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जयनित कुमार मेहता
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Samar kabeer commented on जयनित कुमार मेहता's blog post शायरी चीज़ ही ऐसी है यार (ग़ज़ल)
"जनाब जयनित कुमार मेहता जी आदाब,अभी पिछली ग़ज़ल पर आपने किसी भी टिप्पणी का उत्तर नहीं दिया है,और आज ये ग़ज़ल सामने है, भाई,मंच के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें,और अपनी कुछ तो सक्रियता दिखाएँ,ये मेरा आपसे निवेदन है । अब आपकी ये ग़ज़ल,मतले के दोनों मिसरे…"
Jul 1
जयनित कुमार मेहता posted a blog post

शायरी चीज़ ही ऐसी है यार (ग़ज़ल)

2122 1122 22हर घड़ी? चीज़ ही ऐसी है यार..!शायरी चीज़ ही ऐसी है यार..!तिश्नगी और भड़क जाती है,उफ़! नदी चीज़ ही ऐसी है यार..!कोई हँसता है, कोई रोता हैज़िन्दगी चीज़ ही ऐसी है यार..!चाँद का नूर भी फीका पड़ जाएसादगी चीज़ ही ऐसी है यार..!लो! हुआ मैं भी अब आदम से मशीननौकरी चीज़ ही ऐसी है यार..!साथ अश्क़ों के गुज़रती है उम्रआशिक़ी चीज़ ही ऐसी है यार..!सारा दरिया पी के भी बाक़ी हैतिश्नगी चीज़ ही ऐसी है यार..!राब्ता आंसुओं से है इसकाये ख़ुशी चीज़ ही ऐसी है यार..!(मौलिक व अप्रकाशित)See More
Jun 30
Tasdiq Ahmed Khan commented on जयनित कुमार मेहता's blog post पारसाई ही मेरी दौलत है (ग़ज़ल)
"जनाब जैनित कुमार साहिब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें, सही शब्द "मोजिज़ा"है"
Jun 28
Samar kabeer commented on जयनित कुमार मेहता's blog post पारसाई ही मेरी दौलत है (ग़ज़ल)
"जनाब जयनित कुमार मेहता जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Jun 27
Dr Ashutosh Mishra commented on जयनित कुमार मेहता's blog post पारसाई ही मेरी दौलत है (ग़ज़ल)
"शानदार ग़ज़ल भाई जयनित जी रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Jun 26
Mohammed Arif commented on जयनित कुमार मेहता's blog post पारसाई ही मेरी दौलत है (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित कुमार जी आदाब, बहुत ही शानदार ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
Jun 25
जयनित कुमार मेहता posted a blog post

पारसाई ही मेरी दौलत है (ग़ज़ल)

2122 1212 22जो ये लम्हा उदास है तो हैवो कहीं आस-पास है तो हैपैरहन जिस्म पर हज़ारों हैंरूह गर बेलिबास है तो हैतीरगी हिज्र की है आंखों मेंदिल में लेकिन उजास है तो हैपारसाई ही मेरी दौलत हैछल-कपट तेरे पास है तो हैक्यों न मिट जाए ग़म की कड़ुवाहटआंसुओं में मिठास है तो हैइश्क़ में कोई मोज़िजा होगादिल को अब भी ये आस है तो है(मौलिक व अप्रकाशित)See More
Jun 25
जयनित कुमार मेहता commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल ---झुकी झुकी सी नज़र में देखा
"बहुत खूब, बहुत सुंदर आदरणीय।।"
Jun 25
जयनित कुमार मेहता commented on Naveen Mani Tripathi's blog post 52 शेर की ग़ज़ल।
"काम ऐसा बचा नहीं कोई । अब जिसे आदमी नहीं करते ।। इस शेर ने अकेले ही दिल लूट लिया आदरणीय। ग़ज़ल भी बहुत अच्छी हुई है। हाफ सेंचुरी के लिए विशेष बधाई आपको।।"
Jun 25
जयनित कुमार मेहता commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- मैं आँखों में सपने बोना चाहता हूँ
"आकांक्षाओं से ओत-प्रोत बेहद भावपूर्ण ग़ज़ल कही है आदरणीय दिनेश जी। आखिरी शेर के कहने ही क्या,,एकदम से चौंका दिया आपने।। दिली मुबारकबाद आपको।। सादर।।"
Jun 25
जयनित कुमार मेहता commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"मुझसे मेरा ज़मीर नहीं माँगिये हुजूर । इसकी ही वज़ह से मैं अभी तक मरा नहीं ।। हालात आजमा के गए मुझको बार बार । रहमत खुदा की थी कि नज़र से गिरा नहीं ।। बेहद खूबसूरत हक़ीक़ी ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई आपको।।"
Jun 25
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत धन्यवाद आपका, आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी।।"
May 30
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"आदरणीय विजय जी, आपको ग़ज़ल अच्छी लगी, मुझे ये जानकर बहुत अच्छा लगा। बहुत बहुत आभार आपका।।"
May 30
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"आदरणीय ब्रजेश कुमार जी,हार्दिक धन्यवादी हूँ आपका।।"
May 30
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"आपकी प्रतिक्रिया के बिना मेरी हर रचना अधूरी रहती है आदरणीय सतविंद्र कुमार जी। हार्दिक साधुवाद आपको।।"
May 30
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"आपके उद्गारों से हृदय फूला नहीं समा रहा आदरणीय अनुराग वशिष्ठ जी। हार्दिक आभारी हूँ आपका।।"
May 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Araria,Bihar
Native Place
Araria,Bihar
Profession
Student
About me
I'm simple..!

जयनित कुमार मेहता's Blog

शायरी चीज़ ही ऐसी है यार (ग़ज़ल)

2122 1122 22



हर घड़ी? चीज़ ही ऐसी है यार..!

शायरी चीज़ ही ऐसी है यार..!



तिश्नगी और भड़क जाती है,

उफ़! नदी चीज़ ही ऐसी है यार..!



कोई हँसता है, कोई रोता है

ज़िन्दगी चीज़ ही ऐसी है यार..!



चाँद का नूर भी फीका पड़ जाए

सादगी चीज़ ही ऐसी है यार..!



लो! हुआ मैं भी अब आदम से मशीन

नौकरी चीज़ ही ऐसी है यार..!



साथ अश्क़ों के गुज़रती है उम्र

आशिक़ी चीज़ ही ऐसी है यार..!



सारा दरिया पी के भी बाक़ी है

तिश्नगी चीज़ ही… Continue

Posted on June 30, 2017 at 11:38pm — 1 Comment

पारसाई ही मेरी दौलत है (ग़ज़ल)

2122 1212 22

जो ये लम्हा उदास है तो है
वो कहीं आस-पास है तो है

पैरहन जिस्म पर हज़ारों हैं
रूह गर बेलिबास है तो है

तीरगी हिज्र की है आंखों में
दिल में लेकिन उजास है तो है

पारसाई ही मेरी दौलत है
छल-कपट तेरे पास है तो है

क्यों न मिट जाए ग़म की कड़ुवाहट
आंसुओं में मिठास है तो है

इश्क़ में कोई मोज़िजा होगा
दिल को अब भी ये आस है तो है

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on June 25, 2017 at 3:28pm — 4 Comments

रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)

2122 1122 22



रेत पर फूल खिलाने आये

दश्त में कितने दीवाने आये



मिल गया राह में बचपन का यार

याद फिर गुज़रे ज़माने आये



धूप के पंख निकल आये जब

कुछ शजर जाल बिछाने आये



एक दिन बेखुदी जो ले डूबी

तब मेरे होश ठिकाने आये



वक़्त-बेवक्त भड़क कर आँसू

ग़म की सरकार गिराने आये



नाम लिक्खा था किसी का उनपर

किसी के हिस्से में दाने आये



दिल का दरवाज़ा खुला ही रक्खो

किस घड़ी कौन न जाने आये



आया है हिज्र का… Continue

Posted on May 15, 2017 at 9:55pm — 16 Comments

नज़र में कोई सूरत है? नहीं तो (ग़ज़ल)

1222 1222 122



मुहब्बत की ज़रुरत है? नहीं तो

ये ग़म क्या रस्म-ए-उल्फ़त है? नहीं तो



तेरी इसपर हुक़ूमत है? नहीं तो

ये दिल तेरी रियासत है? नहीं तो



ये दुनिया ख़ूबसूरत है? नहीं तो

किसी में आदमीयत है? नहीं तो



कोई मंज़र नहीं जँचता है गोया

नज़र में कोई सूरत है? नहीं तो



किसी दिन चाँद उतरे मेरे छत पर

उसे क्या इतनी फुरसत है? नहीं तो



मुहब्बत से ही इतना कुछ मिला है

कुछ और पाने की चाहत है? नहीं तो



कि मर-मर के… Continue

Posted on May 1, 2017 at 3:48pm — 17 Comments

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At 12:59pm on January 27, 2016, kanta roy said…

बेहद गर्व का पल  ! बहुत -बहुत बधाई आपको आदरणीय जयनित  जी  "महीने का सक्रिय सदस्य"  बनने हेतु। 

At 8:17pm on January 16, 2016, जयनित कुमार मेहता said…
आदरणीय गणेश जी,
इस सम्मान के लिए मैं OBO परिवार के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ।
At 8:13pm on January 16, 2016, जयनित कुमार मेहता said…
जन्मदिवस की शुभकामनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ,आदरणीय रवि शुक्ला जी..

(विलम्ब से प्रत्युत्तर के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ)
At 4:28pm on January 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

जयनित कुमार मेहता जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:26pm on November 6, 2015, Ravi Shukla said…

जयनित जी जन्‍म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं

 
 
 

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