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ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल
2122 2122 2122 212

गलतियाँ किससे नही होतीं भला संसार में
है मगर शुभ आचरण निज भूल के स्वीकार में

शून्य में सामान्यतः तो कुछ नही का बोध पर
है यहाँ क्या शेष छूटा शून्य के विस्तार में

आधुनिकता के दुशासन ने किया ऐसे हरण
द्रौपदी निर्वस्त्र है खुद कलियुगी अवतार में

सूर्य को स्वीकार गर होता न जलना साथियों
तो भला क्या वो कभी करता प्रभा संसार में

व्यर्थ ही व्याख्यान आदर्शों पे देने से भला
अनुसरण कुछ कीजिये इनका निजी व्यवहार में

लालसा दिल में यही मिल जाय वो मीठा शहद
जो मिला था माँ की लोरी थपकियों और प्यार में

प्रेम पूजा प्रेम ईश्वर प्रेम के ही पंथ सब
प्रेम ही कुरआन गीता बाइबिल के सार में

श्रम दिलों को जीतने में चाहिए उतना बली
चाहिए जितना हमें निज अहं के संहार में

रचना-रामबली गुप्ता
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Ajay Tiwari on Wednesday

आदरणीय रामबली गुप्ता जी,

अच्छी ग़ज़ल हुई है. शुभकामनाएं.

सादर 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on Monday

बहुत खूब अशआर 

Comment by Balram Dhakar on October 11, 2017 at 6:11pm
बहुत शानदार ग़ज़ल आदरणीय रामबली सा०
बहुत बहुत बधाई।
Comment by surender insan on October 8, 2017 at 8:37am
आदरणीय राम बलि गुप्ता जी आदाब। ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है बधाई स्वीकार करे जी।।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 7, 2017 at 10:18pm

बहर में सधी पंक्तियों से आपकी प्रस्तुति अवश्य पठनीय श्रेणी की हो गयी है, भाई रामबली जी. आपके प्रयासों से मन प्रसन्न है.

गीतिका की विधा पर आपका हुआ प्रयास श्लाघनीय है.

शुभेच्छाएँ 

Comment by Samar kabeer on October 1, 2017 at 10:37pm
जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,इधर उधर की बातों पर ध्यान न दें और अभ्यास करते रहें,आपकी ग़ज़ल बहुत उम्दा है,पुनःबधाई ।
Comment by रामबली गुप्ता on September 30, 2017 at 11:43am
आदरणीय भाई नीरज जी यदि आपको मेरी रचना ग़ज़ल के हिसाब से सटीक नही लग रही तो आप इसे कोई कविता मान लीजिए। व्यर्थ ही एक ही बात को पीटने से भी क्या लाभ? मेरे मन में ऐसा कोई आग्रह नहीं कि मैं अपनी रचना को ग़ज़ल ही कहूँ। आप इसे कविता ही मानें और बताएं कि कविता के हिसाब से आपको कैसी लगी?
Comment by रामबली गुप्ता on September 30, 2017 at 10:48am
आदरणीय भाई गजेंद्र जी आपकी विस्तृत प्रतिक्रिया पाकर मन आह्लादित है। बहुत बहुत आभार आपको
Comment by रामबली गुप्ता on September 30, 2017 at 10:44am
हार्दिक आभार आदरणीय भाई नीलेश जी
Comment by रामबली गुप्ता on September 30, 2017 at 10:42am
हार्दिक आभार आदरणीय गुरुदेव

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