Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Apr 11. 14 Replies 4 Likes
आज जहाँ सुनिये वहीँ भाषा का बिगड़ा स्वरूप सुनाई देता है। किस पुरुष का कर्ता है और कौन सी क्रिया लग गई पता ही नही। यह भी नही की यह युवा पीढ़ी ढंग से आंग्ल भाषा ही जानती हो। तो क्या हमारी और सरकार की यह…Continue
डॉ. सूर्या बाली "सूरज" commented on आशीष यादव's blog post अरबों माल डकार के
आशीष यादव commented on डॉ. सूर्या बाली "सूरज"'s blog post ग़म ज़िंदगी के देख के रोया नहीं कभी
डॉ. सूर्या बाली "सूरज" left a comment for आशीष यादव
आशीष यादव replied to Admin's discussion एक घोषणा :- प्रतिष्ठित हिंदी समाचार पत्र "हमारा मेट्रो" आपकी रचनाओं को नियमित प्रकाशित करेगी...
आशीष यादव commented on Raj Lally Sharma's blog post खुद ही
आशीष यादव commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post ऐसे थम थम के जो चलोगी क़यामत होगी
आशीष यादव commented on डॉ. सूर्या बाली "सूरज"'s blog post बस्तियाँ हो गईं वीरान कहीं और चलें
आशीष यादव commented on DEEPAK SHARMA KULUVI's blog post मुहब्बत कर लें
आशीष यादव commented on rajesh kumari's blog post तिश्नगी में
आशीष यादव commented on vandana gupta's blog post डॉलर अट्टहास करता रहेगा .............
आशीष यादव commented on dilbag virk's blog post वो सिर्फ बदनाम है
आशीष यादव commented on PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA's blog post हाँ वो मेरी बेटी है
आशीष यादव commented on Sanjay Mishra 'Habib''s blog post आल्हा - एक प्रयासPosted on May 17, 2012 at 9:00am 22 Comments 1 Like
अरबों माल डकार के राजा जी गै छूट।
जनहित में संदेश है लूट सके तो लूट।।
निकले जब वो जेल से यूँ दिखलाया रंग।
अभिवादन थे कर रहे जीत लिया ज्यों जंग।।
बाहर आकर वायु मे चुम्बन रहे उछाल।
इतने घृणीत कर्म का कोई नही मलाल।।
हर्षित चेलाराम के जमीं न पड़ते पाँव।
बेशरमी रख ताख पे खुश हो करते काँव।।
झिंगुर घुरवा से कहे "जितबे तुहीं चुनाव।
कट्टा पिस्टल साथ हैं डर जइहैं सब गाँव"।।
आशीष यादव
Posted on May 1, 2012 at 10:30pm 15 Comments 1 Like
ये साथ बिताए लम्हें, तुम्हे याद बहुत आयेंगे,
जब सोचोगे हो तन्हा तो तुमको तड़पायेंगे।।।।…
Posted on March 17, 2012 at 9:00am 17 Comments 2 Likes
बटेश्वरनाथ गाँव के सबसे बड़े आदमी हैं। भगवान का दिया हुआ सबकुछ है उनके पास। माता पिता अभी सलामत हैं। दो लड़के और एक लड़की भी है। बड़ा लड़का गटारीनाथ ८ साल का है। लड़की सुनयनी ६ साल की और सबसे छोटा लड़का मेहुल नाथ अभी ३ साल का है जिसे प्यार से सब मेल्हू कहते हैं।
बटेश्वरनाथ के पिता कोई ३ साल पहले रिटायरमेन्ट लिये थे जब मेल्हू का जन्म हुआ था। रिटायरमेन्ट के समय खूब सारा पैसा भी मिला था। ये लोग खानदानी रईस भी थे। बटुकनाथ के पिता बहुत सारा पैसा छोड़ गये थे। इनके परिवार की खूबियाँ बहुत…
ContinuePosted on January 24, 2012 at 3:00pm 26 Comments 7 Likes
क्यों आज तुम्हे अब चैन नहीं है महलों में?,
डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said… आशीष जी आपकी दाद के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! अच्छा लिखते हो ! ऐसे ही लिखते रहो और सबका मनोरंजन करते रहो !!
swagat hai
Ganesh Jee "Bagi" said… Dhanyavaad Ashish Bhai.
Sarita Sinha said… thanx ashish ji for liking my post...
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said… dhanyvad ashish ji, sneh banaye rakhiye.
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said… sundar vicharon ki dharti par aap ka swagat hai.
साथ ही आशीष जी वह शेर दो चार सबक वाला मैंने हैप्पी होली के अंदाज़ में लिखा था आपकी भावना को चोट पहुँचाने के लिए नहीं | मैंने समीक्षा आलोचना को कत्ताअन नाराज़गी की तरह कभी नहीं लिया और न ही मैं अपने को लेखक कवि मानता हूँ | ग़ज़लों और दोहों में तकतई करना मुझे अब तक नहीं आया | कोई मिला ही नहीं जो मुझे बताता | अभी इस मंच पर अग्रजों से निवेदन कर चुका हूँ देखिये सफलता मिलती है की नहीं |
Comment by Arun Kumar Pandey 'Abhinav' 1 second agoआदरणीय श्री आशीष जी , आप वह कमेन्ट पुनः डाल दें मेरा भी आग्रह है | मैं जब बाज़ार में निकला हूँ तो अपनी आम - परख कमी - बेसी सब कुछ खुद और सभी के द्वारा पढ़े सुने कहे जाने से मुझे कोई ऐतराज़ नहीं | इससे कोई छोटा बड़ा नहीं होता | रचनाकार अपनी रचना से बड़ा होता है अपनी उम्र या वरिष्ठता से नहीं | इधर ओ बी ओ में मेरे कारन से कुछ तल्खी बढ़ी है मैं इसे स्वस्थ रूप से लेता हूँ , सभी लें | अन्यथा प्रबंधन मुझे इशारा कर दे टा टा बाय बाय हो तो थोड़ी तकलीफ होगी पर बहुत कुछ सहा है कुछ और सही |
Mukesh Kumar Saxena said… क्यो आज बार की पारियाँ
बहुत खूब लिखा है आपने जो मेरा मनोवल बड़ाया उसके लिए धन्याबाद
Ravi Kumar Giri (Guru Jee) said… janamdin mubarak ho
Saurabh Pandey said… जन्मदिन की अनेकानेक शुभकामनाएँ .. .
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