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दिनेश कुमार
  • Male
  • पुण्डरी। हरियाणा
  • India
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Ravi Shukla commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- बचपन था कोई झौंका सबा का बहार का ( दिनेश कुमार )
"आदरणीय दिनेश जी बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही आपने । शेर दर शेर मुबारक बाद हाज़िर है । समर साहब्बके सुझाव से मिसरों में और भी खूबसूरती आ गई है । बधाई ।"
Jul 7
रामबली गुप्ता commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- बचपन था कोई झौंका सबा का बहार का ( दिनेश कुमार )
"भाई दिनेश कुमार जी उम्दा ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकारें। आद0 समर भाई साहब के सुझावों से सहमत हूँ।"
Jul 6
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- बचपन था कोई झौंका सबा का बहार का ( दिनेश कुमार )
"आद0 दिनेश जी सादर अभिवादन। गजल पर दाद के साथ मूबरकबाद कबूल फरमायें।"
Jul 2
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- बचपन था कोई झौंका सबा का बहार का ( दिनेश कुमार )
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय समर सर जी। आपकी मुहब्बतों को दिल से सलाम सर । जल्द ही मिसरे आपके अनुसार दुरुस्त करता हूँ सर। नवाज़िश।"
Jul 2
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- बचपन था कोई झौंका सबा का बहार का ( दिनेश कुमार )
"जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,ग़ज़ल अच्छी हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मतले का ऊला मिसरा:- 'बचपन था कोई झोंका सबा का बहार का' इस मिसरे में 'सबा'शब्द भर्ती का है, इस मिसरे को यूँ किया जा सकता है :- "बचपन था या कि था…"
Jul 1
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- बचपन था कोई झौंका सबा का बहार का ( दिनेश कुमार )
"खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय दिनेश जी"
Jul 1
दिनेश कुमार posted a blog post

ग़ज़ल --- बचपन था कोई झौंका सबा का बहार का ( दिनेश कुमार )

221____2121____1221____212बचपन था कोई झौंका सबा का बहार कालौट आए काश फिर वो ज़माना बहार काखिड़की में इक गुलाब महकता था सामनेबरसों से बन्द है वो दरीचा बहार काख़ुशबू सबा की, ताज़गी-ए-गुल, बला का हुस्नदिल के चमन को याद है चेहरा बहार काअर्सा गुज़र गया प लगे कल की बात होउस बाग़े-हुस्न में मेरा दर्जा बहार कादौरे-ख़िज़ाँ में दिल के बहलने का है सबबआँखों में मेरी क़ैद नज़ारा बहार काकलियाँ को बाग़बाँ ही मसलता है जब कभीरोता है जार जार कलेजा बहार कामर्ज़ी पे गुलसिताँ की भला कब है मुनहसिरआना बहार का या न…See More
Jun 30
surender insan commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"वाह वहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है जी। शेर दर शेर दिली दाद कबूल फरमाये जी।"
Jun 26
जयनित कुमार मेहता commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- मैं आँखों में सपने बोना चाहता हूँ
"आकांक्षाओं से ओत-प्रोत बेहद भावपूर्ण ग़ज़ल कही है आदरणीय दिनेश जी। आखिरी शेर के कहने ही क्या,,एकदम से चौंका दिया आपने।। दिली मुबारकबाद आपको।। सादर।।"
Jun 25
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. महेंदर जी। वाह वाह गिरह में शायद ऐब शुतुरमुर्ग आ गया है शायद।"
Jun 24
vijay nikore commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"गज़ल बहुत अच्छी बनी है।  मुबारकबाद ।"
Jun 24
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दुनिया से जो बशर गये, लौटे हैं क्या कभी ? ( दिनेश कुमार )
"बेहतरीन..हर एक शे'र लाजबाब बधाइयाँ तब आएगा यक़ीं कि ग़ज़लगो हैं आप भी दिल के तमाम ज़ख़्म छुपा कर ग़ज़ल कहें..जबरजस्त"
Jun 23
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दुनिया से जो बशर गये, लौटे हैं क्या कभी ? ( दिनेश कुमार )
"शुभान  अल्लाह . क्या मुकम्मिल गजल कही है , वाह वाह  और वाह ."
Jun 23
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- अच्छे कर्मों का दिनेश अच्छा नतीज़ा होगा ( दिनेश कुमार )
"वाह वाह  आपने महफिल लूट ली  आदरणीय"
Jun 23
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- मैं आँखों में सपने बोना चाहता हूँ
"अच्छी रचना है आ० दिनेश जी"
Jun 23
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"दुनिया के रंग-मंच पे आ कर चले गये किरदार जो मिला था निभा कर चले गये कितने ही नामदेव तुकाराम औ'र कबीर जीने का हमको ढंग बता कर चले गये जीवन की पाठशाला का सीखा न ककहरा कुछ लोग सिर्फ़ वक़्त बिता कर चले गये सच बोलने का उनको ही तमग़ा दिया गया जो आईने…"
Jun 23

Profile Information

Gender
Male
City State
कैथल हरियाणा
Native Place
कैथल
Profession
अध्यापक

दिनेश कुमार's Blog

ग़ज़ल --- बचपन था कोई झौंका सबा का बहार का ( दिनेश कुमार )

221____2121____1221____212



बचपन था कोई झौंका सबा का बहार का

लौट आए काश फिर वो ज़माना बहार का



खिड़की में इक गुलाब महकता था सामने

बरसों से बन्द है वो दरीचा बहार का



ख़ुशबू सबा की, ताज़गी-ए-गुल, बला का हुस्न

दिल के चमन को याद है चेहरा बहार का



अर्सा गुज़र गया प लगे कल की बात हो

उस बाग़े-हुस्न में मेरा दर्जा बहार का



दौरे-ख़िज़ाँ में दिल के बहलने का है सबब

आँखों में मेरी क़ैद नज़ारा बहार का



कलियाँ को बाग़बाँ ही… Continue

Posted on June 30, 2017 at 8:08pm — 6 Comments

ग़ज़ल -- मैं आँखों में सपने बोना चाहता हूँ

22--22--22--22--22--2



बच्चों के मन जैसा होना चाहता हूँ

बे-फ़िक्री की नींदें सोना चाहता हूँ



दुनिया के मेले में खो कर देख लिया

अब मैं ख़ुद के भीतर खोना चाहता हूँ



राग द्वेष ईर्ष्या लालच को त्याग के मैं

रूह की मैली चादर धोना चाहता हूँ



प्यार का सागर है तू मैं प्यासा सहरा

अपनी हस्ती तुझ में डुबोना चाहता हूँ



जीवन व्यर्थ गँवाया, दिल पर बोझ है ये

ख़ुद से नज़र चुरा के रोना चाहता हूँ



गीली मिट्टी है, शायद जड़ पकड़ भी… Continue

Posted on June 17, 2017 at 1:34pm — 4 Comments

ग़ज़ल -- अच्छे कर्मों का दिनेश अच्छा नतीज़ा होगा ( दिनेश कुमार )

2122____1122____1122____22



सर पे साया जो बुज़ुर्गों की दुआ का होगा

कामयाबी का सफ़र अपना सुहाना होगा



उसकी रोटी से जो आती है पसीने की महक

उसके घर ख़ुशबू-ए-बरकत का ख़ज़ाना होगा



रोज़े-महशर तेरी दौलत नहीं काम आयेगी

साथ बस तेरे सवाबों का पिटारा होगा



झूट को झूट सरे-बज़्म कहा है जिसने

देखना शर्तिया वो ज़हन से बच्चा होगा



मैंने ता-उम्र यही सोच के काटी अपनी

शब गुज़र जायेगी, क़िस्मत में सवेरा होगा



आबला-पाई मेरी और… Continue

Posted on June 15, 2017 at 11:55pm — 2 Comments

ग़ज़ल -- दुनिया से जो बशर गये, लौटे हैं क्या कभी ? ( दिनेश कुमार )

221 -------- 2121 -------- 1221 - - - - 212



मानिंद-ए-शम्अ बज़्म में आ कर ग़ज़ल कहें

आलम है तीरगी का, मिटा कर ग़ज़ल कहें



रस्ते के सब पड़ाव क़वाफ़ी की शक़्ल हों

और लक्ष्य को रदीफ़ बना कर ग़ज़ल कहें



मफ़हूम क्या हो, चर्ख़े-तख़य्युल का चाँद हो

महफ़िल को हुस्ने-ख़्वाब दिखा कर ग़ज़ल कहें



गुलकन्द की मिठास, तग़ज़्ज़ुल, जदीदियत

हर शेर में ये ख़ूबियाँ ला कर ग़ज़ल कहें



होंठों पे सामयीन के आ जाए मरहबा

अल्फ़ाज़ उँगलियों पे नचा कर… Continue

Posted on June 15, 2017 at 4:28am — 6 Comments

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At 8:41am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री दिनेश कुमार जी सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए हार्दिक बधाई।
At 2:19pm on June 18, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय दिनेश जी आपकी रचना को यह सम्मान मिलना ही था इस उपलब्धि पर आपको हार्दिक बधाई

At 1:01pm on June 18, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय दिनेश कुमार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - सर से छप्पर ले गया को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:03pm on February 20, 2015, khursheed khairadi said…

आदरणीय दिनेश जी ,आपकी सक्रियता निर्विवाद रूप से स्वीकार्य है |मेरी ग़ज़लों पर भी आपका स्नेह निरंतर बरसता रहा है |आपको महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है |आपकी उत्कृष्ट रचनाओं ने मंच को साहित्य से परिपूर्ण किया है और आगे भी करती रहेगी |सादर अभिनंदन |

At 1:19pm on February 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

AADARNEE DINESH JEE

सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई i सादर i

At 10:53pm on February 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय दिनेश भाई जी "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) चुने जाने पर बहुत बहुत  बधाई स्वीकार करें |

At 9:07pm on February 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
दिनेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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