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आशीष यादव
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  • India
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आशीष यादव's Discussions

क्या भारत मेँ अन्तर्माध्यमिक तक हिन्दी एक अनिवार्य विषय नही होनी चाहिए
15 Replies

आज जहाँ सुनिये वहीँ भाषा का बिगड़ा स्वरूप सुनाई देता है। किस पुरुष का कर्ता है और कौन सी क्रिया लग गई पता ही नही। यह भी नही की यह युवा पीढ़ी ढंग से आंग्ल भाषा ही जानती हो। तो क्या हमारी और सरकार की यह…Continue

Started this discussion. Last reply by आशीष यादव Jul 28, 2012.

 

Welcome, आशीष यादव!

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आशीष यादव posted a blog post

दर्द

ये रातें जल रही हैं,वो बातें खल रही हैंलगा दी ठेस तुमने दिल के अंदरनसें अंगार बनकर जल रही हैंमौसम सर्द है,जीवन में लेकिनलगी है आग,तन मन जल रहा है।जिसे उम्मीद से बढ़कर था मानावही घाती बना है छल रहा है।तुम्हारी ठोकरों के बीच आकरबहुत टूटा हुआ हूँ, लुट गया हूँतेरा सम्मान खोकर, स्नेह खोकरस्वयं ही बुझ चुका हूँ, घुट गया हूँ।यहाँ हालात क्या से क्या हुआ हैनहीं कुछ सूझता निरुपाय हूँ मैंकहाँ आकर फसा हूँ दलदलों मेंविवश लाचार हूँ असहाय हूँ मैं।इधर दुनिया के ताने मेहनें हैउधर दुनिया मेरी बर्बाद सी हैछिपाऊँ…See More
Jun 3
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post युद्ध के विरुद्ध
"बहुत अच्छी कविता।"
Sep 8, 2018
आशीष यादव commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'डंके' की 'चोट' पर (लघुकथा)
"जबरदस्त रूपक।"
Sep 8, 2018
आशीष यादव commented on TEJ VEER SINGH's blog post औक़ात - लघुकथा –
"सामयिक, यथार्थ और औकात दिखाती हुई कहानी।"
Sep 8, 2018
आशीष यादव commented on विनय कुमार's blog post कोई और नहीं-- लघुकथा
"सँदेसपरक। झटके से दिल तक को छू लिया।"
Sep 8, 2018
आशीष यादव commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आपको तो दिल जलाना आ गया
"बेहतरीन"
Jun 23, 2018
आशीष यादव and vijay nikore are now friends
Sep 20, 2017
आशीष यादव commented on Ravi Shukla's blog post गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत
"आदरणीय रवि शुक्ला जी सुंदर एवं संदेशपरक गीत पर बहुत बहुत बधाई।"
Jul 30, 2017
आशीष यादव commented on Arpana Sharma's blog post " यवनिका" -एक क्षणिका /अर्पणा शर्मा
"जीवन का अंतिम सत्य।  सुन्दर कृति। "
Jun 5, 2017
आशीष यादव commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post 'डोम' (एक लघु-कथा )
"अत्यंत मार्मिक कथा।  सब कुछ स्पष्ट। "
Jun 5, 2017
आशीष यादव commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -और हम भी प्यार की जागीर को समझे नहीं - ( गिरिराज )
"बहुत बढ़ियाँ गज़ल। खूबसूरत।"
Apr 6, 2017

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on आशीष यादव's blog post हम तुम, दो तट नदी के
"आदरणीय आशीष भाई , गंगा जमनी तहज़ीब पर अच्छी कविता रची आपने , हार्दिक बधाइयाँ ।"
Apr 5, 2017
Samar kabeer and आशीष यादव are now friends
Apr 5, 2017
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on आशीष यादव's blog post हम तुम, दो तट नदी के
"बहुत ही सुन्दर कविता हुई"
Apr 3, 2017
Samar kabeer commented on आशीष यादव's blog post हम तुम, दो तट नदी के
"जनाब आशीष यादव जी आदाब,बहुत सुंदर कविता लिखी,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 1, 2017
आशीष यादव commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-३)
"बहुत सुंदर । एक दूसरे से बँधे से और मुक्तक भी। बहुत बहुत बधाई"
Apr 1, 2017

Profile Information

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Male
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GHAZIPUR, U.P.
Native Place
GHAZIPUR
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work in defence
About me
एक सीधा-सादा इन्सान जो जीवन एवँ मानव की सच्चाईयों को जानने मे लगा हुआ है।

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आशीष यादव's Blog

दर्द

ये रातें जल रही हैं,

वो बातें खल रही हैं

लगा दी ठेस तुमने दिल के अंदर

नसें अंगार बनकर जल रही हैं

मौसम सर्द है,

जीवन में लेकिन

लगी है आग,

तन मन जल रहा है।

जिसे उम्मीद से बढ़कर था माना

वही घाती बना है छल रहा है।

तुम्हारी ठोकरों के बीच आकर

बहुत टूटा हुआ हूँ, लुट गया हूँ

तेरा सम्मान खोकर, स्नेह खोकर

स्वयं ही बुझ चुका हूँ, घुट गया हूँ।

यहाँ हालात क्या से क्या हुआ है

नहीं कुछ सूझता…

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Posted on June 1, 2019 at 5:02pm

हम तुम, दो तट नदी के

हम तुम

दो तट नदी के

उद्गम से ही साथ रहें हैं

जलधारा के साथ बहे हैं

किन्तु हमारे किस्से कैसे, हिस्से कैसे

सबने देखा, सबने जाना,

रीति-कुरीति, रस्म-रिवाज, अपने-पराये

सब हमारे बीच आये

एक छोर तुम एक छोर मैं

इनकी बस हम दो ही सीमाएं

जब इनमे अलगाव हुआ दुराव हुआ

धर्म-जाति का भेदभाव हुआ

क्षेत्रवाद और ऊँच-नीच का पतितं आविर्भाव हुआ

तब हम तुम

इस जघन्य विस्तार से और दूर हुए

तब भी इन्हें हमने ही हदों…

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Posted on April 1, 2017 at 1:30pm — 3 Comments

यह सियासत आप पर हम पर कहर होने को है

2122 2122 2122 212



पग सियासी आँच पर मधु भी जहर होने को है।

बच गया ईमान जो कुछ दर-ब-दर होने को है।।



मुफलिसों को छोड़कर गायों गधों पर आ गई।

यह सियासत आप पर हम पर कहर होने को है।।



उड़ रहा है जो हकीकत की धरा को छोड़ कर।

बेखबर वो जल्द ही अब बाखबर होने को है।।



वो जो बल खा के चलें इतरा के घूमें कू-ब-कू।

खत्म उनके हुस्न की भी दोपहर होने को है।।



जुल्म से घबरा के थक के हार के बैठो न तुम।

"हो भयावह रात कितनी भी सहर होने…

Continue

Posted on March 3, 2017 at 12:00pm — 16 Comments

वीर अब्दुल हमीद

हम मजा लूटते कितने सुख चैन से

कुछ तो सोचो, मजा पे क्या अधिकार है ?

जो शहादत दिए हैं हमारे लिए

याद उनको करो, ना तो धिक्कार है



अपना कर्तव्य क्या है धरा के लिए

फ़र्ज़ कितना चुकाया है हमने यहाँ

मैं कहानी सुनाता हूँ उस वीर की

खो गया आज है जो न जाने कहाँ



वीरता हरदम ही दुनिया में पूजी जाती है

बन के ज्वाला दुष्टों के हौसले जलाती है

ऐसे ही वीरता की गाथा आज गाता हूँ

वीर अब्दुल हमीद की कथा…

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Posted on January 19, 2017 at 2:30pm — 4 Comments

Comment Wall (45 comments)

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At 11:15pm on August 6, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

प्रिय आशीष जी.....मेरी कविता को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार.....

At 12:51am on July 13, 2012, Sachchidanand Pandey said…
 शुक्रिया आशीष जी
At 11:26pm on July 2, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

आशीष जी, प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार.......

At 10:46am on June 25, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…
आशीष जी, मेरी रचना को पसंद करने के लिए आपका आभार।
At 10:03am on June 6, 2012, अरुण कान्त शुक्ला said…

आशीष जी मित्र बनने का अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद |

At 10:34am on June 1, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी शुभकमानयों और बधाइयों के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

At 9:33pm on May 26, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी दाद के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! अच्छा लिखते हो ! ऐसे ही लिखते रहो और सबका मनोरंजन करते रहो !!

At 8:21pm on May 19, 2012, MAHIMA SHREE said…

swagat hai

At 3:44pm on May 4, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

Dhanyavaad Ashish Bhai.

At 7:43pm on April 12, 2012, Sarita Sinha said…

thanx ashish ji for liking my post...

 
 
 

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