दावतनामा हमको आया एक मुशायरे में शिरकत का
जिस में अपनी शायरी पढ़ना बाइस था बेहद इज़्ज़त का
किया इरादा हमने उसी दिन ग़ज़लें पुरानी नहीं पढ़ेंगे
जाएंगे उस महफ़िल में तो ताज़ा सुख़न ही पेश करेंगे
नई ग़ज़ल लिखने की ठानी भूल के सारे काम थे जितने
कलम दवात रजिस्टर लेकर बैठ गए हम मतला लिखने
बैठे रहे घंटों कुर्सी पर अपना पूरा ध्यान लगाया
छत पे सैर भी की हमने और लफ़्ज़ों को भी ख़ूब घुमाया
वफ़ा मुहब्बत हिज्र इबादत मौज़ूआत कई ज़ेहन में आये
रहे मुन्तज़िर कब…
ContinuePosted on January 25, 2026 at 12:11pm
हुस्न-ए-ग़ज़ल
2 1 2 2 / 1 2 1 2 / 2 2
है ग़ज़लगोई यार की बातें
शे'र सुनना ख़ुमार की बातें
शे'र पढ़ना हसीं तरन्नुम में
जैसे हों लालाज़ार की बातें…
ContinuePosted on October 19, 2022 at 12:11am — 11 Comments
1212 / 1122 / 1212 / 22(112)
हूँ किसके ग़म का सताया न पूछिये साहिब
जफ़ा-ए-इश्क़ का क़िस्सा न पूछिये साहिब [1]
तमाम उम्र उसे दूर से ही देख के बस
सुकून कितना है पाया न पूछिये साहिब [2]
लहू भी थम सा गया दर्द को भी राहत…
ContinuePosted on October 16, 2022 at 1:06pm — 13 Comments
2122 / 1212 / 22
हर तरफ़ रौशनी के डेरे हैं
मेरी क़िस्मत में क्यूँ अँधेरे हैं [1]
एक अर्सा हुआ उन्हें खोये
अब भी कहता है दिल वो मेरे हैं [2]
और कुछ देर हौसला रखिये
शब के…
ContinuePosted on October 7, 2022 at 11:30am — 12 Comments
आपकी ज़र्रानवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया मोहतरम जनाब रवि भसीन 'शाहिद' साहिब.
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