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Samar kabeer
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Mahendra Kumar commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"खड़े हुए हैं सर-ए-राह आइना लेकर हमारे सामने आए मजाल किसकी है ....वाह! ग़ज़ब का शेर! इस शानदार ग़ज़ल के शेर दर शेर दाद के साथ ढेर सारी बधाई क़ुबूल कीजिए सर. सादर."
7 hours ago
Ajay Tiwari commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"आदरणीय समर साहब, आपकी इस ग़ज़ल से दो चीजें सीखी जा सकती हैं : 1. बिना 132 शेर कहे भी किस तरह बेहतरीन ग़ज़ल कही जा सकती है. 2. उम्दा ग़ज़ल कहने के लिए ये ज़रूरी नहीं कि मिसरे में हर शब्द ऐसा हो कि पाठक को dictionary की शरण में जाना पड़े. तू बेवफ़ा हमें कहता…"
10 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"हार्दिक बधाई आदरणीय समर क़बीर साहब जी।लाज़वाब गज़ल। ज़रा सा ग़ौर करोगे तो जान जाओगे वतन को आग लगाने की चाल किसकी है"
12 hours ago
Asif zaidi commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"समर कबीर साहब आदाब अर्ज़ है, बहुत उम्दा वाह वाह "
13 hours ago
Samar kabeer posted a blog post

'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन1212     1122     1212      22ग़ज़लउठा है ज़ह्न में सबके सवाल,किसकी हैतू जिस पे नाच रहा है वो ताल किसकी हैखड़े हुए हैं सर-ए-राह आइना लेकरहमारे सामने आए मजाल किसकी हैज़रा सा ग़ौर करोगे तो जान जाओगेवतन को आग लगाने की चाल किसकी हैहमें तू बेवफ़ा कहता है ,ये तो देख ज़रालबों पे सबके वफ़ा की मिसाल किसकी हैकभी तो सोच,कभी तो ख़याल कर इसकातू जिसके पीछे है महफूज़,ढाल किसकी है"समर कबीर"मौलिक/अप्रकाशितSee More
18 hours ago
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post जागो उठो हे लाल तुम (मधुमालती छंद)
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,मधुमालती छन्द में अच्छी रचना हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । "चिन्ता न हो, निज प्राण का" इस पंक्ति में 'चिन्ता' शब्द स्त्रीलिंग है,देखिये ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । कुछ अशआर में रवानी की कमी महसूस हो रही है ।"
yesterday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत को न समझे कोई (१४)
"//वाह वाह इस्लाह पर ही दाद क़ुबूल फरमाएं// बहुत शुक्रिया जनाब,महब्बत है आपकी । "
yesterday
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post अपनों का दर्द- लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"जनाब बलराम धाकड़ जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'अब क़यामत का शोर बरपेगा' इस मिसरे में 'बरपेगा' शब्द ठीक नहीं,इसका सहीह व्याकरण है "बरपा होगा",इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं:- 'अब क़यामत का शोर…"
Tuesday
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post जो पतंगों को उड़ाता है।
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,बह्र, शिल्प,व्याकरण पर अभी आपको क़ाबू पाना होगा,इसके लिए ओबीओ पर "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" समूह का लाभ लें ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत को न समझे कोई (१४)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ' माँगता रहता है रोज़ाना बशर रब से कुछ जो अता की उन इनायत को न समझे कोई ' इस शैर के ऊला मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर है,और सानी मिसरे में…"
Tuesday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post ख़ुद ही देखी है किसी को न दिखाई मैंने
"जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।"
Tuesday
राज़ नवादवी commented on Samar kabeer's blog post ख़ुद ही देखी है किसी को न दिखाई मैंने
"आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब. बहुत ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने. दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ. सादर. "
Monday
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जनाब अजय तिवारी साहिब को यौम-ए-पैदाइश की बहुत बहुत मुबारकबाद । 'तुम जियो हज़ारों साल साल के दिन हों पचास हज़ार'"
Monday
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Monday

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Samar kabeer's Blog

"तरही ग़ज़ल नम्बर 4

नोट:-

तरही मुशायरा अंक-100 में 87 ग़ज़लें पोस्ट हुईं,मेरी इस ग़ज़ल में जो क़वाफ़ी इस्तेमाल हुए हैं वो बिल्कुल नये हैं ।

पहले सिल पर घिसा गया है मुझे

फिर जबीं पर मला गया है मुझे

जाल हूँ इक सियासी लीडर का

नफ़रतों से बुना गया है मुझे

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे

कहदो तक़दीर से बखेरे नहीं

करके वो एक जा गया है…

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Posted on October 24, 2018 at 5:54pm — 40 Comments

"हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल

कितनी प्यारी ये मनभावन हिन्दी है

भारत की वैचारिक धड़कन हिन्दी है

जो लिखता हूँ हिन्दी में ही लिखता हूँ

मेरी ख़ुशियों का घर आँगन हिन्दी है

रफ़ी, लता,मन्नाडे को तुम सुन लेना

इन सबकी भाषा और गायन हिन्दी है

भारत में कितनी हैं भाषाएँ लेकिन

सारी भाषाओँ का यौवन हिन्दी है

पहले मैं अक्सर उर्दू में लिखता था

अब तो मेरा सारा लेखन हिन्दी है

मुझको तो लगती है ये भाषा…

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Posted on September 13, 2018 at 11:39pm — 33 Comments

"बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"

ग़ज़ल

बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ

मैं नफ़रतों का ही क़िस्सा तमाम करता चलूँ

अब आख़िरत का भी कुछ इन्तिज़ाम करता चलूँ

दिल-ओ-ज़मीर को अपने मैं राम करता चलूँ

जहाँ जहाँ से भी गुज़रूँ ये दिल कहे मेरा

तेरा ही ज़िक्र फ़क़त सुब्ह-ओ-शाम करता चलूँ

अमीर हो कि वो मुफ़लिस,बड़ा हो या छोटा

मिले जो राह में उसको सलाम करता चलूँ

गुज़रता है जो परेशान मुझको करता है

तेरे ख़याल से…

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Posted on September 1, 2018 at 3:12pm — 50 Comments

जनाब निलेश 'नूर' की ज़मीन में ग़ज़ल नम्बर 2 (कुछ नये क़वाफ़ी के साथ)

मैं तो उसकी पे ब पे अंगड़ाइयाँ गिनता रहा

और वो दामन की मेरे धज्जियाँ गिनता रहा

सौ गुनह होते ही पूरे मारना था इसलिये

मैं भी इक शिशुपाल की बदकारियाँ गिनता रहा

मेरे सीने पर सितम की मश्क़ वो करते रहे

और मैं मासूम दिल की किर्चियाँ गिनता रहा

काम जब कुछ भी नहीं था ओबीओ पर दोस्तो

'नूर' साहिब की मैं कूड़ेदानियाँ गिनता रहा

मेरी बर्बादी पे ख़ुश होकर अज़ीज़ों ने "समर"

कितनी…

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Posted on July 11, 2018 at 10:00am — 31 Comments

Comment Wall (18 comments)

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At 12:57pm on January 14, 2019, गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' said…

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे ---क्या बात है समर कबीर साहेब लाजवाब अशआर हुए हैं | दाद ही दाद क़ुबूल फ़रमाएं | 

At 11:38am on December 25, 2018, Surkhab Bashar said…

जनाब समर कबीर साहब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही है आपने 

हर शेर का़बिले दाद है 

  • मुबारक बाद कुबूल करें
At 11:39pm on August 19, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय प्रणाम!
एवम् शुक्रिया मैं निरंतर सुधर करूँगा
At 6:09pm on August 7, 2018, Kishorekant said…

आपका आभार आदरणीय समर कबीर जी । आप की सुचना के अनुसार अभ्यास शुरु कर दिया है । आशा है आगे भी आपका मार्गदर्शन मिलता रहेगा ।भूलों के लिये दरगुजर करें ।

At 8:05pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय
समर कबीर महोदय प्रणाम
आपका आदेश सर माथे पर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
 
 
 

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