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Nilesh Shevgaonkar
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Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आ. गुलशन जी ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ..बधाई "
5 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आ. महेंद्र जी अच्छी ग़ज़ल हुई है ...दूसरे शेर में मिसरों का कोई ख़ास रब्त नहीं है ...सडक,  रास्ता ..डगर... सब समानार्थी ही हैं....ये लोग रौशनी में दब के मर गए कैसे.... ये बहुत आला मिसरा है.... बहुत ख़ूब लेकिन इसका सानी इसके साथ न्याय नहीं कर रहा…"
5 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"बहुत खूब आ. श्रोत्रिय जी अच्छी ग़ज़ल हुई  है ... थोड़ी कसावट और और होती तो ग़ज़ल और निखरती..सादर "
5 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आ. नायाब साहब.. अच्छी ग़ज़ल हुई है ..बधाई ..सजर को शजर कर लें सादर "
5 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"शुक्रिया... वैसे हर पोस्ट पर ये कॉपी पेस्ट कर के काम टालने से बेहतर कमेंट न करते तो ठीक रहता...सादर "
14 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आ. गिरिराज जी,परिवार को समर सर उर्दू के हिसाब से   लिख गए हैं शायद ...जिसमें  परीवार पढ़ा जाता है ... लेकिन चूँकि यह हिंदी का शब्द है  अत: परिवार सही वज़न होगा ...दूसरा मिसरा शायद यूँ हो... किताब हाथ में और इक सुख़न का कासा…"
19 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"वाह वा.. आ रवि जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है ..बधाई "
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"बहुत ख़ूब आ. मुनीश जी मतले के मिसरों में रब्त की कमी है कज़ा से गले मिलना यानी मर जाना ...   इस शेर   में ..मौत से सामना होने वाला भाव ला सकें तो बेहतर रहेगा सादर "
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"वाह आ. मोहन जी,ग़ज़ल के लिए बधाई ... गवाच का अर्थ बताने की कृपा करें सादर  "
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आ. लक्ष्मण जी,अच्छी   ग़ज़ल हुई है ...बधाई "
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आ. हाश्मी साहब, अभी सहमत नहीं हो पाया हूँ ...सादर "
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"शुक्रिया आ. गुरप्रीत जी "
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"शुक्रिया आ. श्रोत्रिय जी "
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"वाह वाह वाह वाह...क्या खूब ग़ज़ल कही है  आपने ..हर शेर पर दाद प्रस्तुत है ..बधाई सादर "
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आ. डॉ. साहब.. मतले के दोनों मिसरे एक ही बात अलग ढंग से कह रहे हैं जिससे मतला कमज़ोर हो रहा है...पूरे ख़याल ही को वापस बुनने का प्रयत्न कीजिये सादर "
23 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"शुक्रिया आ. डॉ साहब '"
23 hours ago

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल नूर की - तेरे सदमे से उबर जाऊँगा,

२१२२/११ २ २/२२ (११२)

.
तेरे सदमे से उबर जाऊँगा,
न उबर पाया तो मर जाऊँगा.
.
अपनी ही मौत का इल्ज़ाम हूँ मैं
क्यूँ किसी ग़ैर के सर जाऊँगा.
.
मेरी बेटी! तू मुझे “भौ” कर के  
जब डरायेगी तो डर जाऊँगा.
.
बूँद रहमत की, फ़क़त एक ही बूँद  
काश बरसे तो मैं तर जाऊँगा.
.
आती सदियों की तलब की ख़ातिर
जाम कुछ “नूर” से भर जाऊँगा.  
.
निलेश "नूर"
.
मौलिक/ अप्रकाशित 

Posted on May 23, 2017 at 7:00pm — 14 Comments

ग़ज़ल नूर की- किसे गुरेज़ जो दो-चार झूठ बोले है,

१२१२/११२२/१२१२/२२ (११२)

.

किसे गुरेज़ जो दो-चार झूठ बोले है,

मगर वो शख्स लगातार झूठ बोले है.

.

चली भी आ कि तुझे पार मैं लगा दूँगी, 

हमारी नाव से मँझधार झूठ बोले है.

.

सवाल-ए-वस्ल पे करना यूँ हर दफ़ा इन्कार 

ज़रूर मुझ से मेरा यार झूठ बोले है.

.

कहानी ख़ूब लिखी है ख़ुदा ने दुनिया की,

कि इस में जो भी है किरदार, झूठ बोले है. 

.

पटकना रूह का ज़िन्दान-ए-जिस्म में माथा,

बिख़रना तय है प् दीवार झूठ बोले है.   

.

निलेश…

Continue

Posted on May 21, 2017 at 9:33am — 24 Comments

ग़ज़ल नूर की-मैं पहले-पहल शौक़ से लाया गया दिल में

22 11 22 11 22 11 22

.

मैं पहले-पहल शौक़ से लाया गया दिल में

फ़िर नाज़ से कुछ रोज़ बसाया गया दिल में.

.

वो ख़त तो बहुत बाद में शोलों का हुआ था,

तिल तिल के उसे पहले जलाया गया दिल में.

.

हालाँकि मुहब्बत वो मुकम्मल न हो पाई 

शिद्दत से बहुत जिस को निभाया गया दिल में.

.

अंजाम पता है हमें कुछ और है फिर भी,  

हीरो को हिरोइन से मिलाया गया दिल में.   

.

हम सच में तेरी राह में कलियाँ क्या बिछाते

पलकों को मगर सच में बिछाया गया…

Continue

Posted on May 16, 2017 at 7:30pm — 22 Comments

ग़ज़ल नूर की- नुमायाँ है तू अपनी गुफ़्तार में,

122/122/122/12 

.

नुमायाँ है तू अपनी गुफ़्तार में,

सफ़ाई न दे हम को बेकार में.

.

फ़क़त एक मिसरे में गीता सुनो

है संसार मुझ में, मैं संसार में.

.

ये तामीर-ए-क़ुदरत भी कुछ कम नहीं

हिफ़ाज़त से रक्खा है गुल, ख़ार में.

.

कहानी को अंजाम होने तो दो

सभी लौट आयेंगे किरदार में.

.

ऐ ज़िल्ल-ए-ईलाही!! ये इन्साफ़ हो,

कि चुनवा दो शैख़ू को दीवार में.

.

तू शिद्दत से माथा पटक कर तो देख

कोई दर निकल…

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Posted on May 13, 2017 at 9:30am — 20 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, Kewal Prasad said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

At 1:14pm on November 6, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय नीलेश भाई , सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिये आपको हार्दिक बधाईयाँ  !!!!!!

At 12:32pm on November 6, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे | कृपया अपना पता और नाम (जिस नाम से ड्राफ्ट/चेक निर्गत होगा), बैंक खता विवरणी एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर । 


आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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"बहुत शुक्रीया आदरणीय।"
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"धन्यवाद आदरणीय।"
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Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"सादर अभिवादन भाई निलेश जी। आपकी बात सही है। अभी कई मिसरों में सुधार की आवश्यकता है। आपकी मुखर और…"
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Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"धन्यवाद आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी।"
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Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"शुक्रीया जनाब आरिफ साहब।"
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"मुहतरम जनाब शकूर साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया"
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"मुहतरम जनाब सतविंदर कुमार साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया"
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"मुहतरम जनाब बासुदेव साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिय"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अजय जी बधाई आपको"
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"जनाब रिज़वान साहिब,ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफजाई का तहे दिल से शुक्रिया"
1 hour ago

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