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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post चूम आये हम गुलाब-ग़ज़ल
"आदरणीय पंकज मिश्र जी सादर, सुन्दर गजल कही है. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. गजल के विषय में बहुत तो नहीं जानता किन्तु एक मिसरे पर मन में विचार आया है //धड़कनों में उसकी सरगम, उसकी ख़्शबू साँस में।//......यहाँ दूसरी बार "उसकी" शब्द न रख कर…"
Monday
Ashok Kumar Raktale commented on Kewal Prasad's blog post जैसे पियें फकीर......
"आदरणीय केवल प्रसाद जी सादर, अच्छे कुण्डलिया छंद रचे हैं. बहुत-बहुत बधाई. फिरभी कुछ जगह एक बार देख लें. पहले छंद में //फूलों से कहते रहे....... कहते या कहती //./////द्वितीय छंद में //जैसे पियें फकीर, व्यर्थ नहि बात बढ़ाते.//.........यहाँ सम विषम चरणों…"
Monday
Ashok Kumar Raktale commented on सतविन्द्र कुमार's blog post दोहे/सतविंदर
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, सुंदर दोहे. बहुत-बहुत बधाई.दोहे मात्रिक और गेयता के आधार पर अच्छे रचे हैं किन्तु कुछ शब्दों के उपयोग में सावधानी बरती जाने की आवश्यकता है. माँ ममता की मूर्त है  यहाँ 'मूर्ति ' शब्द होना चाहिए. वहीँ इस…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"टोपी पलट गयी है तुझे देखने में दोस्त ऊँचा उठा है तू या मेरा कद ही घट गया ?...वाह ! बहुत खूब आदरणीय सुलभ अग्निहोत्री साहब.सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"बहुत-बहुत आभार आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा जी. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार आदरणीया वन्दना जी.सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"जंगल हुआ जो कत्ल तो बेवा हुई ज़मीं जिसकी फुगाँ से खेत का सीना ही फट गया .............वाह ! वाह ! लेकर हटा किसान के कुनबे की जान ही जब कर्ज़ नाग खेत से आकर लिपट गया...........बहुत खूब साहब. बहुत दिल को छू लेने वाले अशआर कहे हैं आदरणीय प्रधान सम्पादक…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"कैसे रचे भला कोई खेतों के गीत अब हल बैल छूट गए हैं तो यारों रहट गया।9।.........वाह ! खूब. आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है . दिली मुबारकबाद कुबूल फरमाएं. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"आदरणीया सीमा शर्मा जी सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है. बहुत-बहुत मुबारकबाद  कुबूलें.सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"झोंका हवा का था कि हमारी थी आरजू, रुख़ से कोई नक़ाब अचानक उलट गया।...........वाह ! बहुत खूब. आदरणीय रवि शुक्ला जी सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है. दिली मुबारकबाद कुबूल फरमाएं. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, मतला और उससे भी खूब हुआ है हुस्ने मतला और एक-एक शेर कमाल है साहब. गिरह भी जोरदार लगाईं है.दिली मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं इस उम्दा गजल के लिए . सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"आदरणीया वन्दना जी सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है गिरह भी खूब लगायी है. बहुत-बहुत मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"जो शर्मसार था कभी नजरें नहीं उठी ताज्जुब है आज इश्क के मैदां में डट गया...............वाह ! खूब कहा है साहब. आदरणीय डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब सादर, बहुत खूबसूरत गजल कही है सभी अशआर बढ़िया हुए हैं. बहुत-बहुत मुबारकबाद कुबूलें. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"वाह ! वाह ! खूब मज़ाहिया गजल हुई है भाई सचिन देव जी मजा आ गया. बहुत-बहुत मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72
"किस्मत कहूँ नहीं तो छलावा कहूँ उसे वो दूर आज उतने मैं जितना निकट गया......वाह ! बहुत खूब. भाई मुनीश तन्हा जी सादर, खूबसूरत गजल कही है. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर."
Saturday

Profile Information

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Male
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Ujjain
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Ujjain
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service
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I am a technical person and always talk in right angle.

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मनहरण घनाक्षरी

मंद चलती पवन , शांत रहती अगन,
भोर सा उल्लास प्रभु आठों याम चाहिए,
तप्त धरती गगन , और जलता बदन,
ग्रीष्म प्रभू और नहीं ना ही घाम चाहिए,
आयें घन लिए नीर हरें व्याकुलों कि पीर,
एक वरदान भगवान राम चाहिए,
एक बनें नेक बनें, हिलमिल सब रहें,
वसुधा पे ऐसा प्रभु सुखधाम चाहिए ||


मौलिक/अप्रकाशित.

Posted on May 27, 2016 at 10:48pm — 7 Comments

दुर्मिल सवैया

दुर्मिल सवैया.

 

 

बदली - बदली मुख फेर लिया जब सूरज लालमलाल हुआ,

वन शुष्क हुआ हर एक हरा सच शुष्क भरा हर ताल हुआ,

तन शुष्क हुआ मन शुष्क हुआ हर ओर भयंकर हाल हुआ,

जब घाम बढ़ा तब सत्य कहूँ यह हाल बड़ा विकराल हुआ ||

 

 

तन ताप लिए तन आग लिए सब व्याकुल हैं तन प्यास लिए,  

दिन मानव के खग के वन के पशु के कटते बस आस लिए,

सब सोच रहे अब ग्रीष्म टले बरसे बदली मृदु भास लिए,  

निकले फिरसे बरसात लिए दिन सावन भादव मास लिए…

Continue

Posted on May 22, 2016 at 3:40pm — 6 Comments

किस तरह का ये कहो नाता है.

वज्न - 2122---1122---22 / 112

किस तरह का ये कहो नाता है

उनके बिन पल न रहा जाता है

 

लूट ले जाता है खुशियाँ सारी

उसका जाना न हमें भाता है

 

रात लाती है उम्मीदें लेकिन

दिन का सूरज हमें तड़पाता है

 

धूल हो जाते हैं अरमां सारे,

चैन इस दिल को नहीं आता है

 

रात आती है सितारे लेकर

चाँद रातों की नमी लाता है

 

मौलिक/अप्रकाशित.

Posted on April 24, 2016 at 4:30pm — 12 Comments

गीत

इस गीत के सभी अंतरे “हीर छंद” (६,६,११. आदि गुरु अंत रगण) पर आधारित हैं.

 

 

मानव है, मानव बन, मानव का प्यार ले,

बैर भूल, द्वेष मिटा, जिंदगी सँवार ले ||

  

लोक लाज, भूल गया, कैसा मनु कर्म…

Continue

Posted on November 8, 2015 at 10:00am — 4 Comments

Comment Wall (22 comments)

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At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 9:44am on December 31, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

नये साल की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीय रक्ताले सर.......

At 8:37pm on December 15, 2012, AVINASH S BAGDE said…
आदरणीय अशोक रक्ताले जी,
इस 

महीने का सक्रिय सदस्य

चुने जाने पे आपका सादर  अभिनन्दन।
..अविनाश बागडे 
 
 
 

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