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नादिर ख़ान
  • Male
  • Bilaspur,chhattisgarh
  • India
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नादिर ख़ान commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर
"जो थे साहिल पे तमाशाई यही कहते थे, डूबने वाले को अब तक तो उभर जाना था। बज़्मे अग्यार में है जलवा नुमाई तेरी , इस तग़ाफ़ुल पे तेरे मुझको तो मर जाना था। खूबसूरत गज़ल के लिए ढेरों मुबारकबाद आदरणीय रवि शुक्ला साहब "
Mar 3
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"गज़ल पसंद करने हेतु आपका हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी साहब "
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब अनीस साहब आपको गज़ल पसंद आई लेखन सार्थक हुआ बहुत शुक्रिया "
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया आदरणीय मिथिलेश वामनकर साहब ।"
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"बहुत शुक्रिया जनाब आसिफ ज़ैदी साहब "
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ आपका जनाब तसदीक़ साहब "
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"ज़र्रानवाजी का शुक्रिया जनाब बशर साहब "
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"शुक्रिया जनाब शिज्जु भाई "
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"हौसला अफजाई का शुक्रिया जनाब मिर्ज़ा बेग साहब "
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"बहुत शुक्रिया  जनाब बलराम धाकड़ साहब ...."
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"बहुत खूब जनाब समर साहब जितनी भी तारीफ करें कम है ।"
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब सुरखाब साहब शानदार गज़ल के लिए आपको ढेरों मुबारकबाद "
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय बासुदेव साहब सार्थक प्रयास के लिए बधाई स्वीकारें  बाकी गुणिजन अपनी राय दे ही चुके हैं प्रयासरत रहें ।"
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"इश्क़ में यार मुझे काम ये कर जाना थाक्यों रहा हद में मुझे हद से गुज़र जाना था आदरणीय शरीफ साहब ढेरों मुबारकबाद खूबसूरत गज़ल के लिए "
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"नाम तक याद नहीं अब तो किसी को उनकेजिन शहीदों को यहाँ हमने अमर जाना था ज़मीनी सच्चाई है साहब उम्दा गज़ल के लिए मुबारकबाद ....."
Feb 23
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"तर्क ही कर के तअललुक को अगर जाना था lखत्म कर के तुम्हें उलफत का सफ़र जाना था l . किस लिए डाली है इस दिल पे निगाहे उलफतगर बचा कर ही तुम्हें मुझ से नज़र जाना था जनाबी तसदीक साहब बहुत ही उम्दा गज़ल कही आपने पूरी गज़ल दिल में उतर गई बहुत मुबारकबाद…"
Feb 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Bilaspur,chhattisgarh
Native Place
Bhilai Nager,Chhattisgarh
Profession
govt. employee
About me
simplicity

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नादिर ख़ान's Blog

झूम के देखो सावन आया ....

खुशियों की सौगातें लाया

झूम के देखो सावन आया

 

चंचल सोख़ हवा इतराई

बारिश की बौछारें लाई

महक उठा अब मन का आँगन

भीनी भीनी सी खुशबू छाई

 

देख छटा हर मन हर्षाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

 

मन की बगिया महक रही है

पंछी बन के चहक रही है

इच्छाओं को पंख मिल गए

दिल की धड़कन बहक रही है

 

मौसम में है खुमार छाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

धरती बाहों को…

Continue

Posted on August 14, 2018 at 11:21pm — 6 Comments

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

      (122  122  122  122)

कोई बात दिल में छुपाते नहीं हैं

मगर आँसुओं को दिखाते नहीं हैं

 

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

मिले ज़ख्म कितने गिनाते नहीं हैं

 

ये बातें हैं दिल की सुनो तुम भी…

Continue

Posted on February 18, 2018 at 8:00pm — 6 Comments

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

(1222 1222 122)

जिन्हें आने की फुरसत ही नहीं है

उन्हे मिलने की हसरत ही नहीं है

 

अगर तुझमें शराफत ही नहीं है

मुझे तेरी ज़रूरत ही नहीं है

 

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

ये इंसानों की फ़ितरत ही नहीं है

 

उगलते हैं ज़ुबाँ से आग अपनी

बची इनमें शराफत ही नहीं है

 

चलो छोड़ो जुदा थी राह अपनी

हमें तुमसे शिकायत ही नहीं है

 

असल मुद्दों से ही भटकाये रखना

सियासत की रिवायत ही नहीं…

Continue

Posted on February 4, 2018 at 6:31pm — 10 Comments

हाइकू

1

इंसानी भूल

लापरवाह लोग

धूल ही धूल

2

प्यारी सी धुन

सुबह का मौसम

प्यार से सुन 

3…

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Posted on December 29, 2017 at 10:30pm — 4 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 10:50pm on April 20, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय नादिर जी आपका दोस्त बनना मेरे लिए सुखद अहसास वाला है सादर
At 9:34pm on February 3, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीय नादिर खान सर, ओबीओ परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें।
At 5:50pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

 आपका हार्दिक आभार आदरणीय  

At 10:05pm on April 3, 2014, Mukesh Verma "Chiragh" said…

नादिर जी
आपको मित्र रूप मे पाकर मुझे बहुत खुशी हुई.
खुश रहिए.. धन्यवाद

At 1:08pm on January 4, 2014, Razia mirza said…

बहोत बहोत शुक्रिया ओ बी ओ परिवार में मुझे शामिल करने के लिये।

At 7:58pm on November 20, 2013, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार एवं मेरी मित्र मंडली मे आपका हार्दिक स्वागत है । 

At 7:07pm on April 23, 2013, Usha Taneja said…

मित्रता स्वीकार के लिए हार्दिक धन्यवाद! 

At 11:51pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 12:55pm on February 3, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

सालगिरह मुबारक हो, अपका और हमारा स्नेह और सहयोग बना रहे, यही दुआ करते है 

At 3:08pm on December 9, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

बे ज़ार= अप्रसन्न, क्रोधी 

 
 
 

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"आदाब। बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब समर कबीर साहिब।"
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"समस्त परिवारजन को रंगोत्सव पर हार्दिक बधाइयां और शुभकामनाएं।"
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जनाब गणेश जी "बाग़ी" साहिब आदाब, बहुत-बहुत  मुबारकबाद ।"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post नवगीत-वेदना ने नेत्र खोले-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद आदरणीय समर कबीर जी..आपको भी होली की शुभकामनाएं.."
8 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (यूँ ही तो न मायूस हम हो गए)
"जनाब ब्रजेश कुमार साहिब  , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
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सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जुगे जुगे जियऽ ओबीओ के लाल !! .. जै जै .. जै हो.. "
10 hours ago

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