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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"हरदिन जहां लाता ख़ुशी के साथ ही संघर्ष नव | देता रहा हरदिन वहीँ पर और भी उत्कर्ष नव, शुभकामना मेरी कुबूलें जन्मदिन पर आप यह नव वर्ष जीवनकाल का लाये सदा ही हर्ष नव ||   आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, जन्मदिन पर आपको अशेष शुभकामनाएँ. सादर.  "
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"आदरणीय महेंद्र कुमार साहब, प्रस्तुत गजल पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए आपका दिल से आभार. सादर."
Nov 26
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"आदरणीय मुनीश तन्हा साहब सादर, प्रस्तुत गजल पर उत्साहवर्धन के लिए दिल से आभार.सादर."
Nov 26
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर,आपको कुछ अशआर अच्छे लगे. मेरा उत्साहवर्धन हुआ. बहुत-बहुत आभार. सादर."
Nov 26
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"प्रस्तुत गजल पर उत्साहवर्धन के लिए दिल से आभार आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब. सादर."
Nov 26
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"आदरणीय गुलशन खैराबादी साहब सादर, खूब कमाल के अशआर निकाले हैं. इस उम्दा गजल पर शेर दर शेर मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं. सादर."
Nov 26
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"पागल हो बादशाह वजीरों की क्या मजाल। खामोश ताकता हाँ  बेचारा वतन तमाम।।.........वाह ! वाह ! बहुत उम्दा. आदरणीय गंगाधर शर्मा साहब सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है. भरपूर दाद औ मुबारक बाद कुबूलें. सादर."
Nov 26
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"आदरणीय मुनीश तनहा जी सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है आपने. गिरह का शेर भी खूब शानदार हुआ है. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर."
Nov 26
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी सादर, इस खूबसूरत गजल के लिए बहुत-बहुत मुबारकबाद कुबूलें. सादर."
Nov 25
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"आदरणीय गिरिराज भंडारी साहब सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है आपने. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर."
Nov 25
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"अब तो मुख़ालिफ़त की इजाज़त हमें कहाँ ज़म्हूरियत के खत्म हुए हैं चलन तमाम...........वाह ! खूब कहा है. भाई शिज्जु 'शकूर' जी सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है. शेर दर शेर दाद औ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं. गिरह भी खूब उम्दा लगाई है. सादर."
Nov 25
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी सादर, बहुत खुबसूरत गजल कही है. बहुत-बहुत मुबारकबाद कुबूलें. मतले में प्रयुक्त शब्द "हमन" का अर्थ भी बताने का कष्ट करें. सादर."
Nov 25
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"प्रस्तुत गजल पर उपस्थिति के लिए दिल से आभार आदरणीय गौरव कुमार पाण्डेय जी. सादर."
Nov 25
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"आदरणीय तस्दीक एहमद खान साहब सादर, प्रस्तुत गजल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से आभार. आपका सुझाव मान्य है अवश्य ही मैं ऐसा बदलाव कर लूँगा. सादर आभार. उसने चली जो चाल के/कि कायल हुए सभी "
Nov 25
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर, सच है गजल पर मेरी कोई तैयारी नहीं थी किन्तु आपने कहा संभव है तो मैंने प्रयास किया. आपको यह प्रयास अच्छा लगा इसके लिए आपका दिल से आभार.  अवश्य ही मैं संकलन में 'मेरी' को 'मिरी' कर लूंगा. पुनः आभार.…"
Nov 25
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-77
"आदरणीय गिरिराज भंडारी साहब सादर, प्रस्तुत गजल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से शुक्रिया. सादर."
Nov 25

Profile Information

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Ujjain
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Ujjain
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About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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‘वागीश्वरी’ सवैया पर एक प्रयास

१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२

भजो राम को या भजो श्याम को या, भजो नित्य ही मित्र माँ बाप को |

चुनों धर्म का मार्ग सच्चा हमेशा , बढ़ावा न देना कभी पाप को,

सिखाना सभी को सिखाना स्वतः को, भुलाना यहाँ व्यर्थ संताप को,

नई ये हवाएं कहें क्या सुनो तो, सुनो थाप को वक्त की चाप को ||

तजो लाज सारी करो कर्म अच्छे, रहोगे जहां में तभी शान से |

न लेना किसी का न देना किसी का, जिलाता यही मार्ग सम्मान से,

बिना कर्म पाते सभी दुःख देखो,…

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Posted on November 5, 2016 at 10:53pm — 9 Comments

माता मैं ना जाऊँगा

कितने कष्ट सहे हैं तूने , कैसे मुझे पढ़ाया है,

तुझे छोड़कर घर से बाहर, मैंने कदम बढाया है |

अनचाहे ही माता तुझको , मैंने आज रुलाया है

भाग्य विधाता ने भी देखो, कैसा खेल रचाया है ||

 

 

रुक जाता मैं माता क्षणमें, बस कहने की देरी थी,

जाऊँ मैं परदेस मगर माँ, ये जिद भी तो तेरी थी |

देवों को नित पूजा तूने , माला भी नित फेरी थी,

तुझको छोड़ कहीं जाऊँ मैं, ये ईच्छा कब मेरी थी ||

 

 

दमकुंगा बन कुंदन लेकिन, काम न तेरे…

Continue

Posted on September 17, 2016 at 9:30pm — 13 Comments

हर कली अब कमल हो रही है

212  212  212  2

 

जिन्दगी अब सरल हो रही है

बात हर इक गजल हो रही है 

 

दलदली हो चुकी है जमीं पर,

हर कली अब कमल हो रही है

 

तितलियाँ भर रहीं हैं उड़ानें

नीति बेशक सफल हो रही है

 

आ रहा है कहीं से उजाला

रौशनी आजकल हो रही है

 

मखमली हो रही हैं हवाएं

मेंढकी भी विकल हो रही है

 

है दरोगा बड़ा लालची वो

धारणा अब अटल हो रही है

 

मौलिक/अप्रकाशित.

Posted on July 28, 2016 at 11:00pm — 15 Comments

मन उस आँगन ले जाए ( गीतिका )

 

आकर साजन तू ही ले जा क्यूँ ये सावन ले जाए

अधरों पर छायी मस्ती ये क्यूँ अपनापन ले जाए

 

भिगो रहा है बरस-बरस कर मेघ नशीला ये काला

कहीं न ये यौवन की खुश्बू मन का चन्दन ले जाए

 

कड़क-गरज डरपाती बिजली पल-पल नभ में दौड़ रही

कहीं न ये चितवन के सपने संचित कुंदन ले जाए

 

बिंदी की ये जगमग-जगमग खनखन मेरी चूड़ी की,

बूँदों की ये रिमझिम टपटप छनछन-छनछन ले जाए

 

पुहुप बढाते दिल की धड़कन शाखें नम कर डोल…

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Posted on July 20, 2016 at 1:00pm — 28 Comments

Comment Wall (24 comments)

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At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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