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Samar kabeer
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laxman dhami commented on Samar kabeer's blog post 'महब्बत कर किसी के संग हो जा'
"आ. भाई समर जी इस बोलती गजल के लिए बहुत बहुत बधाई ।"
7 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,इस ग़ज़ल पर जनाब सौरभ पाण्डेय साहिब की टिप्पणी आपके लिये बहुत कम की है,मैंने इसी लिये आपको ये ग़ज़ल पढ़ने की दावत दी है । ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।"
11 hours ago
surender insan commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब आदाब!वाह वाह बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल जी। ग़जब के अशआर हुए है जी। बेहद उम्दा लाजवाब जी। दिली मुबारक बाद कबूल करे जी।"
12 hours ago
Samar kabeer commented on surender insan's blog post ग़ज़ल
"जनाब सुरेश इंसान जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । आपकी पूरी ग़ज़ल बह्र में नहीं है,इस हेतु पटल पर आलेख मौजूद हैं उनका अध्यन करें । मेरे ब्लॉग पर इस बह्र में कुछ ग़ज़लें हैं,उनपर आई टिप्पणियां भी हैं जो आपको इस बह्र को सीखने में मददगार…"
14 hours ago
Samar kabeer commented on Dr.Prachi Singh's blog post भीगी सी रुत आई ....//डॉ० प्राची
"मोहतरमा डॉ.प्राची सिंह साहिबा आदाब,सावन की रुत पर गीत का अच्छा प्रयास हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'उन भीगी शामों में गर्म चाय की फिर गरमाई' ये पंक्ति लय में नहीं है,देखियेगा । 'रात रात भर जाग जाग कर वो मेहंदी…"
14 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post यहाँ हुजूर - ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । बाक़ी जनाब रवि जी बता ही चुके हैं ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on laxman dhami's blog post कभी गम के दौर में भी हुई आखें नम नहीं पर- लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’
"जनाब लक्ष्मण धामी'मुसाफ़िर'जी आदाब,ग़ज़ल उम्दा हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । आपने ग़ज़ल के अरकान ग़लत लिख दिये हैं,आपकी ग़ज़ल के अरकान हैं,"फ़इलात फ़ाइलातुन फ़इलात फ़ाइलातुन यानी 1121 2122 1121 2122" 'तेरे अश्क कर रहे हैं…"
15 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post 'महब्बत कर किसी के संग हो जा'
"जनाब नीरज कुमार जी ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।"
18 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post 'महब्बत कर किसी के संग हो जा'
"प्रिय भाई जनाब विजय निकोर जी आदाब,आपकी प्रतिक्रया पाकर मुग्ध हूँ,आपने हमेशा मेरी ग़ज़लों को अपने क़ीमती अल्फ़ाज़ से इज़्ज़त बख़्शी है,और अच्छे से अच्छा लिखने के लिए मेरी हौसला अफ़ज़ाई की है, इसके लिए दिल की गहराइयों से आपका शुक्रिया । ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न…"
18 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल- कब किसी से यहाँ मुहब्बत की
"ग़ज़ल अछि हो गई है :- 'आसमाँ ने कहाँ शहादत की' 'शहादत'शब्द के दो अर्थ हैं,एक तो धर्म या वतन पर जान क़ुर्बान करना,दूसरा किसी बात की गवाही देना, आपका मिसरा इन अर्थों में नहीं है,इसे बदलने का प्रयास करें ।"
19 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post 'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'
"जी,ये तो मेरा फ़र्ज़ है, शुक्रिया ।"
yesterday
Ravi Shukla commented on Samar kabeer's blog post 'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'
"आदरणीय समर साहब हमारे अनुरोध पर आपने इतनी विस्तृत टिप्पणी दे कर जो मान दिया और गजल के पीछे की कहानी से अवगत कराया उसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post तन्हा...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,कविता कुछ और कसावट चाहती है,'ढक देगी उसे सहर अपने पैरहन से हमेशा के लिये'इन पंक्तियों पर थोड़ा ग़ौर कीजिये, भाव जो आप लेना चाहते थे वो नहीं आ सके,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र-22/22/22/2)
"जनाब मिहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश है ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Hari Prakash Dubey's blog post दिल्ली में सूरज: कविता :हरि प्रकाश दुबे
"जनाव हरि प्रकाश दुबे जी आदाब,अच्छी कविता लिखी,अच्छे तंज़ छुपे हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरी आबाद मुहब्बत को मिटाने वाले
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,'क़तील शिफ़ाई'की ज़मीन में ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'याद आओगे बहुत नींद चुराने वाले' इस मिसरे में 'आओगे'बहुवचन'और रदीफ़''वाले'एक वचन…"
yesterday

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'महब्बत कर किसी के संग हो जा'

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन



हिमाक़त छोड़ दे फ़रहंग हो जा

महब्बत कर किसी के संग हो जा



ग़ज़ल मेरी सुना लहजे में अपने

मैं गूँगा हूँ मेरा आहंग हो जा



यहाँ घुट घुट के मरने से है बहतर

निकल मैदाँ में मह्व-ए-जंग हो जा



करे अपना के दुनिया फ़ख़्र जिस पर

वफ़ा का वो निराला ढंग हो जा



चढ़े इक बार जिस पर फिर न उतरे

महब्बत का तू ऐसा रंग हो जा



ये दुनिया सीधे साधों की नहीं है

उदासी छोड़ शौख़्-ओ-शंग हो जा



जुदा ता उम्र कोई कर न… Continue

Posted on July 24, 2017 at 12:00am — 21 Comments

'ये लहू दिल का चूस्ती है बहुत'

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन/फ़ेलान

ज़ह्न में यूँ तो रौशनी है बहुत
पर जमी इसमें गंदगी है बहुत

इतना आसाँ नहीं ग़ज़ल कहना
ये लहू दिल का चूस्ती है बहुत

एक एक पल हज़ार साल का है
चार दिन की भी ज़िन्दगी है बहुत

चींटियाँ सी बदन पे रेंगती हैं
लम्स में तेरे चाशनी है बहुत

फ़न ग़ज़ल का "समर"सिखाने को
एक 'दरवेश भारती'है बहुत
---
लम्स-स्पर्श
समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Posted on July 18, 2017 at 11:03am — 25 Comments

'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'

मफ़ाइलुन फ़्इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन

ख़ुलूस-ओ-प्यार की उनसे उमीद कैसे हो

जो चाहते हैं कि नफ़रत शदीद कैसे हो



छुपा रखे हैं कई राज़ तुमने सीने में

तुम्हारे क़ल्ब की हासिल कलीद् कैसे हो



बुझे बुझे से दरीचे हैं ख़ुश्क आँखों के

शराब इश्क़ की इनसे कशीद् कैसे हो



हमेशा घेर कर कुछ लोग बैठे रहते हैं

अदब पे आपसे गुफ़्त-ओ-शुनीद कैसे हो



इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर

अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे… Continue

Posted on July 13, 2017 at 11:41am — 38 Comments

यहाँ के लोग महब्बत शदीद करते हैं

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन



ये काम आज के एह्ल-ए-जदीद करते हैं

ग़ज़ल के मुँह पे तमांचा रसीद करते हैं



लगे हुए तो हैं पैहम इसी तग-ओ-दौ में

हमें वो देखिये किस दिन शहीद करते हैं



ये नफ़रतें तो महज़ आरज़ी हैं,सच ये है

यहाँ के लोग महब्बत शदीद करते हैं



मुसालहत की अगर आरज़ू है तुमको भी

तो आओ बैठ कर गुफ़्त-ओ-शुनीद करते हैं



वफ़ा से दूर तलक जिन को वास्ता ही नहीं

ये लोग उनसे इसी की उमीद करते हैं



तू भूल से भी "समर" मेरा… Continue

Posted on July 10, 2017 at 12:31am — 26 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

At 6:40pm on March 18, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय समर कबीर जी आपको माह कि सर्वश्रेष्ठ रचना के हेतु चुने जाने के लिए बधाई प्रेषित करती हूँ । ये सच है कि ग़ज़ल को लिखना और उसमे खिताब पाना बहुत ही प्रशंशनीय है ,आपको एक बार फिरसे बधाई हो सादर । 

At 7:09pm on March 16, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०समर कबीर जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन  कोई हंसी खेल नहीं  .आपको यह पुरस्कार प्राप्य हुआ . आपको मेरी भूरि-भूरि  बधायी .

 
 
 

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