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Amit Kumar "Amit"
  • Male
  • ujhani
  • India
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"आदरणीय नादिर साहब जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपका इशारा समझ में आ गया।"
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"आदरणीय नवीन भाई हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
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Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-106
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां। बेहतरीन शेर। किंतु इसका वजन (२२२२,१२२२,१२२२,१२२२) होना चाहिए कृपया मार्गदर्शन करें। उन्हें खंजर उठाने की ज़रूरत क्या भला यारो किसी का क़त्ल कर सकता है उनका मुस्कुराना भी l"
15 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-106
"आदरणीय नादिर जी ग़ज़ल के लिए बहुत-बहुत बधाइयां। कृपया इन शेर को देखें शायद ये बहर में नहीं है,  समय रहते(१२२२) सँभल जाओ(२२२२) निकल जाए(१२२२) न हाथों से(१२२२) बहुत मुश्किल से मिलता है जहाँ में आब ओ दाना भी। तुम्हारे दुख(२२२२),परेशानी…"
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"आदरणीय आसिफ भाई जी मुशायरे का आगाज़ करने और एक खूबसूरत ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां।"
22 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-106
"उसे आता है गम-ऐ- इश्क को दिल में दबाना भी। मेरे अन्दाज में ही गीत मेरे गुनगुनाना भी।।१।। मैं कैसे सोच लूं उसका बुरा अब गाएबाना भी। मेरे बस का नहीं है यार उसके खत जलाना भी।।२।। कहीं मेरी कमी इक रोज उसको मार ना डाले। यही सब सोच कर रोते थे था ऐसा जमाना…"
22 hours ago
Amit Kumar "Amit" commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'तेरे-मेरे मन की बातें' (लघुकथा)
"अजी वाह आदरणीय शहजाद उस्मानी जी बहुत ही सही बात कही आपने किताबें इंसान की सच्ची दोस्त होती हैं। लेखक भी और पाठक भी बाली बात भी बहुत सुंदर है। बधाईयां"
Feb 4
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय समर कबीर सर वाकई ग़ज़ल और समय चाहती है वैसे भी मैं सोच रहा था की ग़ज़ल पोस्ट ना करूं फिर भी मन नहीं माना तो पोस्ट कर दी आपके कहे पर ध्यान करूंगा धन्यवाद घाटे तमाम इश्क के क्यों तुमने रख लिए।हक मार के ये मेरे नफाएं मुझे न दो' इस शैर में…"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आ० राजेश कुमारी जी बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई बहुत-बहुत बधाइयां स्वीकार करें। जीता रहा फ़रेब के साए में आज तक जाते हुए तुम इतनी वफाएँ मुझे न दो........ बहुत ही उम्दा शेर"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आ० अंजलि जी एक उम्दा ग़ज़ल कहने के लिए बधाइयां"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय तस्दीक जी एक अच्छी ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"बीमार इश्क का हूं, दबाएँ मुझे न दो।मर जाउंगा कि और, दुआएं मुझे न दो।।१।। बेखौफ बेवजह वो करता रहा खता।उसकी नदानियों की सजाएं मुझे न दो।।२।। टूटे हुऐ चराग को कैसे जलाओगे।बेकार कोशिशें ये हवाएं मुझे ना दो।।३।। घाटे तमाम इश्क के क्यों तुमने रख लिए।हक…"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय वासुदेव जी बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई बधाइयां स्वीकार करें"
Jan 25

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujhani ,UP
Native Place
Ujhani
Profession
DM QA
About me
Amit

Amit Kumar "Amit"'s Blog

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।।

मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।

अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा।

इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।

जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने।

किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।

मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है।

वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।

नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है।

गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से…

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Posted on January 6, 2019 at 10:30pm — 10 Comments

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At 6:50am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय Amit Kumar साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर

At 5:13pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शीमान अमित कुमार जी नमस्कार
शुक्रिया आपका
At 5:01pm on September 29, 2014, Vivek Jha said…

थैंक्स अमित जी, उस दिन आपसे मिलकर काफी अच्छा लगा 

 
 
 

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