For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सतविन्द्र कुमार
  • Male
  • karnal,haryana
  • India
Share

सतविन्द्र कुमार's Friends

  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
  • महिमा  वर्मा
  • KALPANA BHATT
  • रामबली गुप्ता
  • रतन राठौड़
  • sameer ranjan
  • Pawan Jain
  • Sunil Verma
  • Sheikh Shahzad Usmani
  • Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
  • Ravi Shukla
  • pratibha pande
  • TEJ VEER SINGH
  • Seema Singh
  • जयनित कुमार मेहता
 

सतविन्द्र कुमार's Page

Latest Activity

सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"आदरणीय बासुदेव अग्रवाल सर,हौंसलाफ़ज़ाई के लिए बहुत-बहुत हार्दिक आभार"
16 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय गिरिराज सर उम्दा गजल कही है!वाह्ह्ह् वाह्ह्ह्!हर शेर के लिए दिल से दाद हाज़िर है।"
16 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"आ0 सतविंदर जी खूबसूरत ग़ज़ल की बधाई स्वीकार करें। हैं जहाँ पर दौलतों की रौनकें *पत्थरों के दिल वहीँ अक्सर मिले।* बहुत सुंदर गिरह।"
20 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (इंसानियत)
"आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी,हार्दिक बधाई उस उम्दा गजल के लिए।"
23 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on Rahila's blog post ससुराल की पहली होली(हास्य कविता)राहिला
"आदरणीया राहिला जी,हार्दिक बधाई इस होली-ठिठोली के लिए!"
23 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on Sushil Sarna's blog post ई-मौजी ...
"वाह्ह वाह्ह्ह् आदरणीय sushil sarna जी,उम्दा बिम्ब उकेरे हैं आपने।उत्तम रचनाकर्म के लिए हार्दिक बधाई। सीखा दिया सही शब्द है सिखा दिया,इसमें संशय है।सादर"
23 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी,प्रयास का अनुमोदन,सराहना और प्रोत्साहन करने के लिए तहेदिल हारदिक आभार!"
23 hours ago
Mohammed Arif commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"वाह वाह वाह बहुत बेहतरीन अशआर तरही ग़ज़ल के । शेर दर शेर दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल कीजिए ।"
yesterday
सतविन्द्र कुमार posted blog posts
yesterday
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post ज़ुबाँ पे सख्त पहरा हो रहा है(गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा
"आदरणीय गिरिराज सर,गजल प्रयास को पसन्द कर प्रोत्साहित करने के लिए हार्दिक आभार संग सादर नमन!"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on सतविन्द्र कुमार's blog post ज़ुबाँ पे सख्त पहरा हो रहा है(गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा
"आदरनीय सतविन्द्र भाई , बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है , सभी अशआर अच्छे हुये हैं ... हार्दिक बधाइयाँ ।"
yesterday
सतविन्द्र कुमार commented on Mohit mukt's blog post ना जाने दिल क्यों खोजता है (कविता):- मोहित मुक्त
"हारदिक बधाई आदरणीय मोहित मुक्त जी,इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए"
Monday
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post ज़ुबाँ पे सख्त पहरा हो रहा है(गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा
"आदरणीय तस्दीक अहमद खां जी,प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार"
Monday
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post ज़ुबाँ पे सख्त पहरा हो रहा है(गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा
"आदरणीय बृजेश भाई जी,हौंसलाफ़ज़ाई के लिए तहे दिल शुक्रिया।"
Monday
सतविन्द्र कुमार commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (निगाहों से आँसू निकलते रहे )
"आदरणीय तस्दीक अहमद खां जी,बेहतरीन अशआर हुए हैं,हार्दिक बधाई"
Sunday
Tasdiq Ahmed Khan commented on सतविन्द्र कुमार's blog post ज़ुबाँ पे सख्त पहरा हो रहा है(गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा
"मुहतरम जनाब सत्विन्दर कुमार साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ --"
Sunday

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार's Blog

तरही गजल

2122 2122 212



बस झुके हमको तो सबके सर मिले

बुत यहाँ भारी ज़माने पर मिले



काँच के जिनके बनें हैं घर यहाँ

हाथ में उनके ही बस पत्थर मिले।



विष गले में रख सके जग का सकल

है कहाँ मुमकिन कि फिर शंकर मिले।



दिल में उनके है धुआँ गम का बहुत

पर मिले जिससे भी वो हँसकर मिले



फूल को कैसे समझ लें फूल जब

पास उसके ही हमें खंजर मिले



मिल गया अब रहनुमा देखो नया

झोपड़ी को भी नया छप्पर मिले



हैं जहाँ पर दौलतों की… Continue

Posted on March 21, 2017 at 9:00pm — 4 Comments

ज़ुबाँ पे सख्त पहरा हो रहा है(गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा

1222 1222 122
बिखरकर फिर इकट्ठा हो रहा है
जवाँ फिर से इरादा हो रहा है।

जिसे अपना समझते थे,न जाने
वही क्यों अब पराया हो रहा है?

समन्दर सी छलकती हैं ये आँखें
कोई तो ज़ख्म गहरा हो रहा है।

किसे जाकर सुनाएँ हाल अपना
हमारा शाह बहरा हो रहा है।

भरोसा टूटना लाज़िम हुआ अब
जहाँ का दौर झूठा हो रहा है।

ज़ुबाँ कैसे किसी की अब उठेगी
ज़ुबाँ पे सख़्त पहरा हो रहा है।

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on March 16, 2017 at 10:11pm — 12 Comments

आदमी को आदमी ही अब समझ ले आदमी (गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा

2122 2122 2122.212

प्यार के अहसास को दिल की चुभन तक ले चलो

नफरतों को भूलकर फिर से मिलन तक ले चलो।



आदमी को आदमी ही अब समझ ले आदमी

आदमीयत को जमाने के चलन तक ले चलो



बन नहीं सकती अगर सरकार खुद के जोर से

साथ लेकर औरों को इसके गठन तक ले चलो



भूख से तड़पे न कोई ठण्ड से काँपे नहीं

रोटी कपड़ा हर किसी के अब बदन तक ले चलो



छोड़ कर जिसको हूँ आया चन्द सिक्कों के लिए

याद आता है मुझे,मेरे वतन तक ले चलो



छोड़ना तन को था मुश्किल… Continue

Posted on March 10, 2017 at 9:30pm — 14 Comments

कुछ मुक्तक/सतविन्द्र कुमार राणा

(16 14 मात्रा भार)

.

(1)

हाथ जोड़ कर फिरते दिखते जब-जब सीजन आता है

दर-दर पर मिन्नत होती है हर इक जन तब भाता है

काम साध कुर्सी को पाकर याद नहीं फिर कुछ आता

झुककर जो वादे कर जाते उनको कौन निभाता है?



(2)

मौसम जैसा हाल सजन का समझ नहीं कुछ आता है

इस पल होता है तौला उस पल माशा बन जाता है

प्रीत हमारी लगती झूठी जाने क्या दिल में रखते?

वादे उनके ऐसे लगते ज्यों नेता कर जाता है।



(3)

आँखों को झूठा मत समझो आँखें सच ही कहती हैं…

Continue

Posted on February 22, 2017 at 2:30pm — 4 Comments

Comment Wall (7 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Seema mishra commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -चुप कह के, क़ुरआन, बाइबिल गीता है - ( गिरिराज )
" आदरणीय गिरिराज जी शानदार ग़ज़ल, मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ| सादर "
19 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (इंसानियत)
"आदरणीय वासुदेव भाई , गज़ल अच्छी हुई है ,  आपने बहर निभाने मे  सफल रहे आप । शब्दों का चुनाव…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय सतविन्द्र भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हृदय से आभार ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय वासुदेव भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय वासुदेव भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में
"आदरनीय बृजेश भाई , अच्छी गज़ल कही है आपने , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें । मेरा सोचना है कि .. अगर…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरनीय नवीन भाई , खूबसूरत गज़ल के लिये बधाइयाँ आपको । आ,रवि भाई की बातों का ख्याल कीजियेगा । -- कुछ…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी posted a blog post

ग़ज़ल -चुप कह के, क़ुरआन, बाइबिल गीता है - ( गिरिराज )

22   22   22   22   22   2हर चहरे पर चहरा कोई जीता हैऔर बदलने की भी खूब सुभीता है सांप, सांप को…See More
4 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

ई-मौजी ...

ई-मौजी ...आज के दौर में क्या हम ई-मौजी वाले स्टीकर नहीं हो गए ?भावहीन चेहरे हैं संवेदनाएं…See More
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Sushil Sarna's blog post एक शब्द ....
"आदरनीय सुशील भाई , खूब सूरत दार्शनिक कविता के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Mohit mukt's blog post अरे पगली (याचना} (कविता ):- मोहित मुक्त
"आदरनीय मोहित भाई , प्रेम भाव से ओत प्रोत कविता के लिये बधाई । शब्दों की वर्तनी का ख्याल कीजिये ...…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post दशा और दिशा [लघुकथा] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"बहुत खूब ... मै इस् विधा की बारीकैयाँ नही समझ सकता .. बात बहुत अच्छी लगी । बधाई"
4 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service