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Sushil Sarna posted a blog post

कुछ दोहे : प्रश्न - उत्तर:.....

प्रश्नों का प्रासाद है, जीवन की हर श्वास । मरीचिका में जी रहा, कालजयी विश्वास । ।प्रश्नों से मत पूछिए, उनके दिल का हाल । उत्तर के नखरे बड़े, करते बहुत सवाल ।।बिन उत्तर हर प्रश्न ज्यूँ, बिना पाल की नाव । इक दूजे को दम्भ का, दोनों देते घाव ।।प्रश्न अगर हैं तीक्ष्ण तो , उत्तर भी उस्ताद । बिन उत्तर के प्रश्न का, बढ़ जाता अवसाद ।।उत्तर से बढ़कर नहीं, प्रश्नों का अस्तित्व। इक दूजे में है निहित, दोनों का अमरत्व।।सुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशित ,See More
yesterday
Sushil Sarna replied to Sushil Sarna's discussion भक्तिरस के दोहे : in the group धार्मिक साहित्य
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Sushil Sarna's discussion भक्तिरस के दोहे : in the group धार्मिक साहित्य
"आ. भाई सुशील जी, भक्तरस के सुन्दर दोहे रचे हैं हार्दिक बधाई ।"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ : याद
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से शुक्रिया ।"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मोहब्बत क्या है .......
"आदरणीय लक्ष्मण धामी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से शुक्रिया ।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post मोहब्बत क्या है .......
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ : याद
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post आँखों के सावन में ......
"आदरणीय    लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post आँखों के सावन में ......
"आदरणीय    अमीरुद्दीन 'अमीर' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post आँखों के सावन में ......
"आदरणीय   Samar kabeerजी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post आँखों के सावन में ......
"आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बारिश पर चंद दोहे :
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ' oजी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बारिश पर चंद दोहे :
"आदरणीय  अमीरुद्दीन 'अमीर' oजी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बारिश पर चंद दोहे :
"आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बारिश पर चंद दोहे :
"आदरणीय Samar kabeer'जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।"
Tuesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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कुछ दोहे : प्रश्न - उत्तर:.....

प्रश्नों का प्रासाद है, जीवन की हर श्वास ।

मरीचिका में जी रहा, कालजयी विश्वास । ।

प्रश्नों से मत पूछिए, उनके दिल का हाल ।

उत्तर के नखरे बड़े, करते बहुत सवाल ।।

बिन उत्तर हर प्रश्न ज्यूँ, बिना पाल की नाव ।

इक दूजे को दम्भ का, दोनों देते घाव ।।

प्रश्न अगर हैं तीक्ष्ण तो , उत्तर भी उस्ताद ।

बिन उत्तर के प्रश्न का, बढ़ जाता अवसाद ।।

उत्तर से बढ़कर नहीं, प्रश्नों का अस्तित्व।

इक दूजे में है निहित, दोनों का…

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Posted on August 13, 2020 at 5:30pm

मोहब्बत क्या है .......

मोहब्बत क्या है .......



तुम समझे ही नहीं

मोहब्बत क्या है

मेरी तरह

कुछ लम्हे

तन्हा जी कर देखो

दीवारों पर अहसासों के अक्स

रक्स करते नज़र आएंगे

दर्द के सैलाब

आखों में उतर आएंगे

लबों के साहिल पर

अलफ़ाज़ कसमसायेंगे

अंधेरों के कहकहे

रूह तक पसर जाएंगे

तब तुम जानोगे

मोहब्बत क्या है

उलझी लटों को सुलझाना

मोहब्बत नहीं है

ज़िस्मानी गलियों से गुजर जाना

मोहब्बत नहीं है

हिर्सो-हवस के पैराहन

पहने रहना

मोहब्बत नहीं…

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Posted on August 11, 2020 at 4:56pm — 2 Comments

३ क्षणिकाएँ : याद

३ क्षणिकाएँ : याद

आँच
सन्नाटे की
तड़पा गई
यादों का शहर

.......................

एक टुकड़ा
चमकता रहा
ख़्वाब का
मेरी खामोशियों में
तुम्हारी याद का

..........................

पिघलती रही
यादों की बारिश
बंद आँखों की
झिर्रियों से
दर्द बनकर
उल्फ़त का

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 11, 2020 at 4:50pm — 2 Comments

आज पर कुछ दोहे :

आज पर कुछ दोहे :

झूठ सरासर भूख से, तन बनता बाज़ार।

उजले बंगलों में चलें, कोठे कई हजार।।

नज़रें मंडी हो गईं, नज़र बनी बाज़ार।

नज़र नज़र में बिक गया, एक तन कई बार।।

नज़रों में है प्यार का, झूठ भरा संसार।

प्यार ओट में वासना, का होता व्यापार।।

कलियों का तन नोचतीं, वहशी नज़रें आज।

रक्षक भक्षक बन गए, लज्जित हुआ समाज।।



हुई पुरातन सभ्यता, नव युग हुआ महान।

बेशर्मी पर आज का, गर्व करे इंसान।।

सुशील…

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Posted on July 6, 2020 at 9:46pm — 4 Comments

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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