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SALIM RAZA REWA
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SALIM RAZA REWA commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-मुझ को कोई ख़रीद सस्ता किए बग़ैर
"वाह वाह आ. नीलेश जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद हर शेर लाजवाब, हर शेर के लिए मुबारक़बाद,.."
3 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post आएं न आएं वो लेकिन - सलीम रज़ा रीवा
"आ. नीलेश जी, आपकी नज़रे इनायत और हौसला अफज़ाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया, मुहब्बत बनाए रखें,"
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post आएं न आएं वो लेकिन - सलीम रज़ा रीवा
"आ. सलीम साहब,अच्छी ग़ज़ल हुई है ..बधाई "
4 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post आएं न आएं वो लेकिन - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब तस्दीक साहब, आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया,"
7 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post आएं न आएं वो लेकिन - सलीम रज़ा रीवा
"आली जनाब समर साहब, आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया"
7 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post ग़ज़ल -- मोतिओं की तरह जगमगाते रहो --सलीम रज़ा रीवा
"आली जनाब समर साहब, इस ग़ज़ल में आपकी नज़रे इनायत चाहता हूँ"
7 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आ. राजेश कुमारी जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई,"
20 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"वाह.. जनाब तसदि‍क़ साहिब, बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई है मुबारक़बाद, इस तरह बैठे हैं वो फेर के आँखें मुझ से उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ |... क्या कहने. इतना मजबूर भी मुझको न खुदा कर देना अपने घर बार को इज़्ज़त से चला भी न सकूँ l... दिल को…"
yesterday
SALIM RAZA REWA posted a blog post

आएं न आएं वो लेकिन - सलीम रज़ा रीवा

22 22 22 22 22 22 22 2.........................................आएं न आएं वो  लेकिन हम आस लगाए .बैठे हैं दिन ढलते ही शमए मुहब्बत घर में जलाए बैठे हैं ..आख़िर दिल की बात ज़ुबाँ तकआये तो कैसेआये अपनी  ख़ामोशी  में  वो  सब  राज़  छुपाये बैठे हैं ..हैरत है जो प्यार मुहब्बत से ना वाकिफ़ हैं यारो वह  इल्ज़ाम दग़ाबाज़ी का मुझ पे लगाए  बैठे हैं..कौन है अपना कौन पराया कैसे पहचाने कोई चहरों पर  तो फ़र्ज़ी चहरे लोग सजाए  बैठे  हैं..परदेसी और बेगानों की बात करें आख़िर कैसे हम तो अपनों  से  ही कितने धोके खाए बैठे…See More
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र -फेलुन) यह ग़ज़ल दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल है ।इसे Golden Book Of World Records2017 में शामिल किया गया है ।
"जनाब मोहम्मद आरिफ साहिब, आपको मेरे जानिब से मुबारक़बाद, मेरी दुआ है आप आगे भी यूँ ही का़मयाब होते रहें."
yesterday
SALIM RAZA REWA replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 87 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय राणा प्रताप सिंह जी, आपका संचालन हमेशा से ही अच्छा रहा है, इस बार ख़ूबसूरत तरह में बहुत सारी ख़ूबसूरत ग़ज़लें पढ़ने को मिली, आपने अपना अनमोल वक़्त देकर इसे का़मयाब बनाया इसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया, तमाम ओ बी ओ परिवार को मुशाइरे के का़मयाबी…"
Sunday
SALIM RAZA REWA commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post ग़ज़ल (2)
"आ. कल्पना जी ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई, और नही कुछ चाहूँ तुमसे मेरी जान, जान की जगह " जां " होना चाहिए ,"
Sunday
SALIM RAZA REWA commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूत्र और सूत्रधार (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"जनाब शेख शहज़ाद उस्मानी साहब आदाब, मुहावरों से सजी बेहतरीन लघुकथा के लिए मुबारक़बाद,"
Sunday
SALIM RAZA REWA commented on Rana Pratap Singh's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय राणा प्रताप सिंह जी, मतले से मक़्ते तक इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए दिली मुबारक़बाद,"
Saturday

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Rana Pratap Singh and SALIM RAZA REWA are now friends
Saturday
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"आदरणीय राणा प्रताप सिंह जी, आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया,"
Saturday

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आएं न आएं वो लेकिन - सलीम रज़ा रीवा

22 22 22 22 22 22 22 2

.........................................

आएं न आएं वो  लेकिन हम आस लगाए .बैठे हैं 

दिन ढलते ही शमए मुहब्बत घर में जलाए बैठे हैं 

..

आख़िर दिल की बात ज़ुबाँ तकआये तो कैसेआये 

अपनी  ख़ामोशी  में  वो  सब  राज़  छुपाये बैठे हैं 

..

हैरत है जो प्यार मुहब्बत से ना वाकिफ़ हैं यारो 

वह  इल्ज़ाम दग़ाबाज़ी का मुझ पे लगाए  बैठे हैं

..

कौन है अपना कौन…

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Posted on September 24, 2017 at 10:00am — 14 Comments

खोया रहता हूँ मैं जिनकी यादों में - सलीम रज़ा रीवा

22 22 22 22 22 2

............................

खोया रहता हूँ मैं जिनकी यादों में

उनकी  ही खुशबू है मेरी साँसों में

.

दिल के हाथों था मजबूर बहुत वरना

आता कब  मैं  उनकी मीठी बातों में

.

उनको खो देने का भी अहसास हुआ

रंग-ए-हिना जब देखा उनके हाथों में

.

खो कर दुनिया आख़िर उनको पाया है

यूँ  ही  नहीं  है नाम मेरा अफसानों में

.

हर शय में उनका ही चेहरा दिखता है

उनके  ही  सपने  हैं मे री  आँखों …

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Posted on September 21, 2017 at 8:30am — 7 Comments

जिसे ख़यालों में रखता हूँ - सलीम रज़ा रीवा



1212 1122 1212 22

............................................

जिसे ख़यालों में रखता हूँ शायरी की तरह.

मुझे वो जान से प्यारा है जिंदगी की तरह.

.

क़सम जो खाता था उल्फ़त में जीने मरने की.

वो सामने  से गुज़रता है अजनबी की तरह.

.

यूँ ही न बज़्म  से  तारीकियाँ  हुईं रुख़सत.

कोई न कोई तो आया है रोशनी की तरह.

.

खड़े हैं छत पे  हटा कर…

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Posted on September 18, 2017 at 9:30am — 23 Comments

ग़ज़ल - शर्मिन्दा कर रहा है कोई " सलीम रज़ा

.221 2121 1221 212

..................................

अपने हसीन रुख़ से हटा कर निक़ाब को,  

शर्मिन्दा  कर  रहा  है  कोई माहताब को 

.

कोई  गुनाहगार   या   परहेज़गार    हो,

रखता है रब सभी केअमल के हिसाब को 

.

उनकी निगाहे नाज़ ने मदहोश कर दिया,

मैं  ने  छुआ  नहीं है क़सम से शराब को 

.

दिल चाहता है उनको दुआ से नावाज़ दूँ,

जब देखता हूँ बाग में खिलते गुलाब को 

.

ये ज़िन्दगी तिलिस्म के जैसी है…

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Posted on September 13, 2017 at 8:00am — 17 Comments

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