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Dimple Sharma
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Saturday
Dimple Sharma commented on Dimple Sharma's blog post दीवार से तस्वीर हटाने के लिए आ
"आदरणीय गुणीजनों आप सभी के सुझावों के अनुसार मैं ग़ज़ल से शेर हटा तो दूं पर मुझे समझ नहीं आ रहा की एडीट कहाँ से करूं अतः या तो इस सिलसिले में आप मेरा मार्गदर्शन करें या फिर मैं ये कर सकती हूँ की जब कभी कहीं ये ग़ज़ल सुनाऊंगी तो अन्त के तीन शेर नहीं…"
Jul 30
Dimple Sharma commented on Dimple Sharma's blog post दीवार से तस्वीर हटाने के लिए आ
"आदरणीय लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'जी नमस्ते,जी बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय आपके मार्गदर्शन और हौसला अफ़ज़ाई के लिए हृदय तल से आभार आपका आदरणीय,जी सुझाव के लिए बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय, आपके सुझावों का आगे भी स्वागत और इन्तजार रहेगा आदरणीय"
Jul 30
Dimple Sharma commented on Dimple Sharma's blog post दीवार से तस्वीर हटाने के लिए आ
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह'कुशक्षत्रप'जी नमस्ते, ग़ज़ल तक आने के लिए और आपके मार्गदर्शन के लिए हृदय तल से आभार आपका आदरणीय, जी जरुर सम्भव क्यूं नहीं आप सभी के सुझावों के अनुसार मैं अभी ये तीनों शेर हटा दें रही हूँ, कृप्या आशीर्वाद और स्नेह…"
Jul 30
Dimple Sharma commented on Dimple Sharma's blog post दीवार से तस्वीर हटाने के लिए आ
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्ते,आपके मार्गदर्शन का हमेशा से ही स्वागत रहा है आदरणीय आप सभी इस विषय के अच्छे जानकार और मझे हुए फनकार हो आपके सुझाव निःसंदेह ही मेरी भलाई के लिए होते हैं इसमें अन्यथा लेने जैसा कुछ नहीं , आपके कहे अनुसार मैं इन दो शेरों को…"
Jul 30
Dimple Sharma commented on सालिक गणवीर's blog post उनके ख़्वाबों पे ख़यालात पे रोना आया.(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्ते, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jul 30
Dimple Sharma commented on आशीष यादव's blog post पानी गिर रहा है
"आदरणीय आशीष यादव जी नमस्ते, बहुत ख़ूब वाह रदिफ़ कमाल ली है आदरणीय आपने खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jul 30
Dimple Sharma commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -दौर वह यारो गया और उसके दीवाने गए
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह'कुशक्षत्रप'जी नमस्ते, वाह बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आदरणीय बधाई स्वीकार करें,8 वाँ शेर बहुत ज्यादा पसंद आया आदरणीय इस शेर पर विशेष दाद ।"
Jul 30
Dimple Sharma commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत'तुरंत'जी नमस्ते, वाह बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आदरणीय खासतौर पर सातवें शेर ने तो जैसे खुद ही वाह करवाई हो , खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jul 30
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dimple Sharma's blog post दीवार से तस्वीर हटाने के लिए आ
"आ. डिम्पल शर्मा जी, सादर अभिवादन । अन्तिम दो अशआरों को छोड़ दें तो बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 30
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dimple Sharma's blog post दीवार से तस्वीर हटाने के लिए आ
"आद0डिंपल शर्मा जी सादर अभिवादन। अच्छा ग़ज़ल का प्रयास है। बधाई स्वीकार कीजिये। सम्भव हो तो अंतिम तीन शैर हटा दीजिये।"
Jul 30
सालिक गणवीर commented on Dimple Sharma's blog post दीवार से तस्वीर हटाने के लिए आ
"मुहतरमा डिंपल शर्मा जीआदाबआपने पूरी  ग़ज़ल बहुत उम्दा कही है सिवाय आखिरी दो अश' आर के. हार्दिक बधाइयाँ स्वीकारें.बेहतर  होता यदि आप   इन्हें एडिट करतींं या हटा ही देतींं.यह एक सुझाव है कृपया  अन्यथा न लें."
Jul 30
Dimple Sharma commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल (यहाँ तनहाइयों में क्या रखा है....)
"आदरणीय रवि भसीन'शाहिद'जी नमस्ते,इस नई जानकारी के लिए बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय, मुझे भी मना ही सही लगता था पर अब आगे से मना की जगह में भी मनअ का ही इस्तेमाल करुंगी आदरणीय, बहुत आभार आपका इस नई जानकारी के लिए।"
Jul 30
Dimple Sharma commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल (यहाँ तनहाइयों में क्या रखा है....)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्ते, वाह वाह वाह बहुत ख़ूब आदरणीय कमाल, ग़ज़ल के तीसरा ,चौथा,छठा और सातवां शेर तो बहुत ही उम्दा हुए हैं बधाई स्वीकार करें आदरणीय, बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है।"
Jul 30
Dimple Sharma commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post मक़ाम ऐसे चाहत में आने लगे हैं (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"आदरणीय रवि भसीन'शाहिद'जी नमस्ते, वाह बहुत ख़ूब आदरणीय, लाजवाब ग़ज़ल हुई है खासतौर पर अन्तिम शेर तो कमाल हुआ है बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jul 30
Dimple Sharma commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post झूलों पर भी रोक लगी -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'जी नमस्ते,आज के ताज़ा हालात पर लिखी आपकी यह ग़ज़ल बहुत ख़ूब हुई है, बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jul 30

Profile Information

Gender
Female
City State
Shillong
Native Place
Shillong
Profession
Poetress
About me
Love writing n cooking

Dimple Sharma's Blog

दीवार से तस्वीर हटाने के लिए आ

221 1221 1221 122

दीवार से तस्वीर हटाने के लिए आ

झगड़ा है तेरा मुझसे जताने के लिए आ/1

तू वैद्य मुहब्बत का है मैं इश्क़ में घायल

चल ज़ख्म पे मरहम ही लगाने के लिए आ/2

पत्थर हुए जाती हूं मैं पत्थर से भी ज्यादा

तू मोम मुझे फिर से बनाने के लिए आ/3

है आईना टूटा हुआ चहरा न दिखेगा

सूरत तेरी आँखों में दिखाने के लिए आ/4

ये बाज़ी यहाँ इश्क़ की मैं हार के बैठी

तू दर्द भरा गीत ही गाने के लिए आ /5

रुसवाई भी होती है मुहब्बत के सफ़र में…

Continue

Posted on July 21, 2020 at 6:00am — 11 Comments

बगैर बादल के आ बरस जा तू इश्क़ की कुछ फुवार कर दे

1212, 212, 122, 12 12, 212, 122

बगैर बादल के आ बरस जा तू इश्क़ की कुछ फुवार कर दे

है एक अर्से से प्यासी धरती बढ़ा ले क़ुर्बत बहार कर दे

बहुत बड़ा है शहर ये दिल्ली यहाँ के चर्चे बहुत सुने हैं

हमें तो अपना ही गांव प्यारा तू लाख इसको सुधार कर दे

बदल रहे हैं घरों के ढांचे सभी के अपने अलग है कमरे

पुराने बर्तन नए हुए हैं तू भी बदल जा कनार कर दे

क़मर से कह दो ठहर के निकले कि दीद उनका अभी हुआ है

नहीं भरा उनसे दिल हमारा ख़ुदा क़मर को बुख़ार कर…

Continue

Posted on June 13, 2020 at 5:30pm — 6 Comments

तू ही तू है

एक नज़्म

अरकान-2212, 2212, 2212

दिल-ए-दरीया आब में तू ही तू है

हर इक लहर-ए-नाब में तू ही तू है

मौसम शगुफ़्ता है मुहब्बत में देखो

लाहौर ते पंजाब में तू ही तू है

हर इक वुज़ू पे हर दफ़ा मांगा तुझे

मेरी दुआ से याब में तू ही तू है

पकड़े हुए हूं आज तक दस्तार को

ख़ुर्शीद में महताब में तू ही तू है

हासिल कहाँ मुझको मेरे महबूब तू

फिर भी मेरे हर ख़्वाब में तू ही तू है

भीगी हुई पलकों का दामन छोड़ कर

बढ़ते हुए सैलाब में तू ही…

Continue

Posted on June 9, 2020 at 7:05pm — 18 Comments

बेख़ौफ़ हम

कहा रूक जा सब ने, बेख़ौफ़ हम
चले गांव जल्दी से बेख़ौफ़ हम

कहीं एक विधवा अकेले खड़ी
खड़े साथ उसके ले बेख़ौफ़ हम

हटा ले ये चादर मेरे शव से तू
जला दे या दफ़ना दे, बेख़ौफ़ हम

अरे क्या कहें साँप हम पे गिरा
डरे थे सभी बस थे, बेख़ौफ़ हम

हमें रेत का घर सरल सा लगा
समन्दर कि लहरों से, बेख़ौफ़ हम

वो पीछे से मारे ,हुनर उनका था
खड़े सामने उनके, बेख़ौफ़ हम

डिम्पल शर्मा
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on June 7, 2020 at 2:36pm — 10 Comments

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