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Dimple Sharma
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Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय नादिर ख़ान साहब आदाब, ख़ूबसूरत पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'साहब आदाब, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय, वैसे तो पूरी ग़ज़ल ही उम्दा हुई है पर आखिरी शेर विशेष बधाई का हकदार हैं बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय, चौथा और आखिरी शेर लाजवाब हुए हैं आदरणीय विशेष बधाई।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय चेतन जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय रचना जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीया,छठा शेर बहुत कमाल हुआ है उस शेर के लिए विशेष बधाई स्वीकार करें।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय सुरेन्द्र जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय नीलेश जी नमस्ते, ग़ज़ल तक आने और हौसला अफजाई करने के लिए हृदय से आभार आपका आदरणीय,आपके ये शब्द बहुत मायने रखते हैं आदरणीय, बहुत शुक्रिया आपका।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय नादिर ख़ान साहब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार आपका आदरणीय।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'जी नमस्ते, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार आपका आदरणीय, मार्गदर्शन और कृपा दृष्टि बनाए रखें।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी नमस्ते, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफजाई के लिए हृदय तल से आभार आपका आदरणीय।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय सुरेन्द्र जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय उस्ताद मोहतरम समय कबीर साहब आदाब चरण स्पर्श, आशीर्वाद और कृपा दृष्टि बनाए रखें।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'जी ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार आपका आदरणीय।"
Saturday
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय दयाराम मैथानी जी ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफजाई के लिए हृदय तल से आभार आपका आदरणीय।"
Saturday

Profile Information

Gender
Female
City State
Shillong
Native Place
Shillong
Profession
Poetress
About me
Love writing n cooking

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मेरे ख़त

221 2122 221 2122

ये मामला है दिल का फैला ले पर मेरे ख़त/1

जाना पड़ेगा तुझको उड़कर शहर मेरे ख़त

इस बार लिखना तय था वरना तो जाने कब से/2

आ जा रहे थे ख़्वाबों में उनके घर मेरे ख़त

अनपढ़ गंवार पागल थी इश्क़ क्या ही करती/3

चूल्हा जला रही थी वो फाड़ कर मेरे ख़त

सर्दी की रात थी जब उनको क़मर कहा था/4

उड़ कर के खुद गए थे उनके शहर मेरे ख़त

होठों की लाली होती थी जिन ख़तों पे पहले/5

अब रद्दी बन रहे थे बस उनके घर मेरे ख़त

इनकार लिखना…

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Posted on September 6, 2020 at 3:07pm — 10 Comments

बदल रहा है तेरा शह्र पैरहन मेरा (ग़ज़ल)

1212 1122 1212 22  

बदल रहा है तेरा शह्र पैरहन मेरा/1

ख़ुदारा खैर है बदला नहीं है तन मेरा

तेरा यूँ ख्वाब-ओ-ख्यालों में आना जाना/2

रखेगा कौन बता यार यूँ जतन मेरा

तू लड़ मगर तोड़ मत ये आईना इकलौता/3

जो टूटा कौन निहारेगा फिर बदन मेरा

मुझे ख़बर हुई है तेरे आने की जबसे/4

महक रहा है तेरे ख्याल से बदन मेरा

था खुबसूरत मेरा भी एक आशियाना सुन/5

उजाड़ा है मेरे अपनों ने ही चमन मेरा

जो इन्तजार मेरी मौत का सभी को था/6

तो लो खरीद लिया…

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Posted on September 2, 2020 at 4:00pm — 7 Comments

वक़्त लगता है

221 2121 1221 212

सुन इश्क जादू-टोने में कुछ वक़्त लगता है/1

ये प्यार-व्यार होने में कुछ वक़्त लगता है

मैं चाहती हूँ रोना बड़ी जोर से मगर/2

दिल खोल कर के रोने में कुछ वक़्त लगता है

ये सर्द रातें दर्द बयां करती है मेरा*

अंधेरे कमरें में मैंने पैकर का घर देखा/3

तन्हा अकेले सोने में कुछ वक़्त लगता है

पड़ जाएं हम किसी के यूं ही इश्क़ में कैसे/4

हमको किसी का होने में कुछ वक़्त लगता है

हम तो ज़मीं पे सोते हैं तारों की छांव में/5

समझो…

Continue

Posted on August 18, 2020 at 3:04pm — 7 Comments

दीवार से तस्वीर हटाने के लिए आ

221 1221 1221 122

दीवार से तस्वीर हटाने के लिए आ

झगड़ा है तेरा मुझसे जताने के लिए आ/1

तू वैद्य मुहब्बत का है मैं इश्क़ में घायल

चल ज़ख्म पे मरहम ही लगाने के लिए आ/2

पत्थर हुए जाती हूं मैं पत्थर से भी ज्यादा

तू मोम मुझे फिर से बनाने के लिए आ/3

है आईना टूटा हुआ चहरा न दिखेगा

सूरत तेरी आँखों में दिखाने के लिए आ/4

ये बाज़ी यहाँ इश्क़ की मैं हार के बैठी

तू दर्द भरा गीत ही गाने के लिए आ /5

रुसवाई भी होती है मुहब्बत के सफ़र में…

Continue

Posted on July 21, 2020 at 6:00am — 11 Comments

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