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sunanda jha
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  • सुरेश अग्रवाल
 

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sunanda jha commented on अनहद गुंजन's blog post *मन मनोरम* छ्न्द में गीत.....
"वाहहहहह आदरणीया गुँजन जी बहुत ही प्यारा गीत मन्मनोरम छंद में ।हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sunday
sunanda jha commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post माँ मै तेरे दामन में फिर लौट आऊंगा:- मोहित मुक्त
"वाहहहहह आदरणीय मोहित मिश्र जी ,बहुत भावपूर्ण हृदय स्पर्शी रचना ।हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sunday
sunanda jha commented on KALPANA BHATT's blog post बरखा ( सार छंद- १६,१२)
"वाहहहहहह आदरणीय कल्पना जी सार छंद में बहुत ही प्यारा वर्णन बरसात का ।दिल से बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sunday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"दिल से शुक्रिया आदरणीय शहज़ाद उस्मानी सर छंद की सराहना कर मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सुरेंदर सर बहुत सुंदर लिखा सादर ।दिल से बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"वाहहह ! आदरणीय सतविंद्र सर ,सार छंद में बहुत ही प्यारा गीत लिखा आपने चित्र को परिभाषित करता सार्थक सृजन ।हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"वाहहह !! आदरणीया कल्पना जी बहुत सुंदर भावपूर्ण चित्राधारित रचना सरसी छंद में लिखी आपने ,दिल से बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"वाहहह ! आदरणीय वासुदेव सर चित्र को परिभाषित करती बहुत ही सुंदर रचना सरसी छंद में ,हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीय सतविंद्र सर ,रचना की सराहना कर मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय रक्ताले सर ,अभी मैं यहाँ के परिवेश के लिए नई हूँ यहाँ के नियमों की भी अधिक जानकारी नहीं इसलिए इसे यहीं पोस्ट किया सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"हृदय तल से आभार आपका आदरणीय सौरभ सर ,आपने रचना को पढ़ा मेरा लिखना सार्थक हुआ सादर ।आगे भी कोशिश जारी रहेगी बस आप सब अदीबों का आशीष मिलता रहे सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सर ,दिल से शुक्रिया रचना की सराहना कर मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत बहुत आभार आपका इतने प्यारे तरीके से बातों को समझाने के लिए और मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय रक्ताले सर हृदय तल से आभार आपका रचना की सराहना कर मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।आपका आदेश सर आँखों पर रखते हुए उसी चित्र पर सार छंद में एक कोशिश :-- सार छंद (16,12 यति) हम भारत माता के बच्चे ,निश्छल हृदय हमारे । आजादी का जश्न मनाने ,हुए…"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"हृदय तल से आभार आपका आदरणीया कल्पना जी रचना को मान देने के लिए और मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Saturday
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा जी दिल से शुक्रिया आपका मेरी हौसलाफजाई कर रचना को मान देने के लिए सादर ।"
Saturday

Profile Information

Gender
Female
City State
Gandhidham
Native Place
Madhubani
Profession
home maker
About me
I'm a house wife having ineterest in reading , writing ,and painting

Sunanda jha 's Blog

अनमोल मोती : (लघुकथा)

" माँ .... काकी माँ ....बेटी ......दीदी ....", ---चारों ओर से पुकारती ये आवाज़ें सुधा के कानों में अमृत घोलती ।

" सुधा .....! ", --अचानक चौंक गई आवाज़ को सुनकर ।

" क्या लेने आए हो अब ? "-- उसको देखते ही सुधा की आँखों में रोष उतर आया था ।

" मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ सुधा ... मुझे माफ कर दो । " -- गिड़गिड़ा रहा था रवि ।

" क्यों वो चली गई क्या किसी और के साथ ; जिसके लिए मुझे छोड़ गए थे । "

" प्लीज़ सुधा ; मैं अपराधी हूँ तुम्हारा । घर चलकर जो भी सजा दोगी मंजूर है । "…

Continue

Posted on May 26, 2015 at 6:30am — 8 Comments

मजबूरी (लघुकथा )

"एइ जे ! हाजरा मोड़ जाएगा ? "

"हाँ साहेब, जाएँगे ।"

"किराया कितना ?"

"बीस टाका !"

"गला काटता है रे ...!! "

"नहीं साहेब , ऑटो तो पचास टाका लेगा ।"

"ओ ले शकता है, पेट्रोल से जो चलता है ना ।"

"ठीक है साहेब ...जो मर्जी दे दीजिएगा ।" पेट्रोल का कीमत सब को पता है, खून का कीमत? सोचता रिक्शा खींचने लगा ।

"बस बस ...! यहीं रोको ...!" दस रूपये रख कर चलता बना ।

जेब से दिन भर की कमाई निकाल कर हिसाब लगा रहा था बुधिया... रिक्शा का किराया देने…

Continue

Posted on May 23, 2015 at 9:30am — 10 Comments

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At 6:41pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
आदरणीय मुझे समझ नहीं आ रहा अपनी गज़ल कहाँ पोस्ट करूँ ?
At 6:39pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
मिसरा - जिसे हो जुस्तजू खुद की वो बेचारा किधर जाए ।
रदीफ़ - जाए
काफ़िया -अर

'गज़ल '

जिसे तक़दीर ठुकरा दे कहो वो किस डगर जाए ।
मिलें रुसवाइयां ही फिर जहाँ में वो जिधर जाए ।

करे लाखों जतन खुद से नहीं वो जीत पाएगा ।
उलझकर द्वन्द्व में उसका बचा जीवन गुजर जाए ।

गमों को बांटने वाला ,हमेशा साथ है अपने ।
जिसे हो जुस्तजू अपनी वो बेचारा किधर जाए ।

न तोड़ो इस कदर दिल को ,नहीं फिर जोड़ना मुमकिन ।
समेटें किस तरह दिल को जमीं पर जो बिखर जाए ।

मिले जो जख्म अपनों से नहीं फिर ठीक होते है ।
लगाओ लाख मरहम भी नहीं उसका असर जाए ।

यही है आरजू मेरी पिला तब तक मुझे साकी ।
जहर बन खून में मेरे न जब तक मय उतर जाए ।

नहीं मिलता कभी मोती हजारों 'सीप' भी ढूंढो ।
गिरे इक बूँद स्वाती की बने मोती निखर जाए ।

सुनंदा 'सीप '

(मौलिक व अप्रकाशित )
23/4/2016
At 12:45pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप गद्य तथा पद्य की किसी भी विधा में रचना प्रस्तुत कर सकती है. यथा -

लघुकथा 

कहानी

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
हाइकू
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

सादर 

At 12:19pm on May 11, 2015, sunanda jha said…
जी जरूर सिर्फ कथा या कविता और गज़ल भी ? सादर ।
At 12:06pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचना यहाँ पोस्ट कर सकती है,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जाता है, रचना के अंत में"मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम अवश्य देखे.

At 9:00am on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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