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रवि भसीन 'शाहिद'
  • Male
  • Ferozepur, Punjab
  • India
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रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

हादिसाते-शायरी (नज़्म) – रवि भसीन 'शाहिद'

दावतनामा हमको आया एक मुशायरे में शिरकत काजिस में अपनी शायरी पढ़ना बाइस था बेहद इज़्ज़त काकिया इरादा हमने उसी दिन ग़ज़लें पुरानी नहीं पढ़ेंगेजाएंगे उस महफ़िल में तो ताज़ा सुख़न ही पेश करेंगेनई ग़ज़ल लिखने की ठानी भूल के सारे काम थे जितनेकलम दवात रजिस्टर लेकर बैठ गए हम मतला लिखनेबैठे रहे घंटों कुर्सी पर अपना पूरा ध्यान लगायाछत पे सैर भी की हमने और लफ़्ज़ों को भी ख़ूब घुमायावफ़ा मुहब्बत हिज्र इबादत मौज़ूआत कई ज़ेहन में आयेरहे मुन्तज़िर कब जागे अंदर का शायर रंग में आयेलेकिन कभी कभी क़ुदरत भी अपना नूर नहीं बरसातीहैराँ…See More
7 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"उस्ताद-ए-मुहतरम, आदाब। आपको अपनी कुल्लियात के प्रकाशन पर ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएँ।"
Jan 2, 2023
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post हुस्न-ए-ग़ज़ल (नज़्म)
"आपका हार्दिक आभार आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब!"
Nov 5, 2022
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"नहीं नहीं जनाब-ए-'आली, ऐसी बात नहीं है। बस इसी तरह इस्लाह करने वालों से और अपने शोध और अध्ययन से एक एक लफ़्ज़ का वज़्न पता चलता जाता है। किसी लफ़्ज़ के वज़्न या इस्तेमाल में शक हो तो rekhta dictionary से चैक कीजिये। आपकी शायरी में जो उर्दू और हिंदी…"
Nov 2, 2022
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब, सादर अभिवादन। जनाब 'ख़्वाह-मख़ाह' को 21121 के वज़्न पर लेना पड़ेगा।"
Nov 2, 2022
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही है आपने, इस पर आपको दाद और मुबारकबाद पेश करता हूँ। जनाब छटे शे'र के सानी में 'बे-वजह' दरअसल 'बे-वज्ह' है, 221 के वज़्न पर होना चाहिये। इस मिस्रे को यूँ कर सकते हैं:…"
Nov 1, 2022
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post हुस्न-ए-ग़ज़ल (नज़्म)
"वाह वाह आदरणीय रवि जी...क्या ही शानदार माला पिरोई है..."
Nov 1, 2022
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post हूँ किसके ग़म का सताया न पूछिये साहिब (ग़ज़ल)
"बहुत ही खूब ग़ज़ल कही है आदरणीय रवि जी..."
Nov 1, 2022
vijay nikore commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post हूँ किसके ग़म का सताया न पूछिये साहिब (ग़ज़ल)
"कमाल की गज़ल लिखी है, रवि भसीन शाहिद जी। हार्दिक बधाई।"
Nov 1, 2022
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Zaif's blog post ग़ज़ल - यूँ मुहब्बत हो गई है
"आदरणीय जैफ़ साहिब, आदाब। छोटी बह्र में आपने बहुत उम्द: ग़ज़ल कही है, इस पर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल कीजिये!"
Oct 31, 2022
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post हूँ किसके ग़म का सताया न पूछिये साहिब (ग़ज़ल)
"आदरणीय जैफ़ साहिब, सुख़न-नवाज़ी और हौसला-अफ़ज़ाई के लिए आपका बहुत शुक्रिय:!"
Oct 31, 2022
Zaif commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post हूँ किसके ग़म का सताया न पूछिये साहिब (ग़ज़ल)
"बेहतरीन ग़ज़ल हुई है, सर। अगरचे जब मैं चला था तो हाथ ख़ाली थे सफ़र में क्या है गँवाया न पूछिये साहिब।"
Oct 30, 2022
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय सुरेंद्र इन्साँ साहिब, तरही मिस्रे पर ग़ज़ल का बढ़िया प्रयास हुआ है, आपको बधाई और शुभकामनाएँ पेश करता हूँ।"
Oct 29, 2022
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, आदाब। हालाँकि किसी मुस्तनद शाइर का शे'र तो नहीं ढूँढ पाया हूँ, लेकिन नस्र में ये इज़ाफ़त देखी है, जैसे कि:"भारत के मैच जीतने की ख़बर आते ही 'अवाम में ख़ुशी-ओ-मसर्रत की लहर दौड़ गई।"इसलिए मेरा…"
Oct 29, 2022
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय नादिर ख़ान भाई, आपकी मुहब्बत, सुख़न-नवाज़ी और हौसला-अफ़ज़ाई के लिए तह-ए-दिल से आपका शुक्रिय: अदा करता हूँ।"
Oct 29, 2022
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय संजय शुक्ला जी, बढ़िया ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Oct 29, 2022

Profile Information

Gender
Male
City State
Punjab
Native Place
Ferozepur
Profession
Teacher
About me
Passionate about Urdu poetry and music, an English and IELTS trainer by profession, author of a book of short stories 'And That's the Whole Story'

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हादिसाते-शायरी (नज़्म) – रवि भसीन 'शाहिद'

दावतनामा हमको आया एक मुशायरे में शिरकत का

जिस में अपनी शायरी पढ़ना बाइस था बेहद इज़्ज़त का

किया इरादा हमने उसी दिन ग़ज़लें पुरानी नहीं पढ़ेंगे

जाएंगे उस महफ़िल में तो ताज़ा सुख़न ही पेश करेंगे

नई ग़ज़ल लिखने की ठानी भूल के सारे काम थे जितने

कलम दवात रजिस्टर लेकर बैठ गए हम मतला लिखने

बैठे रहे घंटों कुर्सी पर अपना पूरा ध्यान लगाया

छत पे सैर भी की हमने और लफ़्ज़ों को भी ख़ूब घुमाया

वफ़ा मुहब्बत हिज्र इबादत मौज़ूआत कई ज़ेहन में आये

रहे मुन्तज़िर कब…

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Posted on January 25, 2026 at 12:11pm

हुस्न-ए-ग़ज़ल (नज़्म)

हुस्न-ए-ग़ज़ल

2 1 2 2  /  1 2 1 2  /  2 2

है ग़ज़लगोई यार की बातें

शे'र सुनना ख़ुमार की बातें

शे'र पढ़ना हसीं तरन्नुम में

जैसे हों लालाज़ार की बातें…

Continue

Posted on October 19, 2022 at 12:11am — 11 Comments

हूँ किसके ग़म का सताया न पूछिये साहिब (ग़ज़ल)

1212 / 1122 / 1212 / 22(112)

हूँ किसके ग़म का सताया न पूछिये साहिब

जफ़ा-ए-इश्क़ का क़िस्सा न पूछिये साहिब [1]

तमाम उम्र उसे दूर से ही देख के बस

सुकून कितना है पाया न पूछिये साहिब [2]

लहू भी थम सा गया दर्द को भी राहत…

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Posted on October 16, 2022 at 1:06pm — 13 Comments

हर तरफ़ रौशनी के डेरे हैं (ग़ज़ल)

2122  /  1212  /  22

हर तरफ़ रौशनी के डेरे हैं

मेरी क़िस्मत में क्यूँ अँधेरे हैं [1]

एक अर्सा हुआ उन्हें खोये

अब भी कहता है दिल वो मेरे हैं [2]

और कुछ देर हौसला रखिये

शब के…

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Posted on October 7, 2022 at 11:30am — 12 Comments

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At 5:13pm on March 1, 2020,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

आपकी ज़र्रानवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया मोहतरम जनाब रवि भसीन 'शाहिद' साहिब. 

 
 
 

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