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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - आजकल
"खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी "
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post विरह अग्नि में दह-दह कर के
"आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आपकी हौसलाफजाई का शुक्रिया दिल से "
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post विरह अग्नि में दह-दह कर के
"आदरणीय शर्मा जी बहुत ही खूबसूरत गीत हुआ..सादर"
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"बहुत खूब अशआर "
Oct 16, 2017
नन्दकिशोर दुबे commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post वादों की बरसात न कर
"भाई bsntkumarjee बहु सुन्दर रचना । आनन्द आ गया ।"
Sep 24, 2017
बसंत कुमार शर्मा commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र -फेलुन) यह ग़ज़ल दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल है ।इसे Golden Book Of World Records2017 में शामिल किया गया है ।
"वाह लाजबाब "
Sep 24, 2017
बसंत कुमार शर्मा commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post सम्भावना के द्वार पर
"बेहतरीन भाव , वाह , आनन्द आ गया आदरणीय  सम्भावना के द्वार पर दस्तक हुई हैदेखकर मुझको हुई वह छुईमुई है .....अप्रतिम  दो पदों में तुकांत कुछ गड़बड़ा रहा है."
Sep 24, 2017
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"आदरणीय नन्दकिशोर दुबे जी आपकी उर्जावान प्रतिक्रिया का ह्रदय से आभार"
Sep 24, 2017
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

और सुना, क्या हाल-चाल है

एक नवगीत दूर बैठ कर पूछें दद्दा,और सुना, क्या हाल-चाल है.कैसे कह दूं, ठीक-ठाक सब,मस्त हमारी चाल-ढाल है   तोड़ रहे हैं सभी आजकल,अपना नाता गाँधी से.सपनों की कंदीलें उनकी,बचा रहा हूँ आँधी से. बाँधे मुकुट झूठ बैठा है,सच की गलती नहीं दाल  है आशाओं के स्वर कम्पित हैं,फैली है चहुँ ओर निराशा.शकुनी बैठा फैंक रहा है,हँस-हँस रोज नया पाशा. पाँचों पाण्डव चुप चुप बैठे,फैला भ्रम का मकड़जाल है. उफन रहीं है यहाँ नालियाँ,नालों का भी हाल बुरा है.मंदिर मस्जिद के बाजू में,गली गली उपलब्ध सुरा है नए नए रोगों के दम…See More
Sep 23, 2017
नन्दकिशोर दुबे commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"बहुत ही सुन्दर ! द्विपदी का प्रत्येक भाव और अभिव्यक्ति अंदर तक प्रभावित कर गयी ।"
Sep 23, 2017
बसंत कुमार शर्मा commented on rajesh kumari's blog post भले ही आईने धोये हुए हैं (फिल्बदीह ग़ज़ल 'राज')
"वाह लाजबाब अशआर"
Sep 22, 2017
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"आदरणीय Niraj Kumar जी आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया, मेहनत सफल हुई , आपको रचना पसंद आई."
Sep 20, 2017
Niraj Kumar commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"आदरणीय बसंत जी, मतले का पहला मिसरा क्लासिकल उर्दू शायरों की याद दिलाता है. आपने बाकी ग़ज़ल में भी इस अंदाज़ को बरकरार रखते हुए हिंदी शब्दों का खूबसूरती से इस्तेमाल किया है. दाद के साथ मुबारकबाद. सादर  "
Sep 20, 2017
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"आभार आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आपका , सादर नमन "
Sep 19, 2017
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"क्या कहने आदरणीय..बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई..सादर"
Sep 19, 2017
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post वादों की बरसात न कर
"आ. भाई बसंत जी, हार्दिक बधाई ।"
Sep 19, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

बसंत कुमार शर्मा's Blog

विरह अग्नि में दह-दह कर के

गीत 

मात्र भार १६ १६ 

बहला रहा रोज इस दिल को,  

किस्से बचपन के कह कर के.

तेरी महकी महकी यादें,

मैंने रख लीं हैं तह कर के.

 

प्रथम दृष्टि का वह सम्मोहन,

भूल नहीं अब तक मैं पाया.…

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Posted on January 18, 2018 at 8:30pm — 2 Comments

और सुना, क्या हाल-चाल है

एक नवगीत 

दूर बैठ कर पूछें दद्दा,

और सुना, क्या हाल-चाल है.

कैसे कह दूं, ठीक-ठाक सब,

मस्त हमारी चाल-ढाल है  

 

तोड़ रहे हैं सभी आजकल,

अपना नाता गाँधी से.

सपनों की कंदीलें उनकी,

बचा रहा हूँ आँधी से.…

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Posted on September 22, 2017 at 5:02pm

ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

 

मापनी 1222 1222 1222 1222

इधर  जाता तो अच्छा था, उधर जाता तो अच्छा था.

रहा भ्रम में, कहीं पर यदि, ठहर जाता तो अच्छा था.

 

उभर आता तो अच्छा था, हृदय का घाव चेहरे पर,

हमारा  दर्द  भी हद से, गुजर जाता तो अच्छा था.

 …

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Posted on September 17, 2017 at 5:30pm — 17 Comments

वादों की बरसात न कर

मापनी  २२ २२ २२ २ 

इतनी ज्यादा बात न कर

वादों की बरसात न कर



टूट न  जाए नाजुक दिल,

उससे भीतरघात  न कर



ख्यात न हो, कुछ बात नहीं,…

Continue

Posted on September 15, 2017 at 8:30pm — 18 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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