For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कौन क्या कहता नहीं अब कान देते // सौरभ

२१२२ २१२२ २१२२


जब जिये हम दर्द.. थपकी-तान देते
कौन क्या कहता नहीं अब कान देते 

 
आपके निर्देश हैं चर्या हमारी
इस जिये को काश कुछ पहचान देते

जो न होते राह में पत्थर बताओ
क्या कभी तुम दूब को सम्मान देते ?

बन गया जो बीच अपने हम निभा दें
क्यों खपाएँ सिर इसे उन्वान देते

दिल मिले थे, लाभ की संभावना भी,
अन्यथा हम क्यों परस्पर मान देते ?

जो थे किंकर्तव्यमूढों-से निरुत्तर
आज देखा तो मिले वे ज्ञान देते

आ गये फिर फूल क्या 'सौरभ' हॄदय में
दिख रहे हैं लोग फिर गुलदान देते
***
सौरभ

(मौलिक और अप्रकाशित) 

Views: 281

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 27, 2026 at 12:11pm

 

आदरणीय रवि भसीन ’शाहिद’ जी, प्रस्तुति पर आपका स्वागत है।

इस गजल को आपका अनुमोदन मिला। आपसे मिले उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक आभार 

शुभ-शुभ

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on January 26, 2026 at 6:39pm

आदरणीय सौरभ पांडे जी, नमस्कार। बहुत सुंदर ग़ज़ल कही है आपने, इस पे शेर-दर-शेर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।

/बन गया जो बीच अपने हम निभा दें

क्यों खपाएँ सिर इसे उन्वान देते/

यह शेर विशेष रूप से बहुत पसंद आया। सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 12, 2025 at 2:05pm

आदरणीय रवि भाईजी, आपके सचेत करने से एक बात अवश्य हुई, मैं ’किंकर्तव्यविमूढ़’ शब्द के वैन्यासिक उच्चारण पर पुनर्चिंतन किया. वस्तुतः, कई विद्वान रचनाकार अपनी क्षेत्रीय या बोलचाल की भाषा की प्रकृति के अनुरूप विदेसज या तत्सम शब्दों के विन्यास को उच्चारण के अनुसार शाब्दिक कर लेते हैं. इसे आप भी जानते हैं. मैंने भी ऐसा ही करने का एक प्रयास किया था. लेकिन आपको उत्तर देने के बाद मैंने इस बिन्दु पर हर तरह से सोचा और आपके मन में बना अटपटापन मुझे भी तार्किक लगा. 
अतः मैं ’किंकर्तव्यविमूढ़’ शब्द के विमूढ़ को मूढ़ कर, चूँकि विशेष मूढ़ ही विमूढ़ होता है, उक्त शब्द को ’किंकर्तव्यमूढ़’ कर लिया. इससे आपके मन मे इस शब्द के विन्यास को लेकर  जो असहजता बनी थी, उसका भी निवारण हो गया तथा मिसरा भी आपकी सोच के अनुसार बहर में आ गया. 

यही तो इस मंच की विशेषता है. यहाँ रचनाओं पर बातें खुल कर होती हैं और मिल-बैठ कर शकाओं का उचित समाधान भी हो जाता है. आपकी जागरुकता तथा प्रयुक्त शब्द को लेकर मन में उपजे संदेह के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद, कि मैं भी इस तथ्य पर पुनर्विचार कर पाया. 
शुभ-शुभ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 25, 2025 at 1:48am

प्रस्तुति को आपने अनुमोदित किया, आपका हार्दिक आभार, आदरणीय रवि भाईजी। 

  

किंकर्तव्यविमूढ़ों में तव्य के व्य को एक गिन कर उसे एक गाफ की तरह प्रयुक्त किया गया है। मुझे भान है कि तव्य के व्य को एक गिनने में कई सहज नहीं होंगे। यह वस्तुत: उक्त तत्सम शब्द के उच्चारण की प्रतिकृति है। 

सादर 

Comment by Ravi Shukla on November 16, 2025 at 9:29am

आदरणीय सौरभ जी अच्छी गजल आपने कही है इसके लिए बहुत-बहुत बधाई

सेकंड लास्ट शेर के उला मिसरा की तकती हम नहीं कर पा रहे हैं कृपया इस पर सहायता कीजिएगा।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 12, 2025 at 1:02pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रस्तुति पर आपसे मिली शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद .. 

सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 5, 2025 at 10:36pm

आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
51 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Monday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service