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sunanda jha
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  • सुरेश अग्रवाल
 

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sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"दिल से शुक्रिया आदरणीय सौरभ सर ,आपको रचना पसन्द आई लेखन सार्थक हुआ ।हृदय तल से आभारी हूँ इस रचना को अपना समय देकर मान बढ़ाने के लिए सादर ।"
Saturday
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"हार्दिक आभार आदरणीय अखिलेश सर रचना को समय देकर मान बढ़ाने के लिए सादर ।"
Saturday
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"हार्दिक आभार आदरणीय रक्ताले सर इस हौसलाफजाई के लिए ।लिखते वक्त इस भट का ध्यान ही नहीं रहा आदरणीय कि साढ़े चार  छंद ही हुए ,आइंदा इस बात का ध्यान रखूँगी आदरणीय और संकलन के समय इसमें निम्नलिखित दो पंक्तियाँ जोड़ दूँगी सादर । मुझे चित्र में जो दिखाई…"
Saturday
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"हार्दिक आभार आदरणीय सतविंद्र सर रचना को समय देकर मान बढ़ाने के लिए सादर ।"
Saturday
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"रचना को समय देकर इसका मान बढ़ाने के लिए हृदय तल से आभार आदरणीया राजेश कुमारी  जी ।"
Saturday
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"आदरणीय डॉ छोटेलाल जी भुजंगप्रयात छंद में चित्र को बेहतरीन तरीके से परिभाषित किया आपने ।हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर।"
Saturday
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"आदरणीया मनजीत कौर जी चित्राधारित अनुपम सृजन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें सादर ।"
Saturday
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"आदरणीय सुरेश कुमार 'कल्याण' जी बहुत ही प्यारा सृजन चित्र पर ।हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Saturday
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"वाहहहहह आदरणीया राजकुमारी जी चित्र को शब्दशः परिभाषित करती बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें सादर ।"
Saturday
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"आदरणीया प्रतिभा जी चित्र को परिभाषित करती बहुत प्यारी रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Saturday
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"दिल से शुक्रिया आदरणीय आरिफ सर ,शुक्रगुज़ार हूँ आपकी इस हौसलाफजाई के लिए सादर ।"
Saturday
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"शक्ति छंद घड़ी धैर्य की है बढ़ी जा रही ।नहीं दूर तक माँ नजर आ रही। करें क्या विपत्ति बड़ी सामने ।नहीं पास कोई इन्हें थामने । हवा सर्द है कँपकपी हो रही ।बची आस भी अब कहीं खो रही । ठिठुरती ज़मीं आसमा सर्द है ।डरी आँख में दिख रहा दर्द है । लहर शीत चलती…"
Saturday
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"क्षमा प्रार्थी हूँ आदरणीय कुशक्षत्रप जी बहुत बड़ी गलती हुई मुझसे जल्दीबाजी में ,शर्मिंदा हुन अपनी गलती पे सादर ।"
Friday
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"वाहहआदरणीय तसदीक़ सर दोनों छंदों पर बेहतरीन लेखन  हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Friday
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"आदरणीय रक्ताले सर बहुत ही प्यारा सृजन हमेशा की तरह चित्र को पूर्णतः परिभाषित करता ,हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Friday
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"आदरणीय कुशवाहा जी बहुत ही सुंदर रचना शक्ति छंद में चित्राधारित ,हार्दिक बधाई स्वीकारें सादर ।"
Friday

Profile Information

Gender
Female
City State
Gandhidham
Native Place
Madhubani
Profession
home maker
About me
I'm a house wife having ineterest in reading , writing ,and painting

Sunanda jha 's Blog

समानिका छंद

यह एक समवार्णिक छंद है ,जिसमें प्रत्येक चरण में 7 वर्ण होते हैं ,जिनका क्रम 1 रगण + 1 जगण + 1 गुरू होता है।



21 21 21 2 ,21 21 21 2





चाँद खो गया कहीं रात है बता रही।

नींद में सुहासिनी स्वप्न है सजा रही।



प्रीत खो गयी कहीं बावरी पुकारती । पैर के निशान को आस से निहारती ।



तेज है हवा हुई रात भी सियाह है ।

सूझती न राह भी ,वेदना अथाह है ।



ख्वाहिशें मरी नहीं हौसला बुलंद है ।

पाप पुण्य में छिड़ा अंतहीन द्वंद्व है… Continue

Posted on August 28, 2017 at 7:41pm — 9 Comments

अनमोल मोती : (लघुकथा)

" माँ .... काकी माँ ....बेटी ......दीदी ....", ---चारों ओर से पुकारती ये आवाज़ें सुधा के कानों में अमृत घोलती ।

" सुधा .....! ", --अचानक चौंक गई आवाज़ को सुनकर ।

" क्या लेने आए हो अब ? "-- उसको देखते ही सुधा की आँखों में रोष उतर आया था ।

" मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ सुधा ... मुझे माफ कर दो । " -- गिड़गिड़ा रहा था रवि ।

" क्यों वो चली गई क्या किसी और के साथ ; जिसके लिए मुझे छोड़ गए थे । "

" प्लीज़ सुधा ; मैं अपराधी हूँ तुम्हारा । घर चलकर जो भी सजा दोगी मंजूर है । "…

Continue

Posted on May 26, 2015 at 6:30am — 10 Comments

मजबूरी (लघुकथा )

"एइ जे ! हाजरा मोड़ जाएगा ? "

"हाँ साहेब, जाएँगे ।"

"किराया कितना ?"

"बीस टाका !"

"गला काटता है रे ...!! "

"नहीं साहेब , ऑटो तो पचास टाका लेगा ।"

"ओ ले शकता है, पेट्रोल से जो चलता है ना ।"

"ठीक है साहेब ...जो मर्जी दे दीजिएगा ।" पेट्रोल का कीमत सब को पता है, खून का कीमत? सोचता रिक्शा खींचने लगा ।

"बस बस ...! यहीं रोको ...!" दस रूपये रख कर चलता बना ।

जेब से दिन भर की कमाई निकाल कर हिसाब लगा रहा था बुधिया... रिक्शा का किराया देने…

Continue

Posted on May 23, 2015 at 9:30am — 10 Comments

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At 6:41pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
आदरणीय मुझे समझ नहीं आ रहा अपनी गज़ल कहाँ पोस्ट करूँ ?
At 6:39pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
मिसरा - जिसे हो जुस्तजू खुद की वो बेचारा किधर जाए ।
रदीफ़ - जाए
काफ़िया -अर

'गज़ल '

जिसे तक़दीर ठुकरा दे कहो वो किस डगर जाए ।
मिलें रुसवाइयां ही फिर जहाँ में वो जिधर जाए ।

करे लाखों जतन खुद से नहीं वो जीत पाएगा ।
उलझकर द्वन्द्व में उसका बचा जीवन गुजर जाए ।

गमों को बांटने वाला ,हमेशा साथ है अपने ।
जिसे हो जुस्तजू अपनी वो बेचारा किधर जाए ।

न तोड़ो इस कदर दिल को ,नहीं फिर जोड़ना मुमकिन ।
समेटें किस तरह दिल को जमीं पर जो बिखर जाए ।

मिले जो जख्म अपनों से नहीं फिर ठीक होते है ।
लगाओ लाख मरहम भी नहीं उसका असर जाए ।

यही है आरजू मेरी पिला तब तक मुझे साकी ।
जहर बन खून में मेरे न जब तक मय उतर जाए ।

नहीं मिलता कभी मोती हजारों 'सीप' भी ढूंढो ।
गिरे इक बूँद स्वाती की बने मोती निखर जाए ।

सुनंदा 'सीप '

(मौलिक व अप्रकाशित )
23/4/2016
At 12:45pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप गद्य तथा पद्य की किसी भी विधा में रचना प्रस्तुत कर सकती है. यथा -

लघुकथा 

कहानी

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
हाइकू
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

सादर 

At 12:19pm on May 11, 2015, sunanda jha said…
जी जरूर सिर्फ कथा या कविता और गज़ल भी ? सादर ।
At 12:06pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचना यहाँ पोस्ट कर सकती है,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जाता है, रचना के अंत में"मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम अवश्य देखे.

At 9:00am on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

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