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SALIM RAZA REWA
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
"क्या कहने आदरणीय सलीम साहेब..बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई..सादर"
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
" बहुत खूबसूरत गजल"
Thursday
SALIM RAZA REWA posted a blog post

हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा

221 2121 1221 212 हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया दुश्वारियों को पांव के नीचे दबा दिया - मेरी तमाम उँगलियाँ घायल तो हो गईं लेकिन तुम्हारी याद का नक्शा मिटा दिया   - मैंने तमाम छाँव ग़रीबों में बांट दी और ये किया कि धूप को पागल बना दिया - उसके हँसीं लिबास पे इक दाग़ क्या लगा  सारा  ग़ुरूर ख़ाक़ में उसका मिला दिया  - जो  ज़ख्म  खाके भी रहा है आपका सदा  उस दिल पे फिर से आपने खंज़र चला दिया-उसने निभाई ख़ूब मेरी दोस्ती " रज़ा " इल्ज़ाम-ए-क़त्ल यार मुझी पर लाग दिया…See More
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आ. भाई सलीम जी, सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई ।"
Thursday
vijay nikore commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"अच्छी गज़ल के लिए बधाई।"
Thursday
Kalipad Prasad Mandal commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आ सलिन रज़ा जी  | ग़ज़ल बहुत उम्दा बनी  है , मुबारक बाद कुबूल करें |"
Wednesday
SALIM RAZA REWA commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"भाई नीलेश जी ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई,"
Tuesday
Ajay Tiwari commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम साहब, आपकी बात ठीक है लेकिन कोशिश यही होनी चाहिए की मिस्ररा भी ठीक हो और शेरियत भी बनी रहे. सादर   "
Tuesday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आ. तिवारी जी, आपकी मशविरे के लिए शुक्रिया लेकिन, मिसरा सीधा करने के चक्कर में शेरियत, मर जाए तो शेर कहने का फायदा क्या.. बहरहाल कुछ और सोचेंगे.."
Jan 15
Ajay Tiwari commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम साहब, तीसरे शेर को निकाल देने से ग़ज़ल बेहतर हो गयी है. दूसरे शेर में 'तो' कम होने से मेरी मुराद ये थी कि दोनों मिसरों को जोड़ने वाला संयोजक इनमे नहीं है. दोनों मिसरों को अगर सरल वाक्य के रूप में लिखें तो यह बात स्पष्ट हो जायेगी…"
Jan 15
SALIM RAZA REWA commented on Mohammed Arif's blog post कटाक्षिकाएँ
"अति सुंदर मुबारक़बाद क़ुबूल करें."
Jan 15
SALIM RAZA REWA commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मकर संक्रान्ति (दोहा छंन्द)
"भाई सुरेन्द्र नाथ सिंह जी अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई."
Jan 15
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"बहुत बहुत शुक्रिया"
Jan 15
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"अच्छा है ।"
Jan 15
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आली जनाब समर साहब आपकी शुक्रिया नवाज़िश करम.. एक अभी शेर हुआ है अगर किसी लायक़ हो... मेरे घर में ख़ुशी नहीं आती तू अगर हम-नवा नहीं होता"
Jan 15
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,'मोमिन' की ज़मीन में ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।कि"
Jan 15

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Male
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REWA M.P.
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REWA (M.P.)
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हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा

221 2121 1221 212

हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया

दुश्वारियों को पांव के नीचे दबा दिया

-

मेरी तमाम उँगलियाँ घायल तो हो गईं

लेकिन तुम्हारी याद का नक्शा मिटा दिया  

-

मैंने तमाम छाँव ग़रीबों में बांट दी

और ये किया कि धूप को पागल बना दिया

-

उसके हँसीं लिबास पे इक दाग़ क्या लगा 

सारा  ग़ुरूर ख़ाक़ में उसका मिला दिया 

-

जो  ज़ख्म  खाके भी रहा है आपका सदा 

उस दिल पे फिर से आपने खंज़र चला दिया

-

उसने निभाई…

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Posted on January 18, 2018 at 2:30pm — 2 Comments

तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा

 2122 1212 22 

तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता

दिल ये तुझपे फ़िदा नहीं होता   

-

इश्क़ तुमसे किया नहीं होता 

ज़िन्दगी में मज़ा नहीं होता

-

ज़िन्दगी तो  संवर गयी  होती 

ग़र वो मुझसे जुदा नहीं होता

-

उसकी चाहत ने कर दिया पागल 

प्यार  इतना  किया  नहीं  होता 

-

सबको दुनिया बुरा बनाती है

कोई इंसाँ बुरा नही होता

-

चोट खाएँ भी मुस्कुराएँ भी

अब रज़ा हौसला नहीं होता. …

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Posted on January 13, 2018 at 10:30pm — 18 Comments

मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ क्या हो गई ख़ता है -SALIM RAZA REWA

 221 2122 221 2122

मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ क्या हो गई ख़ता है

जो यक-ब-यक ही मुझसे तू हो गया ख़फ़ा है

-

कुछ भी नहीं है शिकवा कुछ भी नहीं शिकायत

क़िस्मत में जो है मेरे  वो मुझको मिल रहा है

-

आंखों में नींद रुख़ पर गेसू बिखर रहे हैं

हिज्र-ए-सनम में शायद वो जागता रहा है

-

शाख़-ए-शजर हैं सूखी मुरझा गई हैं कलियाँ

गुलशन हुआ है वीरां कैसा ग़ज़ब हुआ है

-

इक पल में रूठ जाना इक पल में मान जाना 

उसकी इसी अदा ने दीवाना कर दिया है…

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Posted on January 10, 2018 at 11:30pm — 11 Comments

जो अपने माँ-बाप के - सलीम रज़ा

22 22 22 22 22 2

जो अपने माँ-बाप के दिल को दुखाएगा

चैन-ओ- सुकूँ वो जीवन भर ना पाएगा

-

हक़ बातें तू हरगिज़ ना कह पाएगा

अहसानों के तले  अगर दब जाएगा

-

उस दिन दुनिया ख़ुशिओं से भर जाएगी

जिस दिन प्रीतम लौट के घर को आएगा

-

भूँखा -प्यासा जब देखेगी बेटों को

माँ का दिल टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा

-

उसकी मुरादें सब पूरी हो जाएंगी

दर पे उसके जो दामन फैलाएगा

-

मेरी…

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Posted on January 7, 2018 at 6:00pm — 12 Comments

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