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आशीष यादव
  • 30, Male
  • ghazipur, uttarpradesh
  • India
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आशीष यादव's Discussions

क्या भारत मेँ अन्तर्माध्यमिक तक हिन्दी एक अनिवार्य विषय नही होनी चाहिए
15 Replies

आज जहाँ सुनिये वहीँ भाषा का बिगड़ा स्वरूप सुनाई देता है। किस पुरुष का कर्ता है और कौन सी क्रिया लग गई पता ही नही। यह भी नही की यह युवा पीढ़ी ढंग से आंग्ल भाषा ही जानती हो। तो क्या हमारी और सरकार की यह…Continue

Started this discussion. Last reply by आशीष यादव Jul 28, 2012.

 

Welcome, आशीष यादव!

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आशीष यादव commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"उम्दा ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
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"बहुत सुंदर। बड़े ही सहज ढँग से आपने बातों को कह दिया। बहुत बहुत बधाई हो।"
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आशीष यादव posted a blog post

मगर हड़का रहा है (गजल)

उसकी ना है इतनी सी औकात मगर हड़का रहा है झूठे में ही खा जाएगा लात मगर हड़का रहा हैऔरों की बातों में आकर गाल बजाने वाला बच्चा जिसके टूटे ना हैं दुधिया दाँत मगर हड़का रहा हैजिसके आधे खर्चे अपनी जेब कटाकर दे रहे हैं अबकी ढँग से खा जायेगा मात मगर हड़का रहा हैआदर्शों मानवमूल्यों को छोड़ दिया तो राम जाने कितने बदतर होंगे फिर हालात मगर हड़का रहा हैउल्फत की शमआ पर पर्दा डाल रहा है बदगुमानी कटना मुश्किल है नफरत की रात मगर हड़का रहा हैआशीष यादव मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
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आशीष यादव commented on आशीष यादव's blog post पानी गिर रहा है
"आदरणीय श्री  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी रचना पर मूल्यवान टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइसे होई गंगा पार in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह ! नीतिपरक रचना से साहित्य में योगदान ला बहुते धन्नबाद, भाई आशीष जी. ढेर दिन प आपके रचना देखि रगल बानीं. हमहूँ पटल प कम आ पावेनीं.  काशिका भोजपुरी के रस में पगाइल एह रचना के आल्हा छंद के विन्यास प जवना सहज ढङ से निर्वहन कइल गइल बा ऊ मन के…"
Saturday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइसे होई गंगा पार in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री Shyam Narain Verma सर, बहुत बहुत धन्यवाद।"
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Shyam Narain Verma replied to आशीष यादव's discussion कइसे होई गंगा पार in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Friday
आशीष यादव posted a photo
Friday
Rupam kumar -'मीत' and आशीष यादव are now friends
Thursday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
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कइसे होई गंगा पार

जिनिगी भर बस पाप कमइला कइसे करबा गंगा पारजुलुम सहे के आदत सभके के थामी हाथे हथियारकेहू नाही बनी सहाई बुझबा जब खुद के लाचारकाम न करबा घिसुआ जइसे कहबा गंदा हव संसारगैर क बिटिया बहू निहारल हवे डुबावल धरम अपारजइसन करबा ओइसन भरबा करनी हव फल कै आधारपढ़ल कुबुद्धी के समझावल भीत से फोरल हवे कपारआशीष यादवमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Thursday
आशीष यादव commented on आशीष यादव's blog post उसने पी रखी है
"आदरणीय श्री लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
Aug 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on आशीष यादव's blog post उसने पी रखी है
"आ. भाई आशीष जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Aug 5
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"बहुत बढ़िया। खूबसूरत खयालातों की यह ग़ज़ल पढ़कर बहुत अच्छा लगा। बधाई स्वीकार कीजिए।"
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"उम्दा शे'रों से सजी नायाब ग़ज़ल। दिली मुबारकबाद है।"
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आशीष यादव commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"एक बार फिर से आपकी एक और बेहतरीन ग़ज़ल पढ़ने को मिली। दिली मुबारकबाद।"
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"एक बढ़िया ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Aug 5

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Gender
Male
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GHAZIPUR, U.P.
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GHAZIPUR
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work in defence
About me
एक सीधा-सादा इन्सान जो जीवन एवँ मानव की सच्चाईयों को जानने मे लगा हुआ है।

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आशीष यादव's Blog

मगर हड़का रहा है (गजल)

उसकी ना है इतनी सी औकात मगर हड़का रहा है

झूठे में ही खा जाएगा लात मगर हड़का रहा है

औरों की बातों में आकर गाल बजाने वाला बच्चा

जिसके टूटे ना हैं दुधिया दाँत मगर हड़का रहा है

जिसके आधे खर्चे अपनी जेब कटाकर दे रहे हैं

अबकी ढँग से खा जायेगा मात मगर हड़का रहा है

आदर्शों मानवमूल्यों को छोड़ दिया तो राम जाने

कितने बदतर होंगे फिर हालात मगर हड़का रहा है

उल्फत की शमआ पर पर्दा डाल रहा है बदगुमानी

कटना मुश्किल है नफरत की रात…

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Posted on August 10, 2020 at 6:36pm

उसने पी रखी है

2122 2122 2122 2122

वो न बोलेगा हसद की बात उसने पी रखी है

सिर्फ़ होगी प्यार की बरसात उसने पी रखी है

होश में दुनिया सिवा अपने कहाँ कुछ सोचती है

कर रहा है वो सभी की बात उसने पी रखी है

मुँह पे कह देता है कुछ भी दिल में वो रखता नहीं है

वो समझ पाता नहीं हालात उसने पी रखी है

झूठ मक्कारी फ़रेबी ज़ुल्म का तूफ़ाँ खड़ा है

क्या वो सह पायेगा झंझावात? उसने पी रखी है

जबकि सब दौर-ए-जहाँ में लूटकर घर भर रहे हों…

Continue

Posted on August 3, 2020 at 12:30pm — 4 Comments

पानी गिर रहा है

2122 2122 2122 2122

इश्क बनता जा रहा व्यापार पानी गिर रहा है 

हुस्न रस्ते में खड़ा लाचार पानी गिर रहा है

चंद जुगनू पूँछ पर बत्ती लगाकर सूर्य को ही

बेहयाई से रहे ललकार पानी गिर रहा है 

टाँगकर झोला फ़कीरी का लबादा ओढ़कर अब

हो रहा खैरात का व्यापार पानी गिर रहा है 

बाप दादों की कमाई को सरे नीलाम कर वह

खुद को साबित कर रहा हुँशियार पानी गिर रहा है 

झूठ के लश्कर बुलंदी की तरफ बढ़ने लगे हैं

साँच की होने लगी…

Continue

Posted on July 30, 2020 at 5:21am — 8 Comments

यह प्रणय निवेदित है तुमको

हे रूपसखी हे प्रियंवदे

हे हर्ष-प्रदा हे मनोरमे

तुम रच-बस कर अंतर्मन में

अंतर्तम को उजियार करो

यह प्रणय निवेदित है तुमको

स्वीकार करो, साकार करो

अभिलाषी मन अभिलाषा तुम

अभिलाषा की परिभाषा तुम

नयनानंदित - नयनाभिराम

हो नेह-नयन की भाषा तुम

हे चंद्र-प्रभा हे कमल-मुखे

हे नित-नवीन हे सदा-सुखे

उद्गारित होते मनोभाव

इनको ढालो, आकार करो

यह प्रणय निवेदित है तुमको

स्वीकार करो साकार करो

मैं तपता…

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Posted on June 15, 2020 at 4:30am — 7 Comments

Comment Wall (45 comments)

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At 11:15pm on August 6, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

प्रिय आशीष जी.....मेरी कविता को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार.....

At 12:51am on July 13, 2012, Sachchidanand Pandey said…
 शुक्रिया आशीष जी
At 11:26pm on July 2, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

आशीष जी, प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार.......

At 10:46am on June 25, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…
आशीष जी, मेरी रचना को पसंद करने के लिए आपका आभार।
At 10:03am on June 6, 2012, अरुण कान्त शुक्ला said…

आशीष जी मित्र बनने का अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद |

At 10:34am on June 1, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी शुभकमानयों और बधाइयों के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

At 9:33pm on May 26, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी दाद के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! अच्छा लिखते हो ! ऐसे ही लिखते रहो और सबका मनोरंजन करते रहो !!

At 8:21pm on May 19, 2012, MAHIMA SHREE said…

swagat hai

At 3:44pm on May 4, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

Dhanyavaad Ashish Bhai.

At 7:43pm on April 12, 2012, Sarita Sinha said…

thanx ashish ji for liking my post...

 
 
 

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