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अजय गुप्ता
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कैलेंडर

नौ तारीख तक कैलेंडर न आने से असुविधा होती है। यदि पहले से निर्धारित हो और 1-2 तारीख तक कैलेंडर आ जाए तो आसानी हो जाये।उम्मीद है आयोजक इस और ध्यान देंगेContinue

Started Apr 9, 2018

 

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Latest Activity

अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"मास्टर जहाँ हाथ लगायेगा वहाँ से मास्टरपीस ही निकलेगा।  बहुत ही बढ़िया और बहुत ही बधाई आदरणीय समर साहब"
May 31
dandpani nahak left a comment for अजय गुप्ता
"आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी उसे सराहा उसके लिए बहुत शुक्रिया"
May 26
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"शुक्रिया अनीस जी"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"शुक्रिया अमित जी"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"शुक्रिया मोहन जी"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आभार जनाब"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जी। सहमत हूँ आपसे।"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"मैं आदरणीय समर साहब की बात से सहमत हूँ। हमें इसे सीखने-सिखाने का खुला मंच बना रहने देना चाहिए। सुझाव व समीक्षा देने वाला तभी अपना श्रेष्ठ दे सकता है जब स्वीकार करने वाला भी उसे खुले दिल से स्वीकार करे। एक बात समर साहब से कहना चाहूंगा कि जब वरिष्ठ…"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जी, ठीक है।"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय समर साहब। विस्तृत आंकलन के लिए आभार। शाद गुलिस्तां से मेरा मंतव्य खुशनुमा और खिले हुए चमन को सहरा की तुलना में लाना था। कृपया सुझाएँ। रौनक-महफ़िल को मैंने अलग अलग ही रखा था। पर आपका सुझाव बेहतर है।  शुतरगुरबा को निकालने का प्रयास करता…"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय जनाब अनीस शेख साहब गजल बहुत अच्छी हुई है। अलग अलग अंदाज के अशआरों ने दिल जीत लिया"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
" आदरणीय मुनीश तन्हा जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। सभी अशआर एक से बढ़कर एक"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
" जनाब दयाराम मेठानी जी इस ग़ज़ल के लिए बहुत-बहुत बधाई"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"बहुत अच्छा प्रयास हुआ है मोहन बेगोवाल जी बधाई"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जनाब प्रकाश पटवर्धन साहब अच्छी ग़ज़ल हुई है बहुत-बहुत बधाई"
May 25
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
" आदरणीय अग्रवाल जी गजल के लिए बहुत-बहुत बधाई"
May 25

Profile Information

Gender
Male
City State
Karnal (Haryana)
Native Place
Karnal
Profession
Business
About me
ग़ज़ल, कविता, लघुकथा लेखन में रूचि. 3 ऑनलाइन पुस्तकें प्रकाशित. एक काव्य संग्रह हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित. parivartaaajkal.com पर 'अजय की कलम' के शीर्षक से नियमित कॉलम

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एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)

एक ग़ज़ल।

**********

बँध गई हैं एक दिन से प्रेम की अनुभूतियाँ

बिक रही रैपर लपेटे प्रेम की अनुभूतियाँ

शाश्वत से हो गई नश्वर विदेशी चाल में

भूल बैठी स्वयं को ऐसे प्रेम की अनुभूतियाँ

प्रेम पथ पर अब विकल्पों के बिना जीवन नहीं

आज मुझ से, कल किसी से, प्रेम की अनुभूतियाँ

पाप से और पुण्य से हो कर पृथक ये सोचिए

लज्जा में लिपटी हैं क्यों ये प्रेम की अनुभूतियाँ

परवरिश बंधन में हो तो दोष किसको दीजिये

कैसे पहचानेंगे…

Continue

Posted on February 14, 2019 at 1:54pm — 4 Comments

एक ग़ज़ल (हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया)

हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया

लेकिन चुप है, शायद गूँगा है साया

कहने में तो है अच्छा हमराही पर

सिर्फ़ उजालों में सँग होता है साया

सूरज सर पर हो तो बिछता पाँवों में

आड़ में मेरी धूप से बचता है साया

असमंजस में हूँ मैं तुमसे ये सुनकर

अँधियारे में तुमने देखा…

Continue

Posted on February 7, 2019 at 12:38pm — 3 Comments

ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)

दिखे हरसूँ अँधेरा है

कहाँ जाने सवेरा है

 

नहीं दिखता कहीं रस्ता

कुहासा है घनेरा है

 

हुनर सीखें नए कैसे

गुरु बिन आज चेरा है

 

चुराता जा रहा साँसें

समय है या लुटेरा है

 

बनाता है जो इंसा को

ये जीवन वो ठठेरा है

 

नहीं शिकवा है साँपों से

डसे जाता सपेरा है

 

नहीं घर रास है मुझको

दिलों में ही बसेरा है

 

तेरा क्या और क्या मेरा

चले माया का फेरा…

Continue

Posted on December 10, 2018 at 7:30pm — 5 Comments

Comment Wall (2 comments)

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At 12:56pm on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी उसे सराहा उसके लिए बहुत शुक्रिया
At 12:18pm on November 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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"आदरणीय दण्डपाणी भाई , बढिया कही है ग़ज़ल , बधाई"
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गिरिराज भंडारी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय आसिफ भाई , बधाई अच्छी ग़ज़ल कही ! मुख फाड़ेगा जो कलयुग तो ये सतयुग ने कहा…"
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गिरिराज भंडारी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आ. सुरेंदर भाई ग़ज़ल अच्छी कही , बधाई आपको"
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Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आँख मौसम ने फिराई, रौ फिरा कर निकला। फिर घटाओं की जफ़ा से जला इक घर निकला।1 सुर्ख़ियों में हो गईं आज…"
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