For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Ajay Tiwari
Share

Ajay Tiwari's Friends

  • Prakash P
  • Mahendra Kumar
  • Ravi Shukla
  • Naveen Mani Tripathi
  • Samar kabeer
  • दिनेश कुमार
  • Nilesh Shevgaonkar
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
  • नादिर ख़ान
  • rajesh kumari
  • Ram Awadh VIshwakarma
 

Ajay Tiwari's Page

Latest Activity

Ajay Tiwari commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post याद के खेत गोड़ देता हूँ (ग़ज़ल) पंकज मिश्र: इस्लाह की गुज़ारिश के साथ पेश
"आदरणीय पंकज जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. ग़ज़ल में एक अतिशय निराशा का भाव है लेकिन वो शायद 'ड़' के काफ़िये की वज़ह ठीक से अभिव्यक्त नहीं हो पाया है. शिल्प का वैचित्र्य कथ्य पर भारी पड़ गया है. सादर "
Saturday
Ajay Tiwari commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६७
"आदरणीय राज़ साहब, खूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. मनाएं जश्न भी क्या हम अँधेरी रातों का नहीं है पास में बाती, दिया भी ख़ाली है???  रदीफ़ और काफ़िया?  "
Saturday
Ajay Tiwari commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी / दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई.  "
Nov 8
Ajay Tiwari commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post हमेशा तो नहीं होती बुरी तकरार की बातें(ग़ज़ल)
"आदरणीय सतविन्द्र जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 8
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जलूँ  कैसे  तुम्हारे बिन - लक्ष्मण धामी"मुसाफिर" ( गजल )
"आदरणीय लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 8
Ajay Tiwari commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (ख़त्म कर के ही मुहब्बत का सफ़र जाऊंगा)
"आदरणीय तस्दीक साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 8
Ajay Tiwari commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६६
"आदरणीय राज़ साहब, खूबसूरत शेर हुए हैं. हार्दिक बधाई. "
Nov 8
Ajay Tiwari replied to Ajay Tiwari's discussion उर्दू शायरी में इस्तेमाल की गईं बह्रें और उनके उदहारण -1 in the group ग़ज़ल की कक्षा
"आदरणीय राज़ साहब, आपकी त्वरित प्रतिक्रिया ने इसे सार्थकता दी. हार्दिक आभार. "
Nov 8
राज़ नवादवी replied to Ajay Tiwari's discussion उर्दू शायरी में इस्तेमाल की गईं बह्रें और उनके उदहारण -1 in the group ग़ज़ल की कक्षा
"आदरणीय अजय तिवारी जी, आदाब. इस बेहतरीन अनुसंधान परक कार्य के लिए आपको हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद. सादर. "
Nov 8
Ajay Tiwari added a discussion to the group ग़ज़ल की कक्षा
Thumbnail

उर्दू शायरी में इस्तेमाल की गईं बह्रें और उनके उदहारण -1

कोशिश ये रही है कि प्रमुख शायरों के स्तरीय शेर ही चुने जाएँ. साथ ही हर दौर की शायरी के अच्छे शेरों का एक प्रतिनिधि चयन करने का भी प्रयास रहा है. बहुत कुछ अच्छा होते हुए भी विस्तार भय से छोड़ देना पड़ा है. मुतक़ारिब मुसम्मन सालिमफ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन122        122       122       122ज़मीन-ए-चमन गुल खिलाती है क्या क्याबदलता है रंग आसमाँ कैसे कैसे न गोर-ए-सिकंदर न है क़ब्र-ए-दारामिटे नामियों के निशाँ कैसे कैसे - हैदर अली आतिशहुए नामवर बे-निशाँ कैसे कैसे ज़मीं खा गई आसमाँ कैसे कैसे - अमीर…See More
Nov 8
Ajay Tiwari commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६५
"आदरणीय राज़ साहब. अच्छी ग़ज़ल हुई है. बह्रे रमल की सालिम बह्रों में उर्दू में कम ग़ज़लें कही गयीं हैं. हार्दिक बधाई."
Nov 3
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कहीं हद तोड़ कर तट भी अगर मझधार हो जाता - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. मतले में 'बद्दुआ' स्त्रीलिंग है इसलिए सानी की रदीफ़ 'होती' हो जायेगी. एक विकल्प ये हो सकता है : 'तो देना बद्दुआ भी इक बड़ा हथियार हो जाता'"
Nov 3
Ajay Tiwari commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"आदरणीय निलेश जी, उम्दा ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 3
Ajay Tiwari commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- नहीं आती
"आदरणीय बसंत जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है. आख़िरी दो शेर ख़ास तौर पर अच्छे लगे. हार्दिक बधाई.  "
Nov 3
Ajay Tiwari commented on Balram Dhakar's blog post काँच पत्थर से भले टकरा गया। (ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"आदरणीय बलराम जी,  वासिते > वास्ते  फिर किसी औरत का दामन जल गया > जल गया दामन किसी औरत का फिर  शायरी के मायने समझा गया > शायरी है क्या मुझे/हमें समझा गया  अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 3
Ajay Tiwari commented on Balram Dhakar's blog post जिसतरह चाँद पिघलकर किसी छत पर उतरे। ( ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"आदरणीय बलराम जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. "
Nov 3

Profile Information

Gender
Male
City State
U P
Native Place
Ballia
Profession
IT

Ajay Tiwari's Blog

ग़ज़ल - दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

नादान से बच्चे भी हँसते हैं, जब वो ऐसा कहता है

दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

 

मुँह उसका है अपने मुंह से, जो कहता है कहने दो

कहने को तो अब वो खुद को, सबसे अच्छा कहता है

 

चिकने पत्थर, फैली वादी, उजला झरना, सहमे पेड़

लहू से भीगा हर इक पत्ता, अपना किस्सा कहता है

 

सूखे आंसू, पत्थर आँखें, लब हिलते हैं बेआवाज

लेकिन उन पे जो गुजरी है, हर इक चेहरा कहता…

Continue

Posted on October 27, 2018 at 7:00am — 30 Comments

ग़ज़ल - सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम - अजय तिवारी

फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ा

 22      22      22       22     22      22      22      2

सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम

लेकिन  तन्हा-तन्हा लड़ कर,  तन्हा-तन्हा  हारे हम

 

ज़र्रा-ज़र्रा  बिखरे  है  हम,  चारो ओर खलाओं में

लेकिन जिस दिन होंगे इकठ्ठा, बन जायेंगे सितारे हम

 

कितने दिन वो मूँग दलेंगे, कमजोरों की छाती पर

कितने दिन और चुप  बैठेंगे, बनके यूं बेचारे हम 

 

कबतक और ये…

Continue

Posted on March 26, 2018 at 11:49am — 22 Comments

केदारनाथ सिंह के लिए - अजय तिवारी

केदारनाथ सिंह के लिए

वैसे तो आजकल किसी को क्या फर्क पड़ता है -

एक कवि के न होने से !  

लेकिन जैसे ख़त्म हो गया है धरती का सारा नमक 

और अलोने हो गए हैं  

सारे शब्द...

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on March 21, 2018 at 4:40pm — 16 Comments

ग़ज़ल - जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी - अजय तिवारी

मुतफाइलुन   मुतफाइलुन    मुतफाइलुन   मुतफाइलुन

11212         11212          11212         11212

जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी

तभी धूप सुब्ह की गुनगुनी,   उन्हीं सिहरनों पे उतर गयी

 

खिली सरसों फिर से कछार में, भरे रंग फिर से बहार में

घुली खुश्बू फिर से बयार में, कोई टीस फिर से उभर गयी   

 

उसी एक पल में ही जी लिए, उसी एक पल में ही मर गए

वही एक पल मेरी सांस में,  तेरी सांस जब थी ठहर गयी

 

जमी…

Continue

Posted on March 20, 2018 at 12:28pm — 9 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 12:21pm on September 5, 2018, Ravi Shukla said…

namaskar 

is computer me hindi font nahi hai is liye kshama 

aapka hardik abhaar mitro me shamil karne ke liye 

9024323219 nambar ha kripya is par bhi sampark karne ka shram karen 

dhanywad 

ravi 

At 11:16pm on November 1, 2017, Prakash P said…
आदरणीय श्री अजय तिवारी जी सदर प्रणाम..माफ़ कीजियेगा ये मेरा
प्रथम प्रयास था अतः बहुत कमियां हैं मेरे लेखन में ..आपका सुझाव हृदय से स्वीकार करता हूँ .ग़ज़ल की कक्षा अावश्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी मेरे लिए, धनयवाद !नहीं उपस्थित होने का कारण बैंक का थकाऊ कार्य है ..उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Neelam Upadhyaya commented on TEJ VEER SINGH's blog post पहल - लघुकथा -
" आदरणीय तेजवीर सिंह जी, अच्छी संदेशपरक लघुकथा की प्रस्तुति पैर हार्दिक बधाई स्वीकार…"
2 hours ago
क़मर जौनपुरी posted blog posts
3 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या- माह अक्टूबर,  2018- एक प्रतिवेदन  -डा. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

21 अक्टूबर 2018, दिन रविवार को लोकप्रिय कथाकार डॉ. अशोक शर्मा के आवास, 81 विनायकपुरम, विकासनगर.…See More
3 hours ago
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post होश की मैं पैमाइश हूँ:........ग़ज़ल, पंकज मिश्र..........इस्लाह की विनती के साथ
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब, सबसे पहले आपकी ग़ज़ल के क़वाफ़ी के अर्थ देखते हैं…"
4 hours ago
राज़ नवादवी commented on Sushil Sarna's blog post 3 क्षणिकाएँ....
"अनुभूतियाँ उक्केरती हैं जो आपकी क्षणिकाएँ, खुले नभ में जैसे चमकें हैं रात को मणिकाएं ! बहुत सुन्दर…"
5 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

11212 11212. 11212. 11212हुई तीरगी की सियासतें उसे बारहा यूँ निहार कर ।कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे…See More
6 hours ago
राज़ नवादवी posted blog posts
7 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted blog posts
7 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post एक ग़ज़ल - शिज्जु शकूर
"जीने की चाह में हुआ बंजारा आदमी बस घूमता दिखे है मक़ामात से अलग। उम्दा शेर के साथ अच्छी ग़ज़ल।…"
8 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on Sushil Sarna's blog post 3 क्षणिकाएँ....
"बेहतरीन रचना।"
8 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
9 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब डॉ छोटेलाल सिंह साहब। खुशी हुई आपसे मिलकर।"
10 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service