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Amit Kumar "Amit"
  • Male
  • ujhani
  • India
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Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी एक बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए और हम सबका ज्ञान वर्धन करने के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं बधाइयां। आभार "
Jun 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीया रचना भाटिया जी अच्छी ग़ज़ल कहीं बहुत-बहुत बधाइयां। आदरणीय अमीर उद्दीन जी की बात संज्ञान में लें"
Jun 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय अशफाक अली जी एक बहुत ही बेहतरीन गजल लिखने के लिए हार्दिक शुभकामनाएं"
Jun 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"धन्यवाद आदरणीया। आभार"
Jun 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"धन्यवाद आदरणीय"
Jun 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी गजल के प्रयास को सरहाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।"
Jun 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी गजल पर इतनी विस्तृत प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत-बहुत आभार आदरणीय मैं आपके बताए गए सुझावों से सहमत हूं और भविष्य में इन की पुनरावृत्ति ना हो उनका ध्यान रखुंगा। मैंने कुछ शेरों को ठीक करने का प्रयास किया है आपका मार्गदर्शन…"
Jun 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी यह पटल सीखने और सिखाने के उद्देश्य से ही बनाया गया है, तो इसमें किसी तरह की संकोच क्षमा की आवश्यकता नहींl गजल पर आपकी टिप्पणी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आभार"
Jun 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी गजल अच्छी हुई बहुत बहुत बधाइयां। आदरणीय आपने गिरह का शेर नहीं लिखा। माफ कीजिएगा गजल के नियमों में शायर को शायद,  अपना नाम लिखने की मनाही है बाकी गुणीजन बताएंगे। आभार "
Jun 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय दयाराम मथानी जी अच्छी गजल के लिए बहुत-बहुत बधाइयां"
Jun 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय संजय शुक्ला जी गजल का अच्छा प्रयास बहुत-बहुत बधाइयां।"
Jun 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल हुई बहुत-बहुत बधाइयां।"
Jun 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीया रिचा यादव, बहुत ही खूबसूरत गजल कही बहुत-बहुत बधाई।  इस शैर में कुछ दोष प्रतीत होता है क्योंकि मिश्रा ऊला और मिश्रा सानी दोनों मैं अंतिम शब्द एक ही है कृपया देखिएगा। दोस्त बनकर ही यहाँ लोग दग़ा देते हैंदोस्ती कैसे समझ पाएगी फ़ितरत क्या…"
Jun 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी इस शैर में कुछ दोष है क्योंकि मिश्रा ऊला और मिश्रा सानी दोनों मैं अंतिम शब्द एक ही है कृपया देखिएगा। जोश में होश न खो तू अभी मुश्किल वक्त है होशियारी से क़दम आज उठा लत क्या है   वाकी गुणीजन बताएंगे।  आभार। "
Jun 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी अच्छी ग़ज़ल हुई बहुत-बहुत बधाइयां।"
Jun 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय रिचा यादव जी ग़ज़ल पसंद करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। शान-ए-गुस्ताख़ी 21   1 221"
Jun 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujhani ,UP
Native Place
Ujhani
Profession
DM QA
About me
Amit

Amit Kumar "Amit"'s Blog

गीत - मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।

तुम मुझको चाहे जो भी समझो लेकिन सुनो प्रिय।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।



तुम अमृत जैसी दुर्लभ हो, तुम गंगाजल सी पावन हो।

तुम खुशबू से लबरेज पवन, तुम बहका-बहका सावन हो।

तुम कलियों में कचनार प्रिय, तुम नील गगन में चंदा हो।

उर्वशी-मेनका से सुंदर, जो जग पूजे वो वृंदा हो।



उस जीवन दाता रब का मुझ पर फजल समझता हूं।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।१।।



सांसो की मधुमय हाला से मदहोश सदा हो जाता हूं।

इन नैनो की मधुशाला… Continue

Posted on July 19, 2019 at 6:09pm — 3 Comments

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।।

मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।

अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा।

इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।

जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने।

किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।

मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है।

वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।

नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है।

गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 10:30pm — 10 Comments

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At 7:42am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय अमित कुमार अमित जी
At 10:31am on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया
At 6:50am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय Amit Kumar साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर

At 5:13pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शीमान अमित कुमार जी नमस्कार
शुक्रिया आपका
At 5:01pm on September 29, 2014, Vivek Jha said…

थैंक्स अमित जी, उस दिन आपसे मिलकर काफी अच्छा लगा 

 
 
 

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