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जयनित कुमार मेहता
  • Male
  • Araria,Bihar
  • India
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Gurpreet Singh commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय जयनित जी "
May 19
vijay nikore commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"//मिल गया राह में बचपन का यारयाद फिर गुज़रे ज़माने आये// बहुत अच्छी गज़ल लिखी है। बधाई।"
May 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"बेहतरीन ग़ज़ल हुई आदरणीय मेहता जी..सादर"
May 18
सतविन्द्र कुमार commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित भाई बहुत् खूब अशआर कहे हैं,हारदिक बधाई"
May 17
Anuraag Vashishth commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"आ. जयनित जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनायें. मतला खास तौर पर अच्छा लगा. सादर "
May 17

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"आ. जयनित भाई , खूबसूरत गज़ल के लिये बधाई स्वीकार करें ।"
May 17
Naveen Mani Tripathi commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"बहुत उम्दा पेशकश ।"
May 16
Nilesh Shevgaonkar commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"आ. जयनीत जी,अच्छी ग़ज़ल हुई है ..हार्दिक बधाई ,,एक दिन बेखुदी जो ले डूबी... इस मिसरे की नेचरल बहर २१२२, १२१२, २२ बन रही है अत: हो सके तो किसी अन्य तरकीब से कहने की कोशिश करें..सादर .."
May 16
जयनित कुमार मेहता posted a blog post

रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)

2122 1122 22रेत पर फूल खिलाने आयेदश्त में कितने दीवाने आयेमिल गया राह में बचपन का यारयाद फिर गुज़रे ज़माने आयेधूप के पंख निकल आये जबकुछ शजर जाल बिछाने आयेएक दिन बेखुदी जो ले डूबीतब मेरे होश ठिकाने आयेवक़्त-बेवक्त भड़क कर आँसूग़म की सरकार गिराने आयेनाम लिक्खा था किसी का उनपरकिसी के हिस्से में दाने आयेदिल का दरवाज़ा खुला ही रक्खोकिस घड़ी कौन न जाने आयेआया है हिज्र का फिर से त्यौहारअश्क़ फिर धूम मचाने आयेदेखो-देखो ये सितारे कैसेरात की माँग सजाने आये(मौलिक व अप्रकाशित)See More
May 16
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post नज़र में कोई सूरत है? नहीं तो (ग़ज़ल)
"आदरणीय महेंद्र जी, मेरी रचना पर आपकी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई, बहुत अच्छा लगा। हृदयतल से धन्यवाद आपको।।"
May 15
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post नज़र में कोई सूरत है? नहीं तो (ग़ज़ल)
"हार्दिक धन्यवाद आपको, आदरणीय अनुराग वशिष्ठ जी।"
May 15
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post नज़र में कोई सूरत है? नहीं तो (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सतविंद्र कुमार जी। जी, इन चर्चाओं से ही तो मंच का उद्देश्य पूर्ण होता है।"
May 15
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post नज़र में कोई सूरत है? नहीं तो (ग़ज़ल)
"आपका बहुत बहुत आभारी हूँ आदरणीय डॉ० आशुतोष मिश्र जी।"
May 15
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post नज़र में कोई सूरत है? नहीं तो (ग़ज़ल)
"उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदयतल से धन्यवाद प्रकट करता हूँ आदरणीय गिरिराज भंडारी जी। आपका कथन सर्वथा उचित है, मैं आपकी बात पर अमल कर सुधार करता हूँ।"
May 15
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post नज़र में कोई सूरत है? नहीं तो (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रगुज़ार हूँ आदरणीय समर कबीर जी आपका। वाक़ई आपके द्वारा सुझाये मिसरे ने शेर में चार चाँद लगा दिये।"
May 15
Mahendra Kumar commented on जयनित कुमार मेहता's blog post नज़र में कोई सूरत है? नहीं तो (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित जी, आप फिर चले गए? बहरहाल, अच्छी लगी ग़ज़ल आपकी. हार्दिक बधाई. सादर."
May 15

Profile Information

Gender
Male
City State
Araria,Bihar
Native Place
Araria,Bihar
Profession
Student
About me
I'm simple..!

जयनित कुमार मेहता's Blog

रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)

2122 1122 22



रेत पर फूल खिलाने आये

दश्त में कितने दीवाने आये



मिल गया राह में बचपन का यार

याद फिर गुज़रे ज़माने आये



धूप के पंख निकल आये जब

कुछ शजर जाल बिछाने आये



एक दिन बेखुदी जो ले डूबी

तब मेरे होश ठिकाने आये



वक़्त-बेवक्त भड़क कर आँसू

ग़म की सरकार गिराने आये



नाम लिक्खा था किसी का उनपर

किसी के हिस्से में दाने आये



दिल का दरवाज़ा खुला ही रक्खो

किस घड़ी कौन न जाने आये



आया है हिज्र का… Continue

Posted on May 15, 2017 at 9:55pm — 8 Comments

नज़र में कोई सूरत है? नहीं तो (ग़ज़ल)

1222 1222 122



मुहब्बत की ज़रुरत है? नहीं तो

ये ग़म क्या रस्म-ए-उल्फ़त है? नहीं तो



तेरी इसपर हुक़ूमत है? नहीं तो

ये दिल तेरी रियासत है? नहीं तो



ये दुनिया ख़ूबसूरत है? नहीं तो

किसी में आदमीयत है? नहीं तो



कोई मंज़र नहीं जँचता है गोया

नज़र में कोई सूरत है? नहीं तो



किसी दिन चाँद उतरे मेरे छत पर

उसे क्या इतनी फुरसत है? नहीं तो



मुहब्बत से ही इतना कुछ मिला है

कुछ और पाने की चाहत है? नहीं तो



कि मर-मर के… Continue

Posted on May 1, 2017 at 3:48pm — 17 Comments

हम वो आईने नहीं हैं जो बिखर जाते हैं (ग़ज़ल)

2122 1122 1122 22



संग जितने सहें उतना ही सँवर जाते हैं

हम वो आईने नहीं हैं जो बिखर जाते हैं



शाम ढलते ही निगाहों से गुज़र जाते हैं

सारे मंज़र जो कभी दिल में ठहर जाते हैं



देखता मैं भी उधर जा के, जिधर जाते हैं

रोज़-के-रोज़ कहाँ शम्स-ओ-क़मर जाते हैं



सहरा-ए-इश्क़ में हो जाता है दरिया का भरम

इसी ग़फ़लत में कई लोग उधर जाते हैं



हिज्र तो ज़रिया है जलने का चराग़-ए-उम्मीद

हम तो बस वस्ल का ही सोच के डर जाते हैं



जब पहुँचना ही… Continue

Posted on April 19, 2017 at 5:49pm — 8 Comments

हमने सांसें भी गिरवी रख दी हैं (ग़ज़ल)

2122 1212 22



मुझको सच कहने की बीमारी है

इसलिए तो ये संगबारी है



अपने हिस्से में मह्ज़ ख़्वाब हैं,बस!

नींद भी, रात भी तुम्हारी है



एक अरसे की बेक़रारी पर

वस्ल का एक पल ही भारी है



चीरती जाती है मिरे दिल को

याद तेरी है या कि आरी है?



हमने साँसें भी गिरवी रख दी हैं

अब तो ये ज़िन्दगी उधारी है



सब तो वाकिफ़ हैं आखिरी सच से

किसलिए फिर ये मारा-मारी है?



नींद का कुछ अता-पता तो नहीं

रात है, ख़्वाब हैं,… Continue

Posted on March 17, 2017 at 4:51pm — 5 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 12:59pm on January 27, 2016, kanta roy said…

बेहद गर्व का पल  ! बहुत -बहुत बधाई आपको आदरणीय जयनित  जी  "महीने का सक्रिय सदस्य"  बनने हेतु। 

At 8:17pm on January 16, 2016, जयनित कुमार मेहता said…
आदरणीय गणेश जी,
इस सम्मान के लिए मैं OBO परिवार के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ।
At 8:13pm on January 16, 2016, जयनित कुमार मेहता said…
जन्मदिवस की शुभकामनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ,आदरणीय रवि शुक्ला जी..

(विलम्ब से प्रत्युत्तर के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ)
At 4:28pm on January 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

जयनित कुमार मेहता जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:26pm on November 6, 2015, Ravi Shukla said…

जयनित जी जन्‍म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं

 
 
 

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