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Manoj kumar Ahsaas
  • 36, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब मैं सदैव आपका बेहद शुक्रगुज़ार रहूंगा आपका मार्गदर्शन मेरे लिए बहुत बड़ा आशीर्वाद है कृपा बनाये रखिये सर"
Nov 15
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब इस ग़ज़ल पर पुनः काम करता हूँ सादर"
Nov 10
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'ग़ज़ल में अपने माज़ी के कई लम्हात लाया हूँ' इस मिसरे में 'अपने' की जगह "अपनी" कर लें। 'मैं टुकड़ा टुकड़ा हूं फिर भी तुम्हारे दिल का टुकड़ा…"
Nov 9
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'कोई दरिंदा घात लगाकर जब घर में ही बैठा हो,सहमी हुई मासूम कली का कितना बड़ा दुपट्टा हो' मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है । 'वक्त जरूरत पर ये दुनिया…"
Nov 9
Manoj kumar Ahsaas posted blog posts
Nov 7
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"हार्दिक आभार सागर साहब"
Nov 6
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"आपका जितना आभार मैं प्रकट करू, कम है बस आपको सादर प्रणाम करता हूँ सुझावों पर काम करता हूँ हार्दिक आभार"
Oct 21
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"आपका जितना आभार मैं प्रकट करू, कम है बस आपको सादर प्रणाम करता हूँ सुझावों पर काम करता हूँ हार्दिक आभार"
Oct 21
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'उतर आया अब आँखों में आंगन में भरा पानी' ये मिसरा बह्र में नहीं है,देखियेगा । 'उसे शफ्फाक रखने को मुझे आँसू छुपाने हैं' इस मिसरे में 'शफ्फाक' ग़लत…"
Oct 19
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल

1222   1222   1222   1222मुहब्बत के नगर में आँसुओं के कारखाने है, यहां रहकर पुराने जन्म के कर्ज़े चुकाने हैं.सड़क पर आके देखों तो झुलस जाओगे शिद्दत से,समाचारों में तो इस दौर के मौसम सुहाने हैं.उतर आया अब आँखों में आंगन में भरा पानी, मेरी चाहत के अफसाने में पटना के फसाने हैं.फलक पर चाँद चाहे चौथ का हो या हो पूनम का, हमें त्यौहार सब परदेस में तन्हा मनाने हैं.कहाँ पे आके बिगड़ी ये कहानी सोचना यारो,मुझे फिर से तुम्हें अपने सभी किस्से सुनाने हैं.दिखाई दे रहा है आज भी मुझको तेरा दामन, उसे शफ्फाक रखने को…See More
Oct 18
प्रशांत दीक्षित 'सागर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"बहुत सुंदर । बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 18
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"सादर प्रणाम आदरणीय कबीर साहब  यकीनन आप बहुत ही ध्यान से सभी ग़ज़लें पढ़ते हैं आपकी सरपरस्ती में हम लोग सीख रहें हैं हमारे लिए ये सौभाग्य की बात है बहुत बहुत आभार"
Oct 17
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'सबको दिल को हाल बताकर दिल से धोखा मत कर लेना' इस मिसरे में 'को' की जगह "का" कर लें ।"
Oct 17
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"इस जानकारी के लिए बेहद शुक्रिया सर मैं इस शेर पर पुनः विचार करता हूँ सादर"
Oct 16
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
""ग़ज़ाला" का अर्थ है हिरन का मादा बच्चा । और "ग़ज़ाल" का अर्थ है हिरन का बच्चा ।"
Oct 16
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल

2×16इश्क रुई के जैसा है पर,ग़म से रिश्ता मत कर लेना.लेकर चलने में आफत हो इतना गिला मत कर लेना.एक समय ऐसा आता है, सूरज भी मुरझा जाता है, चार दिनों की गर्दिश में तुम दामन मैला मत कर लेना.लाख बहाने पास है उसके, अब तो खफा होने के मुझसे,किंतु मना लेने में उसको अना को रुसवा मत कर लेना.सबसे अच्छे शब्दों में तुम अपनी बात बता सकते हो,लेकिन कोई समझ भी लेगा इसका भरोसा मत कर लेना.व्याकुल माता बचपन से ही बच्चों को यह समझाती है,कोई काम भी मेरे बच्चे ऐसा वैसा मत कर लेना.छोटी सी तस्वीर थी तेरी,जिसको बटुए में…See More
Oct 15

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

अहसास की ग़ज़ल

1222×4

ग़ज़ल में अपने माज़ी के कई लम्हात लाया हूँ,

परेशानी की हालत में इन्हीं से जा लिपटता हूँ.

एक ऐसा रास्ता जो देर तक खाली नहीं रहता,

मैं ऐसे रास्ते पर देर से खामोश बैठा हूँ.

लगी है आग वो घर में बुझाई ही नहीं जाती,

मैं दुनिया भर की कितनी उलझनें सुलझाता रहता हूँ.

गली के मोड़ से छुपकर तमाशा देखने वालो,

वतन का खून हूं मैं सूखकर मिट्टी से चिपका हूँ.

मुझे इससे बड़ी राहत जमाने में भला क्या माँ,

मैं…

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Posted on November 6, 2019 at 11:52pm — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल

2×15

कोई दरिंदा घात लगाकर जब घर में ही बैठा हो,

सहमी हुई मासूम कली का कितना बड़ा दुपट्टा हो.

अपनी बीवी के अश्कों की वो भी कद्र नहीं करता,

जिसने मम्मी को बचपन में रोज सिसकते देखा हो.

वक्त जरूरत पर ये दुनिया बेपर्दा हो जाती है,

दुनिया वाले तू भी मुझ पर थोड़ा सा बेपर्दा हो.

मेरे बच्चों में इक बच्चा ऐसा भी हो मेरे ख़ुदा,

मेरे जैसा दिल हो उसका ,उसके जैसा दिखता हो.

हमने कल्पना ऐसी बगिया की जाने क्योंकर कर ली,…

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Posted on November 6, 2019 at 12:13am — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल

1222   1222   1222   1222

मुहब्बत के नगर में आँसुओं के कारखाने है,

यहां रहकर पुराने जन्म के कर्ज़े चुकाने हैं.

सड़क पर आके देखों तो झुलस जाओगे शिद्दत से,

समाचारों में तो इस दौर के मौसम सुहाने हैं.

उतर आया अब आँखों में आंगन में भरा पानी,

मेरी चाहत के अफसाने में पटना के फसाने हैं.

फलक पर चाँद चाहे चौथ का हो या हो पूनम का,

हमें त्यौहार सब परदेस में तन्हा मनाने हैं.

कहाँ पे आके बिगड़ी ये कहानी…

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Posted on October 17, 2019 at 8:51pm — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल

2×16

इश्क रुई के जैसा है पर,ग़म से रिश्ता मत कर लेना.

लेकर चलने में आफत हो इतना गिला मत कर लेना.

एक समय ऐसा आता है, सूरज भी मुरझा जाता है,

चार दिनों की गर्दिश में तुम दामन मैला मत कर लेना.

लाख बहाने पास है उसके, अब तो खफा होने के मुझसे,

किंतु मना लेने में उसको अना को रुसवा मत कर लेना.

सबसे अच्छे शब्दों में तुम अपनी बात बता सकते हो,

लेकिन कोई समझ भी लेगा इसका भरोसा मत कर लेना.

व्याकुल माता बचपन से ही बच्चों को…

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Posted on October 15, 2019 at 2:01am — 4 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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