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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted a blog post

ज़िंदगी के सफे ...

ज़िंदगी के सफे ...हैरां हूँ बाद मेरे फना होने के किसी ने मेरी लहद को गुलों से नवाज़ा है एक एक गुल में गुल की एक एक पत्ती में उसके रेशमी अहसासों की गर्मी है जमाल हाथो की नरमी है कुछ सुलगते जज़्बात हैं कुछ गर्म लम्हों की सौगात है काश तुम मेरे शिकवों को समझ पाते जलते चिराग का दर्द समझ पाते मेरी पलकों को इंतज़ार की चौखट में कैद करने वाले कितना अच्छा होता साथ इन गुलों के तुम भी आ जाते बीते की दौलत से एक लम्हा अपने वस्ल का मेरी लहद के चिराग पे सजा जाते मेरी रूह कोसकूं मिल जाता मेरी ज़िंदगी के सफे को हँसी…See More
22 hours ago
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post पीते हैं ...
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, सच कहा आपने हम कुछ न कुछ पीते जा रहे हैं और जी रहे हैं । सुंदर रचना । बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पीते हैं ...
"आदरणीय नरेंद्रसिंह जी प्रस्तुति को अपने स्नेह से अलंकृत करने का शुक्रिया। "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम ...
"आ.डॉ. गोपाल जी भाई साहिब आपके मुखारविंद से निकली इस काव्यात्मक प्रशंसा का  हार्दिक आभार सर। "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अनकहा ...
"आ. विजय नोकोर साहिब सृजन के भावों को प्रशंसित करने का हार्दिक आभार। "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अनकहा ...
"आ.डॉ. गोपाल जी भाई साहिब आपके मुखारविंद से निकले आशीर्वचनों से सृजन उपकृत हुआ।  हार्दिक आभार सर। "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post सौगंध के बंधन ....
"आ.सुनील प्रसाद जी सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का आभारी है। "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post सौगंध के बंधन ....
"आ. विजय नोकोर साहिब सृजन के भावों को प्रशंसित करने का हार्दिक आभार। "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post सौगंध के बंधन ....
"आ.डॉ. गोपाल जी भाई साहिब आपके मुखारविंद से निकले आशीर्वचनों से सृजन उपकृत हुआ।  हार्दिक आभार सर।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post सौगंध के बंधन ....
"आदरणीय मो. आरिफ़ साहिब सृजन के भावों को आत्मीय समर्थन देने का हार्दिक आभार। "
yesterday
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post पीते हैं ...
"सुन्दर रचना "
Saturday
सुनील प्रसाद(शाहाबादी) commented on Sushil Sarna's blog post सौगंध के बंधन ....
"बहुत ही भावपूर्ण रचना बधाई आपको ।"
Saturday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post सौगंध के बंधन ....
"बहुत ही सुन्दर सर्जन किया है। बधाई, आदरणीय सुशील जी।"
Saturday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post अनकहा ...
"//सांझ कब तलक तिमिर को रोकती प्रतीक्षा की रेशमी डोरी प्रभात की तीक्षण रश्मियों से कमज़ोर पड़ने लगी // सुन्दर भावों से भरपूर रचना पढ़ कर आनन्द आ गया। हार्दिक बधाई, सुशील जी।"
Saturday
Sushil Sarna posted blog posts
Saturday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम ...
"अब क्या मिसाल दूं मैं  तुम्हारे शबाब की ----- सादर ."
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

Sushil Sarna's Blog

ज़िंदगी के सफे ...

ज़िंदगी के सफे ...

हैरां हूँ

बाद मेरे फना होने के

किसी ने मेरी लहद को

गुलों से नवाज़ा है

एक एक गुल में

गुल की एक एक पत्ती में

उसके रेशमी अहसासों की गर्मी है

जमाल हाथो की नरमी है

कुछ सुलगते जज़्बात हैं

कुछ गर्म लम्हों की सौगात है

काश

तुम मेरे शिकवों को समझ पाते

जलते चिराग का दर्द समझ पाते

मेरी पलकों को

इंतज़ार की चौखट में

कैद करने वाले

कितना अच्छा होता

साथ इन गुलों के

तुम भी आ जाते

बीते…

Continue

Posted on June 25, 2017 at 9:49pm

पीते हैं ...

पीते हैं ...

सब 

कुछ न कुछ

पीते हैं //



रजनी

सांझ को

पी जाती है

और सहर

रजनी को

फिर सांझ

सहर को

सच

सब

कुछ न कुछ

पीते हैं //

अंत

आदि को

पंथ

पथिक को

संत

अनंत को

घाव

भाव को

सच

सब

कुछ न कुछ

पीते हैं //



नयन

नीर को

नीर

पीड़ को

समय

प्राचीर को

सरोवर

तीर को

सच

सब

कुछ न कुछ

पीते हैं…

Continue

Posted on June 23, 2017 at 7:22pm — 3 Comments

सौगंध के बंधन ....

सौगंध के बंधन ....

मुझे

सब याद है

समय की गर्द में

कुछ भी तो नहीं छुपा

न तुम

न तुम्हारी

आँखों में आंखें डालकर

सात जन्मों तक

साथ निभाने की

सौगंध

चलते रहे

चलते रहे

साथ साथ

इक दूजे के दिल में

पुष्प भाव से गुंथे हुए

अर्थपूर्ण तृषा

और अर्थपूर्ण तृप्ति की

अभिलाष के साथ

इक दूसरे  के

अंतर्मन को छूते हुए

कब यथार्थ की नदी पर

एक किनारे ने

दूसरे किनारे को जन्म…

Continue

Posted on June 23, 2017 at 4:21pm — 8 Comments

अनकहा ...

अनकहा ...

कुछ तो

रहने दिया होता

मन की कंदराओं में

करवटें लेता

कोई भाव

अनकहा

क्या

ज़रूरी था

स्मृति पृष्ठ की

यादों को

नयन तीरों का

पता देना

आखिर

पता लग गया न

ज़माने को

सब कुछ

जो दबा के रखा था

दिल में

इक दूजे से

बांटने के लिए

सांझा दर्द

अनकहा

सांझ

कब तलक

तिमिर को रोकती

प्रतीक्षा की रेशमी डोरी

प्रभात की तीक्षण रश्मियों से…

Continue

Posted on June 21, 2017 at 3:25pm — 8 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, Kewal Prasad said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, Kewal Prasad said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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