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दिनेश कुमार 'दानिश'
  • Male
  • पुण्डरी। हरियाणा
  • India
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May 20
Mahendra Kumar commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"मैं झूठा हूँ चल ठीक है। ये बतामुझे आइना क्यों दिखाया नहीं वाह! क्या बात है. इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय दिनेश जी. सादर. "
May 15
दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post was featured

ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )

122--122--122--12निगाहों से उसने पिलाया नहींमज़ा मुझको महफ़िल में आया नहींउदासी भी कब आई रुख़ पर मेरेभले मैं कभी मुस्कुराया नहींबशर कौन है वो जिसे वक़्त नेइशारों पे अपने नचाया नहींअभी दाद अपनी सँभाले रखोअभी शे'र मैंने सुनाया नहींमैं झूठा हूँ चल ठीक है। ये बतामुझे आइना क्यों दिखाया नहींदिलों के मिलन पर है सब मुनहसिरकोई अपना कोई पराया नहींतू पत्थर है या एक हीरा 'दिनेश'कोई जौहरी जान पाया नहींमौलिक व अप्रकाशितSee More
Apr 26
दिनेश कुमार 'दानिश' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की- ऐसा लगता है फ़क़त ख़ार सँभाले हुए हैं,
"वाह वाह वाह आदरणीय निलेश भाई जी। हर शेर पर दिल से वाह निकली। वह ।"
Apr 25
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"वाह आदरणीय बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई..बधाई"
Apr 23

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"उदासी भी कब आई रुख़ पर मेरेभले मैं कभी मुस्कुराया नहींबशर कौन है वो जिसे वक़्त नेइशारों पे अपने नचाया नहींअभी दाद अपनी सँभाले रखोअभी शे'र मैंने सुनाया नहीं/// वाह आ. दिनेश भाई क्या खूब बहुत सुंदर, ये अशआर खासे पसंद आए हालाँकि पूरी ग़ज़ल अच्छी…"
Apr 21
दिनेश कुमार 'दानिश' commented on Samar kabeer's blog post क़दम उठाने से पहले विचार करना था
"वो मेरी तेग़ से मरता तो क्या मज़ा आता उसी के तीर से उसका शिकार करना था... .. वाह वाह वाह। हासिल-ए-ग़ज़ल। शानदार ग़ज़ल के लिए दिल से .. वाह वाह आ. समर सर।"
Apr 20
Nilesh Shevgaonkar commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"वाह वाह वा.. क्या खूब ग़ज़ल हुई है आ. दिनेश भाई ..बधाई "
Apr 20
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"जनाब दिनेश कुमार'दानिश'जी आदाब,ये ग्गज़ल भी उम्दा हुई,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Apr 20
Ravi Shukla commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- कभी जीत है कभी हार है ( दिनेश कुमार )
"आदरणीय दिनेश जी अच्‍छी गजल कही आपने, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।"
Apr 20
Ravi Shukla commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"अादरणीय दिनेश जी बहुत बढि़या गजल कही है आपने दिली मुबारक बाद कुबूल करें"
Apr 20
Gurpreet Singh commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- कभी जीत है कभी हार है ( दिनेश कुमार )
"आदरणीय दिनेश जी बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आपने,,,और ये बह्र भी बहुत प्यारी लगी  मेरी धड़कनें भी हैं बह्र मेंमुझे शायरी का ख़ुमार हैवाकई आपकी ग़ज़लें इस बात का सुबूत हैं "बिसात-ए-दह्र" का अर्थ बताइएगा आदरणीय"
Apr 20
दिनेश कुमार 'दानिश' posted a blog post

ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )

122--122--122--12निगाहों से उसने पिलाया नहींमज़ा मुझको महफ़िल में आया नहींउदासी भी कब आई रुख़ पर मेरेभले मैं कभी मुस्कुराया नहींबशर कौन है वो जिसे वक़्त नेइशारों पे अपने नचाया नहींअभी दाद अपनी सँभाले रखोअभी शे'र मैंने सुनाया नहींमैं झूठा हूँ चल ठीक है। ये बतामुझे आइना क्यों दिखाया नहींदिलों के मिलन पर है सब मुनहसिरकोई अपना कोई पराया नहींतू पत्थर है या एक हीरा 'दिनेश'कोई जौहरी जान पाया नहींमौलिक व अप्रकाशितSee More
Apr 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- कभी जीत है कभी हार है ( दिनेश कुमार )
"आद0 दिनेश कुमार दानिश जी सादर अभिवादन, उम्दा गजल कही आपने, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।"
Apr 20
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- कभी जीत है कभी हार है ( दिनेश कुमार )
"वाह आदरणीय जबरजस्त ग़ज़ल हुई..मजा आ गया..सादर"
Apr 19
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- कभी जीत है कभी हार है ( दिनेश कुमार )
"जनाब दिनेश कुमार'दानिश'जी आदाब,बहुत उम्दा और मुरस्सा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Apr 19

Profile Information

Gender
Male
City State
कैथल हरियाणा
Native Place
कैथल
Profession
अध्यापक

दिनेश कुमार 'दानिश''s Blog

ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )

122--122--122--12



निगाहों से उसने पिलाया नहीं

मज़ा मुझको महफ़िल में आया नहीं



उदासी भी कब आई रुख़ पर मेरे

भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं



बशर कौन है वो जिसे वक़्त ने

इशारों पे अपने नचाया नहीं



अभी दाद अपनी सँभाले रखो

अभी शे'र मैंने सुनाया नहीं



मैं झूठा हूँ चल ठीक है। ये बता

मुझे आइना क्यों दिखाया नहीं



दिलों के मिलन पर है सब मुनहसिर

कोई अपना कोई पराया नहीं



तू पत्थर है या एक हीरा 'दिनेश'

कोई… Continue

Posted on April 19, 2017 at 6:17pm — 6 Comments

ग़ज़ल -- कभी जीत है कभी हार है ( दिनेश कुमार )

11212--11212



वो कलंदरों में शुमार है

ग़म-ए-ज़ीस्त से उसे प्यार है



तेरी हाँ नहीं पे ऐ जान-ए-जाँ

मेरी ज़िन्दगी का मदार है



मेरे बाग़-ए-दिल के नसीब में

फ़क़त इन्तज़ार-ए-बहार है



ग़म-ए-आशिक़ी से जो पूछिये

ये जहां भी उजड़ा दयार है



जिसे ताज कहता है ये जहां

वो हक़ीक़तन तो मज़ार है



ये अजब नहीं कि जुनूने-इश्क़

सर-ए-दार था सर-ए-दार है



मैं जो हक़-हलाल की रह पे हूँ

मुझे ख़्वाब में भी क़रार… Continue

Posted on April 18, 2017 at 8:17pm — 7 Comments

ग़ज़ल -- ज़रा सा भी मेरे जैसा नहीं वो ( दिनेश कुमार )

ग़ज़ल की कोशिश

1222--1222--122



ज़रा सा भी मेरे जैसा नहीं वो

मैं इक आईना हूँ पर्दा-नशीं वो



नदी के दो किनारे कब मिले हैं

फ़लक का चाँद हूँ मैं औ'र ज़मीं वो



इसी दो-राहे की अब ख़ाक हूँ मैं

मेरी बाहों से छूटा था यहीं वो



बग़ैर उसके हुआ बे-जान सा मैं

बदन की रूह था दिल का मकीं वो



मैं जिसकी आँख का तारा रहा हूँ

कहाँ गुम हो गई है दूर-बीं वो



अजल से जिस ख़ुदा की जुस्तजू थी

मिला तुझ को 'दिनेश' अब तक कहीं… Continue

Posted on February 9, 2017 at 8:59pm — 11 Comments

ग़ज़ल -- " दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने " ( दिनेश कुमार )

2122--1212--22



संगे मरमर को आइना जाने

ये ज़माना किसी को क्या जाने



अपनी आँखों में ख़्वाब साहिल का

मौजे तूफ़ाँ की नाख़ुदा जाने



मुझ से बस मयकशी की बात करो

पारसाई की पारसा जाने



पल में तोला है पल में माशा है

कौन इस हुस्न की अदा जाने



चुप रहा जो मेरी सदाओं पर

मेरी ख़ामोशियाँ वो क्या जाने



जब हवाओं की सरपरस्ती थी

फिर दिया क्यों बुझा... ख़ुदा जाने



ज़िन्दगी को ग़ज़ल कहेगा वही

रंजो-ग़म को जो… Continue

Posted on February 2, 2017 at 4:13pm — 4 Comments

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At 8:41am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री दिनेश कुमार जी सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए हार्दिक बधाई।
At 2:19pm on June 18, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय दिनेश जी आपकी रचना को यह सम्मान मिलना ही था इस उपलब्धि पर आपको हार्दिक बधाई

At 1:01pm on June 18, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय दिनेश कुमार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - सर से छप्पर ले गया को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:03pm on February 20, 2015, khursheed khairadi said…

आदरणीय दिनेश जी ,आपकी सक्रियता निर्विवाद रूप से स्वीकार्य है |मेरी ग़ज़लों पर भी आपका स्नेह निरंतर बरसता रहा है |आपको महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है |आपकी उत्कृष्ट रचनाओं ने मंच को साहित्य से परिपूर्ण किया है और आगे भी करती रहेगी |सादर अभिनंदन |

At 1:19pm on February 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

AADARNEE DINESH JEE

सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई i सादर i

At 10:53pm on February 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय दिनेश भाई जी "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) चुने जाने पर बहुत बहुत  बधाई स्वीकार करें |

At 9:07pm on February 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
दिनेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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