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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted a blog post

तन्हाई में ...

तन्हाई में ...होती है बहुत ज़रूरत तन्हाई में तन्हा हाथ को अपने से एक हाथ की बोलता रहे जिसका स्पर्श सदियों तक अलसाई सी तन्हाई मेंसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अहसास .. कुछ क्षणिकाएं
"आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब .... सर सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

सजन रे झूठ मत बोलो ...

सजन रे झूठ मत बोलो ...रहने दो मेरे घावों पर मरहम लगाने की कोशिश मत करो मैं जानती हूँ तुम्हारे मन मेंमैं नहीं सिर्फ मेरा तन है जानती हूँ रैन होते ही तुम आओगे कुछ बहलाओगे कुछ फुसलाओगे धीरे धीरे मैं बहल जाऊँगी मोम सी पिघल जाऊँगी न न करते मर्यादाओं की दहलीज़ लाँघ जाऊँगी भोर के साथ नशा उतर जाएगा हर वादा बहक जाएगा हर बार की तरह मेरे मन में फिर आने की कसक छोड़ जाओगे हर इंतज़ार बस इंतज़ार रह जाएगा कब तक बताओ न कब तक तुम मेरी भावनाओं से खेलोगे हर रात मेरी प्रीत की बोली लगाओगे वासना जाल बिछाओगे कभी तो मेरे…See More
Friday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अहसास .. कुछ क्षणिकाएं
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अहसास .. कुछ क्षणिकाएं
"आदरणीय  narendrasinh chauhan  जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अहसास .. कुछ क्षणिकाएं
"आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
Thursday
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post अहसास .. कुछ क्षणिकाएं
"बहोत लाजवाब रचना सर"
Tuesday
TEJ VEER SINGH commented on Sushil Sarna's blog post अहसास .. कुछ क्षणिकाएं
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी।बेहतरीन क्षणिकांयें।"
Jul 16
Sushil Sarna posted a blog post

अहसास .. कुछ क्षणिकाएं

अहसास .. कुछ क्षणिकाएंछुप गया दर्द आँखों के मुखौटों में मुखौटे सिर्फ चेहरे पर नहीं हुआ करते.............................छील गया उल्फ़त की चुभन को एक रेशमी खंजर चुपके से...........................झील की आगोश में चाँद की चाँद संग सरगोशियाँ कर गई बेनकाब सह्र की पहली किरण........................बन जाती घास पर ओस की बूँद रोता है जब चाँदआसमान से...............................मुस्कानों की बागानों में कभी कभी उग आती है दर्द की खरपतवार आंसूओं की बरसात सेसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jul 15
Sushil Sarna commented on TEJ VEER SINGH's blog post दूरदृष्टि -  लघुकथा  -
"खुली सोच का प्रदर्शन करती इस सुंदर लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय तेज वीर सिंह जी।"
Jul 15
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post आज फिर ...
"भटक गई हवायों को पलटने दो आज फिर प्यार के दर्द के पन्ने प्यार जो पागल-सा तैर-तैर दीप्त आँखों में तुम्हारी गया था नभ को छूने आदरणीय विजय निकोर जी सादर प्रणाम , सर आपका सृजन पाषाणों की दरारों में छुपी अंतर्व्यथा की अभियक्ति को पृष्ठ पर साकार कर देता…"
Jul 15
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post श्वासों में....
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब ... सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का आभारी है।"
Jul 11
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post श्वासों में....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Dr.Prachi Singh's blog post ..ऐसा हो तो फिर क्या होगा (गीत) ~ डॉ. प्राची
"मेरे अक्स ढले सपने क्या खुद अपनी मंजिल पाएंगे या नाज़ुक मोती मेरे बिन पल में टूट बिखर जाएंगे ...कभी उन्हें फिर छू ना पाऊँ, ऐसा हो तो फिर क्या होगा ? ...साँझ ढले और मैं ना आऊँ, ऐसा हो तो फिर क्या होगा ? ... बहुत खूब आदरणीया प्राची जी अंतर्मन के भावों…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"मुद्दत के बाद आई है ख़ुश्बू सबा के साथ । बेशक़ बहार होगी मेरे हमनवा के साथ ।। शायद मेरे सनम का वो इज़हारे इश्क था । यूँ ही नहीं झुकी थीं वो पलकें हया के साथ ।।वाह सर वाह बड़े ही खूबसूरत अहसासों को पिरोया हैं आपने इस गजल में। दिल बधाई कबूल करें सर।"
Jul 10
Sushil Sarna posted a blog post

श्वासों में....

श्वासों में....मैं नहीं चाहता अभी मृत्यु का वरण करना प्रेम का वरण करना शेष है अभी श्वासों मेंप्रतीक्षा की दहलीज़ पर खड़े हैं कई स्वप्न निस्तेज से अवसन्न मुद्रा में साकार होने कोमैं नहीं चाहता सपनों की किर्चियों से पलक पथ को रक्तरंजित करना तिमिर गुहा में यथार्थ से साक्षात्कार करना शेष है अभी श्वासों मेंअभी अनीस नहीं हुई मेरी देह ज़िंदा हैं आज भी मेरी देह में गूंजती स्पर्शों की किलकारियाँमेरे अबोले भावों की सुलगती चिंगारियाँमैं नहीं चाहता विछोह की अनिल में स्वयं को भस्म करना प्रेमाग्नि में सूक्ष्म…See More
Jul 9

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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तन्हाई में ...

तन्हाई में ...

होती है
बहुत ज़रूरत
तन्हाई में
तन्हा हाथ को
अपने से
एक हाथ की
बोलता रहे
जिसका स्पर्श
सदियों तक
अलसाई सी तन्हाई में

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on July 20, 2019 at 8:05pm

सजन रे झूठ मत बोलो ...

सजन रे झूठ मत बोलो ...

रहने दो

मेरे घावों पर

मरहम लगाने की कोशिश मत करो

मैं जानती हूँ

तुम्हारे मन में

मैं नहीं

सिर्फ मेरा तन है

जानती हूँ

रैन होते ही तुम आओगे

कुछ बहलाओगे कुछ फुसलाओगे

धीरे धीरे मैं बहल जाऊँगी

मोम सी पिघल जाऊँगी

न न करते

मर्यादाओं की दहलीज़ लाँघ जाऊँगी

भोर के साथ नशा उतर जाएगा

हर वादा बहक जाएगा

हर बार की तरह

मेरे मन में

फिर आने की कसक छोड़ जाओगे

हर इंतज़ार

बस…

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Posted on July 19, 2019 at 4:24pm

अहसास .. कुछ क्षणिकाएं

अहसास .. कुछ क्षणिकाएं

छुप गया दर्द

आँखों के मुखौटों में

मुखौटे

सिर्फ चेहरे पर

नहीं हुआ करते

.............................

छील गया

उल्फ़त की चुभन को

एक रेशमी खंजर

चुपके से

...........................

झील की आगोश में

चाँद की

चाँद संग सरगोशियाँ

कर गई बेनकाब

सह्र की

पहली किरण

........................

बन जाती

घास पर

ओस की बूँद

रोता है

जब चाँद

आसमान…

Continue

Posted on July 15, 2019 at 6:53pm — 6 Comments

श्वासों में....

श्वासों में....

मैं नहीं चाहता अभी 

मृत्यु का वरण करना 

प्रेम का वरण करना

शेष है अभी

श्वासों में

प्रतीक्षा की दहलीज़ पर

खड़े हैं कई स्वप्न

निस्तेज से

अवसन्न मुद्रा में

साकार होने को

मैं नहीं चाहता

सपनों की किर्चियों से

पलक पथ को रक्तरंजित करना

तिमिर गुहा में

यथार्थ से

साक्षात्कार करना

शेष है अभी

श्वासों में

अभी अनीस नहीं हुई

मेरी देह

ज़िंदा हैं आज भी…

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Posted on July 8, 2019 at 5:28pm — 2 Comments

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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