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सतविन्द्र कुमार
  • Male
  • karnal,haryana
  • India
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सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"छन्न पकैया छन्न पकैया,बातें ख़ास बताई चित्र हुआ यह सार्थक सर जी,ले लो खूब बधाई"
Saturday
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"आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी,प्रयास आपको पसन्द आया ,यह सार्थक हुआ। तिथि में कोमा का इस्तेमाल जल्दबाज़ी में हो गया है। आगे इसका ध्यान रखूँगा।सादर आभार संग नमन!"
Saturday
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"आदरणीया प्रतिभा दीदी,उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत हार्दिक आभार,सादर नमन!"
Saturday
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"श्रद्धेय सौरभ सर,सादर नमन! प्रयास आपको ठीक लगा,लिखना सार्थक हुआ। अनुमोदन कर उत्साहवर्धन करने के लिए सादर हार्दिक आभार!"
Saturday
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"आदरणीय योगराज प्रभाकर सर,प्रयास का अनुमोदन करके प्रोत्साहित करने के लिए सादर हार्दिक आभार, सादर नमन!"
Saturday
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"आदरणीय तस्दीक अहमद साहब,प्रयास को पसन्द कर हौंसलाफ़ज़ाई करने के लिए तहेदिल शुक्रिया! नमन सादर"
Saturday
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"आदरणीय अखिलेश जी सार छ्न्द आधारित गीत प्रयास पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए बहुत-बहुत आभार, नमन सादर!"
Saturday
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"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी,प्रयास पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए तहेदिल आभार। आप सही कह रहे हैं शायद और अच्छे भाव आ सकते हैं। प्रयास करूँगा यदि ऐसा कर पाया। सादर"
Saturday
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"आदरणीय अरुण से मिलता,साहस हमें अपार सुन्दर करें टिप्पणी सारी, छंदों में हर बार जय जय सरजी"
Saturday
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"आदरणीय समर कबीर जी सादर नमन,उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत आभार!"
Saturday
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"आपको प्रयास पसन्द आया,लिखना सार्थक हुआ। सादर हार्दिक आभार आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी!"
Saturday
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"आदरणीया सुनन्दा झा जी सादर,प्रयास पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए सादर हार्दिक आभार! नमन सादर"
Saturday
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"अच्छा होता जाता दिखता, हमको सतत प्रयास ऐसे ही ज़ारी रखना दी,आप सही अभ्यास"
Saturday
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"ऐसे सारे बच्चों करते,माँ का ऊँचा भाल सरसी छ्न्द रचें सब अच्छे,हे वासु अग्रवाल"
Saturday
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"सुन्दर सरसी छ्न्द हुए ये,हे दीदी राजेश बता रहें है बच्चे प्यारे,सुन्दर अपना देश हमको तो भाई सब बातें,देतीं ज्ञान अपार ले लो खूब बधाई दीदी,देते बारम्बार!"
Saturday
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"हिंदी हम सारे के सारे,है भारत हिंदुस्तान रच कर सरसी छ्न्द गीत ये,बढ़ा रहे हो शान खूब बधाई देता भाई, ले लो दीदी आज गीत बना जाता है ये,देशभक्ति आवाज़"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार's Blog

लकीरों में तो कुछ रक्खा नहीं है(गजल) /सतविन्द्र कुमार राणा

गजल

बह्र 1222 1222 122



फरेबी तू जो बन पाया नहीं है

तभी सिक्का तेरा चलता नहीं है



नहीं नीयत में ही जब काम करना

कहे क्यों तू, मिला मौका नहीं है



ज़ुबाँ में सादगी उसकी झलकती

भले देहात में रहता नहीं है



जिया था तू वतन के वास्ते पर

शहादत का तेरी चर्चा नहीं है



सरे बाज़ार देखो झूठ बिकता

जो' बिक जाए वो' फिर सच्चा नहीं है



लिखी तकदीर हाथों से ही जाती

लकीरों में तो कुछ रक्खा नहीं है



मौलिक एवं… Continue

Posted on August 6, 2017 at 12:30pm — 2 Comments

एक ग़ज़ल/सतविन्द्र राणा

बह्र:1222 1222 122

नहीं पहले-सी चेहरे पे चमक है
हँसी में आपकी गम की झलक है

नहीँ आमाल में जिसकी है नीयत
उसी की क़ामयाबी पे भी शक है

कोई तो खेल में पानी बहाता
कहीं पर प्यासा मरने की धमक है

पहुँचना उसका ही होगा फलक तक
नज़र जिसकी बहुत आगे तलक है

रहेगी रात तन्हा, दिन अकेला
हमारा साथ कुछ ही देर तक है

उसे बंदिश भला क्या रोक पाए?
नजर में जिसकी ये सारा फलक है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 6, 2017 at 11:00am — 14 Comments

कुण्डलिया/सतविन्द्र राणा

सारे दादुर मोर खुश ,सावन जो घिर आय।
कारे बादल जलभरे ,नभ में जाते छाय।
नभ में जाते छाय, प्यास धरती की हरते।
नीर सुधा बरसाय,सुहागन इसको करते।
सतविन्दर कविराय, लगाओ पौधे प्यारे
मिट्टी उगले अन्न,सुखी हों प्राणी सारे।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 2, 2017 at 8:30pm — 8 Comments

वीर चेतक(आल्हा छ्न्द)/सतविन्द्र कुमार राणा

*वीर चेतक*(वीर छ्न्द)



घोड़े देखे बहुत जगत में,देखा कब चेतक-सा वीर



बिजली-सी चुस्ती थी जिसमें लेकिन रहता रण में धीर



कद था छोटा ही उसका पर,लम्बा उसका बहुत शरीर



मारवाड़ की अश्व-नस्ल में राणा ने पाया वह बीर





हल्दी घाटी समर क्षेत्र में,राणा उसपे रहे सवार



चेतक मुख पर सूंड लगाए,गज पर करता चढ़-चढ़ वार



राणा का भाला चलता था,संग चली टापों की मार



आगे-पीछे हटता चेतक,दिखती रण कौशल में धार





हल्दी घाटी… Continue

Posted on June 8, 2017 at 8:30pm — 9 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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