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santosh khirwadkar
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santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post कैसे कहूँ अब तुझसे कुछ कहा भी नहीं जाता,
"शुक्रिया आदरणीय नरेंद्र जी ....नवाज़िश!!"
Monday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post कैसे कहूँ अब तुझसे कुछ कहा भी नहीं जाता,
"आदरणीय रवि जी , सर्वप्रथम अनुशासन उल्लंघन के लिये मंच से सार्वजनिक रूप में क्षमा!! अभी प्रशिक्षु हूँ..आप जैसे कलावंतों/जानकार लोगों के सानिध्य की गुज़ारिश है ! प्रयत्न कर रहा हूँ कि कुछ सीख सकूँ!! आभार"
Monday
Ravi Shukla commented on santosh khirwadkar's blog post कैसे कहूँ अब तुझसे कुछ कहा भी नहीं जाता,
"आदरणीय संतोष जी आपने जो रचना प्रस्‍तुत की है उसका फार्मेट तो गजल जैसा लग रहा है पर आपने इसकी बहर क्‍या ली है ये नहीं लिखा मंच पर गजल से पहले उसका अरकान लिखने का अनुशासन है जिससे सीखने में आसानी हो  । आ का काफिया हो कर भी मतले के बाद…"
Monday
narendrasinh chauhan commented on santosh khirwadkar's blog post कैसे कहूँ अब तुझसे कुछ कहा भी नहीं जाता,
"लाजवाब "
Monday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post कैसे कहूँ अब तुझसे कुछ कहा भी नहीं जाता,
"शुक्रिया आदरणीय सुरेश जी ..."
Friday
सुरेश अग्रवाल commented on santosh khirwadkar's blog post कैसे कहूँ अब तुझसे कुछ कहा भी नहीं जाता,
"शानदार,,,वाहह"
Friday
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santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post चाँद ढूँढ रहे हो ??......संतोष
"आदरणीय धामी जी ,हृदय से धन्यवाद!!!"
Friday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तिरी नज़रों में ....संतोष
"जी आदरणीय समर साहब , ख़ूब कहा आपने,..हाहा"
Friday
laxman dhami commented on santosh khirwadkar's blog post चाँद ढूँढ रहे हो ??......संतोष
"....हार्दिक बधाई।"
Friday
Samar kabeer commented on santosh khirwadkar's blog post तिरी नज़रों में ....संतोष
"'जो सोचते ही रह गए,वो रह गए इधर जिसने लगाई ऐड वो ख़ंदक़ के पार था' संकोच करोगे तो कुछ नहीं मिलने वाला,हा हा हा....."
Thursday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तिरी नज़रों में ....संतोष
"आदरणीय समर साहब , हृदय से आभार! वास्तव में दिल की बात आप से बयाँ करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था! अब जब कभी भी लगा तो निःसंकोच आप से सीधी बात कर लिया करूँगा! आप का आशीर्वाद ,स्नेह अपेक्षित!!"
Thursday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तिरी नज़रों में ....संतोष
"आदरणीय भंडारी जी , शुक्रिया!! मैं निश्चित ही प्रयत्न करूँगा!!"
Thursday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तिरी नज़रों में ....संतोष
"आदरणीय समर साहब चरण स्पर्श, आप की बातों से शत् प्रतिशत सहमत हूँ ,किंतु क्षमा चाहूँगा ,उपलब्ध सामग्री को मात्र पढ़कर प्रयास करना बहुत कठिन हो रहा है ,मेरे व्यक्तिगत मतानुसार इन तकनीकी बारीकियों का प्रशिक्षण विस्तृत रूप में अथवा प्रत्यक्ष रूप में…"
Thursday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तिरी नज़रों में ....संतोष
"आदरणीय उस्मानी जी ,हृदय से आभार /शुक्रिया....नवाज़िश!!"
Thursday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post प्रेम कहलाता है .......संतोष
"चरण स्पर्श आदरणीय समर साहब, तहेदिल से शुक्रिया!आप का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन सदा अपेक्षित!!"
Thursday

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Gender
Male
City State
Bhopal
Native Place
Indore
Profession
Govt service
About me
National table-tennis player/coach

Santosh khirwadkar's Blog

कैसे कहूँ अब तुझसे कुछ कहा भी नहीं जाता,

कैसे कहूँ अब तुझसे कुछ कहा भी नहीं जाता,

तनहा ज़िंदगी में अब यूँ रहा भी नहीं जाता



चले थे जिस मोड़ तलक इस सफ़र में हम ,

रास्ता उस सफ़र का भुलाया भी नहीं जाता



उठता हैं मेरे दिल में तिरी यादों का तूफ़ाँ भी,

हादसा था जैसे ये भुलाया भी नहीं जाता



सुख गये यूँ अश्क़ भी यादों से तिरी,

ग़मों को लिये अब तो रोया भी नहीं जाता



तुम रहो कहीं भी मगर ये सच है ,

वजूद तिरा दिल से फिर मिटाया भी नहीं जाता



वो शख़्स जिसने मुझे अपना माना…

Continue

Posted on August 10, 2017 at 8:30pm — 6 Comments

प्रेम कहलाता है .......संतोष

मैंने जो गाया था कभी,तूने जो सुना ही नहीं

स्नेह,प्रेम,गीत ,वही तो कहलाता है



सावन की फुहारों में,आसमाँ की राहों से

धरती की माटी को भी ,वो तो चूम जाता है



अख़ियों ही अख़ियों से दिल तक जाने वाला,

यही तो वो रोग है जो ,प्रेम कहलाता है



कभी नीम की निम्बोली में भी अमूवा का स्वाद दे वो,

ऐसी स्मृतियों को कोई भूल कहाँ पाता है



नयनों की बरखा में यादों का सहारा लिये,

पलकों के द्वार को भी ,वो तो भीगो जाता है



सावनों के झूलों पे… Continue

Posted on August 9, 2017 at 11:39pm — 4 Comments

तिरी नज़रों में ....संतोष

तिरी नज़रों में ये  बात नज़र आती है
मिरी याद तो तुझे आज भी आती है

ये चाहत का मामला है जनाब,
दिल की कशिश है,लौट आती है

छुपा लो लाख इसे तुम दिल में मगर,
बात दुनियाँ को भी नज़र आती है

दिल गिरफ़्त में है और क़ैद भी'संतोष'
चाहत तिरी वो ज़ंजीर नज़र आती है
#संतोष
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on August 8, 2017 at 8:00pm — 9 Comments

चाँद ढूँढ रहे हो ??......संतोष

क्यूँ आसमां में चाँद ढूँढ रहे हो,

वो मेरे पास उतर आया है



हाँथों की इन लकीरों में जैसे मेरे,

ज़िंदगी बन के चला आया है



आईना सा था वो बिल्कुल साफ़,

छूने से मेरे ,उस पर कुछ दाग़ उभर आया है



चमकता सितारा हूँ ज़मीं पर उसका,

वो आसमाँ सा ज़मीं को सजाने आया है



ये मेरी मुहब्बत ही तो है उससे,

वो मुझसे मिलने ज़मीं तक आया है



जलते हो तो जलो ए दुनियाँ वालों तुम,

वो मुझसे ईद मुबारक़ कहने आया… Continue

Posted on August 7, 2017 at 8:18pm — 10 Comments

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