For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
Share

बसंत कुमार शर्मा's Friends

  • santosh khirwadkar
  • रोहित डोबरियाल "मल्हार"
  • Prakash Chandra Baranwal
  • Samar kabeer
  • C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"

बसंत कुमार शर्मा's Groups

 

बसंत कुमार शर्मा's Page

Latest Activity

Anamika singh Ana commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आदमी - ग़ज़ल
"वाह ! उम्दा ग़ज़ल हेतु  सादर बधाई  ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आदमी - ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
19 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

आदमी - ग़ज़ल

है कहाँ फूल जैसा खिला आदमीहो गया है ग़मों का किला आदमी मंदिरों, मस्जिदों में रहे ढूँढते  जब मिला आदमी में मिला आदमी गाँठ दिल में लगी तो खुली ही नहींभूल पाया न शिकवा-गिला आदमी भीड़ में जब गया भीड़ का हो गयाबन गया आजकल काफ़िला आदमी दौड़ कर मिल रहा था गले कल तलकतख्त पाकर कहाँ फिर हिला आदमी सुर्ख़ियों में रहा गुम गया एक दिनएक चलता हुआ सिलसिला आदमी"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सजती चुनाव में यहाँ जब तस्तरी बहुत - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्षण धामी साहब -सादर नमस्कार , काफियों में नवीनता और उनका सटीक निर्वाह, आनंद आ गया , बधाई हो आपको  "
Apr 30
बसंत कुमार शर्मा commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम जी को सादर नमस्कार, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई, बधाई आपको "
Apr 30
Hariom Shrivastava commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सभी कुछ बता दिया - ग़ज़ल
"वाह,वाहह,लाजवाब ग़ज़ल। सभी अशआर अतिसुंदर।"
Apr 28
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

सभी कुछ बता दिया - ग़ज़ल

मापनी २२१२ १२१ १२२ १२१२ हमने रखा न राज़ सभी कुछ बता दियाखिड़की से आज उसने भी परदा हटा दिया बंजर जमीन दिल की’ हुई अब हरी-भरीसींचा है उसने प्रेम से’ गुलशन बना दिया जज्बात मेरे’ दिल के’ मचलते चले गएलहरा के उसने हाथ दुपट्टा उड़ा दिया घिरने लगा अँधेरा’ जो’ दिल के मकान मेंहमने तुम्हारी याद का दीपक जला दिया यूँ तो बड़ा कठिन था मुहब्बत का रास्ताहमराह हो के आपने आसां बना दिया"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Apr 23
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सभी कुछ बता दिया - ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर जी सादर नमस्कार, जी कर देता हूँ ,आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Apr 23
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सभी कुछ बता दिया - ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'वंजर जमीन दिल की’ हुई अब हरी-भरी' इस मिसरे में 'वंजर' को "बंजर" कर लें ।"
Apr 23
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

सभी कुछ बता दिया - ग़ज़ल

मापनी २२१२ १२१ १२२ १२१२ हमने रखा न राज़ सभी कुछ बता दियाखिड़की से आज उसने भी परदा हटा दिया बंजर जमीन दिल की’ हुई अब हरी-भरीसींचा है उसने प्रेम से’ गुलशन बना दिया जज्बात मेरे’ दिल के’ मचलते चले गएलहरा के उसने हाथ दुपट्टा उड़ा दिया घिरने लगा अँधेरा’ जो’ दिल के मकान मेंहमने तुम्हारी याद का दीपक जला दिया यूँ तो बड़ा कठिन था मुहब्बत का रास्ताहमराह हो के आपने आसां बना दिया"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Apr 20
बसंत कुमार शर्मा commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल _(रहबरी उनकी मुझको हासिल है)
"आदरणीय तस्दीक अहमद साहिब नमस्कार, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई, बधाई आपको  "
Apr 19
बसंत कुमार शर्मा commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यार पंकज, चुन सुकूँ, रख बन्द आँखें, मौन धर-----ग़ज़ल
"आदरणीय पंकज जी सादर नमस्कार, वाह क्या कहने "
Apr 19
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पलकों पे ठहर जाता है - ग़ज़ल
"आदरणीय दिगंबर नासवा जी सादर नमस्कार, हौसलाफजाई के लिए दिली शुक्रिया "
Apr 19
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पलकों पे ठहर जाता है - ग़ज़ल
"आदरणीय बृजेश कुमार जी सादर नमस्कार, हौसलाफजाई के लिए दिली शुक्रिया "
Apr 19
दिगंबर नासवा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पलकों पे ठहर जाता है - ग़ज़ल
"बसंत जी बधाई स्वीकार करें लाजवाब ग़ज़ल के लिए ... "
Apr 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पलकों पे ठहर जाता है - ग़ज़ल
"बड़ी ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय शर्मा जी..बधाई"
Apr 19

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

बसंत कुमार शर्मा's Blog

आदमी - ग़ज़ल

है कहाँ फूल जैसा खिला आदमी

हो गया है ग़मों का किला आदमी

 

मंदिरों, मस्जिदों में रहे ढूँढते  

जब मिला आदमी में मिला आदमी

 

गाँठ दिल में लगी तो खुली ही नहीं

भूल पाया न शिकवा-गिला आदमी

 …

Continue

Posted on May 24, 2019 at 10:07am — 2 Comments

सभी कुछ बता दिया - ग़ज़ल

मापनी २२१२ १२१ १२२ १२१२ 

हमने रखा न राज़ सभी कुछ बता दिया

खिड़की से आज उसने भी परदा हटा दिया

 

बंजर जमीन दिल की’ हुई अब हरी-भरी

सींचा है उसने प्रेम से’ गुलशन बना दिया

 

जज्बात मेरे’ दिल के’ मचलते चले…

Continue

Posted on April 19, 2019 at 9:00pm — 3 Comments

पलकों पे ठहर जाता है - ग़ज़ल

मापनी - 2122, 1122,1122, 22(112)

 

दूर साहिल हो भले, पार उतर जाता है

इश्क में जब भी कोई हद से गुज़र जाता है

 

है तो मुश्किल यहाँ तकदीर बदलना लेकिन    

माँ दुआ दे तो मुकद्दर भी सँवर जाता है  

 

हमसफ़र साथ रहे कोई…

Continue

Posted on April 15, 2019 at 9:30am — 6 Comments

नवगीत- राजनीति के पंडे

लेकर आये

हैं जुगाड़ से,

रंग-बिरंगे झंडे

सजा रहे

हर जगह दुकानें,

राजनीति के पंडे

 

खंडित जन

विश्वास हो रहा…

Continue

Posted on April 13, 2019 at 10:07pm — 6 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा वलघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
""ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक 107 को सफ़ल बनाने के लिए सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का आभार व…"
1 hour ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"शुक्रिया अनीस जी"
1 hour ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"शुक्रिया अमित जी"
1 hour ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जनाब समर कबीर साहब उपयोगी जानकारी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ...."
1 hour ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"शुक्रिया मोहन जी"
1 hour ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आभार जनाब"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"भाई आलोचना कोई भी करे अगर वो दुरुस्त लगे तो हर सदस्य को या तो उस आलोचना से सहमत होना चाहिए या असहमत…"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'हर किसान…"
1 hour ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"शुक्रिया डॉ अमर नाथ झा  साहब "
1 hour ago
Dr Amar Nath Jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"वाह। बधाई जनाब नादिर खान साहेब। "
2 hours ago
Dr Amar Nath Jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जी सर। सही कह रहे हैं आप। लेकिन कई बार लोग ये भी सोचते हैं कि आपने तो ग़ज़ल की तनकीद कर ही दी है।…"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"उजले कपड़े दिल का काला लगता हैबनता अपना पर बेगाना लगता है...................अति सुंदर। बधाई स्वीकार…"
2 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service