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Nilesh Shevgaonkar
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  • Indore
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Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए

उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए, पंछी जो उड़ चले तो घरौंदे बिख़र गए. . सरहद पे गोलियों ने किया रक्स रात भर, कितने घरों के नींद में सपने बिखर गए. . यादों की आँधियों ने रँगोली बिगाड़ दी बरसों जमे हुए थे वो चेहरे बिखर गए. . समझा था जिस को चोर…See More
Saturday
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा
"उनकी आदत है मुकर जाने की...ये मिसरा बहर पर क़हर बन कर टूट पडा है.. देखिएगा .जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे बद-दुआओं से मर नहीं सकता... कौन ख़ुदा ??.देखिएगा सादर "
Saturday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"अनीस शेख जी अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ. क़मर साहब..अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ. नवीन जी,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है .. इन्शान को इंसान कर लेवें ..तुम्हारे हुस्न से कुछ जाम छलकेगा तस्व्वुर कर ।..इस मिसरे में शुतुरगुर्बा ऐब है ..अंतिम शेर में ज़ाना से क्या आशय है..स्पष्ट नहीं हुआ.. साथ ही ताक़बुले रदीफ़ दोष भी है.. अगर मानें…"
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"शुक्रिया आ. नवीन जी ..मैंने बहुत पहले से इस दोध को दोष मानना छोड़ दिया है... ज़रूरी है शेर होना..अब जिस मिसरे पर सब ग़ज़ल कह रहे हैं... उसी मिसरे की ओरिजिनल ग़ज़ल देखिये . फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा…"
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"शुक्रिया आ. डॉ छोटेलाल सिंह जी "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"शुक्रिया आ. मो. अनीस साहब "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ. मनन जी,ग़ज़ल के कई शेरों  के मिसरों में आपस में रब्त कम है..भाव हालाँकि स्पष्ट हैं लेकिन कहन उलझा हुआ है..संज्ञान लीजिये प्रस्तुति हेतु बधाई "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ. नादिर खान साहेब,अच्छी ग़ज़ल के लिए ढेरों दाद ..सादर "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ. लक्ष्मण जी,ग़ज़ल  सराहनीय हुई है लेकिन समर सर की बातों का संज्ञान लेकर अगली प्रस्तुति में और बेहतर करने का प्रयत्न करें..सादर "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"शुक्रिया आ. मनन जी "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"शुक्रिया आ. दण्डपाणी जी,ग़ज़ल आपको पसन्द आई तो लिखना सार्थक हुआ आभार "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"शुक्रिया भाई नादिर खान साहब "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"शुक्रिया आ. लक्ष्मण जी "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"शुक्रिया आ. रचना जी "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"शुक्रिया आ. समर सर,आप से दाद मिलना ग़ज़ल को मआनी देता है..आभार "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"शुक्रिया आ. आसिफ़ साहब "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"शुक्रिया आ. अन्जली जी "
Sep 28
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"धन्यवाद आ. अजय जी,आप की दाद से अभिभूत हूँ...वर्णित शेर में विरोधाभास स्पस्ट करेंगे तो संभवत: सुधार कर सकूँ.. आभार "
Sep 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए

उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए,

पंछी जो उड़ चले तो घरौंदे बिख़र गए.

.

सरहद पे गोलियों ने किया रक्स रात भर,

कितने घरों के नींद में सपने बिखर गए.

.

यादों की आँधियों ने रँगोली बिगाड़ दी

बरसों जमे हुए थे वो चेहरे बिखर गए.

.

समझा था जिस को चोर गदागर था वो कोई

ली जब तलाशी रोटी के टुकड़े बिखर गए.

.

तुम जो सँवार लेते तो मुमकिन था ये बहुत

उतना नहीं बिखरते कि जितने बिखर गए .

.

मुझ में कहीं छुपे थे अँधेरों के क़ाफ़िले…

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Posted on November 16, 2019 at 8:30pm

ग़ज़ल नूर की- लगती हैं बेरंग सारी तितलियाँ तेरे बिना

लगती हैं बेरंग सारी तितलियाँ तेरे बिना

जाने अब कैसे कटेंगी सर्दियाँ तेरे बिना.

.

फैलता जाता है तन्हाई का सहरा ज़ह’न में

सूखती जाती हैं दिल की क्यारियाँ तेरे बिना.

.

साथ तेरे जो मुसीबत जब पड़ी, आसाँ लगी

हो गयीं दुश्वार सब आसानियाँ तेरे बिना.

.

तू कहीं तो है जो अक्सर याद करता है मुझे

क्यूँ सताती हैं वगर्ना हिचकियाँ तेरे बिना?

.

वक़्त लेकर जा चुका आँखों से ख़ुशियों के गुहर   

अब भरी हैं ख़ाक से ये सीपियाँ तेरे बिना.…

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Posted on July 2, 2019 at 7:30am — 7 Comments

ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे

.

सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे

उनकी आँखों में जो मेरे वास्ते पानी रहे.

.

मैं किसी को जोड़ने में घट भी जाऊँ ग़म न हो

ज़िन्दगानी के गणित में इतनी नादानी रहे.

.

क़त्ल होते वक़्त भी मैं मुस्कुराता ही रहूँ

ताकि क़ातिल को मेरे ता-उम्र हैरानी रहे.

.

क़ाफ़िला यादों का गुज़रे रेगज़ार-ए-दिल से जब

आँखों में लाज़िम है सारी रात तुग़्यानी रहे.

.

क्यूँ भला सोचूँ वो दुश्मन है मेरा या कोई दोस्त

मैं रहूँ…

Continue

Posted on November 2, 2018 at 6:45pm — 29 Comments

ग़ज़ल नूर की- सँभाले थे तूफ़ाँ उमड़ते हुए

सँभाले थे तूफ़ाँ उमड़ते हुए

मुहब्बत से अपनी बिछड़ते हुए.

.

समुन्दर नमाज़ी लगे है कोई

जबीं साहिलों पे रगड़ते हुए.

.

हिमालय सा मानों कोई बोझ है

लगा शर्म से मुझ को गड़ते हुए.

.

“हर इक साँस ने”; उन से कहना ज़रूर  

उन्हें ही पुकारा उखड़ते हुए.  

.

हराना ज़माने को मुश्किल न था  

मगर ख़ुद से हारा मैं लड़ते  हुए.

.

ज़रा देर को शम्स डूबा जो “नूर”

मिले मुझ को जुगनू अकड़ते हुए.

.

निलेश "नूर"

मौलिक/…

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Posted on October 28, 2018 at 10:30am — 22 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 7:53pm on September 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय नीलेश जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया मैं बता नहीं सकता मैं कितना खुश हूँ आपने मेरी ग़ज़ल को सराहा मेरा तो आज का दिन बन गया ! ह्रदय से शुक्रिया
At 8:17pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
मुआफ़ी चाहता हूँ ! बढ़ाने का
At 8:16pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
हौसला बढ़ने का
At 8:15pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश जी आदाब . बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का
At 8:49pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश सर प्रणाम
बहुत शुक्रिया
At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

 
 
 

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