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Nilesh Shevgaonkar
  • Male
  • Indore
  • India
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सालिक गणवीर commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- ज़ुल्फ़ों को ज़ंजीर बना कर बैठ गए
"आदरणीय  भाई  Nilesh Shevgaonkar जी सादर अभिवादन बहुत उम्दः ग़ज़ल कही है ,शैर दर शैर दाद और मुबारक़बाद क़ुबूल करें।"
Feb 3
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"धन्यवाद आ. नादिर खान साहब ,इंसान जब जज़्बाती होता है तो रोता है .. आँख में दरिया क्या कोई क़तरा नहीं... ये जज़्बात के mature होने या स्थिति स्वीकार कर लेने कि पराजय का भाव है ..शायद बात आप तक पहुँच सके..सादर "
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब , //वैसे आपने इसी मुशायरे में अपनी ग़ज़ल में अरबी भाषा के लफ़्ज़ 'फ़ुलाँ' को 'फ़लाने' लिखा है, और उसे सही मान रहे हैं क्योंकि इस ग़लत को सही कहने के लिए आपके पास अपने तर्क होंगे, जबकि 'फ़लाने'…"
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"धन्यवाद आ. आशीष जी "
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी "
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब,मैंने अपना स्टैंड नहीं बदला है .. मैं अब भी मानता हूँ कि बिगाने सहीह नहीं है..इसीलिए आपसे किसी ढंग के शाएर का हवाला माँगा था...आप जिन को ले आए हैं उनकी तारीफ़ रेख्त्रा पर उपलब्ध है, पढ़ लें.. अभी भी आप किसी पाएदार शाएर का…"
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. नादिर खान साहब,अच्छी ग़ज़ल हुई है . बधाई स्वीकार करें.मतला इन्हीं शब्दों में और बेहतर हो सकता था ...बात मेरी टालने के सौ बहाने हो गये अर्ज मेरी टालने के सौ बहाने हो गये ..चारागर भी इन दिनों बेहद सयाने हो गये ... जैसा कुछ.. यदि आप…"
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. अमीर साहब,मुझे उम्मीद थी कि आप किसी क्लासिकल शाएर का हवाला देंगे लेकिन आप उस शाएर का हवाला लाए जिसे मीर तकी मीर ने चूमा चाटी का शाएर और मुसहफ़ी ने छिनाले की शायरी कहा है..जनाब ने उर्दू ग़ज़ल में अशिष्टता, मतवालापन और वासना की जीती-जागती…"
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आभार "
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. दण्डपाणी जी,अच्छी ग़ज़ल हुई है ..बधाई स्वीकार करें.अमुक और फ़लाने लगभग पर्यायवाची हैं अत: कुछ और किया जा सके तो देखिएगा..सादर "
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. दण्डपाणी जी,धन्यवाद एवं आभार "
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब,धन्यवाद. आस्ताने को आस्ताने के लिए ही प्रयुक्त किया गया है सादर "
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. चेतन प्रकाश जी,ग़ज़ल पसंद करने हेतु आभार. चूँकि गिरः का शेर मैं मूल संग्रह में नहीं रखता अत: कोशिश होती है कि नियम पालना के लिए वो बस हो भर जाए.. जैसा भी हो..उसे अंतत: कटना ही होता है ..सादर "
Jan 29
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. सालिक जी, धन्यवाद.टिप्पणी करना अगर मजबूरी लगता हो तो टिप्पणी न करें.. ये हर पोस्ट पर एक जैसी कॉपी पेस्ट टिप्पणी दर्शाती है कि आपने रचनाएं कितनी गंभीरता से पढ़ीं हैं.सादर "
Jan 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"धन्यवाद आ. ऋचा जी "
Jan 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"धन्यवाद आ. संजय जी "
Jan 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. अमीर साहब,मैंने जितने भी शेर पढ़े हैं उसमें बेगाने को २२२ पर बांधा गया है ...आप के पास कोई उदाहरण हो तो साझा करें जिससे मेरा मार्गदर्शन हो सके.सादर "
Jan 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. आज़ी भाई .. ग़ज़ल, मिसरा, बह्र  से इतर यदि आपको किसी से कोई बात कहनी हो तो वो ऐसे कहेंगे छोड़ कर तुझ को बस इक सारे सयाने हो गये.... या ऐसे इक तुझी को छोड़ कर सारे सयाने हो गये ..कौन सा  वाक्य अधिक उपयुक्त लगता है आपको??"
Jan 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. आज़ी भाई,एक पाठक के रूप में मैंने अपनी बात रखी है .. आप यदि मानकर ही बैठे हैं कि दुहराव से मिसरा सुन्दर हो गया है तो मैं आपके अपनी रचना को defend करने के अधिकार का सम्मान करता हूँ ..ग़ज़ल वक़्त क्यूँ माँग रही है इसका उदाहरण यह वाक्य विन्यास देखें…"
Jan 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. दयाराम जी,अच्छी ग़ज़ल हुई है. शेर अनुभव कि दास्तान कह रहे हैं.बधाई स्वीकार करें सादर "
Jan 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल नूर की- ज़ुल्फ़ों को ज़ंजीर बना कर बैठ गए

.

ज़ुल्फ़ों को ज़ंजीर बना कर बैठ गए

किस किस को हम पीर बना कर बैठ गए.

.

यादें हम से छीन के कोई दिखलाओ

लो हम तो  जागीर बना कर बैठ गए.  

.

दुनिया की तस्वीर बनानी थी हम को

हम तेरी तस्वीर बना कर बैठ गए.  

.

मौक़ा रख कर भेजा था नाकामी में

आप जिसे तक़दीर बना कर बैठ गए.

.

मैंने कॉपी में इक चिड़िया क्या मांडी

दुनिया वाले तीर बना कर बैठ गए.

.

चलती फिरती मूरत देख के हम नादाँ

मंदिर की तामीर बना कर बैठ गए.

.

हँसते…

Continue

Posted on January 23, 2022 at 9:02am — 1 Comment

ग़ज़ल नूर की- कहीं ये उन के मुख़ालिफ़ की कोई चाल न हो

.

कहीं ये उन के मुख़ालिफ़ की कोई चाल न हो

सो चाहते हैं कि उन से कोई सवाल न हो.

.

कोई फ़िराक़ न हो और कोई विसाल न हो

उठे वो मौज कि अपना हमें ख़याल न हो.   

.

तेरी तलब में हमें वो मक़ाम पाना है

कि लुट भी जाएँ तो लुट जाने का मलाल न हो.

.

हमें सफ़र जो ये बख़्शा है क्या बने इसका

न हो उरूज अगर इस में या ज़वाल न हो.

.

बशर न हो तो ख़ुदा भी न हो जहाँ में कोई 

न हो जहाँ में ख़ुदा तो कोई वबाल न हो.

.

मैं चाहता हूँ ये दुनिया वहाँ…

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Posted on January 12, 2022 at 9:00am — 4 Comments

ग़ज़ल नूर की - उस के नाम पे धोखे खाते रहते हो

,

उस के नाम पे धोके खाते रहते हो

फिर भी उस के ही गुण गाते रहते हो.

.

उस के आगे बोल नहीं पाते हो तुम

मैं बोलूँ तो हाथ दबाते रहते हो.

.

कोई नया इस दुनिआ में कब आता है

तुम ही जा कर वापस आते रहते हो.

.

तुम को वापस अपने घर भी जाना है

क्यूँ दुनिआ से लाग  लगाते रहते हो.

.

अक्सर मिलता है वो इन्साँ पूजता है 

वो जिस को तुम ख़ुदा बताते रहते हो.

.

वाइज़ जी क्या तुम ने वो सब सीख लिया 

हम को जो कुछ तुम समझाते रहते…

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Posted on December 27, 2021 at 8:30am — 8 Comments

ग़ज़ल नूर की- कहीं से उड़ के परिन्दे कहीं पे उतरे हैं

कहीं से उड़ के परिन्दे कहीं पे उतरे हैं  

ख़ुदा से हो के ख़फ़ा हम ज़मीं पे उतरे हैं.

.

तुम्हारे ढब से मिली बारहा जो रुसवाई  

हर एक बात पे हाँ से नहीं पे उतरे हैं.

.

हमारी आँखों की झीलें भी इक ठिकाना है     

तुम्हारी यादों के सारस यहीं पे उतरे हैं.

.

हमारी फ़िक्र से नीचे फ़लक मुहल्ला है  

ये शम्स चाँद सितारे वहीं पे उतरे हैं.  

.

हज़ारों बार ज़मीं ने ये माथा चूमा है

उजाले सजदों के मेरे जबीं पे उतरे हैं.  

.

निलेश "नूर"…

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Posted on December 22, 2021 at 10:30pm — 10 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 7:53pm on September 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय नीलेश जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया मैं बता नहीं सकता मैं कितना खुश हूँ आपने मेरी ग़ज़ल को सराहा मेरा तो आज का दिन बन गया ! ह्रदय से शुक्रिया
At 8:17pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
मुआफ़ी चाहता हूँ ! बढ़ाने का
At 8:16pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
हौसला बढ़ने का
At 8:15pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश जी आदाब . बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का
At 8:49pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश सर प्रणाम
बहुत शुक्रिया
At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

 
 
 

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