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आशीष यादव
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आशीष यादव's Discussions

क्या भारत मेँ अन्तर्माध्यमिक तक हिन्दी एक अनिवार्य विषय नही होनी चाहिए

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Apr 11. 14 Replies

आज जहाँ सुनिये वहीँ भाषा का बिगड़ा स्वरूप सुनाई देता है। किस पुरुष का कर्ता है और कौन सी क्रिया लग गई पता ही नही। यह भी नही की यह युवा पीढ़ी ढंग से आंग्ल भाषा ही जानती हो। तो क्या हमारी और सरकार की यह…Continue

 

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डॉ. सूर्या बाली "सूरज" commented on आशीष यादव's blog post अरबों माल डकार के
"आशीष जी बहुत सुंदर समसामयिक दोहे जो आज की ओझी राजनीति पर करारा प्रहार करते हैं। सुंदर शब्दों और छंदों में बंधी सुंदर भावना व्यक्त करने के लिए बहुत बहुत बधाई !!"
yesterday
आशीष यादव commented on डॉ. सूर्या बाली "सूरज"'s blog post ग़म ज़िंदगी के देख के रोया नहीं कभी
"हर एक शेर दिल छूता है। खूबसूरत गजल कहे हैं।लेकर बहुत से दर्द वो चुपचाप मर गया,कांटे किसी की राह मे बोया नही कभी॥मज़बूरियाँ थी ज़िंदगी भर साथ में मगर,रिश्तों को बोझ जान के ढोया नही कभी॥आह भी और वाह भी"
yesterday
Albela Khatri and आशीष यादव are now friends
Sunday
डॉ. सूर्या बाली "सूरज" left a comment for आशीष यादव
"आशीष जी आपकी दाद के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! अच्छा लिखते हो ! ऐसे ही लिखते रहो और सबका मनोरंजन करते रहो !!"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion एक घोषणा :- प्रतिष्ठित हिंदी समाचार पत्र "हमारा मेट्रो" आपकी रचनाओं को नियमित प्रकाशित करेगी...
"hardik badhai."
Saturday
आशीष यादव updated their profile
Saturday
आशीष यादव updated their profile photo
Saturday
आशीष यादव commented on Raj Lally Sharma's blog post खुद ही
"बागी जी ने सही कहा, इक अलग तासीर लिये हुए है ये रचना"
Saturday
आशीष यादव commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post ऐसे थम थम के जो चलोगी क़यामत होगी
"शानदार शेर,मनोभावों का सुन्दर वर्णन। प्रत्येक शेर शानदार है।बधाई"
Saturday
आशीष यादव commented on डॉ. सूर्या बाली "सूरज"'s blog post बस्तियाँ हो गईं वीरान कहीं और चलें
"वाह सर, कथ्य-तथ्य सभी शानदार। हर शेर वाहवाही का हकदार।बधाई स्वीकारें"
Saturday
आशीष यादव commented on DEEPAK SHARMA KULUVI's blog post मुहब्बत कर लें
"बिल्कुल सही रचना प्रस्तुत की है आपने।बधाई"
Saturday
आशीष यादव commented on rajesh kumari's blog post तिश्नगी में
"भावों को बहुत खूबसूरती से पिरोया है अल्फाजों मे, और अल्फाजों को सुन्दर शिल्प की पैरहन दी है।बधाई स्वीकारें"
Saturday
आशीष यादव commented on vandana gupta's blog post डॉलर अट्टहास करता रहेगा .............
"आपने हकीकत कही है। सच तो ये है कि आज हम खुद अपने पैसे के मालिक नही हैं। चिन्तनीय बात है।बिल्कुल सही बात लिखा है आपने।बधाई स्वीकार करें।"
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आशीष यादव commented on dilbag virk's blog post वो सिर्फ बदनाम है
"वाह सर, कमाल की रचना रची है आपने। "
Saturday
आशीष यादव commented on PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA's blog post हाँ वो मेरी बेटी है
"एक सुन्दर रचना। बेटी ही दो घरों को जोड़ती है।अच्छी रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए"
Saturday
आशीष यादव commented on Sanjay Mishra 'Habib''s blog post आल्हा - एक प्रयास
"भरी रवानी है आल्हों मे, दिखलाते भारत के हाल,रूपक सुन्दर पेश किया है, दिखलाया नेतों का हाल।बहुत अच्छा लगा आल्हा पढ़कर। यह रूपक का बेहतरीन उदाहरण भी है।बधाई स्वीकारें"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
GHAZIPUR/LUCKNOW, U.P.
Native Place
GHAZIPUR
Profession
STUDENT
About me
एक सीधा-सादा इन्सान जो जीवन एवँ मानव की सच्चाईयों को जानने मे लगा हुआ है।

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आशीष यादव's Blog

अरबों माल डकार के

Posted on May 17, 2012 at 9:00am 22 Comments

अरबों माल डकार के राजा जी गै छूट।
जनहित में संदेश है लूट सके तो लूट।।

निकले जब वो जेल से यूँ दिखलाया रंग।
अभिवादन थे कर रहे जीत लिया ज्यों जंग।।

बाहर आकर वायु मे चुम्बन रहे उछाल।
इतने घृणीत कर्म का कोई नही मलाल।।

हर्षित चेलाराम के जमीं न पड़ते पाँव।
बेशरमी रख ताख पे खुश हो करते काँव।।

झिंगुर घुरवा से कहे "जितबे तुहीं चुनाव।
कट्टा पिस्टल साथ हैं डर जइहैं सब गाँव"।।

  • आशीष यादव

ये साथ बिताए लम्हें, तुम्हे याद बहुत आयेंगे

Posted on May 1, 2012 at 10:30pm 15 Comments

ये साथ बिताए लम्हें, तुम्हे याद बहुत आयेंगे,

जब सोचोगे हो तन्हा तो तुमको तड़पायेंगे।।।।…



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एक पैग (कहानी)

Posted on March 17, 2012 at 9:00am 17 Comments

बटेश्वरनाथ गाँव के सबसे बड़े आदमी हैं। भगवान का दिया हुआ सबकुछ है उनके पास। माता पिता अभी सलामत हैं। दो लड़के और एक लड़की भी है। बड़ा लड़का गटारीनाथ ८ साल का है। लड़की सुनयनी ६ साल की और सबसे छोटा लड़का मेहुल नाथ अभी ३ साल का है जिसे प्यार से सब मेल्हू कहते हैं।

 बटेश्वरनाथ के पिता कोई ३ साल पहले रिटायरमेन्ट लिये थे जब मेल्हू का जन्म हुआ था। रिटायरमेन्ट के समय खूब सारा पैसा भी मिला था। ये लोग खानदानी रईस भी थे। बटुकनाथ के पिता बहुत सारा पैसा छोड़ गये थे। इनके परिवार की खूबियाँ बहुत…

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हम अब नहीं फंसने वाले (कविता )

Posted on January 24, 2012 at 3:00pm 26 Comments

क्यों आज तुम्हे अब चैन नहीं है महलों में?,

लाखों के बिस्तर पर भी नींद नहीं आती?
क्यों घूम रहे हो आज मध्य तुम जनता के,
क्यों आज बार की परियां तुम्हे नहीं भातीं?




वो पांच सितारा होटल, जहाँ ठहरते…
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Comment Wall (47 comments)

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At 9:33pm on May 26, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी दाद के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! अच्छा लिखते हो ! ऐसे ही लिखते रहो और सबका मनोरंजन करते रहो !!

At 8:21pm on May 19, 2012, MAHIMA SHREE said…

swagat hai

At 3:44pm on May 4, 2012, Ganesh Jee "Bagi" said…

Dhanyavaad Ashish Bhai.

At 7:43pm on April 12, 2012, Sarita Sinha said…

thanx ashish ji for liking my post...

At 12:43pm on April 2, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

dhanyvad ashish ji, sneh banaye rakhiye.

At 5:02pm on March 17, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

sundar vicharon ki dharti par aap ka swagat hai.

At 3:55pm on March 10, 2012, Arun Kumar Pandey 'Abhinav' said…

साथ ही आशीष जी वह शेर दो चार सबक वाला मैंने हैप्पी होली के अंदाज़ में लिखा था आपकी भावना को चोट पहुँचाने के लिए नहीं | मैंने समीक्षा आलोचना को कत्ताअन नाराज़गी की तरह कभी नहीं लिया और न ही मैं अपने को लेखक कवि मानता हूँ | ग़ज़लों और दोहों में तकतई करना मुझे अब तक नहीं आया | कोई मिला ही नहीं जो मुझे बताता | अभी इस मंच पर अग्रजों से निवेदन कर चुका हूँ देखिये सफलता मिलती है की नहीं |

Comment by Arun Kumar Pandey 'Abhinav' 1 second ago
Delete Comment

आदरणीय श्री आशीष जी , आप वह कमेन्ट पुनः डाल दें मेरा भी आग्रह है | मैं जब बाज़ार में निकला हूँ तो अपनी आम - परख कमी - बेसी सब कुछ खुद और सभी के द्वारा पढ़े सुने कहे जाने से मुझे कोई ऐतराज़ नहीं | इससे कोई छोटा बड़ा नहीं होता | रचनाकार अपनी रचना से बड़ा होता है अपनी उम्र या वरिष्ठता  से नहीं | इधर ओ बी ओ में मेरे कारन  से कुछ तल्खी बढ़ी है मैं इसे स्वस्थ रूप से लेता हूँ , सभी लें | अन्यथा प्रबंधन मुझे इशारा कर दे टा टा बाय बाय हो तो थोड़ी तकलीफ होगी पर बहुत कुछ सहा है कुछ और सही |

At 7:51pm on January 28, 2012, Mukesh Kumar Saxena said…

क्यो आज बार की पारियाँ
बहुत खूब लिखा है आपने जो मेरा मनोवल बड़ाया उसके लिए धन्याबाद

At 12:32pm on December 29, 2011, Ravi Kumar Giri (Guru Jee) said…

janamdin mubarak ho

At 9:25am on December 29, 2011, Saurabh Pandey said…

जन्मदिन की अनेकानेक शुभकामनाएँ .. .

 
 
 

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