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DR ARUN KUMAR SHASTRI
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post दिल्लगी
"आ. भाई अरुण कुमार जी, सादर अभिवादन । सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 23
Samar kabeer commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post दिल्लगी
"जनाब डॉ. अरुण कुमार जी आदाब, अच्छी कविता लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें । निवेदन है कि रचना के साथ उसकी विधा भी लिख दिया करें ताकि कुछ कहने में आसानी हो ।"
Sep 23
DR ARUN KUMAR SHASTRI posted a blog post

दिल्लगी

जिस इश्क में दिल्लगी नही होती उस इश्क की तो जानू  उमर भी नही होतीसिलसिला साँसों का जिस रोज़ थम गया रौशनी गई दिये से और प्यार मर गयाधड़कन में अगर खून की लाली नही होती उस इश्क की तो जानू  उमर भी नही होतीदिखावा प्यार का तुम खूब कर चुके दे दे के तोहफे प्यार में मिरा घर भर चुकेसेंकडो तो आने जाने के बहाने कर चुके जोश था जो मिलन का वो आज मर चुकाजिस इश्क में दिल्लगी नही होती उस इश्क की तो जानू  उमर भी नही होती // मौलिक व् अप्रकाशित See More
Sep 19
DR ARUN KUMAR SHASTRI posted photos
Sep 12
DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on Sadhvi Saini's blog post मेरे किरदार पर धब्बा नही था
"मोहतरमा साध्बी सैनी जी को एक अबोध बालक का  आदाब पहुंचे आपकी ग़ज़ल बेहतरीन / मुझे इस गजल की ये लाइन्स बहुत मार्मिक लगी ये हम सभी के किर् दार का अनछुआ हिस्सा  हैं **मेरे ग़म को समझता कोई कैसेकोई मेरी तरह तनहा नही था"
Sep 12
DR ARUN KUMAR SHASTRI replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"ओ बी ओ महोत्सव अंक ११९ के लिए विषय - वो भी क्या दिन थे विधा - हाइकु स्वरचित - मौलिक - अप्रकाशित १ हम तुम थे   वो अजब  दिन थे बचपन था २ वो क्या दिन थे भूल तो न पाओगी मिलो न…"
Sep 12
DR ARUN KUMAR SHASTRI replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"ओ बी ओ महोत्सव अंक ११९ के लिए विषय - वो भी क्या दिन थे विधा - हाइकु स्वरचित - मौलिक - अप्रकाशित १ भूल जाऊंगा तुमको यदि सखी जिऊंगा कैसे २ ये बरसात क्या आई ओ सखी महकी…"
Sep 12

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर left a comment for DR ARUN KUMAR SHASTRI
"कृपया अपनी रचना यहाँ पोस्ट करें: http://www.openbooksonline.com/forum/topics/119-1?xg_source=activity&xg_raw_resources=1"
Sep 12
DR ARUN KUMAR SHASTRI left a comment for योगराज प्रभाकर
"ओ बी ओ महोत्सव अंक ११९ के लिए  "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119 विषय - "वो भी क्या दिन थे"स्वरचित - मौलिक - अप्रकाशित अतुकांत आधुनिक कविता   विषय - वो भी क्या दिन थे    वो भी क्या दिन थे , महज १३…"
Sep 12
DR ARUN KUMAR SHASTRI replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
""ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119 विषय - "वो भी क्या दिन थे"स्वरचित - मौलिक - अप्रकाशित अतुकांत आधुनिक कविता   विषय - वो भी क्या दिन थे    वो भी क्या दिन थे , महज १३ साल का ही तो  था मैं जिन्दगी…"
Sep 12
DR ARUN KUMAR SHASTRI shared Admin's discussion on Facebook
Sep 12
DR ARUN KUMAR SHASTRI replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आ ० रचनाएँ कहाँ और कब से [ टाइम ] प्रेषित की जा सकती हैं क्या मैं अभी १२/९/२०२०  के लिए १२.४३ am पर  अपनी रचना प्रेषित कर  सकता हूँ "
Sep 12

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Male
City State
DELHI NCR
Native Place
DELHI
Profession
EMINENT CONSULTANT
About me
LOVE THY GOD AND HUMANITY VASUDHAIV KUTUMBKAM

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दिल्लगी

जिस इश्क में दिल्लगी नही होती 

उस इश्क की तो जानू  उमर भी नही होती

सिलसिला साँसों का जिस रोज़ थम गया 

रौशनी गई दिये से और प्यार मर गया

धड़कन में अगर खून की लाली नही होती 

उस इश्क की तो जानू  उमर भी नही होती

दिखावा प्यार का तुम खूब कर चुके 

दे दे के तोहफे प्यार में मिरा घर भर चुके

सेंकडो तो आने जाने के बहाने कर चुके 

जोश था जो मिलन का वो आज मर चुका

जिस इश्क में दिल्लगी नही…

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Posted on September 19, 2020 at 3:00am — 2 Comments

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At 12:39pm on September 12, 2020,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

कृपया अपनी रचना यहाँ पोस्ट करें:

http://www.openbooksonline.com/forum/topics/119-1?xg_source=activity&xg_raw_resources=1

 
 
 

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"आ. भाई अमीरुद्ददीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसको भाया भीड़ का होकर खो जाना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार । अंंतिम शेर को आपके…"
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