SANDEEP KUMAR PATEL left a comment for Tilak Raj Kapoor
SANDEEP KUMAR PATEL said… saadar pranaam sir ji wandan hai aapka
अमिताभ त्रिपाठी ’अमित’ said… जहाँ भी एक स्वर के साथ दो से अधिक व्यंजन जुड़े हों वहाँ संयुक्ताक्षर होता है। प्र, व्य, स्थ, ल्य, क्त, न्त, आदि सभी संयुक्ताक्षर हैं। हिन्दी मे कुछ संयुक्ताक्षर वर्णमाला में भी जोड़ दिये गये हैं लेखन की सुविधा के लिये। क्+ष= क्ष, त्+र = त्र, ज् + ञ = ज्ञ। ध्यान देने योग्य है इन संयुक्ताक्षरों में पहला वर्ण स्वर रहित या हलन्त युक्त है। एक से अधिक व्यंजन भी जुड़ते हैं जैसे उ+ ज् + ज् + व + ल = उज्ज्वल यहाँ भी ’ज्ज्व’ की मात्रा एक ही होगी - २११ क्योंकि एक ही स्वर (लघु) प्रयुक्त हुआ है।
अमिताभ त्रिपाठी ’अमित’ said… आदरणीय तिलकराज जी,
’ज़िन्दगी’ की हिन्दी में भी पाँच मात्रायें होंगी। यथा ऽ।ऽ या २१२। हिन्दी छन्द शास्त्र के अनुसार व्यंजन की आधी मात्रा होती और किसी व्यंजन का उच्चारण बिना स्वर के सम्मिलन के सम्भव नहीं है। यदि लघु वर्ण के बाद कोई संयुक्ताक्षर आता है तो संयुक्ताक्ष के पूर्व का वर्ण दीर्घ हो जाता है। अर्द्धाक्षर का लोप नहीं होता।किसी संयुक्ताक्षर की वही मात्रा होती है जो उसके मुख्य व्यंजन की होती है।
वीनस जी को एक अच्छी और ज्ञानवर्द्धक चर्चा प्रारम्भ करने के लिये धन्यवाद!
PREETAM TIWARY(PREET) said… MANY MANY HAPPY RETURNS OF THE DAY TILAK SIR....
Ganesh Jee "Bagi" said…
आवाज शर्मा said…
nemichandpuniyachandan said…
Veerendra Jain said…
PREETAM TIWARY(PREET) said…
Ganesh Jee "Bagi" said… आवश्यक सूचना:-
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