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Mahendra Kumar
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Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post एक महान जासूसी लेखक
"आपने बिलकुल सही कहा आ.राजेश मैम। लघुकथा को पसन्द करने के लिए आपका हार्दिक आभार। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर।"
Apr 13
Mahendra Kumar commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -गली गली में कुछ अँधियारे, घूम रहे हैं - ( गिरिराज )
"कटा पेड़ धरती से, तो वो सूखेगा ही भ्रम में हैं, जो बन गुब्बारे घूम रहे हैं ...वाह! बहुत बढ़िया ग़ज़ल है आदरणीय गिरिराज सर। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Apr 13
Mahendra Kumar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ये तमाशा तो मेरे ज़ह’न के अन्दर निकला, ग़ज़ल नूर की
"बहुत ही शानदार ग़ज़ल है आदरणीय नीलेश जी। सभी शेर एक से बढ़कर एक हैं। व्यक्तिगत तौर पर इस ग़ज़ल में 'तो' के प्रयोग से मैं सहमत हूँ। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Apr 13
Mahendra Kumar commented on rajesh kumari's blog post खड़े तनकर तुम्हारे सामने दीवार भी हम थे (ग़ज़ल 'राज')
"बढ़िया ग़ज़ल है आदरणीय राजेश मैम। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। आदरणीय समर सर की टिप्पणी से बहुत कुछ सीखने को मिला। सादर।"
Apr 13
Mahendra Kumar commented on ASHUTOSH JHA's blog post "मेरे दोस्त"
"बढ़िया कविता है आदरणीय आशुतोष जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Apr 13
Mahendra Kumar commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल नंबर-3
"आदरणीय समर कबीर सर, बहुत बढ़िया ग़ज़ल लगी आपकी। शेर दर शेर मुबारक़बाद पेश करता हूँ। दूसरा शेर विशेष रूप से पसन्द आया। इसके लिए अलग से विशेष बधाई। पाँचवे शेर के ऊला में टंकण त्रुटि से 'यारों' की जगह 'यारो' हो गया है। देख लीजिएगा।…"
Apr 13
Mahendra Kumar commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -जब ग़लत हो नामवर, तो चुप रहें - ( गिरिराज )
"आदरणीय गिरिराज सर, बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। दिल से बधाई प्रेषित है। सादर।"
Apr 13
Mahendra Kumar commented on सतविन्द्र कुमार's blog post याद मेरी दिला रही होगी (गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा
"बढ़िया ग़ज़ल है आदरणीय सतविंद्र जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Apr 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर and Mahendra Kumar are now friends
Apr 13

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Mahendra Kumar's blog post एक महान जासूसी लेखक
"अर्थात उस लेखक ने कोई सबूत भी नहीं छोड़ा अपनी हत्या का ...वाह्ह्हह्ह लघु कथा अच्छी लगी ..कुछ अलग .. बहुत बहुत बधाई आद० महेंद्र कुमार जी "
Apr 12
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post एक महान जासूसी लेखक
"आदरणीय समर कबीर सर, आदाब। लघुकथा को पसन्द करने के लिए आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर।"
Apr 9
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post एक महान जासूसी लेखक
"आदाब आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी। रचना को पसन्द करने के लिए आपका हार्दिक आभार। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर।"
Apr 9
Samar kabeer commented on Mahendra Kumar's blog post एक महान जासूसी लेखक
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,बहतरीन कथानक,कसी हुई सधी हुई लघुकथा के लिये दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 9
Mohammed Arif commented on Mahendra Kumar's blog post एक महान जासूसी लेखक
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, बेहतरीन कथानक, अच्छी लघुकथा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 9
Mahendra Kumar posted a blog post

एक महान जासूसी लेखक

करार के अनुसार उसने उस महान जासूसी लेखक की चाकू से गोद कर हत्या की और तेजी से घर के बाहर निकल गया।आज से कुछ दिन पहले हत्यारे के घर में। "तुम अपनी ही हत्या क्यों करवाना चाहते हो? तुम पागल तो नहीं हो?" हत्यारे ने चौंकते हुए कहा।"नहीं। मैं एक महान जासूसी लेखक हूँ।" उस आदमी ने अपना परिचय दिया।"पर अपनी हत्या क्यों?" उसने उत्सुकता ज़ाहिर की।"क्योंकि मैं चाहता हूँ कि लोग मेरी कहानियों की क़द्र करें। मैंने उन्हें रहस्य से भरी हुई अद्भुत और शानदार कहानियाँ दीं पर उन्हें कोई परवाह नहीं। अब मैं उन्हें अपनी…See More
Apr 9
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post मेरे प्यारे-प्यारे वैज्ञानिकों
"आपका हार्दिक आभार आदरणीया कल्पना जी। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर।"
Apr 8

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

एक महान जासूसी लेखक

करार के अनुसार उसने उस महान जासूसी लेखक की चाकू से गोद कर हत्या की और तेजी से घर के बाहर निकल गया।



आज से कुछ दिन पहले हत्यारे के घर में। "तुम अपनी ही हत्या क्यों करवाना चाहते हो? तुम पागल तो नहीं हो?" हत्यारे ने चौंकते हुए कहा।



"नहीं। मैं एक महान जासूसी लेखक हूँ।" उस आदमी ने अपना परिचय दिया।



"पर अपनी हत्या क्यों?" उसने उत्सुकता ज़ाहिर की।



"क्योंकि मैं चाहता हूँ कि लोग मेरी कहानियों की क़द्र करें। मैंने उन्हें रहस्य से भरी हुई अद्भुत और शानदार कहानियाँ… Continue

Posted on April 9, 2017 at 10:05am — 6 Comments

एक ख़तरनाक आतंकवादी

ढूँढो किसी मुफ़लिस को

ग़ुमनाम तंग गलियों से

और फिर मुफ़ीद जगह पर

कर दो एनकाउण्टर

मगर आहिस्ते से

इतने आहिस्ते

कि चल सके पूरे दिन

दहशत का लाइव शो

इस बात को ध्यान में रखते हुए

कि उसे करना है घोषित

भोर की पहली किरण से ही

एक ख़तरनाक आतंकवादी

और फिर रख देना है

उसकी लाश के पास

एक झण्डा

कुछ किताबें

नक़्शे और नोट

व थोड़े से हथियार

जिससे ये डर पुख़्ता होकर

बदल जाए मज़हबी वोटों में

और बना दे अपनी… Continue

Posted on March 8, 2017 at 8:30pm — 14 Comments

मेरे प्यारे-प्यारे वैज्ञानिकों

सीलन भरी छत पर बैठकर

चाँद की ख़ूबसूरती को निहारने वाले

मेरे प्यारे-प्यारे वैज्ञानिकों

यदि संभव हो

तो अगली बार

भूख़, ग़रीबी, शोषण

और अत्याचार के साथ

इस नफ़रत भरी

विषैली बेल को भी

अपने उपग्रहों में लपेट कर

इस पृथ्वी से दूर

बहुत दूर

सुदूर अन्तरिक्ष में

छोड़ देना तुम

जहाँ से फिर कभी लौटना

संभव न हो

और हाँ

अगर तुम्हारे यान में

थोड़ी सी जगह और बचे

तो बिठा लेना मुझे भी

और फेंक देना रास्ते में

जहाँ कहीं… Continue

Posted on February 19, 2017 at 11:30am — 23 Comments

पहली भेड़

वो देखो

जा रहा है भेड़ों का झुण्ड

फटी हुई धोती को पहने

और नंगे पाँव

उस एक भेड़ के पीछे

जो है झुण्ड में

सबसे आगे

मगर

क्या वह पहली भेड़

असली है?

अगर तुम्हें याद हो

तो पिछले चुनाव में

अन्तिम नतीजे आते ही

जीत गया था मीडिया

उस पार्टी की जीत के साथ ही

जिसे अपने जनमत सर्वेक्षणों में

दिखाया था उसने

सबसे पीछे होने के बावजूद भी

सबसे आगे

यही वो पहली भेड़ थी

जिसके पीछे चलते हुए तुम

गिर गए थे खाई में

हर… Continue

Posted on January 6, 2017 at 3:30pm — 7 Comments

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