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Mahendra Kumar
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Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post बे-आवाज़ सिक्के /लघुकथा
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय विजय निकोर जी. हार्दिक आभार. सादर."
Feb 3
Mahendra Kumar replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 में शामिल सभी लघुकथाएँ
"आदरणीय योगराज सर, इस बार की गोष्ठी वाकई में ऐतिहासिक रही. एक से बढ़कर एक उम्दा लघुकथाएँ पढ़ने को मिलीं. सफल सञ्चालन एवं तीव्र संकलन के साथ-साथ ऐसा सामयिक विषय देने के लिए आपको ढेरों साधुवाद. साथ ही, सभी रचनाकारों को भी हार्दिक बधाई.  आपसे सादर…"
Feb 2
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय चन्द्रेश कुमार छ्तलानी जी. हार्दिक आभार. सादर."
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"कथा पूर्णतः वास्तविक हो गयी तो वह कथा ही कहाँ रह जाएगी. इस बात से मैं भी सहमत हूँ सर. इसलिए 'वास्तविक' से यहाँ पर तात्पर्य 'वास्तविकता के समीप' से है. दूसरी बात, रचना यह स्वयं निर्धारित करती है कि वो वास्तविकता के निकट जाना चाहती…"
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"मार्गदर्शन हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"शुक्रगुज़ार हूँ आपका. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"रचना के मर्म तक पहुँचने के लिए आपका हृदय से आभारी हूँ आ. प्रतिभा मैम. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"आदरणीय सतविन्द्र जी, एक विधा के रूप में लघुकथा को लेकर मेरी जो भी थोड़ी-बहुत समझ है वो इसी मंच की देन है. आपकी ही तरह मैं भी इसे अभी समझने की कोशिश मात्र ही कर रहा हूँ. इसलिए इस पर बहुत कुछ तो नहीं कह पाऊँगा. फिर भी, मेरी अल्प समझ के अनुसार, यह गद्य…"
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय ओमप्रकाश क्षत्रिय जी. हार्दिक आभार. सादर."
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"आ. शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी की बात से मैं भी सहमत हूँ आ. कल्पना मैम. लघुकथा का अध्ययन वो बहुत बारीकी से करते हैं. रचना को पसन्द करने के लिए आपका हृदय से आभारी हूँ. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तेज वीर सिंह जी. हृदय से आभारी हूँ. सादर."
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"आ. वीरेंदर वीर मेहता जी, जिस वाक्य का आपना ज़िक्र किया है उसे संशोधन के वक़्त मैं हटा दूँगा. भविष्य में लेखकीय प्रवेश से बचने की पूरी कोशिश रहेगी. लघुकथा आपको पसन्द आयी इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. हार्दिक आभार. सादर."
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"बहुत-बहुत शुक्रिया आ. तस्दीक़ अहमद खान जी. लघुकथा को बेहतर करने की पूरी कोशिश करूँगा. सादर आभार."
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"//ऐसे नए नए कथानक कहाँ से निकाल कर लाते हैं?// बस आपका स्नेह और आशीर्वाद है सर. विषयवस्तु को स्पष्ट करने के चक्कर में कथा कुछ विस्तार पा गयी है. संकलन के बाद इसे संशोधित रूप में प्रस्तुत करूँगा. गृहयुद्ध लघुकथा एक अहम् हिस्सा है इसलिए मुझे लगता है…"
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"बहुत-बहुत शुक्रिया आ. सुरेन्द्र जी. हार्दिक आभार. सादर."
Jan 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"आ. शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी, सच कहूँ तो इतने विस्तृत कथानक (विश्वयुद्ध, उसका कारण और युद्धोपरांत परिस्थिति) को एक लघुकथा में समेट पाना मेरे सामर्थ्य से बाहर की चीज थी. इसलिए यदि कहीं प्रवाह बाधित हो रहा है तो उसे मैं स्वीकार करता हूँ. जहाँ तक शैली की…"
Jan 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

विद्वता के पैमाने /लघुकथा

एथेन्स के प्रसिद्ध चैराहे पर सुकरात जोकर बन कर खड़ा था। जो भी आता उसके ठिगने कद, चपटी नाक, मैले-कुचैले पुराने कपड़े, निकली हुई तोंद और नंगे पैर को देख कर हँसे बिना न रह पाता। ‘‘कौन हो तुम?’’ भीड़ में से किसी ने पूछा।



‘‘एक दार्शनिक।’’ उसे लगा कि नाम बताने की अपेक्षा यदि वह दार्शनिक कहेगा तो लोग उसे कुछ गंभीरता से लेंगे मगर वह गलत था। चैराहा एक बार पुनः ठहाकों से गूँज उठा।

‘‘वो देखो, दार्शनिक उन्हें कहते हैं।’’ विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर्स को बाहर आते देख…

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Posted on January 16, 2018 at 5:22pm — 10 Comments

बे-आवाज़ सिक्के /लघुकथा

‘अगर मैंने पाँच का यह सिक्का पाखाने में ख़र्च कर दिया और मुझे आज भी काम नहीं मिला तो फिर मैं क्या करूँगा?’ सार्वजनिक शौचालय के बाहर खड़ा जमाल अपनी हथेली पर रखे उस पाँच के सिक्के को देखकर सोच रहा था। तभी उसके पेट में फिर से दर्द उभरा। वह चीख उठा, ‘‘उफ! अल्लाह ने पाखाने और भूख का सिस्टम बनाया ही क्यों?’’



जिस उम्र में जवानी शुरु होती है उस उम्र में उसके चेहरे पर बुढ़ापा था। लेबर चैराहे के कुछ अन्य मजदूरों की तरह पिछले कई दिनों से जमाल को भी कोई काम नहीं मिला था। घर भेजने के बाद जो…

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Posted on January 14, 2018 at 1:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल : अब दवाओं का नहीं मुझ पे असर होने को है

अरकान : 2122 2122 2122 212

एक तरफ़ा इश्क़ मेरा बेअसर होने को है

ख़त्म यानी ज़िन्दगी का ये सफ़र होने को है

कहने को तो सर पे सूरज आ गया है दोस्तो

ज़िन्दगी में पर हमारी कब सहर होने को है

हर किसी ने हाथ में पत्थर उठाये देखिये

और फिर उनका निशाना मेरा सर होने को है

आपको चाहा था मैंने बेतहाशा टूट कर

अब यही तकलीफ़ मुझको उम्र भर होने को है

करना है कुछ आपको तो बस दुआएँ कीजिए

अब दवाओं का कहाँ मुझ पे असर होने को…

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Posted on December 26, 2017 at 10:00pm — 18 Comments

मृत्यु : पूर्व और पश्चात्

मृत्यु...

जीवन का वह सत्य

जो सदियों से अटल है

शिला से कहीं अधिक।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य बद होता है

बदनाम होता है

बुरी लगती हैं उसकी बातें

बुरा उसका व्यवहार होता है।

मृत्यु पूर्व...

जीवन होता है

शायद जीवन

नारकीय

यातनीय

उलाहनीय

अवहेलनीय।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य, मनुष्य नहीं होता

हैवान होता है

हैवान, जो हैवानियत की सारी हदें

पार कर देना चाहता…

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Posted on October 22, 2017 at 9:33am — 18 Comments

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