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दिनेश कुमार
  • Male
  • पुण्डरी। हरियाणा
  • India
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"बहुत उम्दा ग़ज़ल आ. समर सर। वाह वाह वाह। सभी अशआर बढ़िया लगे। मुबारकबाद।"
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Kalipad Prasad Mandal commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार
"आ दिनेश कुमार जी बहुत खुबसूरत ग़ज़ल हुई है | मुबारकबाद स्वीकार करें |"
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दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार
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दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार
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दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार
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दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार
"बहुत बहुत शुक्रिया आ. आरिफ़ साहब।"
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दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार
"बहुत शुक्रिया आ. अफ़रोज़ सहर साहब।"
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Ajay Tiwari commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी, छोटी बहर में बेहतरीन शेर निकाले हैं. हार्दिक शुभकामनाएं. सादर "
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"बड़ी खूबसूरत ग़ज़ल हुई..सादर बधाई"
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Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार
"जनाब दिनेश जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Oct 29
Mohammed Arif commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश कुमार जी आदाब, बहुत ही प्यारी ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद देता हूँ क़ुबूल करें ।"
Oct 29
Afroz 'sahr' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी इस रचना पर बहुत बधाई आपको,,"
Oct 29
दिनेश कुमार posted a blog post

ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार

212---212---212दूर कर बदगुमानी मेरीख़त्म हो सरगरानी मेरीमेरे जीवन से तुम क्या गएखो गई शादमानी मेरीअब न आएगी ये लौटकरजा रही है जवानी मेरीबीती बातों पे ये बारहाव्यर्थ की नोहा ख़्वानी मेरीग़म के दरिया में रक्खा है क्याभूल जाओ कहानी मेरीगुल खिलाएगी कोई नयाएक दिन हक़-बयानी मेरीऐ मेरे जिस्म ! ऊबा हूँ मैंअब न कर मेज़बानी मेरीमौलिक व अप्रकाशितसरगरानी-नाराज़गीशादमानी-ख़ुशीनोहा ख़्वानी-रोना पीटना,मातम करनाSee More
Oct 29
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"तहे दिल से शुक्रिया आप का आ. गजेन्द्र जी। इनायत"
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"मृगतृष्णा का पिंजरा तोड़ के, इन्साँ बाहर आए तो कस्तूरी भी हासिल होगी ख़ुद में गहरे जाए तो चार:गरी की कोई तवक़्क़ो, दिल ने किसी से कब रक्खी बेशक हर महफ़िल में हमने ज़ख़्मे-दिल दिखलाए तो देखना है ये जिस्म भी मेरा कब तक साथ निभाएगा गर्दिश के इस दौर में मुझ…"
Oct 28

Profile Information

Gender
Male
City State
कैथल हरियाणा
Native Place
कैथल
Profession
अध्यापक

दिनेश कुमार's Blog

ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार

212---212---212



दूर कर बदगुमानी मेरी

ख़त्म हो सरगरानी मेरी



मेरे जीवन से तुम क्या गए

खो गई शादमानी मेरी



अब न आएगी ये लौटकर

जा रही है जवानी मेरी



बीती बातों पे ये बारहा

व्यर्थ की नोहा ख़्वानी मेरी



ग़म के दरिया में रक्खा है क्या

भूल जाओ कहानी मेरी



गुल खिलाएगी कोई नया

एक दिन हक़-बयानी मेरी



ऐ मेरे जिस्म ! ऊबा हूँ मैं

अब न कर मेज़बानी मेरी



मौलिक व… Continue

Posted on October 29, 2017 at 7:14am — 11 Comments

ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार

2122--1212--22



ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को

हक़परस्ती है सिर्फ़ रोने को



दिल को पत्थर बना लिया मैंने

ख़्वाब आँखों में फिर पिरोने को



दूर मंज़िल है वक़्त भी कम है

कौन कहता है तुम को सोने को



एक बस वो नहीं हुआ मेरा

क्या नहीं होता वर्ना होने को



किस लिये हैं इन आँखों में आँसू

पास भी क्या था जब कि खोने को



ज़िद नहीं करता अब खिलौनों की

क्या हुआ दिल के इस खिलौने को



दाग़ कुछ ऐसे भी हैं दामन पर

अश्क… Continue

Posted on October 15, 2017 at 11:56pm — 14 Comments

ग़ज़ल --- ख़ुदकुशी बार बार कौन करे // दिनेश कुमार

2122---1212---112/22
.
ख़ुदकुशी बार बार कौन करे
आप का इन्तिज़ार कौन करे
.
आइना टूटने से डरता है
झूट को शर्मसार कौन करे
.
अपना मतलब निकालते हैं सब
बे-ग़रज़ हमसे प्यार कौन करे
.
नाव टूटी है हौसला ग़ायब
ग़म के दरिया को पार कौन करे
.
हम हक़ीक़त से मुँह चुराते हैं
ख़्वाब को तार तार कौन करे
.
उस्तरा बन्दरों के हाथ में है
इन को सर पर सवार कौन करे
.
( मौलिक व अप्रकाशित )

Posted on October 10, 2017 at 5:33am — 8 Comments

ग़ज़ल -- ग़लती कर पछताए कौन // दिनेश कुमार

22__22__22__2
.
ग़लती कर पछताए कौन
ख़ुद से नज़र मिलाए कौन
.
अपनी अना मिटाए कौन
सच्ची अलख जगाए कौन
.
पिछले लेखे-जोखे हैं
अपने कौन पराए कौन
.
राम भी कब से भूखे हैं
झूठे बेर खिलाए कौन
.
कस्तूरी मिल जाएगी
ख़ुद में गहरे जाए कौन
.
तूफ़ां नाम का तूफ़ां है
लहरों से टकराए कौन
.
माज़ी माज़ी करें सभी
मुस्तक़बिल चमकाए कौन
.
( मौलिक व अप्रकाशित )

Posted on October 9, 2017 at 6:18am — 20 Comments

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At 8:41am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री दिनेश कुमार जी सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए हार्दिक बधाई।
At 2:19pm on June 18, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय दिनेश जी आपकी रचना को यह सम्मान मिलना ही था इस उपलब्धि पर आपको हार्दिक बधाई

At 1:01pm on June 18, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय दिनेश कुमार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - सर से छप्पर ले गया को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:03pm on February 20, 2015, khursheed khairadi said…

आदरणीय दिनेश जी ,आपकी सक्रियता निर्विवाद रूप से स्वीकार्य है |मेरी ग़ज़लों पर भी आपका स्नेह निरंतर बरसता रहा है |आपको महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है |आपकी उत्कृष्ट रचनाओं ने मंच को साहित्य से परिपूर्ण किया है और आगे भी करती रहेगी |सादर अभिनंदन |

At 1:19pm on February 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

AADARNEE DINESH JEE

सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई i सादर i

At 10:53pm on February 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय दिनेश भाई जी "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) चुने जाने पर बहुत बहुत  बधाई स्वीकार करें |

At 9:07pm on February 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
दिनेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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