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Chetan Prakash
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Chetan Prakash commented on सालिक गणवीर's blog post होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदाब सालिक गणवीर भाई ! ग़ज़ल कुल मिलाकर अच्छी लगी, बधाई स्वीकार करे। परन्तु मकता कहीं मन मे खटकता रहा, जहाँ आपने बेवजह की मात्रा बढ़ाकर बेवजाःह कर मात्रा भार ही पूरा किया। लेकिन लय जाती रही । साभार !"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post नई सुबह
"आ. भाई चेतन प्रकाश जी, सादर अभिवादन । वर्तमान परिप्रेक्ष में अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 9
Chetan Prakash posted a blog post

नई सुबह

नई सुबह का इन्तिज़ार मुझे भी है..... काले पीले पत्ते पेड़ों पर सूखगए हैं, किसी नमी आँखों में पानी नहीं है हो गयी हैं निष्ठुर पीतल सी ! नई सुबह क्या बेहतर होगी प्रश्न खड़ा है, मेरे सम्मुख नये साल का मैं लिखूँ क्या आमुख.......? हर दिन एक नया दिन होता है कल से आज सदा बेहतर होता है निर्विवाद यह उक्ति अब तो शरमाई सी अलग खड़ी है......! नई सुबह का इन्तिज़ार भी करना बेमानी है, यारो ! परिवेश जब इतना अंधकार मय है पौ फटने पर नहीं बोली हैं चिड़िया कोहरा-पाला नहीं छँटा है..... सूरज भी नींद में डूबा है.....…See More
Jan 8
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post भूल मन पीड़ा विगत की गा रहा है - लक्ष्मण धामी'मुसाफिर' (गजल)
"साफ सुथऱी दोस्त धामी ये ग़ज़ल है शेऱ नम्बर दो मुझे 'झटका' रहा है । आँख जब आँसू गिराने को विवश थी, ऊला मिसरा यही बेहतर है, झराने जैसी क्रिया होती ही नहीं, बंधुवर, 'धामी' !"
Jan 1
Chetan Prakash commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post नन्हा गुलाब कह रहा है (कविता)
"नव वर्ष मंगलमय हो, आदरेया ! गीत हृदय से निकलता है, कवि का सहज स्वाभाविक आल्हाद अथवा पीर की रुदावली है! मात्र लघु और दीर्घ स्वरों की गणना नहीं ! अत: गीत में भाव स्वयं बहता है !"
Jan 1
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"आदरणीया, लघुकथा का संदेश मात्र संकेत होता है, उसकी व्याख्या नहीं । खी-खी खूंकू और करिबे करे..... दो अलग बोलियां हैं। संवाद की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह हैं और अन्ततोगत्वा लघुकथा के यथार्थ को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं।"
Dec 30, 2020
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post चोरी करता है - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदाब, भाई, लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर, मुझे आप की, रदीफ़, चोरी करता है, कही गयी ग़ज़ल ने बहुत निराश किया  ! ग़ज़ल में कुछ भी सकारात्मक नहीं है! सो, भाई, ग़ज़ल, क्षमा करें, आपकी सामर्थ्य के साथ बिलकुल न्याय नहीं करती, न भाव के स्तर और शिल्प के स्तर…"
Dec 17, 2020
Chetan Prakash commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदाब, मोहतरमा रचना ' निर्मल,  ग़ज़ल हुई , ज़ाहिर है बेहतर हो सकती थी ! ' तस्बीह ,  कदाचित, श्री जा, (२२१ ) नहीं होता!  पियाली, "
Dec 12, 2020
Chetan Prakash commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदाब, मोहतरमा रचना ' निर्मल' जी,  ग़ज़ल हुई , ज़ाहिर है बेहतर हो सकती थी ! ' तस्बीह ,  कदाचित, श्री जा, (२२१ ) नहीं होता!  पियाली,  भी काफिया जॅचा नहीं! और  एक ही काफिया' खाली की आवृत्ति भी उचित नहीं लगी,…"
Dec 12, 2020
Chetan Prakash commented on amita tiwari's blog post थाली खाली लघु -कथा
"आदरणीया अमिता तिवारी जी, सादर नमन ! आपकी लघुकथा कथ्य के प्रस्तुतिकरण और गठन की दृष्टि से प्रशंसनीय प्रस्तुति है, आदरेया ! लघुकथा, जहाँ तक मैं समझ पाया, सहृदया, हमारे - आपके जीवन के सत्य से ( यथार्थ ) से एकाएक उद्घाटित होती है, और उस विशेष क्षण में…"
Dec 12, 2020
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-122
"अन्नदाता..... कविता.... माँ प्रकृति का लाड़ला बेटा है अन्नदाता..... पेट भरता है, धरती माता के अन्य पुत्रों का किसान... मेरा देश महान नामक विचार- दर्शन का बलिदानी सैनिक के साथ दूसरा आधार स्तम्भ है.... लालबहादुर शास्त्री ने सच्चे धरती पुत्र ने सबसे…"
Dec 12, 2020
Chetan Prakash commented on TEJ VEER SINGH's blog post कब तक  - लघुकथा –
"आदरणीय भाई, योगराज प्रभाकर, सप्रेम वन्दे ! आदरणीय भाई, श्री तेजवीर सिंह की लघु कथा, "कब तक" के संदर्भ में आपका वक्तव्य मैंने पढा़ । बंधुवर, मैंने जो कहा, वह किसी व्यक्ति विशेष के प्रति दुर्भावना से प्रेरित होकर नहीं कहा। और, न ही मंच विशेष…"
Dec 11, 2020
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब नमन, आपने ग़ज़ल तक पहुँचने की जहमत की, बहुत शुक्रिया, आपका, जनाब ! ग़जल आपकी संस्तुति पा सकी, मुझे प्रोत्साहन मिला। साभार"
Dec 10, 2020
Chetan Prakash and DR ARUN KUMAR SHASTRI are now friends
Dec 10, 2020
Samar kabeer commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"जनाब चेतन प्रकाश जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 10, 2020
Chetan Prakash commented on TEJ VEER SINGH's blog post कब तक  - लघुकथा –
"नमस्कार , Shri TEJVIR SINGH ji,क्षमा करे, लघु कथा तथ्यात्मक विधा है, गल्प साहित्य नहीं। कदाचित यहाँ अधिकतर साथियों को लघुकथा के स्वरूप का सही ज्ञान ही नहीं है। और, दुःख की बात है कि संयोगवश यह अप्रिय बात आपकी लघु-कथा के संदर्भ मे कहने को विवश हूँ ।…"
Dec 10, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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ग़ज़ल

221 1221 1221 122

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आग़ाज मुहब्बत का वो हलचल भी नहीं है

आँखों में इजाज़त है हलाहल भी नहीं है।

क्या हिन्दू मुसलमाँ बना फिरता है ज़माने

इन्सान बनेगा कोई अटकल भी नहीं है ।

आसान नहीं होता जहाँ रोटी जुटाना,

तू मौज मनाता दुखी बेकल भी नहीं है |

क़मज़र्फ बने मत कि कमाना नहीँ पड़ता

मुँहजोर है औलाद उसे कल भी नहीं है |

है एक मुसीबत वो निभाने हैं मरासिम,

अब वक्त बचा क़म है, वो दल-बल भी नहीं…

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Posted on December 5, 2020 at 7:30am — 2 Comments

ग़ज़ल

2 2 1 1 2 2 1 1 2 2 1 1 2 2

आग़ाज़ मुहब्बत का वो हलचल भी नहीं है

आँखों में इज़ाज़त है तो हलचल भी नही हैं

क्या हिन्दू मुसलमाँ बना फिरता है, ज़माने

ऐसी तो खुदाया यहाँ हलचल भी नहीं है

आसान नहीं होता जहाँ  रोटी का कमाना

इस ओर तो तेरी कहीं हलचल भी नहीं है

क़मज़र्फ बने मत कि कमाना नहीं आता

औलाद ने उस ओर की हलचल भी नहीं है

है एक मुसीबत वो निभाने हैं, मरासिम

सुन वक़्त बचा क़म है वो हलचल भी…

Continue

Posted on December 3, 2020 at 7:00pm — 5 Comments

रोटी

गोल -गोल होती है रोटी

 गाँव-गाँव से शहर आता

आकर अपना खून बेचता

वो गँवार आदमी देखो तुम

रोटी खातिर महल बनाता |

गोल- गोल होती है रोटी...!

सच्चा कर्म-योगी वही है

प्याज-हरी धर खाता रोटी,

धरती माँ का पुत्र वही है

मोटी- मोटी उसकी रोटी |

गोल-गोल होती है रोटी..!

दुनिया बनी ये काज रोटी

बाल-ग्वाल कमा रहे रोटी

सारा शहर रचा हे, रोटी,

गाँव- गाँव बना है रोटी |

गोल-गोल होती है…

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Posted on December 3, 2020 at 7:26am — 3 Comments

दौड़ अपनी-अपनी (लघु- कथा)

कल मानव और विभा की शादी के दस वर्ष पूरे हो रहे थे। सो इस बार की मैरिज एनीवर्सरी विशेष थी। दाम्पत्य जीवन में कोई अभाव प्रकटतः तो विभा को नहीं था। दो बच्चे, बेटी मानसी और बेटा विशेष प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे थे। विभा एम, ए. बी. एड. थी, मिजाज़ से हाउस वाइफ थी। सारा दिन चौका बर्तन, सफाई, बच्चों की सुख-सविधा में कोई कमी न रहे इसमें निकल जाता था । हाँ मानव से ज़रूर उसे शिकायत थी। मानव एक कस्बे के महाविद्यालय में अंग्रेजी के प्रवक्ता थे। उनका ज्यादातर समय अध्ययन और अध्यापन में ही निकल जाता और बचता…

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Posted on November 29, 2020 at 6:00am — 3 Comments

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At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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