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सतविन्द्र कुमार राणा
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Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post नाम बड़ा है उस घर का- गजल
"जनाब सतविन्द्र कुमार 'राणा' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले का सानी मिसरा लय में नहीं है,देखियेगा । तीसरा शैर यूँ कर लें तो उचित होगा:  'बिन कारण बजते बर्तन हाल यही है घर घर का'"
1 hour ago
सतविन्द्र कुमार राणा updated their profile
23 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post नाम बड़ा है उस घर का- गजल
"हार्दिक बधाई आदरणीय सतबिंदर जी।बेहतरीन गज़ल। 'राणा' सच कहते रहनारंग न छूूटे तेवर का।"
yesterday
Shyam Narain Verma commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post नाम बड़ा है उस घर का- गजल
"क्या बात है .... बहुत उम्दा | बधाई आप को "
yesterday
Mohammed Arif commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post नाम बड़ा है उस घर का- गजल
"आदरणीय सतविंद्र कुमार जी आदाब,                              कठिन बह्र पर बहुत ही अच्छी ग़ज़ल । हर शे'र दूसरे से लाजवाब । हार्दक बधाई स्वीकार करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय…"
yesterday
सतविन्द्र कुमार राणा posted a blog post

नाम बड़ा है उस घर का- गजल

222222 2नाम बड़ा है उस घर काजित असर नज़र के डर काप्यास बुझाना प्यासे कीकब है काम समंदर काबिना बात बजते बर्तनदृश्य यही अब घर-घर काबोल कहे और जय चाहेक्या है काम सुख़नवर का?महल दुमहले जिसके हैंवही भिखारी दर-दर का।'राणा' सच कहते रहना रंग न छूूटे तेवर का।मौलिक/अप्रकाशितSee More
yesterday
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 84 in the group चित्र से काव्य तक
"भुजंगप्रयात छंद सवेरे सवेरे खुली-सी हवा मेंमिले फायदा वो नहीं जो दवा में। कि गंगा किनारे सभी रोज आकेमिलो औ लगाओ यहां पे ठहाके। ठहाके सभी के लिए ये सही हैंकि बातें बड़ों ने सही ही कही हैं। बसा तीर गंगा हुआ देख काशीमहादेव होते जहाँ देख वासी। मौलिक…"
Saturday
सतविन्द्र कुमार राणा commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...परेशां रहा हूँ मैं अहल-ए-सितम से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"बेहतरीन गजल"
Apr 8
Sheikh Shahzad Usmani replied to सतविन्द्र कुमार राणा's discussion चन्द बाल कविताएं ( शक्ति छंद) in the group बाल साहित्य
"बढ़िया कविताएं।‌ हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर कुमार राणा साहिब "
Apr 1
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post जमीं में ही माँ जिसको देती दिखाई-गजल
"आद0 सतविंदर भाई जी सादर अभिवादन।ग़ज़ल का बढिया प्रयास पर अत्यधिक मात्रा पतन से कहीं कहीं लय प्रभावित है। देखियेगा। इस प्रस्तुति पर बधाई आपको"
Mar 26
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post जमीं में ही माँ जिसको देती दिखाई-गजल
"जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । शिल्प पर और अभ्यास की ज़रूरत है ।"
Mar 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post जमीं में ही माँ जिसको देती दिखाई-गजल
"आ. भाई सतविंद्र जी, अच्छी गजल हुई है हार्दिक बधाई ।"
Mar 25
बसंत कुमार शर्मा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post जमीं में ही माँ जिसको देती दिखाई-गजल
"बहुत खूब, अच्छे अशआर हुए हैं आदरणीय "
Mar 25
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post जमीं में ही माँ जिसको देती दिखाई-गजल
"अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय..सादर"
Mar 25
Shyam Narain Verma commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post जमीं में ही माँ जिसको देती दिखाई-गजल
"वाह बेहतरीन ग़ज़ल .. बहुत बधाई.."
Mar 23
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post एक गीत/ सतविंद्र कुमार राणा
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब हौंसलाफ़ज़ाई के लिए तहेदिल शुक्रया"
Mar 22

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार राणा's Blog

नाम बड़ा है उस घर का- गजल

222222 2

नाम बड़ा है उस घर का
जित असर नज़र के डर का

प्यास बुझाना प्यासे की
कब है काम समंदर का

बिना बात बजते बर्तन
दृश्य यही अब घर-घर का

बोल कहे और जय चाहे
क्या है काम सुख़नवर का?

महल दुमहले जिसके हैं
वही भिखारी दर-दर का।

'राणा' सच कहते रहना
रंग न छूूटे तेवर का।

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on April 23, 2018 at 6:30am — 4 Comments

जमीं में ही माँ जिसको देती दिखाई-गजल

122 122 122 122

वफ़ा की क्यों उम्मीद मैनें लगाई
लिखी मेरी किस्मत में थी बेवफाई

जमीं पर मिटे वो जो चाहे जमीं को
जमीं में ही माँ जिसको देती दिखाई

दिखाई नहीं वार देता जुबाँ का
सलीके से उसने अदावत निभाई

अटकता नहीं है कोई काम उसका
रही मन में जिसके सभी की भलाई

जो हारे वही जीत जाता हो जिसमें
बता कौन-सी ऐसी होती लड़ाई

मौलिक अप्रकाशित

Posted on March 22, 2018 at 6:52pm — 6 Comments

एक गीत/ सतविंद्र कुमार राणा

यह वर्ष नया मंगलमय हो

कोंपल फूटी है तरुवर पर

नव पल्लव का निर्माण हुआ

टेसू की लाली उभरी है

पुलकित हर तन, हर प्राण हुआ

हर मन से बाहर हर भय हो

यह वर्ष नया मंगलमय हो।

गेंहूँ बाली पूरी होकर

अब लहर लहर लहराती है

सरसों पर पीला रंग चढ़ा

भवरों को यह ललचाती है

भँवरों के गीतों-सी लय हो

यह वर्ष नया मंगलमय हो।

जाड़े को विदा किया हमने

गर्मी को दिया बुलावा है

हर चीज नई-सी लगती है

जब साल नया यह आया…

Continue

Posted on March 18, 2018 at 8:50am — 10 Comments

तलो कढ़ाई तान पकौड़े-गीतिका

हल्की फुल्की गीतिका(गजल)(16-16)

सर्दी में तुम जान पकौड़े
बारिश की हो शान पकौड़े

पढ़-लिखकर अब क्या करना है?
जब देते सम्मान पकौड़े।

रोटी गर तुम पाना चाहो
तलो कढ़ाई तान पकौड़े।

कुछ इज्जत हमको भी बख्शो
कर दो ये एहसान पकौड़े।

तेज मसाला प्याज हो महँगा
खा ले क्या इंसान पकौड़े।

'राणा' मय के साथी अच्छे
बस जुमला ना मान पकौड़े।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 25, 2018 at 12:30pm — 3 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार राणा said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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