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सतविन्द्र कुमार
  • Male
  • karnal,haryana
  • India
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सतविन्द्र कुमार replied to Dr.Prachi Singh's discussion हौले हौले बोल चिरैया.....लोरी //डॉ० प्राची in the group बाल साहित्य
"वाह्ह्ह् सुन्दरम् आदरणीया डॉ प्राची सिंह जी!"
3 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on Sushil Sarna's blog post क़ैद रहा ...
"बहुत् खूब,सुन्दराभिव्यक्ति!हार्दिक बधाई आदरणीय sushil sarna जी,"
yesterday
सतविन्द्र कुमार posted a blog post

पत्ता जब शाख से गिरा होगा(गजल)/सतविन्द्र

गजल2122 1212 22/112पत्ता जब शाख से गिरा होगादर्द कुछ तो उसे हुआ होगाअब्र से आस क्या करे कोईखुद भी प्यासा तड़प रहा होगाहाथ में जिसके आज पत्थर हैंकौन कल उसका रहनुमा होगा?सिर्फ बातें नहीं अमल भी होऊंचा फिर तेरा मर्तबा होगा।दिल से राणा निकल गया हर शकसोच लोगे भला,भला होगामौलिक एवं अप्रकाशितSee More
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on सतविन्द्र कुमार's blog post पत्ता जब शाख से गिरा होगा(गजल)/सतविन्द्र
"वाह वाह ..अच्छी ग़ज़ल हुई  है..अब्र से आस क्या करे कोईखुद जो प्यासा तड़प रहा होगा..... अब्र से नहीं तो किससे आस करेगा प्यासा?? .अगर ख़ुद भी प्यासा करेंगे तो अब्र के प्यासे होने का भाव आयेगा ..हाथ में जिसके आज पत्थर हैंउसका कल कौन रहनुमा…"
Sunday
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post पत्ता जब शाख से गिरा होगा(गजल)/सतविन्द्र
"आदरणीय तस्दीक अहमद खां जी,सादर नमन,प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन के लिए सादर आभार!"
Sunday
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post पत्ता जब शाख से गिरा होगा(गजल)/सतविन्द्र
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब सादर वन्दन,प्रयास का अनुमोदन कर प्रोत्साहित करने के लिए तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
Sunday
Tasdiq Ahmed Khan commented on सतविन्द्र कुमार's blog post पत्ता जब शाख से गिरा होगा(गजल)/सतविन्द्र
"जनाब सतविंदर कुमार साहिब, अच्छी गज़ल हुई है ,शेर दर शेर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें --शेर 2 के सानी मिसरे "खुद जो" की जगह "वह तो "ज़्यादा सही लग रहा है---सादर"
Saturday
Mohammed Arif commented on सतविन्द्र कुमार's blog post पत्ता जब शाख से गिरा होगा(गजल)/सतविन्द्र
"पत्ति जब शाख से गिरा होगा दर्द कुछ तो उसे हुआ होगा । वाह!वाह!!वाह!!! लाजवाब शे'र हाथ में आज जिसके पत्थर है उसका कल कौन रहनुमा होगा । वाह!वाह!!सच है आज कश्मीर के हाथों में पत्थर ही तो है । बिल्कुल सामयिक शे'र कहा । ढेरों मुबारकबाद आदरणीय…"
Saturday
सतविन्द्र कुमार posted a blog post

पत्ता जब शाख से गिरा होगा(गजल)/सतविन्द्र

गजल2122 1212 22/112पत्ता जब शाख से गिरा होगादर्द कुछ तो उसे हुआ होगाअब्र से आस क्या करे कोईखुद भी प्यासा तड़प रहा होगाहाथ में जिसके आज पत्थर हैंकौन कल उसका रहनुमा होगा?सिर्फ बातें नहीं अमल भी होऊंचा फिर तेरा मर्तबा होगा।दिल से राणा निकल गया हर शकसोच लोगे भला,भला होगामौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी,अनुमोदन एवं प्रोत्साहन के लिए सादर आभार।आदरणीय वस्तुतः यह सतविन्दर लिखना था,जो सतविन्द्र टँकित हुआ है।ऐसा निवेदन मैं टीप में भी कर चुका हूँ,सादर।दिखे का दिखी उत्तम सुझाव है,सादर नमन।वैसे दिखे:दिख रही है,वर्तमान् के लिए…"
Friday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"छ्न्द बंद में कह जाते हो,बातें अच्छी भाई खूब कथा यह गढ़ डाली है, ले लो खूब बधाई। तुक बाँधें हैं कुछ ऐसे भी,बहतर हो सकते थे फिर बातों के मोहक ज्यादा,तेवर हो सकते थे।"
Friday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"सतविन्द्र को सतविन्दर,पढ़ा जाए कृपया"
Friday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"(1) इक दूजे को देख कर,भूले जग को आज दोनों ऐसे रम गये,गई शर्म औ लाज गई शर्म औ लाज,प्रेम में खो ये जाते आँखें होती चार, मूक भाषा बतलाते सतविन्द्र कविराय,बोल बाला है चहुँदिक प्रेम वही है डोर,बँधा है जिससे हर इक। (2) आया प्रेमी पास में,लिए मिलन की…"
Friday
सतविन्द्र कुमार commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -कहीं सजदा किया, पूजा कहीं पत्थर तेरा,
"आदरणीय निलेश जी सारे अशआर कमाल कहे हैं। दिली मुबारकबाद कुबुल फरमाएँ!"
Apr 20
सतविन्द्र कुमार commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post शाइरी भी यार अब हम क्या करें
"आदर सुरेन्द्र भाई जी,उम्दा गजल कही है आपने। शेर दर शेर मुबारकबाद कुबूल करें!"
Apr 20
सतविन्द्र कुमार commented on जयनित कुमार मेहता's blog post हम वो आईने नहीं हैं जो बिखर जाते हैं (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित भाई,हारदिक बधाई स्वीकारें इस उम्दा गजल के लिए!"
Apr 19

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार's Blog

पत्ता जब शाख से गिरा होगा(गजल)/सतविन्द्र

गजल
2122 1212 22/112
पत्ता जब शाख से गिरा होगा
दर्द कुछ तो उसे हुआ होगा

अब्र से आस क्या करे कोई
खुद भी प्यासा तड़प रहा होगा

हाथ में जिसके आज पत्थर हैं
कौन कल उसका रहनुमा होगा?

सिर्फ बातें नहीं अमल भी हो
ऊंचा फिर तेरा मर्तबा होगा।

दिल से राणा निकल गया हर शक
सोच लोगे भला,भला होगा

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 21, 2017 at 10:00pm — 5 Comments

तरही गजल/सतविन्द्र राणा

तरही गजल

2122 2122 212



काफ़िया हमको मिला *अम* क्या करें

लाज़िमी कहनी ग़ज़ल हम क्या करें



सब दिवाने हैं दिखावे के यहाँ

और' हुनर के दाम हैं कम क्या करें?



रौशनी ने दी है दस्तक देख लो

पर खड़ा है फिर भी ये तम क्या करें



बुलबुलों ने छोड़े जब से घोंसले

टहनियों की आँख हैं नम क्या करें



पास है जो वो भी तो अपना नहीं

*जाने वाली चीज का गम क्या करें



बैठकर सब साथ गम थे बाँटते

सिलसिला वो अब गया थम क्या… Continue

Posted on April 16, 2017 at 10:00pm — 16 Comments

याद मेरी दिला रही होगी (गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा

2122 1212 22
उनको हिचकी सता रही होगी
याद मेरी दिला रही होगी

चैन दिल का खो गया होगा
आँसुओं को बहा रही होगी

फ्रेम कस के पकड़ लिया होगा
प्यार तस्वीर पा रही होगी

हौंसला काम कर गया होगा
पास मंजिल अब आ रही होगी

वक्त के साथ सब बदलते हैं
रुत यही तो सिखा रही होगी

भूख ने दूर कर दिए बच्चे
कैसे माँ मन लगा रही होगी ?

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 7, 2017 at 7:00am — 19 Comments

तरही गजल

2122 2122 212



बस झुके हमको तो सबके सर मिले

बुत यहाँ भारी ज़माने पर मिले



काँच के जिनके बनें हैं घर यहाँ

हाथ में उनके ही बस पत्थर मिले।



विष गले में रख सके जग का सकल

है कहाँ मुमकिन कि फिर शंकर मिले।



दिल में उनके है धुआँ गम का बहुत

पर मिले जिससे भी वो हँसकर मिले



फूल को कैसे समझ लें फूल जब

पास उसके ही हमें खंजर मिले



मिल गया अब रहनुमा देखो नया

झोपड़ी को भी नया छप्पर मिले



हैं जहाँ पर दौलतों की… Continue

Posted on March 21, 2017 at 9:00pm — 12 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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