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Dayaram Methani
  • Male
  • Bhilwara - rajsthan
  • India
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय समर कबीर साहब। सुंदर गज़ल। प्रत्येक शेर तारीफ के काबिल। इस पर सोने में सुहागा आपने प्रत्येक पंक्ति को ओपन बुक्स आन लाइन से जाेड़ कर कमाल कर दिया है। इस सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई। ये शेर तो बहुत अचछा लगा . नष्ट ऐसे ही सबको होना…"
3 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण जी,  आपने जबरदस्त कटाक्ष किया है। सभी युग्म हमें आपनी बद्सूरती का अहसास कराते है। मुक्त छंद में नया प्रयोग भी बहुत अद्भुत है। रचना तारीफ के काबिल है। बधाई स्वीकार करें।  --- दयाराम मेठानी"
Oct 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"गिनते-गिनते हुई है उम्र फ़नाकितनी छोटी ये ज़िन्दगानी है............अति सुंदर।"
Jun 28
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"मिलना तय है मुझे हमेशा हीमेरे हिस्से जो दाना-पानी है।............अति सुंदर। "
Jun 28
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"धन्यवाद आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी।"
Jan 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी।"
Jan 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी।"
Jan 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"धन्यवाद आदरणीय समर कबीर जी। आपका सुझाव अच्छा है। भविष्य में असका ध्यान रखूंगा।  सादर"
Jan 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"आभार आदरणीय कल्पना भट्ट जी।"
Jan 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी। आपकों भी नव वर्ष की बहुत बहुत शंभकामनायें।"
Jan 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।"
Jan 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"प्रोत्साहन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी।"
Jan 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय छोटेलाल सिंह जी।"
Jan 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
Jan 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"प्रशंसा हेतु धन्यवाद आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
Jan 13
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय छोटेलाल सिंह जी।"
Jan 13

Profile Information

Gender
Male
City State
BHILWARA
Native Place
BHILWARA
Profession
journlist and writer
About me
I like to read and write kavita, gazal, short stories and artical.

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ग़ज़ल

ग़ज़ल

2122  2122  2122  212

याद करे दुनिया तुझे ऐसी निशानी छोड़ जा,

जोश भर दे जो सभी में वो जवानी छोड़ जा।

नाम पर तेरे कभी कोई उदासी हो नहीं,

प्यार से भरपूर कुछ यादें सुहानी छोड़ जा।

देश की खातिर लुटाओ जान अपनी शान से,

हर किसी की आँख में दो बूँद पानी छोड़ जा।

हो भरोसा हर किसी को तेरी बातों पर सदा,

देश हित की प्रेरणा दे वो बयानी छोड़ जा।

मौत आतीे है सभी को देख ‘‘मेठानी’’ यहां,

गर्व हो अपनाें को कुछ ऐसी…

Continue

Posted on January 16, 2015 at 9:55am — 16 Comments

चार मुक्तक

चार मुक्तक

1.

झुकाना पड़े सिर मां को ऐसा कारोबार मत कीजिये,

अपने लहू से जिसने पाला उसे लाचार मत कीजिये,

कर सको तो करो ऐसा काम जगत में कि गर्व हो तुम पर,

कोख मां की हो जाये लज्जित ऐसा व्यवहार मत कीजिये,

2.

बरस बीत जाते है किसी के दिल में जगह पाने में,

एक गलत फहमी देर नहीं लगाती साथ छुड़ाने में,

बहुत नाजुक होती है मानवीय रिश्तों की डोर यहां,

नफरत में देर नहीं लगाते लोग पत्थर उठाने में।

3.

हर बात की अपनी करामात होती है,

कभी ये हंसाती तो…

Continue

Posted on December 2, 2013 at 11:09pm — 8 Comments

मुक्तक

1.

जो चाहते हो सब मिलेगा, कोशिश करके तो देख,

अंधेरा मिट जायेगा, एक दीप जला करके तो देख,

आंसू बहाने से कभी मंजिल नहीं है मिला करती,

तू मझधार में अपनी नाव कभी उतार करके तो देख।



2..

करके अहसान किसी पर जताया मत कीजिये,

अपने काम को दुनिया में गिनाया मत कीजिये,

मेरे बिना चलेगा नहीं यहां किसी का काम,

ऐसे विचार दिल में कभी लाया मत कीजिये।

3.

आओ अब अंधविश्वासों को भुला कर देखते है,

इस धरा पर प्रेम की गंगा बहा कर देखते…

Continue

Posted on October 17, 2013 at 12:00am — 13 Comments

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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
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