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नादिर ख़ान
  • Male
  • Bilaspur,chhattisgarh
  • India
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नादिर ख़ान commented on SALIM RAZA REWA's blog post किसी भी ज़ुल्म कि वो इब्तदा से डरते हैं - सलीम रज़ा रीवा ( ग़ज़ल )
"टाइप करते वक्त गलती हो गई होगी शायद ......"जिन्हे है ख़ौफ़-ए-ख़ुदा वो सज़ा से डरते हैं "   ऐसा लिखना चाह रहे होंगे ...टाइपिंग मिस्टेक हो जाती है ...बाकि जनाब सलीम भाई बेहतर बता सकते है । आदरणीय प्रदीप भाई सही पकड़े हैं ......."
Nov 11
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85
"आदरणीय शेख शहज़ाद साहब सराहनीय कोशिश के लिए मुबारकबाद स्वीकारें ...... "
Nov 11
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85
"आदर्णीय अरुण जी खूबसूरत बाल गीत के लिए मुबारकबाद ....."
Nov 11
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85
"सुंदर बाल गीत है आदरणीय डॉ छोटेलाल जी बधाई स्वीकारें  दूसरे बंध में टंकण त्रुटि रह गई है ...शैर को सैर कर लीजिएगा ऐसी त्रुटियाँ हम भी करते रहते हैं ।"
Nov 10
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85
" आदरणीय  सुरेन्द्र जी आपने छंद बद्ध रचना के माध्यम से बचपन के बहुत से खूबसूरत चित्र खींचे .. इस उम्दा प्रस्तुतिके लिए ढेरों शुभकामनायें ..........."
Nov 10
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85
"अदरणीय योगराज सर  आपकी उन्मुक्त सराहना ने  रचना  को  जीवंत कर दिया  बहुत शुक्रिया आपका ..... "
Nov 10
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85
"मुझे जगाती है मेरी माँ, जब सूरज नभ पर आता I कैसे जगता सूरज मुन्नू, सोच सोच ये चकराता II क्या सूरज की माँ भी घर में, सबसे पहले जगती है Iनभ की दुनिया मुन्नू को तो, एक पहेली लगती है II॥ आदरणीया प्रतिभा जी  बहुत बधाई इस उत्तम बाल …"
Nov 10
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85
"आदरणीय अखिलेश जी बहुत मनभावन रचना हुयी है मुबारकबाद स्वीकारें ....."
Nov 10
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85
"आ. भाई मो. आरिफ जी, सुंदर कटाक्षिकाओं के लिए बहुत मुबारकबाद ॥ आपसे और बेहतर की उम्मीद है  ..... "
Nov 10
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85
"मकड़जाल (अतुकांत रचना)   उसकी उँगलियाँ दिन भर खेलती रहती हैं मोबाइल के बटन्स के साथ न जाने कितने वीडियो गेम्स का मकड़जाल बुना हुआ है, उसकी आँखों और दिमाग में फिर भी हर रात वो मेरे पास आता है फरमाईस के साथ पापा सोना है, कहानी सुनाओ न…"
Nov 10
नादिर ख़ान posted a blog post

क्यूँ है तू बीमार मेरे दिल

(22 22 22 22)क्यूँ है तू बीमार मेरे दिलगम से यूँ मत हार मेरे दिल तय है इक दिन मौत का आनाइस सच को स्वीकार मेरे दिल पहले ही से दर्द बहुत हैंऔर न ले अब भार मेरे दिल सुनकर भाषण होश न खोनाये सब है व्यापार मेरे दिल कौन यहाँ पर कब बिक जाएरहना तू हुशियार मेरे दिल झूठ खड़ा है सीना तानेसच तो है लाचार मेरे दिल दिल के कोने में रहने देप्यार का हक मत मार मेरे दिल होगी उसकी भी मजबूरीपी ले गुस्सा यार मेरे दिल रिश्तों को तू खूब निभानासबसे मिल इक बार मेरे दिल सच्चाई के साथ चलेंगेहो जा तू तैयार मेरे दिल (मौलिक एवं…See More
Nov 8
Gurpreet Singh commented on नादिर ख़ान's blog post क्यूँ है तू बीमार मेरे दिल
"आदरणीय नादिर खान जी ..बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने ..मुबारकबाद क़ुबूल करें"
Nov 4
नादिर ख़ान commented on Samar kabeer's blog post "अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"
"अल्लाह का शुक्र है कल हॉस्पिटल से डिस्चार्ज भी हो गए और आज से ड्यूटी जाना भी शुरू कर दिया है ... "
Nov 3
नादिर ख़ान commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post एक थी एकता (लघुकथा)
"जनाब शेख शहजाद साहब रियाकारी आज हमारे समाज मे किस कदर बढ़ गई है किसी से छुपी  नहीं है आपने बहुत ही खूबसूरत अंदाज़ मे लघुकथा कही ... बहुत मुबारकबाद ...पैनी निगाह बनाये रखिये ..."
Nov 3

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on नादिर ख़ान's blog post क्यूँ है तू बीमार मेरे दिल
"पहले  से ही  दर्द बहुत हैं बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई आद० नादिर खान जी दिल से दाद हाजिर है "
Nov 3
नादिर ख़ान commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत... हर आहट पर यूँ लगता है जैसे हों साजन आये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"खिड़की पर मायूसी पसरीदरवाजों ने आह भरीआँगन ज्यूँ शमशान हुआ हैकोने कोने डाह भरीकब तक साँस दिलासा देगीकब तक पायल भरमायेहर आहट पर यूँ लगता हैजैसे हों साजन आये ...आदरणीय बृजेश जी सुंदर गीत के लिए मुबारकबाद आपको ... "
Nov 3

Profile Information

Gender
Male
City State
Bilaspur,chhattisgarh
Native Place
Bhilai Nager,Chhattisgarh
Profession
govt. employee
About me
simplicity

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क्यूँ है तू बीमार मेरे दिल

(22 22 22 22)

क्यूँ है तू बीमार मेरे दिल

गम से यूँ मत हार मेरे दिल

 

तय है इक दिन मौत का आना

इस सच को स्वीकार मेरे दिल

 

पहले ही से दर्द बहुत हैं

और न ले अब भार मेरे दिल

 

सुनकर भाषण होश न खोना

ये सब है व्यापार मेरे दिल

 

कौन यहाँ पर कब बिक जाए

रहना तू हुशियार मेरे दिल

 

झूठ खड़ा है सीना ताने

सच तो है लाचार मेरे दिल

 

दिल के कोने में रहने दे

प्यार…

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Posted on November 2, 2017 at 12:30am — 8 Comments

कितना सुकून है तेरी यादों की छाँव में

2212 1212 2212 12

कितना सुकून है तेरी यादों की छाँव  में

लगता है जैसे बैठे हैं जन्नत की ठाँव में

 

फिरते हैं अब तलाश में जिसकी यहाँ वहाँ

मिलता था वो सुकूँ कभी पीपल की छाँव  में

 

आँखों को इंतिज़ार है आने का आपके

मुड़कर तो आइये ज़रा अपने ही गाँव में

 

कुछ इस्तेमाल कीजिये अपना दिमाग भी   

किसको मिला है फायदा नफरत के दाँव में

 

अब क्या सुबूत दें तुम्हें जद्दोजहद की हम

छाले पड़े हैं आज तक हम सब…

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Posted on May 15, 2017 at 12:00am — 11 Comments

कर्ज़ का बोझ

वह किसान था

लड़ता रहा उम्र भर

कभी सूखे की मार से  

तो कभी बाढ़ की तबाही से

कभी बेमौसम बारिश से

तो कभी ओला वृष्टि से .....

 

वह किसान था  

सहता रहा उम्र भर

हर तक़लीफ

हर गम

ताकि भरा रहे पेट दूसरों का  .....

 

वह किसान था  

करता रहा गुज़ारा

बचे खुचे पर

वह सीख गया था, एडजस्ट करना

प्रक्रति के साथ......

 

वह किसान था  

खुश रहता था  

हर परिस्थिति…

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Posted on August 11, 2016 at 11:00am — 5 Comments

तरही ग़ज़ल

जब कदम बढ़ गए सरकशी की तरफ

आदमी चल पड़ा  गुमरही की तरफ

 

मुतमइन हैं सभी अब अंधेरों में भी

देखता कौन है रोशनी की तरफ 

 

पागलों की तरह भागते हम रहे

हमने देखा नही ज़िंदगी की तरफ

 

दुश्मनी कर चुके आप सबसे बहुत

कुछ कदम तो चलें दोस्ती की तरफ

 

सबने देखी मेरी मुस्कुराहट मगर

किसने देखा मेरी बेबसी की तरफ

 

बोझ गम का लिए क्यूँ खड़े हो मियां

इक पहल तो करो तुम खुशी की तरफ

 

आस…

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Posted on August 3, 2016 at 11:00am — 7 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 10:50pm on April 20, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय नादिर जी आपका दोस्त बनना मेरे लिए सुखद अहसास वाला है सादर
At 9:34pm on February 3, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीय नादिर खान सर, ओबीओ परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें।
At 5:50pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

 आपका हार्दिक आभार आदरणीय  

At 10:05pm on April 3, 2014, Mukesh Verma "Chiragh" said…

नादिर जी
आपको मित्र रूप मे पाकर मुझे बहुत खुशी हुई.
खुश रहिए.. धन्यवाद

At 1:08pm on January 4, 2014, Razia mirza said…

बहोत बहोत शुक्रिया ओ बी ओ परिवार में मुझे शामिल करने के लिये।

At 7:58pm on November 20, 2013, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार एवं मेरी मित्र मंडली मे आपका हार्दिक स्वागत है । 

At 7:07pm on April 23, 2013, Usha Taneja said…

मित्रता स्वीकार के लिए हार्दिक धन्यवाद! 

At 11:51pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 12:55pm on February 3, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

सालगिरह मुबारक हो, अपका और हमारा स्नेह और सहयोग बना रहे, यही दुआ करते है 

At 3:08pm on December 9, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

बे ज़ार= अप्रसन्न, क्रोधी 

 
 
 

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