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सतविन्द्र कुमार राणा
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  • India
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"गीतिका(16-14) पानी जब सर से ऊपर हो, हिम्मत करना जायज़ है और तरीके से होता जो,भाई गुस्सा जायज़ है। वक्त बड़ा बीते पर उस पर ध्यान न जब कोई देता बच्चे का हर उस हालत में, पैर पटकना जायज़ है। जिसको कुचले स्वार्थ पूर्ति को, भूल चले परिणाम सभी तब इंसा का कुदरत…"
Jan 12
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post कुण्डलिया छन्द
"आदरणीय सौरभ सर सादर वन्दे! उत्साहवर्धन व मार्गदर्शन के लिए कोटिशः आभारं। कुछ परिवर्तन आपके मार्गदर्शनानुरूप करने की कोशिश की है। सादर"
Jan 11
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post कुण्डलिया छन्द
"आदरणीय समर कबीर सर, अरबी/उर्दू की शून्य जानकारी है। फिर भी जो शब्द पकड़ पाता हूँ पकड़ लेता हूँ। इस बात को लेकर मैं विशुद्ध देवनागरी के मामले में आतंकित तो नहीं पर असहज अवश्य हो जाता हूँ। क्योंकि यदि उर्दू में काफ़िया मिलाने की बात आती है तो ऐसा…"
Jan 11
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post कुण्डलिया छन्द
"आदरणीय समर कबीर जी सादर नमन, सादर हार्दिक आभार उत्साहवर्धन के लिए। "
Jan 11
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post कुण्डलिया छन्द
"आदरणीय फूल सिंह जी सादर नमन सह आभारं"
Jan 11
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)
"आ० बबिता गुप्ता जी सादर नमन, उरसाहवर्धन के लिए सादर आभार"
Jan 4
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)
"आदरणीय तस्दीक अहमद खां जी सादर नमन, हौंसलाफ़ज़ाई के लिए तहेदिल शुक्रिया"
Jan 4
babitagupta commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)
"प्रशासनिक व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करती बेहतरीन रचना ।बधाई, आदरणीय सतविन्दर सरजी।"
Jan 3
सतविन्द्र कुमार राणा posted blog posts
Jan 3
Tasdiq Ahmed Khan commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)
"जनाब सतविंदर कुमार साहिब , अच्छी लघुकथा हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l "
Jan 3
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)
""तवालत" का अर्थ है 'लम्बाई'"
Jan 3
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)
"आदरणीय तेजवीर जी, सादर नमन! प्रयास पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन के लिए सादर हार्दिक आभार।"
Jan 3
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)
"आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी साहब सादर नमन! कुछ प्रत्यक्ष प्रकरण भी कल्पना को उड़ान देते हैं, जिनमें व्यक्ति स्वयं या फिर कोई परिचित पीड़ित रहा हो। आपके टिप्पणी से अभिभूत हुआ। आपको रचनाकर्म पसन्द आया, इसे सार्थकता प्राप्त हुई। सादर"
Jan 3
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)
"आदरणीय सुरेन्द्रनाथ भाई साहब सादर नमन! उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत आभार"
Jan 3
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)
"आदरणीय समर कबीर सर, सादर नमन! अनुमोदन एवं उत्साहवर्धन के लिए तहेदिल शुक्रिया। मेरा उर्दू का ज्ञान सिफ़र ही मान कर चलिए। माफ़ी चाहूँगा मुझे तवालत का भी अर्थ नहीं मालूम। सादर"
Jan 3
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)
"आदरणीय समर कबीर सर, सादर नमन! अनुमोदन एवं उत्साहवर्धन के लिए तहेदिल शुक्रिया। मेरा उर्दू का ज्ञान सिफ़र ही मान कर चलिए। माफ़ी चाहूँगा मुझे तलावत का भी अर्थ नहीं मालूम। सादर"
Jan 3

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार राणा's Blog

रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)

*रक्तसिक्त हाथ* (लघुकथा)

हवालाती कैदी के रूप में तीसरा दिन। किसी से मुलाक़ात के लिए उसे भी पुकारा गया। मुलाकात कक्ष में पहुँचते ही सींखचों के पार एक मुस्कुराता चेहरा नज़र आया।

काजू कतली का डिब्बा आगे बढ़ाते हुए जिसने कहा, ''रजिस्ट्री हो गई साहब! मुँह मीठा करवाने आया हूँ।"

कुछ ही समय पहले जो बिलकुल अंजान था, वही चेहरा अहर्निशं अब उसकी आंखों और दिमाग़ में तैरता रहता है।

सत्यवीर भान का चेहरा। आज दूसरी बार इस चेहरे पर भयानक मुस्कुराहट देख पा रहा था। जिसे देखकर उसे स्मरण हो…

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Posted on January 2, 2019 at 9:26am — 14 Comments

कुण्डलिया छन्द

कुण्डलिया

जन को ढलना चाहिए, मौसम के अनुकूल

संकट होगा स्वास्थ्य पर, अगर करेंगे भूल

अगर करेंगे भूल, बात यह सही विचारो

खान-पान औ वस्त्र, सही ऋतुशः ही धारो

सतविंदर व्यवहार, सही हो रख पक्का मन

तन इसके अनुरूप, नहीं मन मौसम हो जन!

2.

जय-जय जय-जय हे अरुण!, तुम आभा भंडार

मिलती तुमसे जब किरण, तब चालित संसार

तब चालित संसार, प्रेरणा बात तुम्हारी

ऊर्जा तुमसे देव, मही अम्बर ने धारी

सतविंदर हर श्वास, सतत चलता है निर्भय

युग-युग रहो…

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Posted on December 24, 2018 at 7:00am — 8 Comments

कुण्डलियाँ

1

माना होता है समय, भाई रे बलवान

लेकिन उसको साध कर, बनते कई महान

बनते कई महान, विचारें इसकी महता

यह नदिया की धार, न जीवन उनका बहता

सतविंदर कह भाग्य, समय को ही क्यों जाना

नहीं सही भगवान, तुल्य यदि इसको माना।

2

होते तीन सही नकद, तेरह नहीं उधार

लेकिन साच्चा हो हृदय, पक्का हो व्यवहार

पक्का हो व्यवहार, तभी है दुनिया दारी

कभी पड़े जब भीड़, चले है तभी उधारी

सतविंदर छल पाल, व्यक्ति रिश्तों को खोते

उनका चलता कार्य, खरे जो मन के…

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Posted on December 19, 2018 at 3:30pm — 4 Comments

हर ख़ुशी का इक ज़रीआ चाहिये- ग़ज़ल

2122 2122 212

हर ख़ुशी का इक ज़रीआ चाहिए

ठीक हो वह ध्यान पूरा चाहिए।

दर्द को भी झेलता है खेल में

दिल भी होना एक बच्चा चाहिए।

जान लेना राह को हाँ ठीक है

पर इरादा भी तो पक्का चाहिये।

टूट कर शीशा  जुड़ा है क्या कभी

टूट जाए तो न रोना चाहिए।

झूठ की बुनियाद पर है जो टिका

वो महल हमको तो कचरा चाहिए।

 विष वमन कर जो हवा दूषित करे

उस जुबाँ पर ठोस ताला चाहिए।

मौलिक एवं…

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Posted on December 17, 2018 at 6:30am — 10 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 6:46am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा  साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार राणा said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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"आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दुर्मिल सवैया
"आद0 फूल सिंह जी सादर अभिवादन। रचना पसंद करने के लिए कोटिश आभार"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो
"आ. भाई महेंद्र जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post जागो उठो हे लाल तुम (मधुमालती छंद)
"आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन। प्रतिक्रिया से नवाजने के लिए आभारी हूँ।"
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Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"जनाब महेंद्र कुमार साहिब , ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया…"
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"हृदय से आभारी हूँ आदरणीय तेज वीर सिंह जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. सादर."
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Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"लिखना सार्थक रहा आदरणीय अजय जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. हार्दिक आभार. सादर."
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Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तेज वीर सिंह जी. हृदय से आभारी हूँ. सादर."
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