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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion शरद सत्र 2014-15 हेतु ओपन बुक्स ऑनलाइन प्रबंधन टीम व कार्यकारिणी टीम का पुर्नगठन...
"ओबीओ की शरद-सत्र की टीम को हार्दिक बधाई. आदरणीय शिज्जू शकूर जी को कार्यकारिणी सदस्य चुने जाने और आदरणीया राजेशकुमारी जी को सह-संयोजक बनाए जाने पर विशेष बधाई."
Oct 6
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया छाया शुक्ला जी सादर, दिए छंद पर सुन्दर प्रयास हुआ है. यदि यह आपकी प्रथम प्रस्तुति है तो बहुत सुन्दर हैं. सादर."
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया माहेश्वरी कनेरी जी सादर, सुन्दर रचना हुई है. बहुत -बहुत बधाई. सादर. मगर मैं समझ नहीं पाया दो-दो पद में ढाई छंद रचने का क्या कारण है. आपके सहित कई अन्य साथियों ने इस तरह से रचना की है."
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया सरिता भाटिया जी सादर, सुन्दर रचना हुई है किन्तु यह ढाई छंद हो गया है तीसरा छंद अधुरा है. आपके पहले छंद का शिखी भी चित्र में नहीं दिखा. मगर भाव और तुक के लिहाज से उत्तम रचना हुई है. बहुत बधाई. सादर."
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"ख़ुशी से खिलाते इसे घास चारा सभी बाल माने गऊँ का सहारा ||..........वाह ! आदरणीय लड़ीवाला साहब सादर, सुन्दर छंद रचे हैं. कुछ जगह सुधार की गुंजाईश भी  है. मगर भाव उत्तम है. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर."
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"दही ढूध पी के हुआ स्थूल मैया झुका शीश बच्चा रहा झूल मैया............सुन्दर भाव लिया है ! इस सुन्दर प्रस्तुति पर बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें आदरणीय खुर्शीद साहब.  अवश्य ही सुधार की गुंजाइश शेष है.  "
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय खुर्शीद साहब सादर, प्रस्तुत रचना को सार्थक करती आपकी उत्तम प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार. सादर."
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय गिरिराज भंडारी साहब सादर, रचना को चित्र अनुरूप पाने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार. सादर."
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"जी ! आपका सुझाव उत्तम है ! प्रस्तुत रचना को आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया से मान मिला. आपका हृदयातल से आभार. सादर."
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया छाया शुक्ला जी सादर,  आपकी  लम्बी वाह से संतोष हुआ. सादर आभार."
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लड़ीवाला साहब सादर, रचना पसंद करने और आपकी स्नेहिल पन्क्तियों के लिए दिल से आभार. सादर."
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया कल्पना रामानी जी सादर, प्रस्तुत छंद पर आपकी सार्थक प्रतिक्रिया से रचनाकर्म को मान मिला. सादर आभार."
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"जरा देखिये धेनु  की भाव धारा किये नेत्र  में बंद  संसार सारा I तभी पूजते है यहाँ लोग श्यामा मिलेगा कहाँ  आह ऐसा नजारा I.................वाह ! वाह ! भाव तो बस मन मोह रहे हैं. आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब सादर, सुन्दर…"
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब सादर,  आपकी प्रस्तुत रचनाएं भुजंग प्रयात छंद न होकर कुछ-कुछ भुजंग प्रयात सवैया जैसी लग रही हैं. 'सुवदना'  को देख लें. इस सुन्दर प्रयास पर बधाई स्वीकारें. सादर ."
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब सादर, रचना को चित्र के अनुकुल पाने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार. सादर. "
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-41 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण सिंह जी सादर, रचना को सराहने के लिए आपका दिल से आभार. जी ! भक्त और बाल को इधर उधर बैठाने के चक्कर में यहाँ एक शब्द छुट गया है. कृपया इसे ऐसे पढ़ें. यहाँ बाल ये भक्त भी शान सा है."
Sep 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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चुनावी चौसर ! (चौपई छंद)

छिड़ी हुई शब्दों की जंग | दिखा रहे नेता जी रंग ||

वैचारिकता नंगधडंग | सुनकर हैरत जन-जन दंग ||

जाति धर्म के पुते सियार | इनपर कहना है बेकार ||

बात-बात पर दिल पर वार | जन मानस पर अत्याचार ||

 

पांच वर्ष में एक चुनाव | छोड़े मन पर कई प्रभाव ||

महँगाई भी देती घाव | डुबो रही है सबकी नाव ||

नारी दोहन अत्याचार | मिला नहीं अबतक उपचार ||

सरकारें करती उपकार | निर्धन फिरभी हैं बीमार ||

 

तीर तराजू औ तलवार | किसे कहें अब जिम्मेदार…

Continue

Posted on April 23, 2014 at 2:00pm — 27 Comments

दोहे-मोहें.

नेकनीयती वृन्द के, मुरझाये..….हैं फूल |

कहकर पुष्प गुलाब का, दिए सैकड़ों शूल ||

 

बही नाव……..पतवार भी, तूफानों की धार |

बढ़ा प्रेम तब सरित का, जब पाया मँझधार ||

 

कुल की करुणा कान में, बोली थी चुपचाप |

देख समय सूरज चढा, तू भी इसको भाप ||

 

अवसर का उपहास है, अनजाने ही हार |

भोग रहे पीड़ा कई, गए समय की मार ||

 

कागज़ पर लिखता रहा, विरह प्रेम के गीत |

जुडी कलम की छंद से, अनजाने ही प्रीत ||

 

तप…

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Posted on December 10, 2013 at 9:30pm — 13 Comments

हँसते रहे रोते रहे |

गूंजती थी जब खमोशी, हादसे होते रहे |

रात जागी थी जहां पर दिन वहीँ सोते रहे ||

 

अनमने से भाव थे वह अनमनी सी थी नजर

अनमने सिंगार पर ही मुग्ध हम होते रहे ||

 

कौंध कर बिजली गिरी वसुधा दिवाकर भी डरा,

कुंध तनमन क्रोध संकर बीज हम बोते रहे ||

 

भावना विचलित हुई जब चीर नैनो से हटा,

चार अश्रु गिर धरा पर माटी में खोते रहे ||

 

पीर बढती ही गई जब भावना के वेग से,

हम किनारे पर रहे हर शब्द को धोते रहे…

Continue

Posted on November 20, 2013 at 7:00pm — 25 Comments

कुछ दोहे

जीवन में सद्काम का,........... हुआ सदा सम्मान |

आये दिन अब कर्म के,........ जाने सजग किसान ||

 

कारी रैना भोर में,..................... बीती देकर ज्ञान |

चार प्रहर में दोपहर,.............…

Continue

Posted on May 22, 2013 at 10:00pm — 7 Comments

Comment Wall (22 comments)

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At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 9:44am on December 31, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

नये साल की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीय रक्ताले सर.......

At 8:37pm on December 15, 2012, AVINASH S BAGDE said…
आदरणीय अशोक रक्ताले जी,
इस 

महीने का सक्रिय सदस्य

चुने जाने पे आपका सादर  अभिनन्दन।
..अविनाश बागडे 
 
 
 

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