For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सतविन्द्र कुमार राणा
  • Male
  • karnal,haryana
  • India
Share on Facebook MySpace

सतविन्द्र कुमार राणा's Friends

  • पंखराज
  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
  • महिमा  वर्मा
  • KALPANA BHATT ('रौनक़')
  • रामबली गुप्ता
  • रतन राठौड़
  • sameer ranjan
  • Pawan Jain
  • Sheikh Shahzad Usmani
  • Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
  • Ravi Shukla
  • pratibha pande
  • TEJ VEER SINGH
  • Seema Singh
  • जयनित कुमार मेहता
 

सतविन्द्र कुमार राणा's Page

Latest Activity

सतविन्द्र कुमार राणा commented on जयनित कुमार मेहता's blog post साज-श्रृंगार व्यर्थ है तेरा (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित भाई, बहुत बढ़िया ग़ज़ल।"
Sep 10
सतविन्द्र कुमार राणा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सिन्दूर कह न सिर्फ सजाने की चीज है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय धामी सर सादर नमन, सिंदूर पर केंद्रित अच्छे भाव उकेरे आपने हार्दिक बधाई। इससे हैं मिटाती दूरियाँ  में कुछ अटकाव महसूस हो रहा है,  सादर"
Sep 10
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-136
"अर्थ सकल जो प्रेम के, जानें इनको जान दोहे जितने कह दिए, सम्माहित है ज्ञान।"
Feb 13
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"सॉनेट (आशु प्रयास) कुछ दिल में कुछ घर में, कुछ खेतों के अंदर कुछ गाँव, गली, कूचे के कोनों में बिखरी रहता प्यास समेटे जैसे एक समंदर ऐसे ही रहती हैं यादें भूली बिसरी। उलझे के उलझे रह जाते, कच्चे धागे सुलझन में जिनकी उलझन साहस पाती धूल हटाकर पट से…"
Jan 15
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"बहुत खूब आदरणीया, इतने दिन का लेखा जोखा। सादर"
Jan 15
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"सुन्दर कह दोहावली, याद कराते याद धामी जी इस याद का, याद रहेगा स्वाद।।"
Jan 15
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 124 in the group चित्र से काव्य तक
"भुजंगप्रयात छंद सही ज्ञान दाता करे वो उजाले, पिता बालकों को हमेशा सँभाले। नहीं भूख से तंग होते कभी वो, निवाला मिले वक्त पे ही सभी को। मौलिक अप्रकाशित  "
Aug 22, 2021
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय रवि प्रभाकर जी, लघुकथा ने एक सृजक, चिंतक , आलोचक ही नहीं खोया, आपके रूप में मैनें  एक स्नेहसिन्धु, पथप्रदर्शक भी खो दिया है। आपके बारे में सुनें समाचार पर यकीन नहीं कर पा रहा हूँ। आजीवन स्मृतियों में जिंदा रहोगे। ॐ शांति!"
May 23, 2021
सतविन्द्र कुमार राणा posted a blog post

कालिख सना समय

जब-जब कालिख सने समय के,पन्ने खोले जाएंगेमानवता पर लगे ग्रहण को,सीधा याद दिलाएंगे।आफत को जो अवसर मानें,लाभ कमाने बैठे हैंअन्तस् को बस मार दिया है,हठ में अपनी ऐंठे हैंआज हवा और दवा सब पर,जिनका पूरा कब्जा हैजान छीनने के कामों को,ही करने का जज़्बा है।उनके सारे कर्म आज के,सदा ही मुँह चिढाएंगे।जब-जब कालिख सने समय के,पन्ने खोले जाएंगे।कुर्सी का लालच कुर्सी कामद अब जिन पर छाया हैजिनके दुष्कृत्यों के कारण,हर जन ही भरमाया है।दूर रही जो दूरदर्शिता,लचर व्यवस्था भारी हैजिसकी भूल भुगतती दिखती,अब जनता बेचारी…See More
May 19, 2021
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post बिना बात की बात
"आदरणीय धामी जी सादर नमन सह आभारं"
May 18, 2021
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"विनम्र श्रद्धांजलि!  भारी वक्त है, ईश्वर शीघ्र उबारें!"
May 2, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post बिना बात की बात
"आ. भाई सतविन्द्र जी, सादर अभिवादन। अच्छी समसामयिक रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Apr 27, 2021
सतविन्द्र कुमार राणा posted a blog post

बिना बात की बात

बिना बात की बात बनाते, लोग यहाँ दिख जाते हैं जैसे उल्लू सीधा होता, वैसे ही बिक जाते हैं।धर्म नहीं जानें क्या होता, क्या जानें परिभाषा को रिश्तों को अब मान नहीं है, स्थान नहीं कुछ आशा को। दशरथ घर से बाहर हैं अब, पूत वहाँ का राजा है, देकर वचन भूल जाना बस, यही समय से साधा है सरयू को अपमानित करते, गंगा दूषित होती है देख नज़ारा प्रतिदिन का यह, भारत भू अब रोती है। राम नहीं है घट में लेकिन, झंडों पर टिक जाते हैं। बिना बात की बात बनाते, लोग यहाँ दिख जाते हैं।गुह-सा मित्र नहीं है कोई, जो कुछ साथ…See More
Apr 21, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post तेरे गम के निशानों को यहाँ पर कौन समझे
"आ. भाई सतविंद्र जी , सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है हार्दिक बधाई ।"
Apr 10, 2021
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post तेरे गम के निशानों को यहाँ पर कौन समझे
"जी, आदरणीय बृजेश भाई ऐसे किया जा सकताहै।सादर आभार"
Apr 10, 2021
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post तेरे गम के निशानों को यहाँ पर कौन समझे
"तब ठीक है लेकिन सौदा की जगह साधन भी किया जा सकता है...सादर "बनी व्यापार का साधन""
Apr 9, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार राणा's Blog

कालिख सना समय

जब-जब कालिख सने समय के,

पन्ने खोले जाएंगे

मानवता पर लगे ग्रहण को,

सीधा याद दिलाएंगे।

आफत को जो अवसर मानें,

लाभ कमाने बैठे हैं

अन्तस् को बस मार दिया है,

हठ में अपनी ऐंठे हैं

आज हवा और दवा सब पर,

जिनका पूरा कब्जा है

जान छीनने के कामों को,

ही करने का जज़्बा है।

उनके सारे कर्म आज के,

सदा ही मुँह चिढाएंगे।

जब-जब कालिख सने समय के,

पन्ने खोले जाएंगे।

कुर्सी का लालच कुर्सी का

मद अब जिन पर छाया है

जिनके…

Continue

Posted on May 18, 2021 at 5:00pm

बिना बात की बात

बिना बात की बात बनाते,

लोग यहाँ दिख जाते हैं

जैसे उल्लू सीधा होता,

वैसे ही बिक जाते हैं।

धर्म नहीं जानें क्या होता,

क्या जानें परिभाषा को

रिश्तों को अब मान नहीं है,

स्थान नहीं कुछ आशा को।

दशरथ घर से बाहर हैं अब,

पूत वहाँ का राजा है,

देकर वचन भूल जाना बस,

यही समय से साधा है

सरयू को अपमानित करते,

गंगा दूषित होती है

देख नज़ारा प्रतिदिन का यह,

भारत भू अब रोती है।

राम नहीं है घट में लेकिन,

झंडों पर…

Continue

Posted on April 21, 2021 at 2:46pm — 2 Comments

मिर्च कोई आग पर बोता है क्या- ग़ज़ल

2122 2122 212

मिर्च कोई आग पर बोता है क्या,
लोन-पानी ज़ख्म को धोता है क्या।

हो रहा जो अब भले होता है क्या,
कोई अपने आप को खोता है क्या।

बेबसी को तू हटा औज़ार बन,
इसका दामन थाम कर रोता है क्या।

इश्क़ करता, सब्ज़ धरती देख ले,
बीज इसका तू कभी बोता है क्या।

'बाल' चुप्पी साध लेना जुर्म पर,
जुर्म से खुद कम कभी होता है क्या।

लोन-नमक

मौलिक अप्रकाशित

Posted on April 6, 2021 at 8:06pm

हौसले से तीरगी मिट जाएगी

2122 2122 212

कौन कहता है खुशी मिट जाएगी?
हौसले से तीरगी मिट जाएगी।

है भरम बस धूल आँधी के समय,
शांत होते ही कमी मिट जाएगी।

चोर चोरी भी तो मिहनत से करे,
कर ले मिहनत, गंदगी मिट जाएगी।

एक होता दूसरे खातिर फिदा,
फिर कहा क्यों जिंदगी मिट जाएगी?

'बाल' कर अल्फ़ाज़ से तू दोस्ती,
तेरी तन्हा बेबसी मिट जाएगी।


मौलिक अप्रकाशित

Posted on March 29, 2021 at 7:34am — 2 Comments

Comment Wall (8 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:46am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा  साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार राणा said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें,…"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (...महफ़ूज़ है)
"आदरणीय सुधीजन पाठकों ग़ज़ल के छठवें शे'र में आया शब्द "ज़र्फ़मंदों" को कृपया…"
8 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"पुन: आगमन पर आपका धन्यवाद। "
9 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी posted a blog post

ग़ज़ल (...महफ़ूज़ है)

2122 - 2122 - 2122 - 212वो जो हम से कह चुके वो हर बयाँ महफ़ूज़ हैदास्तान-ए-ग़ीबत-ए-कौन-ओ-मकाँ…See More
9 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post रूप(लघुकथा)
"आदरणीय महेंद्र जी, लघुकथा को आपने इज्जत बख्शी। आपका शुक्रिया। "
9 hours ago
Mahendra Kumar commented on Manan Kumar singh's blog post रूप(लघुकथा)
"व्यक्ति के कई रूप होते हैं। इस बात को रेखांकित करती हुई अच्छी लघुकथा लिखी है आपने आ. मनन जी।…"
11 hours ago
Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"कोई बात नहीं। रचना पर अन्तिम निर्णय लेखक का ही होता। एक बार पुनः बधाई। "
11 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया, जनाब…"
12 hours ago
Mahendra Kumar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post मरती हुई नदी (नवगीत)
"पर्यावरणीय चिन्ताओं पर बढ़िया नवगीत लिखा है आपने आ. धर्मेन्द्र जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। कृपया…"
14 hours ago
Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"वैसे दूसरा शेर बेहतर हो सकता है।"
14 hours ago
Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अमीरुद्दीन जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है। "
14 hours ago
Mahendra Kumar commented on जयनित कुमार मेहता's blog post इक वह्म ऐतबार से आगे की चीज़ है (ग़ज़ल)
"संशोधन के बाद ख़ूब ग़ज़ल हुई है आदरणीय जयनित जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। "
14 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service