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नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना
देखना सोया हुआ है

व्यक्त होने की जगह
क्यों शब्द लुंठित
जिस समय जग
अर्थ ’नव’ का गोड़ता हो
कुंद होती दिख रही हो वेग की गति
और कर्कश वक्त
केंचुल छोड़ता हो

साधना जब
शौर्य का विस्तार चाहे
उग्र का पर्याय तब
खोया हुआ है

धूप के दर्शन नहीं हैं,
धुंध है बस
व्योम के उत्साह पर
कुहरा जड़ा है
जम रहा है आँख का पानी निरंतर
काल यह संक्रांति का
औंधा पड़ा है

अब प्रतीक्षा क्यों, शलाका हाथ ले लो
कोड़ दो संसार
तम बोया हुआ है
***
मौलिक और अप्रकाशित

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 13, 2026 at 11:11pm

रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी

हार्दिक आभार

.. 

Comment by vijay nikore on January 12, 2026 at 11:40am

प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।
आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा। निम्न पंक्तिओं को खास दाद देता हूँ।
//धूप के दर्शन नहीं हैं,
धुंध है बस
व्योम के उत्साह पर
कुहरा जड़ा है//

हार्दिक बधाई।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 9, 2026 at 3:56pm

रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी. 

आपका हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 9, 2026 at 3:54pm

उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी 

Comment by Chetan Prakash on January 9, 2026 at 2:54pm

नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता आपका यह नवगीत वास्तव  में मुझे एक प्रयाण गीत जैसा उद्बोधन करता हुआ प्रतीत हुआ जो अपने उद्देश्य पूरी तरह सफल है !इस उल्लेखनीय नवगीत हेतु आप निश्चय ही बधाई के पात्र हैं, आदरणीय भाई सौरभ जी !

Comment by Ashok Kumar Raktale on January 8, 2026 at 10:01pm

   सूर्य के दस्तक लगाना
देखना सोया हुआ है

व्यक्त होने की जगह

क्यों शब्द लुंठित
जिस समय जग
अर्थ ’नव’ का गोड़ता हो... शीतकाल में सूर्य का ना प्रकट होना जब कि संसार नव वर्ष का ढोल पीट रहा है. किन्तु प्रकृति में तो धुंध है, उदासी है. यही मन करता है सूर्य के दर पर एक दस्तक हो. सभी उत्साहियों को अवगत कराने का यह समय है. 

आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, सुन्दर जाग्रति लाता नवगीत रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 5, 2026 at 11:26pm

इस स्नेहिल अनुमोदन हेतु हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी. 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 2, 2026 at 10:39pm

आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। उत्तम नवगीत हुआ है बहुत बहुत हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

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