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रवि भसीन 'शाहिद'
  • Male
  • Ferozepur, Punjab
  • India
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रवि भसीन 'शाहिद''s Friends

  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
 

रवि भसीन 'शाहिद''s Page

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रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ये कैसी बहार है (ग़ज़ल)
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, आदाब। आपका ग़ज़ल तक आने के लिए और मेरा हौसला बढ़ाने के लिए तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ये कैसी बहार है (ग़ज़ल)
"आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । बहुत खूब गजल कही, हार्दिक बधाई। जाने किधर को ले गई दीवानगी हमेंबैठे हैं कब से ख़ुद का हमें इन्तेज़ार है ....."
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post वैलेनटाइन डे
"आ. भाई रवि भसीन जी,सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकारस्वीकारेंं ।"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on amita tiwari's blog post जायदाद के हकदार
"आदरणीय अमिता जी, इस भावपूर्ण सुन्दर रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"प्रिय मनोज भाई, आदाब। इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल की रचना पर आपको हार्दिक बधाई।     मेरे ज़ख़्मों पे बड़ी तेरी इनायत होगी    संग हाथों में कोई तू भी उठा ले अब तो आपका ये शेअर ख़ास तौर पे बहुत अच्छा लगा।"
Sunday
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

ये कैसी बहार है (ग़ज़ल)

मज़ारे मुसम्मन अख़रब मक्फूफ़ महज़ूफ़मफ़ऊलु फ़ाइलातु मुफ़ाईलु फ़ाइलुन2 2 1 / 2 1 2 1 / 1 2 2 1 / 2 1 2फूलों के सीने चाक हैं बुलबुल फ़रार हैसब दाग़ जल उठे हैं ये कैसी बहार हैकैसी बहार शहर में क्या मौसम-ए-ख़िज़ाँकारें इमारतें हैं दिलों में ग़ुबार हैकुछ बस नहीं बशर का क़ज़ा पर हयात परलेकिन ग़ुरूर ये है कि ख़ुद-इख़्तियार हैहाकिम है ख़ूब ख़्वाब-फ़रोशों पे मेहरबांभाता नहीं उसे जो हक़ीक़त-निगार हैक्या ख़ूब है निज़ाम जहान-ए-ख़राब काजिस पर फ़िदा हैं हम वो किसी पर निसार हैपाए निजात ग़म से जहां में बशर कहाँजो ग़म नहीं सनम का…See More
Sunday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत कविता : मैं भी लिखूंगा एक कविता (गणेश बाग़ी)
"आदरणीय गणेश बाग़ी जी, आपने बहुत सुंदर कविता रची है, आपको बहुत बधाई और शुभकानाएं।"
Sunday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post वैलेनटाइन डे
"आदरणीय समर कबीर साहब, हौसला बढ़ाने के लिए आपका बहुत शुक्रिया।"
Sunday
Samar kabeer commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post वैलेनटाइन डे
"जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

वैलेनटाइन डे

कितना क़ायदा, कितना सलीकाले आये हैं हम दुनिया मेंदिन हैं मुक़र्रर सब कामों केमाँ और बाप कोउस्तादों को, और वतन कोयादों में लाने के लिए औरकितनी इज़्ज़त कितनी अक़ीदतउनके लिए है दिल में हमारेसबको बतलाने के लिएऔर इक दिन है इश्क़ के नाम भीवैलेनटाइन डे कहते हैं जिसकोजब भी आता है ये दिन तोएक अजब एहसास सा दिल में भर जाता हैसोचता हूँ कि एक ही दिन क्यों रक्खा गया हैइश्क़, मुहब्बत, प्यार के नामप्यार भी क्या अब काम है कोईजिसको साल में एक बार बसरस्मन करना है हम सब को?अस्ल में प्यार तो वो जज़्बा हैजिसके बिना सब कुछ…See More
Friday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रखकर जो नाम राम का -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, आदाब। बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही है आपने, हार्दिक बधाई क़ुबूल करें।"
Friday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज भाई, आपको इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई। ख़ास तौर से मुझे आपका ये शेर बहुत अच्छा लगा:पापा की आंखों ने उसको जाने क्या क्या समझायाबेटी जब कालेज की खातिर घर से पहली बार गईएक सुझाव देना चाहूँगा कि "कालेज की ख़ातिर" की जगह…"
Friday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Samar kabeer's blog post एक ताज़ा ग़ज़ल
"आदरणीय समर साहब, आपको प्रणाम और हार्दिक बधाई! बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने।"
Friday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Zohaib Ambar's blog post ग़ज़ल
"जनाब ज़ोहेब अम्बर साहब, आदाब। इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर आपको शेर दर शेर हार्दिक बधाई।"
Jan 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' and रवि भसीन 'शाहिद' are now friends
Jan 27
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय दिनेश भाई, इस सुंदर ग़ज़ल पर आपको हार्दिक बधाई। सभी अश'आर बहुत अच्छे हुए हैं।"
Jan 25

Profile Information

Gender
Male
City State
Punjab
Native Place
Ferozepur
Profession
Teacher
About me
Passionate about Urdu poetry and music

रवि भसीन 'शाहिद''s Blog

ये कैसी बहार है (ग़ज़ल)

मज़ारे मुसम्मन अख़रब मक्फूफ़ महज़ूफ़

मफ़ऊलु फ़ाइलातु मुफ़ाईलु फ़ाइलुन

2 2 1 / 2 1 2 1 / 1 2 2 1 / 2 1 2

फूलों के सीने चाक हैं बुलबुल फ़रार है

सब दाग़ जल उठे हैं ये कैसी बहार है

कैसी बहार शहर में क्या मौसम-ए-ख़िज़ाँ

कारें इमारतें हैं दिलों में ग़ुबार है

कुछ बस नहीं बशर का क़ज़ा पर हयात पर

लेकिन ग़ुरूर ये है कि ख़ुद-इख़्तियार है

हाकिम है ख़ूब ख़्वाब-फ़रोशों पे मेहरबां

भाता नहीं उसे जो हक़ीक़त-निगार है

क्या ख़ूब है…

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Posted on February 16, 2020 at 7:41pm — 2 Comments

वैलेनटाइन डे

कितना क़ायदा, कितना सलीका

ले आये हैं हम दुनिया में

दिन हैं मुक़र्रर सब कामों के

माँ और बाप को

उस्तादों को, और वतन को

यादों में लाने के लिए और

कितनी इज़्ज़त कितनी अक़ीदत

उनके लिए है दिल में हमारे

सबको बतलाने के लिए

और इक दिन है इश्क़ के नाम भी

वैलेनटाइन डे कहते हैं जिसको

जब भी आता है ये दिन तो

एक अजब एहसास सा दिल में भर जाता है

सोचता हूँ कि एक ही दिन क्यों रक्खा गया है

इश्क़, मुहब्बत, प्यार के नाम

प्यार भी…

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Posted on February 14, 2020 at 5:20pm — 3 Comments

आया है जनवरी (ग़ज़ल)

(221 2121 1221 212)

(बहर मज़ारे मुसम्मन अख़रब मक्फूफ़ महज़ूफ़)

अब के अजीब रंग में आया है जनवरी

ग़म सब पुराने साथ में लाया है जनवरी

बे-नूर सुब्ह-ओ-शाम हैं वीरां हैं रास्ते

तू भी किसी के ग़म का सताया है जनवरी

ना दिन में आफ़्ताब न महताब रात में

मत पूछिये कि कैसे निभाया है जनवरी

क़हर-ओ-सितम है ठंड का जारी उसी तरह

कोहरा-ओ-धुंद और भी लाया है जनवरी

शादाब ना शजर हों तो क्या लुत्फ़-ए-ज़िन्दगी

तुझको सितम…

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Posted on January 7, 2020 at 11:41am — 6 Comments

बड़ा दिन हो मुबारक

ईसा का जन्मदिन है जहां भर को मुबारक

मग़रिब के बिरादर ये बड़ा दिन हो मुबारक

क्रिसमस के है जश्नों में बहुत शाद ज़माना

सड़कें हैं ढकी बर्फ़ से और गर्म मकां हैं

इशरत का है आराम का सामान मुहइया

चीजों से लबालब लदे बाज़ार-ओ-दुकां हैं

हासिद तो नहीं हैं तेरी ख़ुश-क़ीस्मती से हम

सोचा है कभी दौलतें आईं ये कहाँ से

तुम लूट के जो ले गए सोने की थी चिड़िया

तहज़ीब-ओ-अदब तुमने मिटा डाले जहाँ से

क़ाबिज़ थे हुक़ूमत थी जहाँ पर भी तुम्हारी…

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Posted on December 30, 2019 at 12:30pm — 8 Comments

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