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SALIM RAZA REWA
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Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा
"उनकी आदत है मुकर जाने की...ये मिसरा बहर पर क़हर बन कर टूट पडा है.. देखिएगा .जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे बद-दुआओं से मर नहीं सकता... कौन ख़ुदा ??.देखिएगा सादर "
13 hours ago
SALIM RAZA REWA posted a blog post

जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा

2122 1212 22-हौसला जिसका मर नहीं सकता  मुश्किलों से वो डर नहीं सकता  - लोग कहते हैं ज़ख़्म गहरा है  मुद्दतों तक ये भर नहीं सकता - उनकी आदत है यूँ डराने की  मेरी फ़ितरत है डर नहीं सकता  - जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे  बद-दुआओं से मर नहीं सकता -उनकी आदत है मुकर जाने कीमैं कभी भी मुकर नहीं सकता -जिसने महदूद ख़्वाहिशें कर लीकोई लालच वो कर नहीं सकता -लाख फ़ितरत की ज़ुल्फ़ सुलझाओबिगड़ा ख़ाका सुधर नहीं सकता-"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Nov 9
SALIM RAZA REWA posted blog posts
Oct 23
SALIM RAZA REWA posted a blog post

जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा

2122 1212 22-हौसला जिसका मर नहीं सकता  मुश्किलों से वो डर नहीं सकता  - लोग कहते हैं ज़ख़्म गहरा है  मुद्दतों तक ये भर नहीं सकता - उनकी आदत है यूँ डराने की  मेरी फ़ितरत है डर नहीं सकता  - जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे  बद-दुआओं से मर नहीं सकता -उनकी आदत है मुकर जाने कीमैं कभी भी मुकर नहीं सकता -जिसने महदूद ख़्वाहिशें कर लीकोई लालच वो कर नहीं सकता -लाख फ़ितरत की ज़ुल्फ़ सुलझाओबिगड़ा ख़ाका सुधर नहीं सकता-"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Oct 20
SALIM RAZA REWA commented on dandpani nahak's blog post गज़ल
"भाई बधाई स्वविकरण मतला मज़ा नहीं दे ,"
Oct 15
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आपकी मोहब्बतों के लिए बेहद शुक्रिया।"
Oct 15
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"मोहतरम समर साहब, आपकी मुहब्बत के लिए शुक्रिया, अगर सिर्फ़ उसकी हो तो 22 है मगर ज़रूरत के मुताबिक़, अगर आगे का लफ्ज़ सिंगल है तो और अरकान की ज़रूरत है तो अख़िरी लफ्ज़ के मात्रा को गिरा सकते हैं उसी का फ़ायदा लिया गया है, 2  1 1 22 उस कि हु कू…"
Oct 14
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"//उसकी हु/ कूमत है हर सू वो जो चाहे सो होना है' 2 11/ 22 // 'उसकी' शब्द अपने आप में 22 है तो मात्रा पतन करके आप उसे 21 क्यों करना चाहते हैं?"
Oct 14
SALIM RAZA REWA posted blog posts
Oct 12
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"मोहतरम कबीर साहब आपकी मोहब्बत के लिए बहुत बहुत शुक्रिया,, अल्लाह आपको सलामत रखे  उसकी हु/ कूमत है हर सू वो जो चाहे सो होना है' 2 11/ 22  बदलाव कर दिया जाएगा  'काम बुरे और बद आमाली दोज़ख़ में ले जाएँगे, टाइपिंग मे आगे पीछे हो…"
Oct 12
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"बढ़िया ग़ज़ल कही है सलीम साहब..बधाई"
Oct 12
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । "उसकी हुकूमत है हर सू वो जो चाहे सो होना है' इस मिसरे की बह्र चेक करें,'हुकूमत' शब्द 122 है । 'बुरे काम और बद-आमाली दोज़ख में ले जाएँगे' इस मिसरे की…"
Oct 11
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आदरणीय प्रदीप देवीशरण भट्ट जी आपकी मोहब्बतों के लिए बेहद शुक्रिया।"
Oct 10
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी आपकी मोहब्बतों के लिए बेहद शुक्रिया।"
Oct 10
SALIM RAZA REWA posted a blog post

बिन तेरे रात गुज़र जाए बड़ी मुश्किल है, सलीम 'रज़ा' रीवा

2122 1122 1122 22 बिन तेरे रात गुज़र जाए बड़ी मुश्किल है और फिर याद भी न आए बड़ी मुश्किल है खोल कर बैठे हैं छत पर वो हसीं ज़ुल्फ़ों को ऐसे में धूप निकल आए बड़ी मुश्किल है मेरे महबूब का हो ज़िक्र अगर महफ़िल में और फिर आँख न भर आए बड़ी मुश्किल है वो हसीं वक़्त जो मिल करके गुज़ारा था कभी फिर वही लौट के आ जाए बड़ी मुश्किल है वो सदाक़त वो सख़ावत वो मोहब्बत लेकर फिर कोई आप सा आ जाए बड़ी मुश्किल है --- मौलिक अप्रकाशितSee More
Oct 8
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post जान ले लेगा किसी रोज़ बहाना तेरा - सलीम 'रज़ा' रीवा
"बहुत अच्छा मशविरा है मोहतरम समर साहब बहुत बहुत शुक्रिया, नवाज़िश "
Oct 8

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जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा

2122 1212 22

-

हौसला जिसका मर नहीं सकता 

मुश्किलों से वो डर नहीं सकता 

-

लोग कहते हैं ज़ख़्म गहरा है 

मुद्दतों तक ये भर नहीं सकता

-…

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Posted on November 9, 2019 at 7:30pm — 1 Comment

रौशन है उसके दम से - सलीम 'रज़ा' रीवा

221 2121 1221 212

 -

रौशन है उसके दम से सितारों की रौशनी 

ख़ुश्बू लुटा रही है बहारों की रौशनी

 -

इक वो है माहताब फक़त आसमान में 

फीकी है जिसके आगे हज़ारों की रौशनी…

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Posted on October 22, 2019 at 8:36pm

सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा

22 22 22 22 22 22 22 2

सुख उसका दुख उसका है तो फिर काहे का रोना है

दौलत उसकी शोहरत उसकी क्या पाना क्या खोना है //



चाँद-सितारे उससे रोशन फूल में उससे खुशबू है 

ज़र्रे-ज़र्रे में वो शामिल वो चांदी वो सोना है //



खुशिओं के वो मोती भर दे या ग़म की बरसात करे

उसकी हुकूमत है हर सू वो जो चाहे सो होना है //



सारी दुनिया का वो मालिक हर शय उसके क़ब्ज़े में 

उसके आगे सब कुछ फीका क्या जादू क्या टोना है…

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Posted on October 6, 2019 at 8:30pm — 10 Comments

जान ले लेगा किसी रोज़ बहाना तेरा - सलीम 'रज़ा' रीवा

2122 1122 1122 22 

मेरी आँखों में हुआ जब से ठिकाना तेरा 

लोग कहते हैं सरे आम दिवाना तेरा



रोज़ मिलने की तसल्ली न दिया कर मुझको 

जान ले लेगा किसी रोज़ बहाना तेरा



छीन लेगा ये मेरा होश यकीनन इक दिन …

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Posted on October 1, 2019 at 8:00am — 10 Comments

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