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SALIM RAZA REWA
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SALIM RAZA REWA's blog post जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह - सलीम रज़ा रीवा
"वाह क्या कहने बेहतरीन ग़ज़ल कही है सलीम साहब..बधाई"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ  -सलीम रज़ा रीवा
"जनाब अजय कुमार शर्मा जी ,आपके हौसला अफ़जाई के लिए बहुत शुक्रिया ,"
Friday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ  -सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सुशील सरना जी ,आपके हौसला अफ़जाई के लिए बहुत शुक्रिया ,"
Friday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ  -सलीम रज़ा रीवा
"आपकी पुरख़ुलूस हौसला अफ़जाई का बेहद शुक्रिया मोहतरम समर साहब,"
Friday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ  -सलीम रज़ा रीवा
"बहुत शुक्रिया बृजेश जी"
Friday
Asif zaidi commented on SALIM RAZA REWA's blog post जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह - सलीम रज़ा रीवा
"बहुत ख़ूब जनाब सलीम रज़ा साहब मुबारकबाद मोहतरम"
Thursday
SALIM RAZA REWA commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post समय के साथ भी सीखा गया है ।
"आमोद जी ग़ज़ल के लिए बधाई स्वविकारें, अरकान ग़लत लिखा है.. अरकान 1222 1222 122 है सही कर लें, शेरों में तुक बंदी के साथ शेरियत पैदा करें,"
Thursday
SALIM RAZA REWA commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post तूलिकायें (लघुकथा) :
"वाह वाह बहुत ख़ूब मुबारकबाद जनाब उस्मानी साहब"
Thursday
SALIM RAZA REWA commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...मुझे तू याद मत कर- बृजेश कुमार 'ब्रज'
"ब्रिजेश की ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद, मोहतरम समर साहब सही कह रहे हैं, दोष का कारण आपका रदीफ़ है......."
Thursday
SALIM RAZA REWA commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल _(रहबरी उनकी मुझको हासिल है)
"मोहतरम तस्दीक साहब, उम्दा ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबूल करें l"
Thursday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह - सलीम रज़ा रीवा
"आमोद जी, बहुत बहुत शुक्रिया."
Thursday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह - सलीम रज़ा रीवा
"मोहतरम तस्दीक साहब, आपकी मोहब्बत के लिए बहुत बहुत शुक्रिया."
Thursday
Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आ दाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l "
Thursday
amod shrivastav (bindouri) commented on SALIM RAZA REWA's blog post जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह - सलीम रज़ा रीवा
"आ सलीम रजा साहब आदाब अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारे"
Thursday
SALIM RAZA REWA posted a blog post

जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह - सलीम रज़ा रीवा

1212 1122 1212 22/112--जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह  तुम्हारे लब हैं गुलाबों की पंखुड़ी की तरह  oo शगुफ्ता चेहरा ये  ज़ुलफें ये नरगिसी आँखे  तेरा हसीन तसव्वुर है शायरी की तरह  oo अगर ऐ जाने तमन्ना तू छत पे आ जाए  अंधेरी रात भी चमकेगी चांदनी की तरह oo यूँ ही न बज़्म से तारीकियाँ हुईं ग़ायब कोई न कोई तो आया है रोशनी की तरह oo यही ख़ुदा से दुआ मांगता हूँ रातो दिन कि मै भी जी लूं ज़माने में आदमी तरह_________________________बहरे मुजतस मुसमन मख़बून महज़ूफ"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SALIM RAZA REWA's blog post हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ  -सलीम रज़ा रीवा
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है सलीम साहब..बधाई"
Apr 13

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REWA M.P.
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REWA (M.P.)
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जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह - सलीम रज़ा रीवा

1212 1122 1212 22/112

--

जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह 

तुम्हारे लब हैं गुलाबों की पंखुड़ी की तरह 

oo

शगुफ्ता चेहरा ये  ज़ुलफें ये नरगिसी आँखे 

तेरा हसीन तसव्वुर है शायरी की तरह 

oo

अगर ऐ जाने तमन्ना तू छत पे आ जाए 

अंधेरी रात भी चमकेगी चांदनी की तरह

oo

यूँ ही न बज़्म से तारीकियाँ हुईं ग़ायब

कोई न कोई तो आया है…

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Posted on April 18, 2019 at 9:55am — 6 Comments

हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ  -सलीम रज़ा रीवा

मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईलु फ़ाइलुन

.

हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ तो क्या करें 

ऐसे में उनसे दूर ना जाएँ तो क्या करें 

oo

उसकी अना ने सारे तअल्लुक़ मिटा दिए 

उस बे-वफ़ा को भूल  जाएँ तो क्या करें   

oo

मीना भी तू है मय भी तू साक़ी भी जाम भी

आँखों में तेरी डूब न जाएँ तो क्या करें

oo

कश्ती को डूबने से बचाया बहुत मगर 

हो जाएं गर…

Continue

Posted on April 8, 2019 at 4:30pm — 10 Comments

आख़िर ये इश्क़ क्या है - सलीम रज़ा रीवा

मफ़ऊल फ़ाइलातुन मफ़ऊल फ़ाइलातुन

_____________

आख़िर ये इश्क़ क्या है जादू है या नशा है

जिसको भी हो गया है पागल बना दिया है

oo

हाथो में तेरे हमदम जादू नहीं तो क्या है

मिट्टी को तू ने छूकर सोना बना दिया है

oo

उस दिन से जाने कितनी नज़रें लगी हैं मुझपर

जिस दिन से तूने मुझको अपना बना लिया है

oo

खिलता हुआ ये चेहरा यूँ ही रहे सलामत

तू ख़ुश रहे हमेशा मेरी यही…

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Posted on April 4, 2019 at 9:13am — 6 Comments

जिंदगी को गुनगुना कर चल दिए-सलीम रज़ा रीवा

ओबीओ को समर्पित एक क़त'आ  

----------------------------------

जब से तेरी मेहरबानी हो गई

ख़ूबसूरत ज़िन्दगानी हो गई

हम हुए तेरे दिवाने इस तरह

जिस तरह 'मीरा' दिवानी हो गई

...........

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

बहरे रमल मुसद्दस महज़ूफ़

--------

जिंदगी को गुनगुना कर चल दिए

मौत को अपना बना कर चल दिए

oo

उम्र भर की दोस्ती जाती रही

आप ये क्या गुल खिलाकर चल…

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Posted on April 2, 2019 at 10:00am — 6 Comments

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"आदरणीय सत्यनारायण सिंह जी चित्रानुरूप बेहतरीन सृजन के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल करें"
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