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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"जी ! सुन्दर संशोधित.सादर."
yesterday
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"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर, प्रदत्त चित्र पर बहुत उत्तम छंद रचे हैं आपने. दूर से पानी लाने की परेशानी  तो कन्याओं के नाम पर राजनीति जैसे मुद्दों को आपने अपने छंदों में खूब उठाया है. इस सुंदर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकारें. फिरभी दूसरा…"
yesterday
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"आदरणीय सतीश मापतपुरी साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते व वृक्ष और जल महत्व बताते बहुत उत्तम कुण्डलिया छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर."
yesterday
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, जी हेंड पम्प के लिए हिंदी का इतना सुंदर शब्द देख मेरा मन इसका प्रयोग करने के लिए उत्साहित हुआ और मैंने अपने दोनों ही छंदों में इसका प्रयोग किया है.प्रस्तुति पर आपके आशीर्वाद से रचनाकर्म मान पा गया. हार्दिक आभार.…"
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"आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह साहब सादर, प्रस्तुत छंद आपको विषयानुकूल आकर्षक लगे. मेरा रचनाकर्म सार्थक हुआ.अतिशय आभार आपका.सादर. "
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"आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र पर प्रस्तुत कुकुभ छंद आपको अच्छे लगे मेरा रचनाकर्म सफल हुआ है. हार्दिक आभार स्वीकारें. सादर. "
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"आदरणीय भाई तसदीक़ एहमद खान साहब सादर, प्रस्तुत छंदों को सराह कर मेरा उत्साहवर्धन करने के लिए आपका हृदयातल से आभार. सादर."
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"आदरणीय अजय गुप्ता जी सादर, प्रदत्त चित्र पर रचे छंद आपको अच्छे लगे मेरी रचना को मान मिला है.हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
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"आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह साहब सादर प्रदत्त चित्र पर सुंदर कुकुभ छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. यह अवश्य है कुछ जगह गेयता कमजोर है. जबकि अंतिम छंद कुकुभ न होकर ताटंक हो गया है. सादर."
yesterday
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"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी सादर, प्रदत्त चित्र पर कुण्डलिया छंद रचने का सुन्दर प्रयास क्या है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. प्रथम  चरण में १४ मात्राएँ हो रही हैं. /कभी हो जाय बंद/ व अंतिम दोनों पंक्तियों में गेयता नहीं है. देख लें. सादर "
yesterday
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"आदरणीय शिज्जू 'शकूर' भाई सादर, छान्दोत्सव में आपकी उपस्थिति से प्रसन्नता हुई है. प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते दोनों ही कुकुभ छंद आपने अच्छे रचे हैं. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
yesterday
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"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रदत्त चित्र पर सुंदर कुण्डलिया छंद रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें.फिरभी पिपासा /पाता छान्दसिक तुक नहीं है. सादर. "
yesterday
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"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्र पर सुंदर कुकुभ और कुंडलिया छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. फिरभी आपकी प्रस्तुति में प्रथम दो  छंद कुकुभ न होकर ताटंक हो गए प्रतीत होते हैं.. द्वितीय के प्रथम दो पदों का तुक भी…"
Saturday
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"आदरणीय तस्दीक एहमद खान साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र को बहुत उत्तम रीति से परिभाषित किया है आपने. कुण्डलिया छंद तो बहुत ही उत्तम रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. कुकुभ छंद में अवश्य प्रारम्भ के दो छंद नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. क्योंकि…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार, चित्र पर प्रस्तुत छंद आपको प्रदत्त चित्र अनुरूप लगे मेरे सृजन को मान मिला. हार्दिक आभार. कृपया प्रस्तुति के द्वितीय छंद में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा करते हुए प्रतिक्रिया में प्रस्तुत संशोधित रूप…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"कृपया मेरी प्रस्तुति के द्वितीय छंद में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा करते हुए संशोधित रूप नीचे लिखे अनुसार पढ़ें. सादर.   प्यास लगी हो तब लगता जल, बहती सी इक मधु धारा | चापानल ही बीच सफ़र में , एक सहारा हैं प्यारा || जहाँ-जहाँ भी आफत आयी , वहाँ इसे…"
Saturday

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Ujjain
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Ujjain
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I am a technical person and always talk in right angle.

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रसाला छंद एक प्रयास – (भ न ज भ ज ज ल)

जीवन विषम अबोध , जानकर ना डर मानव |

प्राप्त प्रथम कर ज्ञान, ज्ञान बिन पार न हो भव ||

अंतर तल अँधियार , दूर कर रोशन हो मग |

हो जगमग हर पंथ , पंथ अति रोशन हो जग ||

 

श्रेष्ठ जटिल हर कर्म, है मनुज उन्नति दायक |

भूल बिसर मत कृत्य, सत्य हर भूपति नायक ||

भूमि सतह पर स्वर्ग, कर्म बिन हो कब संभव |

जीवन पथ पर कर्म , धर्म सम भूल न मानव ||

 

मानव परहित कार्य , हैं न बस दाहकता दुख |

कष्ट सहन कर लाख, एक यदि जीवन का सुख…

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Posted on September 22, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 21 Comments

‘वागीश्वरी’ सवैया पर एक प्रयास

१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२

भजो राम को या भजो श्याम को या, भजो नित्य ही मित्र माँ बाप को |

चुनों धर्म का मार्ग सच्चा हमेशा , बढ़ावा न देना कभी पाप को,

सिखाना सभी को सिखाना स्वतः को, भुलाना यहाँ व्यर्थ संताप को,

नई ये हवाएं कहें क्या सुनो तो, सुनो थाप को वक्त की चाप को ||

तजो लाज सारी करो कर्म अच्छे, रहोगे जहां में तभी शान से |

न लेना किसी का न देना किसी का, जिलाता यही मार्ग सम्मान से,

बिना कर्म पाते सभी दुःख देखो,…

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Posted on November 5, 2016 at 10:53pm — 9 Comments

माता मैं ना जाऊँगा

कितने कष्ट सहे हैं तूने , कैसे मुझे पढ़ाया है,

तुझे छोड़कर घर से बाहर, मैंने कदम बढाया है |

अनचाहे ही माता तुझको , मैंने आज रुलाया है

भाग्य विधाता ने भी देखो, कैसा खेल रचाया है ||

 

 

रुक जाता मैं माता क्षणमें, बस कहने की देरी थी,

जाऊँ मैं परदेस मगर माँ, ये जिद भी तो तेरी थी |

देवों को नित पूजा तूने , माला भी नित फेरी थी,

तुझको छोड़ कहीं जाऊँ मैं, ये ईच्छा कब मेरी थी ||

 

 

दमकुंगा बन कुंदन लेकिन, काम न तेरे…

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Posted on September 17, 2016 at 9:30pm — 13 Comments

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At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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