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Samar kabeer
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Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बहना राजेश कुमारी जी आदाब,आपकी महब्बतों के लिए तहे दिल से शुक्र गुज़ार हूँ ।"
Sep 10
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post अब बात कुछ और है- लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 10
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ईंटा पत्थर कंकड़ बजरी ले कर आऊँगा---ग़ज़ल
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । ईंटा पत्थर कंकड़ बजरी ले कर आऊँगा' इस मिसरे में 'ईंटा' को "ईंटें" कर लें ।"
Sep 10
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post चंद्रयान- 2 का सफर
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 10
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post ज़िंदगी तू क्यूँ उदास है-
"जनाब प्रदीप जी,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई ।"
Sep 10
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'तुमने अपने मातम पर भी खर्च किया मोटा पैसा  इस मिसरे में 'मोटा' की जगह "कितना" शब्द उचित होगा । 'उपहास,निरादर,अपमानों आज वही हकदार…"
Sep 10
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post गजल
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई,बधाई ।"
Sep 10
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post निस्सम्बन्ध
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,हमेशा की तरह सुंदर और उम्द: रचना,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 10
Samar kabeer commented on Usha's blog post मेरे सवाल ... अतुकांत कविता
"मुहतरमा ऊषा जी आदाब,अतुकांत कविता का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'बहुत रोका, बहुत संभाला' इस पंक्ति में 'संभाला' को "सँभाला" लिखें । 'मेरी हर ख़्वाईश, हर तमन्ना तेरी हो जाएगी' पिछली बार आपको बताया था…"
Sep 10
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रब है ज़रूर आपको दिखता भले न हो (६१)
"//जलव-ए-हूर से मात्रा गड़बड़ होती है ,क्या चेहरा-ए-हूर किया जा सकता है ?// "चहर-ए-हूर" में भी वही गड़बड़ है,कुछ और सोचें ।"
Sep 10
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,बहुत उम्द: ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'दुनिया भर में खोजा तुझको पता नहीं पाया तेरा' इस मिसरे को यूँ कर लें:- 'दुनिया भर में ढूँढा लेकिन फिर भी नज़र न आया तू'"
Sep 9
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रब है ज़रूर आपको दिखता भले न हो (६१)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'जोश-ओ-जुनून से किये हासिल कई मुक़ाम होता फ़ितूर आपको दिखता भले न हो' इस शैर का भाव स्पष्ट नहीं है,देखियेगा । 'जलवा-ए-हूर आपको दिखता भले…"
Sep 9
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post रोटियाँ
"जनाब प्रदीप जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है,बह्र भी गड़बड़ है,और क़वाफ़ी भी दुरुस्त नहीं हैं,देखियेगा ।"
Sep 9
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"मोहतरमा उषा जी आदाब, आपकी महब्बतों के लिए तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।"
Sep 9
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब, आपकी महब्बतों के लिए तहे दिल से शुक्र गुज़ार हूँ ।"
Sep 9
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आली जनाब डॉ. विजय शंकर जी आदाब, आपकी महब्बतों और दुआओं के लिए तहे दिल से शुक्र गुज़ार हूँ ।"
Sep 9

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Samar kabeer's Blog

'देखो हिंदौस्तान फूँकता है'

2122 1212 112/22

जिस्म में पहले जान फूँकता है

बाद-अज़-जाँ अज़ान फूँकता है

सब्र कर शब गुज़र ही जाएगी

क्यों ये अपना मकान फूँकता है

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

पास आकर वो गर्म साँसों से

मेरे दिल का जहान फूँकता है

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है

रोज़ आयात पढ़…

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Posted on August 6, 2019 at 3:00pm — 9 Comments

एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल

अरकान:-12112 12112

न छाँव कहीं,न कोई शजर

बहुत है कठिन,वफ़ा की डगर

अजीब रहा, नसीब मेरा

रुका न कभी,ग़मों का सफ़र

तलाश किया, जहाँ में बहुत

कहीं न मिला, वफ़ा का गुहर

तमाम हुआ, फ़सान: मेरा

अँधेरा छटा, हुई जो सहर

ग़मों के सभी, असीर यहाँ

किसी को नहीं, किसी की ख़बर

बहुत ये हमें, मलाल रहा

न सीख सके, ग़ज़ल का हुनर

हबीब अगर, क़रीब न हो

अज़ाब लगे, हयात…

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Posted on July 4, 2019 at 2:30pm — 34 Comments

ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा

है उजागर ये हक़ीक़त ओ बी ओ

मुझको है तुझसे महब्बत ओ बी ओ

तेरे आयोजन सभी हैं बेमिसाल

तू अदब की एक जन्नत ओ बी ओ

कहते हैं अक्सर ,ये भाई योगराज

तू है इक छोटा सा भारत ओ बी ओ

सीखने वाले यही कहते सदा…

Continue

Posted on April 1, 2019 at 11:00am — 35 Comments

एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में

मफ़ऊल मफ़ाईल मफ़ाईल फ़अल

221     1221   1221    12

पाना जो शिखर हो तो मेरे साथ चलो

ये अज़्म अगर हो तो मेरे साथ चलो

दीवार के उस पार भी जो देख सके

वो तेज़ नज़र हो तो मेरे साथ चलो

होती है ग़रीबों की वहाँ दाद रसी

तुम ख़ाक बसर हो तो मेरे साथ चलो

पत्थर पे खिलाना है वहाँ हमको कँवल

आता ये हुनर हो तो मेरे साथ चलो

हर शख़्स वहाँ कड़वा…

Continue

Posted on March 6, 2019 at 5:55pm — 21 Comments

Comment Wall (30 comments)

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At 9:23am on September 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय समर क़बीर साहब को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव आपको सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें।हमेशा स्वस्थ रहें और दीर्घायु बनें।उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान हों।

At 12:33am on August 7, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब जी मैं जरूर ग़ज़ल के शिल्प और व्याकरण पर मेहनत करूँगा यक़ीनन मैं जल्दबाज़ी करने लगा हूँ मुआफ़ी चाहता हूँ
At 8:06pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया सब आपकी कृपा है कृपा बनी रहे ! आपकी तबीयत ख़राब होने के बावजूद आप समय निकाल कर जो मदद करते है बहुत शुक्रिया!
At 12:24pm on June 27, 2019, Samar kabeer said…

अब एडिट नहीं होगा,संकलन से पहले,वहाँ लिख दें टंकण त्रुटि है ।

At 12:09pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय जनाब समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया आपका बस आपकी कृपा यूँ ही बनी रहे ! आपने ठीक कहा 'यारो ' का यारों हो गया है जो कि मेरी टाइपिंग भूल है
लेकिन मुझसे एडिट नहीं हो पा रहा
At 9:59pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
हौसला बढ़ाने के लिए बहुत शुक्रिया, सब आपकी कृपा है
कृपा दृस्टि बनाये रखें ! आपका आदेश सर माथे पर
At 10:06pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब
अपेक्षा है की गलतियों को भी इंगित करें
At 12:20pm on March 22, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
बहुत शुक्रिया सब आपका ही आशीर्वाद है
कृपा बनायें रखें
At 3:34pm on March 12, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर सर आपके मार्गदर्शन का हमेशा आकांक्षी रहूँगा!
At 11:42pm on February 23, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय
ये तो आपकी कृपा से ही संभव हुआ है
 
 
 

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