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Nilesh Shevgaonkar
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  • Indore
  • India
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Nilesh Shevgaonkar commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : कामकाजी बेटियों का खिलखिलाना भा गया // -- सौरभ
"आ. सौरभ सर,लम्बे अंतराल के बाद आपकी ग़ज़ल पढने को मिली. आनंद हुआ.ग़ज़ल के कुछ शेर अच्छे हुए हैं.मतले पर अमीरुद्दीन साहब से सहमत हूँ कि दोनों मिसरों में रब्त का आभाव है.  बेटियों की खिलखिलाहट का दर्द पीने से मैं कोई सम्बन्ध नहीं जोड़ सका. आप…"
Aug 18
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"धन्यवाद आ. ममता जी "
Jun 23
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"धन्यवाद आ. समर सर "
Jun 23
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"धन्यवाद आ. आज़ी तमाम भाई "
Jun 23
Mamta gupta commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"बेहतरीन ग़ज़ल की बधाई"
Jun 22
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"जनाब निलेश 'नूर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 21
Nilesh Shevgaonkar commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )
"ख़ूब हुई है यह ग़ज़ल आदरणीय.बढाई "
Jun 20
Aazi Tamaam commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"सादर प्रणाम नीलेश सर बेहद खूबसूरत ग़ज़ल है सहृदय बधाई"
Jun 16
Nilesh Shevgaonkar posted blog posts
Jun 16
Nilesh Shevgaonkar commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post इस को जरूरी रात में कोई जगा रहे-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. लक्ष्मण जी.ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है.बधाई "
Jun 16
Nilesh Shevgaonkar commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: उठाकर शहंशाह क़लम बोलता है
"आ. आज़ी भाई,अच्छा प्रयास हुआ है ग़ज़ल का...खतम और वहम की मात्राएँ देख लें..सादर "
Jun 16
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी "
Jun 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन। खूबसूरत गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jun 16
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - दिल लगाएँ, दिल जलाएँ, दिल को रुसवा हम करें
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी "
Jun 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - दिल लगाएँ, दिल जलाएँ, दिल को रुसवा हम करें
"आ. भाई नीलेश जी सादर अभिवादन ।सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jun 11
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - दिल लगाएँ, दिल जलाएँ, दिल को रुसवा हम करें
"शुक्रिया आ. सालिक जी "
Jun 11
सालिक गणवीर commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - दिल लगाएँ, दिल जलाएँ, दिल को रुसवा हम करें
"आदरणीय भाई Nilesh Shevgaonkarजी आदाब बेहद खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने,बधाई स्वीकार करें । "
Jun 11
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - दिल लगाएँ, दिल जलाएँ, दिल को रुसवा हम करें
"शुक्रिया आ. समर सर "
Jun 10
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - दिल लगाएँ, दिल जलाएँ, दिल को रुसवा हम करें
"जनाब निलेश जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 9
Nilesh Shevgaonkar commented on सालिक गणवीर's blog post चल आज मिल के दोनों.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. सालिक जी,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,,बधाई..मतले में चल के कारण शुतुरगुर्बा हो रहा है..देखिएगा सादर "
Jun 9

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा

ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा

यानी उस को पुकार कर जागा.   

.

एक अरसा गुज़ार कर जागा

ख्व़ाब में ख़ुद से हार कर जागा.

.

तेरी दुनिया बहुत नशीली थी

जिस्म को अपने पार कर जागा.

.

आंखें तस्वीर की बिगाड़ी थीं   

उनका काजल सुधार कर जागा.

.

ख़ुद-परस्ती में मैं उनींदा था  

फिर अना अपनी मार कर जागा.

.

शम्स ने तीरगी पहन ली थी

सुब’ह चोला उतार कर जागा.

.

रात भर आईने की आँखों में

दर्द अपने उभार कर जागा. …

Continue

Posted on June 15, 2021 at 9:30am — 8 Comments

ग़ज़ल नूर की - दिल लगाएँ, दिल जलाएँ, दिल को रुसवा हम करें

दिल लगाएँ, दिल जलाएँ, दिल को रुसवा हम करें

चार दिन की ज़िन्दगी में और क्या क्या हम करें?

.

एक दिन बौनों की बस्ती से गुज़रना क्या हुआ

चाहने वो यह लगे क़द अपना छोटा हम करें.

.

हाथ बेचे ज़ह’न बेचा और फिर ईमाँ बिका  

पेट की ख़ातिर भला अब और कितना हम करें?

.

चाहते हैं हम को पाना और झिझकते भी हैं वो  

मसअला यानी है उनका ख़ुद को सस्ता हम करें.

.

इक सितम से रू-ब-रु हैं पर ज़ुबां ख़ुलती नहीं

ये ज़माना चाहता है उस का चर्चा हम करें.…

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Posted on June 8, 2021 at 12:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल नूर की- मेरी आँखों में तुम को ख़ाब मिला?

मेरी आँखों में तुम को ख़ाब मिला?

या निचोडे से  सिर्फ आब मिला.

.

सोचने दो मुझे समझने दो

जब मिला बस यही जवाब मिला.

.

दिल ने महसूस तो किया उस को   

पर न आँखों को ये सवाब मिला.

.

मैकदे में था जश्न-ए-बर्बादी

जिस में हर रिन्द कामयाब मिला.

.

इतना अच्छा जो मिल गया हूँ मैं

इसलिए कहते हो “ख़राब मिला.”

.

“नूर” चलने से पहले इतना कर

अपने हर कर्म का…

Continue

Posted on October 31, 2020 at 10:01am — 12 Comments

ग़ज़ल- नूर की .. शेख़ ओ बरहमन में यारी रहेगी

जो शेख़ ओ बरहमन में यारी रहेगी

जलन जलने वालों की जारी रहेगी.

.

मियाँ जी क़वाफ़ी को समझे हैं नौकर  

अना का नशा है ख़ुमारी रहेगी.  

.

गले में बड़ी कोई हड्डी फँसी है

अभी आपको बे-क़रारी रहेगी.

.

हुज़ूर आप बंदर से नाचा करेंगे

अकड आपकी गर मदारी रहेगी.

.

हमारे ये तेवर हमारे रहेंगे

हमारी अदा बस हमारी रहेगी.

.

हुज़ूर इल्तिजा है न हम से उलझिये

वगर्ना यूँ ही दिल-फ़िगारी रहेगी.

.

ग़ज़ल “नूर” तुम पर न ज़ाया करेंगे …

Continue

Posted on October 29, 2020 at 6:00pm — 14 Comments

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At 7:53pm on September 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय नीलेश जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया मैं बता नहीं सकता मैं कितना खुश हूँ आपने मेरी ग़ज़ल को सराहा मेरा तो आज का दिन बन गया ! ह्रदय से शुक्रिया
At 8:17pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
मुआफ़ी चाहता हूँ ! बढ़ाने का
At 8:16pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
हौसला बढ़ने का
At 8:15pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश जी आदाब . बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का
At 8:49pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश सर प्रणाम
बहुत शुक्रिया
At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

 
 
 

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