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SALIM RAZA REWA
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Sheikh Shahzad Usmani commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"पते की बात। बढ़िया प्रस्तुति के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब सलीम रज़ा रीवा साहिब।"
5 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"बड़ी उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय..बधाई"
11 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे बड़ी रदीफ़ पर एक और ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब मुझे यक़ीन है आपकी कोशिश ज़रूर रंग लाएगी ,"
15 hours ago
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे बड़ी रदीफ़ पर एक और ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा
"वैसे तो इमकान नज़र नहीं आता,फिर भी कुछ सोचता हूँ भाई ।"
16 hours ago
SALIM RAZA REWA posted blog posts
16 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (नाज़ कब वो भी उठा पाते हैं दीवाने का )
"कोई इक बूँद को तरसे कोई भर भर के पिए खूब दस्तूर है साक़ी तेरे मैखाने का |........ जनाब तस्दीक़ साहिब इस ग़ज़ल पर बहुत मुबारकबाद आपको।"
16 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post महिला सशक्तिकरण (कामरूप छःन्द)
"सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' ख़ूबसूरत रचना के लिए बधाई ,, कहीं कहीं गेयता भंग हो रही है देखिएगा "
16 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय अभिनव अरुण जी ,ग़ज़ल पे आपकी तारीफ़ के लिए शुक्रिया , बहुत दिनों बाद आप की आमद हुई आपको देखकर ख़ुशी हुई '"
17 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब तस्दीक़ साहिब ,आपकी इनायत के लिए शुक्रिया। आप सही कह रहे हैं ,,,,,,,,वहां है टाइप नहीं हो पाया , आप का शुक्रिया। '' ख़ाक  का पुतला है  इंसाँ  ख़ाक में मिल जाएगा ''"
17 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब अफ़रोज़ साहिब ,ग़ज़ल पे आपकी महब्बत के लिए शुक्रिया ,आप सही कह रहे हैं ,,,,,,,,वहां है टाइप नहीं हो पाया , आप का शुक्रिया। '' ख़ाक का पुतला है इंसाँ ख़ाक में मिल जाएगा ''"
17 hours ago
Abhinav Arun commented on SALIM RAZA REWA's blog post सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे बड़ी रदीफ़ पर एक और ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा
"नवल प्रयोग ,बढ़िया है !!"
yesterday
Abhinav Arun commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"उम्दा ग़ज़ल .दिली मुबारकबाद !!"
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब ,उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।शेर 6 उला मिसरे में पुतला और इंसां के बीच " है "टाइप होने से रह गया ,देखियेगा"
yesterday
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब इस ग़ज़ल के लिए आपको बहुत बधाई,,, छठे शेर का ऊला मिसरा बह्र में नहीं है देखिएगा सादर,,"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे बड़ी रदीफ़ पर एक और ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा
"आली जनाब समर साहिब, इस ग़ज़ल को सही करने के लिए आपकी मदद की ज़रुरत है। "
yesterday
SALIM RAZA REWA posted a blog post

सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे बड़ी रदीफ़ पर एक और ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा

212 212 212 212, 212 212 212 212-जब तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी /लब तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी //-तुम मेरे साथ हो, चांदनी रात हो, होंट की बात हो, ज़ुल्फ़ की बात हो /तब तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी //-हम नहीं चाँद तारे ये काली घटा गूंचा ओ गुल ये बुलबुल ये महकी फिज़ा /सब तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी //-हम गुनहगार है, हम सियह कार हैं, फिर भी रहमो करम…See More
yesterday

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Male
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REWA M.P.
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Profession
MANAGER
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सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे बड़ी रदीफ़ पर एक और ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा



212 212 212 212, 212 212 212 212

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जब तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी /

लब तुम्हारी महब्बत में खो…

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Posted on November 15, 2017 at 9:00am — 21 Comments

मुझसे रूठा है कोई उसको मनाना होगा - सलीम रज़ा रीवा

2122 1122 1122 22 

-

मुझसे रूठा है कोई उसको मनाना होगा

भूल कर शिकवे-गिले दिल से लगाना होगा   

-

जिन चराग़ों से ज़माने में उजाला फैले 

उन चराग़ों को हवाओ से बचाना…

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Posted on November 13, 2017 at 11:00am — 24 Comments

किसी भी जुर्म गुनाह-ओ- ख़ता से डरते हैं - सलीम रज़ा रीवा ( ग़ज़ल )

1212 1122 1212 22

-

किसी भी जुर्म गुनाह-ओ- ख़ता से डरते हैं.

जिन्हे है ख़ौफ़-ए-ख़ुदा वो ख़ुदा से डरते हैं 

-

न मुश्किलों…

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Posted on November 12, 2017 at 10:00am — 28 Comments

नाराज़गी है कैसी भला ज़िन्दगी के  साथ - सलीम रज़ा रीवा

221 2121 1221 212

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नाराज़गी है कैसी भला ज़िन्दगी के  साथ.

रहते हैं ग़म हमेशा ही यारों खुशी के साथ

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नाज़-ओ-अदा के साथ कभी बे-रुख़ी के साथ.

दिल में उतर  गया वो बड़ी सादगी के साथ

-

माना कि लोग जीते हैं हर पल खुशी के साथ.

शामिल है जिंदगी में मगर ग़म सभी के साथ

-

आएगा मुश्किलों में भी जीने का फ़न तुझे.

कूछ दिन गुज़ार ले तू मेरी जिंदगी के साथ

-

ख़ून-ए- जिगर निचोड़ के रखते हैं शेर में.

यूँ ही नहीं है  प्यार हमें   शायरी के…

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Posted on November 8, 2017 at 3:30pm — 16 Comments

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