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दिनेश कुमार
  • Male
  • पुण्डरी। हरियाणा
  • India
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Tasdiq Ahmed Khan commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"जनाब दिनेश कुमार साहिब ,सुन्दर गज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
27 minutes ago
दिनेश कुमार commented on Samar kabeer's blog post ग़ज़ल बतौर-ए-ख़ास ओबीओ की नज़्र
"कमाल है आदरणीय समर साहब। मुहब्बत मुहब्बत मुहब्बत मुहब्बत.... आपकी मुहब्बत को दिल से सलाम, सर"
13 hours ago
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"जी आ. समर साहब। एडिट करता हूँ। शुक्रिया"
14 hours ago
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"अब मिसरा ठीक है,ऐडिट कर दीजिए ।"
14 hours ago
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"शुक्रिया आ महेंद्र जी। इनायत आपकी।"
14 hours ago
दिनेश कुमार commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आ राजेश जी। अच्छी ग़ज़ल के लिए वाह वाह । फिलबदीह होने की वजह से अशआर में रवानी थोड़ी कम लगी। बाक़ी उस्ताद लोग कह सकते हैं।"
14 hours ago
दिनेश कुमार commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"उम्दा ग़ज़ल हुई जनाब तस्दीक़ साहब। वाह वाह। सभी अशआर अच्छे लगे।"
14 hours ago
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"बहुत मेहरबानी आ. समर साहब। मुहब्बत है आपकी, जोआपने ग़लती बताई। मतले का सानी कुछ यूं किया है ---- अभी दिल के कोने में डर शेष है।"
14 hours ago
Mahendra Kumar commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"चमन में लगी आग, लगती रहेमुझे क्या, अभी मेरा घर शेष है ...वाह! यही हो रहा है आजकल. इस उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आ. दिनेश जी. सादर."
15 hours ago
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"बहुत बहुत शुक्रिया आ सुरेंद्र जी। आभार"
15 hours ago
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"तहे दिल से शुक्रिया आ आरिफ़ साहब।"
15 hours ago
दिनेश कुमार commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र -फेलुन) यह ग़ज़ल दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल है। इसे "गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स" में शामिल किया गया है ।
"बहुत उम्दा। वाह वाह आरिफ साहब। ग़ज़ल और इस शानदार उपलब्धि पर मेरी तऱफ से भी हार्दिक बधाई। वाह वाह वाह"
15 hours ago
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मतले के सानी मिसरे में 'रोशनाई'शब्द के साथ 'डर'क़ाफ़िया खटक रहा है,मुमकिन हो तो सानी मिसरा बदलने का प्रयास करें ।"
17 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"आदरणीय दिनेश कुमार जी सादर अभिवादन, बेहतरीन ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़बूल करें ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"आदरणीय दिनेश कुमार जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़बूल करें ।"
Sunday
दिनेश कुमार posted a blog post

ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )

122___122___122___12लिखूँ सच को सच, ये हुनर शेष हैअभी रोशनाई में डर शेष हैक़दम उठ रहे हैं इकट्ठे मगरदिलों के मिलन का सफ़र शेष हैबुझाओ न तुम शम्अ उम्मीद कीफ़क़त रात का इक पहर शेष हैभले उनकी दस्तार है तार तारवो ख़ुश हैं कि काँधे पे सर शेष हैचमन में लगी आग, लगती रहेमुझे क्या, अभी मेरा घर शेष हैदशहरा मनाने का क्या फ़ाइदाबुराई का ख़ूँ में असर शेष हैजो हातिम सा इमदाद सबकी करेजहाँ में कहाँ वो बशर शेष हैमौलिक व अप्रकाशितSee More
Sunday

Profile Information

Gender
Male
City State
कैथल हरियाणा
Native Place
कैथल
Profession
अध्यापक

दिनेश कुमार's Blog

ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )

122___122___122___12



लिखूँ सच को सच, ये हुनर शेष है

अभी रोशनाई में डर शेष है



क़दम उठ रहे हैं इकट्ठे मगर

दिलों के मिलन का सफ़र शेष है



बुझाओ न तुम शम्अ उम्मीद की

फ़क़त रात का इक पहर शेष है



भले उनकी दस्तार है तार तार

वो ख़ुश हैं कि काँधे पे सर शेष है



चमन में लगी आग, लगती रहे

मुझे क्या, अभी मेरा घर शेष है



दशहरा मनाने का क्या फ़ाइदा

बुराई का ख़ूँ में असर शेष है



जो हातिम सा इमदाद सबकी… Continue

Posted on September 24, 2017 at 6:57am — 11 Comments

ग़ज़ल -- ज़िन्दगी की ग़ज़ल हो रही है ( दिनेश कुमार )

212___212___212___2



बे-ख़ुदी के हसीं मरहले में

चैन दिल को मिला मयकदे में



हौसला जब मिटा हादसे में

मुश्किलें बढ़ गईं रास्ते में



हमसफ़र मेरा कोई नहीं था

यूँ बहुत लोग थे क़ाफ़िले में



इश्क़ में डूब जाओ तुम इतना

क़ुर्ब महसूस हो फ़ासले में



ग़ौर से मेरे चेहरे को पढ़िए

है उदासी निहाँ क़हक़हे में



बोल कर सच मैं तकलीफ़ में हूँ

वो झूठा है देखो मज़े में



ज़िन्दगी की ग़ज़ल हो रही है

बँध रहे दर्दो-ग़म… Continue

Posted on August 4, 2017 at 10:21pm — 10 Comments

ग़ज़ल --- बचपन था कोई झौंका सबा का बहार का ( दिनेश कुमार )

221____2121____1221____212



बचपन था कोई झौंका सबा का बहार का

लौट आए काश फिर वो ज़माना बहार का



खिड़की में इक गुलाब महकता था सामने

बरसों से बन्द है वो दरीचा बहार का



ख़ुशबू सबा की, ताज़गी-ए-गुल, बला का हुस्न

दिल के चमन को याद है चेहरा बहार का



अर्सा गुज़र गया प लगे कल की बात हो

उस बाग़े-हुस्न में मेरा दर्जा बहार का



दौरे-ख़िज़ाँ में दिल के बहलने का है सबब

आँखों में मेरी क़ैद नज़ारा बहार का



कलियाँ को बाग़बाँ ही… Continue

Posted on June 30, 2017 at 8:08pm — 6 Comments

ग़ज़ल -- मैं आँखों में सपने बोना चाहता हूँ

22--22--22--22--22--2



बच्चों के मन जैसा होना चाहता हूँ

बे-फ़िक्री की नींदें सोना चाहता हूँ



दुनिया के मेले में खो कर देख लिया

अब मैं ख़ुद के भीतर खोना चाहता हूँ



राग द्वेष ईर्ष्या लालच को त्याग के मैं

रूह की मैली चादर धोना चाहता हूँ



प्यार का सागर है तू मैं प्यासा सहरा

अपनी हस्ती तुझ में डुबोना चाहता हूँ



जीवन व्यर्थ गँवाया, दिल पर बोझ है ये

ख़ुद से नज़र चुरा के रोना चाहता हूँ



गीली मिट्टी है, शायद जड़ पकड़ भी… Continue

Posted on June 17, 2017 at 1:34pm — 4 Comments

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At 8:41am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री दिनेश कुमार जी सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए हार्दिक बधाई।
At 2:19pm on June 18, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय दिनेश जी आपकी रचना को यह सम्मान मिलना ही था इस उपलब्धि पर आपको हार्दिक बधाई

At 1:01pm on June 18, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय दिनेश कुमार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - सर से छप्पर ले गया को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:03pm on February 20, 2015, khursheed khairadi said…

आदरणीय दिनेश जी ,आपकी सक्रियता निर्विवाद रूप से स्वीकार्य है |मेरी ग़ज़लों पर भी आपका स्नेह निरंतर बरसता रहा है |आपको महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है |आपकी उत्कृष्ट रचनाओं ने मंच को साहित्य से परिपूर्ण किया है और आगे भी करती रहेगी |सादर अभिनंदन |

At 1:19pm on February 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

AADARNEE DINESH JEE

सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई i सादर i

At 10:53pm on February 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय दिनेश भाई जी "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) चुने जाने पर बहुत बहुत  बधाई स्वीकार करें |

At 9:07pm on February 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
दिनेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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