For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रामबली गुप्ता's Blog (65)

गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता

सोच समझ कर बोलिए, बातें सदा विनीत

छूटा धनु से बाण जो, लौटा कब हे! मीत



तीर-धनुष-तलवार से, बड़े दया औ' प्रेम

इन्हें बना लें शस्त्र यदि, जग को लेंगे जीत।



द्वेष-दंभ सम अरि सखे! यहाँ मनुज के कौन

बिन इनके संहार के, उपजे कब हिय प्रीत



सतत प्रयासों के करें, ऐसे तीव्र प्रहार

पर्वत पथ खुद छोड़ दें, होकर भय से भीत



अधर-सुधा घट भौंह-धनु, मुख…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on November 19, 2018 at 1:21pm — 3 Comments

मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता

हे! जगदीश! सुनो विनती अब, भक्त तुम्हें दिन-रैन पुकारे।
व्याकुल नैन निहार रहे पथ, पावन दर्शन हेतु तुम्हारे।।
कौन भला जग में अब हे हरि संकट से यह प्राण उबारे।
आ कर दो उजियार प्रभो! हिय, जीवन के हर लो दुख सारे।।

रचनाकार-रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

सूत्र-भगण×7+गुरु गुरु; 211×7+22

Added by रामबली गुप्ता on October 13, 2018 at 9:48pm — 6 Comments

छप्पय छंद-रामबली गुप्ता

ज्योतिपुंज जगदीश! रहो नित ध्यान हमारे।
कलुष-द्वेष-दुर्भाव, हृदय-तम हर लो सारे।।
सत्य-स्नेह-सद्भाव, समर्पण का प्रभु! वर दो।
जला ज्ञान का दीप, प्रभा-शुचि हिय में भर दो।
दो बल-पौरुष-सद्बुद्धि हरि! मार्ग चुनेें सद्कर्म का।
हर जनजीवन के त्रास हम, फहरायें ध्वज धर्म का।।

मौलिक एवं अप्रकाशित

रचनाकार-रामबली गुप्ता

शिल्प-प्रथम चार पद रोला छंद और अंतिम दो पद उल्लाला छंद के संयोग से छप्पय छंद की निष्पत्ति होती है।

Added by रामबली गुप्ता on October 9, 2018 at 11:30pm — 11 Comments

पिया का पत्र-रामबली गुप्ता

आज खुशी से झूमूँ सखि री पत्र पिया का आया है

भाव भरे अक्षर-अक्षर ने तन-मन को हर्षाया है



लिखते, प्रिये! तुम्हीं से सब कुछ, सुख-दुख की सहभागी तुम

सतरंगी स्वप्नों सा सुंदर जीवन तुमसे पाया है



रहता था निर्वासित सा मन जीवन के निर्जन वन में

पावन प्यार भरा गृह इसको तुमने ही लौटाया है



कहते- पीर भरा यह जीवन जो तपते मरुथल सा था

होकर सिंचित स्नेह से' तेरे हरा भरा हो…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on October 1, 2018 at 9:21am — 10 Comments

बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

बन के' सूरज सा' जमाने में' निकलते रहिये

हर अँधेरे को' उजाले मे' बदलते रहिये

जिंदगी एक सफर खुशियों' भरा हो अपना

यूँ ही बस आप मेरे साथ तो चलते रहिये

दिल के' मन्दिर में उजाले की' वज़ह आप ही हैं

अब तो इस दिल में' सदा दीप सा' जलते रहिये

मैं जो' हूँ साथ जमाने से' भला डर कैसा

हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिये

मेरे' हर गीत-ग़ज़ल-नज़्म-तरानों में' यूँ ही

बन के' नित…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on September 14, 2018 at 1:39pm — 13 Comments

गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता

गीत

भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे।

प्रेम जीवन में बड़ा अनमोल प्यारे।

भावना में.........

शब्द-शर मुख से निकल कर लौटते कब?

घाव ये गहरे करें हिय में लगें जब।

कर न दें आहत किसी को शब्द तेरे,

मृृदु मधुुुर मकरन्द वाणी बोल प्यारे।

भावना में ........

मत बड़ा छोटा किसी को मान जग में।

काम आ जाए भला कब कौन मग में?

स्नेह का सम्बन्ध ही सबसे उचित है,

तथ्य यह मन की तुला में तोल प्यारे।

भावना…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on February 17, 2018 at 9:00pm — 8 Comments

नव प्रेम राग सिरजाय चली-रामबली गुप्ता

लच-लचक-लचक लचकाय चली,
कटि-धनु से शर बरसाय चली।

कजरारे चंचल नयनों से,

हिय पर दामिनि तड़पाय चली।।1।।



फर-फहर फहर फहराय चली,

लट-केश-घटा बिखराय चली।

अलि मनबढ़ सुध-बुध खो बैठे,

अधरों से मधु छलकाय चली।।2।।



सुर-सुरभि-सुरभि सुरभाय चली,

चहुँ ओर दिशा महकाय चली।

चम्पा-जूही सब लज्जित हैं,

तन चंदन-गंध बसाय चली।।3।।



लह-लहर-लहर लहराय चली,

तन से आँचल सरकाय चली।

नव-यौवन-धन तन-कंचन से,

रति मन में अति भड़काय…
Continue

Added by रामबली गुप्ता on February 14, 2018 at 2:28am — 6 Comments

विधाता छंद-रामबली गुप्ता

न किंचित स्वार्थ हो हिय औ', भुला कर वैर जो सारे।

अमीरी औ' गरीबी के, मिटा कर भेद सब प्यारे!

करें सहयोग हर जन का, सभी के काम जो आते।

सदा वे श्रेष्ठ जन जग में, सुयश-सम्मान हैं पाते।।1।।

धरे हिय धैर्य औ' साहस, निरन्तर यत्न जो करते।

न किंचित राह की बाधा, न मुश्किल से किन्हीं डरते।

सहें हर यातना पथ की, शिखर पर किन्तु चढ़ते हैं।

वही प्रतिमान नव बन कर, अमिट इतिहास गढ़ते हैं।।2।।

सदा सुरभित सुमन बन कर, दिलों में जो यहाँ खिलते।

भुला कर…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on January 31, 2018 at 11:54am — 7 Comments

कुंडलियाँ-रामबली गुप्ता

जीवन में निज यत्न से, करिये ऐसे काम।

आप रहें या ना रहें, रहे सदा पर नाम।

रहे सदा पर नाम, नया इतिहास बनाएँ।

बनें जगत प्रतिमान, लोग यश गाथा गाएँ।

अगर समर्पण-स्नेह-धैर्य-साहस रख मन में।

हों इस हेतु प्रयास, सफल होंगे जीवन में।।1।।

जग में कठिन न है सखे, करना कोई काम।

दृढ निश्चय कर के बढ़ो, होगा जग में नाम।।

होगा जग में नाम, लक्ष्य पाना जो ठानो।

हर बाधा स्वयमेव, मिटेगी सच यह मानो।।

गिरि-सरि आयें राह , चुभें या काँटें पग में।

लक्ष्य प्राप्त कर…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on December 13, 2017 at 1:12pm — 13 Comments

चुनावी दोहे-रामबली गुप्ता

आज चुनावी रंग में, रँगे गली औ' गाँव।

प्रत्याशी हर व्यक्ति के, पकड़ रहे हैं पाँव।।1।।

पोस्टर बैनर से पटे, हैं सब दर-दीवार।

सभी मनाएँ प्रेम से, लोकतंत्र-त्यौहार।।2।।

सोच-समझ कर ही चुनें, जन प्रतिनिधि हे मीत!

सच्चे नेता यदि मिलें, लोकतंत्र की जीत।।3।।

धन-जन-बल-षडयंत्र से, वोट रहे जो मोल।

अरि वे राष्ट्र-समाज के, मत दें हिय में तोल।।4।।

जाति-धर्म के भेद हर आग्रह से हो मुक्त।

चुनें सहज नेतृत्व निज, कर्मठ…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on December 11, 2017 at 8:00pm — 10 Comments

पूनम का रजनीश लजाया-रामबली गुप्ता

मत्तगयन्द सवैया



सूत्र=211×7+22; सात भगण+गागा



सुंदर पुष्प सजा तन-कंचन केश-घटा बिखराय चली है।

हैं मद पूरित नैन-सरोवर, ओष्ठ-सुधा छलकाय चली है।।

अंग सुगंध लिए सम चंदन मत्त गयंद लजाय चली है।

लूट लिया हिय चैन सखे! कटि यूँ गगरी रख हाय! चली है।।1।।



यौवन ज्यों मकरन्द भरा घट और सुवासित कंचन काया।

भौंह कमान कटार बने दृग, केश घने सम नीरद-छाया।।

देख छटा मुख की अति सुंदर, पूनम का रजनीश लजाया।

ओष्ठ-खिली कलियाँ अति कोमल, देख हिया-अलि है… Continue

Added by रामबली गुप्ता on November 23, 2017 at 6:30am — 5 Comments

मुख-शशि उज्ज्वल औ' धनु-भौहें

सरसी छंद



शिल्प-16,11 पर यति, चार चरण और दो पद, पदांत में गुरु-लघु।



भाव शब्द-कल गुरु लघु यति का, रखकर समुचित ध्यान।

दोहा तोटक रोला सरसी, रचिये छंद सुजान।।1।।



सोलह ग्यारह पर यति प्रति पद, गुरु-लघु पद के अंत।

चार चरण दो पद का सरसी, गायें सुर-नर-संत।।2।।



मुख-शशि उज्ज्वल औ' धनु-भौहें, तिरछे नैन-कटार।

हाय! डसें लट-अहि केशों के, हिय पर बारम्बार।।3।।



अरुण अधर-कोमल किसलय नव, दृग-मद पूर्ण तड़ाग।

यौवन-पुष्प खिला ज्यों लेकर घट भर… Continue

Added by रामबली गुप्ता on November 13, 2017 at 8:07am — 14 Comments

ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल

2122 2122 2122 212



गलतियाँ किससे नही होतीं भला संसार में

है मगर शुभ आचरण निज भूल के स्वीकार में



शून्य में सामान्यतः तो कुछ नही का बोध पर

है यहाँ क्या शेष छूटा शून्य के विस्तार में



आधुनिकता के दुशासन ने किया ऐसे हरण

द्रौपदी निर्वस्त्र है खुद कलियुगी अवतार में



सूर्य को स्वीकार गर होता न जलना साथियों

तो भला क्या वो कभी करता प्रभा संसार में



व्यर्थ ही व्याख्यान आदर्शों पे देने से भला

अनुसरण कुछ कीजिये इनका निजी… Continue

Added by रामबली गुप्ता on September 25, 2017 at 5:00am — 49 Comments

जयति जयति जय...-रामबली गुप्ता

गीत

आधार छंद-आल्हा/वीर छंद

जयति जयति जय मात भारती, शत-शत तुझको करुँ प्रणाम।

जननी जन्मभूमि वंदन है, प्रथम तुम्हारी सेवा काम।

जयति जयति जय........

जन्म लिया तेरी माटी में, खेला गोद तुम्हारी मात!

लोट तुम्हारे रज में तन को, मिला वीर्य-बल का सौगात।।

तुझसे उपजा अन्न ग्रहण कर, पीकर तेरे तन का नीर।

ऋणी हुआ शोणित का कण-कण, ऋणी हुआ यह सकल शरीर।।

अब तो यह अभिलाषा कर दूँ, अर्पित सब कुछ तेरे नाम।

जननी जन्मभूमि वन्दन है प्रथम…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on August 27, 2017 at 10:50pm — 26 Comments

दोहे-गुरु पूर्णिमा विशेष-रामबली गुप्ता

जग में बिन गुरु ज्ञान के, नर-पशु एक समान।

गुरु के शुचि सानिध्य में, बनता मूढ़ सुजान।।1।।



ज्ञान जगत का मूल है, संस्कृति का आधार।

किन्तु बिना गुरु ज्ञान कब, पाये यह संसार?2।।



निज गुरु पद में बैठ नित, खुद को लो यदि जान।

कलुष-भेद हिय-तम मिटे, हो शुचि तन-मन-प्रान।।3।।



ज्ञान ज्योति गुरु दीप सम, और तिमिर-अज्ञान।

अर्पित कर श्रम-स्नेह-घृत, बनते शिष्य सुजान।।4।।



नित गुरु-पद वंदन करें, इसमें चारो धाम।

गुरु को श्री-हरि-पार्थ भी, नत हो करें… Continue

Added by रामबली गुप्ता on July 9, 2017 at 10:30pm — 14 Comments

ग़ज़ल-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222



जो लड़कर आँधियों से जीत का इनआम लेता है

ज़माना फ़ख्र से उसका युगों तक नाम लेता है



सहारा जो यहाँ हर डूबते इन्सां का बन जाये

खुदा भी हाथ उसका मुश्किलों में थाम लेता है



दुआओं की कमी होती नहीं उसको कभी यारों

बज़ुर्गों का यहाँ जो हाल सुबहो-शाम लेता है



पता सबको है मुश्किल की घड़ी होती बहुत छोटी

कहाँ हर आदमी हिम्मत से लेकिन काम लेता है



खुदा को भी शिकायत होगी शायद अपने बन्दे से

कि वो है खुदग़रज़ दुख… Continue

Added by रामबली गुप्ता on July 4, 2017 at 11:30am — 21 Comments

गीत-हे हरि हर लो हिय के दुख सब-रामबली गुप्ता

हे हरि हर लो हिय के दुख सब।



सकल चराचर जग के स्वामी! कृपा करो कर शीश रखो अब।

हे हरि हर लो......



चतुर्वेद-वेदांग-पुराणों से भी ऊपर ज्ञान तुम्हारा।

वन-वन गिरि-गिरि भटका नर पर तुमको जान न पाया हारा।

भेद मिटाकर सभी प्यार का जिसने दिल में दीप जलाया।

नही किसी मंदिर-मस्जिद में उसने तुमको खुद में पाया।



सत्य न यह स्वीकारे जग में ऐसा कौन मनुज या मज़हब?

हे हरि हर लो.......



सूर्य-चंद्र की ज्योति तुम्हीं गति ग्रह-उपग्रह ने तुमसे पाई।

जग… Continue

Added by रामबली गुप्ता on June 11, 2017 at 7:45pm — 8 Comments

दीपक सा उजियार करोगे-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल

22 22 22 22



जब जलना स्वीकार करोगे

दीपक-सा उजियार करोगे



स्नेह-समर्पण शस्त्र अगर हों

हर दिल पर अधिकार करोगे



दुर्ग दिलों के जीत सके तो

जय सारा संसार करोगे



दिल में दर्प बढ़ा दानव-सा

उसका कब संहार करोगे



राष्ट्र-हितों पर मिट न सके तो

जीवन यह बेकार करोगे



दिल पर रखकर हाथ बता दो

"हमसे कितना प्यार करोगे"



दृष्टि रखोगे अर्जुन-सी तो

लक्ष्य पे ही हर वार करोगे



उर-अँधियार मिटा पाये… Continue

Added by रामबली गुप्ता on February 26, 2017 at 7:00am — 18 Comments

दोहे-रामबली गुप्ता

कृपा करो जगदीश हे! करो जगत कल्याण।

प्रेम दया सद्भाव दो, हो शुभ तन-मन-प्राण।।1।।



हो कण-कण में व्याप्त तुम, हे! जग पालनहार।

पद-पावन में तीर्थ सब, है सुरसरि की धार।।2।।



सदा तुम्हारी भक्ति में, रहूँ समर्पित नाथ!

ऐसा दो वरदान अब, रखो शीश पर हाथ।।3।।



प्रभो! सकल ब्रह्माण्ड के, एक तुम्ही हो नाथ।

सदा कामना है यही, रहे कृपा-कर माथ।।4।।



सूर्य-चंद्र-तारक सभी, जीव-जन्तु इत्यादि।

सबका तुम से अंत हरि! है तुमसे ही… Continue

Added by रामबली गुप्ता on February 5, 2017 at 6:00pm — 23 Comments

सवैये-दीपावली विशेष-रामबली गुप्ता

मत्तगयंद सवैया (सूत्र=211×7+22; भगण×7+गागा)



ज्योति जले घर-द्वार सजे सब, हैं उतरे वसुधा पर तारे।

आज बनी रजनी वधु सुंदर ज्यों पहने मणि के पट प्यारे।।

थाल लिए जुगनू सम दीपक, नाच रहे खुश हो जन सारे।

आश-दिये हरते उर से तम, भाग रहे डर के अँधियारे।।1।।



किरीट सवैया (सूत्र=211×8; भगण×8)



कोटिक दीप जले वसुधा पर, है कितना यह दृश्य सुहावन।

झूम रहे नव आश भरे उर, पूज रहे मिल आज सभी जन।।

ज्योति जलाकर स्वागत में तव राह निहार रहे सबके मन।

हे! कमला…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on October 29, 2016 at 5:30pm — 9 Comments

Monthly Archives

2018

2017

2016

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी प्रदत्त चित्र पर सुंदर अभिव्यक्ति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें एवं आयोजन का…"
3 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्र देख कर कह रहे, बहुत गहन ही बात  बेटा-बेटी एक होंं, तब बदले हालात !! .. बधाई इन दोहों पर…"
4 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायन भाईजी अच्छी शुरुवात करते हुए अचानक  कश्मीर के मान चित्र तक पहुंच गए, लेकिन…"
13 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"अच्छे दोहे हो गये, सुगढ़ हुआहै कथ्य  चित्र के अनुरूप ही, शब्द-शब्द है तथ्य .. .. बधाई, बहुत…"
37 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय  भाई  छोटेलालजी दोहावली की प्रशंसा के लिए हृदय से बधाई, आभार।"
49 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहे की तारीफ की, सौरभजी आभार। धन्यवाद देता हृदय, एक नहीं सौ बार॥ सादर  "
51 minutes ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा (२८ )
"जयहिंद "
59 minutes ago
narendrasinh chauhan commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा (२८ )
"जय हिन्द "
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"सही-भली दोहावली, रचते हैं अखिलेश निखरे-निखरे चित्र को शब्दों का गणवेश शुभ-शुभ "
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहा छंद (1) खटिया पर बच्चा खड़ा, पिए डोल में शीर धीरे धीरे हँस रही, माता उसके तीर (2) मुझको लगता…"
4 hours ago
Jitendra sharma posted a blog post

लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल

दिन-भर जो बात करते रहे आस्मान सेसूरज ढला तो लौट के आये उड़ान सेथा वक़्त का ख़याल या हारे थकान सेनिकले…See More
6 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') added a discussion to the group English Literature
Thumbnail

Arms and ammunition (Poem)

 Guns and swordsSymbol of braveryUsed by soldiersFor country's victoryGuns and swordsSymbol of…See More
6 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service