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रामबली गुप्ता
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Mohammed Arif commented on रामबली गुप्ता's blog post गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता
"आदरणीय राम बली गुप्ता जी आदाब,                                 सुंदर प्रेम की भावना से ओतप्रोत गीत । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
4 hours ago
रामबली गुप्ता posted a blog post

गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता

गीतभावना में प्रेम का रस घोल प्यारे।प्रेम जीवन में बड़ा अनमोल प्यारे।भावना में.........शब्द-शर मुख से निकल कर लौटते कब?घाव दें गम्भीर ये हिय में लगें जब।कर न दें आहत किसी को शब्द तेरे,शब्द-मधु मकरन्द वाणी बोल प्यारे।भावना में ........है नहीं कोई बड़ा, छोटा न जग में।काम आ जाए भला कब कौन मग में।स्नेह का सम्बन्ध ही सबसे उचित है,तथ्य यह मन की तुला में तोल प्यारे।भावना में........क्यों मनुज ही, पशु-विहग को भी क्षुधा है।स्नेह तो सबके लिए अनुपम सुधा है।स्नेह के बस में सकल जग जगतपति भी,स्नेह से हिय…See More
14 hours ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post नव प्रेम राग सिरजाय चली-रामबली गुप्ता
"धन्यवाद भाई सुरेन्द्र नाथ जी"
15 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post नव प्रेम राग सिरजाय चली-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन गीत। पढ़कर मजा आ गया। बधाई इसस प्रस्तुति पर"
yesterday
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post नव प्रेम राग सिरजाय चली-रामबली गुप्ता
"आदरणीय आरिफ़ जी प्रयास पर प्रोत्साहन और सराहना के लिए ह्रदय से धन्यवाद। वैसे किसी विशेष छंद का आधार तो नही लिया गया है। आप चाहें तो प्रत्येक लाइन को 16 मात्राओं में रख सकते हैं।सादर"
Thursday
Mohammed Arif commented on रामबली गुप्ता's blog post नव प्रेम राग सिरजाय चली-रामबली गुप्ता
"आदरणीय राम बली गुप्ता जी आदाब,                               रचना पढ़कर मज़ा आ गया । बहुत बेहतरीन ध्वन्यत्मकता । रीतिकाल की रचनाओं की याद आ गई । आपने इसका छांदसिक विधान नहीं…"
Thursday
vijay nikore commented on रामबली गुप्ता's blog post विधाता छंद-रामबली गुप्ता
"सुन्दर छन्द लिखे हैं. बधाई। आपकी आँखों की तकलीफ के बारे में सुन कर दुख हुआ... आशा है कि आप शीघ्र अच्छे हो जाएँगे।"
Wednesday
रामबली गुप्ता posted a blog post

नव प्रेम राग सिरजाय चली-रामबली गुप्ता

लच-लचक-लचक लचकाय चली,कटि-धनु से शर बरसाय चली।कजरारे चंचल नयनों से,हिय पर दामिनि तड़पाय चली।।1।।फर-फहर फहर फहराय चली,लट-केश-घटा बिखराय चली।अलि मनबढ़ सुध-बुध खो बैठे,अधरों से मधु छलकाय चली।।2।।सुर-सुरभि-सुरभि सुरभाय चली,चहुँ ओर दिशा महकाय चली।चम्पा-जूही सब लज्जित हैं,तन चंदन-गंध बसाय चली।।3।।लह-लहर-लहर लहराय चली,तन से आँचल सरकाय चली।नव-यौवन-धन तन-कंचन से,रति मन में अति भड़काय चली।।4।।झन-झनन-झनन झनकाय चली,पायल-चूड़ी खनकाय चली।हिय के हर तार झंझोर सखे!नव-प्रेम-राग सिरजाय चली।।5।।मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Wednesday
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post विधाता छंद-रामबली गुप्ता
"हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी"
Tuesday
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post विधाता छंद-रामबली गुप्ता
"समर भाई साहब सादर प्रणाम। आजकल कुछ अस्वस्थ हूँ और आँखों में भी तकलीफ है इसलिए समय से प्रतिक्रिया न दे सका। आपकी सराहना एवं प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभार। इस छंद में -1222 1222 , 1222 1222 के वह्र में लिखा जाता है। प्रत्येक पद यही वह्र रहेगा…"
Tuesday
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post विधाता छंद-रामबली गुप्ता
"आद0 आरिफ़ जी देर से प्रतिक्रिया देने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ। दरअसल आँखों में थोड़ी दिक्कत होने की वजह से मोबाइल देखना नही हो पा रहा। इसलिए समय से प्रतिक्रिया नही दे पाया। अभी भी कुछ दिक्कत है ही। प्रयास पर आपकी प्रशंसा एवं प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक…"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रामबली गुप्ता's blog post विधाता छंद-रामबली गुप्ता
"आ. भाई रामबली जी, सुंदर छंद हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
Feb 2
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post विधाता छंद-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बहुत उम्दा छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । छन्द विधान लिख देते तो कुछ कहने में आसानी होती ।"
Feb 1
Mohammed Arif commented on रामबली गुप्ता's blog post विधाता छंद-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी आदाब,                               सबके कल्याण और अच्छी मनोकामना से युक्त बेहतरीन विधाता छंद । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । काश! छांदसिक विधान भी लिख…"
Feb 1
रामबली गुप्ता posted a blog post

विधाता छंद-रामबली गुप्ता

न किंचित स्वार्थ हो हिय औ', भुला कर वैर जो सारे।अमीरी औ' गरीबी के, मिटा कर भेद सब प्यारे!करें सहयोग हर जन का, सभी के काम जो आते।सदा वे श्रेष्ठ जन जग में, सुयश-सम्मान हैं पाते।।1।।धरे हिय धैर्य औ' साहस, निरन्तर यत्न जो करते।न किंचित राह की बाधा, न मुश्किल से किन्हीं डरते।सहें हर यातना पथ की, शिखर पर किन्तु चढ़ते हैं।वही प्रतिमान नव बन कर, अमिट इतिहास गढ़ते हैं।।2।।सदा सुरभित सुमन बन कर, दिलों में जो यहाँ खिलते।भुला कर भेद जो सारे, सभी से प्यार से मिलते।।दिया सौहार्द का बन कर, घना तम द्वेष का…See More
Jan 31
Sushil Sarna commented on रामबली गुप्ता's blog post कुंडलियाँ-रामबली गुप्ता
"Waaaaaaaah shaaaaàndar sir"
Dec 17, 2017

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रामबली गुप्ता's Blog

गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता

गीत

भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे।

प्रेम जीवन में बड़ा अनमोल प्यारे।

भावना में.........

शब्द-शर मुख से निकल कर लौटते कब?

घाव दें गम्भीर ये हिय में लगें जब।

कर न दें आहत किसी को शब्द तेरे,

शब्द-मधु मकरन्द वाणी बोल प्यारे।

भावना में ........

है नहीं कोई बड़ा, छोटा न जग में।

काम आ जाए भला कब कौन मग में।

स्नेह का सम्बन्ध ही सबसे उचित है,

तथ्य यह मन की तुला में तोल प्यारे।

भावना में........

क्यों…

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Posted on February 17, 2018 at 9:27pm — 1 Comment

नव प्रेम राग सिरजाय चली-रामबली गुप्ता

लच-लचक-लचक लचकाय चली,
कटि-धनु से शर बरसाय चली।

कजरारे चंचल नयनों से,

हिय पर दामिनि तड़पाय चली।।1।।



फर-फहर फहर फहराय चली,

लट-केश-घटा बिखराय चली।

अलि मनबढ़ सुध-बुध खो बैठे,

अधरों से मधु छलकाय चली।।2।।



सुर-सुरभि-सुरभि सुरभाय चली,

चहुँ ओर दिशा महकाय चली।

चम्पा-जूही सब लज्जित हैं,

तन चंदन-गंध बसाय चली।।3।।



लह-लहर-लहर लहराय चली,

तन से आँचल सरकाय चली।

नव-यौवन-धन तन-कंचन से,

रति मन में अति भड़काय…
Continue

Posted on February 14, 2018 at 2:28am — 4 Comments

विधाता छंद-रामबली गुप्ता

न किंचित स्वार्थ हो हिय औ', भुला कर वैर जो सारे।

अमीरी औ' गरीबी के, मिटा कर भेद सब प्यारे!

करें सहयोग हर जन का, सभी के काम जो आते।

सदा वे श्रेष्ठ जन जग में, सुयश-सम्मान हैं पाते।।1।।

धरे हिय धैर्य औ' साहस, निरन्तर यत्न जो करते।

न किंचित राह की बाधा, न मुश्किल से किन्हीं डरते।

सहें हर यातना पथ की, शिखर पर किन्तु चढ़ते हैं।

वही प्रतिमान नव बन कर, अमिट इतिहास गढ़ते हैं।।2।।

सदा सुरभित सुमन बन कर, दिलों में जो यहाँ खिलते।

भुला कर…

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Posted on January 31, 2018 at 11:54am — 7 Comments

कुंडलियाँ-रामबली गुप्ता

जीवन में निज यत्न से, करिये ऐसे काम।

आप रहें या ना रहें, रहे सदा पर नाम।

रहे सदा पर नाम, नया इतिहास बनाएँ।

बनें जगत प्रतिमान, लोग यश गाथा गाएँ।

अगर समर्पण-स्नेह-धैर्य-साहस रख मन में।

हों इस हेतु प्रयास, सफल होंगे जीवन में।।1।।

जग में कठिन न है सखे, करना कोई काम।

दृढ निश्चय कर के बढ़ो, होगा जग में नाम।।

होगा जग में नाम, लक्ष्य पाना जो ठानो।

हर बाधा स्वयमेव, मिटेगी सच यह मानो।।

गिरि-सरि आयें राह , चुभें या काँटें पग में।

लक्ष्य प्राप्त कर…

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Posted on December 13, 2017 at 1:12pm — 13 Comments

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At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 3:10pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामबली गुप्ता जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपका गीत-हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:47am on May 14, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०  रामबली जी

आप जैसा सुन्दर कवि -मित्र पाकर आप्यायित हूँ . आपको सदैव शुभ .  

At 10:17pm on February 25, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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