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Manoj kumar Ahsaas
  • 36, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल

1222   1222   1222   1222मुहब्बत के नगर में आँसुओं के कारखाने है, यहां रहकर पुराने जन्म के कर्ज़े चुकाने हैं.सड़क पर आके देखों तो झुलस जाओगे शिद्दत से,समाचारों में तो इस दौर के मौसम सुहाने हैं.उतर आया अब आँखों में आंगन में भरा पानी, मेरी चाहत के अफसाने में पटना के फसाने हैं.फलक पर चाँद चाहे चौथ का हो या हो पूनम का, हमें त्यौहार सब परदेस में तन्हा मनाने हैं.कहाँ पे आके बिगड़ी ये कहानी सोचना यारो,मुझे फिर से तुम्हें अपने सभी किस्से सुनाने हैं.दिखाई दे रहा है आज भी मुझको तेरा दामन, उसे शफ्फाक रखने को…See More
8 hours ago
प्रशांत दीक्षित 'सागर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"बहुत सुंदर । बधाई स्वीकार करें ।"
10 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"सादर प्रणाम आदरणीय कबीर साहब  यकीनन आप बहुत ही ध्यान से सभी ग़ज़लें पढ़ते हैं आपकी सरपरस्ती में हम लोग सीख रहें हैं हमारे लिए ये सौभाग्य की बात है बहुत बहुत आभार"
21 hours ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'सबको दिल को हाल बताकर दिल से धोखा मत कर लेना' इस मिसरे में 'को' की जगह "का" कर लें ।"
yesterday
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"इस जानकारी के लिए बेहद शुक्रिया सर मैं इस शेर पर पुनः विचार करता हूँ सादर"
yesterday
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
""ग़ज़ाला" का अर्थ है हिरन का मादा बच्चा । और "ग़ज़ाल" का अर्थ है हिरन का बच्चा ।"
yesterday
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल

2×16इश्क रुई के जैसा है पर,ग़म से रिश्ता मत कर लेना.लेकर चलने में आफत हो इतना गिला मत कर लेना.एक समय ऐसा आता है, सूरज भी मुरझा जाता है, चार दिनों की गर्दिश में तुम दामन मैला मत कर लेना.लाख बहाने पास है उसके, अब तो खफा होने के मुझसे,किंतु मना लेने में उसको अना को रुसवा मत कर लेना.सबसे अच्छे शब्दों में तुम अपनी बात बता सकते हो,लेकिन कोई समझ भी लेगा इसका भरोसा मत कर लेना.व्याकुल माता बचपन से ही बच्चों को यह समझाती है,कोई काम भी मेरे बच्चे ऐसा वैसा मत कर लेना.छोटी सी तस्वीर थी तेरी,जिसको बटुए में…See More
Tuesday
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब,नमस्कार सर मैंने इस शब्द को हिरण के बच्चे के अर्थ में प्रयोग किया है बाकी आप मार्गदर्शन देने की कृपा करें हार्दिक आभार सादर"
Monday
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'शिकारी आ गए हैं देख सारे गजाला की सदा में चीखता हूँ' इस शैर का भाव स्पष्ट नहीं है, 'गजाला' का अर्थ क्या है?"
Monday
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल

1222     1222      122जमाने भर की बातें सोचता हूँमगर मैं खुद में अब कितना बचा हूँसुहानी भोर किस्मत में नहीं हैभला मैं रात भर क्यों जागता हूँमुहब्बत एक हरजाई का घर है मैं उस घर से निकाला जा चुका हूँतरफदारी से तेरी क्या है हासिलमैं अपनों में अकेला पड़ गया हूँगुजारी जिंदगी सारी जहाँ पर मैं अब उस शहर में बिल्कुल नया हूँतुझे आवाज देने का सबब है मैं अब तन्हाई से डरने लगा हूँतरक्की कर रही है सारी दुनिया मैं अपनी हार पर पछता रहा हूँकिसी की मद भरी आंखों के फन से कदम रखता हूं गिरता कांपता हूँशिकारी आ गए…See More
Sunday
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"बहुत बहुत आभार आदरणीय समर कबीर साहब आपकी बहुमूल्य इस्लाह के बिना ग़ज़ल अधूरी रह जाती है आशीर्वाद बनाये रखिये सादर"
Oct 4
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"बहुत बहुत आभार आदरणीय समर कबीर साहब आपकी बहुमूल्य इस्लाह के बिना ग़ज़ल अधूरी रह जाती है आशीर्वाद बनाये रखिये सादर"
Oct 4
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"आदरणीय भाई मुसाफ़िर जी हार्दिक आभार  सादर"
Oct 4
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"बहुत बहुत आभार आदरणीय समर कबीर साहब आपकी बहुमूल्य इस्लाह के बिना ग़ज़ल अधूरी रह जाती है आशीर्वाद बनाये रखिये सादर"
Oct 4
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"हार्दिक आभार आदरणीय ब्रज जी सादर"
Oct 4
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'जैसे तुमने ठुकराया है मेरे दिल की ख्वाहिश को, हम भी तेरी दुनिया इक दिन ऐसे ही ठुकरा देंगे' इस शैर में शुतरगुरबा दोष है,देखियेगा । 'सपनों के सौदागर बैठे हैं…"
Oct 4

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Male
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saharanpur uttarpradesh
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India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

अहसास की ग़ज़ल

1222   1222   1222   1222

मुहब्बत के नगर में आँसुओं के कारखाने है,

यहां रहकर पुराने जन्म के कर्ज़े चुकाने हैं.

सड़क पर आके देखों तो झुलस जाओगे शिद्दत से,

समाचारों में तो इस दौर के मौसम सुहाने हैं.

उतर आया अब आँखों में आंगन में भरा पानी,

मेरी चाहत के अफसाने में पटना के फसाने हैं.

फलक पर चाँद चाहे चौथ का हो या हो पूनम का,

हमें त्यौहार सब परदेस में तन्हा मनाने हैं.

कहाँ पे आके बिगड़ी ये कहानी…

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Posted on October 17, 2019 at 8:51pm

अहसास की ग़ज़ल

2×16

इश्क रुई के जैसा है पर,ग़म से रिश्ता मत कर लेना.

लेकर चलने में आफत हो इतना गिला मत कर लेना.

एक समय ऐसा आता है, सूरज भी मुरझा जाता है,

चार दिनों की गर्दिश में तुम दामन मैला मत कर लेना.

लाख बहाने पास है उसके, अब तो खफा होने के मुझसे,

किंतु मना लेने में उसको अना को रुसवा मत कर लेना.

सबसे अच्छे शब्दों में तुम अपनी बात बता सकते हो,

लेकिन कोई समझ भी लेगा इसका भरोसा मत कर लेना.

व्याकुल माता बचपन से ही बच्चों को…

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Posted on October 15, 2019 at 2:01am — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल

1222     1222      122

जमाने भर की बातें सोचता हूँ

मगर मैं खुद में अब कितना बचा हूँ

सुहानी भोर किस्मत में नहीं है

भला मैं रात भर क्यों जागता हूँ

मुहब्बत एक हरजाई का घर है

मैं उस घर से निकाला जा चुका हूँ

तरफदारी से तेरी क्या है हासिल

मैं अपनों में अकेला पड़ गया हूँ

गुजारी जिंदगी सारी जहाँ पर

मैं अब उस शहर में बिल्कुल नया हूँ

तुझे आवाज देने का सबब है

मैं अब तन्हाई से डरने लगा…

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Posted on October 13, 2019 at 4:28pm — 4 Comments

अहसास की ग़ज़ल

2×15

चंद मुकम्मल ग़ज़लों से हम दुनिया को बहला देंगे,

और अधूरे मिसरे तेरी यादों का पहरा देंगे.

जो कुछ तेरी इच्छा है वो ही तुझको दिखला देंगे,

हम खुद को धोखे में रखकर प्यार का मोल चुका देंगे.

ऐसे वो अपने चेहरे के सारे दाग छुपा देंगे,

कंप्यूटर से बनी हुई उम्दा तस्वीर दिखा देंगे.

जब तक तेरी आंखों से बरसेगी करुणा की धारा,

तब तक ये दुनिया वाले मेरे अहसास जला देंगे.

कीमत जिन फूलों की दाता के दर पर भी नहीं…

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Posted on October 1, 2019 at 12:24am — 4 Comments

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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ग़ज़ल - चरागाँ इक मुहब्बत का जला दो तुम

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