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Nilesh Shevgaonkar
  • Male
  • Indore
  • India
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Nilesh Shevgaonkar commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आ दण्डपाणी जी, ग़ज़ल के प्रयास हेतु बधाई। कुछ जगह बह्र टूट रही है। एक टिप है कि सिर्फ मात्राएं गिनने की जगह रचना को लय और ताल पर गुनगुनाएं।  सादर"
13 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"आ. तुरंत साहब अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई। बस एक बात जो खटक रही है वो यह कि क़ाफ़िया की मात्रा को गिरा कर पढ़ना पड़ रहा है। हालांकि ऐसा मीर ने भी किया है लेकिन आमतौर पर ऐसा होना दोष माना जाता है।  आपकी रचना पर आपको पुनः बधाई"
13 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on सालिक गणवीर's blog post सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. सालिक साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई। चौथे शेर में मिरे लिख कर बहर तोड़ दी आपने। पाँचवें शेर का मतलब समझ नहीं सका मैं। अन्तिम शेर में तुम और तू आने से शुतुरगुरबा हो रहा है। देखियेगा। सादर"
13 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"धन्यवाद आदरणीया डिम्पल जी। आभार"
13 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"शुक्रिया आ. सालिक गणवीर जी, आप की बात से पहले भी मैं ये और कि पर बहुत कुछ सोच रहा था। अस्ल में अब भी सोच रहा हूँ। कुछ नए शब्द भी हैं जिनसे तरक़ीब बदल सकती है। सोचता हूँ। आपका बहुत धन्यवाद।"
13 hours ago
Dimple Sharma commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"आदरणीय नीलेश जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें, उर्दू की बज़्म में.. वाह बहुत ख़ूब आदरणीय,ये शेर बहुत सादा और बहुत ख़ूब हुआ है बधाई आपको।"
17 hours ago
सालिक गणवीर commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"मुहतरम ' नूर ' साहेब क्या ग़ज़ल कही है आपने. वाह.सराहना के लिये शब्द नहीं. वाआआआह. दूसरे शैर के सानी में "कि" चुभ रहा है. "ये" लिखें तो काम बन सकता है,आदरणीय."
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"शुक्रिया आ. समर सर, शुक्रिया आ. मनोज भाई "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"आ. समर सर,आयाम हिन्दी का शब्द है , जैसा ऊला में कहा गया है... और आयाम का अर्थ होता है डायमेंशन ..चूँकि नूर का घर सितारों में है इसलिए उसे वहीं चैन आएगा वो वहीँ ख़ुश होगा.. घर पर में पर वाली चिंता दुरुस्त है ..कुछ सोचता हूँ..ख़िराम का अर्थ जहाँ तक…"
yesterday
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"जनाब निलेश 'नूर' जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार करें ।  'तेरे कलाम में नया आयाम आएगा' इस मिसरे में 'आयाम' किस भाषा का शब्द है,और इसका अर्थ क्या है? बताने का कष्ट करें । 'करने लगूँगा रक्स सितारों…"
yesterday
Manoj kumar Ahsaas commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीय नूर साहब  आपके और आदरणीय समर साहब के विचार विमर्श को पढ़ रहा था मेरा निवेदन है कि "यादों का कमरा" वाला ख़्याल ज्यादा मजबूत है उसे ही सही करके रखा जाए बाकी  ग़ज़ल बेहतरीन है ही सादर"
yesterday
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"'यानी समुन्दर के धोखे में कोई क़तरा देख लिया' मेरे ख़याल में 'कोई' की जगह "उसने" शब्द उचित होगा । "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"आ. समर सर एवं मंच के सुधि पाठक गण!.मतले में बहुत विचार के बाद तरमीम की है ..अब मतला यूँ पढ़ा जाए...वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया यानी समुन्दर के धोखे में कोई क़तरा देख लिया. .साथ ही सुझाव भी दें कि अब यह कैसा लग रहा है.सादर "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा

तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा हर बार मुझ से पहले तेरा नाम आएगा. .अच्छा हुआ जो टूट गया दिल तेरे लिए वैसे भी तय नहीं था कि किस काम आएगा. .अब रात घिर चुकी है इसे लौट जाने दे यादों का क़ाफ़िला तो हर इक शाम आएगा.` `उर्दू की बज़्म में कभी हिन्दी चला के…See More
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी (~रूपम कुमार 'मीत')
"अब मुकम्मल हो गया शेर बधाई "
Sunday
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. "अमीर" साहब,यूँ तो मैं अपनी आख़िरी टिप्पणी कर  चुका हूँ अत: पुन: आना ठीक नहीं लगता है लेकिन चूँकि मेरा नाम पुकारा गया है तो मुझे हाज़िर होना पड़ा.मीर की ग़ज़ल को एक बार फिर पढ़ें ..थोड़ी देर बाद दोबारा पढ़ें तो शायद आप को ये इल्म हो कि…"
Sunday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"शुक्रिया आ. दण्डपाणी जी आभार "
Sunday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"शुक्रिया आ. रूपम जी,आपके लिए आज का टास्क है कि इस बह्र के अरकान लिखें..इससे आप की भी प्रैक्टिस हो जाएगी.चला के देख इस्लियेकाहा कि किसी ने कह दिया था की नहीं चलता :) सादर "
Sunday
dandpani nahak commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"आदरणीय नीलेश 'नूर' जी आदाब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! मतला क्या ख़ूब हुआ है दूसरा शैर लाज़वाब तीसरा शैर भी बहुत अच्छा ! वाह क्या कहने ! बहुत बधाई"
Sunday
Rupam kumar -'मीत' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"आ. निलेश 'नूर' साहिब, मतला बहूत खूब कहा आपने , मुझे बह्र एक दम से पढ़ के समझ नहीं आती, बच्चों के लिए बह्र लिख दिया कीजिए सादर और   ''उर्दू की बज़्म में कभी हिन्दी चला के देख''   यहाँ …"
Sunday

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा

तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा

हर बार मुझ से पहले तेरा नाम आएगा.

.

अच्छा हुआ जो टूट गया दिल तेरे लिए

वैसे भी तय नहीं था कि किस काम आएगा.

.

अब रात घिर चुकी है इसे लौट जाने दे

यादों का क़ाफ़िला तो हर इक शाम आएगा.`

`

उर्दू की बज़्म में कभी हिन्दी चला के देख

तेरे कलाम में नया आयाम आएगा.

.

उस सुब’ह धमनियों में ठहर जाएगा ख़िराम  

जिस भोर मेरे नाम का पैग़ाम…

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Posted on September 27, 2020 at 12:00pm — 10 Comments

ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया

वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया

तो क्या उस ने तेरी यादों वाला कमरा देख लिया?

.

वैसे उस इक पल में भी हम अपनों ही की भीड़ में थे

जिस पल दिल के आईने में ख़ुद को तन्हा देख लिया.

.

उस के जैसा दिल तो फिर से मिलता हम को और कहाँ

सो हमने इक राह निकाली, मिलता जुलता देख लिया.

.

मैख़ाने में एक शराबी अश्क मिलाकर पीता है

यादों की आँधी ने शायद उसे अकेला देख लिया.

.

महशर पर हम उठ आए उस की महफ़िल से ये कहकर

तेरी दुनिया तुझे मुबारक़!…

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Posted on September 14, 2020 at 5:30pm — 15 Comments

ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.

तू ये कर और वो कर बोलता है.

न जाने कौन अन्दर बोलता है

.

मेरे दुश्मन में कितनी ख़ामियाँ हैं

मगर मुझ से वो बेहतर बोलता है.

.

जुबां दिल की; मेरे दिल से गुज़रकर

मेरे दुश्मन का ख़ंजर बोलता है.

.

मैं कट जाऊं मगर झुकने न देना

मेरे शानों धरा सर बोलता है.

.

मैं हारा हर लड़ाई जीत कर भी

जहां सुन ले! सिकंदर बोलता है.

.

बहुत भारी पडूँगा अब कि तुम पर

अकेलों से दिसम्बर बोलता है.

.

नया मज़हब नई दुनिया बनाओ

ये…

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Posted on November 30, 2019 at 11:30pm — 10 Comments

ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए

उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए,

पंछी जो उड़ चले तो घरौंदे बिख़र गए.

.

सरहद पे गोलियों ने किया रक्स रात भर,

कितने घरों के नींद में सपने बिखर गए.

.

यादों की आँधियों ने रँगोली बिगाड़ दी

बरसों जमे हुए थे वो चेहरे बिखर गए.

.

समझा था जिस को चोर गदागर था वो कोई

ली जब तलाशी रोटी के टुकड़े बिखर गए.

.

तुम जो सँवार लेते तो मुमकिन था ये बहुत

उतना नहीं बिखरते कि जितने बिखर गए .

.

मुझ में कहीं छुपे थे अँधेरों के क़ाफ़िले…

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Posted on November 16, 2019 at 8:30pm — 13 Comments

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At 7:53pm on September 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय नीलेश जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया मैं बता नहीं सकता मैं कितना खुश हूँ आपने मेरी ग़ज़ल को सराहा मेरा तो आज का दिन बन गया ! ह्रदय से शुक्रिया
At 8:17pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
मुआफ़ी चाहता हूँ ! बढ़ाने का
At 8:16pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
हौसला बढ़ने का
At 8:15pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश जी आदाब . बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का
At 8:49pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश सर प्रणाम
बहुत शुक्रिया
At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

 
 
 

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