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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आपसे सराहना संबल पाकर रचनाकर्म सफल हुआ.सादर आभार."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, जी ! अच्छा सुझाव है  आपका मैं इस तरह कर लेता हूँ. जिस बह्र पर संभव हो जाता है उस पर प्रयास कर लेता हूँ. ओ बी ओ के ये अवसर और कहीं नहीं मिलने वाले.इसलिए प्रयास जारी है. आपको यह प्रयास अच्छा लगा इसके लिए मैं आपका दिल…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"सादर आभार भाई अमित कुमार जी."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"दरख़्तों को उगाकर ग़र हिफ़ाज़त और हो जाती, न ख़ुद पर ही, जगत पर भी इनायत और हो जाती।......वाह ! खूब. आदरणीय शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी सादर, बहुत अच्छी गजल हुई है. दिल से मुबारकबाद कुबूलें. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"आदरणीया अलका चंगा जी अच्छी गजल हुई है. मुशायरे में सहभागिता के लिए बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"आदरणीय सतीश मापतपुरी साहब सादर, अच्छी गजल हुई है. बहुत बधाई स्वीकारें. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी सादर, बहुत खूबसूरत गजल हुई है सभी अशआर एक से बढ़कर एक हुए हैं.शेर दर शेर बधाई स्वीकारें. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"वाह ! बहुत खूब आदरणीय अमित कुमार जी, अच्छी गजल हुई है. बहुत बधाई स्वीकारें. सादर. "
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"आदरणीय सूबे सिंह सुजान जी बहुत खूबसूरत गजल हुई है, गिरह का शेर भी अच्छा कहा है. भरपूर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"भरोसा कर अगर तुम दूर तक इतना चले आये तो दामन थामने की भी इजाजत और हो जाती..........वाह ! वाह ! बहुत खूब साहब. आदरणीय डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है आपने गिरह का शेर भी खूब उम्दा हुआ है. भरपूर दाद और मुबारकबाद…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"वाह ! वाह ! आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी बहुत अच्छे अशआर हुए हैं.बहुत मुबारकबाद कुबूलें.सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"आदरणीय अजीत शर्मा जी सादर, मतले से मकते तक सभी अशआर खूब उम्दा कहे हैं आपने.गिरह का शेर भी खूब कमाल कहा है.भरपूर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं.सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"आदरणीय कालिपद प्रसाद मंडल जी सादर, बहुत अच्छी गजल हुई है साहब. बहुत बधाई स्वीकारें.  अंतिम शेर में सानी के मिसरे में अगर मगर सब एक साथ हो गया लगता है. सादर. "
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"नदी गुम है पहाड़ों से मगर बादल नहीं बरसेजलाते हम न जंगल तो वसातत और हो जाती...........वाह ! खूब. आदरणीय मुनीश तन्हा जी सादर, इस खूबसूरत गजल पर बहुत बधाई स्वीकारें. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"वाह ! अच्छी गजल कही है आदरणीय सुरेंदर इंसान जी. बहुत बधाई स्वीकारें.सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-75
"आदरणीय शिज्जु 'शकूर' जी वाह ! वाह ! बहुत कमाल के अशआर हुए हैं.वाह ! ये गिरह भी क्या खूब लगाई है. शेर-दर-शेर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं. सादर."
Friday

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I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

माता मैं ना जाऊँगा

कितने कष्ट सहे हैं तूने , कैसे मुझे पढ़ाया है,

तुझे छोड़कर घर से बाहर, मैंने कदम बढाया है |

अनचाहे ही माता तुझको , मैंने आज रुलाया है

भाग्य विधाता ने भी देखो, कैसा खेल रचाया है ||

 

 

रुक जाता मैं माता क्षणमें, बस कहने की देरी थी,

जाऊँ मैं परदेस मगर माँ, ये जिद भी तो तेरी थी |

देवों को नित पूजा तूने , माला भी नित फेरी थी,

तुझको छोड़ कहीं जाऊँ मैं, ये ईच्छा कब मेरी थी ||

 

 

दमकुंगा बन कुंदन लेकिन, काम न तेरे…

Continue

Posted on September 17, 2016 at 9:30pm — 12 Comments

हर कली अब कमल हो रही है

212  212  212  2

 

जिन्दगी अब सरल हो रही है

बात हर इक गजल हो रही है 

 

दलदली हो चुकी है जमीं पर,

हर कली अब कमल हो रही है

 

तितलियाँ भर रहीं हैं उड़ानें

नीति बेशक सफल हो रही है

 

आ रहा है कहीं से उजाला

रौशनी आजकल हो रही है

 

मखमली हो रही हैं हवाएं

मेंढकी भी विकल हो रही है

 

है दरोगा बड़ा लालची वो

धारणा अब अटल हो रही है

 

मौलिक/अप्रकाशित.

Posted on July 28, 2016 at 11:00pm — 15 Comments

मन उस आँगन ले जाए ( गीतिका )

 

आकर साजन तू ही ले जा क्यूँ ये सावन ले जाए

अधरों पर छायी मस्ती ये क्यूँ अपनापन ले जाए

 

भिगो रहा है बरस-बरस कर मेघ नशीला ये काला

कहीं न ये यौवन की खुश्बू मन का चन्दन ले जाए

 

कड़क-गरज डरपाती बिजली पल-पल नभ में दौड़ रही

कहीं न ये चितवन के सपने संचित कुंदन ले जाए

 

बिंदी की ये जगमग-जगमग खनखन मेरी चूड़ी की,

बूँदों की ये रिमझिम टपटप छनछन-छनछन ले जाए

 

पुहुप बढाते दिल की धड़कन शाखें नम कर डोल…

Continue

Posted on July 20, 2016 at 1:00pm — 28 Comments

दुश्मन नए मिले.

२२१  २१२१ १२२१ २१२

 

जब छीनने छुडाने के साधन नए मिले

हर मोड़ पर कई-कई सज्जन नए मिले

 

कुछ दूर तक गई भी न थी राह मुड़ गई

जिस राह पर फूलों भरे गुलशन नए मिले

 

काँटों से खेलता रहा कैसा जुनून था

उफ़! दोस्तों की शक्ल में दुश्मन नए मिले

 

जितने भी काटता गया जीवन के फंद वो  

उतने ही जिंदगी उसे बंधन नए मिले

 

अपनों से दूर कर न दे उनका मिज़ाज भी  

गलियों से अब जो गाँव की आँगन नए…

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Posted on July 18, 2016 at 2:00pm — 19 Comments

Comment Wall (24 comments)

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At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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