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Chetan Prakash
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  • Rupam kumar -'मीत'
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Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"साफ सुथरी हिन्दी ग़ज़ल, बधाई ! उद्धरणीय हो सकती थी, मकते के साथ।"
9 hours ago
Chetan Prakash commented on अजेय's blog post ग़ज़ल (और कितनी देर तक सोयेंगें हम)
"श्री अजय गुप्ता जी, आप मुझसे सहमत हो सके, आपका आभारी हूँ ! आपका क्वाफी वस्तुतः ओएंगे की बंदिश लिए हैं, सो अब आप सही कह रहे हैं, अतः आपका रदीफ हम ही है। सधन्यवाद !"
Monday
Chetan Prakash commented on अजेय's blog post ग़ज़ल (और कितनी देर तक सोयेंगें हम)
"श्री अजय गुप्ता जी, मेरी जानकारी के अनुसार हर सानी मिसरे में जिस समान मात्रा ( स्वर -ध्वनि) की आवृत्ति किसी व्यंजन से जुड़कर हो, यानि बंदिश हो कााफिया होता है। सारे क्वाफी एक ही स्वर( मात्रा ) से पिन्हा होते है।सो, आपका काफिया 'ओ' की बंदिश…"
Sunday
Chetan Prakash commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मैं जो कारवाँ से बिछड़ गया)
" "नज़्र झुक गयी है ज़रूर जाँ !"तुम्हारा क़द भी तो बढ़ गया... अमीर साहब भाषा शास्त्र और ध्वन्यातक विज्ञान कुछ दशकों से उच्चतम स्तर पर प़ढ़ाता रहा हूँ, फिर भी आपके आग्रह को सिरे से नकरता भी नहीं हूँ। हाँ, बह्र में कोई भटकाव नहीं…"
Sunday
Chetan Prakash commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मैं जो कारवाँ से बिछड़ गया)
"  अमीर साहब, तकाबुले रदीफ के दोष से ( आखिरी शेर ) बचा सकता था। किन्ही जगहों पर मुझे, मुआफ करे, बह्र से भटकाव दिखाई पड़ा । क्वाफी भी सारे शुद्ध नहीं है। बढ़ का प्रयोग उधड़ अथवा उखड़ के साथ दोष पूर्ण लगा।"
Sunday
Chetan Prakash commented on अजेय's blog post ग़ज़ल (और कितनी देर तक सोयेंगें हम)
"क्षमा करें, दोस्त क्या बता पाएंगे आपके रदीफ और काफिया क्मशः क्या हैं विषय-वस्तु यानि ( थीम्स ) अथवा सरोकार निश्चय ही प्रशंसनीय हैं।"
Sunday
sunanda jha and Chetan Prakash are now friends
Sep 14
Chetan Prakash commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी )
" 'अमीर' साहब ग़जल सम्पादन की मुन्तज़िर हैः रोज़ उठने लगी लगी देखो काली घटा । बाकी तो मोहतरम कबीर समीर साहब, बतला ही चुके है। फिर भी कहन दिल को छू गया, भाव के स्तर पर आप बधाई के पात्र हैं।"
Sep 8
Chetan Prakash commented on सालिक गणवीर's blog post न जाने किस जनम का सिला दे गया मुझे..( ग़ज़ल)
"   बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, जनाब, सालिक गणवीर साहब! मतले की शुरुआत न केबजाय ना से बेहतर होती !"
Sep 8
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"दिन तो होता है मगर रात नही होती है...... 2 1 2 2 1 1 2 2 1 1 2 2 2 2 उम्र होती मगर खैरात नहीं होती है । सुन मेरे भाई कभी मात नहीं होती है।। आशिक़ी तो है जुनूँ बात नहीं होती है। मरते मर जाओ मुलाक़ात नहीं होती है।। आँखो - आँखों भी मुहब्बत हुआ करती थी,…"
Jul 25
Chetan Prakash commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- हाँ में हाँ लोग जो होते हैं मिलने वाले
"सुरेन्द्र नाथ सिंह, कुशक्षत्रप !"
Jul 18
Chetan Prakash commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- हाँ में हाँ लोग जो होते हैं मिलने वाले
"कमाल-धमाल, जनाब, क्या खूबसूरत और असरदार ग़ज़ल कही है आपनेसुरेन्द्र नाथ सिंह क्षत्रप, बधाई !"
Jul 18
Chetan Prakash commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- हाँ में हाँ लोग जो होते हैं मिलने वाले
"ग़ज़ब कर डाला, जनाब, क्या असरदार और खूबसूरत ग़़ज़ल हुई,सुरेन्द्र नाथ सिंह क्षत्रप, बधाई !"
Jul 18
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"  श्री सतविन्दर कुमार राणा, आपने ज़हमत की और अलग- अलग विधाओं मे लिखी हुई प्रस्तुतियों की पड़ताल की और उन्हें अनुशंसा योगय पाया, इसके लिए हृदय से आपका आभार व्यक्त करता हूँ ! वन्दे !"
Jul 12
Chetan Prakash commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको
"प्रिय सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप, बह्रे हजज मुुसम्मन सालिम में अच्छी साफ- सुथरी ग़जल प्रस्तुत की, बधाई स्वीकार करें, इति"
Jul 11
Chetan Prakash commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको
"प्रिय सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप, बह्रे हजज मुुसम्मन सालिम में अच्छी साफ- सुथरी ग़जल प्रस्तुत की, बधाई स्वीकार करें, इति !"
Jul 11

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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रोटी.....( अतुकांत कविता)

रोटी का जुगाड़

कोरोना काल में

आषाढ़ मास में

कदचित बहुत कठिन रहा

आसान जेठ में भी नहीं था.

पर, प्रयास में नए- नए मुल्ला

अजान उत्साह से पढ रहे थे...

दारु मृत संजीवनी सुरा बन गयी थी

सरकार के लिए भी,

कोरोना पैशैन्ट्स के लिए भी

और, पीने वालों का जोश तो देखने लायक था,

सबकी चाँदी थी...!

आषाढ़ तो बर्बादी रही..

इधर मानसून की बारिश

उधर मज़दूरो की भुखमरी

और, बेरोज़गारी.....

सच, मानो कलेजा मुुँह

को आ गय़ा...!…

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Posted on July 11, 2020 at 1:00pm

हादसा

बाबू राम नाथ पचहत्तर पार कर चुके हैं। शरीर अब जवाब देने लगा है। अभी कई दिन पहले जरा डाॅक्टर से चैक-अप कराने गये थे कि देर तक धूप में खड़ा रहना पड़ा । घर लौटते तेज़ बुखार हो गया। बेटा संयोग से इस वीक एन्ड पर सपत्नीक चला आया। दोनों बहनें जो अपने बच्चों के गर्मियो की छुट्टियों में आयी हुईं थी।सो डाॅक्टर को घर बुला लाया।

"हीट स्ट्रोक हुआ है', ङाॅक्टर बोला था। दवा दे गया था। अब आराम था। लेकिन कमजोरी बहुत थी। लू मानो सारा खून चूस गई थी। बाथरूम भी मुश्किल से जा पाते थे।



अभी कल…

Continue

Posted on June 30, 2018 at 6:00pm — 14 Comments

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At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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अजेय updated their profile
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अजेय commented on अजेय's blog post ग़ज़ल (और कितनी देर तक सोयेंगें हम)
"आपकी आमद से मन को अतीव प्रसन्नता हुई समर साहब। आपका बहुत बहुत शुक्रिया। जी मुख्य ग़ज़ल से इस शेर को…"
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Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"साफ सुथरी हिन्दी ग़ज़ल, बधाई ! उद्धरणीय हो सकती थी, मकते के साथ।"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मैं जो कारवाँ से बिछड़ गया)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद जिज्ञासा और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से…"
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सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिये ह्रदय तल से आभार. नया मतला कहने की…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं : जिन्दगी पर
"आ. भाई सुशील सरना जी, सादर अभिवादन । अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post दिल्लगी
"आ. भाई अरुण कुमार जी, सादर अभिवादन । सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. रचना बहन , सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद ।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । आपकी उपस्थिति व स्नेह पाकर गजल मुकम्मल हुई । हार्दिक आभार ।"
13 hours ago
Rachna Bhatia commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें।"
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