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Ajay Tiwari
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Ajay Tiwari replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय राणाप्रताप जी, संकलन की त्वरित प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई.   ग़ज़ल सं. 72 का ये मिसरा 'दिए में ढाल दे मेरी मिट्टी ' बेबहर नहीं है . इस बहर में पहले रुक्न के तौर पर फ़ाइलातुन(2122) कि जगह फ़इलातुन(1122) लाया…"
2 hours ago
Ajay Tiwari replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय राणाप्रताप जी, संकलन की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई.   मेरी दूसरी ग़ज़ल का ये मिसरा 'दिए में ढाल दे मेरी मिट्टी ' बेबहर नहीं है . इस बहर में पहले रुक्न के तौर पर फ़ायलातुन(2122) कि जगह फ़इलातुन(1122) लाया जा सकता…"
3 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय महेंद्र जी, हार्दिक धन्यवाद "
10 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय समर साहब, हार्दिक धन्यवाद.  "
10 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय गणेश जी, ये प्रस्तुति भी बहुत खूब हुई है. हार्दिक बधाई "
10 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय लक्ष्मण जी, बहुत अच्छे अशआर हुए हैं. चौथा शेर ख़ास तौर पर अच्छा लगा. हार्दिक बधाई. "
10 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय महेंद्र जी, ये प्रस्तुति भी बहुत अच्छी है. शेष बातों के बारे में योगराज जी विस्तार से कह चुके हैं. हार्दिक बधाई.  "
10 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय दंडपाणी जी, इस प्रयास के लिए हार्दिक बधाई.  "
10 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय गुरप्रीत जी, उम्दा ग़ज़ल हुई है. ख़ास तौर से चौथा शेर कमाल का है. हार्दिक बधाई  "
10 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय नादिर साहब. खूबसूरत अशआर हुए. चौथा शेर ख़ास तौर पर अच्छा लगा.हार्दिक बधाई "
10 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय योगराज जी, मुझे तीसरी पहली दोनों से भी अच्छी लगी. वजह ये कि इसमें आपकी जबान पूरे आबो-ताब पर है. हास्य-व्यंग को अक्सर हाशिये पर धकेल दिया जाता है लेकिन जबान का असली आस्वाद ऐसी रचानाओं में ही होता है. एक प्रथम श्रेणी की हास्य-ग़ज़ल के लिए हार्दिक…"
10 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीया राजेश जी, खूबसूरत अशआर हुए हैं. पुछल्ला भी खूब है. हार्दिक बधाई."
11 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय अफ़रोज़ साहब, हार्दिक धन्यवाद."
11 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय आकाश जी, उम्दा ग़ज़ल हुई है. तीसरा शेर ख़ास तौर पर अच्छा लगा. हार्दिक बधाई "
11 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय गजेन्द्र जी, उम्दा अशआर हुए हैं. कुछ टंकण की त्रुटियाँ है 'दीया' अपने आपमें ठीक है लेकिन बह्र के लिहाज़ से 'दिया' रखना ही उचित होगा.  बड़ता >बढ़ता. मेंरा >मेरा."
11 hours ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय महेंद्र जी, ग़ज़ल आप तक पहुँँची तो सार्थक हुई. हार्दिक धन्यवाद. "
11 hours ago

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Male
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Ballia
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ग़ज़ल - सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम - अजय तिवारी

फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ा

 22      22      22       22     22      22      22      2

सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम

लेकिन  तन्हा-तन्हा लड़ कर,  तन्हा-तन्हा  हारे हम

 

ज़र्रा-ज़र्रा  बिखरे  है  हम,  चारो ओर खलाओं में

लेकिन जिस दिन होंगे इकठ्ठा, बन जायेंगे सितारे हम

 

कितने दिन वो मूँग दलेंगे, कमजोरों की छाती पर

कितने दिन और चुप  बैठेंगे, बनके यूं बेचारे हम 

 

कबतक और ये…

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Posted on March 26, 2018 at 11:49am — 22 Comments

केदारनाथ सिंह के लिए - अजय तिवारी

केदारनाथ सिंह के लिए

वैसे तो आजकल किसी को क्या फर्क पड़ता है -

एक कवि के न होने से !  

लेकिन जैसे ख़त्म हो गया है धरती का सारा नमक 

और अलोने हो गए हैं  

सारे शब्द...

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on March 21, 2018 at 4:40pm — 16 Comments

ग़ज़ल - जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी - अजय तिवारी

मुतफाइलुन   मुतफाइलुन    मुतफाइलुन   मुतफाइलुन

11212         11212          11212         11212

जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी

तभी धूप सुब्ह की गुनगुनी,   उन्हीं सिहरनों पे उतर गयी

 

खिली सरसों फिर से कछार में, भरे रंग फिर से बहार में

घुली खुश्बू फिर से बयार में, कोई टीस फिर से उभर गयी   

 

उसी एक पल में ही जी लिए, उसी एक पल में ही मर गए

वही एक पल मेरी सांस में,  तेरी सांस जब थी ठहर गयी

 

जमी…

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Posted on March 20, 2018 at 12:28pm — 9 Comments

ग़ज़ल - अक्सर खुद से खुद ही लड़ कर, खुद से खुद ही हारे हम - अजय तिवारी

फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ा

 22      22      22       22     22      22      22      2  

अक्सर खुद से खुद ही लड़ कर, खुद से खुद ही हारे हम

और किसी  से  शिकवा कैसा, अपने हाथ  के मारे हम

 

हम अपनी पर आ जाते तो, दुनिया बदल भी सकते थे

लेकिन थी कोई बात कि जिससे, बन के रहे बेचारे हम

तन्हाई ने कर डाला है,  जिस्म को अब  मिट्टी का ढेर 

साथ तेरे  चाहा था  मिल कर,  छूते  चाँद-सितारे …

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Posted on December 27, 2017 at 2:12pm — 26 Comments

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At 12:21pm on September 5, 2018, Ravi Shukla said…

namaskar 

is computer me hindi font nahi hai is liye kshama 

aapka hardik abhaar mitro me shamil karne ke liye 

9024323219 nambar ha kripya is par bhi sampark karne ka shram karen 

dhanywad 

ravi 

At 11:16pm on November 1, 2017, Prakash P said…
आदरणीय श्री अजय तिवारी जी सदर प्रणाम..माफ़ कीजियेगा ये मेरा
प्रथम प्रयास था अतः बहुत कमियां हैं मेरे लेखन में ..आपका सुझाव हृदय से स्वीकार करता हूँ .ग़ज़ल की कक्षा अावश्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी मेरे लिए, धनयवाद !नहीं उपस्थित होने का कारण बैंक का थकाऊ कार्य है ..उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.
 
 
 

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आ. भाई राणा प्रताप जी, त्वरित संकलन के लिए कोटि कोटि बधाई । नेट की समस्या ने अनेक गजलों तक पहुँचने…"
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KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"इस सफल आयोजन के लिए सभी को हार्दिक बधाई| आदरणीय समर भाई जी को विशेष बधाई |  बहुत उम्दा गज़लें…"
3 hours ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"जिंदाबाद राणा भाई जिंदाबाद."
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