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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मोहतरमा मंजीत कौर जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कुछ और समय चाहती है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,देखियेगा । दूसरे शैर का भाव स्पष्ट  नहीं है,ये शैर यूँ होना था:- 'सांझ को रोज़ ही ढकता है…"
3 minutes ago
Samar kabeer commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"जनाब गणेश जी "बाग़ी" साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल है, बधाई स्वीकार करें । 'बात चलेगी, तब बोलेंगे,अपनी ही थी ग़लती बाबू' इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें 'तब बोलेंगे',मिसरा यूँ कर लें तो ऐब निकल जायेगा:- 'बात चली तो,हम…"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मोहतरमा अंजली गुप्ता 'सिफ़र' जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब मुनीश तन्हा जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 4थे शैर में रदीफ़ बदल गई है?"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कुछ अशआर और वक़्त चाहते हैं,जैसे ,छटे शैर का मफ़हूम साफ़ नहीं, दोनों मिसरों में रब्त नहीं । 'सामने आब से लबरेज़ समन्दर था मगर' इस मिसरे में "आब" और "लबरेज़" अल्फ़ाज़…"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब दण्डपाणि जी आदाब,मुशायरे में सहभागिता के लिए धन्यवाद ।"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मैं आपकी ज़हनी कश्मकश से वाक़िफ़ हूँ,मतले में ऊला को सानी और सानी को ऊला कर दें तो लुत्फ़ दौबाला हो जायेगा, मेरी नाचीज़ राय में 'हमारा'के साथ "इराद:" ग़लत नहीं है ।"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"'शीशा' 'इरादा',"पर्दा' ये सब अलिफ़ के क़वाफ़ी की तरह लिए जा सकते हैं, लेकिन मतले में दोनों मिसरे "ह"ख़फ़ी के नहीं चलेंगे ।"
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब दण्डपाणि जी आदाब,मुशायरे में सहभागिता के लिए धन्यवाद ।"
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब अजय गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,शेष जनाब निलेश जी कह चुके हैं,उनकी बातों का संज्ञान लें, मुशायरे में सहभागिता के लिए धन्यवाद ।"
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब,ग़ज़ल अच्छी हुई है,लेकिन कुछ और समय देते तो और अच्छी होती, शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'एक 'ग़ालिब' ही के आगे नहीं होता सब कुछ' इस मिसरे में 'एक' की जगह…"
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"काम आया न कहीं भी कोई हर्बा देखोआख़िरश टूट गया झूट का सपना देखो इस हक़ीक़त को फ़रामोश न करना देखोजीत होती है मियाँ सच की हमेशा देखो हो गया जैसे ही इक्कीस बरस का देखोबाप को आँख दिखाने लगा बेटा देखो याद करना मेरी चाहत का वो मंज़र जानाँजब किसी फूल से…"
20 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,कविता बहुत प्रभावशाली है,इस उपलब्धि पर आपको बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ ।"
May 16
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ये फ़र्क़ इसलिये है कि अरबी भाषा में "दुवाद" बोलते हैं और उर्दू में इसे "ज़ुवाद" बोलते हैं,(लिखने में एक जैसे ही लिखे जाते हैं)इसलिये अरबी में "रमदान" और उर्दू में "रमज़ान" बोला जाता है,आपको भी रमज़ानुल मुबारक की…"
May 16
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post नहीं जानती ...(350 वीं कृति )
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'रौनक अता जाओगे' इस पंक्ति को यूँ कर लें "रौनक़ अता करोगे""
May 16
Samar kabeer commented on rajesh kumari's blog post मेरी ज़मीन मेरा आसमाँ बदल डालो (ग़ज़ल 'राज')
"'उदास गुल हैं जहाँ तितलियाँ नहीं जतीं' 'जहाँ तलक न पहुंचती ज़िया न बाद-ए-सबा' 'जहाँ' शब्द कई अर्थ रखता है,जैसे 'जिस जगह''जिस घड़ी','जिस मक़ाम,एक 'जहाँ' का अर्थ होता है दुनिया,जिस्रे जहान…"
May 15

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Samar kabeer's Blog

'ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी'

(चौथे शैर में तक़ाबल-ए-रदीफ़ नज़र अंदाज़ करे)

नसीहत जो बुज़ुर्गों की न मानी याद आएगी

हमें ता उम्र उनकी सरगरानी याद आएगी

मियाँ मश्क़-ए-सुख़न कर लो नहीं ये खेल बच्चों का

ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी

ज़माने भर की आसाइश के जब सामाँ बहम होंगे

तुझे माँ-बाप की क्या जाँ फ़िशानी याद आएगी

जुड़ी होंगी मज़ालिम की बहुत सी दास्तानें भी

हवेली गाँव की जब ख़ानदानी याद…

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Posted on May 7, 2018 at 12:00pm — 34 Comments

'निलेश जी की ज़मीन में एक ग़ज़ल'

ज़िन्दगी में जो हुआ सूद-ओ-ज़ियाँ गिनता रहा

बैठ कर मैं आज सब नाक़ामियाँ गिनता रहा

बाग़बाँ को और कोई काम गुलशन में न था

फूल पर मंडराने वाली तितलियाँ गिनता रहा

और क्या करता बताओ इन्तिज़ार-ए-यार में

तैरती तालाब में मुर्ग़ाबियाँ गिनता रहा

रोकता कैसे मैं उनको नातवानी थी बहुत

बे अदब लोगों की बस गुस्ताख़ियाँ गिनता रहा

लोग भूके मर रहे थे और यारो उस…

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Posted on May 1, 2018 at 10:49am — 18 Comments

एक ताज़ा ग़ज़ल

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुन/फ़इलुन

इसलिये आने से कतराते हैं ईमाँ वाले

तेरे कूचे में उधम करते हैं शैताँ वाले

.

ये किसी ख़तरे की आमद का इशारा तो नहीं

ख़्वाब क्यों मुझको दिखाता है वो तूफ़ाँ वाले

.

और सब कुछ यहाँ तब्दील हुआ है लेकिन

घर में दस्तूर हैं अब तक वही अम्माँ वाले

.

बाग़बाँ ने वो सितम तोड़े हैं इनपर देखो

कितने सहमे हुए रहते हैं गुलिस्ताँ वाले

.

रह्म करना किसी बिस्मिल पे गवारा ही…

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Posted on April 6, 2018 at 3:00pm — 28 Comments

'ओबीओ की आठवीं सालगिरह का तुहफ़ा'

फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन



मेरी सारी वफ़ा ओबीओ के लिये

काम करता सदा ओबीओ के लिये




दिल यही चाहता है मेरा दोस्तो

जान करदूँ फ़िदा ओबीओ के लिये




आठ क्या,आठ सो साल क़ाइम रहे

है यही इक दुआ ओबीओ के लिये



मेरे दिल में कई साल से दोस्तो

जल रहा इक दिया ओबीओ के लिये…



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Posted on April 2, 2018 at 3:00pm — 40 Comments

Comment Wall (14 comments)

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At 8:05pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय
समर कबीर महोदय प्रणाम
आपका आदेश सर माथे पर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

 
 
 

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"मोहतरमा मंजीत कौर जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कुछ और समय चाहती है,इस प्रस्तुति पर बधाई…"
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Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आभार आ. समर सर..आप के सुझाव पर विचार करता हूँ सादर "
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" आ. समर सर जी,बहुत सुंदर ग़ज़ल पढ़ने को मिली,बहुत बधाई हो"
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Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आदरनिए नूर जी, बहुत उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई हो ।"
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"आदरणीया नीलम उपाध्याय जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
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"आदरणीया बबिता गुप्ता जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रशंसा का आभारी है।"
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"आदरणीय शेख उस्मानी साहिब, आदाब। ... सर सृजन के भावों को आत्मीय स्नेह देने का दिल से आभार।"
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