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अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
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अमीरुद्दीन 'अमीर''s Page

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अमीरुद्दीन 'अमीर' posted blog posts
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी .....
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, सुंदर दोहा त्रयी हुई है, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।  "कभी जीत के कहकहे,"  इस विषम चरण का रचना संगठन देखें... कदाचित यह "कभी क़हक़हे जीत के," अथवा "कभी ठहाके जीत के" उचित होगा।"
Thursday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, ख़ाकसार की ग़ज़ल पर आपकी पुर-ख़ुलूस नवाज़िशों का तह-ए-दिल से शुक्रिया जनाब।"
Thursday
Sushil Sarna commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)
"वाह आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब बहुत खूबसूरत गज़ल बनी है सर ।हार्दिक बधाई सर"
Thursday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का मतला कुछ आपत्तियों के बाद मूल रूप से बदल दिया गया है, इसलिए कुछ भर्ती के शब्द आ गये हैं, सानी के लिये आपका सुझाव "रुसवाई के भँवर में जाकर ख़ुद गिरा है वो" बह्र के अनुकूल नहीं है। "गुमाँ" को…"
Thursday
Rachna Bhatia commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार करें। बहुत अधिक तो नहीं जानती फ़िर भी .. मतले में मुझे "कि" और "तो" भर्ती के लगे। //जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो  रुस्वाई के भंवर में तो ख़ुद जा…"
Wednesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)

2212 1211 2212 12जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो रुस्वाई के भंवर में तो ख़ुद जा गिरा है वोअच्छा भला था 'ख़ुल्द' में 'इब्लीस' हो गया झूठी अना की शान को मुन्किर हुआ है वो हद से ज़ियाद: ख़ुद पे भरोसे का ये हुआथूका जो आस्मान पे मुँह पर गिरा है वोमिट्टी जो फेंकी चाँद पे मैला नहीं हुआ करनी पे अपनी ख़ुद ही तो शर्मा रहा है वोथोड़ी सी धूप के लिये था जो रवाँ-दवाँसूरज को ले के दीप दिखाने खड़ा है वोजिस ने किया घमंड वही मिट गया है यूँ ख़ुद अपनी आग में ही फ़ना हो गया है वो उसका शऊर खो गया है आज-कल…See More
Wednesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post नये साल का तुहफ़ा
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, सादर धन्यवाद।"
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post नये साल का तुहफ़ा
"सुन्दर रचना के लिए बधाई आदरणीय..."
Monday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)
"आभार आदरणीय अमीरुद्दीन साहब ।"
Sunday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)
"आदरणीय गणेशजी बाग़ी साहिब आदाब, आपकी और सभी सम्मानित सदस्यों की आपत्ति के बाद मतले को एडिट करने का अनुरोध स्वीकार कर मतले को एडिट करने का प्रयास करता हूँ। सादर।"
Sunday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)
"आदरणीय अमीरुद्दीन साहब, भाई नीलेश के कहे से सहमत होए हुए कहना है कि मतला का कहन बिलकुल ही उचित नही लग रहा और आपके कद के अनुरूप भी नही है । अनुरोध है कि मतला को एडिट कर दें ।"
Sunday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मकर संक्रांति के दोहे - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर अच्छे दोहे रचे हैं आपने हार्दिक बधाई स्वीकार करें।  'आज उत्तरायण हो चले,'    'प्रथम माध स्नान'            इन…"
Jan 14
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)
"बहुत शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सिंह जी। "
Jan 14
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (हँसी में उनकी हमने वो छुपा ख़ंजर नहीं देखा )
"बहुत शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सिंह जी ।"
Jan 14
TEJ VEER SINGH commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (हँसी में उनकी हमने वो छुपा ख़ंजर नहीं देखा )
"हार्दिक बधाई आदरणीय अमीरुददीन "अमीर" साहब जी। बेहतरीन ग़ज़ल कहाँ लेकर ये ख़ाली हाथ मौला मैं चला जाऊँ तेरे दर के सिवा मैंने तो कोई दर नहीं देखा ।"
Jan 14

Profile Information

Gender
Male
City State
BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Blog

ग़ज़ल (तुझे है जीतने की धुन तो ये इक़रार ले पहले)

1222 - 1222 - 1222 - 1222

तुझे  है जीतने  की  धुन तो ये  इक़रार ले पहले

न  हारेगा  कभी भी तू  किसी भी हार  से पहले 

अगर  कुंदन  के जैसा  चाहता है तू चमकना तो

ज़रा शो'लों के दरियासे तू  ख़ुद को तारले पहले 

हवाओं की तरह आज़ाद बहना अच्छा लगता है 

तो परवा छोड़  दुनिया की  ज़रा रफ़्तार ले पहले 

फ़रिश्तों  की तरह  मासूम होना है तेरी ख़्वाहिश

इताअत में तू रब की इस ख़ुदी को मार ले पहले  

तुझे महताब…

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Posted on January 21, 2022 at 3:47pm

ग़ज़ल (क़वाफ़ी चंद और अशआर कहने हैं कई मुझको)

1222 - 1222 - 1222 - 1222 

क़वाफ़ी चंद और अशआर कहने हैं कई मुझको

चुनौती दे रहे हैं चाहने वाले नई मुझको 

ये किसने दिलकी चौखट पर ज़बीं ख़म करके रख दी है 

अक़ीदत की मिली है ये इबारत इक नई मुझको 

चले आओ ख़ुतूत-ओ-फ़ोन से ये दिल न बहलेगा 

कि तुम से रू-ब-रू करनी हैं अब बातें कई मुझको 

हवाओं में घुली है फिर वो ख़ुशबू जानी-पहचानी 

सुनाई दी अभी आवाज़ उसकी वाक़ई मुझको 

तेरी आँखों की रंगत से ही मिलती…

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Posted on January 21, 2022 at 2:15pm

ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)

2212 1211 2212 12

जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो 

रुस्वाई के भंवर में तो ख़ुद जा गिरा है वो

अच्छा भला था 'ख़ुल्द' में 'इब्लीस' हो गया 

झूठी अना की शान को मुन्किर हुआ है वो 

हद से ज़ियाद: ख़ुद पे भरोसे का ये हुआ

थूका जो आस्मान पे मुँह पर गिरा है वो

मिट्टी जो फेंकी चाँद पे मैला नहीं हुआ 

करनी पे अपनी ख़ुद ही तो शर्मा रहा है वो

थोड़ी सी धूप के लिये था जो रवाँ-दवाँ

सूरज को ले के…

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Posted on January 17, 2022 at 11:38am — 9 Comments

ग़ज़ल (हँसी में उनकी हमने वो छुपा ख़ंजर नहीं देखा )

1222 - 1222 - 1222 - 1222 

हँसी में उनकी हमने वो छुपा ख़ंजर नहीं देखा 

हसीं मंज़र ही देखा था पस-ए-मंज़र नहीं देखा 

वो जैसा उनको देखा है कोई दिलबर नहीं देखा 

हसीं तो ख़ूब देखे हैं रुख़-ए-अनवर नहीं देखा 

ज़माने में कहीं तुम सा कोई ख़ुद-सर नहीं देखा 

सितमगर तो कई देखे मगर दिलबर नहीं देखा

वो मेरे ज़ाहिरी ज़ख़्मों को मुझसे पूछते हैं क्या 

दिवानों ने कभी दिल में चुभा नश्तर नहीं देखा 

जो कहते थे…

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Posted on January 13, 2022 at 6:03pm — 6 Comments

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At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

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