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सतविन्द्र कुमार राणा
  • Male
  • karnal,haryana
  • India
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"कुण्डलिया कल-कल कल-कल बह रहा, हाथों में से नीर कुछ जाता है व्यर्थ कुछ, हरे कंठ की पीर हरे कंठ की पीर, बुझाता चले पिपासा तन होता है तृप्त, हृदय शीतलता पाता सतविंदर लो जान, समाया इसमें है बल रूप धरे विकराल, कभी गाता यह कल-कल। मौलिक एवं अप्रकाशित"
14 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-93
"वाह वाह, बहुत सुंदर गीत सृजन हुआ है, आदरणीया प्रतिभा दीदी। हार्दिक बधाई।"
Jul 14
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-93
"उत्तम सर्जना हुई है आदरणीया, हार्दिक बधाई स्वीकारें"
Jul 14
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-93
"बेहतरीन ग़ज़ल ! सादर हार्दिक बधाई"
Jul 14
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-93
"वाह, उत्तम कताक्षिकाएँ, हार्दिक बधाई आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी"
Jul 14
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-93
"अच्छे छंद कहे आदरणीय डॉ साहब। बधाई"
Jul 14
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-93
"मृगतृष्णा पर हैं कहे, दोहे सभी अनूप इस तिश्ना के हैं मगर, और कईं भी रूप।"
Jul 14
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-93
"नवगीत *जाने कैसा प्यासा बादल* प्यास बुझाने  भटक रहा है जाने कैसा प्यासा बादल? भरे पड़े भंडार बहुत हैं सागर को मिलते कब मोती दीप उजाला ढूँढ रहा है माथे पर रखता जो जोती लाल कईं पाले हैं जिसने सूना उस ममता का आँचल। प्रीत बसी है हिय के अंदर खोज…"
Jul 13
राज़ नवादवी left a comment for सतविन्द्र कुमार राणा
""आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा  साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर ""
Jul 2
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"अच्छी गजल कही है आदरणीय तस्दीक अहमद साहब। हार्दिक बधाई"
Jun 28
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी,हार्दिक बधाई स्वीकारें!"
Jun 28
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"आदरणीय रोशन सर, अच्छी गजल कही आपने, हर शेर उम्दा। बधाइयाँ!"
Jun 28
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"आदरणीय समर कबीर जी सादर नमन! शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद। उम्दा गजल कही आपने।"
Jun 28
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"बेहतरीन गजल हुई है आदरणीय राज नवादवी जी। मुबारकबाद कबूल फरमाएं6"
Jun 28
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी, कोशिश पर उपस्थित होकर हौंसलाफ़ज़ाई करने के लिए बहुत बहुत आभार।"
Jun 28
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"आदरणीय नीलेश भाई साहब, सादर नमन। मतले से मक्ते तक सब अशआर उम्दा। तहेदिल मुबातकबाद स्वीकारें"
Jun 28

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार राणा's Blog

ग़ज़ल

2122 1212 22/112/211
कुछ नहीं सूझता कई दिन से
जाने क्या हो रहा कई दिन से?

ये अलग है जुबाँ निगाहें अलग
है नहीं राबता कई दिन से।

हो लबों पे हँसी भले कितनी
मन रहा डगमगा कई दिन से।

जल रहा दिल कोई सही में कहीं
गर्म लगती हवा कई दिन से।

खुद पे खुद का नहीं रहा काबू
यूँ चढ़ा है नशा, कई दिन से।

मौलिक अप्रकाशित

Posted on June 11, 2018 at 11:29pm — 13 Comments

नाम बड़ा है उस घर का- गजल

222222 2

नाम बड़ा है उस घर का
जित असर नज़र के डर का

प्यास बुझाना प्यासे की
कब है काम समंदर का

बिना बात बजते बर्तन
दृश्य यही अब घर-घर का

बोल कहे और जय चाहे
क्या है काम सुख़नवर का?

महल दुमहले जिसके हैं
वही भिखारी दर-दर का।

'राणा' सच कहते रहना
रंग न छूूटे तेवर का।

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on April 23, 2018 at 6:30am — 12 Comments

जमीं में ही माँ जिसको देती दिखाई-गजल

122 122 122 122

वफ़ा की क्यों उम्मीद मैनें लगाई
लिखी मेरी किस्मत में थी बेवफाई

जमीं पर मिटे वो जो चाहे जमीं को
जमीं में ही माँ जिसको देती दिखाई

दिखाई नहीं वार देता जुबाँ का
सलीके से उसने अदावत निभाई

अटकता नहीं है कोई काम उसका
रही मन में जिसके सभी की भलाई

जो हारे वही जीत जाता हो जिसमें
बता कौन-सी ऐसी होती लड़ाई

मौलिक अप्रकाशित

Posted on March 22, 2018 at 6:52pm — 6 Comments

एक गीत/ सतविंद्र कुमार राणा

यह वर्ष नया मंगलमय हो

कोंपल फूटी है तरुवर पर

नव पल्लव का निर्माण हुआ

टेसू की लाली उभरी है

पुलकित हर तन, हर प्राण हुआ

हर मन से बाहर हर भय हो

यह वर्ष नया मंगलमय हो।

गेंहूँ बाली पूरी होकर

अब लहर लहर लहराती है

सरसों पर पीला रंग चढ़ा

भवरों को यह ललचाती है

भँवरों के गीतों-सी लय हो

यह वर्ष नया मंगलमय हो।

जाड़े को विदा किया हमने

गर्मी को दिया बुलावा है

हर चीज नई-सी लगती है

जब साल नया यह आया…

Continue

Posted on March 18, 2018 at 8:50am — 10 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 6:46am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा  साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार राणा said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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"वाह वाह वाह १  भाई शिज्जू शकूर जी का प्रयास मोहित और मुग्ध कर रहा है.  शुभातिशुभ"
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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत खूब आदरणीय "
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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
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