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रामबली गुप्ता
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Sushil Sarna commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"गलतियाँ किससे नही होतीं भला संसार में?है मगर शुभ आचरण निज भूल के स्वीकार में। शून्य में सामान्यतः तो कुछ नही का बोध पर,है यहाँ क्या शेष छूटा शून्य के विस्तार में? आधुनिकता के दुशासन ने किया ऐसे हरण,द्रौपदी निर्वस्त्र है खुद कलियुगी अवतार…"
55 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"सादर आभार आदरणीय आशुतोष मिश्र जी"
1 hour ago
Dr Ashutosh Mishra commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली जी सार्थक संदेशों को समाहित किये वर्तमान परिदृश्यों को चित्रित करती हुयी शानदार रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर"
1 hour ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"धन्यवाद आदरणीया कल्पना भट्ट जी"
2 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"बहुत सुंदर ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय रामबली जी हार्दिक बधाई स्वीकारें | "
16 hours ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"धन्यवाद भाई महेंद्र कुमार जी"
16 hours ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"हृदय से आभार भाई राम अवध विश्वकर्मा जी"
16 hours ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"धन्यवाद भाई मुहम्मद आरिफ़ जी"
16 hours ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"आदरणीय समर भाई साहब सराहना एवं प्रोत्साहन के लिये हार्दिक आभार"
16 hours ago
Mahendra Kumar commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"आ. रामबली जी, उम्दा ग़ज़ल कही है आपने. यह शेर विशेष रूप से पसन्द आया : प्रेम पूजा, प्रेम ईश्वर, प्रेम के ही पंथ सब, प्रेम ही कुरआन गीता बाइबिल के सार में। क्षमा चाहूँगा पर यह शेर मुझे पसन्द नहीं आया. हालाँकि अपनी-अपनी सोच है. आधुनिकता के दुशासन ने…"
18 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"आदरणीय खूबसूरत ग़ज़ल कहने के लिये मुबारकबाद कबूल कीजिये"
23 hours ago
Mohammed Arif commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी आदाब, बहुत ही सकारात्मक और सीख देने वाली ग़ज़ल । हर शे'र उम्दा है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
रामबली गुप्ता's blog post was featured

ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल2122 2122 2122 212गलतियाँ किससे नही होतीं भला संसार में?है मगर शुभ आचरण निज भूल के स्वीकार में।शून्य में सामान्यतः तो कुछ नही का बोध पर,है यहाँ क्या शेष छूटा शून्य के विस्तार में?आधुनिकता के दुशासन ने किया ऐसे हरण,द्रौपदी निर्वस्त्र है खुद कलियुगी अवतार में।है जिन्हें स्वीकार परहित हेतु जलना साथियों!चीर तम का वक्ष वे करते प्रभा संसार में।व्यर्थ ही व्याख्यान आदर्शों पे देने से भला,अनुसरण कुछ कीजिये इनका निजी व्यवहार में।लालसा दिल में यही मिल जाय वो मीठा शहद,जो मिला था, माँ की लोरी, थपकियों और…See More
yesterday
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
yesterday
रामबली गुप्ता posted a blog post

ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल2122 2122 2122 212गलतियाँ किससे नही होतीं भला संसार में?है मगर शुभ आचरण निज भूल के स्वीकार में।शून्य में सामान्यतः तो कुछ नही का बोध पर,है यहाँ क्या शेष छूटा शून्य के विस्तार में?आधुनिकता के दुशासन ने किया ऐसे हरण,द्रौपदी निर्वस्त्र है खुद कलियुगी अवतार में।है जिन्हें स्वीकार परहित हेतु जलना साथियों!चीर तम का वक्ष वे करते प्रभा संसार में।व्यर्थ ही व्याख्यान आदर्शों पे देने से भला,अनुसरण कुछ कीजिये इनका निजी व्यवहार में।लालसा दिल में यही मिल जाय वो मीठा शहद,जो मिला था, माँ की लोरी, थपकियों और…See More
yesterday
रामबली गुप्ता commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post खुद से मुझ को अलग करो----- ग़ज़ल पंकज मिश्र द्वारा
"मेरे सुझाव के अनुसार दुसरे शैर में कथ्य का भाव आपके कहन से कुछ भिन्न हो गया है। इसे इस प्रकार कर ले- करते हो तुम भी याद मुझे, ये हिचकी से कहलाया तो।"
Sep 20

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रामबली गुप्ता's Blog

ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल

2122 2122 2122 212



गलतियाँ किससे नही होतीं भला संसार में?

है मगर शुभ आचरण निज भूल के स्वीकार में।



शून्य में सामान्यतः तो कुछ नही का बोध पर,

है यहाँ क्या शेष छूटा शून्य के विस्तार में?



आधुनिकता के दुशासन ने किया ऐसे हरण,

द्रौपदी निर्वस्त्र है खुद कलियुगी अवतार में।



है जिन्हें स्वीकार परहित हेतु जलना साथियों!

चीर तम का वक्ष वे करते प्रभा संसार में।



व्यर्थ ही व्याख्यान आदर्शों पे देने से भला,

अनुसरण कुछ कीजिये… Continue

Posted on September 25, 2017 at 5:16am — 13 Comments

जयति जयति जय...-रामबली गुप्ता

गीत

आधार छंद-आल्हा/वीर छंद

जयति जयति जय मात भारती, शत-शत तुझको करुँ प्रणाम।

जननी जन्मभूमि वंदन है, प्रथम तुम्हारी सेवा काम।

जयति जयति जय........

जन्म लिया तेरी माटी में, खेला गोद तुम्हारी मात!

लोट तुम्हारे रज में तन को, मिला वीर्य-बल का सौगात।।

तुझसे उपजा अन्न ग्रहण कर, पीकर तेरे तन का नीर।

ऋणी हुआ शोणित का कण-कण, ऋणी हुआ यह सकल शरीर।।

अब तो यह अभिलाषा कर दूँ, अर्पित सब कुछ तेरे नाम।

जननी जन्मभूमि वन्दन है प्रथम…

Continue

Posted on August 27, 2017 at 10:50pm — 26 Comments

दोहे-गुरु पूर्णिमा विशेष-रामबली गुप्ता

जग में बिन गुरु ज्ञान के, नर-पशु एक समान।

गुरु के शुचि सानिध्य में, बनता मूढ़ सुजान।।1।।



ज्ञान जगत का मूल है, संस्कृति का आधार।

किन्तु बिना गुरु ज्ञान कब, पाये यह संसार?2।।



निज गुरु पद में बैठ नित, खुद को लो यदि जान।

कलुष-भेद हिय-तम मिटे, हो शुचि तन-मन-प्रान।।3।।



ज्ञान ज्योति गुरु दीप सम, और तिमिर-अज्ञान।

अर्पित कर श्रम-स्नेह-घृत, बनते शिष्य सुजान।।4।।



नित गुरु-पद वंदन करें, इसमें चारो धाम।

गुरु को श्री-हरि-पार्थ भी, नत हो करें… Continue

Posted on July 9, 2017 at 10:30pm — 14 Comments

ग़ज़ल-रामबली गुप्ता

1222 1222 1222 1222



जो लड़कर आँधियों से जीत का इनआम लेता है,

जमाना फ़ख़्र से उसका युगों तक नाम लेता है।



सहारा जो यहाँ हर डूबते इंसान का बनता,

खुदा भी हाथ उसका मुश्किलों में थाम लेता है।



नही सर पे दुआओं की कमी होती उसे यारों,

यहाँ माँ बाप का जो हाल सुबहो शाम लेता है।



पता सबको कि मुश्किल की घड़ी होती बड़ी छोटी,

कहाँ हर आदमी हिम्मत से लेकिन काम लेता है?



खुदा को भी शिकायत होगी शायद अपने बंदे से,

कि है खुदगर्ज़ बस दुख में ही… Continue

Posted on July 4, 2017 at 11:46am — 21 Comments

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At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 3:10pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामबली गुप्ता जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपका गीत-हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:47am on May 14, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०  रामबली जी

आप जैसा सुन्दर कवि -मित्र पाकर आप्यायित हूँ . आपको सदैव शुभ .  

At 10:17pm on February 25, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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