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प्रशांत दीक्षित 'सागर'
  • Male
  • Bhopal, Madhya Pradesh
  • India
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प्रशांत दीक्षित 'सागर' posted a blog post

याद उनको कभी,मेरी आती नहीं

212 212 212 212याद उसको कभी,मेरी आती नहीं ।और ख्वाबों से मेरे,वो जाती नहीं ।।सो रही अब भी वो, चैन से रात भर ।अब इधर नींद आँखों में आती नहीं ।।वो मिले जब कभी,बात पूंछू यहीप्यार उसको नहीं, या जताती नहीं ।।लफ़्ज़ तेरे सभी,मेरे होंठों पे हैं ।गीत क्यूँ तू मिरे गुनगुनाती नहीं ।।तेरी हर बात का मैं तो काइल हुआ ।मेरी बातें तुझे क्यों लुभाती नहीं ।। मौलिक व अप्रकाशितSee More
Friday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"http://www.openbooksonline.com/m/discussion?id=5170231%3ATopic%3A637805 आप लघुकथा की पाठशाला ज्वाइन कर सकते हैं जो ओबीओ में ही है वहां से भी आप सीख सकते हैं। सादर।"
Oct 31
प्रशांत दीक्षित 'सागर' commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"बहुत बहुत धन्यवाद कल्पना भट्ट'रौनक" जी । अभी सीखना प्रारम्भ किया है और मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता है । लघुकथा के विषय में कैसे सीखा जाए,इसके विषय में मार्गदर्शन दें । आपका आभारी रहूंगा । सधन्यवाद ।"
Oct 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"अच्छा प्रयास हुआ है आदरणीय प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी पर अभी लघुकथा नहीं बन पायी है | सादर| "
Oct 30
प्रशांत दीक्षित 'सागर' commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"
"आदरणीय समर कबीर जी, आपके प्रेरणादायक वचनों के लिए हृदय तल से आभारी हूँ। प्रस्तुति आपको पसंद आयी तो रचना सफ़ल हुई ।बहुत-बहुत धन्यवाद ।"
Oct 29
Samar kabeer commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 29
प्रशांत दीक्षित 'सागर' posted a blog post

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है,कहीं है चैन-ओ-सुकून,तो कहीं मुसीबत है,वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है । क्या था ख्याल तेरा,बनाया किसी को गूंगा,किसी को बहरा,बनाया तूने किसी को सबल-सुअंग,क्यों बनाया किसी को अपाहिज-अपंग?बता तो क्या तेरी चाहत है, वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है ।तू किसी से ज़ुबान छीने,किसी से हाथ,पैर,कान छीने ।क्यों तूने ऐसी सजा दी,किसी के नैनों की बत्ती बुझा दी ।या नहीं मिली तुझे,यह बनाने की फुर्सत है,वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है ।क्यों किसी के हाथ लगी निराशा, बोलनी पड़ी उसे हाथों…See More
Oct 29
प्रशांत दीक्षित 'सागर' commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"बहुत बहुत धन्यवाद समर सर । आपके comments से बहुत बल मिलता है ।"
Oct 28
Samar kabeer commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब,लघुकथा का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 28
Samar kabeer commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post याद उनको कभी,मेरी आती नहीं
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई। स्वीकार करें । 'याद उनको कभी,मेरी आती नहीं । और ख्वाबों से मेरे,वो जाती नहीं ' मतले में शुतरगुरबा दोष है,ऊला मिसरे में 'उनको' की जगह…"
Oct 28
प्रशांत दीक्षित 'सागर' posted a blog post

लघुकथा-दीवाली के पटाखे

दीपावली का दिन लगभग 3:00 बजे शाम के पूजन की तैयारियां चल रही थी । माँ किचन में खीर बना रही थी,तो हमारी धर्मपत्नी जी आंगन में रंगोली डाल रही थी । मैं हॉल में बैठा हुआ व्हाट्सएप पर लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं भेज रहा था और मेरे पिताजी,मेरे पुत्र(भैय्यू),जिसने पिछले महीने अपना तीसरा जन्म दिन मनाया था,के साथ मस्ती करने में व्यस्त थे। इस मौसम में आमतौर पर मच्छर बहुत होते हैं,इसलिए पिताजी यह भी ख़याल रख रहे थे कि भैय्यू को मच्छर न कांटें और इसके लिए उन्हें काफ़ी मसक्कत भी करनी पड़ रही थी । तभी मेरा…See More
Oct 28
Dr. Geeta Chaudhary commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post याद उनको कभी,मेरी आती नहीं
"प्रशांत दीक्षित जी बहुत सुंदर रचना, आपको ढेरों शुभकमनाएं.."
Oct 20
प्रशांत दीक्षित 'सागर' posted a blog post

याद उनको कभी,मेरी आती नहीं

212 212 212 212याद उसको कभी,मेरी आती नहीं ।और ख्वाबों से मेरे,वो जाती नहीं ।।सो रही अब भी वो, चैन से रात भर ।अब इधर नींद आँखों में आती नहीं ।।वो मिले जब कभी,बात पूंछू यहीप्यार उसको नहीं, या जताती नहीं ।।लफ़्ज़ तेरे सभी,मेरे होंठों पे हैं ।गीत क्यूँ तू मिरे गुनगुनाती नहीं ।।तेरी हर बात का मैं तो काइल हुआ ।मेरी बातें तुझे क्यों लुभाती नहीं ।। मौलिक व अप्रकाशितSee More
Oct 20
प्रशांत दीक्षित 'सागर' commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post ग़ज़ल - चरागाँ इक मुहब्बत का जला दो तुम
"Bilkul Sir"
Oct 20
Balram Dhakar commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post ग़ज़ल - चरागाँ इक मुहब्बत का जला दो तुम
"जनाब प्रशांत जी,  ग़ज़ल का प्रयास बहुत अच्छा है, मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं।  आदरणीय समर सर की बातों पर गौर करें, ग़ज़ल और बेहतर हो सकेगी।  सादर। "
Oct 20
प्रशांत दीक्षित 'सागर' commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post ग़ज़ल - चरागाँ इक मुहब्बत का जला दो तुम
"बहुत बहुत धन्यवाद समर सर । प्रयास करता हूँ ।"
Oct 19

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal,Madhya Pradesh
Native Place
Sagar,Madhya Pradesh
Profession
Training Officer,Dept. Of Skill Development,Madhya Pradesh

प्रशांत दीक्षित 'सागर''s Blog

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है,

कहीं है चैन-ओ-सुकून,तो कहीं मुसीबत है,

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है । 

क्या था ख्याल तेरा,

बनाया किसी को गूंगा,किसी को बहरा,

बनाया तूने किसी को सबल-सुअंग,…

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Posted on October 28, 2019 at 12:00pm — 2 Comments

लघुकथा-दीवाली के पटाखे

दीपावली का दिन लगभग 3:00 बजे शाम के पूजन की तैयारियां चल रही थी । माँ किचन में खीर बना रही थी,तो हमारी धर्मपत्नी जी आंगन में रंगोली डाल रही थी । मैं हॉल में बैठा हुआ व्हाट्सएप पर लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं भेज रहा था और मेरे पिताजी,मेरे पुत्र(भैय्यू),जिसने पिछले महीने अपना तीसरा जन्म दिन मनाया था,के साथ मस्ती करने में व्यस्त थे। इस मौसम में आमतौर पर मच्छर बहुत होते हैं,इसलिए पिताजी यह भी ख़याल रख रहे थे कि भैय्यू को मच्छर न कांटें और इसके लिए उन्हें काफ़ी मसक्कत भी करनी पड़ रही थी । तभी मेरा…

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Posted on October 27, 2019 at 10:23pm — 5 Comments

याद उनको कभी,मेरी आती नहीं

212 212 212 212

याद उसको कभी,मेरी आती नहीं ।

और ख्वाबों से मेरे,वो जाती नहीं ।।

सो रही अब भी वो, चैन से रात भर…

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Posted on October 19, 2019 at 10:30pm — 3 Comments

ग़ज़ल - चरागाँ इक मुहब्बत का जला दो तुम

1222 1222 1222

चरागाँ इक मुहब्बत का जला दो तुम,

अभी उन्वान रिश्ते को नया दो तुम ।

फ़ना ही हो गये जो इश्क़ कर बैठे,

ज़हर है ये,ज़हर ही तो पिला दो तुम ।

हया कायम रहे,कब तक मुहब्बत में,

ज़रा पर्दा शराफत का उठा दो तुम…

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Posted on October 17, 2019 at 8:44pm — 6 Comments

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