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Samar kabeer
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
""ओ बी ओ लाइव तरही मुशाइर:"अंक-124 को सफल बनाने के लिये सभी ग़ज़लकारों का हार्दिक आभार व धन्यवाद ।"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"तब ठीक है ।"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"'उस के दिल की नफ़रतें शायद मुहब्बत बन सकेंमुझ को लगता है उसे उर्दू सिखानी चाहिए' भाषा के लिहाज़ से आपका ये शैर भी दुरुस्त है ।"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
""ख़याल" 121 ही होता है ।"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"//मर मिटे जो देश हित में वो जवानी चाहिए ......यहां में लगाने से आगे वो करना पड़ेगा जबकि सानी में भी वो है। क्या यह उचित रहेगा?// इस से बचने के लिये सानी यूँ किया जा सकता है:- 'जोश भर दे सब में जो ऐसी कहानी चाहिए'"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"जनाब नादिर ख़ान जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'सिर्फ हर क़ीमत में जिनको हुक़्मरानी चाहिए' इस मिसरे को यूँ कर लें:- 'जिनको हर क़ीमत पे यारो हुक्मरानी चाहिए'"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"जनाब दण्डपाणि 'नाहक़' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'कैसे घोटूँ मैं तमन्नाओं का अपनी खुद गला' इस मिसरे को यूँ कर लें:- 'घोंट दूँ कैसे गला अपनी तमन्नाओं का मैं' 'हसरतों से देखते हैं हम न जाने…"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"जनाब चेतन प्रकाश जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'आदमी हूँ तुम समझ लो नींद आनी चाहिएसारे मसले फिर हुय़े हैं, फाँस जानी चाहिए' मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,और सानी मिसरे में 'मसले' ग़लत…"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'प्यासी धरती पर ख़ुदा की मेहरबानी चाहिए' इस मिसरे में 'मेहरबानी' को "मह्रबानी" कर लें । 'मानते हैं रुत-ए-मुहब्बत फिर से आनी…"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब, आयोजन में सहभागिता के लिए आपका धन्यवाद ।"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"जनाब दयाराम मेठानी जी आदाब,तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार करें । 'मर मिटे जो देश हित ऐसी जवानी चाहिएजोश भर दे जो सभी में वो कहानी चाहिए' मतले के ऊला में 'में' शब्द की कमी लग रही है,और दोनों मिसरों में रब्त भी…"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"मुहतरमा डिम्पल शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।"
Saturday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"सहीह यानी दुरुस्त,ठीक, ग़लत का उल्टा सहीह ।"
Saturday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"लक्ष्मण जी नए अशआर अच्छे हैं,बधाई ।"
Saturday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"सहीह शब्द "सिफ़्र" है और इसका वज़्न 21 होता है, लेकिन अंजलि जी ने इसे तख़ल्लुस बनाया है इसलिये "सिफ़र"12 चलेगा । "
Saturday

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"ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"

2122 2122 212

.

देख साँसों में बसा है ओ बी ओ

मेरी क़िस्मत में लिखा है ओ बी ओ




कितने आए और कितने ही गए

शान से अब तक खड़ा है ओ बी ओ




बढ़ गई तौक़ीर मेरी और भी

तू मुझे जब से मिला है ओ बी ओ




हों वो 'बाग़ी' या कि भाई 'योगराज'

तू सभी का लाडला है ओ बी ओ



भाई 'सौरभ' शान से कहते…

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Posted on April 1, 2020 at 9:00pm — 19 Comments

एक ताज़ा ग़ज़ल

7 फेलुन 1 फ़ा

मेरी यादों से वो यारो जब भी घबराते हों गे

माज़ी के क़िस्सों से अपने दिल को बहलाते हों गे

काले बादल शर्म से पानी पानी हो जाते हों गे

बाम प आकर जब वो अपनी ज़ुल्फ़ें लहराते हों गे

जैसे हमको यार हमारे समझाने आ जाते हैं

उसके भी अहबाब यक़ीनन उसको समझाते हों गे

हम तो उनके हिज्र में तारे गिनते रहते हैं शब भर

वो तो अपने शीश महल में चैन से सो जाते हों…

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Posted on February 13, 2020 at 5:55pm — 6 Comments

'देखो हिंदौस्तान फूँकता है'

2122 1212 112/22

जिस्म में पहले जान फूँकता है

बाद-अज़-जाँ अज़ान फूँकता है

सब्र कर शब गुज़र ही जाएगी

क्यों ये अपना मकान फूँकता है

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

पास आकर वो गर्म साँसों से

मेरे दिल का जहान फूँकता है

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है

रोज़ आयात पढ़…

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Posted on August 6, 2019 at 3:00pm — 18 Comments

एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल

अरकान:-12112 12112

न छाँव कहीं,न कोई शजर

बहुत है कठिन,वफ़ा की डगर

अजीब रहा, नसीब मेरा

रुका न कभी,ग़मों का सफ़र

तलाश किया, जहाँ में बहुत

कहीं न मिला, वफ़ा का गुहर

तमाम हुआ, फ़सान: मेरा

अँधेरा छटा, हुई जो सहर

ग़मों के सभी, असीर यहाँ

किसी को नहीं, किसी की ख़बर

बहुत ये हमें, मलाल रहा

न सीख सके, ग़ज़ल का हुनर

हबीब अगर, क़रीब न हो

अज़ाब लगे, हयात…

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Posted on July 4, 2019 at 2:30pm — 36 Comments

Comment Wall (39 comments)

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At 10:27am on June 27, 2020, Chetan Prakash said…

आदरणीय, मोहतरम समीर कबीर साहब प्रत्युत्तर के लिए आपका आभारी हूँ। रू का शाब्दिक
अर्थ आपने चहरा, (उक्त मिसरे में ) बता या , लेकिन मैंने मूल प्रति में रूह लिखा था। लेकिन कुछ लोग वहाँ ह की गणना कर ले ते हैं, सो मैंने रू चुना। एक और बात रू , वहाँ आत्मा की प्रतिच्छाया है न कि चहरा।आदरणीय, बिम्ब की दृष्टिसे रू का प्रयोग सर्वथा उचित है। माननीय, कवि का संसार ( काव्य ) बिम्ब के माध्यम से अभिव्यक्त होता है, जो लक्षणा और
व्य्ंजना से ही बोध गम्य है। शब्द ही ब्रह्म है, इसी हेतु मनीषियों ने कहा है। और, दूसरे मिसरे की बह्र से खारिज...बतायाआपने, मेहरबानी होगी, आपकी, तक्तीअ कर मार्ग- दर्शन करें!

At 7:03am on May 10, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
यह जानकर खुशी हुई कि आपके अनुज और बेटे की सेहत ठीक है. ओबीओ पर आपकी उपस्थिती से हम जैसे नये शायरों को संबल मिलता है. एक ताज़ा ग़ज़ल पोस्ट की है. वक़्त मिलने पर पढ़कर सलाह दें तो मेहरबानी होगी.
At 11:04pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
बहुत ममनून हूँ कि इतनी जल्दी शंका समाधान कर दिया. एक दफा फिर शुक्रिया.
At 9:38am on May 5, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
बहुत दिनों बाद अपनी एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ, आपकी नज़रे इनायत की दरकार है. समय मिलने पर पढ़ कर सलाह एवं प्रतिक्रिया देकर अनुग्रहित करें.
सालिक गणवीर
At 6:04pm on April 23, 2020, सालिक गणवीर said…

आदरणीय समर कबीर साहब

अपने ब्लाग पर एक ग़ज़ल पोस्ट की है, प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. समय निकाल कर मुझे भी पढ़कर आवश्यक सुझाव देंं.

At 12:25pm on April 1, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय कबीर साहब
अपने ब्लॉग में एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ. साथ ही साथ आपको फ्रैंड रिक्वेस्ट भी भेजा है. कृपया स्वीकार करें. ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. पहले तरही ग़ज़ल,ज़रूरी रद्दोबदल के साथ पोस्ट किया था, प्रभाकर जी का मेल आने के बाद इसे हटा दिया है.
शुभेच्छु
सालिक गणवीर
At 1:52pm on March 29, 2020, Bhupender singh ranawat said…

shri maan aapki hosla afjayI k liye aabhar

At 7:06pm on March 9, 2020, अमीरुद्दीन 'अमीर' said…

शुक्रिया जनाब.

At 8:18am on January 21, 2020, Bhupender singh ranawat said…

आदरणीय Samar Kabeer साहब रचना की सराहना  के लिए आपका बहुत बहुत आभार । आपने जो advice दी हैं उनका में ध्यान रखूँगा। पुनः आपका आभार ।

At 9:23am on September 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय समर क़बीर साहब को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव आपको सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें।हमेशा स्वस्थ रहें और दीर्घायु बनें।उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान हों।

 
 
 

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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
""ओ बी ओ लाइव तरही मुशाइर:"अंक-124 को सफल बनाने के लिये सभी ग़ज़लकारों का हार्दिक आभार व…"
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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
" बहुत खूब आदरणीया  अंजलि जी .. अच्छी गज़ल के लिए ढेरों मुबारकबाद "
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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"जी कोशिश करेंगे जल्दी आने की लेकिन ... और भी ग़म हैं .........   देर हो जाती है । सादर"
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