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Balram Dhakar
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Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"आदरणीया कल्पना जी, ग़ज़ल में शिरक़त का शुक्रिया। बहुत बहुत धन्यवाद।"
Saturday
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"धन्यवाद, आदरणीय धामी जी।"
Saturday
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"जनाब आरिफ़ साहब, हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत धन्यवाद।"
Friday
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"आदरणीय महेंद्र जी, ग़ज़ल में शिरक़त का बहुत बहुत शुक्रिया। आपके सुझावों के मुताविक सुधार शीघ्र ही करूंगा। बहुत बहुत धन्यवाद। सादर।"
Friday
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"आदरणीय समर सर, ग़ज़ल में शिरक़त का बहुत बहुत शुक्रिया। सुधार करने का प्रयास कर रहा हूंँ सर। सादर।"
Friday
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"जनाब तस्दीक साहब, हौसला अफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।"
Friday
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"आदरणीय सलीम जी, बहुत बहुत शुक्रिया आपका। सादर।"
Friday
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"आदरणीय सुरेन्द्र जी, हौसला अफ़जाई के लिए हार्दिक आभार। धन्यवाद।"
Friday
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"आदरणीय नीलेश जी, ग़ज़ल में शिरक़त का बहुत बहुत शुक्रिया। ग़ज़ल के उक्त मिसरों को बहर में लाने का प्रयास करूंगा। संभव हो तो कृपया आप भी सुधार हेतु सुझाव देकर अनुगृहीत करें। सादर।"
Friday
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"मैं तुझे प्यार करूँ और जता भी न सकूँ तेरी यादों के निशां दिल से मिटा भी न सकूँ आपने इसतरह ख़ामोश निग़ाहों से किया आपको दिल के इरादे मैं बता भी न सकूँ तेरे निज़ाम की मनमानियों से वाकिफ़ हूँ लाखों मुद्दे हैं, जो महफ़िल में उठा भी न सकूँ कितने बेनाम…"
Friday
Mohammed Arif commented on Balram Dhakar's blog post अंधी जनता, राजा काना बढ़िया है ...गज़ल
"आदरणीय बलराम धाकड़ जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल , अच्छे अश'आर । गुणीजन अपनी राय दे चुके हैं । बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 19
MUKESH SRIVASTAVA commented on Balram Dhakar's blog post अंधी जनता, राजा काना बढ़िया है ...गज़ल
"BEHATREEN TANZ BANDHUWAR - BADHAEE KE PATRA HO AP"
Sep 18
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-83
"आवाज़ वक़्त की है ये उन्माद तो नहीं तसदीक़ आख़िरी है ये उन्माद तो नहीं भौंरे के साथ फूल का रिश्ता नया नया परवाज़-ए-आशिक़ी है ये उन्माद तो नहीं बेज़ान से बुतों में कोई जान आ गई सचमुच ही बन्दगी है ये उन्माद तो नहीं लाखों प्रयास हो रहे बेटी के नाम…"
Sep 9
PHOOL SINGH commented on Balram Dhakar's blog post अंधी जनता, राजा काना बढ़िया है ...गज़ल
"बेहतरीन रचना"
Aug 31
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीय समर कबीर साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत का बहुत बहुत शुक्रिया। सानी मिसरा के सुधार के लिए सादर धन्यवाद ज्ञापित है। ऐसे ही आपकी निगेहबानी बनी रहे। सादर।"
Aug 26
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी, सादर धन्यवाद आपका।"
Aug 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, Madhya Pradesh
Native Place
Bareli, Raisen (MP)
Profession
Astr. Commissioner, GST

Balram Dhakar's Blog

अंधी जनता, राजा काना बढ़िया है ...गज़ल

22-22-22-22-22-2



नये दौर का नया ज़माना, बढ़िया है

अंधी जनता, राजा काना, बढ़िया है



अब तो है यह उन्नति की नव परिभाषा,

जंगल काटो, पेड़ लगाना, बढ़िया है



अपना राग अलापो अपनी सत्ता है,

अपने मुंह मिट्ठू बन जाना, बढ़िया है



नई सियासत में तबदीली आई है,

आग लगा कर आग बुझाना, बढ़िया है



हत्या करना बीते युग की बात हुई,

अब दुश्मन की साख मिटाना, बढ़िया है



अगर कोख में बिटिया अब तक जिंदा है,

खूब पढ़ाना, ख़ूब बढ़ाना, बढ़िया… Continue

Posted on August 18, 2017 at 8:30pm — 15 Comments

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