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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"'व्यथित मन' सुंदर रचना है आदरणीय सुशील सरना जी राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित होने पर आपको बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Dec 26, 2016
Ashok Kumar Raktale commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"इक मुद्दत के बाद ख़ुशी ने दरवाज़े पर दस्तक दी दिल घबराया और मुझे कुछ यार पुराने याद आये..........वाह ! बहुत खूब. आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, बहुत खूबसूरत गजल हुई है यह आपकी गिरह भी जोरदार है. सादर."
Dec 26, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"आज़ादी की ख़ातिर जिननें सूली का गलहार चुना,लाल किले को जब जब देखा वह परवाने याद आये ।।............वाह ! वाह ! बहुत खूब. आदरणीय कवि राज बुन्देली जी सादर, खूब अशआर निकाले हैं. सभी एक से बढ़कर एक. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें इस सुंदर प्रस्तुति पर. सादर."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी सादर, कोई एक शेर नहीं हर शेर दिल को छू जाने वाला है. बहुत खूबसूरत गजल हुई है. दिली दाद और मुबारकबाद कुबूलें. सादर."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"बातों पर लड़ना मिट जाना बात जबाँ की रख लेना| उस बूढे बरगद को देखा लोग पुराने याद आये||........वाह ! खूब. आदरणीय आशीष यादव जी सादर, खूबसूरत गजल हुई है. दिली दाद क़ुबूल फरमाएं. सादर."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"फिर से दसवीं फेल हुए तो, फिर दिल कोई तोड़ गया बिखरी-बिखरी जुल्फों वाले, कितने शाने याद आये............ वाह ! क्या बात. बरसो बाद उन्हें देखा तो कब छेड़ा था, याद आया फिर तबियत से धोने वाले दो अनजाने याद आये...........बहुत खूब... बहुत खूब. आदरणीय…"
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी सादर, बढ़िया गजल कही है.बहुत मुबारकबाद कुबूलें. सादर."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय महेंद्र कुमार जी. सादर."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"आदरणीय कवि राज बुन्देली जी सादर, मुग्ध हूँ आपकी शेर दर शेर प्रतिक्रिया पाकर. प्रस्तुत गजल को सार्थकता प्रदान करने के लिए आपका हृदयातल से आभार. सादर."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"बहुत शुक्रिया आदरणीय मुनीश तन्हा जी. सादर."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर प्रस्तुत गजल पर उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार. सादर."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी सादर, आपकी सराहना पाकर रचना सफल हुई है. सादर आभार."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"बहुत शुक्रिया आदरणीय तस्दीक एहमद खान साहब. सादर."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"उत्साहवर्धन के लिए अतिशय आभार आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब. सादर."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"उत्साहवर्धन के लिए अतिशय आभार आदरणीय अजीत शर्मा जी. सादर."
Dec 24, 2016
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-78
"आदरणीय गिरिराज भंडारी साहब सादर, सराहना के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया. सादर."
Dec 24, 2016

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I am a technical person and always talk in right angle.

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आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 20 Comments

‘वागीश्वरी’ सवैया पर एक प्रयास

१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२

भजो राम को या भजो श्याम को या, भजो नित्य ही मित्र माँ बाप को |

चुनों धर्म का मार्ग सच्चा हमेशा , बढ़ावा न देना कभी पाप को,

सिखाना सभी को सिखाना स्वतः को, भुलाना यहाँ व्यर्थ संताप को,

नई ये हवाएं कहें क्या सुनो तो, सुनो थाप को वक्त की चाप को ||

तजो लाज सारी करो कर्म अच्छे, रहोगे जहां में तभी शान से |

न लेना किसी का न देना किसी का, जिलाता यही मार्ग सम्मान से,

बिना कर्म पाते सभी दुःख देखो,…

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Posted on November 5, 2016 at 10:53pm — 9 Comments

माता मैं ना जाऊँगा

कितने कष्ट सहे हैं तूने , कैसे मुझे पढ़ाया है,

तुझे छोड़कर घर से बाहर, मैंने कदम बढाया है |

अनचाहे ही माता तुझको , मैंने आज रुलाया है

भाग्य विधाता ने भी देखो, कैसा खेल रचाया है ||

 

 

रुक जाता मैं माता क्षणमें, बस कहने की देरी थी,

जाऊँ मैं परदेस मगर माँ, ये जिद भी तो तेरी थी |

देवों को नित पूजा तूने , माला भी नित फेरी थी,

तुझको छोड़ कहीं जाऊँ मैं, ये ईच्छा कब मेरी थी ||

 

 

दमकुंगा बन कुंदन लेकिन, काम न तेरे…

Continue

Posted on September 17, 2016 at 9:30pm — 13 Comments

हर कली अब कमल हो रही है

212  212  212  2

 

जिन्दगी अब सरल हो रही है

बात हर इक गजल हो रही है 

 

दलदली हो चुकी है जमीं पर,

हर कली अब कमल हो रही है

 

तितलियाँ भर रहीं हैं उड़ानें

नीति बेशक सफल हो रही है

 

आ रहा है कहीं से उजाला

रौशनी आजकल हो रही है

 

मखमली हो रही हैं हवाएं

मेंढकी भी विकल हो रही है

 

है दरोगा बड़ा लालची वो

धारणा अब अटल हो रही है

 

मौलिक/अप्रकाशित.

Posted on July 28, 2016 at 11:00pm — 15 Comments

Comment Wall (24 comments)

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At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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