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Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post दौड़ पड़ा याद का तौसन कोई----ग़ज़ल
"//आदरणीय समर कबीर बाउजी// आप मेरा नाम नहीं लेना चाहते थे,तभी तो 'बाउजी' कहना शुरू'अ किया था, आज नाम के साथ बाउजी देख कर आश्चर्य चकित हूँ । 'फिर खुला याद के कमरे का ज्यूँ रौज़न कोई' 'ज़ह्न" शब्द की मात्रा 21होती…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post दौड़ पड़ा याद का तौसन कोई----ग़ज़ल
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'फिर खुला याद के कमरे का ज्यूँ रौज़न कोई त्यों ही फिर दौड़ पड़ा याद का तौसन कोई' मतले के दोनों मिसरों में 'याद' शब्द खटकता है, इसे दुरुस्त करने का प्रयास…"
7 hours ago
Samar kabeer left a comment for Aazi Tamaam
"जनाब आज़ी साहिब,तरही मुशाइर: में शामिल सभी ग़ज़लों पर लाइव ही तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, शिर्कत फ़रमाएँ, और कोई उलझन हो तो मुझसे 09753845522 पर बात कर सकते हैं ।"
Tuesday
Samar kabeer and Aazi Tamaam are now friends
Tuesday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे पूछताछ
"जनाब आज़ी साहिब आदाब, ओबीओ पर आपका स्वागत है, ओबीओ के तरही मुशाइर: में शिर्कत फ़रमाएँ, वहाँ सभी ग़ज़लों पर तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, इस माह का तरही मिसरा और उसकी तारीख़आप मुख्य पृष्ठ पर आयोजन कैलेंडर में देख सकते हैं ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I मक़ते का ऊला बह्र में नहीं है,यूँ कर सकते हैं :- `उसको सज़ा ही दी है अभी तक तो आपने`"
Tuesday
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post लघुकथा(आजादी)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब, अच्छी लघुकथा हुई है, बधाई स्वीकार करें I"
Tuesday
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नारी की प्रकृति
"जनाब गोपाल नारायण जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 8
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- लाऊँ कहाँ से
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'न चल पाए क़दम इक भी वहाँ से' इस मिसरे को यूँ कहें:- 'क़दम हिल भी नहीं पाए वहाँ से' 'सँभलने के लिए कुछ वक़्त तो दो अभी उतरा ही है वो आसमाँ से' इस…"
Jan 8
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सब कुछ है अब यार सियासी- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'घर  फूटेगा  हो  जाने  दो' इस मिसरे पर मुहतरमा रचना जी का सुझाव अच्छा है ।"
Jan 8
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (तेरे खाने के लिए मुफ्त का माल अच्छा है)
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 5
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post औरों से क्या आस रे जोगी-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'हम जैसा  ही  तुम  को होगा' इस मिसरे में 'तुम' की जगह "तुझ" शब्द उचित होगा । 'समझा दो  सायास  रे…"
Jan 5
Samar kabeer commented on amita tiwari's blog post नए वर्ष तुझ को बहुत काम करने हैं
"मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 5
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post बलात्कार - लघुकथा –
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब, अच्छी लघुकथा लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 5
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'वो दिल के पास भी रहता नहीं था'  इस मिसरे में 'भी' की जगह "जो" शब्द उचित होगा ।"
Jan 5
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post भूल मन पीड़ा विगत की गा रहा है - लक्ष्मण धामी'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'आँख जब आँसू झराने को विवश थी' इस मिसरे में 'झराने' की जगह "बहाने" शब्द पर विचार करें ।"
Jan 1

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तरही ग़ज़ल

दोस्तो गर ज़िन्दगी में कामरानी चाहिए

ज़ह्न-ओ-दिल से गर्द नफ़रत की हटानी चाहिए



अर्ज़ कर दूँ आख़िरी ख़्वाहिश इजाज़त हो अगर

एक शब मुझको तुम्हारी मेज़बानी चाहिए



ज़िल्ल-ए-सुब्हानी अगर कुछ आपसे बच पाए तो

हम ग़रीबों को भी थोड़ी शादमानी चाहिए



मूँद कर आँखें न चलना याद रखना ये सबक़

ज़िन्दगी में हर क़दम पर सावधानी चाहिए



ज़िन्दगी में लाज़मी तो है मगर इंसान को

दफ़्न करने के लिये भी माल पानी चाहिए



फ़ज़्ल से रब के मुकम्मल हो गई मेरी ग़ज़ल

दोस्तो…

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Posted on November 9, 2020 at 5:30pm — 22 Comments

"ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"

2122 2122 212

.

देख साँसों में बसा है ओ बी ओ

मेरी क़िस्मत में लिखा है ओ बी ओ




कितने आए और कितने ही गए

शान से अब तक खड़ा है ओ बी ओ




बढ़ गई तौक़ीर मेरी और भी

तू मुझे जब से मिला है ओ बी ओ




हों वो 'बाग़ी' या कि भाई 'योगराज'

तू सभी का लाडला है ओ बी ओ



भाई 'सौरभ' शान से कहते…

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Posted on April 1, 2020 at 9:00pm — 19 Comments

एक ताज़ा ग़ज़ल

7 फेलुन 1 फ़ा

मेरी यादों से वो यारो जब भी घबराते हों गे

माज़ी के क़िस्सों से अपने दिल को बहलाते हों गे

काले बादल शर्म से पानी पानी हो जाते हों गे

बाम प आकर जब वो अपनी ज़ुल्फ़ें लहराते हों गे

जैसे हमको यार हमारे समझाने आ जाते हैं

उसके भी अहबाब यक़ीनन उसको समझाते हों गे

हम तो उनके हिज्र में तारे गिनते रहते हैं शब भर

वो तो अपने शीश महल में चैन से सो जाते हों…

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Posted on February 13, 2020 at 5:55pm — 6 Comments

'देखो हिंदौस्तान फूँकता है'

2122 1212 112/22

जिस्म में पहले जान फूँकता है

बाद-अज़-जाँ अज़ान फूँकता है

सब्र कर शब गुज़र ही जाएगी

क्यों ये अपना मकान फूँकता है

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

पास आकर वो गर्म साँसों से

मेरे दिल का जहान फूँकता है

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है

रोज़ आयात पढ़…

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Posted on August 6, 2019 at 3:00pm — 18 Comments

Comment Wall (39 comments)

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At 10:27am on June 27, 2020, Chetan Prakash said…

आदरणीय, मोहतरम समीर कबीर साहब प्रत्युत्तर के लिए आपका आभारी हूँ। रू का शाब्दिक
अर्थ आपने चहरा, (उक्त मिसरे में ) बता या , लेकिन मैंने मूल प्रति में रूह लिखा था। लेकिन कुछ लोग वहाँ ह की गणना कर ले ते हैं, सो मैंने रू चुना। एक और बात रू , वहाँ आत्मा की प्रतिच्छाया है न कि चहरा।आदरणीय, बिम्ब की दृष्टिसे रू का प्रयोग सर्वथा उचित है। माननीय, कवि का संसार ( काव्य ) बिम्ब के माध्यम से अभिव्यक्त होता है, जो लक्षणा और
व्य्ंजना से ही बोध गम्य है। शब्द ही ब्रह्म है, इसी हेतु मनीषियों ने कहा है। और, दूसरे मिसरे की बह्र से खारिज...बतायाआपने, मेहरबानी होगी, आपकी, तक्तीअ कर मार्ग- दर्शन करें!

At 7:03am on May 10, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
यह जानकर खुशी हुई कि आपके अनुज और बेटे की सेहत ठीक है. ओबीओ पर आपकी उपस्थिती से हम जैसे नये शायरों को संबल मिलता है. एक ताज़ा ग़ज़ल पोस्ट की है. वक़्त मिलने पर पढ़कर सलाह दें तो मेहरबानी होगी.
At 11:04pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
बहुत ममनून हूँ कि इतनी जल्दी शंका समाधान कर दिया. एक दफा फिर शुक्रिया.
At 9:38am on May 5, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
बहुत दिनों बाद अपनी एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ, आपकी नज़रे इनायत की दरकार है. समय मिलने पर पढ़ कर सलाह एवं प्रतिक्रिया देकर अनुग्रहित करें.
सालिक गणवीर
At 6:04pm on April 23, 2020, सालिक गणवीर said…

आदरणीय समर कबीर साहब

अपने ब्लाग पर एक ग़ज़ल पोस्ट की है, प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. समय निकाल कर मुझे भी पढ़कर आवश्यक सुझाव देंं.

At 12:25pm on April 1, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय कबीर साहब
अपने ब्लॉग में एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ. साथ ही साथ आपको फ्रैंड रिक्वेस्ट भी भेजा है. कृपया स्वीकार करें. ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. पहले तरही ग़ज़ल,ज़रूरी रद्दोबदल के साथ पोस्ट किया था, प्रभाकर जी का मेल आने के बाद इसे हटा दिया है.
शुभेच्छु
सालिक गणवीर
At 1:52pm on March 29, 2020, Bhupender singh ranawat said…

shri maan aapki hosla afjayI k liye aabhar

At 7:06pm on March 9, 2020, अमीरुद्दीन 'अमीर' said…

शुक्रिया जनाब.

At 8:18am on January 21, 2020, Bhupender singh ranawat said…

आदरणीय Samar Kabeer साहब रचना की सराहना  के लिए आपका बहुत बहुत आभार । आपने जो advice दी हैं उनका में ध्यान रखूँगा। पुनः आपका आभार ।

At 9:23am on September 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय समर क़बीर साहब को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव आपको सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें।हमेशा स्वस्थ रहें और दीर्घायु बनें।उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान हों।

 
 
 

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