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Chetan Prakash
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Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"तरही ग़ज़ल  : 221     2121     1221    212 बाक़ी न दुख कोई न वो उसका सवाल हो वो मेरा जाँनिसार सनम अब तो निहाल हो  वो एक दिन की वस्ल कहीं पर मिसाल हो हमराज़ दिलनशीं  भी हो  यारा कमाल…"
Thursday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 139 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद  : दिखता नहीं कुछ भी शहर  है, पड़ी प्रदूषण मार   गैसों  का  भण्डार  अब  हवा, बनी धुंध सरकार  छाया  अँधेरा  चहुँओर है, सुबह   खो   गई  धूप  धकेलते हैं…"
Nov 19
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-145
"दिवास्वप्न......एक ग़ज़ल  122     122     122    122 बह्र ए मुतकारिब मुसम्मन सालिम कवायद उन्होंने वो की थी वफ़ा में हैं करते जो तामीर  मंज़िल हवा में दुराग्रह से वो मुक्त कब हो सके…"
Nov 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"सुना जो नहीं वो अलम देखते हैं ख़ुदा या तिरा हम क़रम देखते हैं ख़ुदा भी ग़रीबों का हमदम नहीं है मुसीबत के आलम वो ग़म देखते हैं फ़साना खुशी बन गई अब हमारी  सनम ज़िन्दगी का वहम देखते हैं जहाँ आदमी का भरोसा न कुछ है कोई बादशाही  हरम देखते…"
Oct 28
Chetan Prakash commented on Manan Kumar singh's blog post एडमिशन(लघुकथा)
"मुझे आश्चर्य है, आप अपने मन / मस्तिष्क में बसे विकृत सोच के रहते उच्चतम शिक्षा व्यवस्था का कपोल- कल्पित मनघड़ंत घिनौना चेहरा चित्रित कर रहे हैं और, वह भी बिना किसी हिचक और संकोच के! और ये दावा भी करते हैं कि आप घिनौने तथाकथित सत्य के दृष्टा है!…"
Oct 22
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 138 in the group चित्र से काव्य तक
"गीतिका छंदावली  दीप.. खुशियों के जलाएँ घर सभी जगमग करें । हम.. अँधेरे ..को भगायें दर ब दर उस को करें ।। दीप... की ...लड़ियाँ ..बनायें हम मुँडेरों पर धरें  । हम ..पड़ौसी ..को बुलायें और स्वागत घर करें ।। छोड़.. देवें स्वार्थपरता पीर…"
Oct 22
Chetan Prakash commented on Manan Kumar singh's blog post एडमिशन(लघुकथा)
"आदाब,  भाई  मनन कुमार सिंह,  आपकी लघुकथा  'एडमिशन ' पढ़कर  घोर निराशा हुई । आखिर आप  कौन  सी  दुनिया  में जीते हैं, अथवा मानसिक विकृति के शिकार हैं।  वास्तव  में शिक्षा व्यवस्था…"
Oct 22
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-144
"दोहा-छंद  तिमिर छोड़ अब दीजिए, चलें उजाले छोर ।  मित्रता न तम की भली, दीप जलें हर ओर ।। जीत सत्य की झूठ पर, होती..........बारम्बार  । अंधकार सदैव क्षणिक, सच की जय जय कार।। भ्रमित हुआ मानव जगत, मानस... होता द्वन्द  । माँ सीता…"
Oct 15
Mahendra Kumar commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में
"आदरणीय चेतन जी, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। आदरणीय समर कबीर सर की इस्लाह बहुत अच्छी है। आपको उसके के अनुसार अपनी ग़ज़ल में परिवर्तन कर लेना चाहिए था जो कि आपने नहीं किया। ख़ैर रचना पर अन्तिम निर्णय आप ही का रहेगा। टिप्पणियाँ…"
Oct 13
Mahendra Kumar commented on Chetan Prakash's blog post दिल से अपने हमें गिला है ये
"आदरणीय चेतन जी, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है। पिछले तरही मुशायरे में आपसे जो बातें आदरणीय समर कबीर सर ने कही थीं, कृपया उनका गम्भीरता से पालन करें। अच्छी ग़ज़लें कहने के लिए अच्छी ग़ज़लें पढ़ना बेहद ज़रूरी है। ढेरों शुभकामनाएँ। सादर।"
Oct 13
Chetan Prakash posted a blog post

दिल से अपने हमें गिला है ये

2122   1212    22खुद ब खुद हो गया जुदा है येदिल हमारा तो मनचला है येगुम है दिल ये किसी पहेली मेंऔर कई दिन से सिलसिला है येज़िन्दगी का कोई सबूत नहींबस धड़कता सा हादसा है येबात करता नहीं कुछिक दिन से" दिल से अपने हमें गिला है ये "है समन्दर भी ये हरा अब तोचांद पूनम तो ज़लज़ला है ये बदहवासी रही है हावी दिलभागता बेहिसी मरा है येआखिरी दांव चल चुका 'चेतन' हद से बाहर है दिल दग़ा है येमौलिक व अप्रकाशितप्रोफ. चेतन प्रकाश 'चेतन'See More
Oct 8
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post दशहरा पर्व पर कुछ दोहे. . . .
"नमस्कार,  भाई  सुशील सरना, सभी  दोहे  अच्छे  लगे, किन्तु  पाँचवे  दोहे के  दूसरे चरण में प्रवाह बाधित हुआ है, इसे"  चला चले  लंकेश "  यदि आप  कर लें, दोष दूर  हो जाएगा …"
Oct 5
Chetan Prakash commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- दर्द है तो कभी दवा है ये
"पुनश्च  : ग़ज़ल कहने के  _कौशल  ! शुभ प्रभात  !"
Oct 1
Chetan Prakash commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- दर्द है तो कभी दवा है ये
"आ. नीलेश शेवगांवकर साहब,  बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने। विशेषत: यह शे'र मुझे अच्छा लगा, अपनी ताक़त को वो समझता है, हुस्न के साथ  मस अला  हे  ये "। हाँ, लेकिन जनाब  एक  शिक़ायत भी है, ओ बी ओ के मुशायरे में…"
Oct 1
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदाब, शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी,  अपनी ही मातृभाषा के प्रतिकूलगामी  जयचंदों की घृणित  प्रवृति और  नकारात्मक  सोच  के होते भी आशा का संचार करती  लघुकथा के  लिए आप  प्रशंसा के पात्र हैं ! रचना किसी विधा…"
Sep 30
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदाब,  तस्दीक अहमद खान साहब, भारतीय रेलवे  के कुसमय प्रबंधन पर चुटीला व्यंग्य कसती अच्छी कही आपने । हाँ, हिन्दी भाषा के जनमानस के  समीप  शब्दों  जैसे  पूछताछ के स्थान पर 'इन्क्वायरी विन्डो', रेलगाड़ी की …"
Sep 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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दिल से अपने हमें गिला है ये

2122   1212    22

खुद ब खुद हो गया जुदा है ये

दिल हमारा तो मनचला है ये

गुम है दिल ये किसी पहेली में

और कई दिन से सिलसिला है ये

ज़िन्दगी का कोई सबूत नहीं

बस धड़कता सा हादसा है ये

बात करता नहीं कुछिक दिन से

" दिल से अपने हमें गिला है ये "

है समन्दर भी ये हरा अब तो

चांद पूनम तो ज़लज़ला है ये 

बदहवासी रही है हावी दिल

भागता बेहिसी मरा है ये

आखिरी दांव…

Continue

Posted on October 5, 2022 at 5:30pm — 1 Comment

ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में

1212     1122     1212     22 / 122

 

बहुत  सी देर लगी आग दिल  लगाने  में 

उन्होंने खेल जो खेला उसे  उसे मिटाने में 

अभी तो आप नहीं भूल पाए प्यार सनम !

लगेगा वक़्त अभी आग वो  बुझाने  में 

वो रात कल भी तो गुज़री है भारी मुझ पर जाँ 

 अभी कोशिश मिरी बस ज़िन्दगी बनाने में

तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ा हमें रुलाकर भी

कि शम'अ बुझ अभी जाती है आज़माने…

Continue

Posted on September 19, 2022 at 3:30pm — 5 Comments

ग़ज़ल: : हिन्दी

1222     1222     1222     1222

बह्रे  हजज़  मुसम्मन सालिम 

जो बोला है  वही लिखती मेरा सम्मान है हिन्दी 

है बिन्दी माँ के  माथे सी पिता का मान है हिन्दी 

तुम्हारी माँ अग्रजा मम शिखा का मान है हिन्दी

है सरकारी वो रोटी आज भोजन आन है हिन्दी

खड़ी बोली है हरियाणा कि  दिल्ली प्रान है हिन्दी 

न है अनजान  कोई उससे मेरी शान है हिन्दी 

कहूँ क्या आपसे साथी स्वयं भण्डार भाषा है

वो सुमधुर गीत फिल्मों के बड़ा…

Continue

Posted on September 16, 2022 at 7:30pm

गज़ल

ग़ज़ल

1222 1222 1222 122

रहे जिससे मरासिम थे वही अखबार निकला

मुसीबत है अभी जीवन निरा श्रृंगार निकला

शबे ग़म दिल मिरा टूटा रही वो आँख रोती

कई दिन हो गये सूरज न वो संसार निकला

अँधेरे अधखुली आँखों मुझे अब देखते हैं

बुरा हो इश्क़ तेरा यार वो अख़बार निकला

न कोई दोस्त है दुनिया न ही हमदम यहाँ है

जिसे गलहार समझा था अभी खूँख़्वार निकला

न हमजोली बचा है आज तो…

Continue

Posted on September 12, 2022 at 8:30pm

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At 6:35am on July 22, 2021, रणवीर सिंह 'अनुपम' said…
आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे।

निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है।

जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो
(कारण-नवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

कृतघ्न पक्के लोग
(कारण-आरंभ में जगण "कृतघ्न"आ रहा है, जो नहीं होना चाहिए)

कर रहे बस भोग
(कारण-एक मात्राभार कम है, साथ ही पाँचवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

न हों कभी बदनाम
(कारण-पहली मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

विद्या  हमें  सिखाती है,
(कारण-13 मात्राओं की जगह 14 मात्राएँ हैं, जो नहीं होनी चाहिए)

कर अन्याय प्रतिकार
(कारण-11 की जगह 12 मात्राएँ हैं जो नहीं होनी चाहिए)
At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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