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रामबली गुप्ता
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Ajay Tiwari commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली जी, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई.  "
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"आ. भाई रामबली जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधायी ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"आपसे टेलीफोन पर बात करने के बाद अब ये शैर यूँ कर सकते हैं:- "ज़िन्दगी का ये सफ़र ख़ुशियों से भर जायेगा मेरे हमराह रह-ए-इश्क़ पे चलते रहिये ""
Tuesday
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"'जिंदगी एक सफर खुशियों' भरा हो अपनायूँ ही बस आप मेरे साथ तो चलते रहिये' इस शैर को यूँ कर सकते हैं:- 'ज़िन्दगी का ये सफ़र ख़ुशियों भरा हो अपना यूँ ही बस आप मेरे साथ में चलते रहिये' 'मैं जो' हूँ साथ जमाने से' भला…"
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय..."
Tuesday
रामबली गुप्ता commented on Samar kabeer's blog post "हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल
"वाह वाह वाकई मजा आया पढ़कर आदरणीय समर भाई साहब। इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हृदय से बधाई स्वीकार करें। सादर"
Sep 17
रामबली गुप्ता commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - ज़माने के लिए
"वाह भाई बसंत कुमार जी बहुत ही शानदार ग़ज़ल कही आपने हार्दिक बधाई स्वीकार करें।  सभी शैर बढियाँ हुए हैं लेकिन पहला और दूसरा शैर दोनों मुझे बहुत पसंद आये। तीसरे शेर में आद० समर भाई साहब का सुझाव बेहतर है। सादर"
Sep 17
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"सादर प्रणाम आदरणीय समर भाई साहब। कौन-कौन से मिसरे कमजोर हैं थोड़ा इंगित करें और संशोधन के लिए सुझाव दें। बेहतर की हमेशा गुंजाइश है। मैं आपके कहे अनुसार प्रयास करूँगा।सादर"
Sep 17
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"सादर आभार आदरणीय भाई बसंत कुमार जी "
Sep 17
बसंत कुमार शर्मा commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी, शुभ प्रभात,  बहुत खूब गजल कही आपने "
Sep 17
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । कुछ मिसरों पर थोड़ा और समय देते तो ग़ज़ल और निखर जाती ।"
Sep 16
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"हृदय से आभार आदरणीय मित्र सुरेन्द्रनाथ सिंह जी"
Sep 15
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"रचना पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार आदरणीय तेज वीर सिंह जी।"
Sep 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल का बेहतरीन प्रयास पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये"
Sep 14
TEJ VEER SINGH commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"हार्दिक बधाई आदरणीय राम बली गुप्ता जी। बेहतरीन गज़ल। लूटते चैनो-अमन जो भी वतन का साहिब!ऐसे' साँपो के' उठे फन को' कुचलते रहिये"
Sep 14
रामबली गुप्ता posted a blog post

बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल2122 1122 1122 22बन के' सूरज सा' जमाने में' निकलते रहिये हर अँधेरे को' उजाले मे' बदलते रहियेजिंदगी एक सफर खुशियों' भरा हो अपना यूँ ही बस आप मेरे साथ तो चलते रहियेदिल के' मन्दिर में उजाले की' वज़ह आप ही हैं अब तो इस दिल में' सदा दीप सा' जलते रहियेमैं जो' हूँ साथ जमाने से' भला डर कैसा हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहियेमेरे' हर गीत-ग़ज़ल-नज़्म-तरानों में' यूँ ही बन के' नित शब्द नये प्यार के ढलते रहियेदिल की बगिया में बहारों के सुमन मुस्काएँ इसमें बस आप सुबह शाम टहलते रहियेलूटते चैनो-अमन जो भी वतन…See More
Sep 14

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KOTHA
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NATIONALIST

रामबली गुप्ता's Blog

बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

बन के' सूरज सा' जमाने में' निकलते रहिये

हर अँधेरे को' उजाले मे' बदलते रहिये

जिंदगी एक सफर खुशियों' भरा हो अपना

यूँ ही बस आप मेरे साथ तो चलते रहिये

दिल के' मन्दिर में उजाले की' वज़ह आप ही हैं

अब तो इस दिल में' सदा दीप सा' जलते रहिये

मैं जो' हूँ साथ जमाने से' भला डर कैसा

हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिये

मेरे' हर गीत-ग़ज़ल-नज़्म-तरानों में' यूँ ही

बन के' नित…

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Posted on September 14, 2018 at 1:39pm — 13 Comments

गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता

गीत

भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे।

प्रेम जीवन में बड़ा अनमोल प्यारे।

भावना में.........

शब्द-शर मुख से निकल कर लौटते कब?

घाव ये गहरे करें हिय में लगें जब।

कर न दें आहत किसी को शब्द तेरे,

मृृदु मधुुुर मकरन्द वाणी बोल प्यारे।

भावना में ........

मत बड़ा छोटा किसी को मान जग में।

काम आ जाए भला कब कौन मग में?

स्नेह का सम्बन्ध ही सबसे उचित है,

तथ्य यह मन की तुला में तोल प्यारे।

भावना…

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Posted on February 17, 2018 at 9:00pm — 8 Comments

नव प्रेम राग सिरजाय चली-रामबली गुप्ता

लच-लचक-लचक लचकाय चली,
कटि-धनु से शर बरसाय चली।

कजरारे चंचल नयनों से,

हिय पर दामिनि तड़पाय चली।।1।।



फर-फहर फहर फहराय चली,

लट-केश-घटा बिखराय चली।

अलि मनबढ़ सुध-बुध खो बैठे,

अधरों से मधु छलकाय चली।।2।।



सुर-सुरभि-सुरभि सुरभाय चली,

चहुँ ओर दिशा महकाय चली।

चम्पा-जूही सब लज्जित हैं,

तन चंदन-गंध बसाय चली।।3।।



लह-लहर-लहर लहराय चली,

तन से आँचल सरकाय चली।

नव-यौवन-धन तन-कंचन से,

रति मन में अति भड़काय…
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Posted on February 14, 2018 at 2:28am — 6 Comments

विधाता छंद-रामबली गुप्ता

न किंचित स्वार्थ हो हिय औ', भुला कर वैर जो सारे।

अमीरी औ' गरीबी के, मिटा कर भेद सब प्यारे!

करें सहयोग हर जन का, सभी के काम जो आते।

सदा वे श्रेष्ठ जन जग में, सुयश-सम्मान हैं पाते।।1।।

धरे हिय धैर्य औ' साहस, निरन्तर यत्न जो करते।

न किंचित राह की बाधा, न मुश्किल से किन्हीं डरते।

सहें हर यातना पथ की, शिखर पर किन्तु चढ़ते हैं।

वही प्रतिमान नव बन कर, अमिट इतिहास गढ़ते हैं।।2।।

सदा सुरभित सुमन बन कर, दिलों में जो यहाँ खिलते।

भुला कर…

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Posted on January 31, 2018 at 11:54am — 7 Comments

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At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 3:10pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामबली गुप्ता जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपका गीत-हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:47am on May 14, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०  रामबली जी

आप जैसा सुन्दर कवि -मित्र पाकर आप्यायित हूँ . आपको सदैव शुभ .  

At 10:17pm on February 25, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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