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अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
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Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- रोज़ सितम वो ढाते देखो हम बेबस बेचारों पर
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' साहिब आदाब, इस ख़ूबसूरत और प्यारी ग़ज़ल पर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । सादर । आपसे निवेदन है कि ग़ज़ल की बह्र लिख दिया करें। "
12 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' साहिब आदाब, इस ख़ूबसूरत और प्यारी ग़ज़ल पर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । सादर ।"
12 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( उकता गया हूँ इनसे मेरे यार कम करो....)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी, आपकी ज़र्रा नवाज़ी और मान देने के लिए शुक्रिया। जनाब आख़िरी मिसरे में शायद भूले से "ही" अतिरिक्त टाईप हो गया है, जिस वजह से मिसरा बह्र में नहीं रहा। देखियेगा। "
12 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तेरे ख्वाहिशों के शह्र में- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"//जहाँ तक चौथे शे'र का सवाल है उसे आपके कहे अनुसार करने से उसका भाव बदल जायेगा । // जनाब लक्ष्मण धामी जी अगर मिसरा बदलने से भाव बदल रहा है तो मत बदलिये मगर जो भाव है उसे बता तो दीजिए हुज़ूर  मैने पिछली टिप्पणी में भी यही जानना चाहा था…"
12 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Ajay Tiwari's discussion उर्दू शायरी में इस्तेमाल की गईं बह्रें और उनके उदहारण - I in the group ग़ज़ल की कक्षा
"जनाब अजय तिवारी जी आदाब, इस शानदार जानकारी को साझा करने के लिए आपको बहुत बधाईयाँ और आभार। सादर। "
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( उकता गया हूँ इनसे मेरे यार कम करो....)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, कई उम्दा शैर हुए हैं बधाई स्वीकार करें। जनाब 'इश्तिहार' शब्द 2121 मात्रिक है जिसे आपने 1221 पर लिया है, देखियेगा। //आगे बहुत है सबसे वो,ये आदेश दे रहा//   ये मिसरा शब्द 'ये'…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें।  जनाब रवि भसीन जी की बातों का संज्ञान लें।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तेरे ख्वाहिशों के शह्र में- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। कुछ टंकण त्रुटियां रह गयी हैं जैसे लफ़्ज़ 'ख्वाहिशों' में ख के नीचे नुक़्ता लगा लें, 'मुझको सफर मिला हैं' में 'सफर' को सफ़र तथा…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post छत पे आने की कहो- ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आपने दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। //है मधुर आवाज़ उसकी और चेहरा खूबसूरत,// ये मिसरा बह्र में नहीं है, चाहें तो इसे यूँ कर सकते हैं : "है मधुर आवाज़ उसकी और चेहरा आफ़रीं,,   …"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"डॉ नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। "अपनी रानाई पे तू मग़रूर है क्या   बेवफ़ाई के लिए मज़बूर है क्या " इस शैर के दोनों मिसरों में कोई रब्त नहीं है, ग़ौर करें। "मजबूर" में नुक़्ता नहीं…"
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब, ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Saturday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"आद0 अमीरुद्दीन साहिब सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कहे आप। इसपर आदरणीय समर साहब की इस्लाह और आपकी चर्चा भी ज्ञानप्रद है। बधाई स्वीकार कीजिये इस बेहतरीन ग़ज़ल पर।"
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post किसे आवाज़ दूँ (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"मुहतरम जनाब रवि भसीन 'शाहिद' साहिब, आदाब। इस उम्दा ग़ज़ल पर शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। "जिस तरफ़ देखूँ है तन्हाई किसे आवाज़ दूँ हर मसर्रत दिल की गहनाई किसे आवाज़ दूँ"  जनाब, "हर मसर्रत दिल की गहनाई"…"
Friday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Dr.Prachi Singh's blog post उम्र आधी कट गई है, उम्र आधी काट लूँगी
"मुहतरमा डॉ० प्राची सिंह जी आदाब, सुन्दर एवं मनोहारी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें।  "उम्र आधी कट गई है, उम्र आधी काट लूँगी"   यहांँ पर दो बार "उम्र" शब्द थोड़ा खटक रहा है, यदि उचित लगे तो इसे यूँ कर के देख सकते…"
Thursday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये दिल से शुक्रिया। "
Jul 7
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी...)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, शानदार ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ साथ ही ग़ज़ल को फीचर ब्लॉग में शामिल होने पर ख़ास मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए। सादर। "
Jul 7

Profile Information

Gender
Male
City State
BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Blog

ग़ज़ल (क्या नसीब है)

2212 /1212 /2212 /12

क्या आरज़ू थी दिल तेरी और क्या नसीब है

चाहा था  टूट कर  जिसे वो अब  रक़ीब  है।

पलकों की छाँव थी जहाँ है ग़म की धूप अब

वो  भी   मेरा  नसीब  था  ये  भी  नसीब  है।

ऐसे  बदल   गये   मेरे   हालात   क्या   कहूँ

अब  चारा-गर  कोई  न  ही  कोई  तबीब है। 

कैसे  मिले  ख़ुशी  हों  भला  दूर  कैसे  ग़म

मुश्किल  कुशा  के  साथ वो  मेरा रक़ीब है।

उसने  बड़े  ही  प्यार  से  बर्बाद  कर …

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Posted on July 6, 2020 at 2:16pm — 11 Comments

ग़ज़ल (जो नज़र से पी रहे हैं )

212 /1212 /2

जो नज़र से पी रहे हैं

बस वही तो जी रहे हैं

ये हमारा रब्त देखो

बिन मिलाए पी रहे हैं

कोई रिन्द भी नहीं हम

बस ख़ुशी में पी रहे हैं

इक हमें नहीं मयस्सर

गो सभी तो पी रहे हैं

क्या पिलाएंगे हमें जो 

तिश्नगी में जी रहे हैं 

वो हमें भी तो पिला दें

जो बड़े सख़ी रहे हैं   

 

बेख़ुदी की ज़िन्दगी है 

बेख़ुदी में पी रहे हैं …

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Posted on June 14, 2020 at 9:00pm — 17 Comments

उफ़ ! क्या किया ये तुम ने ।

उफ़ ! क्या किया ये तुम ने, वफ़ा को भुला दिया,  

उस शख़्स ए बावफ़ा को, कहो क्या सिला दिया।

  

जो ले के जाँ, हथेली पे, हरदम रहा खड़ा, 

तुम ने उसी को, ज़ह्र का, प्याला पिला दिया।

अब क्या भला, किसी पे कोई, जाँ निसार दे, 

जब अपने ख़ूँ ने, ख़ून का, रिश्ता भुला दिया।

गुलशन की जिस ने तेरे, सदा देखभाल की,

उस बाग़बां का तू ने, नशेमन जला दिया।

गर वो मिलेंगे हम से, कभी पूछ लेंगे हम, 

क्यूँ ख़ाक़ में हमारा,…

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Posted on May 26, 2020 at 12:08pm — 17 Comments

ईद कैसी आई है!

ईद कैसी आई है ! ये ईद कैसी आई है !

ख़ुश बशर कोई नहीं, ये ईद कैसी आई है !

जब नमाज़े - ईद ही, न हो, भला फिर ईद क्या,

मिट गये अरमांँ सभी, ये ईद कैसी आई है!

दे रहा कोरोना कितने, ज़ख़्म हर इन्सान को,

सब घरों में क़ैैद हैं, ये ईद कैसी आई है!

गर ख़ुदा नाराज़ हम से है, तो फिर क्या ईद है,

ख़ौफ़ में हर ज़िन्दगी, ये ईद कैसी आई है!

रंज ओ ग़म तारी है सब पे, सब परीशाँ हाल हैं,

फ़िक्र में रोज़ी की सब, ये ईद कैसी आई…

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Posted on May 25, 2020 at 6:00am — 11 Comments

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At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

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