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Chetan Prakash
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Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 120 in the group चित्र से काव्य तक
" नमस्कार,  भाई  लक्ष्मण  सिंह  धामी  मुसाफिर  साहब,  " चाहते होना जरा से दूर कैस तुम अजर , अशुद्ध  है  ! और, गीतिका  मात्रिक  छ॔द है, अत: व्याप्त  चार मात्राएं है, न कि ( 21 ) तीन…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post लघुकथा-- नहले पर दहला
"आ. भाई चेतन जी, अच्छी लघुकथा हुई है । हार्दिक बधाई।"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 120 in the group चित्र से काव्य तक
"भाई, लक्ष्मण सिंह धामी, मुसाफिर, गीतिका छ॔द मैं रचता रहा हूँ, अप्रैल  में भी ओ बी ओ मे गीतिका  छंद में मेरी प्रस्तुति  आप देख सकते  हैं ! लेकिन  मैंने चित्रोक्त  विषय  पर गीत  रचा  है, जिस का…"
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 120 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय, नमन ! निम्न  गीत मंच को समर्पित कर रहा हूँ : खतरा कोई नहीं माँ यहाँ है  ! रहतवारे दोस्त हम जंगल  के हैं  कि माँ प्रकृति की रक्षा में रहते हैं  मास्क जंगल का पत्ता पत्ता है, आक्सीजन बसे स्वयं वायु में है खतरा कोई…"
Saturday
Chetan Prakash commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post रश्मियाँ दिखतीं नहीं - ग़ज़ल
"बंधुवर, बसंत कुमार शर्मा जी अच्छी हिंदी ग़ज़ल हुई है! 'तलहटी में मुझे 'ये' रश्मियाँ दिखती नहीं ' यहाँ 'ये' के स्थान पर, सर्वनाम 'वो' होना चाहिए ! सार्थक ग़ज़ल हेतु बधाई, भाई! "
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126
" भले ( 3 ) स्वार्थ ( 4 ) वश ( 2 ) साथ  ( 3 ) दे ( 2)= 3 + 4 + 2 + 3 + 2 = 14, आदरणीय  भाई  लक्ष्मण सिंह  धामी 'मुसाफिर' देखें !"
Friday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126
"गीत एक मात्रिक छन्द है, और हर गीत का अपना विधान होता है, जो प्रदत अथवा रचयिता द्वारा चुने हुए विषय पर लिखा जाता है!  "
Apr 15
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126
"प्रिय  भाई, आज़ाद तमाम, विषय  का निर्वहन  आखिर किस विधा में हुआ है,  आप  चिन्हित कर पाते तो, आप की  प्रस्तुति का सही मूल्यांकन  हो पाता, बंधु  ! साभार  !"
Apr 15
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126
" भले स्वार्थवश साथ दें,  चौदह मात्राओं कि है, प्रथम चरण, आदरणीय भाई, लक्ष्मण धामी ' मुसाफ़िर' साहब  !  दोहों का आप का, अंततोगत्वा संतोषजनक कहा जाएगा! बधाई, बंधु! "
Apr 15
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126
" गीत.... कलम आज सच की जय बोल  !  कलम आज सच की जय बोल  !  विपदा आती सामर्थ्यवान पर कान्हा हों या कि श्री राम कोरोना फिर परखे हम को धैर्य खोओ न करो कोहराम  !  विश्वास अडिग ईश हमारा जीतेंगे रण भारती बोल …"
Apr 15
Chetan Prakash posted a blog post

लघुकथा-- नहले पर दहला

" कूड़े मल इस दुकान को मैंने खरीद लिया है, अब से एक हफ़्ते में खाली कर देना"" क्या.... क्या बकवास कर ती हो, मैं कई वर्ष पुराना किरायेदार हूँ, मेरी रोज़ी - रोटी चलती है, यहाँ से! बिल्कुल खाली नहीं करूँगा" ! कूड़े मल कस्बे का बड़ा किराना व्यापारी था! बूढ़े, कमज़ोर राम आसरे का मूल किरायेदार था जिसको उसने किराया देना बंद कर दिया था! हारकर राम आसरे ने दबंग, झगड़ालू औरत सुनहरी देवी को आधी कीमत अग्रिम लेकर पावर आफ अटार्नी कर दी थी! कूड़े मल अब परेशान था! भागा-भागा अपने वकील साहब के पास पहुँचा, सारा…See More
Apr 11
Chetan Prakash posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22/ 112  भारती धर्म  अपना क़द करे हैं !माँ की खायी कसम न मद करे हैं !तीरगी को हटाया जाँ हमी ने,रघुवंशी  हम उजालों क़द  करे है !मोमबत्ती भी जिनसे जल न सकी,सूरज  होने का दावा ज़द करे  हैं !जाने  क्या वो अँधेरों  के  हामी वरिष्ठों के है अदु वो हद करे  हैं !सावन  अंधे जुड़ाव  हो  कैसे ?है  रतौंधी  उन्हें  अहद  करे हैं !'चेतन' तूफाँ उड़े बदन हल्के,न दिमाग आला है तो नद करे हैं !मौलिक व अप्रकाशित See More
Apr 7
Chetan Prakash commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (किसी की याद में...)
" आदाब, अमीर साहब, आप ठीक कह रहे हैं, अलिफ वस्ल दोहरा है! आभार! "
Apr 6
Chetan Prakash commented on Sadhvi Saini's blog post मेरे किरदार पर धब्बा नही था
"आदाब, 'अमीर' साहब, मकते के सानी का तक्तीअ , 'अमीर +' अब , अमीरब ( 1212) इश्क़ ( 21 ) +में खुद (  22 ) को ज (11 ) ला के (22 ) देख ते हैं ( 2122 ) होता है, आभार  ! "
Apr 6
Chetan Prakash commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (किसी की याद में...)
"आदाब, कृपया, मकते की बह्र "'अमीर' अब इश्क़ में ख़ुद को जला के देखते हैं," देखें !"
Apr 6
Chetan Prakash commented on विनय कुमार's blog post संवेदना--लघुकथा
"भाई, विनय कुमार लघुकथा कथा  तत्व  में अद्भुत  कसावट  के होते  कथ्य  के उल्लेखनीय  निर्वहन  के कारण  से ही 'लघुकथाकार कही जाती ही है, कृपया  इस  कथन के संदर्भ  अपनी प्रस्तुति पर…"
Apr 4

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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लघुकथा-- नहले पर दहला

" कूड़े मल इस दुकान को मैंने खरीद लिया है, अब से एक हफ़्ते में खाली कर देना"

" क्या.... क्या बकवास कर ती हो, मैं कई वर्ष पुराना किरायेदार हूँ, मेरी रोज़ी - रोटी चलती है, यहाँ से! बिल्कुल खाली नहीं करूँगा" ! कूड़े मल कस्बे का बड़ा किराना व्यापारी था! बूढ़े, कमज़ोर राम आसरे का मूल किरायेदार था जिसको उसने किराया देना बंद कर दिया था! हारकर राम आसरे ने दबंग, झगड़ालू औरत सुनहरी देवी को आधी कीमत अग्रिम लेकर पावर आफ अटार्नी कर दी थी! 

कूड़े मल अब परेशान था! भागा-भागा अपने वकील साहब के…

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Posted on April 11, 2021 at 4:00am — 1 Comment

ग़ज़ल

2122    1212    22/ 112

  

भारती धर्म  अपना क़द करे हैं !

माँ की खायी कसम न मद करे हैं !

तीरगी को हटाया जाँ हमी ने,

रघुवंशी  हम उजालों क़द  करे है !

मोमबत्ती भी जिनसे जल न सकी,

सूरज  होने का दावा ज़द करे  हैं !

जाने  क्या वो अँधेरों  के  हामी 

वरिष्ठों के है अदु वो हद करे  हैं !

सावन  अंधे जुड़ाव  हो  कैसे ?

है  रतौंधी  उन्हें  अहद  करे…

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Posted on April 7, 2021 at 9:30am

गीतिका छंद

दूर तक फैला हुआ है, राज सम्यक शान्ति ।

हूर जीवन - धौंकनी है, गूँजता वन शान्ति ।।

नीर सूखा नालियों का, आँख ज्यौं पानी नही ।

लाज जैसे मर गयी हो, आजमा जीवन कहीं ।।

एक चुप पसरा हुआ है, पर्वतों से घाट तक ।

देखिय़े तट सखिविहीना, कृष्ण-राधा ठाठ तक ।।

ज़िन्दगी यदि मर रही है जग, मारता मन आज मद ।

आदमी रहता यहाँ खुश, मन प्रकृति वन मौज- मद ।।

गाँव की शालीनता मिल जायगी क्या शहर में ।

हैं खुशी छोटी मगर सुख,…

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Posted on March 22, 2021 at 12:00am

गीत

उतरा है मधु मास धरा पर

हर शय पर मस्ती छाई है !

जन गण के तन मन सुरा घुली

गुनगुनी धूप की चोट लगी

कली खुल, वन प्रसफुटित हुई,

मुस्काय बेला चमेली है !

उतरा है मधुमास धरा पर

हर शय पर मस्ती छाई है !!

कमल खिले हैं सरोवरों मेंं

मौज करे हम नावों में

मगन चिड़िया झील के तन हैं

वर बसन्त, प्रकृति मुस्काई है !

उतरा है मधुमास धरा पर

हर शय  पर मस्ती  छाई है !!

बाण चलाया कामदेव ने

घायल चम्पा गुलमोहर…

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Posted on March 5, 2021 at 1:30am — 3 Comments

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At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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