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सतविन्द्र कुमार
  • Male
  • karnal,haryana
  • India
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सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय अजित जी बेहतरीन .गजल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाई"
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सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय महेंद्र जी हारदिक बड़ाहै कबूल कीजिये!"
5 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"प्रयास को समय देने और हौंसलाफ़ज़ाई करने के लिए सभी आदरणीय हाजरीन का शुक्रिया।आदरणीय तस्दीक अहमद जी ,रदीफ़ वाकई दिमाग को हिला देने वाली है।मुझसे चूक रही है ,इसे ठीक करने की कोशिश करूँगा!सादर"
5 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय मुनीश तनहा जी,इस बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई"
5 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय नवीन जी,गजल प्रयास के लिए हार्दिक बधाई! तुम्हारा /तेरा शायद शुतुर्गबा ऐब भी आ गया है,शेष चर्चा हो ही चुकी है।सादर"
5 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदर्णीय आशुतोष जी,हारदिक बधाई इस ग़ज़ल के लिए।आपकी गजल पँर चर्चा हमारे लिए भी लाभदायी रही।सादर"
6 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"हार्दिक बधाई आदरणीय मनन जी इस उम्दा गजल के लिए!"
6 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय मिथिलेश जी,वाह्ह्ह् बेहतरीन अशआर हुए हैं,डबल गिरह ,डबल मक्ता लाजवाब,हार्दिक बधाई स्वीकारें!"
6 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"गजल प्रयास के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय अनुराग जी!"
6 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"हार्दिक बधाई आदरणीया सीमा जी!"
6 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय हेमंत क्7मार जी बेहतरीन अशआर के लिए तहे दिल दाद कबूल फरमाएँ!"
6 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"हार्दिक बधाई आदरणीय नादिर खां साहब,इस खूबसूरत गजल के लिए!"
6 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीया राजेश दीदी,उम्दा गजल कहने और बेहतरीन चर्चा के लिए हार्दिक बधाई!सादर नमन!"
6 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"बढ़िया गजल कहने के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय हसन साहब"
6 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय तस्दीक अहमद खां साहब,बेहतरीन गजल कहने के लिए हार्दिक बधाई!"
6 hours ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय शिज्जु शकूर सर,सादर हार्दिक बधाई बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए!"
6 hours ago

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार's Blog

तरही गजल

2122 2122 212



बस झुके हमको तो सबके सर मिले

बुत यहाँ भारी ज़माने पर मिले



काँच के जिनके बनें हैं घर यहाँ

हाथ में उनके ही बस पत्थर मिले।



विष गले में रख सके जग का सकल

है कहाँ मुमकिन कि फिर शंकर मिले।



दिल में उनके है धुआँ गम का बहुत

पर मिले जिससे भी वो हँसकर मिले



फूल को कैसे समझ लें फूल जब

पास उसके ही हमें खंजर मिले



मिल गया अब रहनुमा देखो नया

झोपड़ी को भी नया छप्पर मिले



हैं जहाँ पर दौलतों की… Continue

Posted on March 21, 2017 at 9:00pm — 12 Comments

ज़ुबाँ पे सख्त पहरा हो रहा है(गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा

1222 1222 122
बिखरकर फिर इकट्ठा हो रहा है
जवाँ फिर से इरादा हो रहा है।

जिसे अपना समझते थे,न जाने
वही क्यों अब पराया हो रहा है?

समन्दर सी छलकती हैं ये आँखें
कोई तो ज़ख्म गहरा हो रहा है।

किसे जाकर सुनाएँ हाल अपना
हमारा शाह बहरा हो रहा है।

भरोसा टूटना लाज़िम हुआ अब
जहाँ का दौर झूठा हो रहा है।

ज़ुबाँ कैसे किसी की अब उठेगी
ज़ुबाँ पे सख़्त पहरा हो रहा है।

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on March 16, 2017 at 10:11pm — 12 Comments

आदमी को आदमी ही अब समझ ले आदमी (गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा

2122 2122 2122.212

प्यार के अहसास को दिल की चुभन तक ले चलो

नफरतों को भूलकर फिर से मिलन तक ले चलो।



आदमी को आदमी ही अब समझ ले आदमी

आदमीयत को जमाने के चलन तक ले चलो



बन नहीं सकती अगर सरकार खुद के जोर से

साथ लेकर औरों को इसके गठन तक ले चलो



भूख से तड़पे न कोई ठण्ड से काँपे नहीं

रोटी कपड़ा हर किसी के अब बदन तक ले चलो



छोड़ कर जिसको हूँ आया चन्द सिक्कों के लिए

याद आता है मुझे,मेरे वतन तक ले चलो



छोड़ना तन को था मुश्किल… Continue

Posted on March 10, 2017 at 9:30pm — 14 Comments

कुछ मुक्तक/सतविन्द्र कुमार राणा

(16 14 मात्रा भार)

.

(1)

हाथ जोड़ कर फिरते दिखते जब-जब सीजन आता है

दर-दर पर मिन्नत होती है हर इक जन तब भाता है

काम साध कुर्सी को पाकर याद नहीं फिर कुछ आता

झुककर जो वादे कर जाते उनको कौन निभाता है?



(2)

मौसम जैसा हाल सजन का समझ नहीं कुछ आता है

इस पल होता है तौला उस पल माशा बन जाता है

प्रीत हमारी लगती झूठी जाने क्या दिल में रखते?

वादे उनके ऐसे लगते ज्यों नेता कर जाता है।



(3)

आँखों को झूठा मत समझो आँखें सच ही कहती हैं…

Continue

Posted on February 22, 2017 at 2:30pm — 4 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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