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नादिर ख़ान
  • Male
  • Bilaspur,chhattisgarh
  • India
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Latest Activity

नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"प्रदत्त विषय पर सार्थक रचना हेतु ढेरों शुभकामनायें  जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहब ..."
Jan 12
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"प्रदत्त विषय पर सार्थक रचना हुयी आदरणीय अखिलेश जी बधाई।"
Jan 12
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"अच्छी ग़ज़ल हुयी है जनाब तस्दीक साहब ...मुबारकबाद कलम स्त्रीलिंग है अपना को अपनी कर लें.."
Jan 12
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत ही उम्दा प्रस्तुति आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी उत्तम रचना कर्म के लिए बधाई स्वीकारें। .."
Jan 12
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"सुख है ... (अतुकांत)   सपनों को पालने में खुशियों को बाँटने में कठिन परिश्रम के फल में सुख है... भूखे को खाना खिलाने में ज़रूरतमंद की सहायता में गिरते हुये को संभालने में सुख है …. बड़ों के आदर में छोटों से हमदर्दी में बच्चों के साथ बच्चा…"
Jan 12
नादिर ख़ान commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल नम्बर 2,कुछ नये क़वाफ़ी के साथ ।
"चूस लेती है बदन का ये लहू शाइरी भी कितनी ख़ूँँ  आशाम है ...सही फ़रमाया जनाब  उसको छूने से भी मुझको डर लगे इस क़दर नाज़ुक वो गुल अंदाम है... ग़ज़ब की कारीगरी  उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद जनाब समर साहब |"
Jan 1
नादिर ख़ान commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- असर होता है // दिनेश कुमार
"वो न सह पायेगा इक पल भी हक़ीक़त की तपिश जिसके ख़्वाबों का महल मोम का घर होता है.हम फ़क़ीरों को ज़ियादा की नहीं चाह 'दिनेश'जितना हासिल है, बस उतने में गुज़र होता है. उम्दा ग़ज़ल हुयी है आदरणीय दिनेश कुमार जी मुबारकबाद स्वीकारें। ...."
Jan 1
नादिर ख़ान commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post ओ बो परिवार को नए साल की मंगल कामना - 'बरवै' छंद में
"सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय डॉ गोपाल नारायन जी, नया वर्ष मंगलमय हो। ..."
Jan 1
नादिर ख़ान commented on नादिर ख़ान's blog post हाइकू
"आदरणीय अजय तिवारी जी आपने कोशिश को सराहा बहुत शुक्रिया आपका, रचनाकर्म सार्थक हुआ ...."
Dec 31, 2017
Ajay Tiwari commented on नादिर ख़ान's blog post हाइकू
"आदरणीय नादिर साहब, अक्सर हाइकू गद्य भर हो कर रह जाते हैं लेकिन आप ने काव्यात्मकता को सुरक्षित रखते हुए खूबसूरत हाइकू प्रस्तुत किये हैं. हार्दिक बधाई."
Dec 30, 2017
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-33 (विषय: नीड़ की ओर)
"आदरणीय महेंद्र जी समसामयिक विषय पर उम्दा भावपूर्ण रचना कही..... आपने जिस दर्द को महसूस किया वो आपके हृदय की  संवेदन शीलता को बयां करता है....एक सवाल मन मे उठ रहा है क्या इस रचना को और छोटा किया जा सकता था?"
Dec 30, 2017
नादिर ख़ान commented on नादिर ख़ान's blog post हाइकू
"जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहब आपने बहुत बारीकी से रचना को पढ़ा.... रचना पर  समय देने और हौसला अफजाई का शुक्रिया ..."
Dec 30, 2017
Mohammed Arif commented on नादिर ख़ान's blog post हाइकू
"आदरणीय नादिर खान साहब आदाब,                              इंसानी करतूत, मौसम की चाल और बढ़ते ठंड के प्रकोप को दर्शाते बेहतरीन और सटीक हाकु के लिए दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
Dec 30, 2017
नादिर ख़ान posted a blog post

हाइकू

1इंसानी भूललापरवाह लोगधूल ही धूल2प्यारी सी धुनसुबह का मौसमप्यार से सुन 3सुर से सुरदूर हुये शिकवेगीत मधुर  4धुंध ही धुंधशहर का ज़हरधुए की गंध5बढ़ती ठण्डकंपकंपाते लोगजारी है दण्ड6ज़ख़्मी है सीनाहौले से पग बढ़ाछोड़ दे कीना    { कीना = द्वेष, बैर, दुर्भाव}(मौलिक और अप्रकाशित)See More
Dec 30, 2017
Tasdiq Ahmed Khan commented on नादिर ख़ान's blog post क्षणिकाएँ
"जनाब नादिर साहिब ,गज़ब की छड़िकाएँ हुई हैं ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
Dec 28, 2017
Mahendra Kumar commented on नादिर ख़ान's blog post क्षणिकाएँ
"अच्छी क्षणिकाएँ हैं आ. नादिर भाई. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Dec 27, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
Bilaspur,chhattisgarh
Native Place
Bhilai Nager,Chhattisgarh
Profession
govt. employee
About me
simplicity

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हाइकू

1

इंसानी भूल

लापरवाह लोग

धूल ही धूल

2

प्यारी सी धुन

सुबह का मौसम

प्यार से सुन 

3…

Continue

Posted on December 29, 2017 at 10:30pm — 4 Comments

क्षणिकाएँ

1.

शायद आज बच जाओ

साम दाम दण्ड भेद से

मगर एक कैमरा

नज़र रखे है

हर करतूत पर

बिना साम दाम दण्ड भेद के .....

 

2.

मत उलझाइये खेल

मत कीजिये घाल-मेल

सीधी है ... सीधी ही रहने दीजिये

जिंदगी की रेल

 

3.

उठ रहे हैं बच्चे

सूरज के जागने से पहले

ठिठुर रहे हैं बच्चे

पीठ में बोझ लिए

झेल रह हैं बच्चे

भविष्य का दण्ड…

Continue

Posted on December 25, 2017 at 1:30pm — 10 Comments

बीमार?

उसे होश में आया देख डॉक्टर का नुमाइंदा पास आया और फरमान सुनाने लगा । अपने घर बात करके  15 हज़ार रुपये काउंटर में जमा करवा दो बाकि के पैसे डिस्चार्ज के समय जमा करा देना । मगर साहब मै बीमार नहीं, बस दो दिन से भूखा हूँ। उसकी आवाज़ घुट के रह गई, नुमाइंदा जा चुका था ।

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on December 9, 2017 at 10:00pm — 12 Comments

क्षणिकाएँ

     

1. 

उतारिए चश्मा

पोछिये धूल

चीज़ें खुदबखुद... साफ़ हो जाएँगी ।

 

 

2.

ज़रूरी है… सफाई अभियान

शुरुआत कीजिये

दिल से ....

 

3.

गंदगी सिर्फ मुझमे ही नहीं

तुम में भी है मित्र

ज़रा अंदर तो झाँको ....

 

4.

जब ईमान गिरवी हो

ज़मीर बिक चुका हो

कौन उठायेगा बीड़ा

समाज की सफाई का ....

 

5.

साफ़ नहीं होती गंदगी

बार बार उंगली दिखाने…

Continue

Posted on November 26, 2017 at 8:00pm — 10 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 10:50pm on April 20, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय नादिर जी आपका दोस्त बनना मेरे लिए सुखद अहसास वाला है सादर
At 9:34pm on February 3, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीय नादिर खान सर, ओबीओ परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें।
At 5:50pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

 आपका हार्दिक आभार आदरणीय  

At 10:05pm on April 3, 2014, Mukesh Verma "Chiragh" said…

नादिर जी
आपको मित्र रूप मे पाकर मुझे बहुत खुशी हुई.
खुश रहिए.. धन्यवाद

At 1:08pm on January 4, 2014, Razia mirza said…

बहोत बहोत शुक्रिया ओ बी ओ परिवार में मुझे शामिल करने के लिये।

At 7:58pm on November 20, 2013, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार एवं मेरी मित्र मंडली मे आपका हार्दिक स्वागत है । 

At 7:07pm on April 23, 2013, Usha Taneja said…

मित्रता स्वीकार के लिए हार्दिक धन्यवाद! 

At 11:51pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 12:55pm on February 3, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

सालगिरह मुबारक हो, अपका और हमारा स्नेह और सहयोग बना रहे, यही दुआ करते है 

At 3:08pm on December 9, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

बे ज़ार= अप्रसन्न, क्रोधी 

 
 
 

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"आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन।बढ़िया अतुकांत, भाव सम्प्रेषण उत्तम। इस कविता पर आपको अनन्त बधाई।"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )
"आद0 तस्दीक अहमद साहिब, बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने,बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर।"
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सतविन्द्र कुमार commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
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"आदरणीय सलीम जी उम्दा ग़ज़ल, बहुत बहुत मुबारकबाद "
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