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Ashok Kumar Raktale
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Ashok Kumar Raktale posted blog posts
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post दोहे !
"अन्तर कितना हो गया, कौमें नहीं करीब पहला छोर अमीर तो, अन्तिम छोर गरीब |६|......सुंदर. आदरणीय कालीपद प्रसाद मंडल जी सादर, अच्छे दोहे रचे हैं किन्तु फिरभी शब्द संयोजन की कुछ कमियाँ नजर आ रही हैं. देख लें. राजसी ठाट बाठ........गेयता नहीं…"
4 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हर कली अब कमल हो रही है
"आदरणीय डॉ. आशुतोष मिश्रा जी सादर, प्रस्तुत गजल पर मेरा उत्साहवर्धन करने के लिए आपका दिल से शुक्रिया. सादर."
5 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हर कली अब कमल हो रही है
"सादर आभार आदरणीय समर कबीर साहब, मैं आपके द्वारा इंगित शैर हटा लेता हूँ और एक बदलाव कर पुनः संशोधित गजल पोस्ट करता हूँ. आपका दिल से शुक्रिया. सादर."
5 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हर कली अब कमल हो रही है
"आदरणीय अशोक जी इस उत्कृष्ट रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर  "
5 hours ago
Samar kabeer commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हर कली अब कमल हो रही है
""तितलियों"वाला मिसरा आपके बताये बिम्ब के अनुसार ठीक है,"रौशनी आजकल हो रही है" ये मिसरा ठीक रहेगा । लेकिन "मुग़ल"वाला शैर हटाना पड़ेगा,या कोई दूसरा क़ाफ़िया सोचियेग । ग़ज़ल पर पुनः बधाई आपको ।बाक़ी शुभ शुभ"
8 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हर कली अब कमल हो रही है
"आदरणीया राजेश कुमारी जी सादर, प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से आभार. सादर. अच्छी सलाह है आपकी मैं आदरणीय समर साहब के विचारों को जान लूँ, फिर बदलाव करता हूँ. सादर."
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हर कली अब कमल हो रही है
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, आपसे दाद पाना सुखद लगा. सही तो यही है की मंच पर आपकी सक्रियता के कारण ही मैंने गजल मंच पर पोस्ट करना प्रारम्भ किया है. आपकी इस्लाह का सदैव स्वागत है. सादर. "तितलियाँ भर रही हैं उड़ानें"......यह मिसरा और…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हर कली अब कमल हो रही है
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई जी सादर , प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए दिल से आभार. सादर."
10 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हर कली अब कमल हो रही है
"बहुत  सुन्दर  वाह्ह  वाह  आद० अशोक रक्ताले जी बढ़िया ग़ज़ल  लिखी है आद०  समर भाई जी के मशविरे भी स्वागत योग्य हैं तितलियाँ  भर रहीं हैं उड़ानें-- तितलियाँ छू  रही  आसमां को -----कर  सकते हैं  आपको…"
10 hours ago
Samar kabeer commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हर कली अब कमल हो रही है
"जनाब अशोक कुमार रक्ताले जी आदाब,आजकल तो आप कमाल पर कमाल कर रहे हैं, बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल से नवाज़ा है आपने मंच को,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं, नाचीज़ के कुछ सुझाव हैं, अगर किसी क़ाबिल हों :- 1) "तितलियाँ भर रही हैं उड़ानें" उड़ानें भरना…"
11 hours ago
laxman dhami commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हर कली अब कमल हो रही है
"आ0 भाई अशोक जी इस सुंदर गजल के लिए हार्दिक बधाई ।"
11 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न नयन के धोती रहीं .....
"जी ! साहब. अभी भी 'वो' खटक ही रहा है. एक सुझाव इस तरह है.सादर. मैं तो जागी सारी रात तूने मानी न मेरी बात कैसी दी है ये  सौगात कि अखियाँ रुक रुक रोती रहीं अधूरे सपने धोती रहीं"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on जयनित कुमार मेहता's blog post सावन में (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित कुमार मेहता जी सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है. मतले से मक्ते तक सभी अशआर मनभावन हैं और इस एक शेर  का तो कहना ही क्या. बादलों! अब न भाग पाओगेहाँ, सुरक्षा कड़ी है सावन में बहुत-बहुत बधाई.सादर."
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to योगराज प्रभाकर's discussion ओबीओ के कानपुर चैप्टर की स्थापना
"आदरणीया सीमा सिंह जी और  आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को साहित्य सेवा का यह  उत्तम  कार्य  प्रारम्भ करने लिए बहुत-बहुत  बधाई एवं ओ बी ओ के कानपुर चैप्टर की निरंतर सफलता के  लिए हार्दिक  शुभकामनाएं. सादर."
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to योगराज प्रभाकर's discussion ओबीओ के कानपुर चैप्टर की स्थापना
"जी ! सादर. "
yesterday

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हर कली अब कमल हो रही है

212  212  212  2

 

जिन्दगी अब सरल हो रही है

बात हर इक गजल हो रही है 

 

दलदली हो चुकी है जमीं पर,

हर कली अब कमल हो रही है

 

तितलियाँ भर रहीं हैं उड़ानें

नीति बेशक सफल हो रही है

 

आ रहा है कहीं से उजाला

रौशनी आजकल हो रही है

 

मखमली हो रही हैं हवाएं

मेंढकी भी विकल हो रही है

 

है दरोगा बड़ा लालची वो

धारणा अब अटल हो रही है

 

मौलिक/अप्रकाशित.

Posted on July 28, 2016 at 11:00pm — 10 Comments

मन उस आँगन ले जाए ( गीतिका )

 

आकर साजन तू ही ले जा क्यूँ ये सावन ले जाए

अधरों पर छायी मस्ती ये क्यूँ अपनापन ले जाए

 

भिगो रहा है बरस-बरस कर मेघ नशीला ये काला

कहीं न ये यौवन की खुश्बू मन का चन्दन ले जाए

 

कड़क-गरज डरपाती बिजली पल-पल नभ में दौड़ रही

कहीं न ये चितवन के सपने संचित कुंदन ले जाए

 

बिंदी की ये जगमग-जगमग खनखन मेरी चूड़ी की,

बूँदों की ये रिमझिम टपटप छनछन-छनछन ले जाए

 

पुहुप बढाते दिल की धड़कन शाखें नम कर डोल…

Continue

Posted on July 20, 2016 at 1:00pm — 14 Comments

दुश्मन नए मिले.

२२१  २१२१ १२२१ २१२

 

जब छीनने छुडाने के साधन नए मिले

हर मोड़ पर कई-कई सज्जन नए मिले

 

कुछ दूर तक गई भी न थी राह मुड़ गई

जिस राह पर फूलों भरे गुलशन नए मिले

 

काँटों से खेलता रहा कैसा जुनून था

उफ़! दोस्तों की शक्ल में दुश्मन नए मिले

 

जितने भी काटता गया जीवन के फंद वो  

उतने ही जिंदगी उसे बंधन नए मिले

 

अपनों से दूर कर न दे उनका मिज़ाज भी  

गलियों से अब जो गाँव की आँगन नए…

Continue

Posted on July 18, 2016 at 2:00pm — 19 Comments

सभी नादान बन गए

२२१  २१२१ १२२१ २१२

 

ये रूप रंग गंध सभी  शान बन गए

कुछ रोज में ही जो मेरी पहचान बन गए

 

नफरत के सिलसिले जो चले धूप छाँव बन

इंसानियत के शब्द भी मेहमान बन गए

 

तुम-तुम न रह सके न ही मैं-मैं ही बन सका

दोनों ही आज देख लो शैतान बन गए

 

खेमों में बँट गए हैं सभी आज इस तरह

कुछ राम बन गए कई रहमान बन गए

 

हद के सवाल पर या कि जिद के सवाल पर

हद भूलकर गिरे सभी नादान बन…

Continue

Posted on July 17, 2016 at 9:35am — 5 Comments

Comment Wall (22 comments)

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At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 9:44am on December 31, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

नये साल की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीय रक्ताले सर.......

At 8:37pm on December 15, 2012, AVINASH S BAGDE said…
आदरणीय अशोक रक्ताले जी,
इस 

महीने का सक्रिय सदस्य

चुने जाने पे आपका सादर  अभिनन्दन।
..अविनाश बागडे 
 
 
 

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