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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"आदरणीया राजेशकुमारी जी सादर, रचना आपको अच्छी लगी मेरा रचनाकर्म सार्थक हुआ. सादर आभार."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"आदरणीय डॉ. प्राची सिंह जी रचना आपको अच्छी लगी मेरे रचनाकर्म को मान मिला. सादर आभार."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, छंद आपको अच्छा लगा. मेरा रचना कर्म सार्थक हुआ. सादर आभार."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब सादर, रचना पसंद करने के लिए आपका दिल से आभार. सादर."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"रचना पसंद करने के लिए दिल से आभार आदरणीय सत्यनारायण सिंह साहब. सादर."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"मृदा-मूल का बंधन गहरा , तरुवर को देता ऊँचाई पूछ लता से देखे कोई , बंधन है कितना सुखदाई.............वाह ! भिन्न-भिन्न बंधन के भावों को प्रस्तुत करती सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीय अरुण निगम साहब. सादर."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"मैं बस आपका एक एहसास हूँ जो मुझे महसूस करेगा वही पायेगा , मेरा अस्तित्व भी देवता की तरह है , मानों तो देवता नहीं तो पत्थर   महसूस न करने वालों के लिये मैं हूँ भी नहीं पर जब मैं होता हूँ तो मेरा नाम लोग बताते हैं -- बन्धन । …"
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"तोड़ बंधन सारे जब जब तू अवतारी है , हजारों पर भारी अकेली तू नारी है , अकेली तू नारी है |.............वाह ! सुन्दर रचना आदरणीया छाया शुक्ला जी. बहुत-बहुत बधाई. सादर. "
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"भाई महर्षि जी सादर, माँ पिता से बच्चों के अटूट बंधन पर रची सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकारें. सादर."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"छटपटाकर निकली घूंघट और बुर्केनुमा कोकून से बाहर अब खुश हैं हाथों पर दस्ताने और चेहरे पर स्कार्फ लपेटे तितलियाँ....................वाह ! बहुत ही उम्दा और सटीक भाव लिए दोनों ही रचनाएं दिल तक पहुँच रही है. दिली बधाई स्वीकारें आदरणीया वंदना जी. सादर."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"आलस सुस्ती ही बाधाए, बंधन उनका एक बहाना, कर्मशील बंधन को तोड़े, जीवन सार उन्ही ने जाना | डरे न कूदे दरियाँ में जो, पथरीले पथ पर वे चलते, उनको जीवन लगे सुहाना, वे बंधन का पहने बाना | बैसाखी वे नहीं ढूंढते,    क्रंदन उनको नहीं सुहाता…"
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"उलझ गया बंजारा मन जाले में रिश्तों के ये न्यारे न्यारे बंधन..............वाह ! बहुत खूब ! आदरणीय खुर्शीद साहब, उम्दा गजल कही है. सभी अशआर दिए विषय को सार्थक करते हुए. बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"चंद लम्हे चल भी न पाएऔर रास्ते कहीं खो गए वक्त की आंधी में बंधन प्यार के धुंधले हो गए............बंधन कभी बंधते-बंधते बिखर भी जाते हैं. दिए विषय अनुसार सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय सुशील सरना जी. बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"आदरणीय सोमेश कुमार जी सादर, दिए विषय पर सुन्दर और भावपूर्ण रचना हुई है. बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"आदरणीय मनन कुमार जी सादर, सुन्दर रचना हुई है बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Nov 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49
"पंख प्यार के मै फैलाऊँ गीतों बहारों के मैं गाऊं दूर गगन तक उड़ता जाऊं शायद अपनी मंजिल पाऊँ धरा छोड़, अब अम्बर से जुड़ने दे I बंधन में मत बाँध मुझे प्रिय उड़ने दे !.............सुन्दर और दिए विषय को सार्थक करती रचना हुई है. क्या सुन्दर भाव हैं. वाह !…"
Nov 15

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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चुनावी चौसर ! (चौपई छंद)

छिड़ी हुई शब्दों की जंग | दिखा रहे नेता जी रंग ||

वैचारिकता नंगधडंग | सुनकर हैरत जन-जन दंग ||

जाति धर्म के पुते सियार | इनपर कहना है बेकार ||

बात-बात पर दिल पर वार | जन मानस पर अत्याचार ||

 

पांच वर्ष में एक चुनाव | छोड़े मन पर कई प्रभाव ||

महँगाई भी देती घाव | डुबो रही है सबकी नाव ||

नारी दोहन अत्याचार | मिला नहीं अबतक उपचार ||

सरकारें करती उपकार | निर्धन फिरभी हैं बीमार ||

 

तीर तराजू औ तलवार | किसे कहें अब जिम्मेदार…

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Posted on April 23, 2014 at 2:00pm — 27 Comments

दोहे-मोहें.

नेकनीयती वृन्द के, मुरझाये..….हैं फूल |

कहकर पुष्प गुलाब का, दिए सैकड़ों शूल ||

 

बही नाव……..पतवार भी, तूफानों की धार |

बढ़ा प्रेम तब सरित का, जब पाया मँझधार ||

 

कुल की करुणा कान में, बोली थी चुपचाप |

देख समय सूरज चढा, तू भी इसको भाप ||

 

अवसर का उपहास है, अनजाने ही हार |

भोग रहे पीड़ा कई, गए समय की मार ||

 

कागज़ पर लिखता रहा, विरह प्रेम के गीत |

जुडी कलम की छंद से, अनजाने ही प्रीत ||

 

तप…

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Posted on December 10, 2013 at 9:30pm — 13 Comments

हँसते रहे रोते रहे |

गूंजती थी जब खमोशी, हादसे होते रहे |

रात जागी थी जहां पर दिन वहीँ सोते रहे ||

 

अनमने से भाव थे वह अनमनी सी थी नजर

अनमने सिंगार पर ही मुग्ध हम होते रहे ||

 

कौंध कर बिजली गिरी वसुधा दिवाकर भी डरा,

कुंध तनमन क्रोध संकर बीज हम बोते रहे ||

 

भावना विचलित हुई जब चीर नैनो से हटा,

चार अश्रु गिर धरा पर माटी में खोते रहे ||

 

पीर बढती ही गई जब भावना के वेग से,

हम किनारे पर रहे हर शब्द को धोते रहे…

Continue

Posted on November 20, 2013 at 7:00pm — 25 Comments

कुछ दोहे

जीवन में सद्काम का,........... हुआ सदा सम्मान |

आये दिन अब कर्म के,........ जाने सजग किसान ||

 

कारी रैना भोर में,..................... बीती देकर ज्ञान |

चार प्रहर में दोपहर,.............…

Continue

Posted on May 22, 2013 at 10:00pm — 7 Comments

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At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 9:44am on December 31, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

नये साल की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीय रक्ताले सर.......

At 8:37pm on December 15, 2012, AVINASH S BAGDE said…
आदरणीय अशोक रक्ताले जी,
इस 

महीने का सक्रिय सदस्य

चुने जाने पे आपका सादर  अभिनन्दन।
..अविनाश बागडे 
 
 
 

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