For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Mahendra Kumar
  • Male
  • India
Share

Mahendra Kumar's Friends

  • Samar kabeer
  • vijay nikore
  • नादिर ख़ान
  • rajesh kumari
  • मिथिलेश वामनकर
  • योगराज प्रभाकर
 

Mahendra Kumar's Page

Latest Activity

Mahendra Kumar replied to योगराज प्रभाकर's discussion ओबीओ लाईव लघुकथा गोष्ठी अंक-31 में सम्मिलित सभी लघुकथाएँ
"लघुकथा गोष्ठी के एक और सफल आयोजन और त्वरित संकलन की हार्दिक बधाई आदरणीय सर. साथ ही, सभी रचनाकारों को भी ढेर सारी बधाई. मैं शीघ्र ही अपनी लघुकथा का संशोधित रूप प्रस्तुत करूँगा. एक बार पुनः बधाई. सादर."
Nov 1
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"अच्छी लघुकथा है आ. अन्नपूर्णा जी. संवाद प्रभावोत्पादक हैं. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"(सरकारी) स्कूलों की दशा वाकई में बहुत दयनीय है आ. वसुधा जी. मूलभूत आवश्यकताओं तक की पूर्ती नहीं हो पाती. इस विषय पर आपने एक अच्छी लघुकथा लिखी है. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. टंकण त्रुटियों को देख लीजिएगा. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"ज़र्रनवाजिश का बहुत-बहुत शुक्रिया आ. तेज वीर सिंह जी. हार्दिक आभार. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"बहुत ही उम्दा लघुकथा है आ. तेज वीर सिंह जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"प्रदत्त विषय से न्याय करती बढ़िया संदेशप्रद लघुकथा है आ. नयना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"लघुकथा को पसन्द करने के लिए आपका हृदय से आभार आ. राजेश मैम. फ़क़ीर को लघुकथा में फ़रिश्ते कि नज़र से नहीं देखा गया है. प्रचलित मान्यताओं के अनुसार पवित्र पुस्तकें फ़रिश्तों के माध्यम से ही मनुष्यों तक पहुँचती है. प्रदत्त विषय को मैंने इसी सन्दर्भ…"
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार आ. प्रतिभा जी. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"सादर आदाब आ. समर कबीर सर. लघुकथा को पसन्द करने के लिए आपका हृदय से आभारी हूँ. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"आपकी इस लघुकथा पर टिप्पणी के माध्यम से मैं भी इस प्रतिष्ठित मंच को नमन करता हूँ. प्रदत्त विषय को अनूठे ढंग से परिभाषित किया है आपने. इस उम्दा लघुकथा पर मेरी तरफ़ से भी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आ. लक्ष्मण रामानुज जी. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"अच्छी लघुकथा है आ. इंद्रविद्यावाचस्पति जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"प्रदत्त विषय से न्याय करती पत्रात्मक शैली में बढ़िया लघुकथा कही है आपने आ. प्रतिभा जी. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"बढ़िया लघुकथा है आ. राजेश मैम. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"उम्दा लघुकथा है आ. जानकी वाही जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"कहाँ से ढूँढ से के लाते हैं इतने अच्छे शीर्षक सर? अद्भुत! कथानक शानदार है तो दृश्य-चित्रण लाजवाब. इस बेहद उम्दा लघुकथा हेतु दिल से बधाई प्रेषित है सर. सादर."
Oct 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"अच्छी लघुकथा है आ. मनन जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Oct 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

मृत्यु : पूर्व और पश्चात्

मृत्यु...

जीवन का वह सत्य

जो सदियों से अटल है

शिला से कहीं अधिक।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य बद होता है

बदनाम होता है

बुरी लगती हैं उसकी बातें

बुरा उसका व्यवहार होता है।

मृत्यु पूर्व...

जीवन होता है

शायद जीवन

नारकीय

यातनीय

उलाहनीय

अवहेलनीय।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य, मनुष्य नहीं होता

हैवान होता है

हैवान, जो हैवानियत की सारी हदें

पार कर देना चाहता…

Continue

Posted on October 22, 2017 at 9:33am — 17 Comments

ग़ज़ल - वक़्त कुछ ऐसा मेरे साथ गुज़ारा उसने

बह्र : 2122-1122-1122-112/22

फिर मुहब्बत से लिया नाम तुम्हारा उसने

वार मुझ पर है किया कितना करारा उसने

मेरी कश्ती को समन्दर में उतारा उसने

और फिर कर दिया तूफ़ाँ को इशारा उसने

डूबते वक़्त दी आवाज़ बहुत मैंने मगर

बैठ कर दूर से देखा था नज़ारा उसने

आप कहते थे इसे बख़्श दो, देखो ख़ुद ही

मुझ में ख़ंजर ये उतारा है दुबारा उसने

ग़ैर भी कोई गुज़ारे न किसी ग़ैर के साथ 

वक़्त…

Continue

Posted on September 26, 2017 at 10:00am — 30 Comments

ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ

बह्र : 122 122 122 122



वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ

सभी की तरह मैं ये क्या चाहता हूँ



दिवानों का मुझ पर असर हो गया है

ख़ता तो नहीं की सज़ा चाहता हूँ



ख़ुदा ही सही पर हटो सामने से

मैं थोड़ी सी ताज़ा हवा चाहता हूँ



वही बस वही बस वही चाहिए बस

नहीं कुछ भी उसके सिवा चाहता हूँ



यहाँ है, वहाँ है, कहाँ है मुहब्बत

बताओ मैं उसका पता चाहता हूँ



वो कैसा था ये जानने के लिए ही

वो कैसा है ये जानना चाहता हूँ



ज़माने… Continue

Posted on September 12, 2017 at 6:34pm — 30 Comments

ग़ज़ल - ढोते फिरेंगे आप मुहब्बत कहाँ कहाँ

बह्र : 221/2121/1221/212



इस दोस्ती के बीच तिजारत कहाँ कहाँ

तुमने लगायी है मेरी कीमत कहाँ कहाँ



तुम मुझ से कह रहे हो कि मैं होश में रहूँ

नासेह दे रहे हो नसीहत कहाँ कहाँ



सब कुछ हमें ख़बर है नुमाइश के दौर में

करता है कौन कितनी सियासत कहाँ कहाँ



हैं आप जो ख़ुदा तो मुझे पूछना है ये

पहुँची है मुफ़लिसों की इबादत कहाँ कहाँ



गंगा में ले के जाइए और फेंक आइए

ढोते फिरेंगे आप मुहब्बत कहाँ कहाँ



तुम पूछ तो रहे हो मगर क्या… Continue

Posted on September 3, 2017 at 12:39pm — 6 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

पंकजोम " प्रेम " commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " शायरी "
"आपके आशिर्वाद का दिल से शुक्रगुज़ार हूँ , आ0 दादा समर कबीर जी , अफरोज़ जी , उस्मानी जी ..... और निखार…"
1 hour ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post क्यों की तुमने आत्महत्या
"आदरणीय समर कबीर जी, उत्साहवर्धन हेतु आपका कोटिशः आभार, आपका स्नेह बना रहे।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'इस उम्मीद पर अब भी इन्तिज़ार…"
1 hour ago
रोहिताश्व मिश्रा posted a blog post

एक कोशिश

ये जो राबिता है अपना फ़क़त एक शे'र का है।कोई इक रदीफ़ है तो कोई उसका क़फ़िया है।है अजीब ख़ाहिश-ए-दिल कि…See More
1 hour ago
Sushil Sarna posted a blog post

अजल की हो जाती है....

अजल की हो जाती है.... ज़िंदगी साँसों के महीन रेशों से गुंथी हुई बिना सिरों वाली एक रस्सी ही तो है…See More
1 hour ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar shrivastava's blog post क्यों की तुमने आत्महत्या
"जनाब मनोज कुमार श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " शायरी "
"जनाब पंक्जोम "प्रेम"साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल अभी और समय चाहती है,कई…"
2 hours ago
Afroz 'sahr' commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " शायरी "
"आदरणीय पंकजोम प्रेम जी इस रचना पर बहुत बधाई आपको । रदीफ़,,, "कौन है शायरी" ज़ू, मानी दे…"
2 hours ago
रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"बहुत आभार विजय जी सुरेन्द्र भाई"
2 hours ago
Sushil Sarna posted a photo
4 hours ago
Manoj kumar shrivastava posted blog posts
5 hours ago
SALIM RAZA REWA posted a blog post

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा

212 1222 212  1222तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैंरात - रात भर तेरा इंतज़ार करते हैंतुमको…See More
5 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service