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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"आदरणीय समीर कबीर जी सादर, बहुत भावपूर्ण और सुन्दर प्रस्तुति. बहुत-बहुत बधाई. सादर. "
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"आदरणीय लड़ीवाला साहब सादर, प्रदत्त विषय पर सभी दोहे सार्थक रचे हैं. बहुत-बहुत बधाई. सादर. कच्चा धागा सुख गुने, जब हो मनुज उदास | पीपल बरगद से कहे ,  तोड़ो मत विश्वास || "
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"अगणित रूप तुम्हारे जग में  मानव के मनजात हिय अन्वेषण किया न जिसने अंत समय पछतात तू गतिमान प्रभंजन तो मैं     श्याम घटा घनघोर I प्रभू जी 0 I..........बहुत मन रमणीय रचना. आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त…"
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"डोर सच की जिन्दगी में तुम कभी भी छोड़ना मत, खून के रिश्तों से कभी मुंह अपना मोड़ना मत, प्यार के रिश्ते है कच्चे धागे से इस जहां में, जिन्दगी में प्यार के रिश्ते कभी तुम तोड़ना मत।............सार्थक सन्देश. आदरणीय दयाराम मेथानी साहब सादर, प्रदत्त विषय…"
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"दोस्ती का बंधन गजब,है जीवन पर्यन्त प्रीत और विश्वास का, यहाँ कभी ना अंत ||..........सुन्दर ! आदरणीया सरिता भाटिया जी सादर, प्रदत्त विषय पर सुन्दर दोहे कहे हैं आपने. बहुत बधाई. "साँसों की ये डोर को" यहाँ 'ये ' का प्रयोग उचित नहीं…"
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"कभी खुला मत छोडि़ए, मोती ढोर पतंगअच्छे लगते  हंै सदा, बँधे  डोर के संग ।1।............बहुत खूब ! आदरणीय लक्षमण धामी जी सादर, बहुत सुन्दर प्रदत्त विषय अनुकूल दोहे रचे हैं.  बहुत बधाई. "
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"आदरणीय खुर्शीद खैराडी साहब वाह ! वाह ! वाह ! मतले से मक्ते तक सभी अशआर जो डोर बांधते रहे हैं की बस उसी में लिपटते चले गए. बहुत बधाई इस सुन्दर प्रस्तुति पर. सादर."
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"काटे तुझे जो तीरगी पैदा नहीं हुई वो सूरज छुपे सौ बार मैं दिल का दिया जला लूँ .............बहुत खूब ! आदरणीया राजेशकुमारी जी सादर, प्रदत्त विषय को सार्थक करती सुन्दर प्रस्तुति. बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"आदरणीय डॉ. विजय शंकर साहब सादर, डोर को विभिन्न रूप में परिभाषित करती सुन्दर रचना. बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"साबित रहे डोर या काट दिया जाये जुड़ाव खत्म नहीं होता   महसूस कर पायें या न कर पायें जुड़ाव एक भी बार हुआ तो , हमेशा के लिये हुआ.............वाह, क्या बात कही है. बिलकुल सहमत. आदरणीय गिरिराज भंडारी जी सादर, सुन्दर प्रदत्त विषय को सार्थक करती…"
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"आदरणीय आखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर प्रणाम, प्रदत्त विषय अनुरूप सुन्दर और सार्थक भाव लिए दोहे रचे हैं. बहुत-बहुत बधाई. कहीं-कहीं चूक हुई है उन पर सार्थक चर्चा भी हुई है. अवश्य ही यह मेरे लिए भी लाभकारी रही है.…"
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52
"न सांस से, न आस से, शरीर से न प्राण से न वासना, न वेदना, किसी न दिव्य बाण से प्रभावशून्य मन हुआ, न कामना यहाँ रही पिया हृदय बसे विराट भाव से विभोर है   हृदय खिला-खिला यहाँ तरंग सी हिलोर है समय के साथ टूटती अजीब सांस डोर है.................आहा !…"
Feb 14
Ashok Kumar Raktale replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ ’चित्र से काव्य तक’ छंदोत्सव" अंक- 45 की समस्त रचनाएँ चिह्नित in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, क्षमा करें कुछ देरी से हाजिर हुआ. यह देखकर प्रसन्नता हुई है की संकलन की कुछ ही रचनाएं रंग लिए मिली. मगर इस बात का दुःख भी हुआ कई कुछ रचनाएं अब तक भी बहुत रंगीन हैं. सादर. मेरी विनम्र प्रार्थना है की मेरी प्रथम प्रस्तुति…"
Jan 26
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-45 in the group चित्र से काव्य तक
"जी सादर. आपके समर्थन से मेरे कहे को बल मिला. अवश्य ही भाई सचिन देव जी भी समझ गए होंगे. सादर."
Jan 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-45 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सचिन जी सादर, सच है कई बार ऐसी शंकाएं मन में जन्म लेती हैं. यह कोई नयी बात नहीं. मेरे मन में भी होती हैं. मात्रिक क्रम की अनिवार्यता क्यों होती है यदि हम इसे जान लें तो आधा कार्य आसान हो जाता है. आपने दोहा छंद भी खूब रचे हैं. क्यों उनके पदांत…"
Jan 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-45 in the group चित्र से काव्य तक
"मीत बनकर ये खड़े हैं शीत पावस घाम पंक्ति पौधों की सुहानी दृश्य मन अभिराम...........प्रदत्त चित्र को सुन्दर शब्द मिले हैं. आदरणीया वन्दना जी सादर, सुन्दर प्रस्तुति. एक दो जगह शिल्प में कुछ कमी रह गई प्रतीत होती है. सादर."
Jan 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

चुनावी चौसर ! (चौपई छंद)

छिड़ी हुई शब्दों की जंग | दिखा रहे नेता जी रंग ||

वैचारिकता नंगधडंग | सुनकर हैरत जन-जन दंग ||

जाति धर्म के पुते सियार | इनपर कहना है बेकार ||

बात-बात पर दिल पर वार | जन मानस पर अत्याचार ||

 

पांच वर्ष में एक चुनाव | छोड़े मन पर कई प्रभाव ||

महँगाई भी देती घाव | डुबो रही है सबकी नाव ||

नारी दोहन अत्याचार | मिला नहीं अबतक उपचार ||

सरकारें करती उपकार | निर्धन फिरभी हैं बीमार ||

 

तीर तराजू औ तलवार | किसे कहें अब जिम्मेदार…

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Posted on April 23, 2014 at 2:00pm — 27 Comments

दोहे-मोहें.

नेकनीयती वृन्द के, मुरझाये..….हैं फूल |

कहकर पुष्प गुलाब का, दिए सैकड़ों शूल ||

 

बही नाव……..पतवार भी, तूफानों की धार |

बढ़ा प्रेम तब सरित का, जब पाया मँझधार ||

 

कुल की करुणा कान में, बोली थी चुपचाप |

देख समय सूरज चढा, तू भी इसको भाप ||

 

अवसर का उपहास है, अनजाने ही हार |

भोग रहे पीड़ा कई, गए समय की मार ||

 

कागज़ पर लिखता रहा, विरह प्रेम के गीत |

जुडी कलम की छंद से, अनजाने ही प्रीत ||

 

तप…

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Posted on December 10, 2013 at 9:30pm — 13 Comments

हँसते रहे रोते रहे |

गूंजती थी जब खमोशी, हादसे होते रहे |

रात जागी थी जहां पर दिन वहीँ सोते रहे ||

 

अनमने से भाव थे वह अनमनी सी थी नजर

अनमने सिंगार पर ही मुग्ध हम होते रहे ||

 

कौंध कर बिजली गिरी वसुधा दिवाकर भी डरा,

कुंध तनमन क्रोध संकर बीज हम बोते रहे ||

 

भावना विचलित हुई जब चीर नैनो से हटा,

चार अश्रु गिर धरा पर माटी में खोते रहे ||

 

पीर बढती ही गई जब भावना के वेग से,

हम किनारे पर रहे हर शब्द को धोते रहे…

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Posted on November 20, 2013 at 7:00pm — 25 Comments

कुछ दोहे

जीवन में सद्काम का,........... हुआ सदा सम्मान |

आये दिन अब कर्म के,........ जाने सजग किसान ||

 

कारी रैना भोर में,..................... बीती देकर ज्ञान |

चार प्रहर में दोपहर,.............…

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Posted on May 22, 2013 at 10:00pm — 7 Comments

Comment Wall (22 comments)

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At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 9:44am on December 31, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

नये साल की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीय रक्ताले सर.......

At 8:37pm on December 15, 2012, AVINASH S BAGDE said…
आदरणीय अशोक रक्ताले जी,
इस 

महीने का सक्रिय सदस्य

चुने जाने पे आपका सादर  अभिनन्दन।
..अविनाश बागडे 
 
 
 

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"आदरणीय नीरज नीर भाई , हौसला अफज़ाई के लिये आपका बहुत शुक्रिया ।"
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"आदरणीय सोमेश भाई , आपकई स्नेहिल सराहना के लिये बहुत आभार"
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"आदरणीय हरि प्रकाश भाई , उत्साहवर्धन के लिये आपका आभारी हूँ ॥"
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गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post एक तरही ग़ज़ल - मैं रंग मुहब्बत का थोड़ा सा लगा दूँ तो ( गिरिराज भंडारी )
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"जितेन्द्र पस्टारिया जी बहुत बहुत शु्क्रिया आपका"
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