For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Mahendra Kumar
  • Male
  • India
Share

Mahendra Kumar's Friends

  • Ajay Tiwari
  • Samar kabeer
  • vijay nikore
  • नादिर ख़ान
  • rajesh kumari
  • मिथिलेश वामनकर
  • योगराज प्रभाकर
 

Mahendra Kumar's Page

Latest Activity

Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"प्रदत्त विषय पर एक अलग एवं ज्वलंत विषय को छुआ है आपने आदरणीय वीर मेहता जी. इस हेतु मेरी तरफ़ से ढेरों बधाई स्वीकार कीजिए. वैसे अन्त यदि कुछ और होता तो मेरी नज़र में यह एक उम्दा लघुकथा होती. साथ ही, अगर अन्त यही रखना था तो नायक और नायिका के बीच प्रेम…"
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"1. जबाब = जवाब 2. "फ़रियाद" स्त्रीलिंग है इसलिए उसके साथ "कैसा" की जगह "कैसी" आना चाहिए. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"उत्साहवर्धक टिप्पणी हेतु हृदय से आभारी हूँ आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय विनय कुमार जी. हार्दिक आभार. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"हृदय से आभारी हूँ आदरणीया प्रतिभा जी. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीय ओमप्रकाश जी, मेरे हिसाब से "रेडिएशन" शीर्षक आपकी लघुकथा के लिए उत्तम रहेगा. संभवतः आपको भी पसन्द आये. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया बबिता जी. हार्दिक आभार. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"लघुकथा पसन्द करने के लिए आपका हृदय से आभारी हूँ आदरणीय ओमप्रकाश जी. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"//''नीचे की अदालतें तो देख लीं और ऊपर कोई अदालत है ही नहीं ।''// बहुत ख़ूब. न्याय व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया है आपने आदरणीया प्रतिभा जी. इस बढ़िया लघुकथा हेतु ढेरों बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"प्रदत्त विषय पर अच्छी लघुकथा प्रस्तुत की है आपने आदरणीय कनक हरलालका जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. वैसे शुरू के हिस्से को थोड़ा सम्पादित किया जा सकता है. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"प्रदत्त विषय पर बहुत ही शानदार लघुकथा कही है आपने आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी. शीर्षक उम्दा है और प्रस्तुति लाजवाब. मेरी तरफ़ से ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए. 1. //समस्याओं से रोज़ ही दो-चार होना पड़ता है।// 2.…"
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"लघुकथा का अच्छा प्रयास है आदरणीया अनीता जी. आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी की बात से मैं भी सहमत हूँ. अभी यह रचना केवल रिपोर्ट सरीखी ही है. इसे लघुकथा में ढालने की आवश्यकता है. उनकी बातों का संज्ञान लीजिए. शीर्षक भी बेहतर हो सकता है. इस प्रस्तुति पर…"
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"ऑनलाइन होने वाले फ्रॉड पर अच्छी लघुकथा कही है आपने आदरणीय मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.   1. आपकी कथा में 600 से ज़्यादा शब्द हैं. संपादन के द्वारा इन्हें कम करने की आवश्यकता है. 2. आपकी लघुकथा में कालखण्ड भी दोष…"
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी, प्रदत्त विषय पर अच्छी लघुकथा कही है आपने. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. थोड़े से संपादन की आवश्यकता है, मैं अपनी तरफ़ से छोटा सा प्रयास प्रस्तुत कर रहा हूँ.  घर के गेट का दरवाज़ा अंदर से बिना लॉक किए ही वह सोफा…"
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"बढ़िया लघुकथा है आदरणीय विनय कुमार जी. समाज सुधार का रास्ता निश्चित पर बेहद कठिन है. तथाकथित ठेकेदार इसे आसानी से पचा नहीं पाते. इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. 1. //फिर वह रज्जब के आत्मविश्वास से वह अपने आप को तसल्ली दे देते// 2. //अब…"
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"प्रदत्त विषय पर अच्छी लघुकथा प्रस्तुत की है आपने आदरणीया बबिता जी. आजकल शिक्षा व्यवस्था में यही सब हो रहा है. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. वैसे लघुकथा में अभी सुधार की काफी गुंजाइश है. कुछ बिन्दुओं की तरफ़ आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहूँगा…"
Oct 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

ग़ज़ल : बात करते हैं मगर मर के दिखाते भी नहीं

बह्र : 2122 1122 1122 112/22

अश्क़ आँखों में कभी भूल के लाते भी नहीं

और बर्बादियों का शोक मनाते भी नहीं

पूछ कर ज़िन्दगी में लोग जो आते भी नहीं

इतने बेदर्द हैं जाएँ तो बताते भी नहीं

वो ख़ुशी थी कि जिसे रास नहीं आए हम

और वो ग़म हैं जो हमें छोड़ के जाते भी नहीं

लोग चाहत का गला घोंट तो देते हैं मगर

दफ़्न करते भी नहीं और जलाते भी नहीं

जाइए आपका मैख़ाने में क्या काम है जब

ख़ुद भी पीते नहीं औरों को पिलाते भी…

Continue

Posted on October 26, 2018 at 11:52am — 21 Comments

धार्मिक पशु (लघुकथा)

उसका सपना था कि दुनिया ख़त्म हो जाए और दुनिया ख़त्म गयी। अब अगर कोई बचा था तो सिर्फ़ वो और उसकी टूटी-फूटी मोहब्बत।

"अब तो इसे मुझसे बात करनी ही पड़ेगी।" खण्डहर बन चुके शहर की वीरान सड़क पर खड़े उस शख़्स ने कहा।

वह उससे बेपनाह मुहब्बत करता था। वह चाहता था कि वो उसे देखे, उसे समझे, उससे बात करे मगर वो हमेशा ही किसी न किसी और को ढूँढ लेती थी। वह इस बात से हमेशा दुःखी रहता था कि उसे छोड़कर वो बाकी सबसे बात करती है मगर उससे नहीं। उसने कहीं पढ़ा था कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है।…

Continue

Posted on August 10, 2018 at 8:30am — 10 Comments

कवि (अतुकान्त कविता)

संवेदनाओं की पथरीली चोटी पर बैठकर

अपने रिसते हुए घावों को देखता हुआ

ये कौन है

जो कभी कुत्ते की तरह

जीभ से उन्हें चाटता है

तो कभी मुट्ठी में नमक भर कर

उनमें उड़ेल देता है

और फिर एक तपस्वी की तरह

ध्यान लगाकर सुनता है

अपनी आहों और कराहों को?

पत्थरों को उठा कर

अपने लहू में डुबा कर

भावनाओं की लहरों पर बैठे हुए

कौन लिख रहा है उनसे

अपना मृत्यु लेख?

किसी फन्दे पर लटक कर

एक पल में शान्ति से गुज़र जाने की अपेक्षा…

Continue

Posted on June 27, 2018 at 9:03am — 4 Comments

शहीद (लघुकथा)

संसद भवन के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे हुए उन युवाओं को दो महीनों से अधिक का समय हो गया था पर न तो किसी अख़बार में इसकी कोई ख़बर थी और न ही न्यूज़ चैनल्स पर चर्चा। 

“इन बेरोज़गार लौंडों के पास अब कोई काम नहीं रह गया है।” बड़ी-बड़ी मूँछों वाले उस स्थानीय बुज़ुर्ग ने अपने पास खड़े अधेड़ से कहा। “कुछ नहीं मिला तो सरकार को ही बदनाम करने में लग गए।”

“कह क्या रहे हैं ये लोग?” अधेड़ ने जिज्ञासा व्यक्त की।

“कह रहे हैं कि जब देश की जनता भूखों मर रही है तो कोई…

Continue

Posted on June 25, 2018 at 4:30pm — 9 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -7 ( गरीबों की लाशों में ढूंढें ख़ज़ाना)
"बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम जनाब समर कबीर साहब। आपकी इस्लाह सर आंखों पर। शह्र के मामले में आपकी नसीहत…"
40 minutes ago
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -7 ( गरीबों की लाशों में ढूंढें ख़ज़ाना)
"जनाब क़मर जौनपुरी साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ' कहे ना हक़ीक़त…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -7 ( गरीबों की लाशों में ढूंढें ख़ज़ाना)
"//क्या यह ग़ज़ल के क्षेत्र में बड़ा दोष है या चलने लायक है।// 'शहर' आम बोल में वो लोग बोलते…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post सन्नाटा  -  लघुकथा  -
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,हक़ीक़त से क़रीब, उम्दा तंज़,वाह, बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर…"
2 hours ago
Vivek Raj commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -6 ( चल गया जादू सभी अंधे औ बहरे हो गए)
"जनाब क़मर साहब अच्छी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद कुबूल फरमाएं"
4 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post सन्नाटा  -  लघुकथा  -
"हार्दिक आभार आदरणीय बबिता गुप्ता जी।"
6 hours ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७१
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, आदाब. ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफज़ाई का तहेदिल से शुक्रिया. सादर "
7 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -7 ( गरीबों की लाशों में ढूंढें ख़ज़ाना)
"हौसला आफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया जनाब तेज वीर सिंह साहब।"
7 hours ago
Munavvar Ali 'taj' replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"मुहतरम राणा प्रताप साहिब गुज़ारिश है कि ग़ज़ल नं. 33 के सातवें शेर के सानी मिसरे में लफ्ज़ '…"
7 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

"अहसास"

ज़िंदगी दी है खुदा ने,मुस्कुराने के लिएभूलना लाज़िम है तुमको,याद आने के लिए बेखयाली मे कदम फ़िर, खींच…See More
7 hours ago
babitagupta commented on TEJ VEER SINGH's blog post सन्नाटा  -  लघुकथा  -
"बेहतरीन रचना के माध्यम से कटाक्ष करती , कि हम भावी पीढी को किस तरह का संस्कार दे रहे है।हार्दिक…"
8 hours ago
babitagupta commented on babitagupta's blog post बदहाल जनता (तुकांत अतुकांत कविता)
"नमस्कार! , आदरणीय तेजवीर सरजी, समर सरजी, राजेश सरजी, रचना पर टिप्पणी करने व पसंद करने के लिए…"
8 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service