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Dayaram Methani
  • Male
  • Bhilwara - rajsthan
  • India
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"धन्यवाद आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"धन्यवाद आदरणीय समर कबीर जी। आपका सुझाव अच्छा है। भविष्य में असका ध्यान रखूंगा।  सादर"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"आभार आदरणीय कल्पना भट्ट जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी। आपकों भी नव वर्ष की बहुत बहुत शंभकामनायें।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"प्रोत्साहन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय छोटेलाल सिंह जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"प्रशंसा हेतु धन्यवाद आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय छोटेलाल सिंह जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"तीन मुक्तक(1)मौसम कैसा भी आये जीवन चलता रहता है, भूखा बचपन गन्दी गलियों में पलता रहता है, थोथे नारों का ही घना जंगल है अपना वतन, नेताओं का सुख जनता का दुख बढ़ता रहता है। (2)सुख और दुख का ही संगम है ये जिन्दगी, हौसले बिन लगती दुर्गम है ये ज़िन्दगी,…"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"एक भाई, भाई को ही मार देमज़हबों का क्या यही पैग़ाम है-------------अति सुंदर।"
Dec 22, 2017
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-86
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, बहुत सुंदर रचना एवं करारा कटाक्ष।"
Dec 9, 2017
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-86
"आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, प्रशंसा द्वारा प्रोत्साहन के लिये बहुत बहुत आभार। ।"
Dec 9, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
BHILWARA
Native Place
BHILWARA
Profession
journlist and writer
About me
I like to read and write kavita, gazal, short stories and artical.

Dayaram Methani's Blog

ग़ज़ल

ग़ज़ल

2122  2122  2122  212

याद करे दुनिया तुझे ऐसी निशानी छोड़ जा,

जोश भर दे जो सभी में वो जवानी छोड़ जा।

नाम पर तेरे कभी कोई उदासी हो नहीं,

प्यार से भरपूर कुछ यादें सुहानी छोड़ जा।

देश की खातिर लुटाओ जान अपनी शान से,

हर किसी की आँख में दो बूँद पानी छोड़ जा।

हो भरोसा हर किसी को तेरी बातों पर सदा,

देश हित की प्रेरणा दे वो बयानी छोड़ जा।

मौत आतीे है सभी को देख ‘‘मेठानी’’ यहां,

गर्व हो अपनाें को कुछ ऐसी…

Continue

Posted on January 16, 2015 at 9:55am — 16 Comments

चार मुक्तक

चार मुक्तक

1.

झुकाना पड़े सिर मां को ऐसा कारोबार मत कीजिये,

अपने लहू से जिसने पाला उसे लाचार मत कीजिये,

कर सको तो करो ऐसा काम जगत में कि गर्व हो तुम पर,

कोख मां की हो जाये लज्जित ऐसा व्यवहार मत कीजिये,

2.

बरस बीत जाते है किसी के दिल में जगह पाने में,

एक गलत फहमी देर नहीं लगाती साथ छुड़ाने में,

बहुत नाजुक होती है मानवीय रिश्तों की डोर यहां,

नफरत में देर नहीं लगाते लोग पत्थर उठाने में।

3.

हर बात की अपनी करामात होती है,

कभी ये हंसाती तो…

Continue

Posted on December 2, 2013 at 11:09pm — 8 Comments

मुक्तक

1.

जो चाहते हो सब मिलेगा, कोशिश करके तो देख,

अंधेरा मिट जायेगा, एक दीप जला करके तो देख,

आंसू बहाने से कभी मंजिल नहीं है मिला करती,

तू मझधार में अपनी नाव कभी उतार करके तो देख।



2..

करके अहसान किसी पर जताया मत कीजिये,

अपने काम को दुनिया में गिनाया मत कीजिये,

मेरे बिना चलेगा नहीं यहां किसी का काम,

ऐसे विचार दिल में कभी लाया मत कीजिये।

3.

आओ अब अंधविश्वासों को भुला कर देखते है,

इस धरा पर प्रेम की गंगा बहा कर देखते…

Continue

Posted on October 17, 2013 at 12:00am — 13 Comments

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