For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Samar kabeer
Share

Samar kabeer's Friends

  • Ambesh Tiwari
  • आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला'
  • Mirza Hafiz Baig
  • Kalipad Prasad Mandal
  • KALPANA BHATT
  • रामबली गुप्ता
  • Abhishek Kumar Amber
  • Arpana Sharma
  • डॉ पवन मिश्र
  • रोहिताश्व मिश्रा
  • बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • Mahendra Kumar
  • सतविन्द्र कुमार
  • Dipu mandrawal
  • Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
 

Samar kabeer's Page

Latest Activity

Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"कोई इधर से तो कोई उधर से निकला था हर एक शख़्स परेशान घर से निकला था बहुत संभाल के रक्खा है हमने सीने में वो एक तीर जो तेरी नज़र से निकला था ये तुमने क्या किया आँखों में डाल दीं आँखें बड़े जतन से मैं इनके असर से निकला था कभी कभी मुझे ख़ुद में दिखाई…"
Friday
Samar kabeer replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ ’चित्र से काव्य तक’ छंदोत्सव" अंक- 73 की समस्त रचनाएँ चिह्नित in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सौरभ पाण्डेय साहिब आदाब,आपकी मुहब्बतों और दुआओं के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।"
Thursday
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह )
"जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,इसके लिये बधाई । बाक़ी निलेश जी ने कहने के लिये कुछ छोड़ा ही नहीं ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on Anuraag Vashishth's blog post घनेरे पेड़ पर है चाँद और हम छत पर बैठे हैं - अनुराग
"जनाब अनुराग वशिष्ठ जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"जनाब गजेंद्र जी आदाब,आपके सुझाये मिसरों पर ज़रा ग़ौर कीजिये:- 'हक़ीक़त कहने वाले देश के अख़बार हो जाये जगे आवाम सारी होश में सरकार हो जाये' इसमें 'देश के'शब्द में बहुवचन है,और रदीफ़ 'जाये'है, आपके मिसरे में रदीफ़…"
Tuesday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल, जनाब निलेश 'नूर' साहिब की नज़्र
"जनाब अनुराग वशिष्ठ जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल, जनाब निलेश 'नूर' साहिब की नज़्र
"जनाब अनुराग वशिष्ठ जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल, जनाब निलेश 'नूर' साहिब की नज़्र
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,आपके हुक्म की तामील ज़रूर करूँगा लेकिन रमज़ान के बाद । ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।"
Tuesday
Anuraag Vashishth commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल, जनाब निलेश 'नूर' साहिब की नज़्र
"आ. समर साहब, आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल हुई है. हर शेर एक बढ़ कर एक है. हार्दिक शुभकामनाये. सादर  "
May 23
Samar kabeer replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ ’चित्र से काव्य तक’ छंदोत्सव" अंक- 73 की समस्त रचनाएँ चिह्नित in the group चित्र से काव्य तक
"प्रिय भाई विजय निकोर जी,'जो अच्छे हैं सबको समझते हैं अच्छा' आमीन,आपकी दुआएँ मुझे क़दम क़दम पर हौसला देती हैं,शुक्रगुज़ार हूँ आपका भाई ।"
May 23
vijay nikore commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल, जनाब निलेश 'नूर' साहिब की नज़्र
"अहा ! हर शेर जैसे classic है। ऐसी ही और गज़लें पढ़ने को देते रहें, समर भाई।"
May 23
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post गजल( वह जमीं पर आग यूँ बोता रहा)
"जैसे,मतले के सानी में 'हो'शब्द भर्ती का है,'हो'की जगह 'ये'होना चाहिये । 'हो गई होती भली अपनी ग़ज़ल मैं पराई ही कथा कहता रहा' इस शैर में शुतरगुर्बा का दोष है,ऊला यूँ होना था:- 'हो गई होती भली मेरी ग़ज़ल'"
May 22
Samar kabeer replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ ’चित्र से काव्य तक’ छंदोत्सव" अंक- 73 की समस्त रचनाएँ चिह्नित in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सौरभ पाण्डेय जी आदाब,'चित्र से काव्य तक'अंक 73 के सफ़ल संचालन कामयाब आयोजन और त्वरित संकलन के लिये आपको बधाई देता हूँ स्वीकार करें । यहाँ में मंच को ये जानकारी दे रहा हूँ कि रमज़ान के कारण मैं 25मई से एक महीने की छुट्टी पर रहूँगा,आप सभी…"
May 22
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल--शम अ रोशन करो मुहब्बत की
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । तनाफ़ुर का ऐब वहाँ मान्य होता है,जहाँ बचने की कोई सूरत न हो,लेकिन जैसा कि निलेश जी ने मिसरे सुझाये हैं उन्हें दुरुस्त करने में गुरेज़ नहीं करना चाहिये…"
May 22
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,आपने एक साथ दो ग़ज़लें पोस्ट कर दीं, 11वें शैर के बाद दूसरी ग़ज़ल शुरू हो गई है,ज़ियादा तर अशआर में क़ाफ़िया पैमाई के अलावा कुछ नहीं है,मैं जनाब गिरिराज भंडारी जी से सहमत हूँ,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
May 22
Samar kabeer commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल बह्र-22/22/22/2
"जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
May 22

Profile Information

Gender
Male
City State
ujjain
Native Place
ujjain
Profession
Poet
About me
poet

Samar kabeer's Blog

तरही ग़ज़ल, जनाब निलेश 'नूर' साहिब की नज़्र

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन



बताऊँ,कैसे शब-ए-इन्तिज़ार गुज़री है

मेरे हवास पे होकर सवार गुज़री है



यही तो होता है हर शब हमारे सीने पर

ग़मों की फ़ौज बनाकर क़तार गुज़री है



न जाने कितनी तमन्नाओं का लहू पीकर

बड़ी ही धूम से फ़स्ल-ए-बहार गुज़री है



तुम्हें ख़बर ही नहीं है कि ये शब-ए-हिज्राँ

किसी ग़रीब का करके शिकार गुज़री है



तुम्हारा साथ जहाँ तक रहा वहाँ तक तो

हयात मेरी बहुत शानदार गुज़री है



हमारी नस्ल भी मग़रिब की तर्ज़… Continue

Posted on May 20, 2017 at 12:08am — 24 Comments

"तरही ग़ज़ल , जनाब रवि शुक्ल साहिब की नज़्र"

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुन



पहले अपनी रूह का ये मक़बरा रोशन करें

और इसके बाद हम सोचें कि क्या रोशन करें



गर मयस्सर घी नहीं है,तेल का रोशन करें

मन्दिर-ओ-मस्जिद में जाएँ इक दिया रोशन करें



ये हमारी ज़िम्मेदारी है, हमारा फ़र्ज़ भी

नाम अपने बाप दादा का सदा रोशन करें



नफरतों के इन अँधेरों को मिटाने के लिये

हम चराग़ उल्फ़त के यारो जा ब जा रोशन करें



याद कर के नज़्म 'हाली'की,ज़ईफ़ा की तरह

झुटपुटे के वक़्त मिट्टी का दिया रोशन… Continue

Posted on May 9, 2017 at 11:30pm — 26 Comments

मोहतरम जनाब योगराज प्रभाकर साहिब की फ़रमाइश पर कही गई तरही ग़ज़ल नम्बर-2

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन



यहाँ हर सू जिहालत है? नहीं तो

पढ़े लिक्खों की क़ीमत है? नहीं तो



सुख़न पर कोई पाबन्दी नहीं अब

ज़बाँ खोलूँ, इजाज़त है? नहीं तो



भरे दरबार में सच बोलना है

तिरे दिल में ये हिम्मत है? नहीं तो



बदल सकता नहीं फ़रमान तेरा

ये क्या क़ुरआँ की आयत है? नहीं तो



अदक़ अल्फ़ाज़ रख देना ग़ज़ल में

इसी का नाम जिद्दत है? नहीं तो



नहीं दौलत ये मिहनत से कमाई

तो क्या माल-ए-ग़नीमत है? नहीं तो



बुलाया है… Continue

Posted on May 5, 2017 at 12:00am — 36 Comments

क़दम उठाने से पहले विचार करना था

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन



(आख़री शैर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ नज़र अंदाज़ करें और शैर का लुत्फ़ लें)



अगर वफ़ा का चलन इख़्तियार करना था

क़दम उठाने से पहले विचार करना था



ये एक बार नहीं बार बार करना था

बग़ैर नाव के दरिया को पार करना था



हुसूल-ए-इल्म की ख़ातिर भटकते फिरते हैं

ग़ज़ल का फ़न जो हमें बा वक़ार करना था



उठाके बोझ ज़माने का तेरी चाहत में

शऊर-ओ-फ़िक्र की सरहद को पार करना था



वो मेरी तेग़ से मरता तो क्या मज़ा आता

उसी… Continue

Posted on April 20, 2017 at 12:04am — 25 Comments

Comment Wall (12 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

At 6:40pm on March 18, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय समर कबीर जी आपको माह कि सर्वश्रेष्ठ रचना के हेतु चुने जाने के लिए बधाई प्रेषित करती हूँ । ये सच है कि ग़ज़ल को लिखना और उसमे खिताब पाना बहुत ही प्रशंशनीय है ,आपको एक बार फिरसे बधाई हो सादर । 

At 7:09pm on March 16, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०समर कबीर जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन  कोई हंसी खेल नहीं  .आपको यह पुरस्कार प्राप्य हुआ . आपको मेरी भूरि-भूरि  बधायी .

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manan Kumar singh posted blog posts
14 minutes ago
Rahila commented on Rahila's blog post ***बदलते सुर***(लघुकथा)राहिला
"बहुत आभार आदरणीय उस्मानी साहब!"
30 minutes ago
Barkha Shukla updated their profile
30 minutes ago
Rahila commented on Rahila's blog post ***बदलते सुर***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीय आरिफ़ साहब!बहुत शुक्रिया ।आप सही हैं मेरा ध्यान इस बार इस बात से चूक गया।"
30 minutes ago
KALPANA BHATT shared their blog post on Facebook
3 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on मोहन बेगोवाल's blog post झूठ का साया(लघुकथा)
"संभवतः आज के समय में यह संभव नहीं है पर आज से पचास वर्ष पूर्व निसंदेह संभव था। यह कहानी का स्पष्ट…"
9 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on मोहन बेगोवाल's blog post झूठ का साया(लघुकथा)
"संभवतः आज के समय में यह संभव नहीं है पर आज से पचास वर्ष पूर्व निसंदेह संभव था। यह कहानी का स्पष्ट…"
11 hours ago
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post डॉ रेखा ( (कहानी)
"धन्यवाद सर"
15 hours ago
KALPANA BHATT posted a blog post

डॉ रेखा ( (कहानी)

"ये कहाँ जा रही हो अम्मी ?" पड़ोस वाली महिला ने पूछा"अरे वो अपनी मधु है न उसके घर से खबर आयी है ,…See More
15 hours ago
Mohammed Arif commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर
"आदरणीय शिज्जू शकूर जी आदाब, छोटी बह्र वाली बेहतरीन ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ…"
18 hours ago
Mohammed Arif commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...क्या क्रांति की है दुन्दभि या सिर्फ ये उफान है
"आदरणीय बृजेश कुमार जी आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल । दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । गुणीजन शैल्पिक विधान…"
18 hours ago
narendrasinh chauhan posted a blog post

मुझे

ईर्ष्या कृपया मुझे छोड़ देंमुझे मुक्त चलने दें तेरी  समझ सेईमानदारीकृपया मुझे में भरमेरे शब्दों को…See More
20 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service