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Mahendra Kumar
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Mahendra Kumar and vijay nikore are now friends
Aug 2
Mahendra Kumar commented on Hari Prakash Dubey's blog post अंत का आरम्भ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"आ. हरि प्रकाश जी, जो बात मैं आपसे कहना चाहता था वो बात आ. समर सर ने कह दी है. यदि आपकी इस लघुकथा की बात की जाए तो यह एक गम्भीर बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाती बढ़िया लघुकथा है हालाँकि अन्तिम संवाद और बेहतर हो सकता है. साथ ही, इसमें कालखण्ड दोष भी है.…"
Jul 20
Mahendra Kumar commented on SHAFIQE SAIFI's blog post मुझको क्या मेरी मेरी याद को भी भूल गयी होगी
"आ. शफ़ीक़ सैफ़ी जी, इस प्रयास पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें और गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें. सादर."
Jul 20
Mahendra Kumar commented on Sunil Verma's blog post कमज़ोर आदमी (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"पुरुषवादी सोच को इस लघुकथा में बहुत बढ़िया तरीके से उभरा है आपने आ. सुनील जी. शीर्षक से पूरी तरह न्याय हुआ है. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jul 20
Mahendra Kumar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मम्मी तो ऐसी नहीं न (लघुकथा) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"बाल मन को केन्द्रित कर संतान और और उससे जुड़े मुद्दों को बहुत ही ख़ूबसूरती से बयां किया है आपने आ. शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी. मुझे लगता है कि आ. कल्पना जी ने जो प्रश्न किया है उसका उत्तर आपके इन शब्दों में "दादा जी स्तब्ध रह गए" मिल जाता है.…"
Jul 20
Mahendra Kumar commented on Sushil Sarna's blog post नेम प्लेट ...
"बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति है आ. सुशील सरना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jul 20
Mahendra Kumar commented on Samar kabeer's blog post 'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'
"इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइरअदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो ...वाह! कितनी ख़ूबसूरती से आपने प्रचलित मुहावरे को शेर में तब्दील किया है. शानदार!! काफ़िये मेरे लिए बिलकुल नए थे. बहुत कुछ सीखने को मिला. इस उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाई स्वीकार कीजिए…"
Jul 20
Mahendra Kumar commented on Dr. Vijai Shanker's blog post गरीबी - उपचार -- डॉo विजय शंकर
"आ. डॉ. विजय शंकर जी, इस छोटी मगर मारक कविता के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. व्यंग्य एकदम सटीक है. सादर."
Jul 12
Mahendra Kumar commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post पढ़ा हुआ पाठ
"बढ़िया लघुकथा है आ. वीरेन्दर वीर मेहता जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jul 12
Mahendra Kumar commented on Samar kabeer's blog post रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है
"वाह! वाह!! वाह!!! क्या शानदार ग़ज़ल पढ़ने को मिली है आ. समर सर. मज़ा आ गया. इस ग़ज़ल के कई शेर मुझे मेरे बेहद क़रीब लगे. शेर-दर-शेर दाद के साथ मुबारकबाद पेश है. ईश्वर करे आप यूँ ही लिखते रहें. सादर."
Jul 12
Mahendra Kumar commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-रामबली गुप्ता
"वाह-वाह आ. रामबली जी. मज़ा आ गया आपकी ग़ज़ल पढ़कर. बहुत ख़ूब! इस शानदार ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jul 12
Mahendra Kumar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...गमे दिल अब मुझे आराम दे दो
"बढ़िया ग़ज़ल है आ. बृजेश जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jul 12
Mahendra Kumar commented on Ajay Kumar Sharma's blog post 'अजय' बीते जमाने में कहीं कुछ छोड़कर आया,
"आ. अजय जी, ग़ज़ल कहने का अच्छा प्रयास हुआ है. हार्दिक बधाई स्वीकार करें. गुणीजनों की बातों का पालन करें, निस्संदेह लाभ होगा. शुभकामनाएँ. सादर."
Jul 12
Mahendra Kumar commented on pratibha pande's blog post राज़ [ लघुकथा प्रतिभा पाण्डे ]
"बढ़िया लघुकथा है आ. प्रतिभा जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. वैसे शीर्षक थोड़ा और बेहतर हो सकता है. सादर."
Jul 12
Mahendra Kumar commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post याद आता तब ख़ुदा जब आसरा कोई न हो
"दोष देना हो किसी को,देख लो ख़ुद आइनाये भी तो सम्भव है कि तुमसे बुरा कोई न हो ...वाह भाई सुरेन्द्र जी! यह शेर पढ़कर मज़ा आ गया. दूसरे शेर को छोड़ दिया जाए तो पूरी ग़ज़ल बहुत उम्दा है. मेरी तरफ़ से दिल से बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jul 12
Mahendra Kumar commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - अजब मासूम है क़ातिल हमारा ( गिरिराज भंडारी )
"तमाशाई के सच को कौन जाने ? वो सच में मर रहा है, या अदा है ...वाह! बहुत ख़ूब!! इस बढ़िया ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आ. गिरिराज सर. सादर. "
Jul 12

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

दायरा

"तेरे पिता उस संगठन से जुड़े हैं जो इन्हें देखना तक नहीं चाहता और तू कहता है कि इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता?" कार्तिक आज भी उसी रेस्टोरेंट में बैठा था जहाँ सुमित ने कभी उससे ये बातें कही थीं। उसके हाथ में परवीन शाकिर की किताब थी तो ज़ेहन में ये ग़ज़ल, तुझसे कोई गिला नहीं है, क़िस्मत में मेरी सिला नहीं है।

"क्या ख़ूब ग़ज़ल सुनाई तुमने। किसकी है?" न्यू ईयर की पार्टी में लोगों ने ज़ोया से पूछा जिसने अभी हाल ही में ऑफिस ज्वाइन किया था।

"परवीन शाकिर की।" यह पहली बार था…

Continue

Posted on June 8, 2017 at 10:30am

एक महान जासूसी लेखक

करार के अनुसार उसने उस महान जासूसी लेखक की चाकू से गोद कर हत्या की और तेजी से घर के बाहर निकल गया।



आज से कुछ दिन पहले हत्यारे के घर में। "तुम अपनी ही हत्या क्यों करवाना चाहते हो? तुम पागल तो नहीं हो?" हत्यारे ने चौंकते हुए कहा।



"नहीं। मैं एक महान जासूसी लेखक हूँ।" उस आदमी ने अपना परिचय दिया।



"पर अपनी हत्या क्यों?" उसने उत्सुकता ज़ाहिर की।



"क्योंकि मैं चाहता हूँ कि लोग मेरी कहानियों की क़द्र करें। मैंने उन्हें रहस्य से भरी हुई अद्भुत और शानदार कहानियाँ… Continue

Posted on April 9, 2017 at 10:05am — 6 Comments

एक ख़तरनाक आतंकवादी

ढूँढो किसी मुफ़लिस को

ग़ुमनाम तंग गलियों से

और फिर मुफ़ीद जगह पर

कर दो एनकाउण्टर

मगर आहिस्ते से

इतने आहिस्ते

कि चल सके पूरे दिन

दहशत का लाइव शो

इस बात को ध्यान में रखते हुए

कि उसे करना है घोषित

भोर की पहली किरण से ही

एक ख़तरनाक आतंकवादी

और फिर रख देना है

उसकी लाश के पास

एक झण्डा

कुछ किताबें

नक़्शे और नोट

व थोड़े से हथियार

जिससे ये डर पुख़्ता होकर

बदल जाए मज़हबी वोटों में

और बना दे अपनी… Continue

Posted on March 8, 2017 at 8:30pm — 14 Comments

मेरे प्यारे-प्यारे वैज्ञानिकों

सीलन भरी छत पर बैठकर

चाँद की ख़ूबसूरती को निहारने वाले

मेरे प्यारे-प्यारे वैज्ञानिकों

यदि संभव हो

तो अगली बार

भूख़, ग़रीबी, शोषण

और अत्याचार के साथ

इस नफ़रत भरी

विषैली बेल को भी

अपने उपग्रहों में लपेट कर

इस पृथ्वी से दूर

बहुत दूर

सुदूर अन्तरिक्ष में

छोड़ देना तुम

जहाँ से फिर कभी लौटना

संभव न हो

और हाँ

अगर तुम्हारे यान में

थोड़ी सी जगह और बचे

तो बिठा लेना मुझे भी

और फेंक देना रास्ते में

जहाँ कहीं… Continue

Posted on February 19, 2017 at 11:30am — 23 Comments

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