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Manoj kumar Ahsaas
  • 35, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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शिज्जु "शकूर" commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ. मनोज अहसास जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है, मोहतरम समर कबीर साहिब की इस्लाह से और निखार आ गया है। सादर बधाई आपको"
Feb 12
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर प्रणाम ये हम लोगों का सौभाग्य है कि हम आपकी देख रेख में हैं आपके सामने आकर ग़ज़ल बोलने लगती है खुद ब खुद उसके दोष दूर हो जाते हैं आपका सादर आभार"
Feb 8
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर प्रणाम ये हम लोगों का सौभाग्य है कि हम आपकी देख रेख में हैं आपके सामने आकर ग़ज़ल बोलने लगती है खुद ब खुद उसके दोष दूर हो जाते हैं आपका सादर आभार"
Feb 8
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय रक्षिता जी सादर आभार"
Feb 8
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मेरे पाँव में इक कांटे से तुझको कितना दर्द हुआ' इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें,मिसरा यूँ कर सकते हैं:- 'देख के मेरे पाँव में काँटा तुझको कितना दर्द…"
Feb 8
Rakshita Singh commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
" आदरणीय मनोज जी नमस्कार  बहुत सुंदर पंक्तियाँ, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 8
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

22 22 22 22 22 22 22 2हर लम्हा इक चोट नई थी मुझ पर क्या गुजरी होगी मेरी हस्ती टूट रही थी मुझ पर क्या गुजरी होगीमेरे पाँव में इक कांटे से तुझको कितना दर्द हुआजब तू शोलों से गुजरी थी मुझ पर क्या गुजरी होगीजिन सपनों को हमने मालिक के हाथों में सौंपा था उन सपनों में आग लगी थी मुझ पर क्या गुजरी होगीसारे रस्ते आकर के जिस रस्ते पर मिल जाते हैं उस रस्ते पर पीर घनी थी मुझ पर क्या गुजरी होगीछोड़ के सारी दुनियादारी कागज कलम उठाया था लफ्ज़ों में तासीर नहीं थी मुझ पर क्या गुजरी होगीझेल नहीं पाया मैं यारो…See More
Feb 8
Mahendra Kumar commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"अच्छी ग़ज़ल है आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. कृपया ग़ज़ल के साथ अरकान भी लिख दिया करें तो हम जैसे सीखने वालों के लिए आसानी रहेगी. सादर."
Jan 27
Ajay Tiwari commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज जी, अच्छे शेर हुए हैं. हार्दिक बधाई."
Jan 24
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक गीत मार्गदर्शन के निवेदन सहित: मनोज अहसास
"आदरणीय मित्रों का हार्दिक आभार सादर"
Jan 24
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"आदरणीय समर कबीर साहब बहुत बहुत आभार इस मिसरे में टाइप करते समय न छूट गया  आदरणीय सुर्खाब बशर और आदरणीय आशुतोष मिश्रा जी हार्दिक आभार सादर"
Jan 24
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"सभी सम्मानीय ,आदरणीय गुणी जनों का हार्दिक आभार सादर"
Jan 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई । शेष आ. समर जी कह ही चुके है ।सादर"
Jan 24
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"बहुत बहुत आभार आदरणीय समर कबीर साहब निश्चित ही ग़ज़ल थोड़ा जल्दबाज़ी में पोस्ट हो गई आपके होने से थोड़ी लापरवाही की आदत भी पड़ गई है कि कुछ गलत होगा तो आप बता देंगे माफी भी चाहता हूं मंच पर सक्रियता न होने के कारण ,प्रयास करूँगा सादर"
Jan 23
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन लगता है जल्द बाज़ी में पोस्ट की है,बधाई स्वीकार करें । 'करने से मेरे कुछ नहीं होना अगर तो' ये मिसरा बह्र से ख़ारिज हो रहा है,देखिये । 'सूनी पड़ी है तेरे बिना दिल की महफिलें' इस…"
Jan 22
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

कहते हैं देख लेता है नजरों के पार तूमेरी तरफ भी देख जरा एक बार तूहर बार मान लेता हूं तेरी रजा को मैं हर बार तोड़ता है मेरा एतबार तूकरने से मेरे कुछ नहीं होना अगर तो अहसासे बेनियाजी दे मुझ में उतार तूसूनी पड़ी है तेरे बिना दिल की महफिलें दो पल तो इस दयार में आकर गुजार तूमेरी रगों में भर गई है कितनी उलझनें है थोड़ा सा चैन दे भी दे मुझको उधार तूमेरी पुकार में नहीं है असलियत कोई या फिर चला गया है सदाओं के पार तूअहसास की नजर में है बेवफा सभी ये जिंदगी, ये रौनकें,चाहत,बहार तूमौलिक और अप्रकाशितSee More
Jan 22

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

22 22 22 22 22 22 22 2

हर लम्हा इक चोट नई थी मुझ पर क्या गुजरी होगी

मेरी हस्ती टूट रही थी मुझ पर क्या गुजरी होगी

मेरे पाँव में इक कांटे से तुझको कितना दर्द हुआ

जब तू शोलों से गुजरी थी मुझ पर क्या गुजरी होगी

जिन सपनों को हमने मालिक के हाथों में सौंपा था

उन सपनों में आग लगी थी मुझ पर क्या गुजरी होगी

सारे रस्ते आकर के जिस रस्ते पर मिल जाते हैं

उस रस्ते पर पीर घनी थी मुझ पर क्या गुजरी होगी

छोड़…

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Posted on February 8, 2019 at 12:26pm — 6 Comments

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

कहते हैं देख लेता है नजरों के पार तू

मेरी तरफ भी देख जरा एक बार तू

हर बार मान लेता हूं तेरी रजा को मैं

हर बार तोड़ता है मेरा एतबार तू

करने से मेरे कुछ नहीं होना अगर तो

अहसासे बेनियाजी दे मुझ में उतार तू

सूनी पड़ी है तेरे बिना दिल की महफिलें

दो पल तो इस दयार में आकर गुजार तू

मेरी रगों में भर गई है कितनी उलझनें

है थोड़ा सा चैन दे भी दे मुझको उधार तू

मेरी पुकार में नहीं है असलियत कोई

या फिर…

Continue

Posted on January 21, 2019 at 10:05pm — 4 Comments

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

एक ताज़ा ग़ज़ल

1222    1222     1222    1222

उदासी घिर के आई है चलो फिर कुछ नया कह दें

पलक को बेवफा कह दें या पैसे को खुदा कह दें

यहाँ से टूट कर जुड़ना नहीं मुमकिन मगर फिर भी

चलो एक बार फिर से आंसुओं को अलविदा कह दें

समंदर सी बड़ी नाकामियां है सामने अपने

ये सोचा है कि अपना नाम मिट्टी पर लिखा कह दें

तुम्हारे आने की उम्मीद की भी क्या जरूरत है

हमें ही लोग शायद कुछ दिनों में जा चुका कह दें

ये धड़कन…

Continue

Posted on January 19, 2019 at 10:39pm — 4 Comments

एक गीत मार्गदर्शन के निवेदन सहित: मनोज अहसास

आज मन मुरझा गया है

मर गई सब याचनाएं
धूमिल हुई योजनाएं
एक बड़ा ठहराव जैसे ज़िन्दगी को खा गया है
आज मन मुरझा गया है

खुरदरी सी हर सतह है
आंसुओ से भी विरह है
वेदना का तेज़ झोंका मेरा पथ बिसरा गया है
आज मन मुरझा गया है

किसलिये बाकी ये जीवन
किसलिये सांसों का बंधन
भावना ,विश्वास पर जब घुप अंधेरा छा गया है
आज मन मुरझा गया है

मौलिक और अप्रकाशित

Posted on December 15, 2018 at 9:20pm — 5 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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