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Chetan Prakash
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  • आशीष यादव
 

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Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदाब, संजय शुक्ल जी, प्रस्तुति अच्छी हुई किंतु ग़ज़ल में शे'रों के संख्या बल के होते शेरियत क़मजोर पड़ गयी है, ऐसा प्रतीत हुआ! आदरणीय समर कबीर साहब की राय का इस बिन्दु पर मुझे इन्तज़ार रहेगा ! शे'र न0. 10 का ऊला थोड़ा संशोधन चाहता है!…"
3 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदाब, लक्ष्मण सिंह मुसाफ़िर खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार कीजिये! अंतिम शे'र के सानी में, 'चल' प्रवाह को रोकता सा लगा! कदाचित 'बस' अच्छा विकल्प है, देखिएगा! सादर  ! "
4 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आभार, नवीन जी आपने मेरी ग़ज़ल का संज्ञान लिया! किन्तु चौथा शे'र आप समझ नहीं पाये, खेद है! वस्तुत: उक्त शेर अगानिस्तान में आतंकी सरकार के दमन और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर कहा गया है, जिस पर सारी विश्व बिरादरी उसको आगाह कर रही है, ले किन…"
4 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
" नमस्कार नवीन जी, ग़ज़ल  हुई  है, बधाई स्वीकार करें।  किन्तु मतला  पुन: देखे ऊला  में रदीफ और सानी ' गुजरे  है  ( 221 ) ज़माने में ( 1221 ) बहुत इम्ति( 1221  हाँ से हम ( 212 ) , बह्र भटक गयी है !…"
5 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"फिलहाल ग़मज़दा हैं कहें क्या खिजां से हम। क़म्बख्त साँस  उखड़ा है झूले जहाँ  से हम ।।  चल  छोड़  यार  साथ  चलें इस जहाँ से हम । कुछ होंसला करें अभी चल कर यहाँ से हम ।। होती झिझक बहुत हमें कहते कहाँ से हम । …"
6 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आशीष भाई, भुजंग प्रयात छंद पर मेरी प्रविष्टि पुनः देखें और फिर  अपनी मीमांसा का अवलोकन  कर बताएं, क्या आपकी आलोचना  सही थी  !"
Tuesday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
" आशीष भाई, ' नदी रास्ता बन गई है' अब तो रास्ता ठीक है अथवा नहीं, बताइयेगा, जरूर !"
Tuesday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"नमन , आदरणीया, प्रस्तुति आपको प्रशंसनीय लगी , एतद्वारा आपका आभार व्यक्त  करता  हूँ !"
Tuesday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण सिंह मुसाफिर आपने मेरी प्रस्तुति को इस योग्य समझा कि उसका  संज्ञान लिया जाए, इस  हेतु आपका  अशेष आभार  !"
Tuesday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
" विकीपीडिया की जानकारी, भाई  आशीष यादव  अंतिम  नहीं है, और न ही प्रमाणिक है ! इसके  अतिरिक्त भाई संदर्भ से काटकर  / वाक्य ( चरण  ) से  अलग कर  आप  'रास्ता को पढ़ रहे हैं, इस  से भ्रम …"
Tuesday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय, अशोक कुमार रक्ताले, कृपया देखें! आदरणीय सौरभ साहब का तुकांत, जहाँ, " लिखेंगे सदा छंद, होगी सुभीता / दिखेगा तभी पद्य का मंच जीता " कृपया अब मेरी प्रस्तुति पर अपनी मीमांसा देखें! "
Tuesday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"नमस्कार, अशोक कुमार रक्ताले साहब, आपकी सारगर्भित आलोचना हेतु आपका आभारी हूँ किन्तु 'रास्ता' को कुल चरण में पढ़ना कदाचित श्रेयस्कर होता! सादर"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आशीष  भाई, मनमानी नियमों की व्याख्या से बचा जाना चाहिए, यह बुरी आदत है, जो सामने काव्य उसकी समीक्षा शास्त्रानुसार कीजिये और उदाहरण देकर रचयिता को कृतार्थ कीजिये, यही आलोचना का सर्वमान्य सिद्धांत है! भाषा काव्य की हो या गद्य की, निर्माण वर्ण पर…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय  भाई,  आशीष यादव,  आभार  ! आपको प्रस्तुति  अच्छी लगी ! परन्तु आपकी शिकायत निराधार  हैं ! भुजंग प्रयास छंद  की सर्जना  यमाता  यमाता यमाता यमाता पर वर्णिक  आधार  पर होती  है ,…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"नमन, आदरणीय, समर कबीर साहब, प्रस्तुति निर्दोष, बहुत सुन्दर और उद्धरणीय बन पड़ी है! बधाई स्वीकार करें! सादर...!  है"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब, आशीष यादव, "बुरे वक़्त में" संशोधन होना चाहिए, देखिएगा! शेष तो आदरणीय सौरभ बता ही चुके हैं! प्रस्तुति वास्तव में प्रशंसनीय है, बधाई स्वीकार करें!  "
Sunday

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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ग़ज़ल

1212     1122     1212     22 / 112

मेरे  अपनों  का  ही खंजर मेरी तलाश में है ।

जिन्हें बनाया था अफसर मेरी तलाश में है ।।

जड़ों को सींच रहा हूँ शुरू से ओ बी ओ की,

नये  आए हैं  वो  चाकर  मेरी तलाश  में हैं ।

जताते झूूठा वो हक़ जो ग़ज़ल की शोहरत पर,

उन्हीं  के  हाथ  का  पत्थर  मेरी  तलाश में है ।

बहुत गुमान है उनको तो जन्म के शहर का,

नगर का हूँ  मैं तो रहबर  मेरी  तलाश  में हैं ।

जहाँ में सच…

Continue

Posted on August 24, 2021 at 7:00pm — 5 Comments

ग़ज़ल

रहगुज़र को मेरी कारवाँ दे गया....

212     212     212     212

रहगुज़र  को  मेरी कारवाँ  दे गया

वो खुदी  को अभी पासवाँ दे गया

मुफलिसी वो बुरा ख्वाब थी ज़िन्दगी 

था खुदा जात वो कहकशाँ  दे  गया

आँख भर आए है याद कर के उसे

वो खुदा  था मुझे  बागवाँ  दे गया

ज़िन्दगी  को रज़ा की जबाँ दे गया

रास्ता  एक  था  दो  जहाँ  दे गया

जो बुरा ख्वाब  होता मुझे नींद में

वो बदल  कर नई दास्ताँ  दे…

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Posted on August 7, 2021 at 6:00pm

ग़ज़ल

2122     1212    22 / 112

आज  सोया है शहर घर कर के ! 

खूब  रोया  खुदा  महर  कर के  !!

क्या बुरा हो गया  सनम मुझ से

देखता कब है वो नज़र कर के  !

ज़हरीला बन गया हरेक रिश्ता याँ 

खत्म हो हर अजाब मर कर के  !

हम हैं मारे उसी की बेरुखी के

जिसको देखा नज़र वो भर कर के !

कोई है बात जो लगी दिल को

मिलता कोई नहीं खबर  कर के !

क्या करू मिल के ज़िन्दगी से मैं

खौलता  खून  है …

Continue

Posted on August 3, 2021 at 12:46am — 2 Comments

वो बेकार है

  1212     1122     1212      22 / 112

 तमाम उम्र सहेजी मगर वो बेकार है 

 अजीब बात है शाइर डगर वो बेकार है

सुहाने चाँद की रातों सफर वो बेकार है

लो अब कहूँ तो कहूँ क्या असर वो बेकार है

बिना किताब बिना बिम्ब काव्य की सर्जना 

जो खोलता है मआनी नगर वो बेकार है

नयी - नयी है ये दुल्हन बहार सावनी अब

नया चलन है सो सहवास घर वो बेकार है 

हमारे गुरू जी अभी सुन बहुत बड़ी जीत हैं

हवा  चहक  तो  रही…

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Posted on July 27, 2021 at 8:30am

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At 6:35am on July 22, 2021, रणवीर सिंह 'अनुपम' said…
आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे।

निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है।

जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो
(कारण-नवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

कृतघ्न पक्के लोग
(कारण-आरंभ में जगण "कृतघ्न"आ रहा है, जो नहीं होना चाहिए)

कर रहे बस भोग
(कारण-एक मात्राभार कम है, साथ ही पाँचवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

न हों कभी बदनाम
(कारण-पहली मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

विद्या  हमें  सिखाती है,
(कारण-13 मात्राओं की जगह 14 मात्राएँ हैं, जो नहीं होनी चाहिए)

कर अन्याय प्रतिकार
(कारण-11 की जगह 12 मात्राएँ हैं जो नहीं होनी चाहिए)
At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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