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Dr Dilip Mittal
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सुझाव एवं शिकायत

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Apr 10, 2015
Dr Dilip Mittal and Kewal Prasad are now friends
Mar 13, 2015
Dr Dilip Mittal updated their profile
Mar 13, 2015
MAHIMA SHREE commented on Dr Dilip Mittal's blog post क्षणिकाएँ
"बहुत ही सुंदर संदेशात्मक भावाभिव्यक्ति बधाई आपको"
Apr 24, 2014
savitamishra commented on Dr Dilip Mittal's blog post क्षणिकाएँ
"बहुत सुंदर सन्देश"
Apr 24, 2014
जितेन्द्र पस्टारिया commented on Dr Dilip Mittal's blog post क्षणिकाएँ
"बहुत सुंदर सार्थक सन्देश, बधाई आदरणीय दिलीप जी"
Apr 24, 2014

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Dr Dilip Mittal's blog post क्षणिकाएँ
"आदरणीय , अच्छी क्षणिकाओं की रचना की है , बधाई !!"
Apr 23, 2014
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on Dr Dilip Mittal's blog post क्षणिकाएँ
"आदरणीय दोनों ही क्षणिकाओं के भाव बहुत ही गहन हैं कुछ टंकण त्रुटियाँ हैं सुधार लें. इस रचना पर बधाई स्वीकारें."
Apr 23, 2014
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on Dr Dilip Mittal's blog post क्षणिकाएँ
"आपके सुन्दर विचारों को नमन "
Apr 22, 2014
Dr Dilip Mittal posted a blog post

क्षणिकाएँ

खुदा के घर से किसी के दिल पर ,ना हिन्दू ना मुसलमान की छाप लगकर आयी है ,फिर क्यूँ तुमने हमपर जाती की तोहमत लगाई है ,खुदा का वास्ता -अब, ना हिन्दू ना मुसमान ना ईसाई बना हमको ,इंसानियत हमारी ज़ात हैं ,कुछ और ना बना हमकोदिल जिगर गुर्दे ,तुम भी रखते हो ,हम भी रखते हैं ,चाहो तो जंग के मैदान में आजमा सकते हो ,और अगर चाहो तो -ज़रूरतमंद को दान कर इंसान और इंसानियत ,दोनों को बचा सकते होअप्रकाशित मौलिकSee More
Apr 22, 2014
बृजेश नीरज left a comment for Dr Dilip Mittal
"आदरणीय दिलीप जी, हम सब साथ-साथ साहित्य की विविध विधाओं की जानकारी प्राप्त करेंगे. सादर!"
Mar 31, 2014
Dr Dilip Mittal left a comment for बृजेश नीरज
"आदरणीय बृजेशजी ,क्षणिकाएँ क्या होती हैं, शिल्प क्या है , इसका technical ज्ञान मुझे नहीं है ,इन पर रौशनी डालना बड़े साहित्यकारों कि बातें है ,मेरा प्रयास मेरे भावों को मेरी रचनाओं में केवल लीपीबद्द करना मात्र ही है,इस प्रयास में क्या बनता है कविता,…"
Mar 30, 2014
Dr Dilip Mittal commented on Dr Dilip Mittal's blog post क्षणिकाएँ
"आदरणीय अभिनवजी ,गिरिराजजी ,श्यामजी , लक्षमण प्रसादजीरचना पसंद आने के लिए शुक्रिया"
Mar 30, 2014
Dr Dilip Mittal commented on Dr Dilip Mittal's blog post क्षणिका
"आदरणीय लक्षमण प्रसादजी ,रामशिरोमणीजी ,अखिलेश श्रीवास्तवजी रचना पसंद आने के लिए शुक्रिया"
Mar 30, 2014
बृजेश नीरज commented on Dr Dilip Mittal's blog post क्षणिकाएँ
"आदरणीय क्षणिकाएँ क्या होती हैं? कृपया मार्गदर्शन करने का कष्ट करें. इसके शिल्प पर भी कुछ रोशनी डालने की कृपा करें. मेरे हिसाब से कुछ टंकण त्रुटियाँ हैं. कृपया देख लें. सादर!"
Mar 22, 2014
laxman dhami commented on Dr Dilip Mittal's blog post क्षणिकाएँ
"भाई दलीप जी भावपूर्ण पंक्तियों के लिए हार्दिक बधाई ."
Mar 22, 2014

Profile Information

Gender
Male
City State
Rajasthan
Native Place
Ajmer
Profession
Doctor

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क्षणिकाएँ

खुदा के घर से किसी के दिल पर ,
ना हिन्दू ना मुसलमान की छाप लगकर आयी है ,
फिर क्यूँ तुमने हमपर जाती की तोहमत लगाई है ,
खुदा का वास्ता -
अब, ना हिन्दू ना मुसमान ना ईसाई बना हमको ,
इंसानियत हमारी ज़ात हैं ,कुछ और ना बना हमको

दिल जिगर गुर्दे ,तुम भी रखते हो ,हम भी रखते हैं ,
चाहो तो जंग के मैदान में आजमा सकते हो ,
और अगर चाहो तो -
ज़रूरतमंद को दान कर इंसान और इंसानियत ,
दोनों को बचा सकते हो


अप्रकाशित मौलिक

Posted on April 21, 2014 at 4:33pm — 6 Comments

क्षणिकाएँ

शौख से आशियाँ उजाड़ ,ये इख्तियार है तुझे ,

खानाबदोश हूँ ,ठहरना मेरी फितरत भी नहीं है

 

मेरे जख्मों पर नमक छिड़क गया ,वो आज ,

उसके ही दिए तोहफों कि याद दिला गया वो आज

उसकी नफरतों के जाम को भी

शांती कि कीमत समझ पिया…

Continue

Posted on March 21, 2014 at 7:22pm — 6 Comments

क्षणिका

कुछ तो मजबूरी की हद रही होगी ,

या निर्लज्जता की इंतेहा रही होगी ,

वो सम्भावित प्रधान मंत्री के पिता थे,

उनकी पत्नी ने प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति

बनाये और अपनी उंगलियों पर नचाये होंगे ,  

कुछ तो हुआ  होगा की 11 साल तक

कई असहाय राष्ट्रपतियों के ज़मीर को…

Continue

Posted on February 21, 2014 at 8:17am — 4 Comments

क्षणिकाएँ

करवट  बदल रहा है कोई

-----------------------------------

शर्मसार नहीं हैं हम, हार कर भी ,

हाँ ,सदमे में जरूर  हैं , कि-

नींद में करवट, बदल रहा है कोई

 

जातिवाद का ज़हर

-----------------------

तुम नीलकंठ कहलाते हो ,

ज़हर कोई, कभी पिया…

Continue

Posted on December 11, 2013 at 2:30pm — 8 Comments

क्षणिकाएँ

क्षणिकाएँ

आज़ादी का जश्न मना लेने भर से,

देश भक्तों की पहचान नही होती है ,

सिर उठाने की अगर कोशिश भी करे कोई तो ,

रूह कांप जाये ,ये वीर सपूतों की शान होती है.

उपजाऊ भूमी भी बंजर बन जाती है

बुद्दी जब…

Continue

Posted on November 28, 2013 at 9:30pm — 6 Comments

तुम आज़ाद हो

तुम पिंजरे में बंद मुर्दा ज़िन्दगी के सिवा कुछ भी तो नहीं ,

अपने आप को ,आज़ाद पंछी मान बैठे हो ,

तुम्हारी तनी  हुई मुट्ठियाँ ,बढ़ते कदम ,

बीवी बच्चों को देख, अपाहिज हो जाते हैं ,

तुम्हारे मस्तक की मांसपेशियां ,

पेट की तरफ देख ,अनाथ हो जाती है ,

तुम्हारी जुबान ,साहब को देख ,…

Continue

Posted on August 4, 2013 at 6:00pm — 4 Comments

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At 7:47am on March 31, 2014, बृजेश नीरज said…

आदरणीय दिलीप जी, हम सब साथ-साथ साहित्य की विविध विधाओं की जानकारी प्राप्त करेंगे.

सादर!

At 7:58pm on January 8, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाईजी, अपनी रचनाओं पर आयी सभी प्रतिक्रियाओं का धन्यवाद ज्ञापन वहीं अपनी रचनाओं पर ही किया करें.

सादर

At 6:41pm on May 10, 2013, बृजेश नीरज said…

आदरणीय यह कमी तो मुझमें भी थी और अब भी बहुत सी कमियां हैं। हम एक दूसरे से ही सीखकर आगे जा सकते हैं। आपने इतना मान दिया इसके लिए आभार।
सादर!

At 7:07pm on March 31, 2013,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

आपका हार्दिक धन्यवाद.

नववर्ष की अनेकानेक बधाइयाँ, भाई. हम सब समवेत सीखते हैं.. .

 
 
 

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