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सुरेश कुमार 'कल्याण'
  • Male
  • कैथल (हरियाणा)
  • India
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सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय मित्रवर, सुंदर छंद रचना पर हार्दिक बधाई । सादर।"
Jan 20
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया राजेश कुमारी जी सादर अभिवादन! रचना पर सुंदर प्रतिक्रिया एवं हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक आभार।सादर।"
Jan 20
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया राजेश कुमारी जी चित्र के मर्म को बयाँ करती और गरीबों के दर्द तो दर्शाती बहुत ही सुंदर एवं मार्मिक रचना के लिए हृदयतल से बधाई।"
Jan 20
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी रचना पर सुंदर प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार । सादर।"
Jan 20
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय मो. आरिफ साहब रचना पसंद करने व अपने बहुमूल्य विचारों के साथ हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक आभार। सादर।"
Jan 20
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"भुजंगप्रयात ------------------ अमीरी सदा से सियासत चलाती। सियासत सभी को रुलाती सताती।। सजा है सवेरा सजी खूब रातें। यहां सब खफा हैं करे कौन बातें।। हवा है हठीली बढ़ी ठंड ऐसे। जमी ये निगाहें तकें राह जैसे।। रजाई नहीं तो दुशाला उढ़ा लूँ। हवा से…"
Jan 20
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"सुख ------- भूल भारत के वैभव को, बाहरी दौड़ लगाते क्यों? नहीं मानते महिमा माँ की, माँ को क्रूर बताते क्यों? अपनों की छाती जो भेदें, तीखे तीर चलाते क्यों? माटी के पुतले हैं फिर भी, माटी को बिसराते क्यों? सुख-दुख बसते अपने भीतर, ऊँच-नीच बतलाते…"
Jan 12
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"एक कोशिश --------- गजल लिखने की कोशिश नाकाम है फिर सीखने पर कौन लगी लगाम है। जम गया है देखो धरा संग अंबर भी मौसम में छाई आज धुंध आम है। फड़फड़ाते होंठ कुछ कह ना सके नैनों के हौसले से मिला आराम है। कचरे के ढेर से रोटी की तलाश क्यों भूखा था दिन भूखी…"
Dec 22, 2017
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद --------------- पथरीली सी इन राहों में,पथरीला सा गाँव। गलियों में जब लगती ठोकर,घायल होते पाँव। कच्चे से इस घर में बसता,निर्धन सा परिवार। छोटी सी इस बच्ची खातिर,यही सकल संसार। क्या होती हैं कापी-किताबें,क्या हों कलम-दवात। मालूम नहीं स्कूल…"
Dec 15, 2017
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-86
"दोहा प्रयास  ------------------- सबको लगती भूख है,जिसके रंग अनेक। रोटी कपड़ा और घर,मांगे है प्रत्येक।१। जो है भूखा प्यार का,उसको मिलता प्यार। खाता सबसे खार जो,उसको कहाँ दुलार।२। भूखा जिसका पेट है,कनक उसे भी भाय। बन्दे में गर अक्ल हो,बेचे रोटी…"
Dec 9, 2017
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-86
"आदरणीय सतविंदर भाई जी सादर अभिवादन।बहुत ही सुंदर छंद रचना । हार्दिक बधाई।"
Dec 9, 2017
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-86
"आदरणीय वासुदेव जी बहुत सुंदर रचना पर हार्दिक बधाई।"
Dec 9, 2017
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-86
"आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत ही सुंदर एवं सटीक दोहावली के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।सादर।"
Dec 9, 2017
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-86
"बहुत ही सुंदर रचना, हार्दिक बधाई आदरणीय।"
Dec 9, 2017
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-86
"आदरणीय मो.आरिफ जी रचना प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार।"
Dec 9, 2017
सुरेश कुमार 'कल्याण' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-86
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी रचना पर अपने सुंदर एवं कीमती विचार प्रदान कर हौसला बढाने के लिए सादर आभार।"
Dec 9, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
हरियाणा
Native Place
कैथल
Profession
प्राध्यापक (हिन्दी)

सुरेश कुमार 'कल्याण''s Blog

बसंत पंचमी

माघ शुक्ल की पंचमी, कामदेव के लाल।

दोनों मिलकर आ गए, कण-कण हुआ निहाल ।।



कोयल काली कूकती, खुश हो नाचे मोर ।

माया जिसकी मोहनी,वही मदन चितचोर ।

गेंदा गुलाब ज्यों खिले,खिले गुलाबी गाल।

दोनों मिलकर-------------------।



आई बसंत पंचमी, खुशियों का आगाज ।

वाणी में रस घोलकर, गले मिलें सब आज।

सर्द रैन अब जा चुकी, हटा धुंध का जाल।

दोनों मिलकर --------------------।



ताजा-ताजा लग रहे,गिरा पुराने पात।

डाल डाल को चूमती, भूल अहं औकात… Continue

Posted on January 31, 2017 at 11:30am — 6 Comments

एक जलज-वीराने में

एक जलज - वीराने में

चहकता हुआ

महकता हुआ

दाग नहीं लगने दिया कभी

आब के छींटे का भी

चक्रवातों में घिरा रहा था

जिन्दगी भर।



लौट चले वो झख मारकर

धक्के खाकर थक हारकर

नाखून घिसाकर दाँत किटकिटाकर

आँधी तूफान भँवर

और

चक्रवात भी।



फिर भी लहलहाता रहा

वह वारिज

कोशिश में

अंबर को नापने की।



चुभने लगी

खुद की ही कलियाँ

शूल बनकर

सताने लगे स्व-सद्कर्म

भूल बनकर।



समझ में आया

क्या… Continue

Posted on December 22, 2016 at 2:30pm — 14 Comments

नशाबंदी का ढोंग

धुम्रपान

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है

इससे कैंसर होता है

सभी जान गए हैं

मगर

क्या बीड़ी सिगरेट की फैक्ट्रियाँ

देश के लिए

दर्द निवारक हैं?

शराब का अधिक सेवन

स्वास्थ्य के लिए

हानिकारक है

इससे लीवर खराब होता है

सभी मान गए हैं

मगर

क्या मधुशालाएं

और शराब के कारखाने

देश के तारणहार हैं?

शायद

इनके बिना काम

नहीं चल सकता।

और भी बहुत सी

नशीली दवाएं व मादक

क्या केवल

टैक्स कमाने के लिए… Continue

Posted on November 28, 2016 at 11:02am — 16 Comments

पंख /सुरेश कुमार ' कल्याण '

पंख

---



पंख

जो

समय की मार से

हो चुके थे

जीर्ण-शीर्ण

मैंने

खूब फैलाने का प्रयास किया,

ताकि

विश्राम कर सकें

इनकी छत्रछाया में

मेरे अपने

मेरे अजीज

मेरे संबंधी।



मगर

जब वो जीर्णावस्था से

उबरे

जब पूर्ण छाया

देने ही वाले थे

चढ़ गए

मेरे

सुन्दर पंखों पर

काटने के लिए

मेरे अपने

मेरे अजीज

मेरे संबंधी।



बहुत दर्द

बहुत पीड़ा

सहने की कोशिश

बहुत… Continue

Posted on October 23, 2016 at 12:48pm — 10 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 11:37pm on July 5, 2016, asha jugran said…

आद.सुरेश कुमार जी ,आपकी  कविताओं में  खूबसूरत बहाव है.सहजता है जो हर पाठक से  सहज में  जुड़  जाती  है. 

At 12:44pm on June 18, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुरेश कुमार 'कल्याण'  जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 12:27am on May 5, 2016, स्वाति सोनी 'मानसी' said…
सादर धन्यवाद सुरेश कुमार कल्याण सर :)
At 9:17pm on April 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
सुस्वागतम्!
 
 
 

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