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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted blog posts
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Neelam Upadhyaya's blog post जब तुम थीं माँ
"आदरणीया नीलम जी इस भावपूर्ण रचना के लिए दिल से बधाई।"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )
"वर्तमान में पारिवारिक परिवेश में पनपते विचारों का गहन मंथन चित्रित किया है सर आपने। इस लघु कथा में एक कटु यथार्थ को दर्शाती मार्मिक व्यथा सजीव हो उठी। इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई एवं नमन आदरणीय डॉ गोपल जी।"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हिज्र में अश्क़ बह गए इतने ।अब तलक वो नदी तो खारी है ।। वाह बहुत सुंदर भावों की ग़ज़ल पेश की है सर आपने। दिल से बधाई स्वीकार करें।"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ख़्वाब ....
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब .... सृजन के भावों को आत्मीय मान देने एवं अपने अमूल्य सुझाव से अलंकृत करने का दिल से आभार। अभी सुझावानुसार संशोधित करता हूँ सर। हार्दिक आभार।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post ख़्वाब ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत सुंदर कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'बुतफरोश के हाथ से' इस पंक्ति में 'बुतफ़रोश' की जगह "बुतगर" कर लें,क्योंकि 'बुतफ़रोश' का अर्थ बुत बेचने वाला होता है ।"
Saturday
Sushil Sarna commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"वाह आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी वाह .... वर्तमान परिस्थितियों को जीती आपकी इन कुंडलियों के दिल से बधाई। एक से बढ़कर एक प्रस्तुति है।"
Friday
Sushil Sarna commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल
"बहुत सुंदर आदरणीय ... खूबसूरत अशआर से सजी इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई।"
Friday
Sushil Sarna commented on विनय कुमार's blog post चलो मुद्दों की बात करते हैं
"वाह आदरणीय एक यथार्थ को बहुत ही ख़ूबसूरती से आपने उजागर किया है। इस रचना के लिए दिल से बधाई।"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

ख़्वाब ....

ख़्वाब ....चोट लगते ही छैनी की शिला से आह निकली जान होती है पत्थर में भी ये अहसास हुआ आज छीलता रहा पत्थर को निकालना था एक ख़्वाब बुत की शक्ल में उसके गर्भ से रो दी शिला जब ख़्वाब बुत में धड़कने लगा क्या हुआ जो रिस रहा था खून बुतगर के हाथ सेसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Mar 12
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अंतिम स्वीकार ....
"आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
Feb 19
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अंतिम स्वीकार ....
"आदरणीय narendrasinh chauhan जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
Feb 19
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अंतिम स्वीकार ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 15
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post अंतिम स्वीकार ....
"खूब सुन्दर रचना "
Feb 14
Sushil Sarna posted a blog post

अंतिम स्वीकार ....

अंतिम स्वीकार ....जितना प्रयास किया आँखों की भाषा को समझने का उतना ही डूबता गया स्मृति की प्राचीर में रिस रही थी जहाँ से पीर आँसूं बनकर स्मृति की दरारों से रह गया था शेष अंतर्मन में सुवासित अंतिम स्वीकारसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Feb 13
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post बच्चा है तू (लघुकथा )
"वाह आदरणीय गोपाल जी बहुत ही मार्के की लघु कथा का सृजन किया है आपने सर। एक यथार्थ को उजागर करती इस प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई। यही सब तो हो रहा है आजकल। घास दिखाते जाओ काम कराते जाओ। अति सुंदर।"
Feb 12

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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2 लघु रचनाएँ : इंतज़ार

2 लघु रचनाएँ : इंतज़ार
1.
कितने अज़ाब हैं
उल्फ़त के सफ्हों में
मिलता नहीं
क्यूँ चैन
फाड़ के भी
इंतज़ार के सफ्हों को

..................................
2
आंखें
कर बैठीं
इंतज़ार से
बग़ावत
अश्क
कर बैठे
चश्म से अदावत
उल्फत करती रही
इंतज़ार
ख़ारी लकीरों में

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on March 19, 2019 at 5:42pm

ख़्वाब ....

ख़्वाब ....

चोट लगते ही
छैनी की
शिला से आह निकली
जान होती है
पत्थर में भी
ये अहसास हुआ आज
छीलता रहा पत्थर को
निकालना था एक ख़्वाब
बुत की शक्ल में
उसके गर्भ से
रो दी शिला
जब
ख़्वाब
बुत में
धड़कने लगा
क्या हुआ
जो रिस रहा था खून
बुतगर के हाथ से

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on March 12, 2019 at 5:00pm — 2 Comments

अंतिम स्वीकार ....

अंतिम स्वीकार ....

जितना प्रयास किया
आँखों की भाषा को
समझने का
उतना ही डूबता गया
स्मृति की प्राचीर में
रिस रही थी जहाँ से
पीर
आँसूं बनकर
स्मृति की दरारों से
रह गया था शेष
अंतर्मन में सुवासित
अंतिम स्वीकार

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 13, 2019 at 7:27pm — 4 Comments

अंतिम साँझ .......

अंतिम साँझ .......

लिख लेने दो
एक अंतिम साँझ
मुझे
साँझ के पन्नों पर
अभिलाषाओं की वेदी पर
साँसों की देहरी पर
व्योम के क्षितिज़ पर
स्मृति के बिम्बों पर
मौन की गुहा में
स्पर्शों की गंध पर
श्वासों के आलिंगन में
अन्तस् के दर्पण पर
बिंदु के अस्तित्व में
लिख लेने दो
मुझे
प्राणों में लीन प्राणों की
अंतिम
साआआआं ... झ


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 6, 2019 at 7:24pm — 4 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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