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Ajay Tiwari
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Latest Activity

Ajay Tiwari commented on amita tiwari's blog post कुछ भी नहीं बोलती जानकी कभी
"आदरणीय सुशील जी, इस प्रभावी काव्य प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई.  इस में एक बात खटकने वाली लगी - सीता अग्नि परीक्षा के वक़्त चुप नहीं रही थी. सीता ने उस वक़्त जो कहा था और जिस तरह कहा था वो विश्व साहित्य की अमूल्य धरोहर है और आज भी उतना ही ज्वलंत…"
34 minutes ago
Ajay Tiwari commented on विनय कुमार's blog post असली विसर्जन- लघुकथा
"आदरणीय विनय जी, साधारण के माध्यम से असाधारण को प्रस्तुत करना कोई आप से सीखे. आपकी कथाएं धीमे सुर के मार्मिक संगीत की तरह है. एक और छू लेने वाली कथा के लिए हार्दिक बधाई. "
1 hour ago
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post क्या मन है बीमार पड़ौसी - गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हर्दिकं बधाई . लड़ना भिड़ना पागलपन हैइसमें सब की हार पड़ौसी सादगी से कहा गया बहुत अच्छा शेर है.  सादर "
1 hour ago
Ajay Tiwari commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत...तितलियाँ अब मौन हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी, गीत के लिए हार्दिक बधाई. ये थोड़ा जल्दी में लिखा गया लगता है. मसलन मुखड़े की पंक्ति को देखें : शोर भौरों का सुनोगे तितलियाँ अब मौन हैं आप कहना ये चाह रहे हैं कि अब कुछ ऐसा हो रहा है जो ग़लत है. लेकिन जो प्रतीक आपने चुने हैं उनसे…"
1 hour ago
Ajay Tiwari commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - पहल हो गई
"आदरणीय बसंत जी, खूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई."
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ताक रही गौरैया प्यासी - गीत
"आदरणीय बसंत जी, एक और अच्छी गीत-प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई."
3 hours ago
Ajay Tiwari commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली जी, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई.  "
3 hours ago
Ajay Tiwari commented on Samar kabeer's blog post "हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल
"आदरणीय समर साहब, ये ग़ज़ल हिंदी के प्रति आपके लगाव का आईना है. आप जैसे लोगों से ही देश की साझा संस्कृति जीवित है. हार्दिक बधाई.   "
3 hours ago
Ajay Tiwari replied to Ajay Tiwari's discussion मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा इस्तेमाल की गई बह्रें और उनके उदहारण in the group ग़ज़ल की कक्षा
"आदरणीय महेंद जी, आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी से यह कार्य सार्थक हुआ. हार्दिक धन्यवाद.      "
Sep 9
Ajay Tiwari left a comment for Ravi Shukla
"आदरणीय रवि जी, आपकी मैत्री हासिल करना किसका सौभाग्य नहीं होगा. और मुझे ख़ुशी है कि ये सौभाग्य अब मुझे भी प्राप्त है. हार्दिक आभार."
Sep 9
Mahendra Kumar replied to Ajay Tiwari's discussion मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा इस्तेमाल की गई बह्रें और उनके उदहारण in the group ग़ज़ल की कक्षा
"आदरणीय अजय जी, इस शोधपरक लेख के लिए आपकी जितनी भी तारीफ़ की जाए वो कम है। बहुत से लोगों की तरह ग़ालिब मेरे भी प्रिय शाइर हैं। उनके द्वारा प्रयुक्त बह्रों को एक स्थान पर देखना निश्चित ही बेहद सुखद एहसास है। इस सद्प्रयास हेतु आपको दिल से ढेरों बधाई…"
Sep 7
Ravi Shukla left a comment for Ajay Tiwari
"namaskar  is computer me hindi font nahi hai is liye kshama  aapka hardik abhaar mitro me shamil karne ke liye  9024323219 nambar ha kripya is par bhi sampark karne ka shram karen  dhanywad  ravi "
Sep 5
Ravi Shukla and Ajay Tiwari are now friends
Sep 5
Ajay Tiwari replied to Ajay Tiwari's discussion मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा इस्तेमाल की गई बह्रें और उनके उदहारण in the group ग़ज़ल की कक्षा
"आदरणीय समर साहब, प्रस्तुति को मान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद.    ग़ालिब के दीवान की सारी ग़ज़ले पूरी की पूरी तो इसमें नहीं हैं लेकिन हर ग़ज़ल से कम से कम एक शेर आवश्य है. इस तरह से यह ग़ालिब के दीवान का अरूजी वर्गीकरण भी है. आपकी टिप्पणी का…"
Sep 5
Samar kabeer replied to Ajay Tiwari's discussion मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा इस्तेमाल की गई बह्रें और उनके उदहारण in the group ग़ज़ल की कक्षा
"जनाब अजय तिवारी साहिब आदाब,आपका एक और कारनामा-ए-अज़ीम,अभी 'मीर'साहिब वाला आलेख पढ़ रहा हूँ,ये आलेख उसके बाद पढूँगा उसके बाद विस्तृत टिप्पणी के किये पुनः हाज़िरी दूँगा,इस कारनामे पर दिल से ढेरों बधाई स्वीकार करें,एक सवाल था कि…"
Sep 3
Ajay Tiwari commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- इतना भी समझदार नहीं था
"आदरणीय बसंत जी, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई.   'इस देश में’ इन्साफ की’ दुनिया है निराली   पकड़ा वो’ गया है जो’  गुनहगार नहीं था' ये शेर समकालीन घटनाओं पर एक अच्छी टिप्पणी है. सादर"
Sep 3

Profile Information

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Male
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U P
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Ballia
Profession
IT

Ajay Tiwari's Blog

ग़ज़ल - सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम - अजय तिवारी

फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ा

 22      22      22       22     22      22      22      2

सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम

लेकिन  तन्हा-तन्हा लड़ कर,  तन्हा-तन्हा  हारे हम

 

ज़र्रा-ज़र्रा  बिखरे  है  हम,  चारो ओर खलाओं में

लेकिन जिस दिन होंगे इकठ्ठा, बन जायेंगे सितारे हम

 

कितने दिन वो मूँग दलेंगे, कमजोरों की छाती पर

कितने दिन और चुप  बैठेंगे, बनके यूं बेचारे हम 

 

कबतक और ये…

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Posted on March 26, 2018 at 11:49am — 22 Comments

केदारनाथ सिंह के लिए - अजय तिवारी

केदारनाथ सिंह के लिए

वैसे तो आजकल किसी को क्या फर्क पड़ता है -

एक कवि के न होने से !  

लेकिन जैसे ख़त्म हो गया है धरती का सारा नमक 

और अलोने हो गए हैं  

सारे शब्द...

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on March 21, 2018 at 4:40pm — 16 Comments

ग़ज़ल - जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी - अजय तिवारी

मुतफाइलुन   मुतफाइलुन    मुतफाइलुन   मुतफाइलुन

11212         11212          11212         11212

जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी

तभी धूप सुब्ह की गुनगुनी,   उन्हीं सिहरनों पे उतर गयी

 

खिली सरसों फिर से कछार में, भरे रंग फिर से बहार में

घुली खुश्बू फिर से बयार में, कोई टीस फिर से उभर गयी   

 

उसी एक पल में ही जी लिए, उसी एक पल में ही मर गए

वही एक पल मेरी सांस में,  तेरी सांस जब थी ठहर गयी

 

जमी…

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Posted on March 20, 2018 at 12:28pm — 9 Comments

ग़ज़ल - अक्सर खुद से खुद ही लड़ कर, खुद से खुद ही हारे हम - अजय तिवारी

फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ा

 22      22      22       22     22      22      22      2  

अक्सर खुद से खुद ही लड़ कर, खुद से खुद ही हारे हम

और किसी  से  शिकवा कैसा, अपने हाथ  के मारे हम

 

हम अपनी पर आ जाते तो, दुनिया बदल भी सकते थे

लेकिन थी कोई बात कि जिससे, बन के रहे बेचारे हम

तन्हाई ने कर डाला है,  जिस्म को अब  मिट्टी का ढेर 

साथ तेरे  चाहा था  मिल कर,  छूते  चाँद-सितारे …

Continue

Posted on December 27, 2017 at 2:12pm — 26 Comments

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At 12:21pm on September 5, 2018, Ravi Shukla said…

namaskar 

is computer me hindi font nahi hai is liye kshama 

aapka hardik abhaar mitro me shamil karne ke liye 

9024323219 nambar ha kripya is par bhi sampark karne ka shram karen 

dhanywad 

ravi 

At 11:16pm on November 1, 2017, Prakash P said…
आदरणीय श्री अजय तिवारी जी सदर प्रणाम..माफ़ कीजियेगा ये मेरा
प्रथम प्रयास था अतः बहुत कमियां हैं मेरे लेखन में ..आपका सुझाव हृदय से स्वीकार करता हूँ .ग़ज़ल की कक्षा अावश्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी मेरे लिए, धनयवाद !नहीं उपस्थित होने का कारण बैंक का थकाऊ कार्य है ..उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.
 
 
 

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"मन को आनन्दित करती बहुत ही सुन्दर रचना..."
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"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन । आपकी उपस्थिति से मन आस्वस्थ हुआ। स्नेह के लिए आभार ।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ताक रही गौरैया प्यासी - गीत
"आ. भाई बसंत जी, बेहतरीन गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
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