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सतविन्द्र कुमार राणा
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"आदरणीय समर कबीर सर, सादर वंदन! हौंसला अफ़ज़ाई और अनुमोदन के लिए तहेदिल आभारं। जहाँ तक ख़ुश्कती शब्द किस भाषा का है, तो इसका सही जवाब क्या होगा? कुछ स्पष्ट नहीं कह सकता। हां इसका मूल शब्द ख़ुश्क अथवा ख़ुश्की शायद उर्दू का ही शब्द है, उसी शब्द से आञ्चलिक…"
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"दोहे जीवन जल को मानता, यह पूरा संसार। जल थल जब हो एक-सा, जीवन जाता हार।। जिसकी आँखों का मरा, पानी सुन लो तात। पानी-पानी हो वही, जब देखे औक़ात।। जल-जल जल चिल्ला रहा, जन-जन अब हर ओर। कहीं ख़ुश्कती सांस हैं, कहीं उन्हीं पर ज़ोर।। अनुशासित जल जिंदगी,…"
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Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना- ग़ज़ल
"जनाब सतविन्द्र कुमार राणा जी आदाब,आपकी इस ग़ज़ल के किसी भी शैर के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,फिर से प्रयास करें ।"
Sep 23
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"तोमर छन्द सकल चिंता को भूल, फकीरी का यह मूल। अन्न मिला भरा पेट, नन्दी पर गया लेट।। दिखे जनबल चहुँ ओर, लगे झूठी सब डोर। जगति में जिस का साथ, जनहुँ वह सबका नाथ। । मौलिक अप्रकाशित"
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surender insan commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना- ग़ज़ल
"अच्छी ग़ज़ल हुई हक़ी सतविंदर भाई जी। मुबारकबाद कबूल करे।"
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सतविन्द्र कुमार राणा posted a blog post

नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना- ग़ज़ल

1222 1222 122 नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना दिखें हैं साथ लेकिन दूर होना।कली का कुछ समय को ठीक है, पर नहीं अच्छा चमन, मगरूर होना।अँधेरों से उजालों का है रस्ता चिरागों का थकन से चूर होना।कोई कहता इसे वरदान है ये खले लेकिन किसी को हूर होना।अभी सूखा नहीं रख ले तसल्ली दिखेगा ज़ख्म का नासूर होना।कदम तो चूम लेगी जीत तेरे है बाकी बस तुझे मंजूर होना।मौलिक अप्रकाशितSee More
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सतविन्द्र कुमार राणा commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-लालफीताशाही-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"उत्तम अति उत्तम!"
Sep 20
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
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Sep 14
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
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Sep 14
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आदरणीय अखिलेश जी उत्साहवर्धन एवं अनुमोदन हित हार्दिक आभार"
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"दोहे कहते दिख रहे, सकल चन्द्र विज्ञान  समझोगे तब मर्म को, पढ़ो लगाकर ध्यान। सादर बधाई"
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आदरणीय डॉ छोटेलाल जी, उत्तम प्रस्तुति हुई है। हार्दिक बधाई सह नमन"
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आदरणीय डॉ विजय शंकर जी, सादर नमन!विषयानुरूप  प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई"
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
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Sep 14

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार राणा's Blog

नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना- ग़ज़ल

1222 1222 122
नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना
दिखें हैं साथ लेकिन दूर होना।

कली का कुछ समय को ठीक है, पर
नहीं अच्छा चमन, मगरूर होना।

अँधेरों से उजालों का है रस्ता
चिरागों का थकन से चूर होना।

कोई कहता इसे वरदान है ये
खले लेकिन किसी को हूर होना।

अभी सूखा नहीं रख ले तसल्ली
दिखेगा ज़ख्म का नासूर होना।

कदम तो चूम लेगी जीत तेरे
है बाकी बस तुझे मंजूर होना।

मौलिक अप्रकाशित

Posted on September 20, 2019 at 2:00pm — 2 Comments

पत्थरों पे हैं इल्ज़ाम झूठे सभी-गजल

212 212 212 212

अब नए फूल डालों पे आने लगे

और' भ्रमर फिर ख़ुशी से हैं गाने लगे।

पत्थरों पे हैं इल्जाम झूठे सभी

राही के ही कदम डगमगाने लगे।

रहबरी तीरगी की रहे कर ते जो

अब वो सूरज को दीपक दिखाने लगे।

वादा वो ही किया जो था तुमने कहा

घोषणा क्यों चुनावी बताने लगे।

जिनको सोचा नजर हैं सही रख रहे

गौर कर देखा सारे ही काने लगे।

भैंस बहरी नहीं अब समझ लेगी सब

बीन ये सोच कर फिर बजाने…

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Posted on March 21, 2019 at 11:30am — 2 Comments

हम मानेंगे बात जो हमको प्यारी है- ग़ज़ल

22 22 22 22 22 2

नमक मसाले से बनती तरकारी है

सच मानों यह असली दुनियादारी है।

देख सलीका नकली बातें करने का

असली पर ही पड़ जाता कुछ भारी है।

छेदों से ही जिसकी है औक़ात यहाँ

छलनी ही समझाती, क्या खुद्दारी है?

होते हों कितने भी पहलू बातों के

हम समझेंगे जितनी अक्ल हमारी है।

तुम मानों जो तुमको अच्छा है लगता

हम मानेंगे बात जो हमको प्यारी है ।

आज लबादे में लिपटे अल्फ़ाज़ सभी

जिनको सुनना जनता की…

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Posted on March 4, 2019 at 9:00am — 4 Comments

करो कुछ याद उनको जो गये हैं- ग़ज़ल

1222 1222 122

ये देखा और' सुना इस फरवरी में

बहकता दिल ज़रा इस फरवरी में।

किसी की कोशिशें कुछ काम आई

कोई जम कर पिटा इस फरवरी में।

दिखावे में ढली है जिंदगी बस

रहे सच से जुदा इस फरवरी में।

मुहब्बत को समेटा है पलों ने

हुआ ये क्या भला इस फरवरी में?

कहीं पर नेह की कोंपल भी फूटी

किसी का दिल जला इस फरवरी में।

करो कुछ याद उनको जो गये हैं

वतन पर जां लुटा इस फरवरी में।

मौलिक…

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Posted on February 12, 2019 at 7:30pm — 2 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 6:46am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा  साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार राणा said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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