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Balram Dhakar
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Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ ( मसौदा भी ज़रूरी है...)
"जनाब तस्दीक़ साहब, सुख़न नवाज़ी का बहुत बहुत शुक्रिया। सादर।"
Feb 25
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ ( मसौदा भी ज़रूरी है...)
"आदरणीय समर सर, ग़ज़ल में आपकी शिरक़त और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया। आपकी समझाइश और सुझाव हमेशा ही बेशकीमती और इसीलिये शिरोधार्य होते हैं। इस्लाह के मुताबिक सुधार कर लूँगा, सर।सादर।"
Feb 25
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ ( मसौदा भी ज़रूरी है...)
"बहुत बहुत धन्यवाद, आ० राम अवध जी। सादर।"
Feb 25
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब तस्दीक़ साहब, बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है। दाद के साथ मुबारक़बाद पेश करता हूँ। सादर।"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब आशीष जी, बेहतरीन ग़ज़ल कही है आपने। मुबारक़बाद क़ुबूल फ़रमाएं। सादर।"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आ० सुरेन्द्र जी, बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है। बधाई। सादर।"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आ० सार्थक जी, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है। बधाई।सादर।"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आ० राम अवध जी, बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार करें।सादर।"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आ० लक्ष्मण जी, बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है। बधाई। सादर।"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय गंगाधर जी, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है। बधाई।सादर।"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब नादिर सा०, बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है। दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल फ़रमाएं। सादर।"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"स्वागत योग्य प्रयास है आ० उस्मानी जी। बधाई स्वीकार करें। सादर।"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आ० दण्डपाणि जी, मुशायरे में शिरक़त केलिए बहुत बहुत बधाई। ग़ज़ल के अच्छे प्रयास की बधाई। सादर।"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, आ० मुकेश जी। बधाई !"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, आ० हर्ष जी।  बधाई !"
Feb 24
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"बहुत बहुत आभार आपका, आदरणीया राजेश कुमारी जी। सादर।"
Feb 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, Madhya Pradesh
Native Place
Bareli, Raisen (MP)
Profession
Astr. Commissioner, GST

Balram Dhakar's Blog

ग़ज़ल- बलराम धाकड़ ( मसौदा भी ज़रूरी है...)

1222,1222,1222,1222

ज़रूरी है अगर उपवास, रोज़ा भी ज़रूरी है।

रवाज़ों का ज़रा होना अलहदा भी ज़रूरी है।।

हमें ये फ़ख़्र होता है कि हम हिंदौस्तानी हैं,

हमारे बीच हमदर्दी का सौदा भी ज़रूरी है।

मनाने रूठ जाने के लिखे हों क़ाइदे जिसमें,

मुहब्बत के लिए ऐसा मसौदा भी ज़रूरी है।

किसानों के लिए बिजली ओ पानी ही नहीं काफ़ी,

उन्हें ख़सरा,…

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Posted on February 21, 2018 at 12:23pm — 12 Comments

नई रुत का अभी तूफ़ान बाक़ी है... ग़ज़ल- बलराम धाकड़

१२२२,१२२२,१२२२

नई रुत का अभी तूफ़ान बाकी है।

निज़ामत का नया उन्वान बाकी है।

निवाले छीनकर ख़ुश हो मेरे आका,

अभी अपना ये दस्तरख़ान बाकी है।

अभी टूटा नहीं है सब्र का पुल भी,

ज़रा सा और इत्मीनान बाकी है।

अभी थोड़ी सी घाटी ही तो खोई है,

अभी तो सारा हिन्दुस्तान बाकी है।

हथेली पर तुम्हारी रख तो दीं आँखें,

हमारे पास सुरमेदान बाकी है।

कयामत के बचे होंगे महीने कुछ,

अभी इंसान में इंसान बाकी…

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Posted on January 23, 2018 at 6:18pm — 14 Comments

चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़

1222, 1222, 1222, 1222

चलो ये मान लेते हैं कि दफ़्तर तक पहुँचती है।

मगर क्या वाकई ये डाक, अफ़सर तक पहुँचती है।

नज़र मेरी सितारों के बराबर तक पहुँचती है।

दिया हूँ, रोशनी मेरी हर इक घर तक पहुँचती है।

वहां कैसा नज़ारा है, चलो देखें, ज़रा सोचें,

नज़र सैयाद की चींटी के अब पर तक पहुँचती है।

शरीफ़ों की हवेली में ये आहें गूँजती तो हैं,

ज़रा धीरे भरो सिसकी, ये बाहर तक पहुँचती है।

किसी से भी पता पूछा नहीं उसने कभी…

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Posted on December 25, 2017 at 11:07am — 18 Comments

अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़

१२२२,१२२२,१२२२,१२२२



दिलों पर कुछ ग़मों की हुक़्मरानी अब भी क़ाइम है,

कि निचली बस्तियों में सरगरानी अब क़ाइम है।



हक़ीक़त है कि उनके वास्ते सब कुछ किया हमने,

मगर औरत के लव पर बेज़ुबानी अब भी क़ाइम है।



मैं शादी तो करुँगी, मह्र, वालिद आप रख लेना,

कि अपनी बात पर बिटिया सयानी अब भी क़ाइम है।



यक़ीनन छोड़ दी हम सबने अब शर्मिन्दगी लेकिन,

हया का आँख में थोड़ा सा पानी अब भी क़ाइम है।



धड़कना दिल ने कुछ कम कर दिया, इस दौर में लेकिन,

लहू के… Continue

Posted on November 6, 2017 at 6:32pm — 26 Comments

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