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आशीष यादव
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आशीष यादव's Discussions

क्या भारत मेँ अन्तर्माध्यमिक तक हिन्दी एक अनिवार्य विषय नही होनी चाहिए

Started this discussion. Last reply by आशीष यादव Jul 28, 2012. 15 Replies

आज जहाँ सुनिये वहीँ भाषा का बिगड़ा स्वरूप सुनाई देता है। किस पुरुष का कर्ता है और कौन सी क्रिया लग गई पता ही नही। यह भी नही की यह युवा पीढ़ी ढंग से आंग्ल भाषा ही जानती हो। तो क्या हमारी और सरकार की यह…Continue

 

Welcome, आशीष यादव!

Latest Activity

mrs manjari pandey commented on आशीष यादव's blog post मजबूरी क्यों खून के आंसू पीने की
"आशीष यादव जी बधाई। सजीव चित्रण।अब येही दर्द सालता है।"
Mar 11
गीतिका 'वेदिका' and आशीष यादव are now friends
Mar 10
गीतिका 'वेदिका' commented on आशीष यादव's blog post मजबूरी क्यों खून के आंसू पीने की
"आशीष जी! ओज पूर्ण विचार है रचना में .... कौमी एकता पर दृष्टिपात किया ... लिखते रहिये।शुभकामनायें सादर वेदिका "
Mar 10
आशीष यादव commented on आशीष यादव's blog post मजबूरी क्यों खून के आंसू पीने की
"जिसने देखे स्वप्न राम के राज की।उसी हिन्द की दशा हुई क्या आज की। ling sambandhi trutiyo se mujhe awgat karaaya gya hai. mai gujaarish karunga ki in panktiyo ko is tarah se padhaa jaay.. जिसने देखे स्वप्न राम के राज के, जिसकी लाठी चली बिना आवाज के"
Mar 10
ram shiromani pathak commented on आशीष यादव's blog post मजबूरी क्यों खून के आंसू पीने की
"आओ हम जनगणमन मे विश्वास करें।अपने अन्दर निहित शक्ति अहसास करें।बनकर दिनकर तम का जोश मिटा डालें।अपने मन का कौमी रोष मिटा डालें।एक हाथ जब अपना दीप जलायेगा।पूरे भारत मे प्रकाश हो जायेगा।   रचना के कथ्य बहोत ही बढ़िया है इसके लिए हार्दिक बधाई…"
Mar 10
बृजेश नीरज commented on आशीष यादव's blog post मजबूरी क्यों खून के आंसू पीने की
"आदरणीय आशीष जी,वर्तमान परिस्थितियों को बहुत अच्छे से पिरोया है आपने। आपका यह प्रयास सराहनीय है। मजबूरी क्यों खून के आंसू पीने की। यह प्रश्न जायज है लेकिन वास्तविकता यही है कि लोग खून के आंसू पी रहे हैं और मूकदर्शक बने चुपचाप बैठे हैं।"
Mar 10
baban pandey commented on आशीष यादव's blog post मजबूरी क्यों खून के आंसू पीने की
"सामयिक कविता.. ओजपूर्ण ..लिखते रहिये "
Mar 10
आशीष यादव posted a blog post

मजबूरी क्यों खून के आंसू पीने की

जिनके लिये हिन्द प्राण से प्यारा था। सत्य अहिंसा ही बस जिनका नारा था। तैंतीस कोटि जनो का जो विश्वास था। जिसमे होता देवों का आभाष था। जिसने देखे स्वप्न राम के राज की। उसी हिन्द की दशा हुई क्या आज की। सत्य बैठ कोने मे सिसकी लेता है। झूठ हमेशा गीदड़ भभकी देता है। और अहिंसा बिलख रही लाचार है। हिंसा उसे नोचने को तैयार है।सोचें भी तो कैसे हम, ऐसे भारत मे जीने की। मजबूरी है खून के आंसू पीने की। मजबूरी है खून के आंसू पीने की। राशन की रक्षा मे बैठे गिद्ध हैं। अपना घर भरने मे जो कि सिद्ध हैं। जो हर दिन…See More
Mar 10
आशीष यादव commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post महाशिवरात्रि पर विशेष : शिव पार्वती विवाह
"वाह श्रीमान जी, आपने गजब का चित्रण प्रस्तुत किया है। कहीं विभत्स तो कहीं हास्य प्रभावी है।जैसे भोला वैसी ही उनकी बारात और और सबसे सुन्दर आपकी कलम से उनकी बारात का चित्रण।वाह................."
Mar 10
आशीष यादव and Tushar Raj Rastogi are now friends
Feb 20
आशीष यादव commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post दोहा-रोला गीत
"bahut shandaar prastuti......"
Feb 14
sandeep kumaar kushwaha liked आशीष यादव's blog post हम अब नहीं फंसने वाले (कविता )
Dec 14, 2012
आशीष यादव replied to Admin's discussion एक घोषणा :- प्रतिष्ठित हिंदी समाचार पत्र "हमारा मेट्रो" आपकी रचनाओं को नियमित प्रकाशित करेगी...
"venus bhaiya, badhai."
Sep 24, 2012
आशीष यादव posted a blog post

कुछ कही कुछ अनकही (निजी डायरी के कुछ पन्ने)

मानव की प्रवृत्तियाँ क्या हैं? वह क्या चाहता है? क्या पसन्द है उसे? क्या नही पसन्द करता वो? ये सभी बातें उसी पर निर्भर हैं। किन्तु ये नही कहने वाला हूँ मै। कुछ और ही कहना चाहता हूँ।कुछ लोगों को अच्छे लोग नही भाते बल्कि बुरे लोगो में दिलचस्पी हो जाती है। पता नही कैसा ये मन का रिश्ता है। क्या पता कब, कैसे, किससे जुड़ जाये। इसकी खबर भी नही लगती।बात ये भी नही कहना चाहता मै लेकिन ये सभी घटनायें कभी न कभी अवश्य ही घटती हैं जीवन मे। इनके पीछे क्या होता है उस समय कोई नही जान सकता। पता तो तब लगता है जब…See More
Aug 20, 2012
कुमार गौरव अजीतेन्दु left a comment for आशीष यादव
"प्रिय आशीष जी.....मेरी कविता को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार....."
Aug 6, 2012
आशीष यादव commented on Albela Khatri's blog post मित्रता दिवस को समर्पित छह दोहे
"मित्रता दिवस पर बहुत ही अच्छे दोहे प्रस्तुत किया आपने। बहुत-बहुत बधाई एवँ मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें"
Aug 6, 2012

Profile Information

Gender
Male
City State
GHAZIPUR/LUCKNOW, U.P.
Native Place
GHAZIPUR
Profession
STUDENT
About me
एक सीधा-सादा इन्सान जो जीवन एवँ मानव की सच्चाईयों को जानने मे लगा हुआ है।

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आशीष यादव's Blog

मजबूरी क्यों खून के आंसू पीने की

Posted on March 10, 2013 at 10:30am 6 Comments

जिनके लिये हिन्द प्राण से प्यारा था।

सत्य अहिंसा ही बस जिनका नारा था।

तैंतीस कोटि जनो का जो विश्वास था।

जिसमे होता देवों का आभाष था।

जिसने देखे स्वप्न राम के राज की।

उसी हिन्द की दशा हुई क्या आज की।

सत्य बैठ कोने मे सिसकी लेता है।…

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कुछ कही कुछ अनकही (निजी डायरी के कुछ पन्ने)

Posted on August 20, 2012 at 10:00am 0 Comments

मानव की प्रवृत्तियाँ क्या हैं? वह क्या चाहता है? क्या पसन्द है उसे? क्या नही पसन्द करता वो? ये सभी बातें उसी पर निर्भर हैं। किन्तु ये नही कहने वाला हूँ मै। कुछ और ही कहना चाहता हूँ।

कुछ लोगों को अच्छे लोग नही भाते बल्कि बुरे लोगो में दिलचस्पी हो जाती है। पता नही कैसा ये मन का रिश्ता है। क्या पता कब, कैसे, किससे जुड़ जाये। इसकी खबर भी नही लगती।

बात ये भी नही कहना चाहता मै लेकिन ये सभी घटनायें कभी न कभी अवश्य ही घटती हैं जीवन मे। इनके पीछे क्या होता है उस समय कोई नही जान सकता।…

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मेरा भारत अपना भारत ना जाने कहाँ खो गया

Posted on July 26, 2012 at 5:59pm 19 Comments

मेरा भारत अपना भारत ना जाने कहाँ खो गया

उसके सारे चिन्ह खो गये, कैसा ये बदलाव हो गया

नही रही अब गुरु की गुरुता, नही रहे वो शिष्य महान

काट अँगूठा तक दे देते थे करते गुरु का सम्मान

आज के युग में शिक्षा क्या, बस पैसों का व्यापार हो गया

मेरा भारत अपना भारत ना जाने कहाँ खो गया

नही रही धुन बाँसुरिया की, जो छेड़ा करती थी तान

कहाँ थाप तबले ढोलक की, कहाँ नगाड़े का है मान

आज कान के परदे फट जाते ऐसा संगीत हो गया

मेरा भारत अपना भारत ना जाने कहाँ खो…

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मै विद्रोह कराऊँगा

Posted on June 5, 2012 at 8:00am 19 Comments

आज बनूँगा मै विद्रोही, अब विद्रोह कराऊँगा|

जो सबके ही समझ में आये, ऐसे गीत सुनाऊँगा||

बहुत हो गया अब न रुकूँगा, मै रोके इन चट्टानों के,

बहुत बुझ चुका अब न बुझूँगा मै पड़कर इन तूफानों मे।

कर के हलाहल-पान आज मै होके अमर दिखा दूँगा,

और बुलबुलों को बाजों से लड़ना आज सिखा…

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Comment Wall (52 comments)

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At 11:15pm on August 6, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

प्रिय आशीष जी.....मेरी कविता को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार.....

At 12:51am on July 13, 2012, Sachchidanand Pandey said…
 शुक्रिया आशीष जी
At 11:26pm on July 2, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

आशीष जी, प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार.......

At 10:46am on June 25, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…
आशीष जी, मेरी रचना को पसंद करने के लिए आपका आभार।
At 10:03am on June 6, 2012, अरुण कान्त शुक्ला said…

आशीष जी मित्र बनने का अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद |

At 10:34am on June 1, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी शुभकमानयों और बधाइयों के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

At 9:33pm on May 26, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी दाद के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! अच्छा लिखते हो ! ऐसे ही लिखते रहो और सबका मनोरंजन करते रहो !!

At 8:21pm on May 19, 2012, MAHIMA SHREE said…

swagat hai

At 3:44pm on May 4, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

Dhanyavaad Ashish Bhai.

At 7:43pm on April 12, 2012, Sarita Sinha said…

thanx ashish ji for liking my post...

 
 
 

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