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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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बसंत कुमार शर्मा commented on सालिक गणवीर's blog post धुआँ उठता नहीं कुछ जल रहा है..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय  सालिक गणवीर जी सादर नमस्कार  बहुत खुबसूरत गजल हुई है  बधाई स्वीकारें "
Monday
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

कश्ती में है मगर नहीं पतवार हाथ में- गजल

 221 2121 1221  212कश्ती में है मगर नहीं पतवार हाथ में. होता कहाँ किसी के ये संसार हाथ में.कर लो भला गरीब का कुर्सी पे बैठकर,तुमको मिला है भाग्य से अधिकार हाथ में. ईश्वर की चाह है तो अकेले भजन करो,रक्खो न आप धर्म का व्यापार हाथ में. दुनिया ये खाली हाथ सिकंदर ने छोड़ दी,जाना सरल है ले के दुआ प्यार हाथ में.मौसम कभी भी एक सा रहता नहीं यहाँ, है बाद में ‘बसंत’ के पतझार हाथ में.मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Saturday
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ ज़िंदगी अच्छी तरह अब कट रही है, आजकल खुद से हमारी पट रही है.  लूट कर वो ले गई  है दिल हमारा, झूलती रुखसार पर जो लट रही है.  हाल पूछा जो हमारा आज उसने, हर पुरानी पीर दिल की घट रही है. धुंध दुख की छँट गई माँ की दुआ से,रेल सुख की दौड़ अब सरपट रही है.   धीरे-धीरे दिख रहा है साफ सब कुछ धूल मन के आईने की हट रही है.मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Sep 14
बसंत कुमार शर्मा commented on Saurabh Pandey's blog post हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ
"आ. सौरभ पांडे जी सादर नमस्कार  बहुत सटीक प्रहार किया है आपने आज के दिखावे पर  बधाई स्वीकारें "
Sep 14
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार  आपकी निरंतर हौसला अफजाई मुझे सम्बल प्रदान करती है , दिल से शुक्रिया आपका "
Sep 14
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल
"आदरणीय  Rupam kumar -'मीत' जी सादर नमस्कार  आपका दिल से शुर्किया "
Sep 14
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल
"आदरणीय  Samar kabeer  जी सादर नमस्कार  आपकी तरमीम का दिल से शुक्रिया, सुझाव बहुत अच्छा है हमेशा की तरह , सुधार कर पुन प्रस्तुत करता हूँ "
Sep 14
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल
"आदरणीय Harash Mahajan जी सादर नमस्कार  हृदय से आभार आपका "
Sep 14
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल
"जनाब  अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब  आपकी हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ "
Sep 14
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post अपना द्वार खुला अलबत्ता.- ग़ज़ल
" आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Sep 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल
"आ. भाई बसंत कुमार जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 13
Rupam kumar -'मीत' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश कर रहा हूँ  थोड़ी-थोड़ी छा गई थी धुंध गम की,  है दुआ माँ बाप की अब छट रही है.        इस शेर को यूँ कहा जाए तो ?  थोड़ी-थोड़ी छा रही है धुंध…"
Sep 13
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'ज़िंदगी अच्छी तरह से कट रही है' इस मिसरे में 'तरह' शब्द के साथ 'से' का प्रयोग उचित नहीं होता,मिसरा यूँ कर सकते हैं:- 'ज़िन्दगी अच्छी तरह अब…"
Sep 13
Harash Mahajan commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल
"आदरणीय बसंत जी बहुत ही अच्छी पेशकश । दिली मुबारकबाद । वसूल पाइएगा । सादर ।"
Sep 12
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।"
Sep 12
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post अपना द्वार खुला अलबत्ता.- ग़ज़ल
"आ. भाई बसन्त कुमार जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 12

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Gender
Male
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जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

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कश्ती में है मगर नहीं पतवार हाथ में- गजल

 221 2121 1221  212

कश्ती में है मगर नहीं पतवार हाथ में. 

होता कहाँ किसी के ये संसार हाथ में.

कर लो भला गरीब का कुर्सी पे बैठकर,

तुमको मिला है भाग्य से अधिकार हाथ में. 

ईश्वर की चाह है तो अकेले भजन…

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Posted on September 19, 2020 at 6:00pm

आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ 

ज़िंदगी अच्छी तरह अब कट रही है, 

आजकल खुद से हमारी पट रही है. 

 

लूट कर वो ले गई  है दिल हमारा, 

झूलती रुखसार पर जो लट रही है. 

 

हाल पूछा जो हमारा आज उसने, …

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Posted on September 11, 2020 at 5:00pm — 10 Comments

अपना द्वार खुला अलबत्ता.- ग़ज़ल

मापनी २२ २२ २२ २२ 

है जिनके हाथों में सत्ता. 

उनका हर दिन बढ़ता भत्ता. 

छोड़ दिया जिसको डाली ने, 

इधर-उधर उड़ता वह पत्ता.

कीमत भारी होनी ही थी,

था पुस्तक पर…

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Posted on September 7, 2020 at 3:30pm — 12 Comments

माँ की मिली जो गोद तो जन्नत में आ गए.- गजल

बहर- 221, 2121, 1221, 212

घर से निकल के आज अदालत में आ गए,

नाज़ुक हमारे रिश्ते मुसीबत में आ गए. 

हमने जरा सा आइना उनको दिखा दिया,

अहसान भूल कर वो अदावत में आ गए.

कोने में पेड़ आम का चुपचाप है…

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Posted on August 18, 2020 at 9:00pm — 10 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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