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SudhenduOjha
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  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
 

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Gender
Male
City State
New Delhi
Native Place
Pratapgarh (UP)
Profession
Service

SudhenduOjha's Blog

मुझको यदि पढ़ना चाहोगे, कई बहाने मिल जाएँगे

यूँ ही.............. 

 

मुझको यदि पढ़ना चाहोगे

कई बहाने मिल जाएँगे

मुझसे यदि बचना चाहोगे

कई बहाने मिल जाएँगे

 

हम दुनियावी मसलों को-

छोड़, यहाँ तक आ पहुंचे हैं

तुम, अपनी फिकरों को छोड़ो

कई बहाने मिल जाएँगे

 

खूब दिखाए बाग-तितलियाँ

औ खूब सुनाई गज़लें भी

कैसे डूब गई मैं तुझमें 

कई बहाने मिल जाएँगे

 

कौन कह रहा तनहा हैं हम

हम से दूर हुए कब तुम थे?

मजबूरी टूटे बस…

Continue

Posted on July 20, 2017 at 11:43am

अवसादों की खींच-तान हो, तुमको मैंने देखा है

यूँ ही.............. 

 

अवसादों की खींच-तान हो,

तुमको मैंने देखा है

बादल तिरता आस्मान हो

तुमको मैंने देखा है

 

हर कारज के होने में

पाने में या खोने में

तुम ही सब अनुष्ठान हो

तुमको मैंने देखा है

 

आपा-धापी, गला-काट

बात-बात पर लाग-डांट

दुनिया से परेशान हो

तुमको मैंने देखा है

 

जगती के इस रेले में

औ विवाद के ठेले में

जलता सा जब मसान हो

तुमको मैंने देखा…

Continue

Posted on July 20, 2017 at 11:27am — 7 Comments

दुनिया कहती है, मैं ऐसा हूँ। दुनिया कहती है, मैं वैसा हूँ॥

दुनिया कहती है,

मैं ऐसा हूँ।

दुनिया कहती है,

मैं वैसा हूँ॥

जेठ की दोपहरी

पसीने का एहसास,

ताम्र वर्ण की-

अतृप्त प्यास॥

तेरी काँख के गंध

जैसा हूँ॥



दुनिया कहती है,

मैं ऐसा हूँ।

दुनिया कहती है,

मैं वैसा हूँ॥

सही वक़्त, सही लोग

मिल नहीं पाए।

शब्द बिखरे रहे,

अर्थ मिल नहीं पाए॥

उनींदी रातों की,

सिलवटों जैसा हूँ॥



दुनिया…

Continue

Posted on May 20, 2017 at 10:05pm

फुर्सत से कभी मेरी,ज़िंदगानी देख लेना (कविता/नज़्म)

फुर्सत से कभी मेरी,

ज़िंदगानी देख लेना।

हो सके तो दरिया,

तूफानी देख लेना॥



है मेरी माँ ये,

समझाऊँ तुम्हें कैसे।

भूखा जो रहूँ, मैं

इसकी पेशानी देख लेना॥



आज़ाद परिंदे हो,

तुम उड़ ही जाओगे।

माँ-बाप की कभी खटिया,

पुरानी देख लेना॥



मैं अकेला कब था

मुझ में क़ायनात थी।

किस तरह से हमने, की

बे-ईमानी देख लेना॥



है सहूलियत तो,

मुंह खोलने से पहले।

पिताजी के अपनी,

परेशानी देख लेना॥



पीपल… Continue

Posted on March 16, 2017 at 2:35pm — 4 Comments

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At 6:00pm on June 9, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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