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नादिर ख़ान
  • Male
  • Bilaspur,chhattisgarh
  • India
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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आप सभी हाजरात का गज़ल तक आने और हौसला अफजाई करने का बहुत बहुत शुक्रिया "
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय कृष जी गज़ल का उम्दा प्रयास  हुआ बधाई स्वीकारें प्रयासरत रहें ..."
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीया राजेश कुमारी जी उम्दा गज़ल की बधाई गिरः भी खूब लगाई बहुत मुबारकबाद "
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"संजय शुक्ला जी बहुत खूब "
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब तसदीक साहब  उम्दा ग़ज़ल हुयी ढेरों मुबारकबाद आपको ..."
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब अमीरुद्दीन साहब ग़ज़ल खूब हुयी मुबारकबाद ..."
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब समर कबीर साहब आपकी उम्दा इस्लाह का बहुत शुक्रिया ....."
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय dandpani nahak जी अच्छी गजल हुयी मुबारकबाद आपको 3 रे शेर के उला में लेकिन की जगह मुझको और सानी में हमसे के जगह मुझसे करके देखें  और 4 थे शेर का सानी अगर इस तरह लिखा जाए "तेरी तस्वीर इन आँखों से छुपाई न गई " सादर ..."
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदमी सब ही बराबर हैं ख़ुदा क्यों फिर भीमुफ़लिसी और अमीरी की ये खाई न गई । ख़ूब कहा आदरणीय दिनेश जी बधाई स्वीकारें |मतला और बेहतर किया जा सकता है सादर"
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय अमित जी गजल की अच्छी कोशिश हुयी है बधाई स्वीकारें |"
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय नाथ जी गज़ल के लिए दिली मुबारकबाद पेश है ।"
Feb 25
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय नीलेश जी उम्दा गज़ल के लिए मुबारकबाद पेश है आदरणीय समर साहब ने ख़ूब इसलाह की ।"
Feb 25
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"हमसे दूरी कभी रिश्तों की मिटाई न गई आग रोशन जो  अना की थी  बुझाई न गई ...1   अक़्ल ने मेरी ये कोशिश तो बहुत की थी मगर दिल से तस्वीर तेरी मुझसे हटाई न गई ...2   तुमने वादों की बहुत लोरी सुनाई लेकिन तुमसे शाइस्तगी वादों की निभायी न…"
Feb 25
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
""हार का सामना करने की तवानाई हो " सर क्या ये प्रयोग उचित है "
Jan 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"उम्दा इस्लाह हुयी .... "
Jan 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीया ऋचा जी गज़ल की  उम्दा कोशिश के लिए बधाई स्वीकारें । "
Jan 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Bilaspur,chhattisgarh
Native Place
Bhilai Nager,Chhattisgarh
Profession
govt. employee
About me
simplicity

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नादिर ख़ान's Blog

झूम के देखो सावन आया ....

खुशियों की सौगातें लाया

झूम के देखो सावन आया

 

चंचल सोख़ हवा इतराई

बारिश की बौछारें लाई

महक उठा अब मन का आँगन

भीनी भीनी सी खुशबू छाई

 

देख छटा हर मन हर्षाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

 

मन की बगिया महक रही है

पंछी बन के चहक रही है

इच्छाओं को पंख मिल गए

दिल की धड़कन बहक रही है

 

मौसम में है खुमार छाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

धरती बाहों को…

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Posted on August 14, 2018 at 11:21pm — 6 Comments

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

      (122  122  122  122)

कोई बात दिल में छुपाते नहीं हैं

मगर आँसुओं को दिखाते नहीं हैं

 

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

मिले ज़ख्म कितने गिनाते नहीं हैं

 

ये बातें हैं दिल की सुनो तुम भी…

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Posted on February 18, 2018 at 8:00pm — 6 Comments

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

(1222 1222 122)

जिन्हें आने की फुरसत ही नहीं है

उन्हे मिलने की हसरत ही नहीं है

 

अगर तुझमें शराफत ही नहीं है

मुझे तेरी ज़रूरत ही नहीं है

 

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

ये इंसानों की फ़ितरत ही नहीं है

 

उगलते हैं ज़ुबाँ से आग अपनी

बची इनमें शराफत ही नहीं है

 

चलो छोड़ो जुदा थी राह अपनी

हमें तुमसे शिकायत ही नहीं है

 

असल मुद्दों से ही भटकाये रखना

सियासत की रिवायत ही नहीं…

Continue

Posted on February 4, 2018 at 6:31pm — 10 Comments

हाइकू

1

इंसानी भूल

लापरवाह लोग

धूल ही धूल

2

प्यारी सी धुन

सुबह का मौसम

प्यार से सुन 

3…

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Posted on December 29, 2017 at 10:30pm — 4 Comments

Comment Wall (14 comments)

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At 11:00pm on August 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नादिर खान साहब आदाब , बहुत शुक्रिया आपकी हौसलाअफजाई का
At 11:34pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय नादिर ख़ान साहब
At 10:50pm on April 20, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय नादिर जी आपका दोस्त बनना मेरे लिए सुखद अहसास वाला है सादर
At 9:34pm on February 3, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीय नादिर खान सर, ओबीओ परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें।
At 5:50pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

 आपका हार्दिक आभार आदरणीय  

At 10:05pm on April 3, 2014, Mukesh Verma "Chiragh" said…

नादिर जी
आपको मित्र रूप मे पाकर मुझे बहुत खुशी हुई.
खुश रहिए.. धन्यवाद

At 1:08pm on January 4, 2014, Razia mirza said…

बहोत बहोत शुक्रिया ओ बी ओ परिवार में मुझे शामिल करने के लिये।

At 7:58pm on November 20, 2013, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार एवं मेरी मित्र मंडली मे आपका हार्दिक स्वागत है । 

At 7:07pm on April 23, 2013, Usha Taneja said…

मित्रता स्वीकार के लिए हार्दिक धन्यवाद! 

At 11:51pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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"बहुत ही भावपूर्ण ग़ज़ल कही है आदरणीय..बधाई"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on gumnaam pithoragarhi's blog post अब क्या करें
"वाह वाह खूब ग़ज़ल कही आदरणीय गुमनाम जी...बधाई"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पहरूये ही सो गये हों जब चमन के- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"बहुत ही खूब ग़ज़ल कही आदरणीय... बधाई"
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Aazi Tamaam commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-क्या करे कोई
"अच्छी ग़ज़ल है आदरणीय रचना जी गुस्ताखी माफ़ हो वैसे तो मैं अभी इस काबिल नही कि राय दे सकूँ फ़िर भी…"
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Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-क्या करे कोई
"आदरणीय सर्, सादर नमस्कार।  हाँ जी सर्, फिर से कोशिश करती हूँ।"
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Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल ~ "ठहर सी जाती है"
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