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सालिक गणवीर
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"जी, उला मिसरा में होती लग रही है.."
Wednesday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हृदय से आभार. आप सहीह कह रहे हैं हमेशा की बजाय "सदा ही" लिखना उचित होगा।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन ।अच्छी गजल हुई है हार्दिक बधाई । मुझे छटे शेर में लय बाधित होती लग रही है । देखिएगा । सादर"
Wednesday
सालिक गणवीर posted a blog post

( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221 2121 1221 212बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझेकल घाट मौत के यूँ उतारा गया मुझे (1)मैं जा रहा था रूठ के लेकिन सदा न दीथा सामने खड़ा तो पुकारा गया मुझे (2)मैं एक साँस में कभी बाहर न आ सकूँदरिया में और गहरे उतारा गया मुझे (3)अक्सर यही हुआ है मैं जब भी दुरुस्त थाबिगड़ा नहीं था फिर भी सुधारा गया मुझे (4)देता रहूँ सबूत मैं कब तक वज़ूद काहर बार हर क़दम पे नक़ारा गया मुझे (5)वो जानते हैं जिस्म मेरा भी है काग़ज़ीपर आग से हमेशा गुज़ारा गया मुझे (6)अहबाब ऐसे हैं तो कमी क्यों अदू की होकरते हैं याद सबको…See More
Wednesday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post बात मुख्तसर सी थी गर कही नहीं होती......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"प्रिय भाई  नाथ सोनांचली जी आदाब ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Apr 1
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post बात मुख्तसर सी थी गर कही नहीं होती......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"उस्ताद - ए - मुहतरम  Samar kabeer साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए हार्दिक आभार। जी मतले का सानी बदलने की कोशिश करता हूँ"
Apr 1
नाथ सोनांचली commented on सालिक गणवीर's blog post बात मुख्तसर सी थी गर कही नहीं होती......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आद सालीक गणवीर भाई जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Mar 30
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"जनाब munish tanha साहिबआदाब तरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद क़ुबूल फरमायें"
Mar 26
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"जनाब  dandpani nahak साहिबआदाब तरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद क़ुबूल फरमायें"
Mar 26
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"मुहतरमा  Richa Yadavजी आदाब तरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद क़ुबूल फरमायें"
Mar 26
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"जनाब  अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिबआदाबतरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद क़ुबूल फरमायें"
Mar 26
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"जनाब  Sanjay Shukla साहिब आदाब तरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद क़ुबूल फरमायें"
Mar 26
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"जनाब   निलेश बरई (नवाज़िश) आदाबतरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें । उस्ताज जी की इस्लाह पर गौर फरमाएं"
Mar 26
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"जनाब  Aazi Tamaam आदाब तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें । उस्ताज जी की इस्लाह पर गौर फरमाएं"
Mar 26
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय भाई   Tasdiq Ahmed Khan  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए बहुत शुक्रियः"
Mar 26
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय भाई  dandpani nahak  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए बहुत शुक्रियः"
Mar 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

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( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221 2121 1221 212

बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे

कल घाट मौत के यूँ उतारा गया मुझे (1)

मैं जा रहा था रूठ के लेकिन सदा न दी

था सामने खड़ा तो पुकारा गया मुझे (2)

मैं एक साँस में कभी बाहर न आ सकूँ

दरिया में और गहरे उतारा गया मुझे (3)

अक्सर यही हुआ है मैं जब भी दुरुस्त था

बिगड़ा नहीं था फिर भी सुधारा गया मुझे (4)

देता रहूँ सबूत मैं कब तक वज़ूद का

हर बार हर क़दम पे नक़ारा गया मुझे…

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Posted on April 7, 2021 at 1:51pm — 3 Comments

बात मुख्तसर सी थी गर कही नहीं होती......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

212 1222 212 1222

बात मुख्तसर सी थी गर कही नहीं होती

लाठी एक तनकर थी अब खड़ी नहीं होती (1)

छोटे छोटे ख़्वाबों का रोज़ क़त्ल करती है

बेटी क्यों ये आसानी से बड़ी नहीं होती (2)

आपसे मिलूँ गर मैं तो उदास होता हूँ

और जब नहीं मिलते तो ख़ुशी नहीं होती (3)

बढ़ नहीं सकी आगे कार ही उमीदों की

लाल ही रही बत्ती वो हरी नहीं होती (4)

ज़िंदगी में दोनों तो साथ साथ रहते हैं

पर गुलाब काँटों में दोस्ती नहीं होती…

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Posted on March 19, 2021 at 11:01pm — 4 Comments

शम्स हरदम छुपा नहीं रहता......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 1212 22/112

शम्स हरदम छुपा नहीं रहता

बादलों से ढका नही रहता (1)

लोग मुझको न ढूँढ पाएँगे

मैं कहाँ हूँ पता नहीं रहता  (2)

इश्क़ में काम इतने होते हैं

फिर कोई काम का नहीं रहता  (3)

लोग आपस में बाँट लेते हैं

मेरा हिस्सा बचा नहीं रहता (4)

हम सभी मिल के एक होते तो

मुल्क इतना बँटा नहीं रहता (5)

लौट आया है सुख मिरे घर में

देख रहता है या नहीं रहता (6)

इक न इक…

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Posted on March 5, 2021 at 4:42am — 5 Comments

यार कब तक डरा करे कोई.........( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 1212 22/112

यार कब तक डरा करे कोई

मौत का सामना करे कोई (1)

मैं तो उनके क़रीब रहता हूँ

दूर मुझसे रहा करे कोई (2)

मुफ़्त में गर किसी को देना हो

मशविर: दे दिया करे कोई (3)

मयकदे से बताओ ऐ यारो

दूर कब तक रहा करे कोई (4)

क्या ज़मींदोज़ करके मानेगा

और कितना दबा करे कोई (5)

वक्त के साथ भर ही जाएँगे

ज़ख़्म जितने दिया करे कोई (6)

यार "सालिक" की अब ये ख़्वाहिश…

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Posted on February 14, 2021 at 10:30pm — 8 Comments

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