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Krishnasingh Pela replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"हार्दिक अाभार "
Oct 23, 2018
Krishnasingh Pela replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"१. आदरणीय , मुशायरे के इस बेहतरीन शीघ्र संकलन के लिए बधाइ स्वीकार करें ! २. ग़ज़ल संख्या 86 में बेबह्र व खारिज़ मिसरे का विकल्प उपयुक्त एवम् संभव हो तो संशोधन हेतु निवेदन है । विकल्प इसप्रकार है : दर्द दिल में ही दफ़्न कर डाला ३. अंतिम से तीसरा…"
Oct 22, 2018
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Oct 22, 2018
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Oct 22, 2018
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Oct 22, 2018
Krishnasingh Pela replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"गिरह अच्छी है । कुछ मिसरे बेबह्र हो गये हैं आदरणीय नन्द कुमार जी । पहले तीसरे व चौथे शेर मे‌ पुनर्विचार अपेक्षित है ।"
Oct 21, 2018
Krishnasingh Pela replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
" बहौत शुक्रिया अादरणीय ।  आप सभी का स्नेह व मार्गदर्शन प्राप्त करना, यह हमारा सौभाग्य है ।"
Oct 21, 2018
Krishnasingh Pela replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"बहुत शुक्रिया जनाब मोहम्मद अारिफ जी । मन प्रसन्न हो गया आप की प्रतिक्रिया से। "
Oct 21, 2018
Krishnasingh Pela replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"हौशला अफजाइ के लिए बहौत शुक्रिया अादरणीय । अभी करिब समापन के समय पोष्ट की है । आपने पढ ली तो लगा  कि यह प्रयास सार्थक हुअा । "
Oct 21, 2018
Krishnasingh Pela replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"हार्दिक धन्यवाद अादरणीय श्लेष जी ।"
Oct 21, 2018
Krishnasingh Pela replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"हार्दिक धन्यवाद अादरणीय रवि शुक्ला जी । "
Oct 21, 2018
Krishnasingh Pela replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आईना वो दिखा गया है मुझे मेरी हस्ती बता गया है मुझे थी ये साज़िश या मैं ही था पुतलाआज रावण जला गया है मुझे इस से पहले कि मैं जुबाँ खोलुँ कोई ख़ंजर चुभा गया है मुझे कल से मेरा वजूद क्या होगा ख़ौफ अन्दर ही खा गया है मुझे मैं कई फाइलों का राज़ हूँ…"
Oct 21, 2018
Krishnasingh Pela commented on Krishnasingh Pela's blog post एक तरही ग़ज़ल: ज़िन्दगी ने पलट के पूछा है/कृष्णसिंह पेला
"हार्दिक आभार आदरणीय गिरिराज भण्डारी साहब ! आपके दो शब्द मेरे लिए प्रेरणा के श्रोत हैं । सादर ।"
Feb 4, 2015
Krishnasingh Pela replied to Rana Pratap Singh's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 55 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"बहुत कम समय में मुशायरे का संकलन प्रस्तुत कर सभी को लाभन्वित किया है आदरणीय राणा प्रताप जी ने । अत: आपको हार्दिक बधाइ ! ग़ज़ल में जो दोष रह गये हैं उन्हें महसूस करने का अवसर प्राप्त हुआ । यदि संशोधन संभव हो तो मैं पुनः आप से निवेदन करूँगा कि इस…"
Feb 4, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Krishnasingh Pela's blog post एक तरही ग़ज़ल: ज़िन्दगी ने पलट के पूछा है/कृष्णसिंह पेला
"मुस्कुराहट में आब बाक़ी है गाँव से वो नया नया आया ।  -- लाजवाब शे र ! आदरणीय ग़ज़ल के लिये बधाई आपको ।"
Feb 3, 2015
Krishnasingh Pela posted blog posts
Feb 3, 2015

Profile Information

Gender
Male
City State
Dhangadhi
Native Place
Baitadi
Profession
Instructor

Krishnasingh Pela's Blog

एक तरही ग़ज़ल: ज़िन्दगी ने पलट के पूछा है/कृष्णसिंह पेला

वक़्त ऐसे मुक़ाम पर लाया

आज हम से बिछड गया साया



चंद हालात ने जो समझाया

उस को अपनी जगह सही पाया



झूठ से जा मिली जुबाँ उसकी

आज पहली दफ़ा वो हकलाया



हमसफ़र की तलाश है सब को

और पा कर भी कोई पछताया



प्यार के नाम पर वहम केवल

उस के सारे वजूद पर छाया



तुम भी लगते बहुत परेशाँ हो

हम को भी ये जहाँ नहीं भाया



किन ख़यालों में फूल था गुमशुम

मैंने हौले छुआ तो इतराया



मुस्कुराहट में आब बाक़ी है

गाँव… Continue

Posted on February 1, 2015 at 11:00pm — 17 Comments

ग़ज़ल: मर्ज़ अपने हैं सभी...

मर्ज़ अपने हैं सभी कोई न बेगाना

मेरे घर का एक कोना है दवाखाना



इक नशा सा है मगर साकी न पैमाना

ज़ख़्म अपने पास हैं और दूर मैखाना



किस बीमारी का पता क्या है, वतन क्या है

पूछना कुछ हो तो मेरे घर पे आ जाना



आह भी है, ऊह भी है, शाम है ग़मगीन

शम्अ जलती दर्द की, मैं मस्त परवाना



कोई काँटा, कोई पत्थर, कोई ख़ंजर है

दर्ददाताओं से ही अपना है याराना



इक ग़ज़ल आयी ठिठुरती, कह गयी मुझसे

जम न जाना, जनवरी में ठंड है, माना ।…

Continue

Posted on January 20, 2015 at 10:30am — 20 Comments

ग़ज़ल : तुम्हारे लिए जश्न हाेगा ये मेला

सभी रास्ताें पर सिपाही खटे हैं 

ताे फिर लाेग क्याें रास्ते से हटे हैं । 

सियासत अाै मज़हब की दीवारें देखाे 

दीवाराें से ही लाेग गुमसुम सटे हैं । 

सरहद है सराें के लिए अाखरी हद 

अकारण यहाँ पर कई सर कटे हैं…

Continue

Posted on April 13, 2014 at 12:00pm — 27 Comments

ये ग़ज़ल नहीं है देश का बयान है

ये  ग़ज़ल नहीं है देश का बयान है, 

डूबते जहाज की ये दास्तान है।

लुट रही है कहकहाें के बीच अाबरु, 

धर्तीपुत्र अाज माैन, बेजुबान है।

गर्व था उन्हें कि बन गये जगतपिता, 

गर्भ में ही मर चुका वाे संविधान है। 

हम ताे नेक हैं ये बाेलता है हर काेई, 

हर काेई कहे कि मुल्क बेइमान है। 

घर ताे बन गया मगर वाे साे नहीं सके, 

बेघराें के बीच घर जाे अालिशान है। 

लाेग पूछते हैं कैसे खण्डहर बना…

Continue

Posted on March 29, 2014 at 12:30am — 14 Comments

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