For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रवि भसीन 'शाहिद'
  • Male
  • Ferozepur, Punjab
  • India
Online Now
Share

रवि भसीन 'शाहिद''s Friends

  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
 

रवि भसीन 'शाहिद''s Page

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी, इस रचना पर आपको बधाई और महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं। सादर"
1 minute ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी, आपको ये सुंदर ग़ज़ल कहने पर बधाई और महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं। आपने मतला बहुत अच्छा कहा है। सादर..."
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान साहब, आदाब। आपको इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल की रचना पर मुबारक़बाद और महाशिवरात्री की शुभकामनाएं।"
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, आपको महाशिवरात्रि की ढेरों शुभकामनाएं। आपकी ग़ज़ल – जो कि आज के दिन के लिए बिलकुल उपयुक्त है – पढ़ कर आनंद आ गया। आपको इस सुंदर रचना पर हार्दिक बधाई। दूसरे शेर में 'तनका' को 'तन का' और 'सफर'…"
3 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"उसको शम्अ' ख़ुद को परवाना समझ बैठे थे हमकुछ मुलाक़ातों में ही क्या क्या समझ बैठे थे हम उस निगाह-ए-नाज़ को अपना समझ बैठे थे हमआलम-ए-दीवानगी में क्या समझ बैठे थे हम ज़िन्दगी ये दर-हक़ीक़त लम्हा लम्हा मौत हैसाँस रुकने भर को मर जाना समझ बैठे थे हम ये…"
13 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, ग़ज़ल पढ़ने के लिए और हौसला बढ़ाने के लिए बहुत शुक्रिया। इस मंच पर मैं आपकी सक्रियता, सकारात्मक प्रतिक्रिया, और सभी को प्रोत्साहित करने के लिए हृदयतल से सराहना करता हूँ। सलामत रहें, और ख़ूब अच्छा लिखते रहें।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post झूठी बातें कह कर दिनभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, आदाब। बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है, शेर दर शेर दाद और मुबारक़बाद क़ुबूल करें।"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)

रमल मुसम्मन महज़ूफ़फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन2 1 2 2 / 2 1 2 2 / 2 1 2 2 / 2 1 2सारी दुनिया से ख़फ़ा तू ही नहीं मैं भी तो हूँहादसों का सिलसिला तू ही नहीं मैं भी तो हूँदौड़ता जाता है ख़ामोशी से बिन पूछे सुनेवक़्त से दहशत-ज़दा तू ही नहीं मैं भी तो हूँज़िन्दगी है लम्हा लम्हा जंग अपने-आप सेअपने अंदर कर्बला तू ही नहीं मैं भी तो हूँदिल के अंदर गूंजती हैं चीख़ती ख़ामोशियाँएक साज़-ए-बे-सदा तू ही नहीं मैं भी तो हूँक्या हुआ तकमील तेरी और न मेरी हो सकीख़ल्क़ का अहद-ए-वफ़ा तू ही नहीं मैं भी तो हूँक्या ख़बर आये कहाँ…See More
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ये कैसी बहार है (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर कबीर साहब, सादर प्रणाम। हौसला-अफ़ज़ाई के लिए बेहद शुक्रगुज़ार हूँ। आपकी उपस्थिति और आशीर्वाद के बाद ही ग़ज़ल मुकम्मल होती है।"
yesterday
Samar kabeer commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ये कैसी बहार है (ग़ज़ल)
"जनाब रवि भसीन 'शाहिद' साहिब आदाब,बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ये कैसी बहार है (ग़ज़ल)
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, आदाब। आपका ग़ज़ल तक आने के लिए और मेरा हौसला बढ़ाने के लिए तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ये कैसी बहार है (ग़ज़ल)
"आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । बहुत खूब गजल कही, हार्दिक बधाई। जाने किधर को ले गई दीवानगी हमेंबैठे हैं कब से ख़ुद का हमें इन्तेज़ार है ....."
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post वैलेनटाइन डे
"आ. भाई रवि भसीन जी,सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकारस्वीकारेंं ।"
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on amita tiwari's blog post जायदाद के हकदार
"आदरणीय अमिता जी, इस भावपूर्ण सुन्दर रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।"
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"प्रिय मनोज भाई, आदाब। इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल की रचना पर आपको हार्दिक बधाई।     मेरे ज़ख़्मों पे बड़ी तेरी इनायत होगी    संग हाथों में कोई तू भी उठा ले अब तो आपका ये शेअर ख़ास तौर पे बहुत अच्छा लगा।"
Sunday

Profile Information

Gender
Male
City State
Punjab
Native Place
Ferozepur
Profession
Teacher
About me
Passionate about Urdu poetry and music

रवि भसीन 'शाहिद''s Blog

तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)

रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

2 1 2 2 / 2 1 2 2 / 2 1 2 2 / 2 1 2

सारी दुनिया से ख़फ़ा तू ही नहीं मैं भी तो हूँ

हादसों का सिलसिला तू ही नहीं मैं भी तो हूँ

दौड़ता जाता है ख़ामोशी से बिन पूछे सुने

वक़्त से दहशत-ज़दा तू ही नहीं मैं भी तो हूँ

ज़िन्दगी है लम्हा लम्हा जंग अपने-आप से

अपने अंदर कर्बला तू ही नहीं मैं भी तो हूँ

दिल के अंदर गूंजती हैं चीख़ती ख़ामोशियाँ

एक साज़-ए-बे-सदा तू ही नहीं मैं भी…

Continue

Posted on February 20, 2020 at 12:44am — 2 Comments

ये कैसी बहार है (ग़ज़ल)

मज़ारे मुसम्मन अख़रब मक्फूफ़ महज़ूफ़

मफ़ऊलु फ़ाइलातु मुफ़ाईलु फ़ाइलुन

2 2 1 / 2 1 2 1 / 1 2 2 1 / 2 1 2

फूलों के सीने चाक हैं बुलबुल फ़रार है

सब दाग़ जल उठे हैं ये कैसी बहार है

कैसी बहार शहर में क्या मौसम-ए-ख़िज़ाँ

कारें इमारतें हैं दिलों में ग़ुबार है

कुछ बस नहीं बशर का क़ज़ा पर हयात पर

लेकिन ग़ुरूर ये है कि ख़ुद-इख़्तियार है

हाकिम है ख़ूब ख़्वाब-फ़रोशों पे मेहरबां

भाता नहीं उसे जो हक़ीक़त-निगार है

क्या ख़ूब है…

Continue

Posted on February 16, 2020 at 7:41pm — 4 Comments

वैलेनटाइन डे

कितना क़ायदा, कितना सलीका

ले आये हैं हम दुनिया में

दिन हैं मुक़र्रर सब कामों के

माँ और बाप को

उस्तादों को, और वतन को

यादों में लाने के लिए और

कितनी इज़्ज़त कितनी अक़ीदत

उनके लिए है दिल में हमारे

सबको बतलाने के लिए

और इक दिन है इश्क़ के नाम भी

वैलेनटाइन डे कहते हैं जिसको

जब भी आता है ये दिन तो

एक अजब एहसास सा दिल में भर जाता है

सोचता हूँ कि एक ही दिन क्यों रक्खा गया है

इश्क़, मुहब्बत, प्यार के नाम

प्यार भी…

Continue

Posted on February 14, 2020 at 5:20pm — 3 Comments

आया है जनवरी (ग़ज़ल)

(221 2121 1221 212)

(बहर मज़ारे मुसम्मन अख़रब मक्फूफ़ महज़ूफ़)

अब के अजीब रंग में आया है जनवरी

ग़म सब पुराने साथ में लाया है जनवरी

बे-नूर सुब्ह-ओ-शाम हैं वीरां हैं रास्ते

तू भी किसी के ग़म का सताया है जनवरी

ना दिन में आफ़्ताब न महताब रात में

मत पूछिये कि कैसे निभाया है जनवरी

क़हर-ओ-सितम है ठंड का जारी उसी तरह

कोहरा-ओ-धुंद और भी लाया है जनवरी

शादाब ना शजर हों तो क्या लुत्फ़-ए-ज़िन्दगी

तुझको सितम…

Continue

Posted on January 7, 2020 at 11:41am — 6 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी, इस रचना पर आपको बधाई और महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं। सादर"
1 minute ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सादर अभिवादन । उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आ. भाई नवीन जी, सादर अभिवादन । सूबसूरत गिरह के साथ सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई साथ ही पावन…"
1 hour ago
vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post झूठी बातें कह कर दिनभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"बहुत ही उम्दा गज़ल कही है। बधाई, मित्र लक्ष्मण जी।"
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी, आपको ये सुंदर ग़ज़ल कहने पर बधाई और महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं। आपने…"
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान साहब, आदाब। आपको इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल की रचना पर मुबारक़बाद और महाशिवरात्री की…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गिरह और उम्दा गजल से मंच का शुभारम्भ करने के लिए ढेरों…"
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, आपको महाशिवरात्रि की ढेरों शुभकामनाएं। आपकी ग़ज़ल – जो कि आज के दिन के लिए…"
3 hours ago
MUKESH SRIVASTAVA posted a blog post

"मै" इक  समंदर में तब्दील हो जाता हूँ

एक --------रात होते ही "मै" इक  समंदर में तब्दील हो जाता हूँ और मेरे सीने केठीक ऊपर इक चाँद उग आता…See More
3 hours ago
vijay nikore posted a blog post

प्यार का प्रपात

प्यार का प्रपातप्यार में समर्पणसमर्पण में प्यारसमर्पण ही प्यारनाता शब्दों का शब्दों से मौन छायाओं…See More
3 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आशिकी के दौर को अपना समझ बैठे थे हममुस्कुराते फूल को प्यारा समझ बैठे थे हम। आस्तीनों में बहुत…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"शिव शरण में आ के जाना सब उन्हीं के अन्श हैं'इस ज़मीन ओ आसमाँ को क्या समझ बैठे थे…"
6 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service