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Ashok Kumar Raktale
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Ashok Kumar Raktale commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post याद
"वाह ! वाह ! बहुत ही मार्मिक रचना हुई है एक दृश्य सा खींच आया है आदरनीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब. सादर."
Monday
Ashok Kumar Raktale commented on Abha saxena's blog post लघु कथा राखी वाला नोट
"वाह ! उत्साह में लापरवाह होना कितना घातक होता है. यह बताती सुंदर लघुकथा. बहुत-बहुत बधाई."
Monday
Ashok Kumar Raktale commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: अंदाज कातिलों के बेहतरीन बहुत हैं
"वाह ! बहुत खूबसूरत गजल कही है आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी. बहुत-बहुत मुबारकबाद क़ुबूल करें. सादर."
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion रचनाओं को सम्मानित करने की एक अनूठी पहल @ महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना ( Best Creation of the Month )
"हार्दिक आभार आदरणीय तेज वीर सिंह साहब. सादर."
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion रचनाओं को सम्मानित करने की एक अनूठी पहल @ महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना ( Best Creation of the Month )
"उतासाह्वर्धन के लिए आपका दिल से आभार आदरनीय सुशील सरना साहब. सादर."
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion रचनाओं को सम्मानित करने की एक अनूठी पहल @ महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना ( Best Creation of the Month )
"सादर आभार आदरणीय गिरिराज भंडारी साहब. सादर."
Monday
Ashok Kumar Raktale commented on रामबली गुप्ता's blog post स्वाभिमानी पत्थर-रामबली गुप्ता
"वाह ! वाह ! दोनों ही छंद सुंदर रचे हैं आदरणीय रामबली गुप्ता जी. बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Dr. Vijai Shanker's blog post रक्षा का बंधन ( लेख ) - डॉo विजय शंकर
"//पर क्या रक्षा बंधन केवल भाई-बहन के बीच का ही बंधन पर्व है ? रक्षा के इस बंधन की आवश्यकता तो सभी रिश्तों में है , सभी जाने-अनजाने के बीच , सभी के जीवन , मान सम्मान के लिए।//..........बिलकुल जरूरी है हर रिश्ते को जोड़े रखने के लिए इस तरह के त्यौहारों…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ ’चित्र से काव्य तक’ छंदोत्सव" अंक- 64 की समस्त रचनाएँ चिह्नित in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, १२:१३ am रचनाओं के शीघ्र संकलन और छान्दोत्सव -६४ की सफल समाप्ति के लिए बहुत-बहुत बधाई.  रंगी हुई पंक्तियाँ अवश्य ही रचनाकारों को अपनी गलती समझने और सुधार में सहायक होंगी. सादर."
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 64 in the group चित्र से काव्य तक
"उत्साहवर्धन के लिए दिल से आभार आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 64 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत-बहुत आभार आदरणीय शैख़ शहजाद उस्मानी साहब.सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 64 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 64 in the group चित्र से काव्य तक
"जी ! और सभी छंद भी उत्तम रचे हैं. बहुत अच्छा लगा. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 64 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय शैख़ शहजाद उस्मानी साहब सादर, कुकुभ छंद पर सुन्दर प्रयास किया है आपने. बाकी गुणीजनों ने बताया ही है. इस सहभागिता के लिए बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 64 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लड़ीवाला साहब सादर, प्रदत्त चित्र पर कुकुभ छंद आधारित सुंदर गीत रचा है. फिरभी जैसा कि आदरणीय सौरभ जी ने कहा है तुकांतता अवश्य जांच लें. इस सुंदर प्रस्तुति पर बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 64 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सुरेश कुमार जी सादर, प्रदत्त चित्र से भाव लेकर सुंदर दोहे रचे हैं. कुछ खामियों पर गुणीजनों ने इंगित किया ही है.अवश्य ही आप संकलन में सुधार प्रस्तुत करेंगे.  सादर."
Saturday

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हर कली अब कमल हो रही है

212  212  212  2

 

जिन्दगी अब सरल हो रही है

बात हर इक गजल हो रही है 

 

दलदली हो चुकी है जमीं पर,

हर कली अब कमल हो रही है

 

तितलियाँ भर रहीं हैं उड़ानें

नीति बेशक सफल हो रही है

 

आ रहा है कहीं से उजाला

रौशनी आजकल हो रही है

 

मखमली हो रही हैं हवाएं

मेंढकी भी विकल हो रही है

 

है दरोगा बड़ा लालची वो

धारणा अब अटल हो रही है

 

मौलिक/अप्रकाशित.

Posted on July 28, 2016 at 11:00pm — 15 Comments

मन उस आँगन ले जाए ( गीतिका )

 

आकर साजन तू ही ले जा क्यूँ ये सावन ले जाए

अधरों पर छायी मस्ती ये क्यूँ अपनापन ले जाए

 

भिगो रहा है बरस-बरस कर मेघ नशीला ये काला

कहीं न ये यौवन की खुश्बू मन का चन्दन ले जाए

 

कड़क-गरज डरपाती बिजली पल-पल नभ में दौड़ रही

कहीं न ये चितवन के सपने संचित कुंदन ले जाए

 

बिंदी की ये जगमग-जगमग खनखन मेरी चूड़ी की,

बूँदों की ये रिमझिम टपटप छनछन-छनछन ले जाए

 

पुहुप बढाते दिल की धड़कन शाखें नम कर डोल…

Continue

Posted on July 20, 2016 at 1:00pm — 16 Comments

दुश्मन नए मिले.

२२१  २१२१ १२२१ २१२

 

जब छीनने छुडाने के साधन नए मिले

हर मोड़ पर कई-कई सज्जन नए मिले

 

कुछ दूर तक गई भी न थी राह मुड़ गई

जिस राह पर फूलों भरे गुलशन नए मिले

 

काँटों से खेलता रहा कैसा जुनून था

उफ़! दोस्तों की शक्ल में दुश्मन नए मिले

 

जितने भी काटता गया जीवन के फंद वो  

उतने ही जिंदगी उसे बंधन नए मिले

 

अपनों से दूर कर न दे उनका मिज़ाज भी  

गलियों से अब जो गाँव की आँगन नए…

Continue

Posted on July 18, 2016 at 2:00pm — 19 Comments

सभी नादान बन गए

२२१  २१२१ १२२१ २१२

 

ये रूप रंग गंध सभी  शान बन गए

कुछ रोज में ही जो मेरी पहचान बन गए

 

नफरत के सिलसिले जो चले धूप छाँव बन

इंसानियत के शब्द भी मेहमान बन गए

 

तुम-तुम न रह सके न ही मैं-मैं ही बन सका

दोनों ही आज देख लो शैतान बन गए

 

खेमों में बँट गए हैं सभी आज इस तरह

कुछ राम बन गए कई रहमान बन गए

 

हद के सवाल पर या कि जिद के सवाल पर

हद भूलकर गिरे सभी नादान बन…

Continue

Posted on July 17, 2016 at 9:35am — 5 Comments

Comment Wall (23 comments)

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At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 9:44am on December 31, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

नये साल की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीय रक्ताले सर.......

 
 
 

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