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Manoj kumar Ahsaas
  • 37, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज 'अह्सास' जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ, मिसरा- उठती नहीं है तेरी तरफ मेरी उंगलियां, ग़ौर कीजियेगा कि किसी को बुरा कहने के लिए उंगलियां नहीं बल्कि एक ही उंगली उठाई जाती है, आप चाहें तो मिसरा यूँ कर सकते हैं :…"
Sunday
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । कुछ टंकण त्रुटियाँ देख लें ।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज कुमार जी, सादर अभिवादन । गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई ।"
Thursday
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

221   2121    1221    212अपनी खता लिखूं या ख़ुदा का किया लिखूं .इस दौरे नामुराद को किसका लिखा लिखूं .उठती नहीं है तेरी तरफ मेरी उंगलियां,फिर कौन सी कलम से तुझे बेवफा लिखूं.मैं तेरा नाम ला नहीं सकता बयान में, अपने ख़्याल पर बता किस का पता लिखूं.मेरी पुकार तो नहीं जाएगी आप तक, मैं किसके जरिए साल मुबारक नया लिखूं.है याद मुझको तेरा वो छूना मेरे क़दम,तब कैसे खुद को तेरी नज़र से गिरा लिखूं.अब जिंदगी के शोर ने सब कुछ भुला दिया, कैसे कोई ख़्याल ग़ज़ल में नया लिखूं.मुद्दत के बाद लिख रहा हूं आज दोस्तों,पर…See More
Thursday
Manoj kumar Ahsaas commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीय नूर साहब  आपके और आदरणीय समर साहब के विचार विमर्श को पढ़ रहा था मेरा निवेदन है कि "यादों का कमरा" वाला ख़्याल ज्यादा मजबूत है उसे ही सही करके रखा जाए बाकी  ग़ज़ल बेहतरीन है ही सादर"
Sep 28, 2020
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

221  2121   1221    212क्या है मेरे होठों की दुआ मैं भुला चुका. किस तरह मानता है ख़ुदा मैं भुला चुका.मेरे सभी गुनाहों को अब तू भी भूल जा, तुझसे हुई है जो भी खता मैं भुला चुका.असली खुशी दबी पड़ी है गर्त में कहीं, अब उसको ढूंढने की अदा मैं भुला चुका.नज़दीक से गुज़र के मेरे देख ले कभी, वो तेरी रहबरी की हवा मैं भुला चुका.मुझको पुकार ने की तो आदत सी हो गई, पर किसको दे रहा हूँ सदा मैं भुला चुका.इतना फरेब दुनिया में है ए मेरे ख़ुदा, उस दिलफरेब दिल की दग़ा मैं भुला चुका.तुमने तो कह दिया है ,मुझे है गमों…See More
Aug 8, 2020
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय मुसाफ़िर जी हार्दिक आभार सादर"
Aug 6, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई । मेरी कहीं इक बात पे मेरा में "कहीं " को "कही " कर लें ।"
Aug 6, 2020
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2×15एक ताज़ा ग़ज़ललाखों ग़म की एक दवा है, सोचो ! कुछ भी याद नहीं. कोई शिकायत करने आए,कह दो कुछ भी याद नहीं.हमने उसकी यादें जीकर उसकी याद के गीत लिखे,उसने पढ़कर लिख भेजा है, उसको कुछ भी याद नहीं.मेरी कहीं इक बात पे मेरा साथी रूठ गया मुझसे, मैंने वफ़ा की याद दिलाई,वो तो कुछ भी याद नहीं!मेरी तड़प तो भूलना बेहतर था तेरे जीने के लिए,तुमने काटी थीं जो रातें रो-रो,कुछ भी याद नहीं?सारे कागज़ के टुकड़े तो आग निगलकर खाक हुए,मेरे क़ासिद तुम भी जोर से बोलो, कुछ भी याद नहीं.वक्त गुज़र जाने पर दुनिया में अल्फाज़…See More
Aug 6, 2020
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय एवम आदरणीया साथियों का हार्दिक आभार सादर"
Aug 6, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"बढ़िया ग़ज़ल ज़नाब मनोज जी।"
Aug 4, 2020
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"जनाब मनोज कुमार अह्सास जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Jul 30, 2020
Dimple Sharma commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज अहसास जी नमस्ते, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jul 30, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज अहसास जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 30, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज अहसास जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 29, 2020
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2122   2122  2122   212.अपनी धुन में सब मगन हैं किससे क्या चर्चा करें. किसको अपना दिल दिखायें किसके ग़म पूछा करें.अब हमारी धडकनों का मोल कुछ लग जाये बस, चल चलें मालिक के दर पर और कोई सौदा करें.ज़िन्दगी इस खूबसूरत जाल में लिपटी रही, रात में लिक्खें ग़ज़ल दिन में तुझे सोचा करें.दे सके तो दे हमें वो वक़्त फिर मेरे ख़ुदा, रात भर जागा करें और खत उन्हें लिक्खा करें.सारा जीवन एक उलझन के भँवर में फँस गया, अपने रिश्तों की ख़ुशी को क्या करें क्या ना करें.रूठ जाने के लिए उनके बहाने बेशुमार, हम मनाने के लिए उनसे…See More
Jul 29, 2020

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Male
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saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

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अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

221   2121    1221    212

अपनी खता लिखूं या ख़ुदा का किया लिखूं .

इस दौरे नामुराद को किसका लिखा लिखूं .

उठती नहीं है तेरी तरफ मेरी उंगलियां,

फिर कौन सी कलम से तुझे बेवफा लिखूं.

मैं तेरा नाम ला नहीं सकता बयान में,

अपने ख़्याल पर बता किस का पता लिखूं.

मेरी पुकार तो नहीं जाएगी आप तक,

मैं किसके जरिए साल मुबारक नया लिखूं.

है याद मुझको तेरा वो छूना मेरे क़दम,

तब कैसे खुद को तेरी नज़र से गिरा…

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Posted on January 15, 2021 at 11:33pm — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

221  2121   1221    212

क्या है मेरे होठों की दुआ मैं भुला चुका.

किस तरह मानता है ख़ुदा मैं भुला चुका.

मेरे सभी गुनाहों को अब तू भी भूल जा,

तुझसे हुई है जो भी खता मैं भुला चुका.

असली खुशी दबी पड़ी है गर्त में कहीं,

अब उसको ढूंढने की अदा मैं भुला चुका.

नज़दीक से गुज़र के मेरे देख ले कभी,

वो तेरी रहबरी की हवा मैं भुला चुका.

मुझको पुकार ने की तो आदत सी हो गई,

पर किसको दे रहा हूँ सदा मैं भुला…

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Posted on August 8, 2020 at 9:30am

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2×15

एक ताज़ा ग़ज़ल

लाखों ग़म की एक दवा है, सोचो ! कुछ भी याद नहीं.

कोई शिकायत करने आए,कह दो कुछ भी याद नहीं.

हमने उसकी यादें जीकर उसकी याद के गीत लिखे,

उसने पढ़कर लिख भेजा है, उसको कुछ भी याद नहीं.

मेरी कहीं इक बात पे मेरा साथी रूठ गया मुझसे,

मैंने वफ़ा की याद दिलाई,वो तो कुछ भी याद नहीं!

मेरी तड़प तो भूलना बेहतर था तेरे जीने के लिए,

तुमने काटी थीं जो रातें रो-रो,कुछ भी याद नहीं?

सारे कागज़ के…

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Posted on August 6, 2020 at 12:12am — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2122   2122  2122   212

.

अपनी धुन में सब मगन हैं किससे क्या चर्चा करें.

किसको अपना दिल दिखायें किसके ग़म पूछा करें.

अब हमारी धडकनों का मोल कुछ लग जाये बस,

चल चलें मालिक के दर पर और कोई सौदा करें.

ज़िन्दगी इस खूबसूरत जाल में लिपटी रही,

रात में लिक्खें ग़ज़ल दिन में तुझे सोचा करें.

दे सके तो दे हमें वो वक़्त फिर मेरे ख़ुदा,

रात भर जागा करें और खत उन्हें लिक्खा करें.

सारा जीवन एक उलझन के भँवर में फँस…

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Posted on July 29, 2020 at 1:30am — 5 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
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शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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