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दिनेश कुमार
  • Male
  • पुण्डरी। हरियाणा
  • India
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दिनेश कुमार posted a blog post

तज़्मीन बर ग़ज़ल // "ज़िन्दगी में मज़ा नहीं बाक़ी" // दिनेश कुमार

एक कोशिश।तज़मीन बर ग़ज़ल जनाब फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब।..फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन..इश्क़ का नक़्शे-पा नहीं बाक़ीहुस्न का सिलसिला नहीं बाक़ीमेहरबाँ पहले सा नहीं बाक़ी"हिम्मत-ए-इल्तिजा नहीं बाक़ीज़ब्त का हौसला नहीं बाक़ी"..मेरा साया भी अजनबी मुझे सेऐसे रूठी है ज़िन्दगी मुझ सेसहमी सहमी है रौशनी मुझसे"इक तिरी दीद छिन गई मुझ सेवर्ना दुनिया में क्या नहीं बाक़ी"..ज़ीस्त के जाम-ए-जम से हाथ न खींचइस निगाहे-करम से हाथ न खींचएक दम हम-क़दम से हाथ न खींच"अपनी मश्क़-ए-सितम से हाथ न खींचमैं नहीं या वफ़ा नहीं…See More
2 hours ago
दिनेश कुमार commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल
"बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है आ. समर साहब। हर शेर पढ़ने पर दिल से वाह निकली। मुबारकबाद सर।"
3 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"जनाब दिनेश साहिब ,छोटी बह्र में ग़ज़ल की अच्छी कोशिश की है आपने, मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । मुहतरम समर साहिब ने सही मश्वरा दिया है ,उस पर गौर कीजियेगा शेर2 उला मिसरा यूँ करके देखिए (एक वो ही नहीं हुआ मेरा ) ,मेरे ख़याल से खिलौने क़ाफ़िया बाक़ी क़ाफिये ,रोने…"
Wednesday
Ajay Tiwari commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी, प्रभावी ग़ज़ल हुई है. शुभकामनाएं. सादर "
Wednesday
दिनेश कुमार commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (आ गये सिमट के ) --------------------------------
"बहुत उम्दा ग़ज़ल लगी मुहतरम तस्दीक़ साहब। वाह वाह"
Tuesday
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"बहुत बहुत शुक्रिया आ. समर सर, अपनी बहुमूल्य इस्लाह रूपी आशीर्वाद से मुझे नवाज़ने के लिये। //ग़ज़ल कुछ जल्दी में कही हुई लगती है//आपकी पारखी नज़र को सलाम सर। //'दिल को पत्थर बना लिया मैंने ख़्वाब आँखों में फिर पिरोने को' इस शैर के सानी मिसरे…"
Tuesday
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"बहुत बहुत शुक्रिया आ. आशुतोष साहब।"
Tuesday
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"बहुत बहुत शुक्रिया आ. अफ़रोज़ सहर साहब।"
Tuesday
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आ. निलेश सर जी। //एक बस वो नहीं हुआ मेरा क्या नहीं होता वर्ना होने को... इस शेर से मोमिन खान मोमिन याद आ गए // अवचेतन मन में मोमिन का वो फेमस शेर ही रहा होगा सर, जब यह मिसरे मैंने फिट किये। अब थोड़ा change करते…"
Monday
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"आ. सलीम रज़ा साहब , तहे दिल से शुक्रिया।"
Monday
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"आ. वन्दना जी, हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत शुक्रिया।"
Monday
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल कुछ जल्दी में कही हुई लगती है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'दिल को पत्थर बना लिया मैंने ख़्वाब आँखों में फिर पिरोने को' इस शैर के सानी मिसरे में 'फिर'शब्द भर्ती का…"
Monday
Dr Ashutosh Mishra commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी इस उम्दा रचना पर हार्दिक बढाई साद"
Monday
दिनेश कुमार commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - किसी साधू के गहरे ध्यान से हम
"आ. निलेश सर जी। बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है। वह वाह सभी शेर उम्दा लगे। दिली दाद। सर,... ऐक से बढ़कर एक"
Oct 16
Afroz 'sahr' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"वाह वाहहह दिनेश जी बहुत बहुत मुबारकबाद सादर,,,"
Oct 16
Nilesh Shevgaonkar commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"बहुत खूब आ. दिनेश जी एक बस वो नहीं हुआ मेरा क्या नहीं होता वर्ना होने को... इस शेर से मोमिन खान मोमिन याद आ गए ग़ज़ल के लिए बधाई"
Oct 16

Profile Information

Gender
Male
City State
कैथल हरियाणा
Native Place
कैथल
Profession
अध्यापक

दिनेश कुमार's Blog

तज़्मीन बर ग़ज़ल // "ज़िन्दगी में मज़ा नहीं बाक़ी" // दिनेश कुमार

एक कोशिश।

तज़मीन बर ग़ज़ल जनाब फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब।

..

फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन

..

इश्क़ का नक़्शे-पा नहीं बाक़ी

हुस्न का सिलसिला नहीं बाक़ी

मेहरबाँ पहले सा नहीं बाक़ी

"हिम्मत-ए-इल्तिजा नहीं बाक़ी

ज़ब्त का हौसला नहीं बाक़ी"

..

मेरा साया भी अजनबी मुझे से

ऐसे रूठी है ज़िन्दगी मुझ से

सहमी सहमी है रौशनी मुझसे

"इक तिरी दीद छिन गई मुझ से

वर्ना दुनिया में क्या नहीं बाक़ी"

..

ज़ीस्त के जाम-ए-जम से हाथ न… Continue

Posted on October 22, 2017 at 2:05pm

ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार

2122--1212--22



ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को

हक़परस्ती है सिर्फ़ रोने को



दिल को पत्थर बना लिया मैंने

ख़्वाब आँखों में फिर पिरोने को



दूर मंज़िल है वक़्त भी कम है

कौन कहता है तुम को सोने को



एक बस वो नहीं हुआ मेरा

क्या नहीं होता वर्ना होने को



किस लिये हैं इन आँखों में आँसू

पास भी क्या था जब कि खोने को



ज़िद नहीं करता अब खिलौनों की

क्या हुआ दिल के इस खिलौने को



दाग़ कुछ ऐसे भी हैं दामन पर

अश्क… Continue

Posted on October 15, 2017 at 11:56pm — 14 Comments

ग़ज़ल --- ख़ुदकुशी बार बार कौन करे // दिनेश कुमार

2122---1212---112/22
.
ख़ुदकुशी बार बार कौन करे
आप का इन्तिज़ार कौन करे
.
आइना टूटने से डरता है
झूट को शर्मसार कौन करे
.
अपना मतलब निकालते हैं सब
बे-ग़रज़ हमसे प्यार कौन करे
.
नाव टूटी है हौसला ग़ायब
ग़म के दरिया को पार कौन करे
.
हम हक़ीक़त से मुँह चुराते हैं
ख़्वाब को तार तार कौन करे
.
उस्तरा बन्दरों के हाथ में है
इन को सर पर सवार कौन करे
.
( मौलिक व अप्रकाशित )

Posted on October 10, 2017 at 5:33am — 8 Comments

ग़ज़ल -- ग़लती कर पछताए कौन // दिनेश कुमार

22__22__22__2
.
ग़लती कर पछताए कौन
ख़ुद से नज़र मिलाए कौन
.
अपनी अना मिटाए कौन
सच्ची अलख जगाए कौन
.
पिछले लेखे-जोखे हैं
अपने कौन पराए कौन
.
राम भी कब से भूखे हैं
झूठे बेर खिलाए कौन
.
कस्तूरी मिल जाएगी
ख़ुद में गहरे जाए कौन
.
तूफ़ां नाम का तूफ़ां है
लहरों से टकराए कौन
.
माज़ी माज़ी करें सभी
मुस्तक़बिल चमकाए कौन
.
( मौलिक व अप्रकाशित )

Posted on October 9, 2017 at 6:18am — 20 Comments

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At 8:41am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री दिनेश कुमार जी सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए हार्दिक बधाई।
At 2:19pm on June 18, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय दिनेश जी आपकी रचना को यह सम्मान मिलना ही था इस उपलब्धि पर आपको हार्दिक बधाई

At 1:01pm on June 18, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय दिनेश कुमार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - सर से छप्पर ले गया को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:03pm on February 20, 2015, khursheed khairadi said…

आदरणीय दिनेश जी ,आपकी सक्रियता निर्विवाद रूप से स्वीकार्य है |मेरी ग़ज़लों पर भी आपका स्नेह निरंतर बरसता रहा है |आपको महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है |आपकी उत्कृष्ट रचनाओं ने मंच को साहित्य से परिपूर्ण किया है और आगे भी करती रहेगी |सादर अभिनंदन |

At 1:19pm on February 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

AADARNEE DINESH JEE

सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई i सादर i

At 10:53pm on February 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय दिनेश भाई जी "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) चुने जाने पर बहुत बहुत  बधाई स्वीकार करें |

At 9:07pm on February 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
दिनेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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