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राज़ नवादवी
  • Male
  • Bhopal, Madhya Pradesh
  • India
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अनुपम ध्यानी and राज़ नवादवी are now friends
Mar 19
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने-४१ (बाकी रह गया इक शख्स जो राज़ नवादवी है)
"शुक्रिया भाई सौरभ  जी! विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा! सादर."
Nov 16, 2012

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने-४१ (बाकी रह गया इक शख्स जो राज़ नवादवी है)
"भाईजी, बच्चन के शब्द-पुष्प साझा कर रहा हूँ -- लाल सुरा की धार लपट सी कह न इसे देना ज्वाला, फेनिल मदिरा है, मत इसको कह देना उर का छाला, दर्द नशा है इस मदिरा का विगत स्मृतियाँ साकी हैं, पीड़ा में आनंद जिसे हो, आए मेरी मधुशाला !! शुभेच्छाएँ"
Nov 2, 2012
राज़ नवादवी commented on Rajesh Kumar Jha's blog post अनायास
"बहुत खूब राजेश जी! "
Nov 1, 2012
राज़ नवादवी liked Rajesh Kumar Jha's blog post अनायास
Nov 1, 2012
राज़ नवादवी commented on Er.vir parkash panchal's blog post पत्थरों के शहर में
"वाह पांचाल जी!"
Nov 1, 2012
राज़ नवादवी liked Er.vir parkash panchal's blog post पत्थरों के शहर में
Nov 1, 2012
राज़ नवादवी liked पियुष द्विवेदी 'भारत''s blog post लघुकथा :- रंग
Nov 1, 2012
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने-४१ (बाकी रह गया इक शख्स जो राज़ नवादवी है)
"धन्यवाद भाई लक्षमण जी. तहेदिल से शुक्रिया कि आपने मेरे लिखे को पसंद किया! मेरे लिए डायरी लेखन स्मरण की पराकाष्ठा है, अतीत को फिर से जी कर वर्तमान में पुनः लौट आना. चुनांचे, लिख के भूल जाता हूँ, बातें ज़हन से निकल जाती हैं और फिर सब कुछ पहले जैसा ही…"
Nov 1, 2012
Laxman Prasad Ladiwala commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने-४१ (बाकी रह गया इक शख्स जो राज़ नवादवी है)
"आपकी डायरी के पन्नो में बहुत से यादे खोंस रक्खी है, जो अब एक एक कर सामने आ रही है |हम भी लुफ्त उठा रहे है | जो गंदे का फूल छुपा दिया था, और जो काजल का रेजा आपके शाने से आ लगा था,उनकी यादे आपको सताती होगी | मगर अपने इस पन्ने पर रोज फूल पंखुड़ी तो…"
Oct 31, 2012
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने-४१ (बाकी रह गया इक शख्स जो राज़ नवादवी है)
"आपका बहुत बहुत शक्रिया आदरणीया राजेश जी. आपकी दाद पाके दिल खुशी से फूले नहीं समा रहा है. सादर!"
Oct 31, 2012

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने-४१ (बाकी रह गया इक शख्स जो राज़ नवादवी है)
"काव्य के आलावा गद्य रचना में भी किसी की याद में इतने खूबसूरत शब्द घड देना कोई आप से सीखे बहुत खूबसूरत एहसास लाजबाब संस्मरण "
Oct 31, 2012
राज़ नवादवी shared their blog post on Facebook
Oct 31, 2012
राज़ नवादवी commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post दीदार के खातिर यूँ आवाम दिवानी है
"प्रिय संदीपजी, बधाई हो, मंच पे आपकी मुराजअत (वापसी) हुई. 'आवाम' लफ्ज़ को देख लें, मेरे ख्याल से सही लफ्ज़ 'अवाम' है जो आम का जम्आ है, और मुज़क्कर (पुल्लिंग) है, मुअन्नस (स्त्रीलिंग) नहीं.  सादर! "
Oct 31, 2012
राज़ नवादवी posted a blog post

राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने-४१ (बाकी रह गया इक शख्स जो राज़ नवादवी है)

दिन ऐसे गुज़र जाते है जैसे हाथ से ताश के पत्ते. देखते देखते महोसालोदहाई सर्फ़ हो गए, कहाँ गए सब? ज़िंदगी में जो बीत गया, किधर चला चला गया? जो लोग अब नहीं हैं तकारुब में और जिनके मख्फी साये ही ज़हन में आते जाते हैं, वो कहाँ हैं अभी? ख्वाहिशों से भी मुलायम सपने जो कभी पूरे नहीं हुए, उदासियों सी भी तन्हा कोई राहगुज़र जो कभी मंजिल तक न पहुँच पाई, दिल की सोजिशों से भी रंजीदा इक नज़र जो झुक गई मायूसियों के बोझ तले- क्या हुआ उनका? तुम्हारे गाँव का वो खाली खाली घर जहाँ बसी है आईने के सामने संवरते…See More
Oct 31, 2012
राज़ नवादवी commented on वीनस केसरी's blog post कहानी - नशा - वीनस केसरी
"आदरणीय, मेरी राय इसपे अलग है. कहानी का अंत चाहे जो भी हो, मगर ज़िंदगी कहानी नहीं होती, गो ज़िंदगी की भी कहानी होती है. आपने बड़ी संजीदगी से निष्कर्ष माँगा था, मैंने कहानी का नहीं, ज़िंदगी का निष्कर्ष दिया है क्यूंकि मुझे लगा ये कहानी जिंदगियों को भी…"
Oct 31, 2012

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, Madhya Pradesh
Native Place
Nawada, Bihar
Profession
Education, Training, and Community Development (Head, Operations B2B, LabourNet Services India Private Limited)
About me
Main shayar to nahin, magar ai zindgee, jab se tum ko samjha, shayari aa gai.

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राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने-४१ (बाकी रह गया इक शख्स जो राज़ नवादवी है)

Posted on October 31, 2012 at 9:03am 6 Comments

दिन ऐसे गुज़र जाते है जैसे हाथ से ताश के पत्ते. देखते देखते महोसालोदहाई सर्फ़ हो गए, कहाँ गए सब? ज़िंदगी में जो बीत गया, किधर चला चला गया? जो लोग अब नहीं हैं तकारुब में और जिनके मख्फी साये ही ज़हन में आते जाते हैं, वो कहाँ हैं अभी? ख्वाहिशों से भी मुलायम सपने जो कभी पूरे नहीं हुए, उदासियों सी भी तन्हा कोई राहगुज़र जो कभी मंजिल तक न पहुँच पाई, दिल की सोजिशों से भी रंजीदा इक नज़र जो झुक गई मायूसियों के बोझ तले- क्या हुआ उनका?

 

तुम्हारे गाँव का वो खाली खाली घर जहाँ बसी है आईने के…

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राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने- ४० (वही घर के कोने अपना मुंह छुपाए, वही रास्ते में तुम्हारी यादों के नक्श.. शरमाए शरमाए)

Posted on October 26, 2012 at 12:30pm 11 Comments

घरों में सीलिंग फैन्स की घड़घड़ाहट बंद सी होने लगी है और दिन सुबुकपा और रातें संगीन. मौसम ने करवट की इक गर्दिश पूरी की हो जैसे- धूप की शिद्दत खत्म होने लगी है और सुकून और मुलायमियत के झीने से सरपोश के उस तरफ साकित ओ मुतमईन, आयंदा और तबस्सुमफिशाँ कुद्रत के नए रूप का एहसास होने लगा है. घर की हर शै जैसे तपिश भरी दोपहरियों से सज़ायाफ्ता ज़िंदगी की नींद से बेदार होने लगी है और जल रहे लोबान के धुंए की तरह दूदेसुकूत फजाओं में फ़ैल रहा है. ये आमदेसरमा (जाड़े के मौसम के आगमन) के बेहद इब्तेदाई रोज़…

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राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ४१ (बहरे रमल मुसम्मन महजूफ़: "बात क्यूँ करते हो मुझसे इश्रतोआराम की")

Posted on October 19, 2012 at 11:51pm 8 Comments

बहरे रमल मुसम्मन महजूफ़

(वज़न- फायलातुन फायलातुन फायलातुन फाएलुन)

---------------------------------------------------------

मुलाहिजा फरमाएं:

 

बात क्यूँ करते हो मुझसे इश्रतोआराम की

हुस्नवालों की दलीलें हैं मिरे किस काम की

 

कब हुई तस्लीम मेरी इक ज़रा सी इल्तेजा

दास्तानें कब हुईं मंसूख तेरे नाम की

 

जाग जाओ सोने वालो अपने मीठे ख्वाब से   

घंटियाँ बजने लगी हैं शह्र में आलाम की

 

पीछे पीछे नामाबर…

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राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने- ३९ (जैसे कोई अतीत दबे पाँव आपके पीछे पीछे ही हमसवार है)

Posted on October 13, 2012 at 11:19am 10 Comments

ऐतिहासिक इमारतों में कितना आकर्षण समाया है. इक पूरी ज़िंदगी और ज़माने का कोई थ्री डी अल्बम हों ये जैसे. ख्यालों की लम्बी दौड़ लगानेवालों के लिए गोया ये फंतासी, रूमानियत, त्रासदी, और न जाने किन किन रंगों के तसव्वुरात की कब्रगाह या कोई मज़ार हैं ये इमारतें.

 

ज़िंदगी जीते हुए जितनी हसीन नहीं लगती उससे कहीं अधिक माजी के धुंधले आईने में नज़र आती है. जैसे गर्द से आलूदा किसी शीशे में कोई हसीन सा चेहरा पीछे से झांकता नज़र आ जाए और हम खयालों में मह्व (खोए), हौले से अपनी उंगुलियाँ आगे…

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At 5:36pm on October 11, 2012, DEEPAK SHARMA 'KULUVI' said…

welcome sir

At 2:36pm on October 11, 2012, DEEPAK SHARMA 'KULUVI' said…

aapki rachnaen behatreen hain

At 4:38pm on October 8, 2012, नादिर ख़ान said…

मुझको तिरी बेजारियों का कुछ गिला नहीं

मेरी भी ज़िंदगी अना दिखला के रह गई  

मैं भी न मिल सका उसे पिछले बरसके बाद

तनहा कली कहीं कोई मुरझा के रह गई

बहुत ही उम्दा गज़ल है राज़ भाई  बहुत ख़ूब

At 11:45am on September 21, 2012, प्रमेन्द्र डाबरे said…

राज़ साहब आपने मुझ नाचीज़ की भी रचना पढ़ी मैं धन्य हो गया, आपकी दाद मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है और कुछ और अच्छा लिखने की प्रेरणा अब मुझे मिलती रहेगी.... आपका तलबगार  प्रमेन्द्र डाबरे

At 10:24am on September 21, 2012, लोकेश सिंह said…

राज भाई तहे दिल से मेरा शुकराना स्वीकार करे ,आपके स्नेहिल वचन मुझे और अच्छे काव्य की रचना की प्रेरणा देंगे ,सराहना के लिए बहुत -बहुत साधुवाद ......लोकेश सिंह

At 12:37am on June 27, 2012, Albela Khatri said…

राज़ साहेब, आप नये हैं ये मुझे मालूम नहीं था क्योंकि मैं ख़ुद यहाँ नया हूँ......हा हा हा हा ....लेकिन आपसे पहली मुलाक़ात  अच्छी रही........मुझे  इस महफ़िल में बहुत प्यार और  मुहब्बत से नवाज़ा गया है और आप भी  यहाँ के दोस्ताना माहौल  में रस से सराबोर हो जायेंगे . ऐसा मेरा यक़ीन है

___ओ बी ओ  है ही ऐसी जगह.................आपका  तहेदिल से इस्तेकबाल है भाई साहेब !

At 12:24am on June 27, 2012, Albela Khatri said…

वाह वाह वाह वाह
निहाल कर दिया  साहेब
___जनाब राज़ नवादवी जी.........गज़ब है !

___मुबारक  हो ये उम्दा शाइरी........

At 11:37pm on June 26, 2012, Albela Khatri said…

aapka dili isteqbaal hai janaab !

At 10:11pm on February 5, 2012, Admin said…

 
 
 

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