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Mahendra Kumar
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Mohammed Arif commented on Mahendra Kumar's blog post मृत्यु : पूर्व और पश्चात्
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, शाश्वत सच्चाई , सनातन सच्चाई मृत्यु के पूर्व और पश्चात की स्थिति को परिभाषित करती , मृत्यु की भयावह सच्चाई को प्रदर्शित करती बेहतरीन कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
3 hours ago
Mahendra Kumar posted a blog post

मृत्यु : पूर्व और पश्चात्

मृत्यु...जीवन का वह सत्यजो सदियों से अटल हैशिला से कहीं अधिक।मृत्यु पूर्व...मनुष्य बद होता हैबदनाम होता हैबुरी लगती हैं उसकी बातेंबुरा उसका व्यवहार होता है।मृत्यु पूर्व...जीवन होता हैशायद जीवननारकीययातनीयउलाहनीयअवहेलनीय।मृत्यु पूर्व...मनुष्य, मनुष्य नहीं होताहैवान होता हैहैवान, जो हैवानियत की सारी हदेंपार कर देना चाहता है।मृत्यु पश्चात्...विश्राम, विश्रान्तिआनन्द, परमानन्द।मृत्य पश्चात्...मनुष्य की सारी भूलेंभुला दी जाती हैंयाद रहती हैंतो सिर्फ उसकी अच्छाइयाँअच्छाइयाँ, जो शायद उसने          कभी…See More
3 hours ago
Mahendra Kumar commented on Dr.Prachi Singh's blog post दीप जला क्या // डॉ० प्राची
"आ. प्राची जी, दिवाली पर मैं ऐसी ही रचना की तलाश कर रहा था. इस शानदार प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
7 hours ago
Mahendra Kumar commented on लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's blog post नई कमीज
"आ. लक्ष्मण रामानुज जी, इस अच्छी और संवेदनशील लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.  //"मैंने छुटकू को प्रदूषण के बारे में समझाकर दो फुलझड़ी के पैकेट लिए राजी कर लिया है । // मुझे लगता है कि इस संवाद में प्रदूषण शब्द कुछ भारी है. यदि इसे…"
7 hours ago
Mahendra Kumar commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post बचपन
"आ. डॉ छोटेलाल सिंह जी, बचपन पर बहुत ही अच्छी रचना प्रस्तुत की है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
7 hours ago
Mahendra Kumar commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--मलिका
"वाह! शानदार लघुकथा है आ. मोहम्मद आरिफ़ जी. शीर्षक चयन और उस शीर्षक को सार्थक करता संवाद दोनों उम्दा हैं. दिल से ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए.  //" जन्म से मुस्लिम , मन से सच्चा हिन्दुस्तानी , तन से अधनंगा और पेट से भूखा हूँ…"
7 hours ago
Mahendra Kumar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post बावले (लघुकथा)
"आ. शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी, उम्दा व्यंग्यात्मक लघुकथा हुई है. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. //"हां, इसे ख़ुद से और अपनों से ही पीड़ित, अपनों के ही बीच का कोई शरणार्थी कह लो या शरणार्थियों जैसे हालात वाला कोई महत्वाकांक्षी शिक्षित…"
7 hours ago
रामबली गुप्ता commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आदरणीय भाई महेंद्र जी आपकी ग़ज़ल कई बार पढ़ी। इस पर समर भाई साहब की टिप्पणी और आपका जवाब और स्पष्टीकरण भी पढा। वास्तव में किसी भी रचनाकार को रचनाकर्म के दौरान इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसकी किसी भी रचना में (चाहें वह किसी भी विधा में क्यों न हों)…"
Sep 17
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर उम्दा प्रयास हुआ है। और उसपर आद0 समर साहब की विस्तृत इस्लाह। समर साहब की इस्लाह मुझे बेहद सटीक लगी। उनकी बातों से सहमत हूँ। कुछ अशआर अच्छे भी हुए हैं,जिसपर मेरी मुबारकबाद आपको।"
Sep 17
Samar kabeer commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,आपने हर उस शैर का अपने जवाब में बचाव किया है जिस पर मैंने ऐतिराज़ किया है,और उन अशआर का अर्थ(तशरीह)करने की कोशिश की है, अगर आप अपने अशआर से संतुष्ट हैं तो कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं है,लेकिन बुज़ुर्ग कहते हैं कि शाइर अपने…"
Sep 16
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"बहुत-बहुत शुक्रिया आ. बृजेश जी. सादर धन्यवाद."
Sep 16
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आ. गिरिराज सर, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रतिक्रिया का हृदय से आभारी हूँ. आ. समर सर की सलाह हम लोगों के संजीवनी की तरह हैं, उन्हें कैसे अनदेखा किया जा सकता है. //आदरनीय सभी की सलाहें एक सी हों ज़रूरी नही है ... आप क्या  चुने  ये आपका अधिकार…"
Sep 16
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आ. पंकजोम जी, इस प्रशंसा के लिए दिल से शुक्रिया. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Sep 16
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आ. आशुतोष जी, आपका हृदय से आभार. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Sep 16
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आ. कल्पना मैम, जानकर बेहद ख़ुशी हुई कि कुछ अशआर आपको पसन्द आये. लम्बी ग़ज़ल के सन्दर्भ में मैं आ. समर सर की बात से सहमत हूँ. निश्चित ही मंच पर उनकी उपस्थिति हम सभी के लिए गर्व की बात है. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Sep 16
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आ. नीरज जी, ग़ज़ल को पसन्द करने और मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार. मैं इस बात के लिए आपका ज़्यादा आभारी हूँ कि आपने यह भी बताया कि कौन सा शेर आपको नहीं पसन्द आया. ऐसी ही प्रतिक्रिया की मैं आपसे (और अन्य साथियों से भी) भविष्य में भी उम्मीद…"
Sep 16

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

मृत्यु : पूर्व और पश्चात्

मृत्यु...

जीवन का वह सत्य

जो सदियों से अटल है

शिला से कहीं अधिक।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य बद होता है

बदनाम होता है

बुरी लगती हैं उसकी बातें

बुरा उसका व्यवहार होता है।

मृत्यु पूर्व...

जीवन होता है

शायद जीवन

नारकीय

यातनीय

उलाहनीय

अवहेलनीय।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य, मनुष्य नहीं होता

हैवान होता है

हैवान, जो हैवानियत की सारी हदें

पार कर देना चाहता…

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Posted on October 22, 2017 at 9:33am — 1 Comment

ग़ज़ल - वक़्त कुछ ऐसा मेरे साथ गुज़ारा उसने

बह्र : 2122-1122-1122-112/22

फिर मुहब्बत से लिया नाम तुम्हारा उसने

वार मुझ पर है किया कितना करारा उसने

मेरी कश्ती को समन्दर में उतारा उसने

और फिर कर दिया तूफ़ाँ को इशारा उसने

डूबते वक़्त दी आवाज़ बहुत मैंने मगर

बैठ कर दूर से देखा था नज़ारा उसने

आप कहते थे इसे बख़्श दो, देखो ख़ुद ही

मुझ में ख़ंजर ये उतारा है दुबारा उसने

ग़ैर भी कोई गुज़ारे न किसी ग़ैर के साथ 

वक़्त…

Continue

Posted on September 26, 2017 at 10:00am — 30 Comments

ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ

बह्र : 122 122 122 122



वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ

सभी की तरह मैं ये क्या चाहता हूँ



दिवानों का मुझ पर असर हो गया है

ख़ता तो नहीं की सज़ा चाहता हूँ



ख़ुदा ही सही पर हटो सामने से

मैं थोड़ी सी ताज़ा हवा चाहता हूँ



वही बस वही बस वही चाहिए बस

नहीं कुछ भी उसके सिवा चाहता हूँ



यहाँ है, वहाँ है, कहाँ है मुहब्बत

बताओ मैं उसका पता चाहता हूँ



वो कैसा था ये जानने के लिए ही

वो कैसा है ये जानना चाहता हूँ



ज़माने… Continue

Posted on September 12, 2017 at 6:34pm — 30 Comments

ग़ज़ल - ढोते फिरेंगे आप मुहब्बत कहाँ कहाँ

बह्र : 221/2121/1221/212



इस दोस्ती के बीच तिजारत कहाँ कहाँ

तुमने लगायी है मेरी कीमत कहाँ कहाँ



तुम मुझ से कह रहे हो कि मैं होश में रहूँ

नासेह दे रहे हो नसीहत कहाँ कहाँ



सब कुछ हमें ख़बर है नुमाइश के दौर में

करता है कौन कितनी सियासत कहाँ कहाँ



हैं आप जो ख़ुदा तो मुझे पूछना है ये

पहुँची है मुफ़लिसों की इबादत कहाँ कहाँ



गंगा में ले के जाइए और फेंक आइए

ढोते फिरेंगे आप मुहब्बत कहाँ कहाँ



तुम पूछ तो रहे हो मगर क्या… Continue

Posted on September 3, 2017 at 12:39pm — 6 Comments

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