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Saurabh Pandey's Discussions

ई-पत्रिका ओबीओ के दो वर्ष पूर्ण होने पर गोष्ठी-सह-कवि सम्मेलन

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Apr 6. 44 Replies

हर किसी संस्थान का अपना उद्येश्य हुआ करता है. आज मात्र दो वर्षों में साहित्यिक ई-पत्रिका ओपन बुक्स ऑनलाइन (ओबीओ) एक संस्थान बन चुकी है. साहित्यांगन में नामधन्य मठों की कभी नहीं रही. लेकिन लगनशील…Continue

Tags: इलाहाबाद, कवि-सम्मेलन, गोष्ठी

०१ अप्रील को इलाहाबाद में सम्मिलन-सह-काव्य गोष्ठी

Started this discussion. Last reply by AVINASH S BAGDE Apr 1. 24 Replies

दिनांक 01 अप्रील का दिन अभिनव…Continue

दिल्ली के गुलाबी मौसम में सम्मिलन सह काव्य-गोष्ठी

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Dec 27, 2011. 22 Replies

ओपेन बुक्स ऑनलाइन (ओबीओ) के प्रबन्धन द्वारा इसके प्रादुर्भाव काल से ही इसके उद्येश्यों के मुख्य विन्दुओं को सदा से मुखर रखा गया है. साहित्य की विधाओं पर सटीक चर्चा, साहित्यिक विषयों और विधाओं की…Continue

 

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Latest Activity

Saurabh Pandey commented on arunendra mishra's blog post जीवन तुझसे एक वर माँगू
"भाई अरुणेंद्र जी, आपकी वैचारिकता सनातन पारंपरिक सोच का परावर्तन है. रचना पाठक का ध्यान खींचने में सफल है.  पौराणिक बिम्बों का प्रयोग सटीक तरीके से हुआ है, इस हेतु आप बधाई के पात्र हैं.  जीवन को दो आवृतियों के साथ इंगित करना अच्छा लगा. बधाई…"
10 minutes ago
Saurabh Pandey commented on Albela Khatri's blog post एक गाना प्यार का ...
"भाई अलबेलाजी, आप आश्वस्त रहें.  इस खाल उधेड़ने की प्रक्रिया में हम ओबिओ वाले सिद्धहस्त हैं. इससे कोई बच भी नहीं पाता. :-))) लेकिन इस खाल उधेड़ू प्रक्रिया का उद्येश्य सकारात्मक हुआ करता है. न कि किसी की हिनाई होती है.  भाई, अभी तक तो यही…"
7 hours ago
Saurabh Pandey commented on Albela Khatri's blog post एक गाना प्यार का ...
"आपकी बातों का सादर अनुमोदन करता हूँ, आदरणीय योगराभाईजी.  विश्वास है, अलबेलाभाईजी हम सभी के परस्पर संवादों से अबतक वाकिफ़ हो चुके होंगे. आज की ही बात ली जाय. आत्मीयता, हास्य और संप्रेषणीयता का अद्भुत संगम दीखता है संवादों और टिप्पणियों में. …"
8 hours ago
Saurabh Pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें
"साहेब,  आप हमारी बोली पर हुँकारी तकले त भरबे नहीं करते हैं आ कहते हैं कि ’पियार’ किया हूँ..  जानते हैं, हम आपके हुँकारी का आसा में एने बइठल-बइठल सूत गये आ फजिरे बुझाइबो नहीं किया जे हम सूते थे. का कीजियेगा, जिनिगी अइसहीं ओझराई…"
10 hours ago
Saurabh Pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें
"हुज़ूर, हम नहीं लोग बोलते हैं जे  छपरा के देस-दिसा में घोरा सरक पर पराक्-पराक् दौरता है .. . .  :-))))))))) "
11 hours ago
Saurabh Pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें
"उपरा कुछ औरी कहा हूँ हम, ओहू प’  धियान राखी जाये.. .   :-)))))))))))))))) "
11 hours ago
Saurabh Pandey commented on Sanjay Mishra 'Habib''s blog post आल्हा - एक प्रयास
"इस नगीने से मैं अबतक दूर रहा इसका खेद है. प्रवहमान पंक्तियों और सन्निहित भावों से यह आल्हा संग्रहणीय बन गया है. हालाँकि पारंपरिक आल्हा के इंगित नहीं हैं जहाँ अतिशयोक्ति या अतिरेक को अतिविशिष्ट महत्ता मिली होती है. परन्तु, उन संदर्भों को भी प्रस्तुत…"
11 hours ago
Saurabh Pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें
"बहुत सही.. .   फिर पटियाला में क्या कर रहे हैं आदरणीय ? करबिगहिया, पोस्टलपार्क या फिर कदमकुआँ की गलियाँ आबाद करें ..  :-)))))))))))))) "
11 hours ago
Saurabh Pandey commented on rajesh kumari's blog post द्वन्द
"वाह .. सच्चाइयों से आँखें मूँदने का क्या ही सटीक वर्णन हुआ है. आदरणीया राजेश कुमारी जी,  बधाई"
22 hours ago
Saurabh Pandey commented on Albela Khatri's blog post एक गाना प्यार का ...
"उफ़ जवानी का ये आलम जानेमन और उस पर उमड़ आना प्यार का उस घड़ी मत रोकना "अलबेला" को जब लबों पर हो तराना प्यार का बहुत सुन्दर .. अलबेला जी.  आपकी ग़ज़ल अच्छी लगी. .. प्यार भरी ! "
22 hours ago
Saurabh Pandey commented on vandana gupta's blog post श्रापित मोहब्बत हो कोई और उसे मुक्तिद्वार मिल जाये ……
"भावनाओं के ज्वार की उठान और पाठकों का शब्दशःआप्लावित होते जाना.. . वाह ! पत्थर की राजकुमारियां शापित होती हैं डूब कर मरने के लिए मगर तुम्हारी साधना की आराधना बनना तुम्हारे हाथों में सुमिरन की माला बन ऊंगलियों में फिरना जीवित काष्टों का नसीब…"
22 hours ago
Saurabh Pandey commented on Dr.Prachi Singh's blog post तुमको अलख जगाना होगा…
"कलम की ताकत बहुत बड़ी है इसको रे लेखक पहचानो, बस कुछ भावों की तुकबंदी में न इसके सार को जानो, बहुत कुछ साझा हुआ है, डा. प्राची.  अनवरत साधना चले.  शुभेच्छाएँ. "
22 hours ago
Saurabh Pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें
"आदरणीय योगराजभाईसाहब का उत्तरदायित्त्व भान चकित भी करता है और अनुकरण हेतु उत्प्रेरित भी.  सद्यः समाप्त ऑनलाइन तरही मुशायरे में शामिल सभी ग़ज़लों के इस संकलन के लिये आपको बधाई तो क्या दी जाये,  हार्दिक रूप से अभिभूत और मानसिक रूप से संतुष्ट…"
23 hours ago
Saurabh Pandey commented on Rekha Joshi's blog post विश्वासघात [कहानी ]
"कुछ अजीब सा कथानक लगा. दोस्ती का होना और उसका बने रहना दोनों दो बातें हैं. फिर, भावावेश में कही गयी बातों की गंभीरता क्या इतनी होती है कि कोई अपने भविष्य के पल सँवारने लगे !  दिवास्वप्न में जीना एक बात है और ठोस सच्चाई को जीना एकदम सी दूसरी…"
yesterday
Saurabh Pandey commented on MAHIMA SHREE's blog post दो कवितायेँ किसान भाईयों के लिए
"किसानों की व्यथा और उनकी दुर्दशा सामाजिक असंवेदनशीलता के कारण ही है.  यह बात मुखरित हो कर आयी भी है.  महिमा श्री आपके लेखन और उसके निहितार्थ पर बधाइयाँ.  टंकण त्रुटियों की ओर वकोध्यान रहे. रचना को पढ़ते समय उनका होना बहुत खलता है. "
yesterday
Saurabh Pandey commented on वीनस केसरी's event गुफ़्तगू नरेश कुमार महरानी अंक विमोचन और मुशायरा
"अग्रिम शुभकामनाएँ .. ."
yesterday
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"प्रयास को बधाई"
yesterday
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"हरजीत खालसा साहब, आपका आना सुकून का कारण होता है.  उम्दा ग़ज़ल के लिये हृदय से बधाई स्वीकार करें जो था करीब दिल के, बहुत ही करीब था, उससे करीबियों के हि हकदार हम नहीं...   दिल के करीब लगा ये शे’र गिरह आपने बहुत खूबसूरत लगायी है ..…"
yesterday
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"ओबिओ मात्र मुशायरे का मंच ही नहीं एक वर्कशाप भी है को सत्य साबित करती आपकी कोशिश.  बधाई "
yesterday
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"ग़ज़ल के लिये बधाई स्वीकार करें विवेकभाई जी.   कृपया बह्र और वज़्न से ध्यान न हटायें्. आपकी उम्दा कोशिशें देख चुका हूँ. सादर"
yesterday

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Allahabad
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ITeS
About me
I am a person with heart.

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फागुनी दोहे

Posted on February 29, 2012 at 7:30am 20 Comments



फाग बड़ा चंचल करे, काया रचती रूप !

भाव-भावना-भेद को, फागुन-फागुन धूप !!



फगुनाई ऐसी चढ़ी,  टेसू धारें आग

दोहे तक तउआ रहे,  छेड़ें मन में फाग ॥



भइ, फागुन में उम्र भी करती जोरमजोर

फाग विदेही कर रहा, बासंती बरजोर !!…



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फुलकी

Posted on December 31, 2011 at 2:00pm 42 Comments

(छंद - दुर्मिल सवैया)

जब मौसम कुंद हुआ अरु ठंड की पींग चढी, फहरे फुलकी

कटकाइ भरे दँत-पाँति कहै निमकी चटखार धरे फुलकी…

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दीप जले -- (छंद : मत्तगयंद सवैया और घनाक्षरी)

Posted on October 31, 2011 at 1:32pm 2 Comments

 

पाँति सजी मनभावन, पावन दीप जले,…

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जो बीते... तो बीत गये --- सौरभ

Posted on October 15, 2011 at 9:30am 21 Comments

 

कंधे पर मेरे एक अज़ीब सा लिजलिजा चेहरा उग आया है.. .

गोया सलवटों पड़ी चादर पड़ी हो, जहाँ --

करवटें बदलती लाचारी टूट-टूट कर रोती रहती है चुपचाप.



निठल्ले आईने पर

सिर्फ़ धूल की परत ही नहीं होती.. भुतहा आवाज़ों की आड़ी-तिरछी लहरदार रेखाएँ भी होती हैं

जिन्हें स्मृतियों की चीटियों ने अपनी बे-थकी आवारग़ी में बना रखी होती हैं

उन चीटियों को इन आईनों पर चलने से कोई कभी रोक पाया है क्या आजतक?..

 …

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Comment Wall (46 comments)

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At 9:46pm on May 17, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

सौरभ जी सादर नमस्कार ! आपकी स्नेह भरी प्रतिक्रिया और उत्साहवर्धन से मज़ा आ गया । आशीर्वाद बनाए रखें!

At 8:18pm on May 14, 2012, SANDEEP KUMAR PATEL said…

सर जी अपना स्नेह और आशिर्वाद बनाये रखिये 

At 12:55pm on April 14, 2012, विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी said…
गुरुदेव! निवेदन स्वीकारने हेतु सादर आभार और अभिवादन।
At 12:31pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

परम पूज्य गुरु , श्री सौरभ  जी.

सादर अभिवादन.
शरीर साथ देगा तो आजीवन सक्रिय रहूँगा.
धन्यवाद
At 12:38am on March 8, 2012, neeraj said…

aap ko bhi holi ki hardik mangalmay shubh kamnaye..aapka apna hi--neeraj

At 12:53pm on March 5, 2012, Vinay Kull said…

धन्यवाद पाण्डेय जी, सब बाबा काशी विश्वनाथ और बुजुर्गों का आशीर्वाद है !

At 10:37am on March 5, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

सुप्रभात, आदरणीय सौरभ जी, हाँ निराशा हुई थी. पर एक भारतीय की तरह देखा 5 7 5 दिमाग़ लगाया , फिर आनंद लिया तारीफ करी अपनी बात भी रख दी. अब  आपका स्नेह प्राप्त हो रहा है आभार. 

At 1:18pm on March 3, 2012, MAHIMA SHREE said…
माननीय सौरभ , सर नमस्कार,
मुझे किसी-2 कॉमेंट पे रिप्लाइ का . नही मिलता..शायद अभी आदि नही हुई हूँ ,....OBO के ..इस लिए थोड़ी TECHNICAL prablem झेलनी पर रही है.....पर मेरी कोशिश तो रहती..है की सही तरीके..करू

आपका बहुत धन्यवाद..
At 7:52am on March 3, 2012, राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' said…

mananiya Shrimaan aapki ye kavita nahi dhindh paya: धूप लगा करती है. kripya link de.

At 11:07am on March 2, 2012, MAHIMA SHREE said…
सौरभ जी, नमस्कार,

आपने मेरी कविता के मर्म की विवेचना बड़ी ही गहराई से करी है...इसके लिए आभारी हूँ..सराहने के लिए बहुत-2 धन्यवाद..आशा है..आप जैसे प्रबुधजन का ..साथ मिलता रहेगा...... दो दिन ..ही हुए है मुझे ..यहा . हुए....
 
 
 

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