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sunanda jha
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  • सुरेश अग्रवाल
 

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sunanda jha commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...हर कदम पर जह्न मेरा आजमाता कौन है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"वाहहहहह आदरणीय बृजेश जी ,बहुत प्यारी ग़ज़ल लिखी आपने ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।"
Sunday
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Sunday
sunanda jha commented on KALPANA BHATT's blog post क्यों लिखूं कोई और कहानी (कविता)
"वाहहहहह आदरणीया कल्पना जी बहुत सुंदर समसामयिक समस्याओं को उजागर करती बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति ।"
Sunday
sunanda jha commented on KALPANA BHATT's blog post क्या तुम सुन रहे हो ? ( कविता)
"Beautiful ,बहुत प्यारी भावपूर्ण कविता आदरणीया कल्पना जी दिल से बधाई इस सुंदर सृजन के लिए ।"
Sunday
sunanda jha commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"वाहहहहह आदरणीया अलका जी सुन्दर गीत के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sunday
sunanda jha commented on rajesh kumari's blog post ये जो इंसान आज वाले हैं (एक ही रदीफ़ पर दो गज़लें ---'राज')
"वाहहहहह आदरणीया 'राज'जी बहुत प्यारी ग़ज़ल कही आपने ,हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sunday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"आदरणीय मिथिलेश सर ,मेरे इस तुच्छ प्रयास को अपना बहुमूल्य समय देकर रचना का मान बढ़ाने और मेरा हौसला बढ़ाने के लिए हृदय तल से आभारी हूँ सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"मेरी अदना सी कोशिश को मान देकर हौसला बढ़ाने के लिए आपका हृदय तल से आभार आदरणीय सत्यनारायण सर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"दिल से शुक्रिया आदरणीया मनीषा जी मेरा हौसला बढ़ाने की लिए सदर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"वाहहहह आदरणीया गुँजन जी बहुत सुंदर सृजन मनहरण घनाक्षरी के म्याध्यम से बेटियों को परिभाषित किया आपने ,हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"वाहहहह आदरनिया गुँजन जी बहुत सुंदर रचना ,गंगोदक छंद में हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"हार्दिक आभार आपका आदरणीय सुरेंद्र नाथ सर हौसलाफजाई के लिए सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"हृदय तल से आपका आभार आदरणीय आरिफ़ सर ,मेरी इस कोशिश को अपना बहुमूल्य समय देकर सार्थक बनाने के लिए सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"हार्दिक आभार आदरणीय सुरेंदर इंसान सर ,मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"हृदय तल से आभार आपका आदरणीया प्रतिभा जी ,मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Saturday

Profile Information

Gender
Female
City State
Gandhidham
Native Place
Madhubani
Profession
home maker
About me
I'm a house wife having ineterest in reading , writing ,and painting

Sunanda jha 's Blog

अनमोल मोती : (लघुकथा)

" माँ .... काकी माँ ....बेटी ......दीदी ....", ---चारों ओर से पुकारती ये आवाज़ें सुधा के कानों में अमृत घोलती ।

" सुधा .....! ", --अचानक चौंक गई आवाज़ को सुनकर ।

" क्या लेने आए हो अब ? "-- उसको देखते ही सुधा की आँखों में रोष उतर आया था ।

" मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ सुधा ... मुझे माफ कर दो । " -- गिड़गिड़ा रहा था रवि ।

" क्यों वो चली गई क्या किसी और के साथ ; जिसके लिए मुझे छोड़ गए थे । "

" प्लीज़ सुधा ; मैं अपराधी हूँ तुम्हारा । घर चलकर जो भी सजा दोगी मंजूर है । "…

Continue

Posted on May 26, 2015 at 6:30am — 8 Comments

मजबूरी (लघुकथा )

"एइ जे ! हाजरा मोड़ जाएगा ? "

"हाँ साहेब, जाएँगे ।"

"किराया कितना ?"

"बीस टाका !"

"गला काटता है रे ...!! "

"नहीं साहेब , ऑटो तो पचास टाका लेगा ।"

"ओ ले शकता है, पेट्रोल से जो चलता है ना ।"

"ठीक है साहेब ...जो मर्जी दे दीजिएगा ।" पेट्रोल का कीमत सब को पता है, खून का कीमत? सोचता रिक्शा खींचने लगा ।

"बस बस ...! यहीं रोको ...!" दस रूपये रख कर चलता बना ।

जेब से दिन भर की कमाई निकाल कर हिसाब लगा रहा था बुधिया... रिक्शा का किराया देने…

Continue

Posted on May 23, 2015 at 9:30am — 10 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 6:41pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
आदरणीय मुझे समझ नहीं आ रहा अपनी गज़ल कहाँ पोस्ट करूँ ?
At 6:39pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
मिसरा - जिसे हो जुस्तजू खुद की वो बेचारा किधर जाए ।
रदीफ़ - जाए
काफ़िया -अर

'गज़ल '

जिसे तक़दीर ठुकरा दे कहो वो किस डगर जाए ।
मिलें रुसवाइयां ही फिर जहाँ में वो जिधर जाए ।

करे लाखों जतन खुद से नहीं वो जीत पाएगा ।
उलझकर द्वन्द्व में उसका बचा जीवन गुजर जाए ।

गमों को बांटने वाला ,हमेशा साथ है अपने ।
जिसे हो जुस्तजू अपनी वो बेचारा किधर जाए ।

न तोड़ो इस कदर दिल को ,नहीं फिर जोड़ना मुमकिन ।
समेटें किस तरह दिल को जमीं पर जो बिखर जाए ।

मिले जो जख्म अपनों से नहीं फिर ठीक होते है ।
लगाओ लाख मरहम भी नहीं उसका असर जाए ।

यही है आरजू मेरी पिला तब तक मुझे साकी ।
जहर बन खून में मेरे न जब तक मय उतर जाए ।

नहीं मिलता कभी मोती हजारों 'सीप' भी ढूंढो ।
गिरे इक बूँद स्वाती की बने मोती निखर जाए ।

सुनंदा 'सीप '

(मौलिक व अप्रकाशित )
23/4/2016
At 12:45pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप गद्य तथा पद्य की किसी भी विधा में रचना प्रस्तुत कर सकती है. यथा -

लघुकथा 

कहानी

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
हाइकू
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

सादर 

At 12:19pm on May 11, 2015, sunanda jha said…
जी जरूर सिर्फ कथा या कविता और गज़ल भी ? सादर ।
At 12:06pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचना यहाँ पोस्ट कर सकती है,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जाता है, रचना के अंत में"मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम अवश्य देखे.

At 9:00am on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

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