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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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बसंत कुमार शर्मा commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (निगलते भी नहीं बनता उगलते भी नहीं बनता)
"आ. अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन  अच्छी ग़ज़ल हुई है,  बधाई स्वीकारें    "
Nov 9
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया "
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"बेहतरीन ग़ज़ल कही आदरणीय शर्मा जी...दूसरे शे'र में जो विशेषण दिये वो कमाल हैं..."
Nov 1
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"आदरणीय Samar kabeer जी सादर नमस्कार  जी उत्तम जानकारी दी आपने , आपकी इस्लाह से हमेशा ही मेरा मार्गदर्शन होता है. सादर नमन , कुछ और सोचता हूँ "
Oct 31
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'गाँव है, कोई जिला है'  इस मिसरे में सहीह शब्द है "ज़ि'लअ" इसका वज़्न ज़रूर 12 है,मगर इसे 'ला' के क़ाफ़िये के साथ नहीं ले सकते,ग़ौर करें…"
Oct 27
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसला अफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Oct 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Oct 24
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसको भाया भीड़ का होकर खो जाना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्षण धामी जी सादर नमस्कार उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
Oct 23
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे - ग़ज़ल
"आदरणीय Rupam kumar -'मीत' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Oct 23
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल

२१२२ २१२२ फूल काँटों में खिला है, प्यार में सब कुछ मिला है.  है न कुछ परिमाप गम का, गाँव है, कोई जिला है.  झोंपड़ी का देखकर गम,तख़्त कब कोई हिला है.  है कहाँ जाना न मालूम,क्या गजब ये काफिला है.  हो अगर संवाद दिल से,खत्म हर शिकवा गिला है.  तोडना उसको है मुश्किल,ख़्वाहिशों का जो किला है. दर्द सँग किलकारियाँ हैं,जिंदगी का सिलसिला है.मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Oct 22
Rupam kumar -'मीत' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे - ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, बहतरीन ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ, सादर।"
Oct 20
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे - ग़ज़ल
"आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी सादर नमस्कार  आपका सुझाव अनुकरणीय है , सादर स्वागत है "
Oct 16
बसंत कुमार शर्मा commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- जिन की ख़ातिर हम हुए मिस्मार; पागल हो गये
"आदरणीय निलेश 'नूर' जी जी सादर नमस्कार  बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई, बधाई स्वीकार करें "
Oct 16
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post नेता कम - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सादर नमस्कार  अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकारें "
Oct 16
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

मगर होता नहीं दिखता - गजल

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२जमीं पर बीज उल्फत के कोई बोता नहीं दिखता.लगाता प्रेम सरिता में कोई गोता नहीं दिखता. करे अपराध कोई और ही उसकी सजा पाए,वो कहते हैं हुआ इंसाफ़, पर होता नहीं दिखता. झरोखे हैं न आँगन है, न दाना है न गौरैया,सुनाये राम का जो नाम वह तोता नहीं दिखता.  सभी बेटों ने अपनी एक नई दुनिया बसा ली है,कि अब दादी के’ हाथों में यहाँ पोता नहीं दिखता. हुए जंगल नदारद सब, बचे बस ठूँठ पेड़ों के,बुझा दे प्यास वन में जो कहीं सोता नहीं दिखता. लुटे कोई पिटे कोई किसी को कुछ नहीं मतलब,पराये दुख में अब कोई…See More
Oct 16
बसंत कुमार शर्मा left a comment for Ravi Shukla
"सादर प्रणाम स्वीकारें आदरणीय, सादर स्नेह बनाये रखें, अच्छा लगा आपकी मित्रता रिक्वेस्ट देख करमैं भी रेल परिवार से ही हूँ  वर्तमान में उप मुख्य सतर्कता अधिकारी के पद कार्य कर रहा हूँ.  जबलपुर पश्चिम मध्य रेल "
Oct 16

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

बसंत कुमार शर्मा's Blog

फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल

२१२२ २१२२ 

फूल काँटों में खिला है, 

प्यार में सब कुछ मिला है. 

 

है न कुछ परिमाप गम का, 

गाँव है, कोई जिला है. 

 

झोंपड़ी का देखकर गम,

तख़्त कब कोई हिला है. 

 …

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Posted on October 19, 2020 at 11:30am — 6 Comments

जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे - ग़ज़ल

सागर से भी गहरे देखे.

जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे.

 

नए दौर में नई सदी में,

साँसों पर भी पहरे देखे. 

 

गांधी जी के तीनों बंदर, 

अंधे गूँगे बहरे देखे.

 …

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Posted on October 14, 2020 at 12:54pm — 11 Comments

मगर होता नहीं दिखता - गजल

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

जमीं पर बीज उल्फत के कोई बोता नहीं दिखता.

लगाता प्रेम सरिता में कोई गोता नहीं दिखता.

 

करे अपराध कोई और ही उसकी सजा पाए,

वो कहते हैं हुआ इंसाफ़, पर होता नहीं दिखता.

 

झरोखे हैं न आँगन है, न दाना है न गौरैया,…

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Posted on October 5, 2020 at 9:30am — 12 Comments

कश्ती में है मगर नहीं पतवार हाथ में- गजल

 221 2121 1221  212

कश्ती में है मगर नहीं पतवार हाथ में. 

होता कहाँ किसी के ये संसार हाथ में.

कर लो भला गरीब का कुर्सी पे बैठकर,

तुमको मिला है भाग्य से अधिकार हाथ में. 

ईश्वर की चाह है तो अकेले भजन…

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Posted on September 19, 2020 at 6:00pm

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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