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Amit Kumar "Amit"
  • Male
  • ujhani
  • India
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Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"हुस्न को तो इश्क से प्यारा समझ बैठे थे हम।क्या नफा नुकसान सब किस्सा समझ बैठे थे हम।। देख लेने भर से उनके हम दीवाने हो गए।इश्क़ उनकी मुस्कुराहट सा समझ बैठे थे हम।। भूल ही से हां मगर ये भूल हमसे हो गई।अपने दुश्मन को कभी अपना समझ बैठे थे हम।। हर…"
Feb 22
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय रवि भसीन शाहिद भाई एक बेहतरीन गजल लिखने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां शेर दर शेर दाद कबूल करें।"
Feb 22
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय क्षमा करें किंतु  गजल अलग से पोस्ट नहीं की है रिप्लाई बॉक्स में ही है अगर अलग से की होती तो शायद लास्ट पेज पर होती।"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय दिनेश भाई जी एक बेहतरीन गजल कहने के लिए शुभकामनाएं"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय मोहम्मद अनीस अरमान जी एक बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बधाइयां"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"श्री सुरेंद्र नाथ जी अच्छी गजल हुई बधाइयां स्वीकार करें"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय में ग़ज़ल को सुधार के साथ दोबारा प्रस्तुत कर रहा हूं क्या यह सही बहर है कृपया मार्गदर्शन करें। खुशी हो या फिर ये गम हो, सिर पे ये आसमां है।यही है मेरा मुकद्दर यही मेरा पासबाँ है।।१।। ये तू ढूढता किसे है, अभी कुछ न मिल सकेगा।अभी आग बुझ चुकी…"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय समर सर धन्यवाद आज स्वास्थ्य ठीक ना होने की वजह से इतनी देरी से रिप्लाई कर पाया हूं मैं मात्रा के विषय में और ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश करूंगा और आपकी बताई हुई बातों का ध्यान रखूंगा"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय अनीश अमन जी बिल्कुल धन्यवाद"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय रवि शुक्ला जी प्रयास की सराहना करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद मुझे मात्रा के बारे में थोड़ा और ज्ञान की आवश्यकता है जिसे मैं ग़ज़ल की कक्षा से लेने का प्रयास करूंगा धन्यवाद आभार"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय अजय गुप्ता जी प्रयास की सराहना के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय रवि शुक्ला जी प्रयास की सराहना करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद मुझे मात्रा के बारे में थोड़ा और ज्ञान की आवश्यकता है जिसे मैं ग़ज़ल की कक्षा से लेने का प्रयास करूंगा धन्यवाद आभार"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"पर आदरणीय क्या गम को 11 पर नहीं कर सकते हैं"
Jan 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय समर सर मार्ग दर्शन के लिए धन्यवाद किंतु मैं समझ नहीं पाया कि यह बहर अलग कैसे है मैंने तो इसी बहर में लिखने का प्रयास किया है कृपया प्रकाश डालने का कष्ट करें आपकी अति कृपा होगी और मेरे जान में प्रति धन्यवाद आभार"
Jan 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी एक बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां"
Jan 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बधाइयां बाकी समर सर की बातों पर ध्यान दें"
Jan 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujhani ,UP
Native Place
Ujhani
Profession
DM QA
About me
Amit

Amit Kumar "Amit"'s Blog

गीत - मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।

तुम मुझको चाहे जो भी समझो लेकिन सुनो प्रिय।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।



तुम अमृत जैसी दुर्लभ हो, तुम गंगाजल सी पावन हो।

तुम खुशबू से लबरेज पवन, तुम बहका-बहका सावन हो।

तुम कलियों में कचनार प्रिय, तुम नील गगन में चंदा हो।

उर्वशी-मेनका से सुंदर, जो जग पूजे वो वृंदा हो।



उस जीवन दाता रब का मुझ पर फजल समझता हूं।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।१।।



सांसो की मधुमय हाला से मदहोश सदा हो जाता हूं।

इन नैनो की मधुशाला… Continue

Posted on July 19, 2019 at 6:09pm — 3 Comments

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।।

मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।

अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा।

इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।

जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने।

किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।

मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है।

वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।

नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है।

गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 10:30pm — 10 Comments

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At 7:42am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय अमित कुमार अमित जी
At 10:31am on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया
At 6:50am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय Amit Kumar साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर

At 5:13pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शीमान अमित कुमार जी नमस्कार
शुक्रिया आपका
At 5:01pm on September 29, 2014, Vivek Jha said…

थैंक्स अमित जी, उस दिन आपसे मिलकर काफी अच्छा लगा 

 
 
 

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