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Nilesh Shevgaonkar
  • Male
  • Indore
  • India
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नादिर ख़ान commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"वाह वाह पढ़कर आनंद आ गया ....  बेहतरीन ग़ज़ल कही आदरणीय नीलेश जी आपने .... "
Tuesday
vijay nikore commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"बहुत ही दिलकश गज़ल लिखी है। बधाई।"
Tuesday
Mohammed Arif commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"आदरणीय नीलेश जी आदाब,                           लाजवाब ग़ज़ल । दिल को सुकून की बारिश देने वाली ग़ज़ल । वैसे भी मालवांचल में भीषण गरमी और उत्तर भारत में आँधी-तूफान का ज़बर्दस्त दौर चल रहा है…"
Tuesday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"शुक्रिया आ. लक्ष्मण धामी जी "
Tuesday
Dr Ashutosh Mishra commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -कब है फ़ुर्सत कि तेरी राहनुमाई देखूँ?
"आदरणीय भाई निलेश जी आपकी रचना पर प्रतिक्रियाओं के माध्यम से बहुत कुछ सीखने को मिला ..इस रचना पर भी हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर "
May 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"आ. भाई नीलेश जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 14
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"धन्यवाद आ. हर्ष जी आभार "
May 14
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"शुक्रिया आ. समर सर..ग़ज़ल  पोस्ट करने के बाद कुछ विचार उठे थे इसलिए कमेंट में कह दिए,ग़ज़ल आप के समर्थन से पूर्ण हुई..सादर "
May 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -कब है फ़ुर्सत कि तेरी राहनुमाई देखूँ?
"आ. भाई नीलेश जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 13
Harash Mahajan commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"वाह आदरणीय नूर साहब वाह । दिली दाद , हर शेर खूब है सर ।  लाजवाब । सादर"
May 13
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"जनाब निलेश 'नूर'साहिब आदाब,मुझको तो जो ग़ज़ल आपने पोस्ट की है उसमें किसी तरमीम की गुंजाइश नहीं लगती,इस बढ़िया ग़ज़ल के लिए शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
May 13
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"मतले और कुछ शेरों के लिए एक दो विचार और चल रहे हैं.. बताइयेगा कौन से बेहतर हैं...मतला जब उन को पता था है हवाओं की ज़ुबाँ और फिर क्यूँ रखे अपने भी चिराग़ों ने गुमाँ और.उन को था पता अब है हवाओं की ज़ुबाँ और क्यूँ फिर भी रखे अपने चिराग़ों ने…"
May 13
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर

था उन को पता अब है हवाओं की ज़ुबाँ और उस पर भी रखे अपने चिराग़ों ने गुमाँ और.  . रखता हूँ छुपा कर जिसे, होता है अयाँ और  शोले को बुझाता हूँ तो उठता है धुआँ और . ले फिर तेरी चौखट पे रगड़ता हूँ जबीं मैं   उठकर तेरे दर से मैं भला जाऊँ कहाँ और? . इस…See More
May 13
Nilesh Shevgaonkar commented on santosh khirwadkar's blog post यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया....संतोष!!
"अच्छी ग़ज़ल हुई है संतोष दादा कहीं कहीं सपाट बयानी लग रही है..सादर "
May 13
Nilesh Shevgaonkar commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post समझ गया हूँ
"वाह बहुत खूब आ. गोपाल नारायण जी बधाई "
May 12
Nilesh Shevgaonkar commented on rajesh kumari's blog post मेरी ज़मीन मेरा आसमाँ बदल डालो (ग़ज़ल 'राज')
"आ. राजेश दीदी,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है ..बधाई स्वीकार करें सादर "
May 12
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -कब है फ़ुर्सत कि तेरी राहनुमाई देखूँ?
"धन्यवाद आ. समर सर,जुलूस वाले शेर को भी आपके कहे अनुसार बदल लिया है ... कभी -कभी मान भी लेता हूँ, कभी नहीं भी मानता हूँ..किताब पर भरोसा ज़रूरी है या रब पर? जब ये सवाल मैं ख़ुद से करता हूँ तो पाता हूँ कि रब पर भरोसा कर के मनुष्य अधिक विनम्र  और…"
May 11
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -कब है फ़ुर्सत कि तेरी राहनुमाई देखूँ?
"मतला बहुत उम्दा हो गया है । 'इन किताबों पे भरोसा ही नहीं अब मुझ को मुस्कुराहट में किसी,रब की लिखाई देखूँ' ऊला मिसरा कहता है कि "अब"मुझ को भरोसा नहीं,यानी पहले भरोसा था,तो फिर ऐसा क्यों हुआ कि अब भरोसा नहीं?आपकी कही हुई बात स्पष्ट…"
May 11
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -कब है फ़ुर्सत कि तेरी राहनुमाई देखूँ?
"धन्यवाद आ. तेजवीर सिंह जी आभार "
May 11
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -कब है फ़ुर्सत कि तेरी राहनुमाई देखूँ?
"आ. समर सर,ग़ज़ल पर आप की इस्लाह पाकर ग़ज़ल समृद्ध होती है ...वैसे तो सच्चाई को सचाई भी   लिखा/ कहा जाता है जैसे नदी को नद्दी ...लेकिन फिर भी शंका के निवारण के लिए मतला ही बदल देता   हूँ...अब मतला यूँ पढ़ें ...क्यूँ खँडर जिस्म पे जमती…"
May 11

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर

था उन को पता अब है हवाओं की ज़ुबाँ और

उस पर भी रखे अपने चिराग़ों ने गुमाँ और. 

.

रखता हूँ छुपा कर जिसे, होता है अयाँ और 

शोले को बुझाता हूँ तो उठता है धुआँ और

.

ले फिर तेरी चौखट पे रगड़ता हूँ जबीं मैं  

उठकर तेरे दर से मैं भला जाऊँ कहाँ और?

.

इस बात पे फिर इश्क़ को होना ही था नाकाम    

दुनिया थी अलग उन की तो अपना था जहाँ और.

.

आँखों की तलाशी कभी धडकन की गवाही 

होगी तो अयाँ होगा कि क्या क्या है निहाँ और.

.

करते हैं…

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Posted on May 13, 2018 at 9:12am — 10 Comments

ग़ज़ल नूर की -कब है फ़ुर्सत कि तेरी राहनुमाई देखूँ?

कब है फ़ुर्सत कि तेरी राहनुमाई देखूँ?

मुझ को भेजा है जहाँ में कि सचाई देखूँ.

.

ये अजब ख़ब्त है मज़हब की दुकानों में यहाँ

चाहती हैं कि मैं ग़ैरों में बुराई देखूँ.

.

उन की कोशिश है कि मानूँ मैं सभी को दुश्मन

ये मेरी सोच कि दुश्मन को भी भाई देखूँ.

.

इन किताबों पे भरोसा ही नहीं अब मुझ को,   

मुस्कुराहट में फ़क़त उस की लिखाई देखूँ.

.

दर्द ख़ुद के कभी गिनता ही नहीं पीर मेरा  

मुझ पे लाज़िम है फ़क़त पीर-पराई देखूँ.

.

अब कि बरसात में…

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Posted on May 10, 2018 at 8:43pm — 10 Comments

ग़ज़ल नूर की - याद आया है गुज़रा पल कोई

याद आया है गुज़रा पल कोई
लेगी अँगड़ाई फिर ग़ज़ल कोई.
.
कोशिशें और कोई करता है
और हो जाता है सफल कोई.
.
ज़िन्दगी एक ऐसी उलझन है
जिस का चारा नहीं न हल कोई.
.
इश्क़ में हम तो हो चुके रुसवा
वो करें तो करें पहल कोई.
.
हिज्र में आँसुओं का काम नहीं   
ये इबादत में है ख़लल कोई.
.
इक सिकंदर था और इक हिटलर
आज तू है तो होगा कल कोई.
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित  

Posted on May 9, 2018 at 7:54am — 11 Comments

ग़ज़ल नूर की -तू जहाँ कह रहा है वहीं देखना

तू जहाँ कह रहा है वहीं देखना

शर्त ये है तो फिर.. जा नहीं देखना.

.

जीतना हो अगर जंग तो सीखिये

हो निशाना कहीं औ कहीं देखना.

.

खो दिया गर मुझे तो झटक लेना दिल

धडकनों में मिलूँगा..... वहीँ देखना.

.

देखता ही रहा... इश्क़ भी ढीठ है

हुस्न कहता रहा अब नहीं देखना.

.

कितना आसाँ है कहना किया कुछ नहीं

मुश्किलें हमने क्या क्या सहीं देखना.

.

एक पल जा मिली “नूर” से जब नज़र

मुझ को आया नहीं फिर कहीं देखना.

.

निलेश…

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Posted on May 6, 2018 at 8:30pm — 10 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 8:49pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश सर प्रणाम
बहुत शुक्रिया
At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

At 1:14pm on November 6, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय नीलेश भाई , सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिये आपको हार्दिक बधाईयाँ  !!!!!!

At 12:32pm on November 6, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे | कृपया अपना पता और नाम (जिस नाम से ड्राफ्ट/चेक निर्गत होगा), बैंक खता विवरणी एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर । 


आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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