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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी सादर नमस्कार, हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया"
Sep 23
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आदरणीय ब्रजेश कुमार ब्रज जी सादर नमस्कार, हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया"
Sep 23
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आदरणीय विजय निकोरे जी सादर नमस्कार, हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया"
Sep 23
बसंत कुमार शर्मा commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post देखा इतना दर्द दिलों का इस बेदर्द ज़माने में(६४)
"आदरणीय गिरधारी लाल जी को सादर नमस्कार, वाह आनन्द आ गया लाजबाब ग़ज़ल हुई।"
Sep 23
बसंत कुमार शर्मा commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post देखा इतना दर्द दिलों का इस बेदर्द ज़माने में(६४)
"वाह लाजबाब ग़ज़ल हुई है"
Sep 23
vijay nikore commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"अच्छी गज़ल के लिए बधाई, मित्र बसंत जी।"
Sep 23
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"वाह वाह आदरणीय शर्मा जी खूब ग़ज़ल कही..."
Sep 21
surender insan commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आदरणीय बसन्त जी अच्छी ग़ज़ल कही आपने । बधाई स्वीकार करें जी।"
Sep 20
बसंत कुमार शर्मा commented on Manan Kumar singh's blog post गजल
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी सादर नमस्कार बधाई हो आपको बढ़िया ग़ज़ल की"
Sep 19
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर जी सादर नमस्कार, आपकी ग़ज़ल पर उपस्थिति से मन प्रसन्न हुआ। सादर नमन आपको इसी तरह हौसलाफजाई करते रहें"
Sep 19
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी सादर नमस्कार आपकी हौसलाफजाई को सादर नमन"
Sep 19
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 19
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल

2122 1122 1122 22 नींद आँखों से मेरी कोई चुराने वाला आ गया फिर से नए ख्वाब दिखाने वाला  उन दुकानों पे मिलेंगे तुम्हें झंडे-डंडे  पास अपने तो है ये काम किराने वाला  जान लेने के लिए लोग खड़े लाइन से कोई दिखता ही नहीं जान लुटाने वाला आज रस्ते हैं बहुत, साथ मुसाफिर अनगिनचाह कर भी न मिला साथ निभाने वाला  जाम हाथों से छलक जाते हैं अक्सर देखा बात तब है मिले आँखों से पिलाने वाला "मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Sep 14
बसंत कुमार शर्मा commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"आदरणीय मनोज अहसास जी सादर नमस्कार, बधाई हो आपको खूबसूरत ग़ज़ल के क लिए "
Sep 13
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए
"आदरणीय समर कबीर जी , आपके स्नेह को सादर नमन , बहुत बहुत आभार आपका हौसलाअफजाई के लिए "
Sep 13

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

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नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

 

नींद आँखों से मेरी कोई चुराने वाला 

आ गया फिर से नए ख्वाब दिखाने वाला 

 

उन दुकानों पे मिलेंगे तुम्हें झंडे-डंडे  

पास अपने तो है ये काम किराने वाला 

 

जान लेने के लिए लोग खड़े लाइन…

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Posted on September 13, 2019 at 8:44pm — 10 Comments

ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए

आप आये अब गले हमको लगाने के लिए 

जब न आँखों में बचे आँसू बहाने के लिए 

 

छाँव जब से कम हुई पीपल अकेला हो गया  

अब न जाता पास कोई सिर छुपाने के लिए

 

तितलियाँ उड़ती रहीं करते रहे गुंजन भ्रमर

पुष्प में मकरंद जब तक था लुभाने…

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Posted on July 19, 2019 at 9:26am — 4 Comments

हो गए - ग़ज़ल

मापनी २१२*4 

चाहते हम नहीं थे मगर हो गए

प्यार में जून की दोपहर हो गए

 

हर कहानी खुशी की भुला दी गई

दर्द के सारे किस्से अमर हो गए

 

खो गए आपके प्यार में इस कदर

सारी दुनिया से हम बेखबर हो…

Continue

Posted on June 17, 2019 at 11:56am — 6 Comments

आदमी - ग़ज़ल

है कहाँ फूल जैसा खिला आदमी

हो गया है ग़मों का किला आदमी

 

मंदिरों, मस्जिदों में रहे ढूँढते  

जब मिला आदमी में मिला आदमी

 

गाँठ दिल में लगी तो खुली ही नहीं

भूल पाया न शिकवा-गिला आदमी

 …

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Posted on May 24, 2019 at 10:07am — 10 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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