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जयनित कुमार मेहता
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गिरिराज भंडारी commented on जयनित कुमार मेहता's blog post हमने सांसें भी गिरवी रख दी हैं (ग़ज़ल)
"आदरनीय जयनित भाई , अच्छी गज़ल कही , बधाइयाँ स्वीकार करें ।  महज़ की मात्रिकता  12 या 21 .. क्या हो ये सोचने लायक बात है ।"
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Ravi Shukla commented on जयनित कुमार मेहता's blog post हमने सांसें भी गिरवी रख दी हैं (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित जी बडि़या गजल कही है आपने नींद भी रात भी तुम्‍हारी है बहुत खूब  बधाई स्‍वीकार करें"
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on जयनित कुमार मेहता's blog post हमने सांसें भी गिरवी रख दी हैं (ग़ज़ल)
"वाह बहुत खूबसूरत गजल"
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सतविन्द्र कुमार commented on जयनित कुमार मेहता's blog post हमने सांसें भी गिरवी रख दी हैं (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित भाई,बेहतरीन अशआर हुए हैं तहेदिल मुबारकबाद"
Saturday
Mohammed Arif commented on जयनित कुमार मेहता's blog post हमने सांसें भी गिरवी रख दी हैं (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित कुमार जी आदाब, हर शेर उम्दा । दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल कीजिए ।"
Friday
जयनित कुमार मेहता posted a blog post

हमने सांसें भी गिरवी रख दी हैं (ग़ज़ल)

2122 1212 22मुझको सच कहने की बीमारी हैइसलिए तो ये संगबारी हैअपने हिस्से में मह्ज़ ख़्वाब हैं,बस!नींद भी, रात भी तुम्हारी हैएक अरसे की बेक़रारी परवस्ल का एक पल ही भारी हैचीरती जाती है मिरे दिल कोयाद तेरी है या कि आरी है?हमने साँसें भी गिरवी रख दी हैंअब तो ये ज़िन्दगी उधारी हैसब तो वाकिफ़ हैं आखिरी सच सेकिसलिए फिर ये मारा-मारी है?नींद का कुछ अता-पता तो नहींरात है, ख़्वाब हैं, ख़ुमारी है।(मौलिक व अप्रकाशित)See More
Friday
जयनित कुमार मेहता posted a blog post

अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है (ग़ज़ल)

122   122   122   122है हर सू फ़क़त धूप,साया कहाँ है?ये आख़िर मुझे इश्क़ लाया कहाँ है!अमीरी को अपनी दिखाया कहाँ है?तुम्हें शह्र-ए-दिल ये घुमाया कहाँ है?अभी सहरा में एक दरिया बहेगाअभी क़ह्र अश्क़ों ने ढाया कहाँ है?अभी देखिएगा अँधेरों की हालतउफ़ुक़ पर अभी शम्स आया कहाँ है?कोई दोस्त है,कोई दुश्मन,यहाँ परसब अपने हैं,कोई पराया कहाँ है?अभी से ही क्यों आँख भर आई सबकी?अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है?(मौलिक व अप्रकाशित)See More
Mar 9
जयनित कुमार मेहता's blog post was featured

अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है (ग़ज़ल)

122   122   122   122है हर सू फ़क़त धूप,साया कहाँ है?ये आख़िर मुझे इश्क़ लाया कहाँ है!अमीरी को अपनी दिखाया कहाँ है?तुम्हें शह्र-ए-दिल ये घुमाया कहाँ है?अभी सहरा में एक दरिया बहेगाअभी क़ह्र अश्क़ों ने ढाया कहाँ है?अभी देखिएगा अँधेरों की हालतउफ़ुक़ पर अभी शम्स आया कहाँ है?कोई दोस्त है,कोई दुश्मन,यहाँ परसब अपने हैं,कोई पराया कहाँ है?अभी से ही क्यों आँख भर आई सबकी?अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है?(मौलिक व अप्रकाशित)See More
Mar 9

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शिज्जु "शकूर" commented on जयनित कुमार मेहता's blog post अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है (ग़ज़ल)
"अच्छी ग़ज़ल है आ. जयनित भाई, समर साहब के शब्दों पर गौर कीजिएगा"
Mar 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on जयनित कुमार मेहता's blog post अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है (ग़ज़ल)
"आदरणीय बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई..हार्दिक बधाई"
Mar 8
Mahendra Kumar commented on जयनित कुमार मेहता's blog post अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है (ग़ज़ल)
"बढ़िया ग़ज़ल हुई है आदरणीय जयनित जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है। आदरणीय समर सर की बात का संज्ञान लें। सादर।"
Mar 8
Dr Ashutosh Mishra commented on जयनित कुमार मेहता's blog post अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है (ग़ज़ल)
"आदरणीय भाई जयनित जी ऊम्फ ग़ज़ल हुयी है रचना के लिए हार्दिक बधाई बाकी मार्गदर्शन आदरणीय समर सर ने किया है सादर"
Mar 8
Samar kabeer commented on जयनित कुमार मेहता's blog post अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है (ग़ज़ल)
"जनाब जयनित कुमार मेहता जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । हुस्न-ए-मतला में'दौलत-ए-दिल'स्त्रीलिंग है, देखियेगा । तीसरे शैर के ऊला में 'सहरे'या 'सहरा'? चौथे शैर में 'उफ़ुक़'का क्या अर्थ…"
Mar 8
Mohammed Arif commented on जयनित कुमार मेहता's blog post अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित कुमार जी आदाब,बहुत अच्छी ग़ज़ल । हर शे'र पर मेरी दाद क़ुबूल करें ।"
Mar 8
जयनित कुमार मेहता posted a blog post

अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है (ग़ज़ल)

122   122   122   122है हर सू फ़क़त धूप,साया कहाँ है?ये आख़िर मुझे इश्क़ लाया कहाँ है!अमीरी को अपनी दिखाया कहाँ है?तुम्हें शह्र-ए-दिल ये घुमाया कहाँ है?अभी सहरा में एक दरिया बहेगाअभी क़ह्र अश्क़ों ने ढाया कहाँ है?अभी देखिएगा अँधेरों की हालतउफ़ुक़ पर अभी शम्स आया कहाँ है?कोई दोस्त है,कोई दुश्मन,यहाँ परसब अपने हैं,कोई पराया कहाँ है?अभी से ही क्यों आँख भर आई सबकी?अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है?(मौलिक व अप्रकाशित)See More
Mar 8
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-80
"आदरणीय समर कबीर जी आप की गज़लें मेरे जैसे सीखने के इच्छुक लोगों के लिए किसी पाठशाला से कम नहीं होतीं।हमेशा की तरह इस बार भी आपने बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल प्रस्तुत की। गिरह वाले शेर के संदर्भ में एक जिज्ञासा है मेरी! क्या "आंखों के किस्से और प्यार की…"
Feb 24

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Male
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Araria,Bihar
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Araria,Bihar
Profession
Student
About me
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जयनित कुमार मेहता's Blog

हमने सांसें भी गिरवी रख दी हैं (ग़ज़ल)

2122 1212 22



मुझको सच कहने की बीमारी है

इसलिए तो ये संगबारी है



अपने हिस्से में मह्ज़ ख़्वाब हैं,बस!

नींद भी, रात भी तुम्हारी है



एक अरसे की बेक़रारी पर

वस्ल का एक पल ही भारी है



चीरती जाती है मिरे दिल को

याद तेरी है या कि आरी है?



हमने साँसें भी गिरवी रख दी हैं

अब तो ये ज़िन्दगी उधारी है



सब तो वाकिफ़ हैं आखिरी सच से

किसलिए फिर ये मारा-मारी है?



नींद का कुछ अता-पता तो नहीं

रात है, ख़्वाब हैं,… Continue

Posted on March 17, 2017 at 4:51pm — 5 Comments

अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है (ग़ज़ल)

122   122   122   122

है हर सू फ़क़त धूप,साया कहाँ है?

ये आख़िर मुझे इश्क़ लाया कहाँ है!

अमीरी को अपनी दिखाया कहाँ है?

तुम्हें शह्र-ए-दिल ये घुमाया कहाँ है?

अभी सहरा में एक दरिया बहेगा

अभी क़ह्र अश्क़ों ने ढाया कहाँ है?

अभी देखिएगा अँधेरों की हालत

उफ़ुक़ पर अभी शम्स आया कहाँ…

Continue

Posted on March 8, 2017 at 3:30pm — 6 Comments

गुलाब ऐसे ही थोड़ी गुलाब होता है (ग़ज़ल)

1212 1122 1212 22



क़दम-क़दम पे नुमाया सराब होता है

नज़र में दिखता है फिर चूर ख़्वाब होता है



नयी उमर में निगाहों में आब होता है

भड़क उठे जो यही इंक़िलाब होता है



दिलों की गुफ़्तगू भी क्या क़माल होती है

नज़र-नज़र में सवाल-ओ-जवाब होता है



अगर हो रब्त दिलों में तो दूरियां कैसी

ज़मीं से दूर बहुत आफ़ताब होता है



जो काटनी हों कभी हिज्र की सियाह शबें

हर इक ख़याल तेरा माहताब होता है



वो लोग चेहरों को पढ़ना सिखा रहे हम को

बजाय… Continue

Posted on February 22, 2017 at 3:38pm — 3 Comments

कोई इस तरह न तोड़े सपने (ग़ज़ल)

2122 1122 22



उम्र-भर चुभते हैं बिखरे सपने

कोई इस तरह न तोड़े सपने



टूट जाती है तभी नींद मेरी

जब कभी आते हैं अच्छे सपने



पूरे होने की कोई शर्त नहीं?

पूरे होते नहीं ऐसे सपने



हम हकीकत में यकीं रखते है

हों मुबारक़ तुझे तेरे सपने



वस्ल का वक़्त है नज़दीक बहुत

सुब्ह आते है अब उसके सपने



नींद अब मुझसे ख़फ़ा है, यानी

उसको रास आ गए मेरे सपने



अपनी क़िस्मत में फ़क़त प्यास ही थी

पर थे आँखों में नदी के… Continue

Posted on February 12, 2017 at 11:55am — 12 Comments

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At 12:59pm on January 27, 2016, kanta roy said…

बेहद गर्व का पल  ! बहुत -बहुत बधाई आपको आदरणीय जयनित  जी  "महीने का सक्रिय सदस्य"  बनने हेतु। 

At 8:17pm on January 16, 2016, जयनित कुमार मेहता said…
आदरणीय गणेश जी,
इस सम्मान के लिए मैं OBO परिवार के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ।
At 8:13pm on January 16, 2016, जयनित कुमार मेहता said…
जन्मदिवस की शुभकामनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ,आदरणीय रवि शुक्ला जी..

(विलम्ब से प्रत्युत्तर के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ)
At 4:28pm on January 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

जयनित कुमार मेहता जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:26pm on November 6, 2015, Ravi Shukla said…

जयनित जी जन्‍म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं

 
 
 

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