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  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
 

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vijay nikore commented on SudhenduOjha's blog post अवसादों की खींच-तान हो, तुमको मैंने देखा है
"रचना अच्छी लगी। बधाई।"
Jul 24
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post अवसादों की खींच-तान हो, तुमको मैंने देखा है
"भाई ये निर्देश नहीं निवेदन है,जो कि मंच का नियम भी है, आप अपनी रचना को कविता समझते हैं तो कविता लिख दिया करें ।"
Jul 21
SudhenduOjha commented on SudhenduOjha's blog post अवसादों की खींच-तान हो, तुमको मैंने देखा है
"आप सभी गुणी-जनों का आभार. आदरणीय समर कबीर जी पंक्ति "मेरे बलिहारी तुम थे" है। टंकण दोष रह गया था। (विकट अंधेरी रातों में  एक सुनहरी रेखा है अँधियारे के विरुद्ध खड़े तुमको मैंने देखा है) इसे कृपया इस प्रकार पढ़ें :  विकट अंधेरी…"
Jul 21
SudhenduOjha posted blog posts
Jul 21

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on SudhenduOjha's blog post अवसादों की खींच-तान हो, तुमको मैंने देखा है
"आदरनीय ओझा भाई , खूब सूरत भाव पूर्ण रचना के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।"
Jul 20
laxman dhami commented on SudhenduOjha's blog post अवसादों की खींच-तान हो, तुमको मैंने देखा है
"बहुत खूब...."
Jul 20
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post अवसादों की खींच-तान हो, तुमको मैंने देखा है
"जनाब सुधेन्दु ओझा जी आदाब,अच्छी भावपूर्ण रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'मेरी बलिहारी तुम थे' या "मेरे बलिहारी तुम थे" ? एक निवेदन ये है कि रचना के साथ उसकी विधा भी लिखने का नियम है ।"
Jul 20
Mohammed Arif commented on SudhenduOjha's blog post अवसादों की खींच-तान हो, तुमको मैंने देखा है
"आदरणीय सुधेंदु जी आदाब,बेहतरीन भावाभिव्यक्ति । बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 20
SudhenduOjha posted a blog post

दुनिया कहती है, मैं ऐसा हूँ। दुनिया कहती है, मैं वैसा हूँ॥

दुनिया कहती है, मैं ऐसा हूँ। दुनिया कहती है, मैं वैसा हूँ॥जेठ की दोपहरी पसीने का एहसास, ताम्र वर्ण की- अतृप्त प्यास॥ तेरी काँख के गंध जैसा हूँ॥ दुनिया कहती है, मैं ऐसा हूँ। दुनिया कहती है, मैं वैसा हूँ॥सही वक़्त, सही लोग मिल नहीं पाए। शब्द बिखरे रहे, अर्थ मिल नहीं पाए॥ उनींदी रातों की, सिलवटों जैसा हूँ॥ दुनिया कहती है, मैं ऐसा हूँ। दुनिया कहती है, मैं वैसा हूँ॥गीत होंठों को छू कर चले जाते हैं। दिवस, अमावस हुए जाते हैं॥ शब्द-हीन गीतों के, गायक जैसा हूँ॥ दुनिया कहती है, मैं ऐसा हूँ। दुनिया…See More
May 21
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SudhenduOjha's blog post फुर्सत से कभी मेरी,ज़िंदगानी देख लेना (कविता/नज़्म)
"वाह आदरणीय बहुत ही सुन्दर"
Mar 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SudhenduOjha's blog post फुर्सत से कभी मेरी,ज़िंदगानी देख लेना (कविता/नज़्म)
"वाह वाह आदरणीय बहुत ही स"
Mar 19
TEJ VEER SINGH commented on SudhenduOjha's blog post फुर्सत से कभी मेरी,ज़िंदगानी देख लेना (कविता/नज़्म)
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुधेन्दु ओझा जी।बेहतरीन कविता/नज़्म। आज़ाद परिंदे हो,तुम उड़ ही जाओगे।माँ-बाप की कभी खटिया,पुरानी देख लेना॥"
Mar 17
सतविन्द्र कुमार commented on SudhenduOjha's blog post फुर्सत से कभी मेरी,ज़िंदगानी देख लेना (कविता/नज़्म)
"आदरणीय सुधेन्दु ओझा सर,बेहतरीन नज्म कही है आपने।हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Mar 16
SudhenduOjha posted blog posts
Mar 16
SudhenduOjha replied to SudhenduOjha's discussion वर्तमान हिन्दू समाज में जातिगत विभीषिका को किस तरह समाप्त किया जासकता है? in the group आध्यात्मिक चिंतन
"Part-2 मैं कृतार्थ हूँ उन सज्जन का कि उन्होंने मेरी प्रथम पाण्डुलिपि पर बेबाक टिप्पणियाँ कीं और उसे दस-पंद्रह दिनों के अंदर ही मुझे लौटा भी दिया। उनकी इन टिप्पणियों से मैं बहुत लाभान्वित हुआ। मैंने ‘सनातन समाज की नई संहिता’ को समग्र…"
Aug 21, 2016
SudhenduOjha replied to SudhenduOjha's discussion वर्तमान हिन्दू समाज में जातिगत विभीषिका को किस तरह समाप्त किया जासकता है? in the group आध्यात्मिक चिंतन
"Part-1         सुधेन्दु ओझा (9868108713)     नए ‘सनातन समाज’ का गठन सभी हिन्दू-अहिन्दू अनिवार्यरूप से पढ़ें चतुर्थ वर्ण का ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य वर्णों में आमेलन हिंदुओं की आदर्श नई समाज…"
Aug 21, 2016

Profile Information

Gender
Male
City State
New Delhi
Native Place
Pratapgarh (UP)
Profession
Service

SudhenduOjha's Blog

मुझको यदि पढ़ना चाहोगे, कई बहाने मिल जाएँगे

यूँ ही.............. 

 

मुझको यदि पढ़ना चाहोगे

कई बहाने मिल जाएँगे

मुझसे यदि बचना चाहोगे

कई बहाने मिल जाएँगे

 

हम दुनियावी मसलों को-

छोड़, यहाँ तक आ पहुंचे हैं

तुम, अपनी फिकरों को छोड़ो

कई बहाने मिल जाएँगे

 

खूब दिखाए बाग-तितलियाँ

औ खूब सुनाई गज़लें भी

कैसे डूब गई मैं तुझमें 

कई बहाने मिल जाएँगे

 

कौन कह रहा तनहा हैं हम

हम से दूर हुए कब तुम थे?

मजबूरी टूटे बस…

Continue

Posted on July 20, 2017 at 11:43am

अवसादों की खींच-तान हो, तुमको मैंने देखा है

यूँ ही.............. 

 

अवसादों की खींच-तान हो,

तुमको मैंने देखा है

बादल तिरता आस्मान हो

तुमको मैंने देखा है

 

हर कारज के होने में

पाने में या खोने में

तुम ही सब अनुष्ठान हो

तुमको मैंने देखा है

 

आपा-धापी, गला-काट

बात-बात पर लाग-डांट

दुनिया से परेशान हो

तुमको मैंने देखा है

 

जगती के इस रेले में

औ विवाद के ठेले में

जलता सा जब मसान हो

तुमको मैंने देखा…

Continue

Posted on July 20, 2017 at 11:27am — 7 Comments

दुनिया कहती है, मैं ऐसा हूँ। दुनिया कहती है, मैं वैसा हूँ॥

दुनिया कहती है,

मैं ऐसा हूँ।

दुनिया कहती है,

मैं वैसा हूँ॥

जेठ की दोपहरी

पसीने का एहसास,

ताम्र वर्ण की-

अतृप्त प्यास॥

तेरी काँख के गंध

जैसा हूँ॥



दुनिया कहती है,

मैं ऐसा हूँ।

दुनिया कहती है,

मैं वैसा हूँ॥

सही वक़्त, सही लोग

मिल नहीं पाए।

शब्द बिखरे रहे,

अर्थ मिल नहीं पाए॥

उनींदी रातों की,

सिलवटों जैसा हूँ॥



दुनिया…

Continue

Posted on May 20, 2017 at 10:05pm

फुर्सत से कभी मेरी,ज़िंदगानी देख लेना (कविता/नज़्म)

फुर्सत से कभी मेरी,

ज़िंदगानी देख लेना।

हो सके तो दरिया,

तूफानी देख लेना॥



है मेरी माँ ये,

समझाऊँ तुम्हें कैसे।

भूखा जो रहूँ, मैं

इसकी पेशानी देख लेना॥



आज़ाद परिंदे हो,

तुम उड़ ही जाओगे।

माँ-बाप की कभी खटिया,

पुरानी देख लेना॥



मैं अकेला कब था

मुझ में क़ायनात थी।

किस तरह से हमने, की

बे-ईमानी देख लेना॥



है सहूलियत तो,

मुंह खोलने से पहले।

पिताजी के अपनी,

परेशानी देख लेना॥



पीपल… Continue

Posted on March 16, 2017 at 2:35pm — 4 Comments

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At 6:00pm on June 9, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

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