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Nilesh Shevgaonkar
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post "नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना
"बेहतरीन ..बहुत शानदार आत्मचिन्तन कराती रचना.."
Mar 16
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post "नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना
"शुक्रिया आ. समर सर,आप ने जिन बिन्दुओं पर ध्यान दिलाया है मैं उन पर विचार कर के उन में तरमीम सोचता हूँ ...बहुत बहुत आभार "
Mar 16
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post "नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना
"शुक्रिया आ. सुशिल सरना जी "
Mar 16
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post "नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना
"जनाब निलेश 'नूर'साहिब आदाब,बहुत उम्दा जज़्बाती और सच्ची नज़्म लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें । कुछ मिसरों की तरफ़ तवज्जो दिलाना चाहूँगा :- 'धर्म-ओ- मज़हब की सियासत की ख़िलाफ़ वर्ज़ी की' इस मिसरे में…"
Mar 16
Sushil Sarna commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post "नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना
"आदरणीय नीलेश जी गहन भावों की इस सुंदर ग़ज़ल के लिए दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।"
Mar 16
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post "नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना
"शुक्रिया आ. राघव साहब "
Mar 15
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post "नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना
"शुक्रिया आ. मोहम्मद आरिफ़ साहब"
Mar 15
Raghav Priydarshi commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post "नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना
"कौन हिन्दू है यहाँ कौन मुसलमान यहाँ कब्र की ख़ाक, चिताओं के धुएँ से पूछो.सब परिन्दे हैं मुहब्बत की फ़ज़ाओं वाले.  .आइये मिल के जलाते हैं मुहब्बत का चिराग़ तेल भी हम ही बनें और हमीं बाती बनें, इल्म का नूर बरसने और सहर होने…"
Mar 15
Raghav Priydarshi commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post "नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना
"आदरणीय नीलेश जी, 'धर्म-ओ-मज़हब की सियासत की ख़िलाफ़वर्ज़ी' करनेवालों वह सब झेलना ही पड़ता है जिसका जिक्र आपने इस नज़म में किया है. कभी किसी कबीर को हाथी के पैरों तले दाल दिया जाता है तो कभी किसी गाँधी को गद्दार कहा जाता है, गालियाँ दी जाती है और…"
Mar 15
Mohammed Arif commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post "नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना
"आदरणीय नीलेश जी आदाब, समंवय, साम्प्रदायिक सद्भावना से परिपूर्ण बेहतरीन अशआर के लिए दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
Mar 15
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

"नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना

२१२२/११२२/११२२/२२ कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना न तो माँ बाप चुनें और न घर ही को चुना हम ने ये भी न चुना था कि बशर हो जायें. हम को इंसान बना कर था यहाँ भेजा गया, कैसे मज़हब के कई ख़ानों में तक्सीम हुए? क्यूँ सिखाये गए हम को ये सबक नफरत के? .हम ने दहशत से परे जा के बुना इक सपना अपनी दुनिया न सही, काश हो आँगन अपना ऐसा आँगन कि जहाँ साथ पलें राम-ओ-रहीम. .जुर्म ये था कि जलाया था अँधेरों में चराग़ हम ने नफ़रत की हवाओं के मुख़ालिफ़ बन कर धर्म-ओ-मज़हब की सियासत की ख़िलाफ़वर्ज़ी की. . मुआशरा तल्ख़ हुआ…See More
Mar 15
Nilesh Shevgaonkar commented on Mahendra Kumar's blog post एक ख़तरनाक आतंकवादी
"सभी साथियों से निवेदन है कि रचना पर टिप्पणी करें न कि क्यूँ, कब, कैसा..कहाँ आदि पर ....लेखक की स्वतंत्रता का हनन न please ..विषय से सहमत या असहमत हुआ जा सकता है .....रचना नवीनता लिये हुए है.. मुझे पसंद आयी.. सादर "
Mar 9
Nilesh Shevgaonkar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (हसीनों में मुहब्बत ढूंढता है )
"बहुत खूब ..बधाई "
Mar 8
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की -क्या है ज़िन्दगी,
"शुक्रिया आ. महेंद्र जी "
Mar 8
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की -क्या है ज़िन्दगी,
"शुक्रिया आ. गिरिराज जी "
Mar 8
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की -क्या है ज़िन्दगी,
"शुक्रिया आ. बैजनाथ जी "
Mar 8

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Gender
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Indore-MP
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Profession
Civil Engineer

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"नूर" ....कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना

२१२२/११२२/११२२/२२

कब चुना हमने मुसलमान या हिन्दू होना

न तो माँ बाप चुनें और न घर ही को चुना

हम ने ये भी न चुना था कि बशर हो जायें.



हम को इंसान बना कर था यहाँ भेजा गया,

कैसे मज़हब के कई ख़ानों में तक्सीम हुए?

क्यूँ सिखाये गए हम को ये सबक नफरत के?

.

हम ने दहशत से परे जा के बुना इक सपना

अपनी दुनिया न सही, काश हो आँगन अपना

ऐसा आँगन कि जहाँ साथ पलें राम-ओ-रहीम.

.

जुर्म ये था कि जलाया था अँधेरों में चराग़

हम ने नफ़रत की हवाओं के…

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Posted on March 14, 2017 at 9:30pm — 10 Comments

ग़ज़ल-नूर की -क्या है ज़िन्दगी,

२१२२,२१२२, २१२२, २१२ 

.

सोचने लगता हूँ अक्सर मैं कि क्या है ज़िन्दगी,

आग पानी आसमां धरती हवा है ज़िन्दगी.

.

मौत जो मंज़िल है उसका रास्ता है ज़िन्दगी,

या कि अपने ही गुनाहों की सज़ा है ज़िन्दगी.

.

बिन तुम्हारे इक मुसलसल हादसा है ज़िन्दगी,

सच कहूँ! ज़िन्दा हूँ लेकिन बेमज़ा है ज़िन्दगी.

.

ज़िन्दगी की हर अलामत यूँ तो आती है नज़र,

शोर है शहरों में फिर भी लापता है ज़िन्दगी.

.…

Continue

Posted on March 4, 2017 at 2:37pm — 10 Comments

ग़ज़ल नूर की : इश्क़ हुआ है क्या?

22. 22. 22. 22. 22. 22. 2



तन्हा शाम बिताते हो
तुम, इश्क़ हुआ है क्या?

मंज़र में खो जाते हो तुम, इश्क़ हुआ है क्या?

.

बारिश से पहले बादल पर अपनी आँखों से,

कोई अक्स बनाते हो तुम, इश्क़ हुआ है क्या?



ज़िक्र किसी का आये तो फूलों से खिलते हो,

शर्माते सकुचाते हो तुम, इश्क़ हुआ है क्या?

.

होटों पर मुस्कान बिना कारण आ जाती है,

बेकारण झुँझलाते हो तुम, इश्क़ हुआ है क्या?-…

Continue

Posted on March 1, 2017 at 7:00pm — 17 Comments

ग़ज़ल नूर की : ये नहीं है कि हमें उन से मुहब्बत न रही,

२१२२, ११२२, ११२२, २२



ये नहीं है कि हमें उन से मुहब्बत न रही,

बस!! मुहब्बत में मुहब्बत भरी लज्ज़त न रही. 

.

रब्त टूटा था ज़माने से मेरा पहले-पहल,

रफ़्ता-रफ़्ता ये हुआ ख़ुद से भी निस्बत न रही.

.

ज़ह’न में कोई ख़याल और न दिल में हलचल,

ज़िन्दगी!! मुझ में तेरी कोई अलामत न रही.

.

उन से नज़रें जो मिलीं मुझ पे क़यामत टूटी,

वो क़यामत!! कि क़यामत भी क़यामत न रही.

.

याद गर कीजै मुझे, यूँ न…

Continue

Posted on February 21, 2017 at 12:00pm — 17 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, Kewal Prasad said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

At 1:14pm on November 6, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय नीलेश भाई , सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिये आपको हार्दिक बधाईयाँ  !!!!!!

At 12:32pm on November 6, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे | कृपया अपना पता और नाम (जिस नाम से ड्राफ्ट/चेक निर्गत होगा), बैंक खता विवरणी एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर । 


आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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