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दिनेश कुमार
  • Male
  • पुण्डरी। हरियाणा
  • India
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जयनित कुमार मेहता commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- मैं आँखों में सपने बोना चाहता हूँ
"आकांक्षाओं से ओत-प्रोत बेहद भावपूर्ण ग़ज़ल कही है आदरणीय दिनेश जी। आखिरी शेर के कहने ही क्या,,एकदम से चौंका दिया आपने।। दिली मुबारकबाद आपको।। सादर।।"
7 hours ago
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. महेंदर जी। वाह वाह गिरह में शायद ऐब शुतुरमुर्ग आ गया है शायद।"
yesterday
vijay nikore commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"गज़ल बहुत अच्छी बनी है।  मुबारकबाद ।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दुनिया से जो बशर गये, लौटे हैं क्या कभी ? ( दिनेश कुमार )
"बेहतरीन..हर एक शे'र लाजबाब बधाइयाँ तब आएगा यक़ीं कि ग़ज़लगो हैं आप भी दिल के तमाम ज़ख़्म छुपा कर ग़ज़ल कहें..जबरजस्त"
yesterday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- दुनिया से जो बशर गये, लौटे हैं क्या कभी ? ( दिनेश कुमार )
"शुभान  अल्लाह . क्या मुकम्मिल गजल कही है , वाह वाह  और वाह ."
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- अच्छे कर्मों का दिनेश अच्छा नतीज़ा होगा ( दिनेश कुमार )
"वाह वाह  आपने महफिल लूट ली  आदरणीय"
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- मैं आँखों में सपने बोना चाहता हूँ
"अच्छी रचना है आ० दिनेश जी"
Friday
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"दुनिया के रंग-मंच पे आ कर चले गये किरदार जो मिला था निभा कर चले गये कितने ही नामदेव तुकाराम औ'र कबीर जीने का हमको ढंग बता कर चले गये जीवन की पाठशाला का सीखा न ककहरा कुछ लोग सिर्फ़ वक़्त बिता कर चले गये सच बोलने का उनको ही तमग़ा दिया गया जो आईने…"
Friday
दिनेश कुमार replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 74 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"इसी प्रकार ' क्या ' को क्या हम 1 मात्रा पर ले सकते हैं आ."
Wednesday
दिनेश कुमार replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 74 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"शुक्रिया आ. राणा प्रताप जी। मेहरबानी। इनायत। मेरी याददाश्त बहुत कमज़ोर हो गई है। इसलिये आपको ज़हमत दी। इनायत।"
Wednesday
दिनेश कुमार replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 74 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय एक संशय और हुआ है क्यूँ अभी से जा रहे हो,ज़रा आसमाँ तो देखो Kya क्यूँ ko 1 मात्रा पर बाँध सकते हैं? अगर हाँ.. तो क्या सभी परिस्थियों में .. या कोई विशेष .."
Wednesday
दिनेश कुमार replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 73 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"इनायत। मेहरबानी। आ. राणा साहब। शुक्रिया।"
Wednesday
दिनेश कुमार replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 73 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"एक और संशय है आदरणीय। सबकी नज़रें हैं मेरी ख़ुशी की तरफ़। कोई तो देख ले बेबसी की तरफ़। जयनित साहब का यह मतला क़ाफ़िया बंदी के हिसाब से ठीक है ? अपनी जानकारी के लिये ही पूछ रहा हूँ सर।"
Wednesday
दिनेश कुमार replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 73 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"शुक्रिया आदरणीय संशय दूर करने के लिये। सादर।"
Wednesday
दिनेश कुमार replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 73 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय राणा प्रताप जी, क्या यह मतला ठीक है, मतलब क्या हम उसी और किसी को मतले के काफिये ले सकते हैं? अगर हाँ तब अन्य शेरों में कौन कौन से काफिये लेने पड़ेंगे। अगर उसी और किसी को मतले में लेना अनुचित है तब इनको भी हरे रँग में कीजिये सर। कृपया…"
Wednesday
दिनेश कुमार replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 74 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"जी आदरणीय राणा साहब। मैं समझता था ऐसा कर सकते हैं। शायद कोई शेर किसी बड़े शायर का भी ऐसा हो। लेकिन आप ज्यादा बेहतर जानते होंगे। इसलिये मैं आपत्ति वापस लेता हूँ।"
Wednesday

Profile Information

Gender
Male
City State
कैथल हरियाणा
Native Place
कैथल
Profession
अध्यापक

दिनेश कुमार's Blog

ग़ज़ल -- मैं आँखों में सपने बोना चाहता हूँ

22--22--22--22--22--2



बच्चों के मन जैसा होना चाहता हूँ

बे-फ़िक्री की नींदें सोना चाहता हूँ



दुनिया के मेले में खो कर देख लिया

अब मैं ख़ुद के भीतर खोना चाहता हूँ



राग द्वेष ईर्ष्या लालच को त्याग के मैं

रूह की मैली चादर धोना चाहता हूँ



प्यार का सागर है तू मैं प्यासा सहरा

अपनी हस्ती तुझ में डुबोना चाहता हूँ



जीवन व्यर्थ गँवाया, दिल पर बोझ है ये

ख़ुद से नज़र चुरा के रोना चाहता हूँ



गीली मिट्टी है, शायद जड़ पकड़ भी… Continue

Posted on June 17, 2017 at 1:34pm — 4 Comments

ग़ज़ल -- अच्छे कर्मों का दिनेश अच्छा नतीज़ा होगा ( दिनेश कुमार )

2122____1122____1122____22



सर पे साया जो बुज़ुर्गों की दुआ का होगा

कामयाबी का सफ़र अपना सुहाना होगा



उसकी रोटी से जो आती है पसीने की महक

उसके घर ख़ुशबू-ए-बरकत का ख़ज़ाना होगा



रोज़े-महशर तेरी दौलत नहीं काम आयेगी

साथ बस तेरे सवाबों का पिटारा होगा



झूट को झूट सरे-बज़्म कहा है जिसने

देखना शर्तिया वो ज़हन से बच्चा होगा



मैंने ता-उम्र यही सोच के काटी अपनी

शब गुज़र जायेगी, क़िस्मत में सवेरा होगा



आबला-पाई मेरी और… Continue

Posted on June 15, 2017 at 11:55pm — 2 Comments

ग़ज़ल -- दुनिया से जो बशर गये, लौटे हैं क्या कभी ? ( दिनेश कुमार )

221 -------- 2121 -------- 1221 - - - - 212



मानिंद-ए-शम्अ बज़्म में आ कर ग़ज़ल कहें

आलम है तीरगी का, मिटा कर ग़ज़ल कहें



रस्ते के सब पड़ाव क़वाफ़ी की शक़्ल हों

और लक्ष्य को रदीफ़ बना कर ग़ज़ल कहें



मफ़हूम क्या हो, चर्ख़े-तख़य्युल का चाँद हो

महफ़िल को हुस्ने-ख़्वाब दिखा कर ग़ज़ल कहें



गुलकन्द की मिठास, तग़ज़्ज़ुल, जदीदियत

हर शेर में ये ख़ूबियाँ ला कर ग़ज़ल कहें



होंठों पे सामयीन के आ जाए मरहबा

अल्फ़ाज़ उँगलियों पे नचा कर… Continue

Posted on June 15, 2017 at 4:28am — 6 Comments

ग़ज़ल -- तू क्या बोले है ख़ुद अपने बारे में ( दिनेश कुमार )

22--22--22--22--22--2



बे-शक जन्नत होगी बलख-बुखारे में

छज्जू ख़ुश है अपने इस चौबारे में



दिले-मुसव्विर दुनिया की परवाह न कर

लोग तो नुक़्स निकालेंगे शह-पारे में



सारी बस्ती जल कर राख हुई देखो

थी चिंगारी एक सियासी नारे में



उसके नक़्शे-पा जब मील के पत्थर हैं

कुछ तो ख़ूबी होगी उस बंजारे में



तेरा काम ही चीख़ चीख़ कर बोेलेगा

तू क्या बोले है ख़ुद अपने बारे में



राजा बने भिखारी और भिखारी शाह

हश्र निहाँ हैं उसके… Continue

Posted on June 10, 2017 at 3:28pm — 3 Comments

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At 8:41am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री दिनेश कुमार जी सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए हार्दिक बधाई।
At 2:19pm on June 18, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय दिनेश जी आपकी रचना को यह सम्मान मिलना ही था इस उपलब्धि पर आपको हार्दिक बधाई

At 1:01pm on June 18, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय दिनेश कुमार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - सर से छप्पर ले गया को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:03pm on February 20, 2015, khursheed khairadi said…

आदरणीय दिनेश जी ,आपकी सक्रियता निर्विवाद रूप से स्वीकार्य है |मेरी ग़ज़लों पर भी आपका स्नेह निरंतर बरसता रहा है |आपको महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है |आपकी उत्कृष्ट रचनाओं ने मंच को साहित्य से परिपूर्ण किया है और आगे भी करती रहेगी |सादर अभिनंदन |

At 1:19pm on February 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

AADARNEE DINESH JEE

सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई i सादर i

At 10:53pm on February 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय दिनेश भाई जी "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) चुने जाने पर बहुत बहुत  बधाई स्वीकार करें |

At 9:07pm on February 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
दिनेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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"आदरणीय सौरभ सर बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है, हर शैर सवा अरब का प्रतिनिधित्व कर रहा है, भारत के परिवेश…"
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बसंत कुमार शर्मा commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : भइ, आप हैं मालिक तो कहाँ आपसे तुलना
"वाह मुग्ध हूँ, आपकी ग़ज़ल पढ़कर, लाजबाब से भी लाजबाब, बहुत बहुत बधाई आपको. ईद मुबारक "
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"बेहतरीन ग़ज़ल "
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"आ0 मित्र श्री जयनित मेहता जी सादर आभार ।"
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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post 52 शेर की ग़ज़ल।
"आ0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आभार ।"
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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post 52 शेर की ग़ज़ल।
"भाई जयनित मेहता जी आभार मित्र"
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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"आ0 अनिता मौर्या जी शुक्रिया ।"
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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"आ0 जयनित मेहता जी सादर आभार ।"
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बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पश्चिम का आँधी
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, आप बिलकुल सही हैं, यह १६ १० मात्रा पर ही है, फुर्र हुई चिट्ठी…"
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