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Mahendra Kumar
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Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"हार्दिक आभार आ. प्रतिभा मैम। आपके प्रश्न के सन्दर्भ में, प्रदत्त विषय “सुबह का भूला” है, अब सुबह का भूला लौट भी सकता है और नहीं भी। यदि आप इस बात को ध्यान में रखेंगी तो लघुकथा प्रदत्त विषय को किस तरह परिभाषित कर रही है, स्पष्ट हो जाएगा।…"
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"बहुत-बहुत शुक्रिया मैम. हार्दिक आभार. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"850 शब्दों से ज़्यादा की यह प्रस्तुति लघुकथा के लिहाज से बहुत बड़ी है आ. इन्द्र्विद्या वाचस्पति जी. साथ ही, पूरी कथा मात्र एक पैरे में वह भी बिना किसी संवाद के? इस रचना को एक बार पुनः देखने की आवश्यकता है. आयोजन में सहभागिता हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार…"
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"प्रदत्त विषय पर अच्छी लघुकथा है आ. राजेश मैम. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"प्रदत्त विषय पर अच्छी प्रस्तुति है आ. विनय जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. आ. समर कबीर सर की बातों का संज्ञान लें. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"इस सार्थक प्रयास पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आ. नयना मैम. गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"अच्छी लघुकथा है आ. लक्ष्मण जी. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. आ. योगराज सर की बातों से मैं भी सहमत हूँ. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"प्रदत्त विषय पर बढ़िया लघुकथा है आ. अन्नपूर्णा जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"महज लॉकेट की वजह से हृदय परिवर्तन हो जाना मुझे भी अस्वाभाविक लगा. यदि इस ओर ध्यान देंगी तो यह रचना एक बढ़िया लघुकथा में बदल सकती है. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"प्रदत्त विषय पर बढ़िया लघुकथा प्रस्तुत की है आपने आ. प्रतिभा मैम. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"प्रदत्त विषय को सार्थक करती उम्दा लघुकथा है आ. कुसुम जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"बढ़िया लघुकथा है आ. डॉ. गोपाल नारायन सर. आ. योगराज सर की बात से मैं भी सहमत हूँ. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"प्रदत्त विषय पर बढ़िया रचना प्रस्तुत की है आपने आ. विजय शंकर जी. इस हेतु मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई प्रेषित है. शेष गुणीजनों की बातों से मैं भी सहमत हूँ. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"पुनः आभार आदरणीय. सादर."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"हार्दिक आभार आ. मनन जी. सादर धन्यवाद."
Nov 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"सादर आदाब आ. मोहम्मद आरिफ़ जी. लघुकथा पर आपकी उपस्थिति और प्रतिक्रिया का हृदय से आभारी हूँ. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Nov 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

मृत्यु : पूर्व और पश्चात्

मृत्यु...

जीवन का वह सत्य

जो सदियों से अटल है

शिला से कहीं अधिक।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य बद होता है

बदनाम होता है

बुरी लगती हैं उसकी बातें

बुरा उसका व्यवहार होता है।

मृत्यु पूर्व...

जीवन होता है

शायद जीवन

नारकीय

यातनीय

उलाहनीय

अवहेलनीय।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य, मनुष्य नहीं होता

हैवान होता है

हैवान, जो हैवानियत की सारी हदें

पार कर देना चाहता…

Continue

Posted on October 22, 2017 at 9:33am — 17 Comments

ग़ज़ल - वक़्त कुछ ऐसा मेरे साथ गुज़ारा उसने

बह्र : 2122-1122-1122-112/22

फिर मुहब्बत से लिया नाम तुम्हारा उसने

वार मुझ पर है किया कितना करारा उसने

मेरी कश्ती को समन्दर में उतारा उसने

और फिर कर दिया तूफ़ाँ को इशारा उसने

डूबते वक़्त दी आवाज़ बहुत मैंने मगर

बैठ कर दूर से देखा था नज़ारा उसने

आप कहते थे इसे बख़्श दो, देखो ख़ुद ही

मुझ में ख़ंजर ये उतारा है दुबारा उसने

ग़ैर भी कोई गुज़ारे न किसी ग़ैर के साथ 

वक़्त…

Continue

Posted on September 26, 2017 at 10:00am — 30 Comments

ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ

बह्र : 122 122 122 122



वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ

सभी की तरह मैं ये क्या चाहता हूँ



दिवानों का मुझ पर असर हो गया है

ख़ता तो नहीं की सज़ा चाहता हूँ



ख़ुदा ही सही पर हटो सामने से

मैं थोड़ी सी ताज़ा हवा चाहता हूँ



वही बस वही बस वही चाहिए बस

नहीं कुछ भी उसके सिवा चाहता हूँ



यहाँ है, वहाँ है, कहाँ है मुहब्बत

बताओ मैं उसका पता चाहता हूँ



वो कैसा था ये जानने के लिए ही

वो कैसा है ये जानना चाहता हूँ



ज़माने… Continue

Posted on September 12, 2017 at 6:34pm — 30 Comments

ग़ज़ल - ढोते फिरेंगे आप मुहब्बत कहाँ कहाँ

बह्र : 221/2121/1221/212



इस दोस्ती के बीच तिजारत कहाँ कहाँ

तुमने लगायी है मेरी कीमत कहाँ कहाँ



तुम मुझ से कह रहे हो कि मैं होश में रहूँ

नासेह दे रहे हो नसीहत कहाँ कहाँ



सब कुछ हमें ख़बर है नुमाइश के दौर में

करता है कौन कितनी सियासत कहाँ कहाँ



हैं आप जो ख़ुदा तो मुझे पूछना है ये

पहुँची है मुफ़लिसों की इबादत कहाँ कहाँ



गंगा में ले के जाइए और फेंक आइए

ढोते फिरेंगे आप मुहब्बत कहाँ कहाँ



तुम पूछ तो रहे हो मगर क्या… Continue

Posted on September 3, 2017 at 12:39pm — 6 Comments

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