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SALIM RAZA REWA
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vijay nikore commented on SALIM RAZA REWA's blog post ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा  - सलीम 'रज़ा' रीवा
"// न मज़हब सिखाता है तकरार बाँटो अगर बाँटना हो सदा प्यार बाँटो  अमन चैन हो सारी दुनिया में क़ाएम ज़माने में हो हर तरफ भाई चारा // बहुत ही खूबसूरत भाव। आपको हार्दिक बधाई, मित्र सलीम जी।"
Thursday
SALIM RAZA REWA's blog post was featured

ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा  - सलीम 'रज़ा' रीवा

ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा उजड़ने न देंगे चमन ये हमारा वतन के लिए जो मेरी जान जाएख़ुदारा यहीं  फिर जनम लें दुबारा   जो सरहद पे अपने सरों को कटाकरअमर हो गये जो वतन को बचाकरवो ख़ुश्बू के जैसे महकते रहेंगेचमकते रहेंगे वो बनकर सितारा भगत बोष सुखदेव बलिदानियो कोन भूलेंगे हम उनकी क़ुर्बानिओं कोवो फांसी में भी चढ़ गए हँसते हँसतेवतन के लिए हर सितम था गवारा  तुम्हे याद करते हैं चाँद और तारेतुम्हे  सरहदों की है मिट्टी पुकारें मोहब्बत की शम्मा जलाते रहेंगेन टूटेगा रिश्ता हमारा तुम्हारा न मज़हब सिखाता है तकरार…See More
Thursday
Pratibha Pandey commented on SALIM RAZA REWA's blog post ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा  - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आदरणीय सलीम जी बहुत ही  अच्छी रचना , बधाई "
Aug 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on SALIM RAZA REWA's blog post ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा  - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आ. भाई सलीम जी, सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Aug 16
SALIM RAZA REWA posted blog posts
Aug 15
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on SALIM RAZA REWA's blog post बिन तेरे रात गुज़र जाए बड़ी मुश्किल है, सलीम 'रज़ा' रीवा
" SALIM RAZA REWA जी, "वो सदाक़त वो सख़ावत वो मोहब्बत लेकरफिर कोई आप सा आ जाए बड़ी मुश्किल है" सुन्दर शेर के साथ अच्छी ग़ज़ल | "
Aug 6
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post बिन तेरे रात गुज़र जाए बड़ी मुश्किल है, सलीम 'रज़ा' रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'वो हंसीं वक़्त जो मिल करके गुज़ारा था कभी' इस मिसरे में 'हंसीं' को "हसीं" कर लें ।"
Aug 4
SALIM RAZA REWA posted a blog post

बिन तेरे रात गुज़र जाए बड़ी मुश्किल है, सलीम 'रज़ा' रीवा

2122 1122 1122 22बिन तेरे रात गुज़र जाए बड़ी मुश्किल हैऔर फिर याद भी न आए बड़ी मुश्किल हैखोल कर बैठे हैं छत पर वो हसीं ज़ुल्फ़ों कोऐसे में धूप निकल आए बड़ी मुश्किल हैमेरे महबूब का हो ज़िक्र अगर महफ़िल मेंऔर फिर आँख न भर आए बड़ी मुश्किल हैवो हंसीं वक़्त जो मिल करके गुज़ारा था कभीफिर वही लौट के आ जाए बड़ी मुश्किल हैवो सदाक़त वो सख़ावत वो मोहब्बत लेकरफिर कोई आप सा आ जाए बड़ी मुश्किल है---मौलिक अप्रकाशितSee More
Jul 29
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post बुलन्दी मेरे जज़्बे की - सलीम 'रज़ा' रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,आप ये ग़ज़ल पहले ओबीओ पर पोस्ट कर चुके हैं,और इसके 4थे शैर पर काफ़ी चर्चा भी हो चुकी है,याद करें ।"
Jul 25
SALIM RAZA REWA posted a blog post

बुलन्दी मेरे जज़्बे की - सलीम 'रज़ा' रीवा

1222 1222 1222 1222बुलन्दी मेरे जज़्बे की ये देखेगा ज़माना भी फ़लक के सहन में होगा मेरा इक आशियाना भी. अकेले इन बहारों का नहीं लुत्फ़-ओ-करम साहिब करम फ़रमाँ है मुझ पर कुछ मिजाज़-ए-आशिक़ाना भी. जहाँ से कर गए हिजरत मोहब्बत के सभी जुगनू वहां पे छोड़ देती हैं ये खुशियाँ आना जाना भी . बहुत अर्से से देखा ही नहीं है रक़्स चिड़ियों का कहीं पेड़ों पे भी मिलता नहीं वो आशियाना भी . हमारे शेर महकेंगे किसी दिन उसकी रहमत से हमारे साथ महकेगा अदब का ये घराना  भी  . न जाने किन ख़्यालों में नहाकर मुस्कुराती है 'रज़ा'…See More
Jul 24
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
May 2
Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब, गज़ब के एहसास से सजी उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं I "
May 2
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"आद0 सलीम साहब सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपको दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ"
May 1
Sushil Sarna commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब और ख़ुश्बू निचो रही है शब oo मेरे ख़ाबों की ओढ़कर चादर मेरे बिस्तर पे सो रही है शब आदरणीय सलीम रजा रीवा साहिब , आदाब। ... गज़ब के अहसास पिरोये हैं आपने ग़ज़ल में । आपकी कल्पना और कलम को सलाम। दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं…"
May 1
राज़ नवादवी commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे बधाई क़ुबूल करें. सादर. "
May 1
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-49
"वाह वाह बहुत ख़ूब मुबारकबाद अच्छी लघुकथा कही है भाई वीर मेहता जी. "
Apr 30

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REWA M.P.
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ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा  - सलीम 'रज़ा' रीवा

ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा 

उजड़ने न देंगे चमन ये हमारा 

वतन के लिए जो मेरी जान जाए

ख़ुदारा यहीं  फिर जनम लें दुबारा 

 …

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Posted on August 15, 2019 at 11:30am — 3 Comments

बिन तेरे रात गुज़र जाए बड़ी मुश्किल है, सलीम 'रज़ा' रीवा

2122 1122 1122 22
बिन तेरे रात गुज़र जाए बड़ी मुश्किल है
और फिर याद भी न आए बड़ी मुश्किल है

खोल कर बैठे हैं छत पर वो हसीं ज़ुल्फ़ों को
ऐसे में धूप निकल आए बड़ी मुश्किल है

मेरे महबूब का हो ज़िक्र अगर महफ़िल में
और फिर आँख न भर आए बड़ी मुश्किल है

वो हंसीं वक़्त जो मिल करके गुज़ारा था कभी
फिर वही लौट के आ जाए बड़ी मुश्किल है

वो सदाक़त वो सख़ावत वो मोहब्बत लेकर
फिर कोई आप सा आ जाए बड़ी मुश्किल है

---
मौलिक अप्रकाशित

Posted on July 29, 2019 at 9:54pm — 2 Comments

बुलन्दी मेरे जज़्बे की - सलीम 'रज़ा' रीवा

1222 1222 1222 1222

बुलन्दी मेरे जज़्बे की ये देखेगा ज़माना भी

फ़लक के सहन में होगा मेरा इक आशियाना भी

.

अकेले इन बहारों का नहीं लुत्फ़-ओ-करम साहिब

करम फ़रमाँ है मुझ पर कुछ मिजाज़-ए-आशिक़ाना भी

.

जहाँ से कर गए हिजरत मोहब्बत के सभी जुगनू

वहां पे छोड़ देती हैं ये खुशियाँ आना जाना भी

.

बहुत अर्से से देखा ही नहीं है रक़्स चिड़ियों का

कहीं पेड़ों पे भी मिलता नहीं वो आशियाना भी

.

हमारे शेर महकेंगे किसी दिन उसकी रहमत से

हमारे साथ…

Continue

Posted on July 23, 2019 at 9:30pm — 1 Comment

अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा

2122 1212 22

अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब

और ख़ुश्बू निचो रही है शब

oo

मेरे ख़ाबों की ओढ़कर चादर

मेरे बिस्तर पे सो रही है शब

oo

अब अंधेरों से जंग की ख़ातिर

कुछ चराग़ों को बो रही है शब

oo

सुब्ह--नौ के क़रीब आते ही

अपना अस्तित्व खो रही है शब

oo

दिन के सदमों को सह रहा है दिन

रात का बोझ ढो रही है शब

___________________

"मौलिक व…

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Posted on April 29, 2019 at 10:51am — 6 Comments

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