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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"एक मुक्तक दिल से...   फूलों से भी कोमल है हृद, इसे तनिक मुस्काने दो । छिपी हुई हर बात बताओ, अधरों पर सब आने दो ।। कहते जिसको दिल से कहना, वैसे ही कह डालो ना । या फिर छोडो नैन मिलाओ, सब कुछ भूलो जाने दो ।।   मौलिक/अप्रकाशित."
Nov 10
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय भाई सतविन्द्र कुमार राणा जी सादर, प्रदत्त विषय पर अच्छे दोहे रचे है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
Nov 10
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय विवेक पांडे द्विज जी सादर, प्रदत्त विषय को साधते हुए कवित्त रचने का सुंदर प्रयास हुआ है. किन्तु अभी गेयता के लिए और भी प्रयास की आवश्यकता है. सादर. "
Nov 10
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय भाई शैख़ शहज़ाद उस्मानी साहब सादर, हिन्दुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब को और मजबूत करने का सन्देश लिए सुंदर अतुकांत रचा है आपने. अवश्य ही ऐसे कदम उठाये जाना चाहिए. सुंदर प्रस्तुति पर बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर."
Nov 10
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय विवेक पांडे द्विज जी सादर, प्रदत्त विषय पर भिन्न-भिन्न रंग लेकर सुंदर दोहे रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
Nov 10
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीया नमिता सुंदर जी सादर, प्रदत्त विषय पर सुन्दर प्रेम के रंग से रंगी  क्षणिका रची है आपने. इस सुंदर रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर ."
Nov 10
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी सादर, देशोत्थान के लिए सभी को हिलमिल कर रहने और मुसीबतों से लड़ने का सन्देश देते सुंदर ताटंक छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर."
Nov 10
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय सुरेन्द्रनाथ सिंह जी सादर, आपस में सौहार्द बनाए रखने का सन्देश लिए दोनों ही कुण्डलिया छंद सुंदर रचे हैं आपने. प्रदत्त विषय पर. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर "
Nov 10
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"वाह खूब ग़ज़ल कही है..बधाई"
Oct 12
vijay nikore commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"बहुत ही खूबसूरत गज़ल के लिए बधाई, मित्र अशोक कुमार जी।"
Oct 8
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"बहुत सारी शिकायतों का गज़ल में सुंदर समावेष किया है अशोक जी बधाई"
Oct 7
dandpani nahak commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी आदाब बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें! सभी शैर लाज़वाब वाह! क्या कहने! दिल से बधाई"
Oct 6
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर नमस्कार, गज़ल पर हुए मेरे प्रयास को सराहने के लिए आपका हृदय से आभार ।सादर ।"
Oct 6
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार ,  आपसे मिली दाद ने मेरे रचना कर्म को सार्थक किया है । हार्दिक आभार । सादर ."
Oct 6
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट है झुलसने लगे अब शजर देख लो ।वाह आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत सुंदर और यथार्थ का चित्रण करती बेहतरीन ग़ज़ल। दिल से बधाई सर।"
Oct 4
Samar kabeer commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"जनाब अशोक कुमार रक्ताले जी आदाब,बहुत उम्द: ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Oct 4

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I am a technical person and always talk in right angle.

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गज़ल

उठाओ नजर रहगुज़र देख लो ।

यहाँ जिन्दगी का सफ़र देख लो ।

 

नियम कायदे तो बने हैं कई

मगर भंग हैं सब जिधर देख लो ।

 

न भय है न चिंता न है शर्म ही

बना है बशर जानवर देख लो ।

 

कहीं लूट है तो कहीं क़त्ल है

किसी भी नगर की ख़बर देख लो ।

 

गले मिल रहे दोस्त खंजर लिए

बदलते समय का असर देख लो ।

 

करें फ़िक्र उनकी जो हैं नापसंद

सियासत का है ये हुनर देख लो ।

 

बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट…

Continue

Posted on October 2, 2019 at 10:00pm — 8 Comments

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

रसाला छंद एक प्रयास – (भ न ज भ ज ज ल)

जीवन विषम अबोध , जानकर ना डर मानव |

प्राप्त प्रथम कर ज्ञान, ज्ञान बिन पार न हो भव ||

अंतर तल अँधियार , दूर कर रोशन हो मग |

हो जगमग हर पंथ , पंथ अति रोशन हो जग ||

 

श्रेष्ठ जटिल हर कर्म, है मनुज उन्नति दायक |

भूल बिसर मत कृत्य, सत्य हर भूपति नायक ||

भूमि सतह पर स्वर्ग, कर्म बिन हो कब संभव |

जीवन पथ पर कर्म , धर्म सम भूल न मानव ||

 

मानव परहित कार्य , हैं न बस दाहकता दुख |

कष्ट सहन कर लाख, एक यदि जीवन का सुख…

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Posted on September 22, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 21 Comments

Comment Wall (25 comments)

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At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

 
 
 

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