For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है

कितने दुःख दर्द से भरा दिल है

ये मेरा क्यूँ हुआ है ज़ज़्बाती

पास उनके जो सुनहरा दिल है

ताज इक सब के मन के अंदर भी

और ये शह्र आगरा दिल है

दिल लगी दिल्लगी नहीं होती

इक ग़ज़ब का मुहावरा दिल है

देखकर उनकी मदभरी आँखें

खो गया मेरा मदभरा दिल है

याद मुद्दत से वो नहीं है 'जय'

आज फिर क्यूँ भरा भरा दिल है

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 216

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Jaihind Raipuri on April 7, 2026 at 12:39pm

आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की वजह से

दूसरे आपके उपनाम को मैं कई बार शाहिद की जगह त्रुटिवश शहीद लिख दिया था! अतः आप मुझे क्षमा कीजियेगा

आपने वक़्त निकाल कर ग़ज़ल पर अपनी टिप्पणी दी बहुत शुक्र गुज़ार हूँ आपका आपकी बधाई एवं हौसला अफ़ज़ाई के लिए

ह्रदय तल से धन्यवाद //सुनहरा // के वज़्न के मुआमले में मैंने देखा है आप सहीह है वज़्न 122 ही है किन्तु मुझे लगा सुनहरा यदि

संस्कृत मूल का शब्द है तो क्या वज़्न वही रहेगा कृपया मार्गदर्शन कीजियेगा! // शह्र ए आगरा //बेहतरीन इस्लाह हुई बहुत बहुत धन्यवाद आपका 

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on April 3, 2026 at 8:45pm

आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार।

बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें।

/ये मेरा क्यूँ हुआ है ज़ज़्बाती

पास उनके जो सुनहरा दिल है/

जनाब सुनहरा का वज़्न 122 है, आप चैक कीजियेगा।

/ताज इक सब के मन के अंदर भी

और ये शह्र आगरा दिल है/

शह्र-ए-आगरा कहने से और बेहतर हो जाएगा।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
3 hours ago
Sushil posted blog posts
3 hours ago
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
3 hours ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service