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जयनित कुमार मेहता
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  • India
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मिथिलेश वामनकर left a comment for जयनित कुमार मेहता
"आदरणीय जयनित जी जन्‍म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं"
Nov 6, 2017
जयनित कुमार मेहता commented on Samar kabeer's blog post "अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"
"सादर प्रणाम आदरणीय! बेहद उम्दा ग़ज़ल है। शत-शत नमन आपको।"
Nov 4, 2017
जयनित कुमार मेहता commented on Naveen Mani Tripathi's blog post याद आ जाती है फिर उलझी कहानी आपकी
"मेरी जिज्ञासा शांत करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका, आदरणीय समर कबीर जी।"
Oct 24, 2017
जयनित कुमार मेहता commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post जिन्हें आदत पड़ी हर बात में आँसू बहाने क़ई (ग़ज़ल)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Oct 24, 2017
जयनित कुमार मेहता commented on Naveen Mani Tripathi's blog post याद आ जाती है फिर उलझी कहानी आपकी
"उम्दा ग़ज़ल हुई है आदरणीय नवीन जी। आखिरी शेर को लेकर एक प्रश्न उठ रहा है मेरे मन में- "हाल पूछा मुस्कुरा कर आपने जब से मेरा । मिट गईं तन्हाईयाँ सब मेहरबानी आपकी ।।" सानी को देखते हुए क्या उला मिसरे में 'से' का प्रयोग अनुचित नहीं…"
Oct 24, 2017
जयनित कुमार मेहता commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल
"बहुत ही ख़ूबसूरत अशआर से सजी हुई क़माल की ग़ज़ल हुई है आदरणीय समर कबीर जी। आपकी रचना पर ज़ियादा क्या कहूँ, आप तो हमारे मार्गदर्शक, गुरु और आदर्श है। हार्दिक बधाई आपको।।"
Oct 24, 2017
जयनित कुमार मेहता commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - यूँ ही गाल बजाते रहिये
"उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आपको, आदरणीय राम अवध विश्वकर्मा जी।"
Oct 24, 2017
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on जयनित कुमार मेहता's blog post सब कुछ उपलब्ध है दुकानों में (ग़ज़ल)
"वाह आदरणीय जयनित जी क्या खूबसूरत ग़ज़ल कही है..सादर बधाई"
Sep 29, 2017
Samar kabeer commented on जयनित कुमार मेहता's blog post सब कुछ उपलब्ध है दुकानों में (ग़ज़ल)
"जी,आपने सही निर्णय लिया है,ये अशआर हटा दें ।"
Sep 27, 2017
Dr Ashutosh Mishra commented on जयनित कुमार मेहता's blog post सब कुछ उपलब्ध है दुकानों में (ग़ज़ल)
"आदरणीय भाई जयनित जी बहुत बढ़िया प्रयास है समर सर की प्रतिक्रिया के माध्यम से बहुत कुछ सीखने को मिला। बच्चे लड़-भिड़ के खेलने भी लगे गुफ़्तगू बंद है सयानों में। यह शेर दिल को भा गया आदरणीय नीरज जी की प्रतिक्रिया में मिल की जगह मिट की बात की गयी है मुझे…"
Sep 27, 2017
Niraj Kumar commented on जयनित कुमार मेहता's blog post सब कुछ उपलब्ध है दुकानों में (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित जी.  खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. दाद के साथ मुबारकबाद. जनाब समर कबीर साहब ने 'मिट चुके हैं फ़क़त बयानों में' की जगह जो मिसरा सुझाया है उसमे शायद गलती 'मिट' की जगह 'मिल' हो गया है. उसकी यादों की कूक गूँजे…"
Sep 27, 2017
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post सब कुछ उपलब्ध है दुकानों में (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर कबीर जी, प्रणाम! इस मंच पर ग़ज़ल साझा करने के बाद इन आँखों को जैसे आप ही की टिप्पणी का इंतजार रहता है। आपके मार्गदर्शन के बाद मुझे लग रहा है कि "बयानों" और "कानों" वाले शेर बहुत ज़रूरी नाहीं लग रहे हैं, सो इनको हटा रहा…"
Sep 27, 2017
जयनित कुमार मेहता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post सब कुछ उपलब्ध है दुकानों में (ग़ज़ल)
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी, नमस्कार! उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। धन्यवाद!"
Sep 27, 2017
रामबली गुप्ता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post सब कुछ उपलब्ध है दुकानों में (ग़ज़ल)
"बधाई स्वीकार करें"
Sep 27, 2017
रामबली गुप्ता commented on जयनित कुमार मेहता's blog post सब कुछ उपलब्ध है दुकानों में (ग़ज़ल)
"बहुत ही सुंदर ग़ज़ल कही आपने आदरणीय जयनित भाई जी"
Sep 27, 2017
Mahendra Kumar commented on जयनित कुमार मेहता's blog post सब कुछ उपलब्ध है दुकानों में (ग़ज़ल)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. जयनित जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Sep 27, 2017

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I'm simple..!

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सब कुछ उपलब्ध है दुकानों में (ग़ज़ल)

2122 1212 22



सब हैं मसरूफ़ अब उड़ानों में

देखिये भीड़ आसमानों में



प्यार? ईमान? दोस्ती? जी हाँ

सब कुछ उपलब्ध है दुकानों में



भुखमरी,बालश्रम,अशिक्षा..सब

मिट चुके हैं फ़क़त बयानों में



पत्थरों से उन्हीं की यारी है

जो हैं शीशे-जड़े मकानों में



सच्चे हीरे की है तलाश अगर

जा! भटक कोयले की खानों में



बच्चे लड़-भिड़ के खेलने भी लगे

गुफ़्तगू बंद है सयानों में



फ़र्श से अर्श पर मैं जा पहुँचा

कितनी ताक़त है देखो… Continue

Posted on September 26, 2017 at 8:06pm — 14 Comments

आदमी मैं कभी बड़ा न हुआ (ग़ज़ल)

2122 1212 22



दर्द से जिसका राब्ता न हुआ

ज़ीस्त में उसकी कुछ नया न हुआ



हाल-ए-दिल उसने भी नहीं पूछा

और मेरा भी हौसला न हुआ



आरज़ू थी बहुत, मनाऊँ उसे

उफ़! मगर वो कभी ख़फ़ा न हुआ



तब तलक ख़ुद से मिल नहीं पाया

जब तलक ख़ुद से गुमशुदा न हुआ



सिर्फ़ इक पल की थी वो क़ैद-ए-नज़र

जाने क्यों उम्र-भर रिहा न हुआ



मुझसे छूटी नहीं ख़ुलूस-ओ-वफ़ा

आदमी मैं कभी बड़ा न हुआ



अपनी ख़ुशबू ख़ला में छोड़ के "जय"

दूर होकर भी वो जुदा… Continue

Posted on September 2, 2017 at 10:36pm — 10 Comments

शायरी चीज़ ही ऐसी है यार (ग़ज़ल)

2122 1122 22



हर घड़ी? चीज़ ही ऐसी है यार..!

शायरी चीज़ ही ऐसी है यार..!



तिश्नगी और भड़क जाती है,

उफ़! नदी चीज़ ही ऐसी है यार..!



कोई हँसता है, कोई रोता है

ज़िन्दगी चीज़ ही ऐसी है यार..!



चाँद का नूर भी फीका पड़ जाए

सादगी चीज़ ही ऐसी है यार..!



लो! हुआ मैं भी अब आदम से मशीन

नौकरी चीज़ ही ऐसी है यार..!



साथ अश्क़ों के गुज़रती है उम्र

आशिक़ी चीज़ ही ऐसी है यार..!



सारा दरिया पी के भी बाक़ी है

तिश्नगी चीज़ ही… Continue

Posted on June 30, 2017 at 11:38pm — 1 Comment

पारसाई ही मेरी दौलत है (ग़ज़ल)

2122 1212 22

जो ये लम्हा उदास है तो है
वो कहीं आस-पास है तो है

पैरहन जिस्म पर हज़ारों हैं
रूह गर बेलिबास है तो है

तीरगी हिज्र की है आंखों में
दिल में लेकिन उजास है तो है

पारसाई ही मेरी दौलत है
छल-कपट तेरे पास है तो है

क्यों न मिट जाए ग़म की कड़ुवाहट
आंसुओं में मिठास है तो है

इश्क़ में कोई मोज़िजा होगा
दिल को अब भी ये आस है तो है

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on June 25, 2017 at 3:28pm — 6 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 11:19am on November 6, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय जयनित जी जन्‍म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं

At 12:59pm on January 27, 2016, kanta roy said…

बेहद गर्व का पल  ! बहुत -बहुत बधाई आपको आदरणीय जयनित  जी  "महीने का सक्रिय सदस्य"  बनने हेतु। 

At 8:17pm on January 16, 2016, जयनित कुमार मेहता said…
आदरणीय गणेश जी,
इस सम्मान के लिए मैं OBO परिवार के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ।
At 8:13pm on January 16, 2016, जयनित कुमार मेहता said…
जन्मदिवस की शुभकामनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ,आदरणीय रवि शुक्ला जी..

(विलम्ब से प्रत्युत्तर के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ)
At 4:28pm on January 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

जयनित कुमार मेहता जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:26pm on November 6, 2015, Ravi Shukla said…

जयनित जी जन्‍म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं

 
 
 

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