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Sushil Sarna
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Sushil Sarna commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post गऊ ठीक-ठाक नहीं (लघुकथा)
"Bahut sundr srijan sir haardik badhaaèeeeeeeeeee"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (मिलाओ किसी से नज़र धीरे धीरे )
"Waaaaaaaah anupm srijan sir haardik badhaaèeeeeeeeeee"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on सतविन्द्र कुमार's blog post मोम नहीं जो दिल पत्थर है-ग़ज़ल
"Waaaaaaaah shaaaaàndar ahsaas sir haardik badhaaèeeeeeeeeee"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post तलाक की मोहर (लघुकथा)
"Waaaaaaaah bahut umdà laghu katha. ..haardik badhaaèeeeeeeeeee"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"Waaaaaaaah bahut sundr srijan sir haardik badhaaèeeeeeeeeee sir"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"Waaaaaaaah shaaaaàndar ahsaas"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on विनय कुमार's blog post पिंजरा--लघुकथा
"Waaaaaaaah bahut sundr laghu katha haardik badhaaèeeeeeeeeee sir"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Neelam Upadhyaya's blog post हाइकु
"Waaaaaaaah bahut sundr srijan"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post असलियत (लघुकथा)
"Waaaaaaaah shaaaaàndar ahsaas ki sundr abhivyaktì. ..haardik badhaaèeeeeeeeeee sir"
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Manoj kumar shrivastava's blog post निःशब्द देशभक्त
"Ati uttam sir"
10 hours ago
Sushil Sarna commented on रामबली गुप्ता's blog post कुंडलियाँ-रामबली गुप्ता
"Waaaaaaaah shaaaaàndar sir"
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post आग ..
"आदरणीय विजय निकोर साहिब , सादर प्रणाम , प्रस्तुति में निहित भावों को अपना आशीर्वाद देने का दिल से आभार।"
13 hours ago
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post आग ..
"//सहमी सहमी सांसें बेआवाज़ आहटें खामोशियों के लिबास में लिपटे कुछ अनकहे शब्द पल पल सिमटती ज़िदंगी जवाबों को तरसते बेहिसाब सवाल शायद यही सब था इस हयाते सफ़र का अंजाम //........ बहुत ही दिलकश शब्द-चित्र…"
yesterday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post विकल विदा के क्षण
"इस पर भी आधी-आधी रात मेंअर्ध-अचेतन स्थिति में अंधेरे के फैलाव मेंतनाव में, घिराव मेंप्रतीक्षातुर, गिनते रहते हैं हमअशान्त साँसों की खतरनाक धड़कनहार कर भी हार नहीं मानती है खंडित चेतना प्रलय के द्वार पर भी वाह आदरणीय विजय निकोर जी वाह .. अंतर्मन की…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

आग ..

आग ..सहमी सहमी सांसें बेआवाज़ आहटें खामोशियों के लिबास में लिपटे कुछ अनकहे शब्द पल पल सिमटती ज़िदंगी जवाबों को तरसते बेहिसाब सवाल शायद यही सब था इस हयाते सफ़र का अंजाम लम्हे ज़िदंगी से अदावत कर बैठे ख़्वाब आग के साथ सुलगने लगे अभी तो जीने की आग भी न बुझ पायी थी कि मौत की फसल लहलहाने लगी इक हुजूम था मेरे शेष को अवशेष में बदलने के लिए नाज़ था जिस वज़ूद पर वो ख़ाक हो जाएगा आग के साथ मिलकर आग हो जाएगा बशर फिर भी न कुछ समझ पायेगा मरघट में जलाकर फिर जलने के लिए दुनिया में चला जाएगा कभी रिश्तों की आग जलाएगी…See More
Friday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post जीने के लिए ...
"//जाने कब वक़्त ज़िंदगी की पेशानी पर बिना तारीख़ के अंत की एक तख़्ती लगा जाता है //...................... वाह, वाह, वाह ! बहुत ही सुन्दर भाव। रचना का आनन्द आ गया , आदरणीय सुशील जी।"
Thursday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

आग ..

आग ..

सहमी सहमी सांसें

बेआवाज़ आहटें

खामोशियों के लिबास में लिपटे

कुछ अनकहे शब्द

पल पल सिमटती ज़िदंगी

जवाबों को तरसते

बेहिसाब सवाल

शायद

यही सब था

इस हयाते सफ़र का अंजाम

लम्हे ज़िदंगी से अदावत कर बैठे

ख़्वाब

आग के साथ सुलगने लगे

अभी तो जीने की आग भी

न बुझ पायी थी

कि मौत की फसल

लहलहाने लगी

इक हुजूम था

मेरे शेष को

अवशेष में बदलने के लिए

नाज़ था जिस वज़ूद पर

वो ख़ाक हो जाएगा

आग के…

Continue

Posted on December 15, 2017 at 4:35pm — 2 Comments

जीने के लिए ...

जीने के लिए ...

जाने

कितनी दुश्वारियों को झेलती

ज़िंदगी

रेंगती हसरतों के साथ

खुद भी

रेंगने लगती है

हर कदम

जीने के लिए

ज़ह्र पीती है

हर लम्हा

चिथड़े -चिथड़े होते

आरज़ूओं के

पैबंद सीती है

जाने कब

वक़्त

ज़िंदगी की पेशानी पर

बिना तारीख़ के अंत की

एक तख़्ती

लगा जाता है

उस तख़्ती के साथ

ज़िंदगी रोज

मरने के लिए

जीती है

और

जीने के लिए

मरती है

सुशील सरना…

Continue

Posted on December 6, 2017 at 1:25pm — 9 Comments

अचंभित हूँ ....

अचंभित हूँ ....

अचंभित हूँ

इस गहन तिमिर में भी

तुमने श्वासों के

आरोह-अवरोह को

महसूस कर लिया

अचंभित हूँ

तुमने कैसे मेरे

अबोले तिमित स्वरों को

पहचान लिया

और चुपके से

मेरे अंतर्भावों का

अपने नयन स्वरों से

शृंगार कर दिया

अचंभित हूँ

तुम कैसे मुझसे मिलने

हृदय की गहन कंदराओं में

मेरे अस्तित्व की प्रेमानुभूतियों से

अभिसार करने आ गए

मैं तो कब से

अस्तित्वहीन हो गयी थी…

Continue

Posted on December 6, 2017 at 1:00pm — 10 Comments

तेरे-मेरे दोहे - (२)

तेरे-मेरे दोहे - (२)

नर समझाये नार को, नार करे तकरार,

रार-रार में खो गया ,मधुर पलों का प्यार।१ ।

बिन तेरे पूनम सखा , लगे अमावस रात ,

प्रणय प्रतीक्षा दे गयी ,अश्कों की सौग़ात।२।

तेरी मीठी याद है ,इक मीठा अहसास,

रास न आये श्वास को, जीवन का मधुमास।३ ।

अवगुंठन में देह की ,स्पंदन हुए उदास,

दृगजल बन बहने लगी , अंतर्मन की प्यास।४ ।

मौन भाव को मिल गए ,स्पर्श मधुर आयाम ,

पलक नगर को दे गए, स्वप्न अमर…

Continue

Posted on December 4, 2017 at 5:30pm — 10 Comments

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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