For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Amit Kumar "Amit"
  • Male
  • ujhani
  • India
Share

Amit Kumar "Amit"'s Friends

  • kamal pahuja
  • Vivek Jha
  • Nilesh Shevgaonkar
  • मोहन बेगोवाल
  • Dr.Prachi Singh
  • Ashok Kumar Raktale
  • राज़ नवादवी
  • Tilak Raj Kapoor
  • Saurabh Pandey
  • Rana Pratap Singh
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"
 

Amit Kumar "Amit"'s Page

Latest Activity

Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय क्षमा करें किंतु  गजल अलग से पोस्ट नहीं की है रिप्लाई बॉक्स में ही है अगर अलग से की होती तो शायद लास्ट पेज पर होती।"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय दिनेश भाई जी एक बेहतरीन गजल कहने के लिए शुभकामनाएं"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय मोहम्मद अनीस अरमान जी एक बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बधाइयां"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"श्री सुरेंद्र नाथ जी अच्छी गजल हुई बधाइयां स्वीकार करें"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय में ग़ज़ल को सुधार के साथ दोबारा प्रस्तुत कर रहा हूं क्या यह सही बहर है कृपया मार्गदर्शन करें। खुशी हो या फिर ये गम हो, सिर पे ये आसमां है।यही है मेरा मुकद्दर यही मेरा पासबाँ है।।१।। ये तू ढूढता किसे है, अभी कुछ न मिल सकेगा।अभी आग बुझ चुकी…"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय समर सर धन्यवाद आज स्वास्थ्य ठीक ना होने की वजह से इतनी देरी से रिप्लाई कर पाया हूं मैं मात्रा के विषय में और ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश करूंगा और आपकी बताई हुई बातों का ध्यान रखूंगा"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय अनीश अमन जी बिल्कुल धन्यवाद"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय रवि शुक्ला जी प्रयास की सराहना करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद मुझे मात्रा के बारे में थोड़ा और ज्ञान की आवश्यकता है जिसे मैं ग़ज़ल की कक्षा से लेने का प्रयास करूंगा धन्यवाद आभार"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय अजय गुप्ता जी प्रयास की सराहना के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय रवि शुक्ला जी प्रयास की सराहना करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद मुझे मात्रा के बारे में थोड़ा और ज्ञान की आवश्यकता है जिसे मैं ग़ज़ल की कक्षा से लेने का प्रयास करूंगा धन्यवाद आभार"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"पर आदरणीय क्या गम को 11 पर नहीं कर सकते हैं"
Jan 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय समर सर मार्ग दर्शन के लिए धन्यवाद किंतु मैं समझ नहीं पाया कि यह बहर अलग कैसे है मैंने तो इसी बहर में लिखने का प्रयास किया है कृपया प्रकाश डालने का कष्ट करें आपकी अति कृपा होगी और मेरे जान में प्रति धन्यवाद आभार"
Jan 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी एक बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां"
Jan 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बधाइयां बाकी समर सर की बातों पर ध्यान दें"
Jan 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय रवि भसीन साहब जी एक अच्छी गजल के आने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां बाकी समर साहब की बात पर और ध्यान दें।"
Jan 24
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"गम हो या फिर खुशी हो, सर पर ये आसमां है।यही है मेरा मुकद्दर यही मेरा पासबाँ है।।१।। गुमनामियों को मेरी अब ढूढता कहां हैहर आग बुझ चुकी है बस राख का निशां है।।२।। कुछ तो बताओ मुझको कुछ तो हुआ यहाँ है।बिन आग और लकड़ी ये कैसा भला धुआं है।।३।। इतना…"
Jan 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujhani ,UP
Native Place
Ujhani
Profession
DM QA
About me
Amit

Amit Kumar "Amit"'s Blog

गीत - मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।

तुम मुझको चाहे जो भी समझो लेकिन सुनो प्रिय।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।



तुम अमृत जैसी दुर्लभ हो, तुम गंगाजल सी पावन हो।

तुम खुशबू से लबरेज पवन, तुम बहका-बहका सावन हो।

तुम कलियों में कचनार प्रिय, तुम नील गगन में चंदा हो।

उर्वशी-मेनका से सुंदर, जो जग पूजे वो वृंदा हो।



उस जीवन दाता रब का मुझ पर फजल समझता हूं।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।१।।



सांसो की मधुमय हाला से मदहोश सदा हो जाता हूं।

इन नैनो की मधुशाला… Continue

Posted on July 19, 2019 at 6:09pm — 3 Comments

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।।

मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।

अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा।

इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।

जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने।

किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।

मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है।

वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।

नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है।

गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 10:30pm — 10 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:42am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय अमित कुमार अमित जी
At 10:31am on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया
At 6:50am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय Amit Kumar साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर

At 5:13pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शीमान अमित कुमार जी नमस्कार
शुक्रिया आपका
At 5:01pm on September 29, 2014, Vivek Jha said…

थैंक्स अमित जी, उस दिन आपसे मिलकर काफी अच्छा लगा 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari commented on amita tiwari's blog post जायदाद के हकदार
"रवि जी , विजय जी  उत्साह वर्धन के लिए हार्दिक आभार "
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post वैलेनटाइन डे
"आ. भाई रवि भसीन जी,सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकारस्वीकारेंं ।"
9 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post डूब गया कल सूरज
"रचना की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, प्रिय मित्र लक्ष्मण जी।"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post डूब गया कल सूरज
"आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई । "
11 hours ago
MUKESH SRIVASTAVA commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post प्रेम गली अति सांकरी
"Bhaee Musafir ji, Post Pasandgee aur comment ke liye bahut bahut aabhar"
12 hours ago
DR DEEPAK PANDEY updated their profile
13 hours ago
Profile IconDR DEEPAK PANDEY and Anupama Mishra joined Open Books Online
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत कविता : मैं भी लिखूंगा एक कविता (गणेश बाग़ी)
"आ. भाई गणेश जी बागी, सादर अभिवादन। सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post धरणी भी आखिर रोती है
"आ. ऊषा जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post
15 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on amita tiwari's blog post जायदाद के हकदार
"आदरणीय अमिता जी, इस भावपूर्ण सुन्दर रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।"
15 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post डूब गया कल सूरज
"रचना की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, प्रिय भाई समर कबीर जी।"
16 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service