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Mahendra Kumar
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Rakshita Singh commented on Mahendra Kumar's blog post जलियांवाला बाग़ (लघुकथा)
"आदरणीय महेन्द्र जी नमस्कार, लघुकथा पढते पढते आखों में उस समय के चलचित्र दौड़ पड़े....बहुत ही सुन्दर लघुकथा । हार्दिक बधाई स्वीकार  करें ।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mahendra Kumar's blog post जलियांवाला बाग़ (लघुकथा)
"आपकी कलम व परिकल्पना से एक और उम्दा सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीय महेंद्र कुमार साहिब। दरअसल जिन पाठकगण को इस ऐतिहासिक घटना के पात्रों के बारे में आवश्यक जानकारी नहीं है, वे कुछ असहजता महसूस कर सकते हैं रुचि लेने में, जबकि कुछ  जानकार पाठकगण ऐसे…"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mahendra Kumar's blog post जलियांवाला बाग़ (लघुकथा)
"आ. भाई महेंद्र जी, बेहतरीन कथा हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Thursday
Neelam Upadhyaya commented on Mahendra Kumar's blog post जलियांवाला बाग़ (लघुकथा)
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी, नमस्कार । बहुत ही अच्छी लघुकथा हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Thursday
Shyam Narain Verma commented on Mahendra Kumar's blog post जलियांवाला बाग़ (लघुकथा)
"लाजवाब रचना है बहुत बहुत बधाई आपको    सादर ,"
Thursday
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post बाज़ार (लघुकथा)
"पाठक अपनी पसन्द-नापसंद और राय को ज़ाहिर करने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र हैं आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी. यदि हमारी रचनाओं में विभिन्न प्रकार के पाठक आ कर अपने भिन्न-भिन्न विचार व्यक्त करें तो इससे बढ़कर हमारे लिए ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है. आपकी…"
Wednesday
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post बाज़ार (लघुकथा)
"अपने मूल्यवान विचारों से अवगत करने हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय विजय निकोर जी. हार्दिक आभार. सादर."
Wednesday
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post नजीब (लघुकथा)
"हार्दिक आभार आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान जी. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Wednesday
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post जलियांवाला बाग़ (लघुकथा)
"उत्सावर्धन हेतु बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान जी. हार्दिक आभार. सादर."
Wednesday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Mahendra Kumar's blog post नजीब (लघुकथा)
"जनाब महेंद्र कुमार साहिब, अच्छी लघुकथा हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |"
Wednesday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Mahendra Kumar's blog post जलियांवाला बाग़ (लघुकथा)
"जनाब महेंद्र कुमार साहिब  , ज़बर्दस्त लघुकथा हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |"
Wednesday
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post नजीब (लघुकथा)
"अपने विचारों से अवगत कराने हेतु बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी, सादर आदाब. कईयों ने तो मेरी रचनाओं पर आना ही छोड़ दिया है. बहरहाल, शीर्षक को ले कर मैंने भी काफी चिंतन किया पर कोई अन्य ऐसा शीर्षक मुझे भी नहीं मिला जो इसकी सांकेतिकता को…"
Wednesday
Mahendra Kumar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल _तक़दीर आज़माने की ज़हमत न कीजिए
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान जी, लाजवाब ग़ज़ल हुई है. हर शेर ख़ूबसूरत है. दिल से ढेर सारी बधाई प्रेषित है. सादर."
Wednesday
Mahendra Kumar commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
"//तेज इस रफ्तार से घात से प्रतिघात से वक्त रहते , सम्भल जाओजरा धीरे चलो// इस बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीया उषा अवस्थी जी. सादर. "
Wednesday
Mahendra Kumar commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- फिर कोई मीठी शरारत हो गई है
"ख़ूबसूरत ग़ज़ल है आदरणीय बसंत जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए इस लाजवाब प्रस्तुति पर. सादर."
Wednesday
Mahendra Kumar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी, बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपने. हर शेर बढ़िया है. हार्दिक बधाई आपको इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर. सादर."
Wednesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

जलियांवाला बाग़ (लघुकथा)

‘‘फ़ायर!’’ जनरल के कहते ही सैकड़ों बन्दूकें गरजने लगीं। उस जंगल में आदिवासी चारों तरफ़ से घिर चुके थे। उनकी लाशें ऐसे गिर रही थीं जैसे ताश के पत्ते। क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या जवान, कोई भी ऐसा नहीं नहीं था जो बच सका हो। कुछ ने पेड़ों के पीछे छिपने की कोशिश की तो कुछ ने पोखर के अन्दर मगर बचा कोई भी नहीं। देखते ही देखते हरा-भरा जंगल लाल हो गया।

‘‘आगे बढ़ो!’’ जनरल ने आदेश दिया। सेना लाशों के बीच से होते हुए जंगल के भीतर बढ़ने लगी। वहाँ कोई भी ज़िन्दा नज़र नहीं आ रहा था सिवाय उस छोटी सी…

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Posted on June 13, 2018 at 12:00pm — 7 Comments

नजीब (लघुकथा)

और प्रधानमंत्री जी गायब हो गये। ‘‘क्या? प्रधानमंत्री जी गायब हो गये? यह कैसे हो सकता है?’’ हर किसी के जे़हन में यही सवाल था।

उस दिन जब रसोई में प्रधानमंत्री जी बच्चों के लिए पापड़ तल रहे थे तो पापड़ तलते-तलते न जाने कहाँ अचानक गायब हो गये। जैसे ही यह ख़बर न्यूज़ चैनल्स पर फ़्लैश हुई तो सारा देश सकते में आ गया।

‘‘हम लोग जी जान से लगे हैं और बहुत जल्द ही प्रधानमंत्री जी का पता लगा लेंगे। आप लोग निश्चिन्त रहिए।’’ जाँच समिति के प्रमुख ने देश को आश्वस्त करते हुए…

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Posted on June 11, 2018 at 6:30pm — 4 Comments

बाज़ार (लघुकथा)

‘‘बिटिया की उम्र निकली जा रही है, तुम उसकी कहीं शादी क्यों नहीं करते?’’ हर कोई उससे यही सवाल करता। कल तो सुपरवाइजर ने भी टोक दिया, ‘‘कलेक्टर ढूँढ रहे हो क्या?’’

मिल में काम करने वाले उस मजदूर का सपना कोई कलेक्टर नहीं बस एक अच्छा सा लड़का था जिसे वह अपनी बेटी के लिए ढूँढ रहा था। बीमारी से बीवी के गुज़र जाने के बाद बस एक बेटी ही थी जो उसका सबकुछ थी। बीते सालों में उसने रात-दिन एक कर के कई रिश्ते देखे मगर बात कहीं बनी नहीं। आज भी वह एक ऐसी ही जगह से निराश हो कर लौटा था। ‘‘बेटी!’’…

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Posted on June 7, 2018 at 5:30pm — 16 Comments

एलियंस /लघुकथा

पहाड़ की चोटी पर बैठा हुआ वह युवक अभी भी एंटीने से जूझ रहा था।

आज से कई साल पहले जब गाँव का सबसे ज़्यादा पढ़ा-लिखा युवक शहर से पहली बार टीवी लेकर आया था तो सब लोग बेहद ख़ुश थे। नारियल, अगरबत्ती और फूल-माला से स्वागत किया था सबने उसका। मगर जल्द ही, ‘‘ये टीवी ख़राब है क्या? इसमें हमारी ख़बर तो आती ही नहीं।’’ बुज़ुर्ग की बात से उस युवक के साथ-साथ बाकी गाँव वालों का भी माथा ठनका। ‘‘अरे हाँ! इसमें तो सिर्फ़ शहरों की ही ख़बरें आती हैं, गाँव का तो कहीं कोई नाम ही नहीं।’’ सबने तय किया कि शहर…

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Posted on June 2, 2018 at 6:00pm — 6 Comments

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