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Balram Dhakar
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Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"सुख़न नवाज़ी का बहुत बहुत शुक्रिया, आदरणीया कल्पना जी। आपको ग़ज़ल पसंद आई, मेरा लिखना सार्थक हुआ।सादर।"
Dec 30, 2017
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"धन्यवाद, आदरणीय महेंद्र जी। सादर।"
Dec 30, 2017
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण जी। सादर।"
Dec 30, 2017
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आदरणीय सुरेन्द्र जी,ग़ज़ल में शिरक़त, सुखन नवाज़ी और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया।सादर।"
Dec 30, 2017
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"शरीफ़ों की हवेली में ये आहें गूँजती तो हैं,ज़रा धीरे भरो सिसकी, ये बाहर तक पहुँचती है। किसी से भी पता पूछा नहीं उसने कभी लेकिन,नदी अपनी मशक्कत से समन्दर  तक पहुँचती है। बहुत खूब| हार्दिक बधाई आदरणीय बलराम जी |"
Dec 27, 2017
Mahendra Kumar commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"धाकड़ ग़ज़ल है आ. बलराम जी. आख़िरी शेर विशेष रूप से पसन्द आया. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Dec 27, 2017
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"बेहतरीन गजल , हार्दिक बधाई बंधु ।"
Dec 26, 2017
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आद0 बलराम जी सादर अभिवादन। बहुत खूब। दिल के छूने वाले अशआर मिले पढ़ने को। बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर। सादर"
Dec 26, 2017
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"धन्यवाद, आदरणीय अजय जी। सादर।"
Dec 25, 2017
Ajay Kumar Sharma commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"बहुत सुन्दर गजल"
Dec 25, 2017
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"सुख़न नवाज़ी का बहुत बहुत शुक्रिया, मोहतरम जनाब नादिर ख़ान साहब। आपको ग़ज़ल पसंद आई, मेरा लिखना सार्थक हुआ।सादर"
Dec 25, 2017
नादिर ख़ान commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"किसी से भी पता पूछा नहीं उसने कभी लेकिन,नदी अपनी मशक्कत से समन्दर  तक पहुँचती है। जुआ उसने नहीं खेला, कभी चाही नहीं सत्ता,बताओ द्रौपदी क्यों कर के चौसर तक पहुँचती है। तुम्हारे पैतरेबाजी से दिल्ली दूर रहती है,हमारी चीख बस नक्सल से बस्तर…"
Dec 25, 2017
Balram Dhakar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ख़त हमारे अगर जलाता है ; ग़ज़ल नूर की
"आदरणीय नीलेश जी, बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है। बधाई। सादर।"
Dec 25, 2017
Balram Dhakar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-हँसता चेहरा यूँ तो रुख्सत उसे कर आएगा
"आदरणीय नीलेश जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई। सादर।"
Dec 25, 2017
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आदरणीय अजय जी,ग़ज़ल में शिरक़त, सुखन नवाज़ी और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया।आपने बहुत बारीक़ी से कहन को समझा, आपके दोनों की सुझाव शिरोधार्य हैं।सादर।"
Dec 25, 2017
Ajay Tiwari commented on Balram Dhakar's blog post चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आदरणीय बलराम जी,  छठे शेर में 'क्यों कर के' थोड़ा खटकता है 'मगर चौसर पे फिर भी द्रौपदी क्यों कर पहुंचती है' या 'बताओ द्रौपदी क्यों कर जुआघर तक पहुँचती है' जैसा कुछ किया जा सकता है.  'शरीफ़ों की हवेली में…"
Dec 25, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, Madhya Pradesh
Native Place
Bareli, Raisen (MP)
Profession
Astr. Commissioner, GST

Balram Dhakar's Blog

चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़

1222, 1222, 1222, 1222

चलो ये मान लेते हैं कि दफ़्तर तक पहुँचती है।

मगर क्या वाकई ये डाक, अफ़सर तक पहुँचती है।

नज़र मेरी सितारों के बराबर तक पहुँचती है।

दिया हूँ, रोशनी मेरी हर इक घर तक पहुँचती है।

वहां कैसा नज़ारा है, चलो देखें, ज़रा सोचें,

नज़र सैयाद की चींटी के अब पर तक पहुँचती है।

शरीफ़ों की हवेली में ये आहें गूँजती तो हैं,

ज़रा धीरे भरो सिसकी, ये बाहर तक पहुँचती है।

किसी से भी पता पूछा नहीं उसने कभी…

Continue

Posted on December 25, 2017 at 11:07am — 18 Comments

अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़

१२२२,१२२२,१२२२,१२२२



दिलों पर कुछ ग़मों की हुक़्मरानी अब भी क़ाइम है,

कि निचली बस्तियों में सरगरानी अब क़ाइम है।



हक़ीक़त है कि उनके वास्ते सब कुछ किया हमने,

मगर औरत के लव पर बेज़ुबानी अब भी क़ाइम है।



मैं शादी तो करुँगी, मह्र, वालिद आप रख लेना,

कि अपनी बात पर बिटिया सयानी अब भी क़ाइम है।



यक़ीनन छोड़ दी हम सबने अब शर्मिन्दगी लेकिन,

हया का आँख में थोड़ा सा पानी अब भी क़ाइम है।



धड़कना दिल ने कुछ कम कर दिया, इस दौर में लेकिन,

लहू के… Continue

Posted on November 6, 2017 at 6:32pm — 26 Comments

ग़ज़ल: बलराम धाकड़

1222-1222-1222-1222

जनम होगा तो क्या होगा मरण होगा तो क्या होगा

तिमिर से जब भरा अंतःकरण होगा तो क्या होगा



हरिक घर से यूँ सीता का हरण होगा तो क्या होगा

फिर उसपे राम का वो आचरण होगा तो क्या होगा



मेरे अहले वतन सोचो जो रण होगा तो क्या होगा

महामारी का फिर जब संक्रमण होगा तो क्या होगा



वो ही ख़ैरात बांटेंगे वो ही एहसां जताएंगे

विमानों से निज़ामों का भ्रमण होगा तो क्या होगा



जमा साहस है सदियों से हमारी देह में अबतक

नसों…

Continue

Posted on October 11, 2017 at 6:00pm — 16 Comments

अंधी जनता, राजा काना बढ़िया है ...गज़ल

22-22-22-22-22-2



नये दौर का नया ज़माना, बढ़िया है

अंधी जनता, राजा काना, बढ़िया है



अब तो है यह उन्नति की नव परिभाषा,

जंगल काटो, पेड़ लगाना, बढ़िया है



अपना राग अलापो अपनी सत्ता है,

अपने मुंह मिट्ठू बन जाना, बढ़िया है



नई सियासत में तबदीली आई है,

आग लगा कर आग बुझाना, बढ़िया है



हत्या करना बीते युग की बात हुई,

अब दुश्मन की साख मिटाना, बढ़िया है



अगर कोख में बिटिया अब तक जिंदा है,

खूब पढ़ाना, ख़ूब बढ़ाना, बढ़िया… Continue

Posted on August 18, 2017 at 8:30pm — 18 Comments

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