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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post दोहा गीत (एक प्रयास)
"अभ्यास के तौर पर अच्छा रचनाकर्म हुआ है आदरणीय अशोकजी. वैसे कई जगह विशेष तौर पर ध्यान देने की आवश्यकता है लेकिन चूँकि आपने पहली बार इस तरह की विधा पर काम किया है उस हिसाब से आपका प्रयास श्लाघनीय है. हार्दिक शुभकामनाएँ "
Jul 20
Ashok Kumar Raktale replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ ’चित्र से काव्य तक’ छंदोत्सव" अंक- 51 की समस्त रचनाएँ चिह्नित in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ जी सादर  प्रणाम , छान्दोत्सव- ५१ की चिन्हित  रचनाओं  के  संकलन  की प्रस्तुति पर  बहुत-बहुत  आभार. चिन्हित  रचनाएं  काफी कुछ सिखाती  हैं. सादर."
Jul 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लड़ीवाला  जी सादर, बहुत  ही सुंदर  दोहा गीत  रचा  है. बहुत  बधाई  स्वीकारें. सादर. "
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"सकुचाती साहस भरी , झूल रही है नार जगह बनी दो की मगर,झूल रहीं है चार.......वाह  ! चित्र  को खूब  परिभाषित  किया है.  हिय में उठती प्यास भी, ऊपर उठती जाय पर झूले के साथ में ,नीचे कभी न आय ...............वाह ! क्या बात…"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया डॉ. नीरज  शर्मा जी सादर, तीनों  ही  कुण्डलिया छंद  सुन्दर रचे हैं. प्रथम दो  छंदों  में चित्र  के  भावों  को बहुत  सुन्दरता से समाहित किया है  आपने. इस सुंदर  प्रस्तुति  पर…"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय श्री सुनील जी सादर, रोला  छंद  पर  सुंदर  प्रयास  हुआ  है. सादर. "
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय  सौरभ जी सादर, बहुत  सुंदर  रोला गीत  हुआ  है. हर  बंद मन मोहक  बन पडा  है. कोई भी रोला किसी से कम नहीं. अति मनोहारी प्रस्तुति  के  लिए  बहुत-बहुत बधाई  स्वीकारें. सादर."
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"भीड़ बहुत है बाग में, सुंदर  यह संयोग। झूले का लेते मज़ा, जोश दिलाते लोग॥...........सुन्दर. आदरणीय  अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब  सादर, प्रदत्त चित्र पर  सुंदर  दोहे  रचे  हैं.बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर."
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"सावन आया झूम के, झटपट झूला डाल.   कोयल मन की कूकती, बैठी अमुआ डार मेरे मन पर छा गया, बादल सा विस्तार साँसों को महका रही, गुम्फित मोंगर माल............वाह  सुंदर  ! आदरणीय मिथिलेश  वामनकर जी  सादर, सुन्दर दोहा गीत  रचा…"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"पीत  रक्त  पट  ओढ़ि   तन , पेंग  चढ़ाएं  नार। झूलत कटि तनु खांहिं बल ,लचकत यौवन भार॥..........बहुत  सुन्दर  दोहा. आदरणीया डॉ. नीरज शर्मा जी सादर, प्रदत्त  चित्र से भाव  लेकर  रचे  सभी…"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"झूला झूले रागिनी, लहर-लहर में राग बाहर जितना आर्द्र तन, भीतर उतनी आग ............वाह  ! सच  है सावन मन सुलगाता है. आदरणीय  सौरभ  जी  सादर,  प्रदत्त चित्र पर  सभी  दोहे  एक  नए  अंदाज…"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह  ! बहुत  सुंदर  दोहा आदरणीय  रवि शुक्ला  जी. बहुत-बहुत  बधाई. सादर."
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"झूला झूले लडकियाँ,जब तक ना हो शाम।देखों फिर से आ गया,सावन खाने आम।।...........वाह  ! बहुत  सुंदर.  आदरणीय राहुल दांगी जी सादर, सुंदर  दोहे  रचे  हैं. सभी  दोहे  यदि  प्रथम दोहे  की तरह  प्रदत्त…"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया राजेश कुमारी जी सादर, प्रदत्त चित्र  को  शब्द  देकर  सुन्दर  कुण्डलिया छंद  रचा  है. बहुत-बहुत  बधाई  स्वीकारें. सादर. "
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"भाई  सचिन देव  जी  सादर, आपकी  स्नेहमयी प्रतिक्रिया  पाकर  प्रसन्नता  हुई. बहुत-बहुत  आभार. सादर. "
Jul 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-51 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय  अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर  प्रणाम, आपको प्रस्तुत  दोहा गीत  पसंद  आया  मेरे  रचनाकर्म  को मान मिला  है. सच है  झूला  बंधा  है तो डाल का  लचकना सीधे-सीधे  दिख रहा…"
Jul 18

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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दोहा गीत (एक प्रयास)

मनुज रूप मैं पा गया,

हुआ स्वप्न साकार

 

 

कोमल किरणे भोर की,

बिखराती जब नेह है,

दिखती उल्लासित धरा

आन्दंदित हर देह है.

 

सचमुच एक सराय सा

लगा मुझे संसार

 

प्यार भरे व्यवहार से

मिलती देखी जीत है,

बना एक अनजान जब,

मेरे मन का मीत है

 

सच्ची निष्ठा ने किया,

हरदम बेडा पार

 

लोभ मोह माया कपट,

सारे लगते काल हैं,

सत्य यहाँ है मौत ही,

बाकी सब…

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Posted on July 9, 2015 at 9:07am — 14 Comments

चुनावी चौसर ! (चौपई छंद)

छिड़ी हुई शब्दों की जंग | दिखा रहे नेता जी रंग ||

वैचारिकता नंगधडंग | सुनकर हैरत जन-जन दंग ||

जाति धर्म के पुते सियार | इनपर कहना है बेकार ||

बात-बात पर दिल पर वार | जन मानस पर अत्याचार ||

 

पांच वर्ष में एक चुनाव | छोड़े मन पर कई प्रभाव ||

महँगाई भी देती घाव | डुबो रही है सबकी नाव ||

नारी दोहन अत्याचार | मिला नहीं अबतक उपचार ||

सरकारें करती उपकार | निर्धन फिरभी हैं बीमार ||

 

तीर तराजू औ तलवार | किसे कहें अब जिम्मेदार…

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Posted on April 23, 2014 at 2:00pm — 27 Comments

दोहे-मोहें.

नेकनीयती वृन्द के, मुरझाये..….हैं फूल |

कहकर पुष्प गुलाब का, दिए सैकड़ों शूल ||

 

बही नाव……..पतवार भी, तूफानों की धार |

बढ़ा प्रेम तब सरित का, जब पाया मँझधार ||

 

कुल की करुणा कान में, बोली थी चुपचाप |

देख समय सूरज चढा, तू भी इसको भाप ||

 

अवसर का उपहास है, अनजाने ही हार |

भोग रहे पीड़ा कई, गए समय की मार ||

 

कागज़ पर लिखता रहा, विरह प्रेम के गीत |

जुडी कलम की छंद से, अनजाने ही प्रीत ||

 

तप…

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Posted on December 10, 2013 at 9:30pm — 13 Comments

हँसते रहे रोते रहे |

गूंजती थी जब खमोशी, हादसे होते रहे |

रात जागी थी जहां पर दिन वहीँ सोते रहे ||

 

अनमने से भाव थे वह अनमनी सी थी नजर

अनमने सिंगार पर ही मुग्ध हम होते रहे ||

 

कौंध कर बिजली गिरी वसुधा दिवाकर भी डरा,

कुंध तनमन क्रोध संकर बीज हम बोते रहे ||

 

भावना विचलित हुई जब चीर नैनो से हटा,

चार अश्रु गिर धरा पर माटी में खोते रहे ||

 

पीर बढती ही गई जब भावना के वेग से,

हम किनारे पर रहे हर शब्द को धोते रहे…

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Posted on November 20, 2013 at 7:00pm — 25 Comments

Comment Wall (22 comments)

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At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 9:44am on December 31, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

नये साल की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीय रक्ताले सर.......

At 8:37pm on December 15, 2012, AVINASH S BAGDE said…
आदरणीय अशोक रक्ताले जी,
इस 

महीने का सक्रिय सदस्य

चुने जाने पे आपका सादर  अभिनन्दन।
..अविनाश बागडे 
 
 
 

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