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Sushil Sarna
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Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय वासुदेव जी गहन भावों को सुंदर शाब्दिक अलंकरण से आपने प्रस्तुति को जिस माधुर्य से चित्रित कर प्रस्तुत किया है उसके लिए आपकी जितनी तारीफ़ की जाए , कम है।  इस श्रेष्ठ रचना के लिए दिल से बधाई। "
Oct 13
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"प्रभात !मनोभावों की शुरुआत,आशाओं का संचार योजनाओं का प्रपात,मनोरंजक शीतलता भ्रमपूर्ण लाली से नतमस्तक हो करती नई मुलाकात।। वाह आदरणीय डॉ टी आर शुक्ल जी वाह ... प्रभात के साथ ही भावों की भी प्रभात हो जाती है ... दिन भर खेलते हैं दिल के आँगन में ...…"
Oct 13
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"देर तक मत फैलाये रख इनको मन के आस पास समेटने में तकलीफ होगी ... उफ़ कितनी कसक है इन पंक्तियों में ... जैसे दिल के अथाह सागर में कोई मधु पल स्वयं को जीने का संघर्ष कर रहा हो ... अति सुंदर आदरणीया प्रतिभा जी तभी तो उसकी चुगली करने झट से आ जाता है ....…"
Oct 13
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"ये हुनर तो तुमने भी माँ से ही सीखा होगा ?.. वाह अनुपम सृजन। .... निर्बाध प्रवाह। ... सरल और आकर्षक शब्द चयन ... नमन आदरणीया राजेश कुमारी जी नमन आपकी लेखनी,कल्पना और यथार्थ का संगम ... हार्दिक बधाई .. दूसरी प्रस्तुति कसमसाती वेदना का सजीव चित्रण ....…"
Oct 13
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब , आदाब , सृजन के भावों की गहनता को अपनी सहमति से अलंकृत करने के लिए दिल से आभार।"
Oct 13
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"सूरज ,उदास हो गया ... पेड़ सवयं सहते रहे धूप मगर अपनी छाया से धरा को जलने न दिया देख त्याग पेड़ों का सूरज उदास हो गया काट दिए इंसान ने शज़र अपने वास्ते झोंक दिया धरा को भानु की आग्नेय रश्मियों के तपते कुंड में स्वार्थ का तांडव देख सूरज उदास हो…"
Oct 13
Sushil Sarna commented on SALIM RAZA REWA's blog post शाम-ए-रंगीं  गुलबदन गुलफा़म है : सलीम रज़ा रीवा ग़ज़ल
"पा के सुर्खी़ आपके रुख़सार कीख़ूबसूरत आज कितनी शाम है..लोग कहते हैं बुरा कहते रहेंसाफ़ गोई में''रज़ा''बदनाम है बहुत खूब आदरणीय रज़ा साहिब .. बड़े ही खूबसूरत अहसास पिरोये हैं आपने अपनी इस बेहतरीन ग़ज़ल में। हार्दिक बधाई स्वीकारें सर।"
Oct 11
Sushil Sarna commented on Rahila's blog post अपने-पराये(लघुकथा)राहिला
"मार्मिकता से लिपटी इस संदेशप्रद लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय राहिला जी। "
Oct 11
Sushil Sarna commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ५७
"खूबसूरत अहसासों की इस ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय। "
Oct 11
Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी आपको जनम दिन की ढेरों बधाईयां एवं शुभकामनाएं. "
Oct 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अमर ...
"आदरणीय सौरभ सर , प्रणाम  ... आप सृजन पर आये, अपने स्नेहिल आशीर्वाद से उसे अलंकृत किया , सृजनकर्ता के हृदय को परमसुख का अनुभव हुआ। अपने कीमती समय से सृजन को आत्मीय स्नेह देने का दिल से आभार। "
Oct 9
Sushil Sarna commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल - चाहे आँखों लगी, आग तो आग है.. // --सौरभ
"फिर जगी आस तो चाह भी खिल उठी मन पुलकने लगा नगमगी खिल उठी दीप-लड़ियाँ चमकने लगीं, सुर सधे.. ये धरा क्या सजी, ज़िन्दग़ी खिल उठी वाह आदरणीय सौरभ सर वाह ... बहुत ही खूबसूरत,सार्थक और दिलकश अंदाज़ में पेश इस ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई स्वीकार करें सर।"
Oct 9

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post अमर ...
"कविताओं में पारिभाषिकता का चलन एक समय बहुत ज़ोर पर था. आज उस तौर की कविता को देख कर भला लगा. वैसे यह शिल्पगत व्यवस्था है. जो चलन के हिसाब से आती-जाती रहती है. आपके प्रयास केलिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय सुशील सरनाजी. "
Oct 9
Sushil Sarna commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल - चाहे आँखों लगी, आग तो आग है.. // --सौरभ
"फिर जगी आस तो चाह भी खिल उठी मन पुलकने लगा नगमगी खिल उठी दीप-लड़ियाँ चमकने लगीं, सुर सधे.. ये धरा क्या सजी, ज़िन्दग़ी खिल उठी वाह आदरणीय सौरभ सर वाह ... बहुत ही खूबसूरत,सार्थक और दिलकश अंदाज़ में पेश इस ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई स्वीकार करें सर।"
Oct 9
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अमर ...
"आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'   जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। "
Oct 9
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post अमर ...
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन, बेहद भाव पूर्ण के साथ साथ अर्थ पूर्ण, भाव विभोर करती हुई रचना,हार्दिक बधाई स्वीकारें इस प्रस्तुति पर।"
Oct 8

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

अमर ...

अमर ...

प्रश्न 

कभी मृत नहीं होते
उत्तर
सदा अमृत नहीं होते
कामनाएं
दास बना देती हैं
उत्कण्ठाएं
प्यास बढ़ा देती हैं
शशांक
विभावरी का दास है
शलभ
अमर लौ अनुराग है
दृष्टि
दृश्य की प्यासी है
तृषा
मादक मकरंद की दासी है
भाव
निष्पंद श्वास है
अंत
अनंत का विशवास है
स्मृति
कालजयी कल है
अमर
प्रीत का हर पल है

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on October 5, 2017 at 6:07pm — 14 Comments

तुम चली आना ...

तुम चली आना   ... 



जब 

दिन भर का

शेष

थोड़ा सा

उजाला हो

थोड़ी सी

सांझ हो

मेरे प्रतीक्षा द्वार पर

निस्संकोच

तुम चली आना

जब

थके हारे विहग

अंधकार में

विलीन होती

सांझ के डर से

अपने अपने

तृण निर्मित घोंसलों में

अपनी

चहचहाट के साथ

लौट आएं

तब

मेरी आशाओं के घरौंदों में

अपनी प्रीत का

दीप जलाने

निस्संकोच

तुम चली आना

जब…

Continue

Posted on September 29, 2017 at 8:30pm — 4 Comments

अवशेष ...

अवशेष ...

गोली
बारूद
धुंआ
चीत्कार
रक्तरंजित
गर्द में
डूबा
अन्धकार
शून्यता
इस पार
शून्यता
उस पार
बिछ गयी लाशें
हदों के
इस पार
हदों के
उस पार
बस
रहे शेष
अनुत्तरित प्रश्नों को
बंद पलकों में समेटे
क्षत-विक्षित
शवों के
ख़ामोश
अवशेष

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 28, 2017 at 5:10pm — 6 Comments

तेरे इंतज़ार में ...

तेरे इंतज़ार में ...

गज़ब करता रहा

तेर हर वादे पे

यकीं करता रहा

हर लम्हा

तेरी मोहब्बत में

कई कई सदियाँ

जीता रहा

और हर बार

सौ सौ बार

मरता रहा

पर अफ़सोस

तू

मुझे न जी सकी

मैं

तुझे न जी सका

पी लिया

सब कुछ मगर

इक अश्क न पी सका

मेरी ख़ामोशी को तूने

मेरी नींद का

बहाना समझा

तू

ग़फ़लत में रही

और

मैं

अजल का हो गया

तिश्नागर आँखों के …

Continue

Posted on September 25, 2017 at 2:00pm — 19 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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